कारोबार

प्याज महंगा होने जा रहा




पायल भुयन

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। महाराष्ट्र की लासलगांव प्याज मंडी के अधिकारियों के मुताबिक बीते दस दिनों में प्याज के दाम 1600 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 2500-3000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
एशिया की इस सबसे बड़ी प्याज मंडी के थोक व्यापारियों का कहना है कि नवंबर महीने के आखिर तक प्याज और महंगा होता रहेगा।
लासलगांव एग्रीकल्चर प्रॉड्यूस मार्केट कमेटी के थोक व्यापारियों का कहना है कि मांग और आपूर्ति में बढ़ते फासले के कारण प्याज के दाम बढ़ रहे हैं।
लासलगांव में प्याज की पिछली फसल चार महीने पहले आई थी। तब प्याज के दाम 400 रूपये प्रति क्विंटल थे। लेकिन, पिछले दस दिनों में प्याज की कीमतों में औसतन 70 से 80 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई है। नासिक में प्याज आज खुदरा बाजार में 40-50 रूपये प्रति किलो तक बिक रहा है। सोमवार को लासलगांव मंडी में प्रति क्विंटल प्याज 2415 रूपये में बिक रहा था वहीं, 
पिछले हफ्ते शुक्रवार को यही प्याज औसतन 2,020 रूपए क्विंटल था।
लासलगांव प्याज मंडी में विक्रेताओं का कहना है कि पिछले दो से तीन दिनों में ही प्याज के दाम चढ़े हैं। इन बढ़े दाम का असर कुछ दिनों में खुदरा बाजार में दिखने लगेगा।
लासलगांव एग्रीकल्चर प्रॉड्यूस मार्केट कमेटी के अध्यक्ष जयदत्ता होलकर बताते हैं कि दक्षिण भारत में बारिश की वजह से प्याज की फसल खराब हो गई है। मध्य प्रदेश में भी प्याज की कमी है। आपूर्ति और मांग में अंतर के कारण प्याज के दाम नासिक थोक बाजार में भी बढ़े हैं। लासलगांव और अन्य जिलों में मौजूद एपीएमसी दिवाली के पूरे हफ्ते प्याज की नीलामी नहीं करेंगे, और यह भी एक वजह है की विक्रेताओं ने प्याज के दाम बढ़ा दिए हैं।
जानकारों के मुताबिक नासिक में खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें अभी और भी बढ़ सकती हैं। दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र बुद्धिराजा का कहना है कि आजाद पुर मंडी में इस वक्त प्याज 20 से 30 रूपये किलो बिक रहा है , लेकिन वो कहते हैं कि दिवाली के बाद यही दाम मंडी में 50 रूपए तक पहुंच सकते हैं। इसका असर दिल्ली के खुदरा बाजार में प्याज के दामों पर पड़ेगा।
सोमवार को लासलगांव मंडी में करीब 8,000 क्विंटल प्याज की बोली लगी। शुक्रवार को लासलगांव एपीएमसी में 21,000 क्विंटल प्याज की बोली लगी थी।
लेकिन, व्यापारियों का कहना है कि इतना प्याज मांग के हिसाब से काफी नहीं है। दरअसल, अभी जो प्याज बाजार में आ रहा है उसकी खेती मार्च-अप्रैल में हुई थी और गर्मी की फसल पांच से छह महीने ही ठीक रह पाती है।
लासलगांव मंडीं में काम करने वाले थोक विक्रेता नंद कुमार दागे ने बताया कि अभी प्याज की नई खेप आने में एक महीने का वक्त लगेगा, तब तक प्याज के दाम बढ़ते रहेंगे।
भारतीय व्यापार मंडल में वित्तीय सलाहकार जी चंद्रशेखर का मानना है कि प्याज के दामों में बढ़ोत्तरी का मुख्य कारण कर्नाटक, महाराष्ट्र में हुई बे-मौसम बरसात है, जिससे फसल को काफी नुकसान पहुंचा है ।
प्याज के दामों में बढ़ोतरी के राजनीतिक प्रभाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि, जब तक प्याज के दाम 80 से 100 रूपये के आसपास नहीं पहुंच जाते तब तक राजनीतिक असर नहीं होगा, लोकिन दाम ज्यादा न बढ़े इसके लिए सरकार को इस बढ़ोत्तरी पर नजर रखनी पड़ेगी। उनका ये भी मानना है कि नवंबर के पहले हफ्ते में जब फसल की नई पैदावार आना शुरू होगी तब दाम में कमी जरूर आएगी।  (बीबीसी)

 




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