कारोबार

ऑनलाइन खरीदी, रियायत तो ठीक है, पर चौकन्ने भी रहें




प्रज्ञा मानव

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । दिल्ली पुलिस ने शिवम चोपड़ा और सचिन जैन नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल अमेजॉन से धोखाधड़ी करके लाखों रुपये उगाहने का आरोप है।

दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के सब इंस्पेक्टर विकास कुहार ने बताया कि शिवम अमेजॉन से फोन खरीदता था और डिलीवरी ना होने का बहाना लगाकर शॉपिंग पोर्टल से पैसे वापस मांग लेता था। सचिन पर आरोप है कि उसने शिवम को इस जालसाजी के लिए 150 प्री-एक्टिवेटेड सिम मुहैया कराए। ऐसे उन्होंने 166 फोन खरीदे, जिन्हें बाद में बेच दिया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के समय इन दोनों के पास 25 फोन, 12 लाख रुपये, 40 बैंक खातों की पासबुक और दो प्रॉपर्टी के कागजात मिले।
तकनीकी के जरिए धोखाधड़ी का यह पहला मामला नहीं है। समय की कमी के चलते आजकल ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ा है और सरकार भी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में लोगों की कम जानकारी का फायदा उठाकर उन्हें बेवकूफ बनाने के मामलों में भी खासी तेजी आई है। कहीं पोर्टल के लोगों को ठगने की खबर आती है तो कहीं लोग पोर्टल को चकमा दे रहे हैं।
इसी साल जुलाई में पुणे की रहने वाली पवित्रा वेलपुरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी जिसमें उन्होंने बताया कि अगर वो जरा सी समझदारी न दिखाती तो खुद को खरीदार बताने वाला एक शख्स उन्हें ठग लेता।
पवित्रा ने मशहूर साइट ओएलएक्स पर अपने बच्चे का स्ट्रॉलर बेचने का विज्ञापन लगाया था। जिसमें एक शख्स ने दिलचस्पी दिखाई। रकम पर सहमति हो जाने के बाद पवित्रा ने उस व्यक्ति को अपनी बैंक अकाउंट की जानकारी वॉट्सऐप के जरिए भेज दी, जिससे वह स्ट्रॉलर का भुगतान कर सके।
कुछ ही मिनट में पवित्रा को पांच संख्या वाले एक नंबर से एसएमएम आया कि उनके खाते में 13,500 रुपये क्रेडिट हुए हैं। जबकि स्ट्रॉलर सिर्फ साढ़े तीन हजार रुपये का था। पवित्रा ने खरीदार को फोन करके पूछा तो उसने कहा कि गलती से ज्यादा पैसे ट्रांसफर हो गए। साथ ही उसने पवित्रा से दस हजार रुपये उसकी मां के पेटीएम खाते में भेजने के लिए कहा।
पवित्रा पैसे भेजने ही चली थीं कि उन्हें सूझा कि एक बार अपने बैंक अकाउंट में भी चैक कर लें। वह दंग रह गईं जब उन्होंने देखा कि उनके बैंक अकाउंट में कोई पैसे नहीं आए। खरीदार से पूछने पर उसने बताया कि कभी-कभी बैंक की तरफ से देरी हो जाती है, साथ ही उसने पवित्रा पर जल्दी पैसे भेजने के लिए दबाव बनाते हुए कहा कि उसकी मम्मी को पैसे की तुरंत जरूरत है।
पवित्रा को दाल में कुछ काला लगा और उन्होंने बैंक को फोन लगा दिया। वहां से जानकारी मिली कि ऐसी कोई रकम उनके खाते में नहीं भेजी गई है। इस बीच खरीदार उन्हें बार-बार जल्दी पैसे भेजने के लिए कहता रहा।
बैंक से सूचना मिलने के बाद पवित्रा ने उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसे समझ आ गया कि उसकी दाल वहां नहीं गलेगी और उसके बाद, उसने पवित्रा से संपर्क नहीं किया।
इसके अलावा ऐसे भी मामले हैं जिनमें फोन करने वालों ने बताया कि वो बैंक की तरफ से बात कर रहे हैं और लोगों ने अनजाने में उन्हें सही मानकर, अपने कार्ड की जानकारी साझा कर ली।
वहीं कुछ और मामलों में लोगों से आधार कार्ड को जोडऩे, या गलती से ब्लॉक हो गए कार्ड को अनलॉक करने का हवाला देकर बैंक अकाउंट और कार्ड की जानकारी मांगी गई।  इसके अलावा नाइजीरियाई स्कैम भी हैं जिनमें आपके फोन पर आए वन टाइम पासवर्ड या कोड मांगे जा सकते हैं।
इन सभी मामलों में जिन नंबरों से फोन आते हैं, जितने विश्वास के साथ फोन करने वाले बात करते हैं और जिस तरह की वजहें बताईं जाती हैं, वे किसी को भी कश्मकश में डाल सकती हैं।
बीबीसी ने जानकारों से बात करके जानने की कोशिश की कि ऐसी कौनसी बातें हैं जिनका खयाल करके इंटरनेट पर होने वाले इन धोखों से बचा जा सकता है। और अगर धोखा हो जाए, तो क्या करना चाहिए।
