कारोबार

Posted Date : 02-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 2 जनवरी । देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने मकान खरीदने वालों तथा कर्ज ले रखे ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ने मार्च के अंत तक जहां कर्ज पर प्रसंस्करण शुल्क छूट की मियाद मार्च अंत तक बढ़ा दी है। साथ ही आधार दर में 0.30 प्रतिशत की कटौती कर 8.65 प्रतिशत कर दिया है। नई दरें आज से प्रभावी हो गई हैं।
    इससे बैंक के करीब उन 80 लाख ग्राहकों को लाभ होगा जो आधार दर से जुड़े हैं। अत्यधिक नकदी के साथ एसबीआई ने वाहन तथा मकान के लिये प्रसंस्करण शुल्क में छूट की घोषणा की थी। औद्योगिक कर्ज में वृद्धि नहीं होने से वास्तव में पिछले वित्त वर्ष में खासकर नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद सभी बैंकों के पास पर्याप्त नकदी है। पिछले दो साल में पहली बार कंपनियों द्वारा लिये जाने वाले कर्ज में नवंबर में वृद्धि हुई। हालांकि यह वृद्धि महज एक प्रतिशत थी।
    एसबीआई ने एक बयान में कहा, हमने नए ग्राहकों के लिये आवासीय ऋण पर कर्ज प्रसंस्करण शुल्क में छूट की अवधि 31 मार्च, 2018 तक बढ़ाने का फैसला किया। खुदरा और डिजिटल बैंकिंग के प्रबंध निदेशक पी के गुप्ता ने कांफ्रेन्स कॉल में कहा कि रीयल एस्टेट कानून रेरा के क्रियान्वयन के बाद जमीन-जायदाद के क्षेत्र में स्थिरता लौटने के साथ आने वाले समय में आवासीय ऋण की मांग बढ़ेगी।
    बैंक ने मौजूदा ग्राहकों के लिये आधार दर तथा प्रधान उधारी दर में भी संशोधन किया है। इसके तहत आधार दर 8.95 प्रतिशत से घटाकर 8.65 प्रतिशत तथा प्रधान उधारी दर बीपीएलआर 13.70 प्रतिशत से कम कर 13.40 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि बैंक ने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर एमसीएलआर में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक की एक साल के कर्ज के लिये एमसीएलआर 7.95 प्रतिशत है।
    गुप्ता ने कांफ्रेन्स कॉल में कहा, हमने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ब्याज दर की समीक्षा की और जमा पर ब्याज दरों के आधार पर हमने आधार दर 0.30 प्रतिशत कम कर अब 8.65 प्रतिशत कर दिया है। बैंक का एक साल के लिये एमसीएलआर 7.95 प्रतिशत है। करीब 80 लाख ग्राहक ब्याज दर की पुरानी व्यवस्था पर है और उन्होंने एमसीएलआर को नहीं अपनाया।
    इन ग्राहकों को इस कटौती का लाभ होगा। बैंक मासिक आधार पर एमसीएलआर की समीक्षा करता है जबकि आधार दर की समीक्षा तिमाही आधार पर होती है।(आज तक)

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Posted Date : 02-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 2 जनवरी। दूरसंचार विभाग  टाटा टेलीसर्विसेज, टेलीनॉर और रिलायंस जियो सहित पांच दूरसंचार कंपनियों को नोटिस जारी करेगा। इन कंपनियों से विभाग को 2,578 करोड़ रुपये की वसूली करनी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इन कंपनियों द्वारा अपनी आय को कम कर दिखाने का खुलासा किया था। 
    एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, सीएजी ने इस महीने अपनी रिपोर्ट में इन कंपनियों द्वारा अपनी आमदनी को कम कर दिखाने का खुलासा किया है। इसी के मद्देनजर दूरसंचार विभाग इन कंपनियों से 2,578 करोड़ रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी करेगा। सीएजी की 19 दिसंबर को संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार टाटा टेलीसर्विसेज, टेलीनॉर, वीडियोकॉन टेलीकाम, क्याडरेंट (वीडियोकॉन समूह की कंपनी) और रिलायंस जियो ने अपनी आय को 14,800 करोड़ रुपये कम कर दिखाया है जिससे विभाग को 2,578 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
    सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को इन कंपनियों ने लाइसेंस शुल्क में 1,015.17 करोड़ रुपये की कम राशि अदा की। इसी तरह स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क के रूप में 511.53 करोड़ रुपये का कम भुगतान किया गया। इसके अलावा 1,052 करोड़ रुपये भुगतान में विलंब का ब्याज है।
