सोशल मीडिया

हिंदू जागरण मंच वाले सिर्फ इस बात से नाराज हैं कि सांता क्लॉज उन्हें हर बार धोखा दे जाता है!

Posted Date : 20-Dec-2017



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन हिंदू जागरण मंच (एचजेएम) ने उत्तर प्रदेश स्थित निजी स्कूलों में हिंदू छात्रों को क्रिसमस मनाने से दूर रखने की बात कही है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक मंच ने राज्य में अपनी जिला इकाइयों से इसे लेकर निजी स्कूलों का दौरा करने को कहा है। साथ ही, उसने इसे न मानने वाले स्कूलों के बाहर प्रदर्शन करने को कहा गया है। मंच का कहना है कि क्रिसमस के आयोजन के जरिए स्कूल ईसाइयत को बढ़ावा देते हैं। सोशल मीडिया में इस खबर के चलते हिंदू जागरण मंच ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल रहा।
दक्षिणपंथी संगठनों के समर्थकों ने यहां जागरण मंच के समर्थन में कई प्रतिक्रियाएं दी हैं तो वहीं एक बड़े तबके ने इस खबर के हवाले से संगठन पर सवाल उठाए हैं। फेसबुक पर अशरफ ने पूछा है, मैंने पहले कभी दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ ऐसी धमकियां नहीं सुनीं...क्या ये लोग इस्लामिक दुनिया के एक हिस्से में जो चल रहा है, उसका अनुसरण करना चाहते हैं? इस खबर के बहाने यहां केंद्र की भाजपा सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। गोपाल भोजक का ट्वीट है, सबका साथ सबका विकास.... लेकिन क्रिसमस अपनी रिस्क पर मनानी होगी।
सोशल मीडिया में इस खबर पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
शकुनि मामा- हिंदू जागरण मंच वाले सिर्फ इस बात से नाराज हैं कि सांता क्लॉज उन्हें हर बार धोखा दे जाता है।
राहुल एस्वर- यह ट्वीट हिंदू जागरण मंच के लिए है जो क्रिसमस मनाने का विरोध कर रहा है...भाइयो, एक बार क्रिसमस के मौके पर हिंदुओं के आश्रम बेलूर मठ जरूर जाइए...वहां आप यह (नीचे तस्वीर) देख सकते हैं। वहां एक हफ्ते रुकिए और ध्यान का एक कोर्स कीजिए। आप एक अच्छे हिंदू, भारतीय और इंसान बन जाएंगे।
द बैड डॉक्टर- हिंदू जागरण मंच ने उत्तर प्रदेश के स्कूलों को एक पत्र भेजकर क्रिसमस के आयोजन रद्द करने को कहा है। मुझे यह जानकर हैरतभरी खुशी है कि ऐसे उन्मादी दिमाग वाले लोग लिख भी सकते हैं!
विनोद कुमार- ये हिंदू जागरण मंच किट-कैट जीम्स आदि कहां पाए जाते हैं... इनको चर्चित करने के बजाय हमें इनकी उपेक्षा करनी चाहिए।
राजीव देसाई- किसी भी सभ्य समाज में ऐसे उपद्रवियों गिरफ्तार कर लंबे समय के लिए जेल भेजा जाता....लेकिन यह साफ है कि किसी भाजपा शासित प्रदेश में यह नहीं हो सकता। (सत्याग्रह)




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