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खुद को दूसरे से कम न आंकिए




सफलता का पहला मंत्र है प्रयत्न करना। यदि आप प्रयत्न करने को तत्पर हो जाते हैं, तो आधी सफलता तो आपको मिल गई समझो। कहा भी तो है कि अच्छी शुरुआत यानी आधी सफलता। सफलता का दूसरा मंत्र है कि अपने मन में हीन भावना न आने दें।
सफलता मिलने की आशा नहीं है, तो इस का मतलब यह नहीं कि कोशिश ही न करें। असफलता मिलने की उम्मीद के कारण कोई कार्य ही न करें। कार्य करें और अपनी ओर से पूर्ण मेहनत के साथ कार्य करें। पर अगर मन में  जरा-सी भी शंका हो तब उस शंका का निवारण जरूरी है। दरअसल प्रयत्न और भीतर की आवाज सुनने में एक तरह से संतुलन बैठाना होता है और जिसने सही तरीके से संतुलन बिठा लिया, उसकी सफलता की दर बढऩे  की संभावना रहती है, क्योंकि वह अपनी गलतियों को स्वयं के सामने रखने का माद्दा रखता है। कई बार ऐसा होता है कि स्टूडेंट्स  दूसरों के ओपिनियन के आधार पर अपने बारे में गलत राय बना लेते हैं।  याद  रखिए  जो कामयाब हैं वे इसलिए  कि वे अपने को किसी से कम नहीं आंकते। वे हमेशा अपनी बेहतर  चीजों पर फोकस करते हुए अपना सेल्फ  कान्फिडेंस बढ़ाते रहते हैं और अपनी  पर्सनेलिटी को चमकाते रहते हैं। इसलिए अपने  भीतर झांकिए और दूसरों से अपने को बिलकुल कम मत आंकिए कई स्टूडेंट्स इस प्रॉब्लम से जूझते दिखाई देते हैं। न तो उनका फिजिकल अपीरियंस अच्छा है न उनकी चाल न उनकी आवाज अच्छी है और न एटीच्यूड। वे दूसरों की धारणा पर अपने बारे में राय बना लेते हैं और परेशान रहते हैं। वे अपनी स्टडी, कैरियर और लाइफ से नाखुश रहते हैं। इसलिए  वे कोशिश करते  हैं कि वे कुछ और हो  जाएं। कामयाब होने की पहली सीढ़ी है अपने को स्वीकार करना, अपने को  प्यार  करना और अपनी गलतियों को भुला देना। इसकी आज से ही शुरुआत कर दीजिए। यहां दी जा रही कुछ  टिप्स को अपनाएं और आगे बढ़ जाएं। गौरतलब है कि सबसे पहली बात  तो यह है कि अपने बारे में तमाम नापसंद बातों को भूल जाएं। आपको लगता है कि न तो आप स्मार्ट  हैं  और न ही हंबल, यह सब निगेटिव थिंकिंग का रिजल्ट है। इसलिए अपने बारे में अच्छी बातें सोचिए। अपने बारे में दूसरों की राय को ज्यादा महत्त्व मत दीजिए और अपने को सफल होते देखने की आदत डालिए। आत्मविश्वास बड़ाने का एक आसान और सहज तरीका है अपने को आईने में देखना। आईने के समाने खड़े होकर अपने से लगातार कहते रहिए कि आप यूनिक हैं, हैंडसम हैं या ब्यूटीफुल हैं। सेल्फ कान्फिडेंस हासिल करने के बाद उस  तरफ  बढऩे की कोशिश करिए, जो आप हासिल करना चाहते हैं। अपने  बारे में तमाम अच्छी बातें या अपनी क्वालिटीज को लिख लें और कमजोरियों को भी लिख लें । यदि आपको लगता है कि आप जल्द ही  इमोशनल हो जाते हैं या हर्ट हो जाते हैं तो उसकी जड़ों को समझने की कोशिश करिए। इससे आप अपने  ही बारे में बेहतर अंडरस्टैंडिंग बना पाएंगे। दुनिया में तमाम ऐेसे उदाहरण हैं कि जिनके पास खूब पैसा और शोहरत थी, लेकिन वे कभी अपनी जिंदगी में खुश नहीं रह पाए। जाहिर है खुशी बाहर नहीं, भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं। यह पूरी तरह आप पर निर्भर है कि आप खुश रहना चाहते हैं कि दुखी। इसलिए अपने भीतर सदा ग्रीनर साइड ही देखें। अपने बारे में हमेशा सकारात्मक सोचें। क्योंकि आपकी सोच ही आपकी जिंदगी का आईना होती है। मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है। तो क्यों न ऐसा सोचा जाए कि आप अच्छे बन जाएं। नकारात्मक सोच आपको असफलता के धुंधलके में ले जाती है। कोई आपको लाख सलाह दे, पर जब तक आप स्वयं अपने मन को नकारात्मक सोचने से मना नहीं करेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा।  सफलता का सफर सकारात्मकता से शुरू हो कर उपलब्धियों पर आकर खत्म होता है और असफलता का तो कोई सफर ही नहीं होता। असफलता खुद-ब खुद आपके द्वार आ जाती है। और यदि आप कुछ करें तो यही असफलता सफलता में तबदील हो सकती है। सफलता का पहला मंत्र है प्रयत्न करना। यदि आप प्रयत्न करने को तत्पर हो जाते हैं, तो आधी सफलता तो आपको मिल गई समझो। कहा भी तो है कि अच्छी शुरुआत यानी आधी सफलता। सफलता का दूसरा मंत्र है कि अपने मन में हीन भावना न आने दें। अपने को दूसरों से हमेशा बेहतर समझें। आप यह मानकर चलें कि जो काम आप कर सकते हैं, वह कोई दूसरा नहीं कर सकता। आप अपने आप को इस विश्व का अद्वितीय इनसान समझें। यह धारणा आप में आत्मविश्वास पैदा करेगी। ध्यान रहे कि इस दरमियान अपने ऊपर अभिमान को हावी न होने दें। क्योंकि यदि आप के मन में अहंकार घर कर गया तो आप सब कुछ गंवा बैठेंगे।




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