    सरकार को टाटा टेलीसर्विसेज से 1,893.6 करोड़, टेलीनॉर से 603.75 करोड़, वीडियोकॉन से 48.08 करोड़, चडरेंट से 26.62 करोड़ तथा जियो से 6.78 करोड़ वसूल करने हैं। सूत्र ने कहा कि इन कंपनियों को जनवरी में नोटिस भेजे जा सकते हैं। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 01-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 1 जनवरी। नये साल के पहले दिन से टाटा मोटर्स की कारें आपको 25 हजार रुपये तक महंगी पड़ेंगी। कंपनी ने 11 दिसंबर को ही कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। कंपनी ने कहा था कि वह पैसेंजर व्हीकल की कीमतों में 25 हजार रुपये तक का इजाफा करेगी। ये नई कीमतें 1 जनवरी से लागू हो गई हैं।
    टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल कारों की अपनी पूरी रेंज की कीमतें 25 हजार रुपये तक बढ़ाएगी। इसकी शुरुआत जनवरी से ही होगी। कारों की कीमतें बढऩे के लिए इनपुट कॉस्ट बढऩे को जिम्मेदार बताया गया है।
    कंपनी की कॉम्पैक्ट एसयूवी, नेक्सॉन की शुरुआती कीमतें भी बदल जाएंगी। ये कारें लेवल नेक्स डिजाइन, परफॉर्मेंस और टेक्नोलॉजी फीचर के साथ आती हैं। इसके साथ ही इनकी कीमतों में भी आज से बदलाव आ जाएगा।
    टाटा मोटर्स की तरह ही मारुति और ह्युंडई भी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी का मन बना चुकी है। साल 2017 के आखिरी महीने में इन कंपनियों ने इस तरफ संकेत दिए थे कि उनकी कारों की कीमतें 1 लाख रुपये तक बढ़ जाएंगी।
    टाटा मोटर्स और मारुति के अलावा होंडा कार्स की भी अपनी कारों की कीमतें बढ़ाने वाली हैं। कार की कीमतें बढऩे के लिए इनपुट कॉस्ट में इजाफे को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है।
    31 दिसंबर तक चलने वाले डिस्काउंट के बाद आपको कारों के लिए नये साल में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। इन सभी कंपनियों की तरफ से बढ़ाई गई कीमतें जनवरी में ही लागू होंगी। (आज तक)

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Posted Date : 01-Jan-2018
  • मेघा मांडवीय/बैजू कालेश
    मुंबई, 1 जनवरी। बजाज ग्रुप के प्रमोटरों ने उत्तराधिकार योजना के तहत अपनी संपत्ति युवा पीढ़ी को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए वे लोग ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की आपस में खरीद-फरोख्त करके अपनी ओनरशिप को दुरुस्त कर रहे हैं। पिछले हफ्ते मधुर बजाज और उनकी पत्नी कुमुद, नीरव बजाज, उनके बेटे नीरज बजाज; बजाज इलेक्ट्रिकल्स के चेयरमैन शेखर बजाज और उनके बेटे अनंत बजाज के बीच शेयर स्वापिंग यानी अदला-बदली हुई थी। आनेवाले दिनों में परिवार के लोगों के बीच इस तरह की शेयर स्वापिंग और भी हो सकती हैं।
    फैमिली वेल्थ के ट्रेजरर का काम करने वाले नीरज बजाज चारों प्रमोटरों में सबसे छोटे हैं। उन्होंने कहा, यह परिवार के भीतर छोटा सा फेरबदल है। परिवार के बाहर एक भी शेयर नहीं बेचा गया है और न ही परिवार से बाहर का शेयर खरीदा गया है। आगे ऐसे कुछ और ट्रांजैक्शंस हो सकते हैं। इस पर काम चल रहा है। बजाज ग्रुप का इतिहास 90 साल पुराना है, जो इसके संस्थापक जमनालाल बजाज से शुरू होता है। ग्रुप के अब चार प्रमोटर-परिवार के मुखिया राहुल बजाज, शेखर बजाज, मधुर बजाज और नीरज बजाज हैं। उत्तराधिकार योजना के तहत संपत्तियों का हस्तांतरण उनके बच्चों को होगा। 
    नीरज बजाज कहते हैं, परिवार को उत्तराधिकार के अलावा ग्रुप और उसकी कंपनियों की फ्यूचर प्लानिंग के बारे में सोचते रहना होगा। यह कोशिश भी होगी कि संयुक्त परिवार यूं ही हंसी खुशी चलता रहे जिसमें चारों बजाज भाइयों और उनके बच्चों के परिवार शामिल हैं। हम चाहते हैं कि बजाज ग्रुप लंबे समय तक अपने सफर पर आगे बढ़ता रहे, इसलिए हम जरूरी कदम उठाते रहते हैं। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, कुछ एंटिटी ने प्रमोटर ग्रुप की दूसरी एंटिटी को बजाज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट के औसतन 2,993 रुपये की दर से 1,369.55 करोड़ रुपये से ज्यादा के 45 लाख से ज्यादा शेयर बेचे हैं। 
