विशेष रिपोर्ट

रुनियाडीह स्कूल बैगलैश




शिक्षक की पहल को विभाग ने सराहा

सूरजपुर, 5 अक्टूबर (छत्तीसगढ़)। जिले के ग्राम पंचायत रुनियाडीह के शासकीय माध्यमिक शाला के बच्चों को भारी-भरकम बैग से निजात मिल गई है। इस विद्यालय को बैगलैश बनाने की दिशा में एक शिक्षक के बेहतर पहल को अभिभावकों तथा अधिकारियों ने सराहनीय बताया तथा शिक्षा विभाग ने इसी तर्ज पर एक लक्ष्य के तहत अनेक स्कूलों के अध्ययनरत बच्चों को बैगलैश की सौगात देने की तैयारी में है।
सरकारी स्कूल के शिक्षक के बेहतर सोच और पहल ने विद्यालय के अध्ययनरत बच्चों को भारी-भरकम बैग के बोझ से निजात दिलाकर जिले में ऐसी मिशाल कायम की है जिसकी सराहना अभिभावक तथा जिले भर के उच्च अधिकारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग ने लक्ष्य तय कर इस वर्ष जिले के 100 स्कूलों को इसी तर्ज पर बैगलैश कर बच्चों को भारी-भरकम बैग की भार से छुटकारा दिलाने के लिए दृढ़ संकल्प कर ली है। 
 जिले के ग्राम पंचायत रुनियाडीह इन दिनों सुर्खियों में है जिसकी वजह है यहां के शासकीय माध्यमिक शाला की बैगलैश की सफल शुरुआत। इस विद्यालय के छात्रों को सिर्फ  एक रफ़ कॉपी लेकर स्कूल आना होता है। जिस कॉपी में प्रति दिवस होम वर्क की पूरी जानकारी मिलती है और पढ़ाई के लिए प्रत्येक छात्रों के लिए पूरी पुस्तकों का एक-एक सेट एक पात्र में होता है जो स्कूल पहुंचने पर विद्यार्थी एक-एक ट्रे लेकर पढ़ाई करते हैं। पढ़ाई पूरी कर पुन: ट्रे सुनिश्चित स्थान पर रखकर होम वर्क की पूरी जानकारी रफ़  कॉपी में लेकर छात्र घर वापस आते हैं। 
इतना ही नहीं घर की पढ़ाई, होम वर्क के लिए सभी छात्रों को एक-एक सेट पुस्तक दी गई है जिसे वार्षिक परीक्षा के बाद विद्यालय को वापस करना है। उक्त पुस्तक को पुन: उस कक्षा में पहुंचे अन्य छात्रों को दिया जाएगा। इस पहल से पुस्तकें भी सुरक्षित रहती है तथा भारी भरकम बैग ढोने से बच्चों को निजात भी मिल गई। 
इस सफल और प्रशंसनीय पहल का पूरा श्रेय जाता है इस विद्यालय के शिक्षक सिमांचल त्रिपाठी को। हलाकि इस बैगलैश की पहल से पूर्व शिक्षक श्री त्रिपाठी को काफी मशक्कत भी करनी पड़ी। सभी छात्रों को घर पर पढ़ाई के लिए दिए गए एक-एक सेट पुस्तक उन विद्यार्थियों से एकत्रित करनी पड़ी जो बच्चे माध्यमिक शाला की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। शासन के योजनाओं के तहत प्रदान की गई पुस्तक स्कूल के ट्रे में रहती है।
इस संबंध में स्कूल के प्राचार्य सिमांचल त्रिपाठी ने बताया कि मैंने एक किताब में पढ़ा की अमेरीका की स्कूली किताबें करीब तीन वर्षों तक सुरक्षित रहती है और वहीं से मैंने भी किताबों के सुरक्षा तथा बच्चों के बैग के भार को कम करने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया। सर्व प्रथम सभी विद्यार्थियों को हिदायत दिया कि इस वर्ष उत्तीर्ण सभी विद्यार्थी अपनी पुस्तकें विद्यालय में जमा करें और उन्हीं पुस्तकों को घर में पढऩे के लिए सुदृढ़ कर सभी बच्चों को एक-एक सेट दिया गया है और इस तरह से विद्यालय को बैगलैश बनाने में बहुत हद तक सफलता मिली है।
 विदित हो की छोटे बच्चों के बैग के बढ़ते भार को देखते हुए  सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी कई बार सुझाव दिए गए हैं कि बच्चों के बैग के भार को कम करने की दिशा में पहल करें। बावजूद इसके अभी भी स्कूली बच्चों को भारी भरकम बैग का भार उठाना पढ़ रहा है। ऐसे में यह एक सार्थक पहल है जिससे स्कूली बच्चोंं के बैग का भार तो कम हुआ ही साथ ही पुस्तकों के भी सुरक्षा के मद्देनजर बैगलैश एक बेहतर पहल है।
 इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ए के सिंह ने बताया कि रुनियाडीह माध्यमिक शाला के शिक्षक सिमांचल त्रिपाठी के द्वारा बैगलैश के सार्थक पहल को शिक्षा विभाग अपनाते हुए इसी तर्ज पर इस वर्ष जिले के 100 स्कूलों को बैगलैश बनाने के दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। आने वाले वर्षों में जिले के सभी विद्यालयों को बैगलैश करने की दिशा में विभाग तथा शिक्षक मिलकर कार्य करेंगे।
शासकीय माध्यमिक शाला रुनियाडीह जिले का एकमात्र बैगलैश विद्यालय है जहां बच्चों को भारी भरकम स्कूली बैग का भार नहीं उठाना पढ़ता है। इस सार्थक पहल को सफल बनाने में शिक्षक का पूरा सहयोग स्कूल के छात्र-छात्राएं तथा अभिभावकों ने भी किया, जिससे बैगलैश विद्यालय के रूप में इस स्कूल की पहचान आज जिले भर में गौरव का विषय बना हुआ है। 
इस स्कूल की छात्रा प्रीति तथा कमला सिंह का कहना है कि श्री त्रिपाठी सर के इस पहल और सोंच ने हमारे विद्यालय को जिले भर में गौरवान्वित कर दिया। सर के इस पहल ने विद्यार्थियों के भार को कम करने के साथ पुस्तकों को भी सुरक्षित किया है। साथ ही अब हम लोग अध्ययन के लिए मानसिक रुप से ज्यादा मजबूत महसूस कर रहे हैं।




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