सोशल मीडिया

साल 1818 की लड़ाई पर 2018 में टकराव बताता है कि हम दुनिया से दो सौ साल पीछे चल रहे हैं!

Posted Date : 03-Jan-2018



पुणे में भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ मनाने के दौरान भड़की जातीय हिंसा का मामला आज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोमवार को यहां एकत्रित दलित समुदाय के लोगों पर भगवा झंडे लिए कुछ लोगों ने हमला कर दिया था और इसमें एक दलित युवक की मौत हो गई थी। साथ ही यहां बसों और निजी वाहनों के साथ तोड़-फोड़ भी की गई थी। इस घटना से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं। वहीं इसकी प्रतिक्रिया में दलित संगठनों ने आज मुंबई में विरोध प्रदर्शन किया है। सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें-वीडियो भी शेयर हुए हैं।
ट्विटर पर भीमा कोरेगांव ट्रेंडिंग टॉपिक के साथ इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएं आई हैं। यहां कई लोगों ने राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, वे दक्षिणपंथी गुट कौन थे जिन्होंने कल पुणे के भीमा-कोरेगांव कार्यक्रम पर हमला किया? क्या उनके नाम सार्वजनिक करके उनकी (हमलावरों की) गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए?
इस घटना को लेकर यहां कई लोगों ने महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, साथ ही भाजपा को भी निशाना बनाया है। ट्विटर हैंडल रक्षामंत्री पर टिप्पणी है, भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा को देखकर लगता है कि भाजपा सरकार में दलित-पिछड़ा हिंदू सच में खतरे का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी चल रही है कि मुख्यधारा के मीडिया ने इस घटना को जरूरी तवज्जो नहीं दी। वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले की इससे जुड़ी टिप्पणी है, ...मुझे इससे न कोई झटका लगा, न हैरानी हुई। हमारे मीडिया में इस तरह का पक्षपाती रवैया वर्षों से सड़ांध मार रहा है।
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
मंजू राजस्थानी- कश्मीर के पत्थरबाज अगर आतंकी हैं तो भीमा कोरेगांव के पत्थरबाजों को क्या कहा जाना चाहिए?
अनिल आचार्य- पुलिस (भाजपा) कोरेगांव में दक्षिणपंथी गुटों की हिंसा रोक सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
राजदीप सरदेसाई- जब 1818 में लड़ा गया युद्ध 2018 में सड़कों पर टकराव पैदा करे तो आप खुद से पूछते हैं- भारत आगे बढ़ रहा है या पीछे जा रहा है?
हिस्टरी ऑफ इंडिया- पुणे के नजदीक भीमा कोरेगांव स्मारक पर जा रहे दलितों पर भगवा झंडा लिए कुछ लोगों ने हमला किया.. इस मामले में सरकार की समझदारी देखकर अच्छा लगा कि उसने शांति स्थापित करने के लिए गुंडों पर पैलेट गन नहीं चलवाई!  (सत्याग्रह)




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