    ऐसे ही सौदों में बजाज ऑटो, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और बजाज फिनसर्व के 408.20 करोड़, 103.55 करोड़ और 597.69 करोड़ रुपये के शेयरों का लेनदेन हुआ है। इस तरह कुल 2,479 करोड़ रुपये के सौदे हुए हैं। जमनालाल बजाज के पांच पोतों- राहुल, शिशिर, शेखर, मधुर और नीरज ने टू-वीलर, इंश्योरेंस, शुगर, स्टील और हाउसहोल्ड इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज में इंट्रेस्ट वाला कारोबार खड़ा किया था। हालांकि शिशिर बजाज लगभग एक दशक पहले बजाज हिंदुस्तान और बजाज कन्ज्यूमर केयर लिमिटेड का मालिकाना हक लेकर ग्रुप से अलग हो गए थे। राहुल और शिशिर सगे भाई हैं, जबकि मधुर, शेखर और नीरज चचेरे भाई हैं। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 01-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 1 जनवरी। इकॉनॉमी पर इंडिया इंक ने नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ की है, लेकिन एक्सपोर्ट और ऐग्रिकल्चर सेक्टर पर दबाव कम करने में सुस्ती से वह खुश नहीं है। नववर्ष की पूर्वसंध्या पर जारी देशभर में सीईओ के बीच एक सर्वे की रिपोर्ट से यह बात पता चली है। अधिकतर पर्टिसिपेंट्स ने सरकार को अब तक के परफॉर्मेंस पर 10 में 7 नंबर यानी कुल 70 फीसदी अंक दिए। इससे पता चलता है कि मुश्किलों के बावजूद पॉलिटिकल लीडरशिप पर इंडिया इंक का भरोसा बना हुआ है।
    सर्वे में शामिल होनेवाले ज्यादातर सीईओज ने कहा कि उन्हें अगले साल इकनॉमिक ग्रोथ में बहुत अधिक बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी मानना है कि बैड लोन की समस्या भी बहुत जल्द नहीं सुलझने जा रही है। सीईओज पोल 10 दिनों तक चला, जिसमें रिपोर्टर ने आईटी से लेकर मेटल और हेवी इंजिनियरिंग सेक्टर के टॉप 51 सीईओज से बात की। 
    करीब 55 फीसदी प्रतिभागियों का मानना है कि 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 6.5-7 फीसदी रह सकती है। इसका मतलब यह है कि 2015-17 के बीच पस्त पड़ी इकॉनमी की रिकवरी में अधिक समय लगने की उम्मीद की जा रही है। 49 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वे नोटबंदी और जीएसटी संबंधी दिक्कतों से उबर गए हैं, लेकिन 43 फीसदी ने बताया कि वे अभी भी रिकवरी फेज में हैं। 67 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि गुजरात चुनाव के नतीजों की वजह से अब केंद्र सरकार लोक-लुभावन नीतियों का ऐलान कर सकती है। गुजरात चुनाव में बीजेपी की सीटें कम हुईं, लेकिन वह सरकार बचाने में सफल रही। 
    33 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वे नए साल में कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना बना रहे हैं, जबकि 92 फीसदी ने ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर बेहतर उम्मीद जाहिर की, 73 फीसदी ने कहा कि वे नए साल में अधिक लोगों को नौकरी पर रखेंगे। इससे पता चलता है कि पिछले साल के स्लोडाउन का इन कंपनियों के हायरिंग प्लान पर असर नहीं पड़ा है। 
    2015-17 का समय भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए अच्छा नहीं रहा। इस दौरान कमोडिटीज के दाम गिरे, बैड लोन संकट पैदा हुआ और बैंकों को ग्रोथ की अनदेखी करके प्रोविजनिंग बढ़ानी पड़ी। नवंबर 2016 में नोटबंदी का ऐलान हुआ और जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किया गया। इससे इंडिया इंक पर बुरा असर पड़ा। बड़ी कंपनियां इस मुश्किल से जहां जल्द उबर गईं, वहीं असंगठित और कृषि क्षेत्र को काफी परेशानी उठानी पड़ी। 
    57 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि सरकार ने एक्सपोर्ट ग्रोथ को बढ़ाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड बढ़ाने की सरकार की कोशिशों से भी इंडिया इंक खुश नहीं है। 51 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि इसके लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। वर्षा के असमान वितरण और फसलों की कम कीमत से परेशान किसानों की समस्या असरदार ढंग से नहीं सुलझाई गई। 78 फीसदी ने कहा कि सरकार सभी जरूरी उपाय कर रही है, जबकि 14 फीसदी ने कहा कि स्थितियों को ठीक से हैंडल नहीं किया गया।  (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 31-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 31 दिसंबर । वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन को लेकर लोगों में बढ़ती उत्सुकता को देखते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चेतावनी जारी की। निवेशकों को अलर्ट करते हुए सरकार ने कहा कि यह पोंजी स्कीम की तरह है, जिनमें भोले-भाले निवेशक धोखाधड़ी के शिकार होते हैं। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि बिटकॉइन वैध नहीं है। इस वर्चुअल करेंसी में निवेश पर पोंजी स्कीमों जैसा ही जोखिम होता है। निवेशकों खासकर खुदरा ग्राहकों को अचानक भारी नुकसान हो सकता है और उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई पल भर में डूब सकती है।
    मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि लोगों को इस तरह की स्कीमों के जाल में फंसने से बचना चाहिए। बिटकॉइन और इस तरह की अन्य क्रिप्टोकरंसी की कीमतें पूरी तरह अटकलों पर आधारित होती हैं, इसलिए इनकी कीमतों में भी बेहद तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। इस वर्चुअल करंसी को डिजिटल रूप में रखा जाता है। ऐसे में हैक होने, पासवर्ड खोने और वायरस के हमले आदि की स्थिति में पूरी रकम डूब सकती है। 
    लोकसभा में शुक्रवार को सरकार ने बताया कि अन्य देशों में बिटकॉइन से जुड़े कानून और स्थिति की स्टडी  के लिए आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी, जिसने इसे रेगुलेट करने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाए जाने का सुझाव दिया था। वित्त राज्यमंत्री पी. राधाकृष्णन ने लिखित जवाब में बताया कि कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार विचार कर रही है। जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। (पीटीआई)

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Posted Date : 31-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 31 दिसंबर। ई-कॉमर्स वेबसाइटों के ज्यादातर सेलर्स उपभोक्ता मामलों के विभाग के उस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसमें उन्हें अपने पोर्टल्स पर उत्पादों की एमआरपी का खुलासा करने को कहा गया है। एक सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इस आदेश का पालन करने के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइटों को छह महीने का वक्त दिया था लेकिन अभी भी ज्यादातर सेलर्स अपने सभी उत्पादों की एमआरपी नहीं बता रहे हैं। लोकल सर्किल्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है।
    लोकल सर्किल्स ने एक बयान में कहा, यूजर्स से मिले फीडबैक से पता चलता है कि ई-कॉमर्स साइटों पर केवल 10 से 12 फीसदी उत्पादों की ही एमआरपी दिखती है और वे भी खुद ई-कॉमर्स साइटों के ही उत्पाद होते हैं।
    इस साल की शुरुआत में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने पैकेज्ड कमोडिटी नियम 2011 में संशोधन किया था और एक अधिसूचना जारी कर सभी ई-कॉमर्स साइट्स के सेलरों से 1 जनवरी के बाद से अपने सभी उत्पादों के वास्तविक एमआरपी को बताने को कहा था। (आईएएनएस)

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Posted Date : 31-Dec-2017
  • अतुल ठाकुर
    नई दिल्ली, 31 दिसंबर। देश के ऑर्गनाइज्ड सेक्टर (संगठित क्षेत्र) ने वित्त वर्ष 2016-17 में हर दिन 1,100 से कुछ ज्यादा नौकरियां दीं। इस तरह पूरे साल में कुल 4.16 लाख जॉब्स के नए अवसर संगठित क्षेत्र ने प्रदान किए। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2015-16 से 2फीसदी ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि 2016-17 की आखिरी तिमाही में पिछली तीन तिमाहियों के मुकाबले बहुत ज्यादा नई नौकरियां दी गईं जब अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर था। रोजगार परिदृश्य पर श्रम मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी तिमाही रिपोर्ट में ये आंकड़े पेश किए गए। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में 45फीसदी नई नौकरियां जनवरी से मार्च 2017 के बीच आईं जबकि नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर को हुआ था।
    इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मिलाकर विकास की रफ्तार अब भी सुस्त है। साल 1990 से भारत के वर्कफोर्स में हर साल 8 लाख वर्कर्स जुड़ते रहे हैं। श्रम मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि संगठित क्षेत्र 50 फीसदी नए वर्करों को ही नौकरियां दे पाता है। हालांकि, सर्वे में देश में रोजगार के संपूर्ण परिदृश्य को नहीं दर्शाता है, बल्कि इसके दायरे में 2013-14 की आर्थिक जनगणना के आधार पर निर्धारित संगठित क्षेत्र ही है। गौरतलब है कि 10 या 10 से ज्यादा एंप्लॉयीज वाले संस्थानों को ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर का दर्जा दिया गया है। साल 2013-14 की आर्थिक जनगणना के मुताबिक, कुल 5 करोड़ 85 लाख संस्थानों में सिर्फ 1.4फीसदी ही संगठित क्षेत्र का हिस्सा हैं। 
