कारोबार

अपनी डूबी प्रॉपर्टी की बोली में शामिल होने एस्सार, रुइया और सिंघल बना रहे योजना

Posted Date : 05-Dec-2017



देव चटर्जी और ईशिता आयान दत्त 
मुंबई/कोलकाता, 5 दिसंबर  एस्सार समूह कर्जदाताओं का बकाया चुकाने की योजना बना रहा है ताकि वह हजीरा में अपने स्टील प्लांट की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सके। इस संयंत्र में टाटा स्टील और आर्सेलर मित्तल जैसी कंपनियों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। एक कर्जदाता ने कहा कि समूह ने कर्जदाताओं से लंबित ब्याज बकाया के बारे में जानकारी मांगी है, जिससे वह रकम अदा कर सके और दिसंबर अंत तक अन्य के साथ संयंत्र के लिए बोली लगा सके। 
भूषण पावर एंड स्टील के प्रवर्तक संजय सिंघल ने भी कहा कि अगर ऐसा संभव होता है तो वह बकाया देय चुका कर अपनी फर्म के लिए बोली लगा सकते हैं। एस्सार स्टील ने अप्रैल 2016 से इस साल जून तक बैंकों को करीब 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। एस्सार ऑयल और एजिस की बिक्री से मिलने वाली रकम से समूह अपना कर्ज चुका सकता है। बैंकर ने कहा, ऋणदाताओं की समिति इस पर विचार करेगी।
एस्सार स्टील पर बैंकों का करीब 44 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है लेकिन बकाया ब्याज काफी कम है। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के मैनेजिंग पार्टनर आलोक धीर ने कहा, सरकार द्वारा जारी स्पष्टïीकरण के अनुसार कोई कंपनी या प्रवर्तक अपना बकाया बैंकों को चुका कर बोली प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। उन्होंने कहा, ऋणदाताओं की समिति को उनको बेहतर पेशकश मिल सकती है और अभिरुचि प्रक्रिया के पूरा होने के बाद वे अपने लिए बेहतर वित्तीय सौदे की मांग कर सकते हैं।
मुंबई के एक जाने-माने वकील ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, प्रवर्तक कंपनी के लिए बोली लगा सकते हैं, लेकिन उन्हें अपना खाता चालू करना होगा। लेकिन इसमें स्पष्टïता नहीं है कि उन्हें पूरा कर्ज चुकाना होगा या केवल बकाया ब्याज/मूलधन। अगर पूरा कर्ज चुकाने की बात हो तो एनसीएलटी प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं होगा क्योंकि कोई देनदारी नहीं होगी।
सार्वजनिक क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कई प्रवर्तकों ने आग्रह किया हैै कि वह बकाया चुकाने के बारे में उनकी योग्यता पर विचार करें। उन्होंने कहा कि यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक से जुड़ा है, इसलिए इस बारे में केंद्रीय बैंक द्वारा ही स्पष्टï किया जा सकता है। इस बारे में एस्सार समूह के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 
एस्सार स्टील उन 12 कंपनियों में शामिल हैं, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक ने राष्टï्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में भेजा है। एस्सार स्टील के अलावा, भूषण स्टील, भूषण पावर एंड स्टील, मोनेट इस्पात और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स जैसी कंपनियां ऋणशोधन एवं दिवालिया प्रक्रिया में गईं हैं।
एनसीएलटी ने इन कंपनियों के निदेशक मंडल को निलंबित कर ऋणशोधन पेशेवरों को नियुक्त किया है। ऋणशोधन एवं निपटान पेशवर फंसी कंपनियों के कर्ज का एक हिस्सा लेने इच्छुक पक्षों के लिए वित्तीय बोली मंगाएंगे। इस बीच बैंक को भी अपना करीब 60 फीसदी कर्ज गंवाना होगा। सबसे अधिक कर्ज को लेने वाले बोलीदाता को ही कंपनी सौंपी जाएगी। मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भूषण पावर ऐंड स्टील देय बकाया 10 हजार करोड़ है, जिसे अग्रिम में चुकाया जा सकता है। भूषण पावर का कुल कर्ज करीब 37,248 करोड़ रुपये का है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)।




Related Post

Comments