सोशल मीडिया

इस साल मोदीजी ऐसे पहले प्रधानमंत्री भी बन गए जिनको पार्टी सांसद नमस्ते का जवाब नहीं देते!

Posted Date : 30-Dec-2017



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा सांसदों से एक शिकायत है और वो यह कि वे उनकी 'नमस्तेÓ का जवाब तक नहीं देते। कई न्यूज वेबसाइटों ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। इसके मुताबिक गुरुवार को भाजपा की साप्ताहिक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पार्टी सांसदों से कहना था, मैं रोज सुबह 'नमो एप्लिकेशनÓ पर आपसे नमस्ते कहता हूं। लेकिन सिर्फ चार-पांच (सांसदों) का ही जवाब आता है। सुबह की शुभकामना (गुड मॉर्निंग) के साथ भेजे गए कई जरूरी संदेशों पर एक प्रतिक्रिया तक नहीं आती...। सोशल मीडिया में आज इस खबर पर खूब प्रतिक्रियाएं आई हैं। फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए 'नमस्तेÓ या 'गुडमॉर्निंगÓ कहते हुए टिप्पणियां की हैं।
इस बात पर हैरानी जताते हुए यहां कई मजेदार टिप्पणियां भी आई हैं। सिद्धांत मोहन की एक ऐसी ही फेसबुक पोस्ट है, यह बात नरेंद्र मोदी की समझ में कब आएगी कि उनके सांसदों को संघ प्रार्थना यानी नमस्ते सदावत्सले की आदत है... गुड मॉर्निंग उनके लिए पश्चिमी सभ्यता का प्रतीक है... सागर का ट्वीट है, आप जिस पर दिलो-जान से मरते हैं, अगर वो अगली बार आपके मैसेज की उपेक्षा करे तो याद रखिये कि देश के प्रधानमंत्री तक की उपेक्षा हो जाती है।
इसी खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
राधा चरण दास- नरेंद्र मोदी अपनी गुड मॉर्निंग के बदले कोई भी जवाब न पाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बने, यूनेस्को ने सम्मानित किया।
अन ऑफीशियल सुसुस्वामी- मैं रोज सुबह गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजता हूं, लेकिन पांच-छह सांसदों के अलावा कोई जवाब नहीं देता- वाट्सएप ग्रुप के सदस्यों को एडमिन का संदेश।
माणक गुप्ता- अगर भाजपा सांसदों को पता होता कि गुडमॉर्निंग का मैसेज मोदीजी खुद भेज रहे हैं तो वे रात को भी पलटकर गुड मॉर्निंग मैसेज भेज रहे होते। पार्टी में किसी एक भी हिम्मत नहीं जो उनका संदेश इग्नोर करे।
हूमेश सागर- वे (नरेंद्र मोदी) सांसदों और देश की जनता के कई सारे सवालों का जवाब नहीं देते, पर सांसदों ने 'गुड मॉर्निंगÓ भर का जवाब नहीं दिया तो बुरा मान गए...
जाकिर हुसैन कुरैशी- मोदीजी का कहना है कि उनके सांसद गुड मॉर्निंग का जवाब भी नहीं देते! और वे हम से उम्मीद करते हैं कि हम उनकी मन की बात सुनें! (सत्याग्रह)




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