राजनीति

Posted Date : 28-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 28 दिसंबर। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आज अपना 133वां स्थापना दिवस मना रही है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद ये कांग्रेस का पहला स्थापना दिवस समारोह है। इस मौके पर आज देशभर में कांग्रेस की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार सुबह कांंग्रेस अध्यक्ष राहुल ने मुख्यालय पहुंच झंडा फहराया।  
    स्थापना दिवस कार्यक्रम में राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा सच का साथ दिया है, आज के समय में बाबा साहेब अंबेडकर का दिया हुआ संविधान खतरे में है, उस संविधान पर हमला हो रहा है। ये देखना दुखद है, लेकिन हमारा कत्र्तव्य है कि हम संविधान की रक्षा करें।
    राहुल ने बीजेपी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी लगातार झूठ के साथ आगे बढ़ रही है, बीजेपी की ओर से कांग्रेस के खिलाफ हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम भले ही हार जाएं, लेकिन सच का साथ नहीं छोड़ेंगे।  (आज तक)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर। केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े के बयान पर आज संसद में अच्छा खासा बवाल हुआ। लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ जिसके बाद दोनों सदनों को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया। अनंत हेगड़े ने कहा था कि जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष और बुद्धिजीवी मानते हैं, उनकी अपनी खुद की कोई पहचान नहीं होती है, वो अपनी जड़ों से अंजान होते हैं। ब्राह्मण युवा परिषद की सभा में हेगड़े ने ये भी कहा था कि बीजेपी संविधान को बदलने के लिए सत्ता में आई है।
    अब इस पर हंगामा शुरू हो गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर किसी शख्स को संविधान पर विश्वास नहीं है तो उसे संसद सदस्य होने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस के सदस्यों ने प्रश्नकाल शुरू होते ही आसन के समीप आकर हेगड़े के बयान के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सांसद 'मंत्री को बर्खास्त करोÓ के नारे लगा रहे थे। राजद के जयप्रकाश नारायण यादव भी कांग्रेस सदस्यों के साथ नारेबाजी में शामिल थे।
    इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ कराया, वैसे ही शिवसेना के कुछ सदस्यों ने 'पाकिस्तान मुर्दाबादÓ के नारे लगाये जिनका साथ भाजपा के कुछ सदस्यों ने भी दिया। ये सदस्य कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी के साथ पाकिस्तान में दुर्व्यवहार की खबरों की पृष्ठभूमि में नारेबाजी कर रहे थे। उधर तेलंगाना से टीआरएस के सदस्य अपने राज्य में अलग उच्च न्यायालय की मांग को लेकर आसन के समीप आकर नारे लगा रहे थे।
    लोकसभा अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया और 'मेंटर इंडियाÓ अभियान से संबंधित सदस्यों के प्रश्न पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने जवाब भी दिया। इसी बीच बता दें कि सोमवार को पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव के साथ उनके परिवार की हुई मुलाकात के मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कल संसद के दोनों सदनों में बयान देंगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सुबह 11 बजे से पहले राज्यसभा में बोलेंगे और फिर 12 बजे लोक सभा में बोलेंगी। (भाषा)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • मुंबई, 27 दिसंबर । भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष हरीभाई बागड़े ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आजकल कोई भी भाजपा में शामिल होकर पद हासिल कर सकता है। हरीभाई बागड़े ने कहा, पहले पार्टी में किसी को शामिल करने या पद देते वक्त ठीक उसी तरह छानबीन की जाती थी, जिस तरह लोग अपनी लड़की के लिए दूल्हा ढूंढ़ते वक्त करते थे। उनका आगे कहना था कि कार्यकर्ता अब केवल हत्यारों और पागलों को पार्टी में शामिल करने का