सामान्य ज्ञान

बैंगलोर का मूंगफली मेला-कडलेकाई परिसे

Posted Date : 15-Nov-2017



कडलेकाई परिसे कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में मनाया जाने वाला दो दिवसीय पर्व है। यह मूंगफली मेला है। पौराणिक कथायों के मुताबिक  इसवीं 1537 में बैंगलोर के संस्थापक केम्पे गौडा ने यहां हम्पी राज्य की वास्तुकला के अनुरूप एक मंदिर का निर्माण कराया। इसमें नंदी की पूजा की जाती है। बसवा मंदिर बसवनगुडी की एक पहाड़ी पर स्थित है। इसी परिसर में यह पर्व मनाया जाता है। 
इस पर्व में आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के किसान अपनी पहली फसल को भगवान बसवा (नन्दी) को अर्पण करते हैं।  बुल टेम्पल  को मेले के समय एक लाख दीपों से सजाया जाता है।    काफी समय पहले बसवंगुडी कई गांवों का समूह था जैसे,सनकेनाहल्ली, गुट्टाहल्ली, मावल्ली, दशरहल्ली, जहां मूंगफली की खेती की जाती थी। लेकिन उस दौरान किसान एक बैल के कारण बेहद परेशान थे,ये बैल तब पूरी फसल को नष्ट कर देता था जब आकाश में पूरा चांद होता था।  तब एक दिन क्षेत्र के सभी किसान उस बैल के पास गए और उन्होंने उससे विनती की और कहा कि कृपया आप हमारी फसलों को नुक्सान न करें, साथ ही क्षेत्र के लोगों ने बैल के सामने ये भी पेशकश रखी कि यदि नुकसान नहीं हुआ तो फसल की पहली मूंगफली आपको चढ़ाई जायगी। बैल किसानों की इस शर्त को मान गया और तब से लेकर आज तक यहां पर मूंगफली मेले का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि लोगों की प्रार्थना के बाद ये बैल वहां से गायब हो गया और कुछ दिनों बाद वहां एक मूर्ति मिली जिसे बाद में एक स्थाई मंदिर में रख दिया गया। इस मूर्ति के बारे में एक दिलचस्प बात ये है कि इस मूर्ति के माथे पर एक त्रिशूल गाड़ के इसके विकास को रोका गया है क्योंकि तब से हर साल इस मूर्ति का आकार बढ़ रहा था। 
 कडलेकाई परिसे  यानी मूंगफली का मेला हिन्दू पञ्चांग के अनुसार कार्तिक माह के अंतिम सोमवार को आयोजित किया जाता है। बसवनगुडी इलाके में  बुल टेम्पल  यानी नंदी मंदिर के समीप स्थित प्रसिद्ध दोव् गणेश अर्थात बड़े गणेश मंदिर के पास यह आयोजित होता है। मेले से एक दिन पूर्व ही कर्नाटक और अन्य राज्यों के व्यापारी मूंगफली खरीदने और बेचने का काम आरम्भ कर देते हैं।




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