विशेष रिपोर्ट

विकास नहीं हो पाया, नपा से हटाई गई कई पंचायतें, अब बैकुंठपुर नपा भी नपं बनेगी

Posted Date : 23-Dec-2017



चंद्रकांत पारगीर
बैकुंठपुर, 23 दिसंबर (छत्तीसगढ़)। जिन ग्राम पंचायतों को जोड़कर नगर पालिका बनाई गई थी, अब ऐसी ग्राम पंचायतों का विकास नहीं होने की दुहाई देते हुए नगर पालिका से हटाया गया है, ऐसे में अब वापस हुई ग्राम पंचायतों में सरपंच के चुनाव होंगे, साथ ही नगर पालिका अब नगर पंचायत बन जाएगा। विकास के नाम पर आगे बढऩे की बजाय पीछे जाने का यह पहला मामला है। इसी तरह अब बैकुंठपुर नगर पालिका को भी नगर पंचायत बनाने की तैयारी है। 
जानकारी के अनुसार कोरिया जिला मुख्यालय के निकट कोयलांचल शिवपुर चरचा नगर पालिका क्षेत्र को नगरीय प्रशासन विभाग के द्वारा नपा सीमा में जुड़े ग्राम पंचायत व ग्राम जिनमें खरवत, महुआपार, जमुनीपारा, बनखेता, उपरपारा, सरडी, जूनापारा, तेंदूपारा को शामिल किया गया था। जिसे नगरीय निकाय विकास के उप सचिव आर एक्का के हस्ताक्षर द्वारा आदेश को छग के राजपत्र में जारी कर दिया गया है। 
बीते 1 दिसंबर को जारी आदेश में यह उल्लेख किया गया है कि छग नगर पालिका अधिनियम 1961 क्रमांक 37 सन 1961 की धारा 5 क द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य शासन एतद द्वारा नगर पालिका परिषद शिवपुर चरचा में सम्मिलित ग्राम पंचायत व ग्राम खरवत, महुआपार, जमुनीपारा, बनखेता, उपरपारा, सरडी, जूनापारा, तेंदूपारा की सीमा को नगर पालिका परिषद शिवपुर चरचा की सीमा से पृथक करता है।  
क्या है असल कहानी
वर्ष 2004 में नगर पंचायत चुनाव में बैकुंठपुर और शिवपुर चरचा में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, जिसके बाद वर्ष 2008 में कार्यकाल खत्म होने पर चुनाव होना तय था, भाजपा के रणनीतिकारों ने दुबारा सत्ता हासिल करने का फार्मूला यह बनाया कि आसपास के ग्राम पंचायतों को जोड़कर नगर पालिका बनाई जाए, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैकुंठपुर और शिवपुर चरचा को नगर पालिका बनाए जाने की घोषणा की, ऐसे में परिसीमन के नाम पर दो साल चुनाव नहीं हुए और भाजपा के अध्यक्ष ही इन परिषदों पर काबिज रहे। 
ग्राम पंचायत जोड़े जाने का विरोध कांग्रेस के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामचंद्र सिंहदेव ने पुरजोर किया, तब उन्हें विकास विरोधी कहा गया, और मामला कोर्ट पहुंचा, जहां सरकार ने हलफनामा प्रस्तुत कर दोनों नगर पालिका की जनसंख्या सही बताकर नगर पालिका बनाए जाने का रास्ता साफ कर दिया। वर्ष 2010 में नगर पालिका के चुनाव हुए, शिवपुर चरचा में भाजपा जीती, परन्तु बैकुंठपुर में निर्दलीय के रूप में शैलेष शिवहरे ने जीत दर्ज की, वर्ष 2015 में पुन: चुनाव हुए दोनों स्थानों पर भाजपा हार गई, वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा सिर्फ 1062 वोटों से ही चुनाव जीत पाई, और इस बार भी भाजपा के आंतरिक सर्वे में स्थिति उतनी ठीक नहीं है। 
अब भाजपा के रणनीतिकारों को एहसास होने लगा कि कांग्रेस के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामचंद्र सिंहदेव की बात सही थी, जिसके बाद अब जुड़ी ग्राम पंचायतों में विकास नहीं होने की बात कही जानी लगी और ऐसे ग्राम पंचायतों से जुड़े ग्रामीणों के हस्ताक्षर कर वापस ग्राम पंचायत में जाने की मांग की गई। वहीं अब फिर दोनों स्थानों पर दुबारा मतदान होने की संभावना बन गयी है, ऐसे में इससे जुड़े लोग एक बार फिर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हंै। वहीं लोग इस निर्णय को 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की खराब स्थिति को ठीक करने का प्रयास मान रहे हंै, ताकि इन क्षेत्रों से भाजपा को वोट मिल सके। 




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