सोशल मीडिया

कुमार विश्वास को शत्रुघ्न बनना पड़ेगा या अडवानी!

Posted Date : 04-Jan-2018



राज्यसभा चुनाव को लेकर गुटबाजी का सामना कर रही आम आदमी पार्टी (आप) ने पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह के साथ नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। मंगलवार को पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में इन नामों पर फैसला किया गया और इसके बाद से सोशल मीडिया में इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। यहां कई लोगों ने नारायण गुप्ता और सुशील गुप्ता के नामों पर हैरानी जताई है और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर राज्यसभा सीटों के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया है। स्वराज अभियान के नेता और आप के पूर्व सदस्य योगेंद्र यादव का ट्वीट है, पिछले तीन साल में मैंने ना जाने कितने लोगों को कहा कि अरविंद केजरीवाल में और जो भी दोष हों, कोई उसे खरीद नहीं सकता आज समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या कहूं? हैरान हूं, स्तब्ध हूं, शर्मसार भी। इतिहासकार इरफान हबीब का कहना है, आम आदमी पार्टी ने आखिरकार दो गैर राजनीतिक धन्नासेठों को चुन लिया है। ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां ऐसा करती रही हैं। इस हिसाब से आप अलग नहीं है, उसने पहले से ही प्रचलित और उपलब्ध ऐसी ही परंपरा का अनुकरण किया है।
आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे कुमार विश्वास भी कई दिनों से राज्यसभा सीट पर दावेदारी जताते रहे हैं। पार्टी के आज के फैसले पर उन्होंने तंजभरे अंदाज में असंतोष जताया है और राष्ट्रीय संयोजक पर निशाना साधा है, अरविंद ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा था कि सरजी आपको मारेंगे, लेकिन शहीद नहीं होने देंगे। मैं उनको बधाई देता हूं कि मैं अपनी शहादत स्वीकार करता हूं। विश्वास के इस बयान और इससे जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है।
आज के घटनाक्रम के बाद कुमार विश्वास के समर्थकों और अन्य लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है। अभय दुबे का ट्वीट है, कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल में सिर्फ यह फर्क है कि पहले को लोग सुनने आते हैं, दूसरे को सुनाने। गपिस्तानरेडियो पर टिप्पणी है, कुमार विश्वास का राज्यसभा में जाना दिलचस्प होता। कई सारे वकीलों के बीच किसी कवि की मौजूदगी वहां एक अच्छा बदलाव साबित होती।
सोशल मीडिया में इस पूरे मामले पर आई कुछ और टिप्पणियां -
राजेश प्रियदर्शी- अरविंद केजरीवाल किस पर 'विश्वासÓ करते हैं, ये 'गुप्तÓ ही नहीं, डबल गुप्त बात है, आज पता चला।
शिव मिश्रा- डॉ. कुमार विश्वास के लिए अरविंद केजरीवाल के ईमानदार और बेईमान होने बीच में केवल उनके राज्यसभा नॉमिनेशन का अंतर है।
रोहित सरदाना- गुप्ताजी ने 35 दिन में केजरीवाल का जितना 'विश्वासÓ अर्जित कर लिया, कुमार विश्वास पांच साल में भी ना कर पाए?
आफताब- कुमार विश्वास पार्टी नहीं छोड़ेंगे, वे शत्रुघ्न सिन्हा की तरह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
अनुराग मुस्कान- बड़ा सवाल तो अब ये भी है कि कुमार विश्वास और आशुतोष अगर राज्यसभा नहीं जाएंगे तो फिर अब जाएंगे कहां?
पार्थसारथी शर्मा- कोई दीवाना नहीं समझता, सब पागल ही समझते हैं कुमार विश्वास को!
विक्रम सिंह- कुछ लोग तो यही कहकर मजे ले रहे हैं कि कुमार विश्वास जवानी में ही आम आदमी पार्टी के अडवानी बन गए...। (सत्याग्रह)




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