    बहरहाल, श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 2016-17 में पैदा नई नौकरियों के कुल अवसरों में 47.4फीसदी यानी करीब आधे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से आए थे। इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य का 32फीसदी योगदान रहा है। क्षेत्र के आधार पर आए बदलावों के विश्लेषण से पता चलता है कि हेल्थ सेक्टर में रोजगार के अवसरों का अच्छा-खासा विस्तार हुआ है और इस सेक्टर में अप्रैल 2016 के मुकाबले अप्रैल 2017 में 5.5 फीसदी ज्यादा लोगों को नौकरियां मिलीं। स्वास्थ्य के बाद व्यापार (ट्रेड), परिवहन (ट्रांसपोर्ट) और आईटी/बीपीओ का नंबर आता है। इन तीनों सेक्टरों में 3-3 प्रतिशत की दर से नौकरियों का विस्तार हुआ। कुल मिलाकर अप्रैल 2017 में इन चार सेक्टरों ने मिलकर 21.3 फीसदी नए रोजगार दिए। इसके उलट कंस्ट्रक्शन और रेस्ट्रॉन्ट इंडस्ट्री में क्रमश: 6.3 फीसदी और 0.5फीसदी की गिरावट देखी गई। 
    रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में नए रोजगार पानेवाले 87फीसदी लोगों को किसी-न-किसी एंप्लॉयर ने नौकरी पर रखा जबकि सिर्फ 12.7फीसदी लोगों ने ही स्वरोजगार की शुरुआत की। भारत के जॉब मार्केट की खासियत यह है कि यहां भारी तादाद में लोगों को आंशिक रोजगार मिले हैं जिन्हें बेरोजगार नहीं माना जाता। देश की बड़ी आबादी जिनके पास कोई रेग्युलर जॉब नहीं है और न ही उन्हें कोई अनएंप्लॉयमेंट बेनेफिट मिल रहा है, उन्हें सेल्फ-एंप्लॉयड माना जाता है जबकि हकीकत में ये मुश्किल से ही जीवनयापन कर पा रहे हैं। इस संदर्भ में स्वरोजगार की जगह पर किसी-न-किसी एंप्लॉयर से मिली नौकरियां सकारात्मक संदेश देती हैं। इस रिपोर्ट के लिंग आधारित विश्लेषण से पता चलता है कि पुरुषों ने 60.8फीसदी नई नौकरियों पर कब्जा जमाया जबकि महिलाएं रोजगार के सिर्फ 39.2फीसदी नए मौकों को ही अपने नाम कर सकीं। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 30-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 30 दिसंबर । सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की तर्ज पर अब भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) भी अपने कर्मचारियों को किसी करीबी की मौत पर शोक मनाने की छुट्टियां देगा। एसबीआई के अनुसार अधिकतम सात दिनों के लिए मिलने वाली यह छुट्टी पेड लीव होगी यानी इस दौरान कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं होगी। भारत में यह पहली बार होगा जब कोई सरकारी संस्थान शोक के मौके पर छुट्टियां देगा।
    एसबीआई के प्रबंध निदेशक प्रशांत कुमार ने इस बारे में बताया कि उनका बैंक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लागू छुट्टी के नियमों का अनुकरण कर रहा है। उनके अनुसार ऐसा करने से उसके कर्मचारी शोक के समय अपने परिवार के साथ समय बिता पाएंगे। उन्होंने आगे बताया, यह छुट्टी बैंक के स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के कर्मचारियों को मिलेगी। लेकिन कोई कर्मचारी इसका हकदार तभी होगा जब दिवंगत शख्स उसका पति या पत्नी, मां-बाप, सास-ससुर या उसकी संतान हो।
    भारत में अभी तक ज्यादातर संस्थानों में आकस्मिक, मेडिकल, अर्जित, मातृत्व या पितृत्व जैसे मकसदों के लिए छुट्टियां दी जाती हैं। केवल टीसीएस और सिप्ला जैसी कंपनियों में ही शोक के मौके पर छुट्टियां दी जाती हैं। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 29-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 29 दिसंबर । कर्ज की समस्या से जूझ रही रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ने गुरुवार को ऐलान किया है कि वह अपनी विभिन्न संपत्तियों को रिलायंस जियो इन्फोकॉम को बेचेगी। कंपनी के अनुसार इस करार के तहत वायरलेस स्पेक्ट्रम, टावर, फाइबर और मीडिया कन्वर्जेंस नोड (एमसीएन) जैसी परिसंपत्तियां बेची जाएंगी। आरकॉम ने यह भी बताया है कि इस सौदे से मिली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा।
    इस सौदे के लिए रिलायंस जियो का चयन पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के तहत किया गया। आरकॉम के अनुसार करार के तहत उसका 4जी स्पेक्ट्रम और उसके 43 हजार टॉवर रिलायंस जियो के पास चले जाएंगे। टॉवरों के मामले में आरकॉम अभी देश की तीसरी बड़ी दूरसंचार कंपनी है। इसलिए जानकारों का मानना है कि इस सौदे से रिलायंस जियो की सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। 
