राजनीति

मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा-हामिद अंसारी




नई दिल्ली, 11 अगस्त । निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 'स्वीकार्यता के माहौलÓ को खतरे में बताते हुए कहा है कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है। उपराष्ट्रपति के तौर पर 80 साल के अंसारी का दूसरा कार्यकाल गुरुवार को पूरा हो गया। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब असहनशीलता और कथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी की घटनाएं सामने आई हैं।
अंसारी ने कहा कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों के सामने उठाया है। उन्होंने इसे 'परेशान करने वाला विचारÓ करार दिया कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राज्यसभा टीवी पर जाने माने पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में जब अंसारी से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है, इस पर उपराष्ट्रपति ने 'हांÓ कहकर जवाब दिया।
सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, यूं तो हमेशा एक स्पष्टीकरण होता है और एक तर्क होता है। अब यह तय करने का मामला है कि आप स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि नहीं और आप तर्क स्वीकार करते हैं कि नहीं।
इस इंटरव्यू में अंसारी ने भीड़ की ओर से लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, घर वापसी और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना, सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है और इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक तरह की शंका है और जिस तरह के बयान उन लोगों के खिलाफ दिए जा रहे हैं, उससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इस पर अंसारी ने कहा- हां, यह आकलन सही है, जो मैं देश के अलग-अलग हलकों से सुनता हूं। मैंने बेंगलुरु में यही बात सुनी। मैंने देश के अन्य हिस्सों में भी यह बात सुनी। मैं इस बारे में उत्तर भारत में ज्यादा सुनता हूं। बेचैनी का अहसास है और असुरक्षा की भावना घर कर रही है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मुस्लिमों को ऐसा लगने लगा है कि वे अवांछित हैं, इस पर अंसारी ने कहा, मैं इतनी दूर नहीं जाऊंगा, असुरक्षा की भावना है।
तीन तलाक के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह एक सामाजिक विचलन है, कोई धार्मिक जरूरत नहीं। धार्मिक जरूरत बिल्कुल स्पष्ट है, इस बारे में कोई दो राय नहीं है लेकिन पितृसत्ता, सामाजिक रीति-रिवाज इसमें घुसकर हालात को ऐसा बना चुके हैं जो अत्यंत अवांछित है। उन्होंने कहा कि अदालतों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे।
कश्मीर मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह राजनीतिक समस्या है और इसका राजनीतिक समाधान ही होना चाहिए।
हामिद अंसारी ने राज्य सभा में अपने विदाई भाषण में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की बात दोहराई है।
राज्य सभा में सभी का धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, मैं आज पूर्व राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन के वही शब्द दोहराना चाहता हूँ जो मैंने 2012 में कहे थे। एक लोकतंत्र की पहचान इस बात से होती है कि वो अपने अल्पसंख्यकों को कितनी सुरक्षा दे सकती है। साथ ही किसी लोकतंत्र में अगर विपक्ष को सरकारी नीतियों की समीक्षा या आलोचना करने का अधिकार नहीं मिलता तब वो तानाशाही में तब्दील हो जाती है। (भाषा)




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