कारोबार

छोटे कारोबारी, अब ई-वे बिलिंग सिस्टम नई परेशानी खड़ी कर सकता है




नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । छोटे और मंझोले कारोबारी उपक्रम अभी जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के झटके से उबर भी नहीं पाए हैं कि उनके सामने एक नई परेशानी आने को तैयार खड़ी दिखती है। खबर के मुताबिक जीएसटी परिषद ने आठ अक्टूबर को हुई बैठक में चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में ई-वे बिलिंग सिस्टम लागू करने की वकालत की है। अगर उसकी सिफारिश मानी गई तो कारोबारियों को राज्य के भीतर या बाहर खरीदे-बेचे जाने वाले हर उत्पाद का ई-वे बिल अपने पास सुरक्षित रखना होगा। साथ ही उस उत्पाद से संबंधित कंसाइनमेंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा।
खबर के मुताबिक जीएसटी परिषद ने जनवरी-2018 से परीक्षण के तौर पर ई-वे बिलिंग सिस्टम शुरू करने को कहा है। यह व्यवस्था अप्रैल से पूरे देश में लागू हो सकती है। इसके बाद 50,000 रुपए से अधिक के हर माल के कंसाइनमेंट का पंजीकरण और ई-वे बिल बनाना अनिवार्य हो जाएगा। जीएसटीएन (जीएसटी नेटवर्क) पोर्टल पर कंसाइनमेंट का विवरण डालते ही ई-वे बिल और उसका एक नंबर मिलेगा। यह नंबर कॉमन पोर्टल के जरिए आपूर्तिकर्ता, ट्रांसपोर्टर और जिसके पास माल पहुंचना है उसे उपलब्ध कराया जाएगा।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि इससे एक से दूसरे राज्य में माल भेजने पर दस्तावेजी कार्रवाई कम हो जाएगी। कम वक्त में माल एक से दूसरी जगह पहुंचेगा। देश भर में चैक पोस्ट हट जाएंगे और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। केंंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले हफ्ते ही इसके संकेत भी दिए थे। उन्होंने बताया था कि ई-वे बिलिंग सिस्टम का कर्नाटक में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परीक्षण किया गया। इसके नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। हालांकि जीएसटी से हुई परेशानियों के बाद कारोबारियों में इसे लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है।
मर्क इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एलईडी पैनल एवं एसी सेक्शन के बिजनेस हैड सुनील शंकर कहते हैं, छोटे व्यापारियों के लिए यह नई चुनौती साबित होने वाला है। ईवाई के साझेदार अभिषेक जैन भी कहते हैं, चूंकि बहुत से छोटे-मंझोले कारोबारी अब भी तकनीक से पूरी तरह लैस नहीं हैं। ऐसे में अगर सरकार को यह व्यवस्था लागू करनी है तो पहले इस बाबत मूलभूत ढांचा बेहतर करना चाहिए। नहीं तो जीएसटीएन जैसी ही समस्याएं पेश आने वाली हैं। (लाइव मिंट)

 

 




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