विरोध कर सकते हैं। (जनसत्ता)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • शिमला, 27 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश में नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सूबे के चौदहवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। शपथग्रहण समारोह में पीएम मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री, पार्टी के बड़े नेताओं समेत बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर समेत 10 मंत्रियों ने शपथ ली जिसमें से दो विधायकों ने मंत्री पद की शपथ संस्कृत में ली। 
    शपथ लेने से पहले जयराम ठाकुर ने कहा, लोगों ने हम पर विश्वास दिखाया और हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। 
    ये पहली बार था जब कोई पीएम हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के शपथग्रहण में शिरकत की। गुजरात की तरह यहां भी बीजेपी की शक्ति प्रदर्शन किया। यहां पांच साल बाद बीजेपी ने 68 में से 44 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई है। हालांकि इसके सीएम उम्मीदावर प्रेम कुमार धूमल अपनी सीट नहीं बचा पाए, जिसके बाद जयराम ठाकुर के नाम पर मुहर लगी।
    इन विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ 
    महेंद्र सिंह ठाकुर 
    महेंद्र सिंह ठाकुर मंडी की धर्मपुर विधानसा क्षेत्र से हैं। छह बार के विधायक हैं। पहले पांच चुनाव अलग-अलग सिंबल पर जीते। पहला चुनाव 1989 में आजाद उम्मीदवार के रूप में लड़ा और जीता। साल 1993 में पंडित सुख राम कांग्रेस में लाए और वह चुनाव जीत गए। साल 1998 में जब पंडित सुखराम ने हिविकां बनाई तो महेंद्र सिंह ने तीसरा चुनाव हिविकां की ओर से लड़ा और जीता। इस दौरान सरकार में मंत्री बने। साल 2003 में महेंद्र सिंह ने हिम लोकतांत्रिक मोर्चा के बैनर तले चुनाव लड़ा और जीता।  साल 2007 में भाजपा में आ गए। फिर से चुनाव लड़ा व जीता। तीन बार मंत्री रह चुके हैं।
    राजीव सैजल
    सोलन की कसौली सीट से जीते राजीव सैजल भी मंत्रीमंडल में शामिल किया है। उन्होंने इस सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। अनुसूचित जाति से आते हैं। जातीय समीकरण की वजह से भी इनके मंत्री बनने की प्रबल संभावना हैं।
     सुरेश भारद्वाज ने संस्कृत में ली शपथ 
    शिमला शहरी सीट से 65 वर्षीय सुरेश भारद्धाज बीएससी व ला ग्रेजूयेट हैं। छात्र काल में एबीवीपी से जुड़े रहे। बाद में राजनिति का रुख किया। 1982 में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे।  साल 2003 से लेकर 2006 तक फिर भाजपा की कमान संभाली।  साल  1990 में पहली बार विधायक चुने गये। उसके बाद 2007 में फिर विधायक बने।  साल 2012 में भी चुनाव जीता। राज्यसभा सासंद भी रहे हैं। इस बार भी जीते हैं। इनके स्पीकर बनाए जाने की भी चर्चा है।
    अनिल शर्मा 
    अनिल शर्मा मंडी से हैं। पंडित सुखराम के बेटे हैं। मौजूदा कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। लेकिन चुनाव से ठीक पहले, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। तीन बार विधायक और एक बार राज्यसभा सांसद भी रहे।  साल 1996 में पिता की गिरफ्तारी के बाद मंत्री छोड़ा था। पिता के साथ नई पार्टी बनाई, 2004 में पार्टी समेत कांग्रेस में गए। मौजूदा सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे। भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने दावा किया था कि उन्हें मंत्री बनाने का आश्वासन मिला है।
     गोविंद ठाकुर ने संस्कृत में शपथ ली 
    मनाली सीट से जीते गोविंद ठाकुर को भी जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।  क्योंकि यहां से कुल्लू सीट से भाजपा के कद्दावर नेता महेश्वर सिंह हार गए हैं। गोविंद ठाकुर तीन बार लगातार विधायक बने चुने गए हैं।
    रामलाल मार्कंडेय 
    लाहौल स्पीति से भाजपा के रामलाल मार्कंडेय ने कांग्रेस प्रत्याशी रवि ठाकुर को हराया। इस सीट पर दोनों पार्टियों ने पुराने चेहरों पर ही दांव खेला था। पहले लाहौल स्पिति से कांग्रेस के उम्मीदवार रवि ठाकुर विधायक थे।  साल 2012 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट के लिए करीब 21910 मतदाता थे। पिछले विधानसभा चुनाव में लाहौल स्पिति क्षेत्र से 7 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा था।