    आरकॉम के मुताबिक संपत्ति बेचने के लिए वह अपने कर्जदाताओं और उनके सलाहकार एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के साथ मिलकर काम कर रही है। वहीं नीलामी की प्रकिया संपन्न करने के लिए एक उच्चस्तरीय मूल्यांकन समिति बनाई गई थी। कंपनी ने बताया है कि लेन-देन की प्रक्रिया जनवरी से मार्च 2018 के बीच पूरी हो जाएगी। इसके तहत रिलायंस जियो कंपनी को नगद राशि देने के साथ-साथ दूरसंचार विभाग को स्पेक्ट्रम के लिए किश्तों में भुगतान करेगी। आरकॉम अनिल अंबानी की कंपनी है जबकि रिलायंस जियो पर बड़े भाई मुकेश अंबानी का नियंत्रण है। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 28-Dec-2017
  • भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा एयर कॉरिडोर खुला। काबुल मुंबई एयर कॉरिडोर से भारत को ताजा मेवे मिलेंगे और अफगानिस्तान को पैसा।
    काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट में भारत के लिए दूसरा एयर कॉरिडोर बुधवार को खोला गया। कॉरिडोर काबुल को सीधा भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में जोड़ेगा। दिल्ली और काबुल के बीच भी ऐसा एयर कॉरिडोर मौजूद है।
    अफगानिस्तान चैम्बर ऑफ कॉमर्स के उप प्रमुख खान जान अलाकोजाय के मुताबिक नए कॉरिडोर से अफगानिस्तान के किसानों और कारोबारियों को बड़ी मदद मिलेगी। मुंबई को उन्होंने दोगुनी कीमत देने वाला हाई वैल्यू मार्केट बताया। नए एयर कॉरिडोर से 40 टन लोड के साथ पहली उड़ान मुंबई के लिए रवाना होगी। विमान में ताजा फल, सूखे मेवे और औषधीय पौधे लोड किए गए हैं।
    अफगानिस्तान और भारत के पहला कॉरिडोर (काबुल-दिल्ली) जून 2017 में शुरू हुआ। अब तक इस कॉरिडोर की मदद से अफगानिस्तान 1,552 टन सामान भारत भेज चुका है। अफगानिस्तान ज्यादातर फल, सूखे मेवे, कालीन, चमड़ा और औषधीय पौधे भारत को निर्यात करता है। काबुल दिल्ली एयर कॉरिडोर पर अब तक 52 फ्लाइटें उड़ान भर चुकी हैं।
    अफगान कारोबारियों को उम्मीद है कि नए कॉरिडोर के साथ ही काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्टोरेज की सुविधा भी बेहतर की जाएगी। एक व्यापारी ने आरोप लगाया कि खराब मैनेजमेंट के चलते काबुल एयरपोर्ट पर कई फल सड़ जाते हैं।
    अफगानिस्तान और भारत के बीच मौजूद कारोबार 60 करोड़ डॉलर का है। दोनों देशों को उम्मीद है कि नए कॉरिडोर के खुलने से आपसी कारोबार एक अरब डॉलर के पार चला जाएगा।  (डीपीए)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर । एक जनवरी से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारकों के लिए नए नियम लागू हो जाएंगे। जिन लोगों के पास एसबीआई में मर्ज हो चुके बैंकों की चेकबुक हैं, वे इन्हें बदलवा लें। इन बैंकों की पुरानी चेक बुक और आईएफएससी कोड 31 दिसंबर के बाद मान्य नहीं होंगे।
    पहली जनवरी से एसबीआई के एसोसिएट बैंकों के पुराने चेक अमान्य हो जाएंगे। यानी वे बैंक जिनका एसबीआई में मर्जर हो चुका है उसकी चेकबुक अब किसी काम की नहीं रहेगी। एसबीआई के आदेश के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ रायपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और भारतीय महिला बैंक के खाताधारकों को नई चेक बुक के लिए आवेदन करना होगा 
    नए चेकबुक के लिए आप एसबीआई की शाखा, एसबीआई एटीएम या मोबाइल ऐप पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एसबीआई ने बड़े शहरों की कुछ ब्रांचों के नाम, ब्रांच कोड और आइएफएससी कोड भी बदल दिए हैं। इसलिए कहीं भी आईएफएससी कोर्ड की जानकारी देने से पहले एक बार अपने बैंक का आईएफएससी कोर्ड फिर से जांच लें। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर। अमरीकी डॉलर के मामले में भारत 2018 तक ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। ब्रिटेन स्थित आर्थिक मामलों की सलाहकारी संस्था सेंटर फॉर इकॉनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट 2018 वल्र्ड इकॉनॉमिक लीग टेबल में यह बात कही है। इसके कार्यकारी उपनिदेशक डगलस मैकविलियम ने कहा, अस्थायी झटकों के बावजूद भारत फ्रांस और ब्रिटेन का साथ पकड़ लेगा और 2018 में पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए उनसे आगे निकल जाएगा। डगलस मैकविलियम ने कहा कि नोटबंदी और वस्तु व सेवा कर के चलते भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार घटी है।
    रिपोर्ट के मुताबिक सस्ती ऊर्जा और तकनीक की कीमतों से 2018 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा। वहीं, अगले 15 साल में दुनिया की शीर्ष 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एशियाई देशों का बोलबाला होगा।
