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पद्मभूषण डॉक्टर 10 Cr ब्लैकमनी खपाने के आरोप घिरे, सांसद की बैंक के 4 बैंक अफसरों के खिलाफ भी सीबीआई ने दर्ज किया केस


सीबीआई ने कालेधन को सफेद करने के आरोप में डॉक्टर सुरेश आडवाणी के खिलाफ केस दर्ज किया है। उनका नाम देश के नामी कैंसर स्पेशलिस्टों में गिना जाता है। आडवाणी को प्रतिष्ठित पद्मश्री और पद्मभूषण अवॉर्ड भी मिल चुका है। घाटकोपर में एक कार से 10 करोड़ की पुरानी करंसी मिलने के बाद सीबीआई ने डॉक्टर के अलावा बीजेपी सांसद की को-ऑपरेटिव बैंक के 4 अफसरों को भी आरोपी बनाया है। आरोपियों के 11 ठिकानों पर हुई छापेमारी...
 
 
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफआईआर में आडवाणी के अलावा योगेश बी. शिरोय, धर्म राज थिगले, कृष, गजानंद सोमनाथ, बीएम शाह के नाम शामिल हैं।
- सीबीआई स्पोक्सपर्सन ने कहा, ''4 आरोपी वैद्यनाथ को-ऑपरेटिव अरबन बैंक लिमिटेड के अफसर हैं। जिसकी डायरेक्टर दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे हैं. वे बीजेपी सांसद हैं।''
- ''पूछताछ में मिली जानकारियों के आधार पर शुक्रवार को आरोपियों के 11 ठिकानों पर पुणे, मुंबई, औरंगाबाद और बीड़ में छापेमारी की गई।''
- ''डॉक्टर को कैश डिपॉजिट में गड़बड़ी का आरोपी बनाया है। जांच के बाद ही उनका असली रोल सामने आएगा। वह औरंगाबाद के CIIGMA हॉस्पिटल से जुड़े हैं।''
 
घाटकोपर में 9 दिन पहले पकड़ी गई कार
 
- सीबीआई के मुताबिक, 15 दिसंबर को केस के तीन आरोपियों को मुंबई पुलिस ने घाटकोपर इलाके में चेकिंग के दौरान पकड़ा था। उनकी कार से 10 करोड़ के पुराने नोट मिले थे। 
- पूछताछ में उन्होंने खुद को बैंक अफसर बताया और कहा कि ये करंसी बैंक के बीड़ स्थित हेड ऑफिस ले जाई जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये रकम मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होने वाली थी।
- अफसरों ने कहा कि आरोपियों ने करीब 15 करोड़ रुपए महाराष्ट्र स्टेट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में जमा कराए। बाकी 10 करोड़ वापस बैंक के बीड़ हेडक्वार्टर ले जाए जा रहे थे।
 
को-ऑपरेटिव बैंक ने क्या कहा?
- को-ऑपरेटिव बैंक के एक सीनियर अफसर ने सीबीआई के दावे को खारिज किया।
- उन्होंने कहा, ''जांच एजेंसी को गलत जानकारी मिली। कार से मिले 10 करोड़ रुपए 25 करोड़ का हिस्सा है, जिसे घाटकोपर ब्रांच में जमा कराना था। पूरा मामला सीबीआई के गलत मैनेजमेंट का नतीजा है।
 
कौन हैं आडवाणी?
- सुरेश का नाम देश के नामी कैंसर स्पेश्लिस्ट में गिना जाता है। उन्हें 2002 में पद्मश्री और 2012 में पद्मभूषण अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। 
- भारत में पहली बार बोन मेरो ट्रांसप्लांट करने का श्रेय भी डॉक्टर आडवाणी को ही जाता है।

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