    विपिन परमार 
    हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा के उम्मीदवार विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस के प्रत्याशी जगजीवन पॉल को 10291 मतों के अंतर से हराया। उनके पिता का नाम कंचन सिंह परमार है। उन्होंने ग्रेजुएशन में बीए और एलएलबी भी किया है। सिंह एक एलआईसी एजेंट और गणपति एसोसिएट के बिजनस पार्टनर हैं। उनके ऊपर किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
    वींरेंद्र कवंर
    ऊना सदर से भाजपा अध्यक्ष सत्ती के हारे के बाद अब इसी जिले की कुटलेहड़ सीटे से जीते वींरेंद्र कवंर को भी मंत्री बनाया गया है। फार्मेसी में डिप्लोमा और लॉ करने वाले विधायक वीरेंद्र कंवर तेज तर्रार नेताओं में गिने जाते हैं। धूमल खेमे से हैं। इन्होंने तो हार के बाद धूमल के लिए अपनी सीट छोडऩे का ऐलान तक कर दिया था।  साल 2012 के चुनाव में वीरेंद्र कंवर 26028 वोट मिले थे। साल 2003 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं।
    सरवीन चौधरी 
    शाहपुर सीट से चुनाव जीता है। साल 1998 में पहली बार विधायक बनीं और जनवरी 2008 से दिसंबर 2012 तक मंत्री रहीं।  विक्रम सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। 
     शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से पहले जयराम ठाकुर ने कहा था कि लोगों ने हम पर विश्वास दिखाया और हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। उन्होंने कहा था कि बहुत खुशी होती अगर पिताजी आज साथ होते। एक साल पहले वो हमें छोड़कर चले गए। माताजी अस्वस्थ हैं पर उनका आशीर्वाद है और ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। 
    वहीं जयराम ठाकुर की पत्नी साधना ठाकुर ने कहा कि यह आम आदमी की जीत है। लोगों को इस सरकार से कई उम्मीदें हैं और ये सरकार लोगों की सभी समस्यों को दूर करेगी।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • भोपाल, 27 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नोएडा को लेकर पिछले 29 साल से चले आ रहे अंधविश्वास को तोडऩे के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी तरह का अंधविश्वास तोडऩे जा रहे हैं। शिवराज ने घोषणा की है कि वह अशोक नगर जाएंगे जहां जाने से राज्य के अब तक के सीएम कतराते रहे हैं। राज्य के कई ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्हें अशोक नगर जिला मुख्यालय की यात्रा के बाद पद छोडऩा पड़ा। इससे इस अंधविश्वास को बढ़ावा मिला। शिवराज ने घोषणा की कि वह अंधविश्वासी नहीं हैं और जल्द ही यात्रा कर अशोक नगर से जुड़े मिथक को तोड़ेंगे।  (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर । गुजरात में नई-नई बनी विजय रूपाणी सरकार के 20 सदस्यों वाले मंत्रिमंडल में तीन दागी हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स यानी एडीआर के हवाले से यह बात कही गई है। इन तीन मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सभी 20 मंत्रियों की कुल औसत संपत्ति 13.34 करोड़ रुपये है और 18 मंत्री करोड़पति हैं।
    गुजरात में मंगलवार को विजय रूपाणी ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके साथ नितिन पटेल ने उप-मुख्यमंत्री और अन्य आठ कैबिनेट सदस्यों ने मंत्री पद की शपथ ली। 10 राज्यमंत्रियों ने भी शपथ ली। एडीआर के मुताबिक बोताड चुनाव क्षेत्र के सौरभ यशवंतभाई दलाल पटेल इनमें सबसे अमीर मंत्री हैं। उनके बाद भावनगर (ग्रामीण) के पुरुषोत्तमभाई ऊधवजी भाई सोलंकी और जेतपुर के राधडिय़ा जयेशभाई विट्ठलभाई हैं। एडीआर के मुताबिक सौरभ पटेल ने चुनाव के लिए नामांकन भरते वक्त हलफनामे में अपनी निजी संपत्ति 123.78 करोड़ रुपये घोषित की है। वहीं, सोलंकी ने 45.9 करोड़ रुपये और वि_लभाई ने 28.5 करोड़ की संपत्ति की घोषणा की है। सबसे कम संपत्ति (35.45 लाख) देवगढ़बरिया के बच्चूभाई मगनभाई खाबड़ की है।
