विशेष रिपोर्ट

कार्यकाल के साथ बदलता गया रमन का चेहरा- सिंहदेव

Posted Date : 14-Nov-2017



खास मुलाकात में सरल स्वभाव के नेता प्रतिपक्ष ने दागे तल्खी के साथ कई सवाल

प्रदीप मेश्राम

राजनांदगांव,  14 नवंबर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का वैसे तो मिजाज हमेशा से ही शांत रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ की मौजूदा राजनीति में चल रहे सरकारी तंत्र की असीमित दखल अंदाजी और भाजपा सरकार की खामियों को लेकर वह तल्ख हो गए हैं। सोमवार को कांग्रेस की जन अधिकार पदयात्रा में शरीक होने आए श्री सिंहदेव ने 'छत्तीसगढ़Ó से एक खास मुलाकात में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर सवालों की बौछार कर दी।
श्री सिंहदेव का मानना है कि राजनीतिक रूप से   मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने अपने पहले कार्यकाल में उदार  चेहरा दिखाया। 2008 और 2014 के दूसरे और तीसरे कार्यकाल में उनका व्यक्तित्व बनावटी रूप में बदल गया। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ की जनता  चौथी बार डॉ. सिंह को बागडोर देने के पक्ष में नहीं है। 'छत्तीसगढ़Ó से खास मुलाकात में सिंहदेव ने सिलसिलेवार सवालों का जवाब दिया।
0  जन अधिकार यात्रा में आप आए, कैसा माहौल दिखाई दिया?
00 पंचायतीराज संगठन कांग्रेस की एक सेल के रूप में माना जाता है। स्वायत्तशासी संस्थाओं में जुडे हुए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से पूरे प्रदेश में गांव-गांव पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। यह संस्था कांग्रेस का अनुषांगिक संगठन है। यह पदयात्रा मां बम्लेश्वरी के छत्रछाया में इसका शुभारंभ हुआ। इसका समापन भिलाई में होगा।
0 नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से आप एक साल बाद होने वाले चुनाव में किस तरह का माहौल देखते हैं?
00  रमन सिंह के पहले 5 साल उनके छवि निखारने वाले थे। एक नया व्यक्ति जो विधानसभा का चुनाव तो हारा था, लेकिन लोकसभा का चुनाव जीतकर केन्द्र में मंत्री बना और प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी मिली। उस वक्त डॉ. सिंह मुख्यमंत्री के दौड़ में भी नहीं थे। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री जुदेव की मूंछों की बातें सुर्खियों में रही, लेकिन एक कथित सीडी की वजह से वह पीछे हो गए। 2003 के चुनाव में कांग्रेस महज 6-7 सीटों के अंतर से भाजपा से हार गई और डॉ. सिंह को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, फिर 2008 का चुनाव रमन के व्यक्तित्व पर केन्द्रित होकर लड़ा गया। 2008 और 2013 के बीच  डॉ. सिंह की वादा खिलाफियां सामने आने लगी। जिन-जिन बातों को कहा गया था, आदिवासी परिवारों को जर्सी गाय देने की बात कही गई थी। सबसे पहले आदिवासी परिवारों को छला गया यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि क्योंकि चुनाव घोषणा पत्र को मतदाता गंभीरता के साथ लेते हैं। वहीं युवाओं को भी छला गया। उसके मन में यह बात आती है कि जो बात कही है वह सच है। बेरोजगारों को रोजगार देने की बात कही, लेकिन नहीं दी गई। किसानों को बिजली देने का वायदा किया गया। किसानों को मुफ्त बिजली देने के वायदे से पलटकर उनके साथ भी छलावा किया गया।  कहने और करने के अंतर से 2008 के चुनाव के बाद  रमन सिंह की छवि में गिरावट आई। 2013 का चुनाव काफी टक्कर का था। गिनती के दौरान कांग्रेस एक समय 51 सीटों पर आगे चल रही थी। बदकिस्मती से 0.73 प्रतिशत के अंतर से कांग्रेस हार गई। 
मेरा यह मानना है कि रमन सिंह ने जो पाया था वह खो दिया। 2013 और 2018 के बीच कई ऐसी बातें सामने आ गई। जिसमें सामान्य रूप से अच्छी छवि वाले व्यक्ति के ऊपर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। यही समय था, जब रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की बहनों को रक्षाबंधन पर्व पर 35 किलो चावल दिए जाने का वादा किया था, जिसे बाद में 7 किलो कर दिया गया। छत्तीसगढ़ में जितने परिवार नहीं थे उससे कई गुना लगभग 70 लाख राशन कार्ड बना दिए। छत्तीसगढ़ की आबादी से ज्यादा राशन वितरण कर दिया और यह भाजपा कार्यकर्ताओं को लाभान्वित करने के उद्देश्य से किया गया।
2011 में प्रदेश की आबादी 2 करोड़ 55 लाख  थी, तुलना में सवा तीन करोड़ की आबादी दिखाते राशन कार्ड बना दिए। फर्जी राशन कार्ड के ऊपर कार्रवाई नहीं हुई। गर्भाशय कांड में भी सरकार की लापरवाही सामने आई। यह पहली बार सुनने को मिला कि गर्भाशय नहीं निकालने वाली महिलाओं का भी जबरिया गर्भाशय निकाला गया। इसी पांच साल के दौरान आंख फोडवा कांड हुआ। यह दुर्भाग्य है कि आंख आपरेशन में मौत होने की घटनाएं छत्तीसगढ़ में हुई। 
एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुसार फैमिली प्लानिंग के तहत सरकार द्वारा जो दवाई दी गई उससे बिलासपुर में कई बहू-बेटियों की मौत हो गई। इस पर भी कार्रवाई नहीं हुई। सरकार ने सिर्फ एक चिकित्सक को सस्पेंड कर दिया। जबकि ड्रग एंड कास्टोमेटिक एक्ट के तहत नकली दवाई बनाने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई। 2003-08 और 13 के बीच रमन सिंह की साख प्रभावित हुई।
0 रेणु जोगी को लेकर अभी तक सस्पेंस कायम है। उनका कहना है कि वह कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष को सूचित कर गई थी और जोगी ने भी अपने साथ होने का दावा किया है इस पर क्या कहेंगे?
00  रेणु जोगी से मेरी बात नहीं हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी होने के नाते वह उनके साथ है। धर्मपत्नी अपने शौहर को छोड़ के कैसे जा सकती है, लेकिन रेणु जोगी ने विधायक दल की बैठक में कई बार कहा है कि कांग्रेस ने उनके और उनके परिवार को काफी कुछ दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव तक क्या होगा मैं नहीं जानती। हम लोग इस बात को लेकर चल रहे हैं। चुनाव में कुछ भी हो सकता है, लेकिन जब उनके पति एक अलग राजनीतिक दल का गठन कर रहे हैं, तब रेणु जोगी ने खुद कहा कि मेरे और मेरे परिवार को जिस कांग्रेस ने इतना दिया कि मैं उनके साथ हूं। मेरे से उनकी नवाखाई कार्यक्रम को लेकर बात हुई, लेकिन एक अलग राजनीतिक दल के बैनर तले जाने से मुझे आपत्ति है।
0  गुजरात और हिमाचल में चुनावी नतीजे  को लेकर क्या कहेंगे?
00  हिमाचल में अच्छी संभावना है, मैं अपने बहन के प्रचार में गया था और इस बात का भरोसा है कि वहां जीत होगी, लेकिन कांग्रेस के सत्तारूढ़ होने की वजह से थोड़ी कमियां है। गुजरात में हमने भाजपा का पसीना निकाल दिया है। राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है।




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