विशेष रिपोर्ट

सुबह 6 बजे से खुल जाती हैं शिक्षा की दुकानें

Posted Date : 12-Nov-2017



प्रतिमाह एक करोड़ से अधिक का कारोबार
मन्नू चन्देल

कवर्धा, 12 नवंबर (छत्तीसगढ़)। शहर के गली-गली में कोचिंग सेंटर की बाढ़ आ गई है। संचालक बिना पंजीयन कराए बेधड़क कोचिंग व ट्यूशन क्लास का संचालन कर रहे हैं। जिले में खुलेआम शिक्षा की आड़ में बिजनेस किया जा रहा है। बच्चों से फीस के रूप में मोटी रकम लेकर सेंटर संचालक उन्हें प्रर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। संचालकों ने शिक्षा को ही बिजनेस का जरिया बना लिया है। 
कोचिंग सेंटर खोलने के लिए पहले शिक्षा विभाग से परमिशन लेना पड़ता है, लेकिन जिले में ऐसा कुछ भी नहीं है। संचालकों ने बिना परमिशन लिए कोचिंग सेंटर का संचालन कर रहे हैं। हमेशा विवादों में रहने वाला शिक्षा विभाग में खुलकर मनमानी चल रही है।
शिक्षक पढ़ा रहे ट्यूशन
वर्तमान कंपीटिशन के समय में बच्चों व युवाओं के ऊपर पढ़ाई का दबाव अधिक है। बच्चों व युवाओं पर पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे नंबर लाने, भविष्य में वह क्या बनेंगे, इस बारे में डाले जा रहे दबाव के कारण आगे बढऩे के उद्देश्य से पालक भी स्कूल के अलावा कोचिंग व ट्यूशन सेंटर का सहारा ले रहे हैं। स्कूल के ही शिक्षक ट्यूशन पढ़ रहे हैं।
कवर्धा में 300 कोचिंग व ट्यूशन सेंटर
जिले में गिनती के ही कोचिंग सेंटर के संचालकों ने अपना पंजीयन कराया है। जिले में सैकड़ों एजुकेशन सेंटर अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। संचालकों ने अब तक शिक्षा विभाग से संचालन के लिए किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नहीं ली है। शहर के गली-गली में बिना परिमिशन के कोचिंग सेंटर व ट्यूशन चल रहे हैं। जहां पढ़ाई के नाम पर बच्चों से मोटी रकम वूसली जा रही है।
हर माह 1 करोड़ से अधिक खर्च कर रहे पालक 
  जिले में माने की सिर्फ 20000 बच्चों और युवाओं ट्यूशन व कोचिंग क्लास जाते हैं अगर वो सिर्फ  500 रुपये प्रतिमाह फीस देते हंै तो यही 1 करोड़ हो जाता है। जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कही अधिक होंगे।
नहीं के बराबर सुविधा
शहर में चले रहे एजुकेशन सेंटरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। विद्यार्थियों के लिए न ही पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौच की। विद्यार्थियों से मोटी रकम लेने के बाद भी एजुकेशन सेंटर के संचालक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
ये होनी चाहिए सुविधा
पेयजल की व्यवस्था, कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी, लैब जैसी जरूरी सुविधाएं, सुविधायुक्त कमरे और हाल, पार्किंग की व्यवस्था, दक्ष शिक्षकों की स्टाफ आदि।
शिक्षा विभाग है अनजान
एजुकेशन सेंटर खोलने के पहले शिक्षा विभाग से परमिशन लेना जरुरी है। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। जिले में बिना परमिशन के सैकड़ों एजुकेशन सेंटर चल रहे हैं। इन सबकी जानकारी होने के बाद भी शिक्षा विभाग कार्रवाई करने में पीछे हट रहा है। इससे साफ प्रतीत होता है कि अवैध रूप से संचालित कोचिंग व ट्यूशन सेंटरों के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग कितना सख्त है। 




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