    यही नहीं, 2032 तक चीन द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमरीका को पीछे छोडऩे की संभावना है। हालांकि, रूस 2032 तक इस साल के 11 वें स्थान से खिसककर 17वें स्थान पर पहुंच जाएगा। इसकी वजह तेल की कीमतों में गिरावट है, जिस पर वह ज्यादा निर्भर है। वहीं, पिछले दो वर्षों से फ्रांस से पिछड़ रहा ब्रिटेन 2020 तक उससे आगे निकल जाएगा, क्योंकि यूरोपीय संघ से उसके अलग होने का अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर कम हो जाएगा। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर। रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी (एडीएजी) बैंकों और निजी कर्जदाताओं के करीब 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को इक्विटी में नहीं बदलेगी, बल्कि वह कर्ज का भुगतान नकदी में करेगी। यह घोषणा मंगलवार को कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की है। इस घोषणा के चलते आज शेयर बाजार में भारी उत्साह का माहौल देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में आरकॉम के शेयर में 41 प्रतिशत तक का उछाल आया तो वहीं आज बाजार ने अब तक के अपने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए उच्चतम स्तर को भी छू लिया।
    अनिल अंबानी ने साफ किया है कि कंपनी ने अपने स्पेक्ट्रम और टावरों को बेचने का निर्णय किया है और इस बिक्री से प्राप्त रकम के जरिये जनवरी से मार्च 2018 के बीच कर्जदारों की बड़ी राशि चुकता कर दी जाएगी। इसके बाद कंपनी पर केवल छह हजार करोड़ रुपये का बकाया रह जाएगा। इसके अलावा अनिल ने अंडर सी यानी समुद्र के भीतर बिछाई फाइबर लाइनों से फायदा कमाने के लिए अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी के साथ भी हाथ मिलाया है। माना जा रहा है कि इस समझौते का सकारात्मक असर 'रिलायंस जियोÓ की सेवाओं पर भी दिखेगा। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर। बीते दो वर्षों से स्वच्छ भारत सेस के तहत वसूल किए गए 16,401 करोड़ रुपये में से 4,001 करोड़ रुपये रकम राष्ट्रीय स्वच्छता कोष में नहीं डाले गए हैं। एक रिपोर्ट में महालेखा और नियंत्रक परीक्षक (सीएजी) के हवाले से कहा गया है कि केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने इसके इस्तेमाल के लिए तय किए गए प्रावधानों को भी नहीं माना है। इसके मुताबिक इस कोष में से 80 फीसदी रकम गांवों और बाकी रकम शहरों में स्वच्छता कार्यक्रम चलाने के लिए आवंटित की जाती है। स्वच्छ भारत सेस के तहत सरकार सेवाओं का इस्तेमाल करने पर लोगों से 0.5 फीसदी सेस वसूल करती है। (टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी थी, लेक‍िन इसके बावजूद आम लोगों को बढ़ती कीमतों से राहत नहीं मिल रही है.
    दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में डीजल की कीमतें सितंबर 2014 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. वहीं, मुंबई में डीजल की कीमतें 3 अक्टूबर के बाद ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.  27 दिसंबर को मुंबई में एक लीटर डीजल 62.85 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है.
    पेट्रोल की बात करें, तो इसकी कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. मुंबई में एक लीटर पेट्रोल 77.62 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. दिल्ली में प्रति लीटर  पेट्रोल 69.72, चेन्नई 
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमते हैं.  दरअसल OPEC और रूस की तरफ से कच्चे तेल का उत्पादन कम करने की वजह से इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.
    कच्चे तेल की कीमतें पिछले 6 महीने के दौरान 42 फीसदी बढ़ चुकी हैं. फिलहाल यह 65 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा है. इसकी वजह से भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस तरह लगातार बढ़ोतरी होती रही, तो भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से रेट कट की संभावना इस बार भी धूमिल हो जाएंगी. इससे कर्ज सस्ता होने की उम्मीद कर रहे लोगों के हाथ निराशा ही लगेगी.
    फिलहाल पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे से बाहर है. ऐसे में इन्हें जीएसटी में शामिल करना एकमात्र रास्ता हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो आम आदमी को इनकी बढ़ती कीमतों से बड़ी राहत मिल सकती है.
