विशेष रिपोर्ट

रायगढ़-जशपुर के 33 हजार किसानों पर डेढ़ अरब कर्ज




नरेश शर्मा  
रायगढ़, 11 अक्टूबर (छत्तीसगढ़) । छत्तीसगढ़ में सरकार बोनस तिहार मना रही है। किसानों को दीपावली से पहले बोनस उनके खाते में सीधा जमा हो रहा है। खातों में रकम जमा होना उन किसानों के लिए चिंता का कारण बना गया है जो कर्जदार हैं। अगर बोनस की राशि उनके खाते में आती है तो कर्ज की रकम या किस्त काट ली जाएगी। रायगढ़ के 22 हजार और जशपुर जिले के 11 हजार, कुल 33 हजार किसान बैंकों के कर्जदार हंै और इन पर एक अरब पचास करोड़ का ऋण बकाया है।  
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार रायगढ़  जिले में 68 हजार किसानों को 127 करोड़ की राशि बतौर बोनस के रूप में बांटी जानी है जबकि 22 हजार किसान विभिन्न बैंकों के कर्जदार हंै। इन किसानों ने फसल तथा अन्य कामों के लिए अपनी जमीनों को बंधक बनाकर बैंकों से लाखों का कर्ज ले रखा है। सूत्र बताते हंै कि इनमें से अधिकतर किसान ऐसे है जिनके खातों में पैसा नहीं है। साथ ही साथ कई किसान अभी भी धीरे-धीरे किस्तों के रूप में कर्ज पटा भी रहे हंै लेकिन बोनस की राशि सीधे खाते में जमा होने के बाद बैंक उनकी कर्ज में दी गई रकम की किस्त की राशि तत्काल काट लेंगे और दीपावली के समय किसानों के घर में उनको मिलने वाली बोनस की राशि नहीं मिल पाएगी। बैंकों से लिया गया कर्ज उनके खाते से कट जाएगा। 
इस संबंध में बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है चूंकि कर्ज की रकम खाते से कटौती बकायदा कम्प्यूटराईज्ड होती है और इसे रोक पाना भी संभव नहीं है। अधिकारी ने यह भी बताया कि कई किसानों के अलग-अलग खाते भी हंै और अगर उनकी रकम कर्ज खाते के अलावा दूसरे खाते में जाएगी तो भी नियमानुसार बकाया किस्तों का लेन देन दूसरे खातों से भी बैंक कर सकता है। 
अब बोनस बांटने के इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी किसानों को इस मुसीबत से बचाने के लिए बैंक के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हंै और अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी किसान का कर्जा बाकी है तो तत्काल बोनस की राशि में से कर्जा न काटा जाए चंूकि सरकार की मंशा है कि किसानों को मिलने वाला बोनस उनके दीपावली तथा अन्य खेती किसानी के काम आए। 
इस संबंध में रायगढ़ एसडीएम प्रकाश सर्वे ने भी बताया कि उनकी कोशिश है कि किसानों के खाते नंबर लेकर सीधे उनके खातों में बोनस की राशि डालने से पहले इस बात की जानकारी ली जा रही है कि उन्होंने बैंक से अगर कर्जा लिया है, तो उस खाते के नंबर की बजाए दूसरे खाते का नंबर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को दें ताकि उनके बोनस का चेक दूसरे खाते में जमा किया जा सके।     
बहरहाल छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर किसानों को बोनस देकर उन्हें खुश करने में लगी है वहीं कर्ज में डूबे किसान चिंता में हंै कि कहीं उनके खातों में जमा होने वाली रकम बैंक पूरी की पूरी न काट ले। चूंकि कई संकटों से गुजरते वे किसान समय पर कर्जा नहीं पटा पा रहे हैं जिसके चलते कर्ज ली गई रकम के अलावा उन पर लग रहा ब्याज लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में किस्त भी जमा नहीं हो पा रही है और अब खातों में सीधे पैसे जमा करने की घोषणा से उनकी चिंता दोगुनी हो गई है। 

 




Related Post

Comments