सोशल मीडिया

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजे या न बजे, लेकिन अब मूवी टिकट को आधार से लिंक करना जरूरी होगा!

Posted Date : 10-Jan-2018



सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने संबधी 2016 के अपने फैसले को बदल दिया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 को देश के सभी सिनेमाघरों को फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और वहां मौजूद सभी लोगों के खड़े होने को अनिवार्य बना दिया था। सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने इस फैसले का स्वागत किया है। फेसबुक परज्ञानेंद्र मिश्रा की पोस्ट है, सिनेमाहॉल में राष्ट्रगान बजाना वैसा ही है जैसे किसी आपत्तिजनक स्थान पर झंडा फहराना... इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है।
इस फैसले के चलते आज सोशल मीडिया पर नागरिकों में देशभक्ति जगाने के तौर-तरीकों पर भी बहस चल रही है। ट्विटर हैंडल विसा पर सवाल उठाया गया है, इतने वर्षों तक सिनेमाघरों में राष्ट्रगान नहीं बजा तो क्या इस दौरान लोग राष्ट्रभक्त नहीं थे? वहीं इस फैसले पर एक यूजर ने चुटकी ली है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फिल्म दिखाने के पहले राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता नहीं है। अब यह देखने वाली बात होगी कि कौन से सिनेमाघर का मालिक अपने को ज्यादा देशभक्त साबित करता है!
सोशल मीडिया में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर आई कुछ और टिप्पणियां-
सुखदीप सिंह- सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है...लेकिन इस अतिराष्ट्रवाद वाले दौर में कितने सिनेमाहॉल होंगे जो राष्ट्रगान बजाना बंद करके राष्ट्रद्रोही कहलाने का जोखिम मोल लेंगे।
बीम्यूज्ड- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि सिनेमाघरों में फिल्म दिखाने के पहले राष्ट्रगान बजाने की जरूरत नहीं है, हां लेकिन अपनी मूवी टिकट के साथ आधार लिंक करना अनिवार्य है।
पन्स्टर- सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब भक्त यहां फिल्में देखना छोड़ देंगे।
साध्वी खोसला- ...अब फर्जी देशभक्तों के लिए सुप्रीम कोर्ट भी देशद्रोही हो जाएगा।
नाओमी दत्ता- आपको सिनेमाघरों में जबर्दस्ती के महंगे पॉपकॉर्न खाने के लिए ही मजबूर किया जाना चाहिए, देशभक्ति जगाने के लिए नहीं। (सत्याग्रह)




Related Post

Comments