ऐसी किसी भी ईमेल, मैसेज या फोन कॉल के झांसे में न आएं जिसमें आपको कोई इनाम, कोई लॉटरी, कोई वसीयत, कोई तोहफा, या कोई सच न लगने वाला ऑफर, डिस्काउंट वगैरह देने की बात की गई हो। ये अक्सर फिशिंग गिरोहों का काम होता है जिनका मकसद आपकी बैंक से जुड़ी जानकारी हासिल करना होता है। हमेशा सुरक्षित साइटों पर ही लेन-देन करें।
यह पता करने के लिए कि आप किसी सुरक्षित साइट पर हैं या नहीं, जांच लें कि पेज के ऊपर यूआरएल में एचटीटीपीएस:// लिखा हो। किसी वेबसाइट से कुछ खरीदने या किसी नए गेटवे के जरिए भुगतान करने से पहले इंटरनेट पर उसके बारे में थोड़ी जानकारी हाासिल कर लें। लोगों के रीव्यू और फीडबैक से यह जानने में मदद मिल सकती है कि उनका अब तक का परफॉरमेंस कैसा रहा है।
ऑनलाइन भुगतान करते समय अपने रजिस्टर्ड फोन नंबर पर ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड मंगवाएं। और इस पासवर्ड को किसी के साथ शेयर न करें। अपना पिन या नंबर किसी को न दें। न कहीं नोट करके रखें। न फोटो लें और न ही कभी किसी ऐप या मैसेज में किसी से शेयर करें।
ध्यान रखें कि कोई भी बैंक किसी भी सूरत में आपका पिन या सीवीवी नंबर नहीं मांग सकता। ऐसी जानकारी मांगने वाले किसी भी शख्स की रिपोर्ट करें। अपने वेब ब्राउजर को नियमित तौर पर अपडेट करते रहें।
देख लें कि आपके सिस्टम में बढिय़ा एंटी वायरस और मालवेयर रोकने वाला सॉफ्टवेयर मौजूद हो। किसी सार्वजनिक कंप्यूटर पर लेन-देन करने से बचें। पब्लिक कंप्यूटर में मौजूद सॉफ्टवेयर की-लॉगर आपकी जरूरी जानकारी सेव कर सकता है।
अगर पब्लिक कंप्यूटर इस्तेमाल करना भी पड़े तो पासवर्ड, कोड या पिन डालते समय वर्चुअल की-बोर्ड का इस्तेमाल करें। ऐसा की-बोर्ड ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सार्वजनिक हॉटस्पॉट या किसी होटल, एयरपोर्ट वगैरह का वाई-फाई इस्तेमाल करते समय ऑनलाइन लेन-देन से बचें।
लिंक बेट यानी किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाने वाली मेल या मैसेज पर ध्यान न दें। आम तौर इनका इस्तेमाल फिशिंग के लिए होता है।
देख लें कि आप अभी भी पुराना मैग्नेटिक स्ट्रिप वाला डेबिट कार्ड तो इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वह बहुत पुरानी तकनीक है और ऐसे कार्ड का डेटा चोरी करना बहुत आसान है। इसलिए पिछले कुछ समय में तकरीबन सभी बैंकों ने अपने कार्ड अपग्रेड करके, चिप कार्ड जारी कर दिए हैं।
साथ ही होटल, रेस्टोरेंट, दुकान वगैरह में कार्ड से भुगतान करते समय नजर रखें कि आपका कार्ड कहां इस्तेमाल हो रहा है। मोबाइल फोन पर भी लेन-देन करते हैं तो उसकी मेमोरी को लगातार साफ करते रहें जिससे पुरानी जानकारी हट जाए।
जितेन और आदिल आगे बताते हैं कि अगर किसी वजह से आपकी जानकारी लीक हो जाए या आपके कार्ड का कोई गलत इस्तेमाल कर ले तो, तुरंत बैंक को सूचना दें। इसमें देर न करें। कुछ खास मामलों में 24 घंटे के भीतर सूचना मिलने पर बैंक आपका पैसा लौटाने के लिए बाध्य भी होता है।
पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज करें। आपके इलाके में साइबर सेल की ब्रांच हो तो वहां जाएं। बाद में, बैंक में अपनी शिकायत लिखकर भी जमा कराएं। और शिकायत की कॉपी संभालकर रखें।
बैंक के साथ हुई सारी बातचीत, फॉलोअप की तारीख, समय वगैरह भी नोट करके रखें। अगर आपके कार्ड का इस्तेमाल किसी वेबसाइट या दुकान में हुआ है तो उनसे संपर्क करके भुगतान रुकवाने की कोशिश करें। फ्रॉड से जुड़े सारे मैसेज, ईमेल और बाकी सबूत संभालकर रखें।
अगर आपको लगता है कि आपका बैंक शिकायत मिलने के कुछ हफ्तों के भीतर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है तो आप बैंकिंग ओम्बड्समैन के पास जा सकते हैं। जितेन जैन के मुताबिक ऐसे कई मामले हैं जिनमें लोगों को लोकपाल के दखल के बाद जवाब मिला है। (बीबीसी)

 




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