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नोटबंदी की अगली तिमाही में देश में हुई बंपर भर्तियां

Posted Date : 31-Dec-2017



अतुल ठाकुर
नई दिल्ली, 31 दिसंबर। देश के ऑर्गनाइज्ड सेक्टर (संगठित क्षेत्र) ने वित्त वर्ष 2016-17 में हर दिन 1,100 से कुछ ज्यादा नौकरियां दीं। इस तरह पूरे साल में कुल 4.16 लाख जॉब्स के नए अवसर संगठित क्षेत्र ने प्रदान किए। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2015-16 से 2फीसदी ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि 2016-17 की आखिरी तिमाही में पिछली तीन तिमाहियों के मुकाबले बहुत ज्यादा नई नौकरियां दी गईं जब अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर था। रोजगार परिदृश्य पर श्रम मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी तिमाही रिपोर्ट में ये आंकड़े पेश किए गए। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में 45फीसदी नई नौकरियां जनवरी से मार्च 2017 के बीच आईं जबकि नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर को हुआ था।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मिलाकर विकास की रफ्तार अब भी सुस्त है। साल 1990 से भारत के वर्कफोर्स में हर साल 8 लाख वर्कर्स जुड़ते रहे हैं। श्रम मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि संगठित क्षेत्र 50 फीसदी नए वर्करों को ही नौकरियां दे पाता है। हालांकि, सर्वे में देश में रोजगार के संपूर्ण परिदृश्य को नहीं दर्शाता है, बल्कि इसके दायरे में 2013-14 की आर्थिक जनगणना के आधार पर निर्धारित संगठित क्षेत्र ही है। गौरतलब है कि 10 या 10 से ज्यादा एंप्लॉयीज वाले संस्थानों को ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर का दर्जा दिया गया है। साल 2013-14 की आर्थिक जनगणना के मुताबिक, कुल 5 करोड़ 85 लाख संस्थानों में सिर्फ 1.4फीसदी ही संगठित क्षेत्र का हिस्सा हैं। 
बहरहाल, श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 2016-17 में पैदा नई नौकरियों के कुल अवसरों में 47.4फीसदी यानी करीब आधे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से आए थे। इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य का 32फीसदी योगदान रहा है। क्षेत्र के आधार पर आए बदलावों के विश्लेषण से पता चलता है कि हेल्थ सेक्टर में रोजगार के अवसरों का अच्छा-खासा विस्तार हुआ है और इस सेक्टर में अप्रैल 2016 के मुकाबले अप्रैल 2017 में 5.5 फीसदी ज्यादा लोगों को नौकरियां मिलीं। स्वास्थ्य के बाद व्यापार (ट्रेड), परिवहन (ट्रांसपोर्ट) और आईटी/बीपीओ का नंबर आता है। इन तीनों सेक्टरों में 3-3 प्रतिशत की दर से नौकरियों का विस्तार हुआ। कुल मिलाकर अप्रैल 2017 में इन चार सेक्टरों ने मिलकर 21.3 फीसदी नए रोजगार दिए। इसके उलट कंस्ट्रक्शन और रेस्ट्रॉन्ट इंडस्ट्री में क्रमश: 6.3 फीसदी और 0.5फीसदी की गिरावट देखी गई। 
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में नए रोजगार पानेवाले 87फीसदी लोगों को किसी-न-किसी एंप्लॉयर ने नौकरी पर रखा जबकि सिर्फ 12.7फीसदी लोगों ने ही स्वरोजगार की शुरुआत की। भारत के जॉब मार्केट की खासियत यह है कि यहां भारी तादाद में लोगों को आंशिक रोजगार मिले हैं जिन्हें बेरोजगार नहीं माना जाता। देश की बड़ी आबादी जिनके पास कोई रेग्युलर जॉब नहीं है और न ही उन्हें कोई अनएंप्लॉयमेंट बेनेफिट मिल रहा है, उन्हें सेल्फ-एंप्लॉयड माना जाता है जबकि हकीकत में ये मुश्किल से ही जीवनयापन कर पा रहे हैं। इस संदर्भ में स्वरोजगार की जगह पर किसी-न-किसी एंप्लॉयर से मिली नौकरियां सकारात्मक संदेश देती हैं। इस रिपोर्ट के लिंग आधारित विश्लेषण से पता चलता है कि पुरुषों ने 60.8फीसदी नई नौकरियों पर कब्जा जमाया जबकि महिलाएं रोजगार के सिर्फ 39.2फीसदी नए मौकों को ही अपने नाम कर सकीं। (टाईम्स न्यूज)




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