संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 14 नवंबर : अब गुजरात में सेक्स-सीडी की राजनीति हार्दिक के खिलाफ

Posted Date : 14-Nov-2017



चुनावग्रस्त गुजरात में पिछले दो दिनों में ऐसी दो सेक्स-सीडी बाजार में आने की खबर है जिन्हें हार्दिक पटेल की बताया जा रहा है। हार्दिक एक नौजवान है, और शादीशुदा भी नहीं है। एक बंद कमरे में किसी महिला के साथ किसी एक नौजवान के बीच के देह संबंधों को चोरी-छुपे रिकॉर्ड करने वाली यह सीडी हार्दिक की बताते हुए कल जिसने इसे जारी किया है, वह गुजरात के एक भाजपा मंत्री का करीबी बताया जा रहा है, और आज सुबह तक मंत्री के साथ उस नौजवान की बहुत सी तस्वीरें भी सामने आ गई हैं। लोगों को याद होगा कि पिछले पखवाड़े ही छत्तीसगढ़ में भाजपा के एक मंत्री का नाम बताते हुए एक सेक्स-सीडी आई थी, और बाद में भाजपा ने उसे झूठा करार दिया, और एक दूसरी सीडी सामने आई जिसमें चेहरा बदलकर मंत्री का चेहरा जोडऩा बताया गया था। भाजपा ने इसे स्तरहीन और बिलो दि बेल्ट वार करना कहा था। 
हमारा यह मानना है कि सेक्स-सीडी की राजनीति करना, हारे हुए लोगों का काम हो सकता है, जीते हुए लोग या जीतते हुए लोग ऐसा घटिया काम शायद न ही करते होंगे। जहां तक ऐसी वीडियो रिकॉर्डिंग हैं, हम पहले भी कई बार लिखते आए हैं कि जब तक ऐसी रिकॉर्डिंग में किसी जुर्म की बात न हो, तब तक उसे रिकॉर्ड करना ही जुर्म है। अगर दो वयस्क आपसी सहमति से बंद कमरे में कुछ कर रहे हैं, तो वहां पर जुर्म महज यह हो सकता है कि कोई बाहरी ताक-झांक करे, और उसकी रिकॉर्डिंग करे। अब एक दूसरा सवाल हमने पिछले एक पखवाड़े में ही इसी कॉलम में यह भी उठाया था कि राजनीति या सार्वजनिक जीवन के लोगों को बदनाम करने की नीयत से जो लोग ऐसी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करते हैं, वे ऐसे देह संबंधों में भागीदार महिला को भी बदनाम करते हैं जो कि सार्वजनिक जीवन में नहीं भी हो सकती हैं। इसे एक बड़ा जुर्म मानते हुए ऐसी रिकॉर्डिंग फैलाने वाले तमाम लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, चाहे वह छत्तीसगढ़ में हो या फिर वे गुजरात में हों। 
आज देश और प्रदेशों में मुद्दों की कोई कमी नहीं है, और उन्हें छोड़कर निजी जिंदगी में दखल देते हुए ऐसे आपराधिक काम को किसी भी पार्टी या किसी भी नेता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। भारत का राजनीतिक इतिहास बताता है कि कांग्रेस छोड़ रहे जगजीवन राम के खिलाफ उनके बेटे के निजी जीवन की तस्वीरों पर एक पूरे का पूरा अंक ही मेनका गांधी ने अपनी पत्रिका का निकाला था। और जैसा बोएं वैसा काटें के कुदरती अंदाज में अभी कुछ समय पहले उनके बेटे वरूण गांधी की उसी किस्म की बहुत सी असली या नकली तस्वीरें चारों तरफ फैली थीं। हमारा यह मानना है कि लोगों का निजी जीवन अगर वह अपनी कुर्सी की ताकत का इस्तेमाल करते हुए, किसी का शोषण करते हुए नहीं है, तो उसके उजागर करने पर कड़ी सजा होनी चाहिए। 
- सुनील कुमार




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