    पेट्रोल और डीजल के जीएसटी के तहत आने से इनकी कीमतें 45 से 55 रुपये के बीच हो सकती है. क्योंक‍ि मौजूदा व्यवस्था में जीएसटी में सबसे ज्यादा टैक्स रेट 28 फीसदी है. अगर यह टैक्स रेट लगाया जाता है, तो इनकी  कीमत 55 रुपये के भीतर सिमट सकती है. (आजतक)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 26 दिसंबर। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भारतीय उड्डयन क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पहले सरकार ने छोटे-छोटे शहरों तक हवाई संपर्क बेहतर करने के लिए उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना शुरू की। वह भी बेहद कम किराए के साथ। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। भारत में ही बने विमानों को सरकार ने घरेलू हवाई मार्गों पर व्यावसायिक उड़ानों की अनुमति भी दे दी है।
    खबर के मुताबिक नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) की ओर से भारत में बने डोर्नियर-228 विमान को घरेलू हवाई मार्गों पर व्यावसायिक उड़ान की इजाजत दी गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने इस 19 सीटों वाले विमान का निर्माण किया है। इसका इस्तेमाल फिलहाल भारतीय सेनाएं कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक डीजीसीए ने इसे 'टाइप सर्टिफिकेट (यानी विमान किस श्रेणी का है) के साथ ही एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेट (यह बताने के लिए विमान व्यावासायिक उड़ान के लायक है) भी जारी कर दिया है। सूत्रों की मानें तो एचएएल अब इस विमान को किसी भी विमानन कंपनी को भी बेच सकेगी। और ये कंपनियां इसे उड़ान योजना के तहत संचालित की जाने वाली अपनी उड़ानों के लिए इस्तेमाल भी कर सकेंगी। उड्डयन मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, जो विमानन कंपनियां इस स्वदेशी विमान को खरीदने और इस्तेमाल करने में रुचि दिखाएंगी उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यही नहीं एचएएल के सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि उनकी ओर से इस विमान को श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों को बेचने की भी तैयारी की जा रही है।
    खबर के मुताबिक डोर्नियर-228 बहुउद्देश्यीय विमान है। इस हल्के परिवहन विमान को एयर टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। सीमाई और समुद्र तटीय इलाकों में निगरानी के लिए इस उपयोग हो सकता है। यात्रियों को लाने-ले जाने में भी यह काम आ सकता है। यह अधिकतम 700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। और रात में उड़ान भरने में भी सक्षम है। इसने इसी महीने कानपुर हवाई अड्डे से अपने सभी व्यावसायिक परीक्षण पास किए हैं। इसके बाद ही डीजीसीए ने व्यावसायिक उड़ानों में इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है। (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 26 दिसंबर । रेलवे में अब फ्लेक्सी फेयर खत्म होने की संभावना तो नहीं है लेकिन उसमें बदलाव पर विचार हो रहा है। फ्लेक्सी फेयर को एयरलाइंस के डाइनैमिक प्राइसिंग की तर्ज पर बनाने की कोशिश हो रही है। इससे ज्यादा पैसेंजरों को बेस फेयर पर ही यात्रा करने का लाभ मिल सकता है। इसी तरह सबसे आगे वाली या फिर विंडो सीटों के लिए कुछ अतिरिक्त चार्ज लगाया जा सकता है। वहीं साइड बर्थ का किराया कम करने रखने की भी योजना रेलवे बना रहा है।
    इसके अलावा पीक सीजन में ज्यादा किराया, जबकि ऑफ सीजन में किराया कुछ कम रखा जा सकता है। फ्लेक्सी फेयर और डाइनैमिक फेयर सिस्टम में बड़ा अंतर यह है कि रेलवे ट्रेन में पहली 10 फीसदी सीटें भरते ही किराए में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर देता है। इस तरह से बेसिक किराए का फायदा ट्रेन के सिर्फ 10 फीसदी पैसेंजरों को ही मिलता है जबकि एविएशन सेक्टर में विमान की 
    पहली 30 फीसदी सीटों पर बेसिक किराया लिया जाता है। 
    अब विचार हो रहा है कि अगर रेलवे में भी यही व्यवस्था हो और 30 फीसदी सीटें भरने के बाद ही किराए में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए तो इस तरह से लगभग 20 फीसदी और पैसेंजरों को कम किराए पर यात्रा का फायदा मिल सकता है। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 26 दिसंबर । राजस्व वसूली में कमी को देखते हुए केंद्र सरकार वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) दरों में बदलाव को अगले वित्तीय वर्ष तक टाल सकती है। 
    एक रिपोर्ट बताती है कि बजट अनुमान के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में हर महीने 91 हजार करोड़ रुपये की कर वसूली करनी है। दूसरी ओर, बीते अक्टूबर में यह आंकड़ा घटकर 83,346 करोड़ रुपये रह गया है। साथ ही, इसके आगे भी कम रहने की संभावना जाहिर की गई है। 
    आधिकारिक सूत्रों ने अखबार को बताया कि जनवरी, 2018 में जीएसटी परिषद की होने वाली बैठक में दरें कम किए जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं होगी। इससे पहले बीते नवंबर में जीएसटी परिषद ने 200 से अधिक चीजों पर कर की दर घटाने का फैसला लिया था। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • भारती एयरटेल, वोडाफोन और जियो जैसी निजी टेलीकॉम कंपनियों की तरह अब भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भी 4जी सेवा उपलब्ध कराने जा रही है। इस सेवा की शुरुआत जनवरी 2018 में केरल से होगी। इसके बाद ओड़ीसा के ग्राहकों की बारी आएगी।
    बीएसएनएल के चेयरमैन अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि कंपनी के पास इन क्षेत्रों में 4जी सेवा को शुरू करने के लिए फिलहाल पर्याप्त स्पेक्ट्रम है। लेकिन आगे उसे अतिरिक्त स्पेक्ट्रम चाहिए होगा। इसके लिए कंपनी सरकार को और इक्विटी की पेशकश कर सकती है। दिल्ली और मुंबई को छोड़कर पूरे भारत में अभी बीएसएनएल के पास करीब 10 करोड़ ग्राहक हैं।

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