संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 5 दिसंबर : मेरे पास पृथ्वी थिएटर है...

Posted Date : 05-Dec-2017



फिल्म अभिनेता और निर्माता-निर्देशक शशि कपूर के गुजरने पर जो लोग उन्हें याद कर रहे हैं, उनमें दो चीजें सबसे अधिक कही और लिखी जा रही हैं। एक तो यह कि इंसान के रूप में उनका बर्ताव बहुत ही ऊंचे दर्जे का था। वे हँसते-मुस्कुराते ही अनजान लोगों से भी मिलते थे, और  किसी को उनसे बदसलूकी नहीं झेलनी पड़ी। उनकी दूसरी खूबी जो मायने रखती है, वह थी मुंबई में नाटकों के लिए सबसे अच्छी जगह, पृथ्वी थिएटर को बनाना और चलाना, जो कि फायदे का काम शायद नहीं भी था। इन दोनों ही खूबियों को देखें, तो यह लगता है कि इनका खानदान से कोई लेना-देना नहीं था। कपूर खानदान के दर्जन भर लोग फिल्म उद्योग में कामयाब हुए, लेकिन इन दो खूबियों के लिए और किसी को नहीं जाना गया। हम किसी एक कलाकार के गुजरने पर उसके काम पर लिखने के आदी नहीं हैं, क्योंकि उनका छोड़ा गया काम ही उनके बारे में लिखा हुआ रहता है। लेकिन उनकी दूसरी खूबियों के बारे में कभी-कभी लिखने को दिल करता है, और शशि कपूर की ये दो खूबियां उनकी जिंदगी के साथ इस तरह चस्पा हैं कि आखिर में यही सबसे अधिक मायने रखती दिखती हैं, उनके अभिनय के साथ-साथ।
जो लोग यह मानते हैं कि किसी खानदान के होने के नाते किसी इंसान को आगे बढऩे का ऐसा मौका मिलता है, वे लोग कुछ खूबियों को कभी-कभी अनदेखा कर देते हैं। किसी खानदान का होने के नाते ऐसे लोगों से बड़ी ऊंची-ऊंची उम्मीदें भी बंध जाती हैं, जैसे कि आज राहुल गांधी से बंधी हुई हैं, और जिन पर खरा उतरना खासा मुश्किल भी हो जाता है। ऐसे में लोगों के अपने काम ही उन्हें यादगार बनाते हैं। शशि कपूर के साथ कुछ ऐसा ही था। 
लोगों को यह याद रखना चाहिए कि मशहूर और कामयाब हो जाने के बाद दुनिया उन्हें लंबे अर्से तक याद तो रखती हैं, लेकिन ये यादें लोगों को खुशी देने वाली होनी चाहिए। लोग जब तक कामयाब हैं, तब तक तो बहुत यादों की जगह निकलती नहीं है, लेकिन बाद में लोगों के बर्ताव की सकारात्मक बातें ही उन्हें संस्मरणों में बेहतर जगह दिला पाती हैं। इसके साथ-साथ एक दूसरी बात यह भी रहती है कि लोगों ने अपने पेशे, और कमाऊ कामकाज से परे समाज के लिए, दूसरे लोगों के लिए क्या किया, यह बात भी लोग याद करते हैं, और याद रखते हैं। नाटकों को एक मंच देने के लिए पृथ्वी थिएटर का मुंबई और हिंदुस्तान के लिए योगदान शशि कपूर का एक बड़ा काम हमेशा ही गिना जाएगा। दूसरी तरफ हम फिल्म उद्योग के कुछ और लोगों को देखते हैं, तो नाना पाटेकर जैसे लोग दिखते हैं जो कि अपनी थोड़ी सी कमाई का पूरा सा हिस्सा आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को देते हैं, और अपनी मिसाल अपने कहे बिना दूसरों के सामने रखते हैं। दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन जैसे लोग दिखते हैं जो कि एक सैनिक वाली फौज की तरह काम करते हैं, और अरबों कमाते हैं, और बांटते शायद कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने अपने ससुराल भोपाल के गैस पीडि़तों के लिए भी इस चौथाई सदी में कुछ किया हो ऐसा याद नहीं पड़ता। यह उनकी निजी-कारोबारी पसंद हो सकती है, लेकिन लोगों को समाज के लिए किया हुआ याद रहता है, और न किया हुआ भी याद रहता है। शशि कपूर की चर्चा करते हुए अमिताभ की चर्चा इसलिए की जा रही है कि आज अमिताभ यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, अरबों हैं, तुम्हारे पास क्या है, और मानो इसके जवाब में शशि कपूर की देह से आवाज निकल रही है कि मेरे पास पृथ्वी थिएटर है।
- सुनील कुमार




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