    वहीं, 13 मंत्री ऐसे हैं जिन पर देनदारियां हैं। इनमें वि_लभाई सबसे आगे हैं जिन पर 16.04 करोड़ रुपये की देनदारी है। जहां तक शैक्षिक योग्यता की बात है तो कैबिनेट के 45 प्रतिशत मंत्रियों की औसत शैक्षिक योग्यता 12वीं कक्षा या उससे नीचे की है। जबकि 11 मंत्री ग्रेजुएशन या उससे आगे की पढ़ाई कर चुके हैं।(हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 27-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 27 दिसंबर । केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नीचता के लिए जाना जाता है। साथ ही रिजीजू ने कुलभूषण के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारत की जीत की उम्मीद जताई।
    रिजीजू ने कहा कि मुझे यकीन है कि पूरी दुनिया पाकिस्तान का ये रूप देख रही होगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान की नापाक गतिविधियां खुल गईं है। कुलभूषण जाधव के मामले में भारत के पक्ष की जीत होगी और पाकिस्तान का झूठ सामने आएगा। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • बेंगलुरु, 26 दिसंबर। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष और बुद्धिजीवी मानते हैं, उनकी अपनी खुद की कोई पहचान नहीं होती और वे अपनी जड़ों से अनजान होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी संविधान को बदलने के लिए सत्ता में आई है। उनके इस बयान पर विवाद शुरू हो गया है। हेगड़े पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने संविधान नहीं पढ़ा है, वह संसदीय या राजनीतिक भाषा नहीं जानते। 
    कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री हेगड़े ने कहा, जो लोग खुद को धर्मनरपेक्ष करते हैं, वे नहीं जानते कि उनका खून क्या है। हां, संविधान यह अधिकार देता है कि हम खुद को धर्मनिरपेक्ष कहें, लेकिन संविधान में कई बार संशोधन हो चुके हैं, हम भी उसमें संशोधन करेंगे, हम सत्ता में इसलिए ही आए हैं।
    कोप्पल जिले के कुकानूर में ब्राह्मण युवा परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे लोग जो अपनी जड़ों से अनभिज्ञ होते हुए खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, उनकी खुद की कोई पहचान नहीं होती। उन्हें अपनी जड़ों का पता नहीं होता, लेकिन वे बुद्धिजीवी होते हैं। इस मौके पर उन्होंने परिषद की महिला विंग की वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने कहा कि आप अपनी रगों में बह रहे खून के बारे में जानते हैं, इसलिए मैं आपको नमन करता हूं। 
    हेगड़े के बयान के जवाब में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि देश का हर नागरिक भारतीय है, और हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त हैं। हेगड़े को मूलभूत जानकारी भी नहीं है।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नीतीश कुमार रमन सिंह सहित सभी एनडीए सीएम शामिल हुए
    गांधीनगर, 26 दिसंबर। गुजरात में मंगलवार को सीएम विजय रूपाणी ने दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। शपथग्रहण से पहले वह सुबह मंदिर गए। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने कम सीटें आने के बावजूद एक बार फिर रूपाणी पर भरोसा जताया है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्रियों के अलावा एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।
    मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल के साथ 20 मंत्रियों ने शपथ ली। इसमें इनमें 6 पाटीदार चेहरे, 6 ओबीसी, 2 राजपूत, 3 आदिवासी, एक दलित, एक ब्राह्मण और एक जैन चेहरे हैं। इसमें से नॉर्थ गुजरात से छह, सौराष्ट्र से सात, मध्य गुजरात से 2, दक्षिण गुजरात से 5 चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। 
    आर सी फलदू -(कैबिनेट मंत्री)
    जामनगर दक्षिण से विधायक आर सी फलदू लेउवा पटेल समाज से ताल्लुक रखते है। दो बार गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं। पाटीदारों के घोर विरोध के बीच सौराष्ट्र रीजन से जीत कर तीसरी बार विधायक चुनकर आये हैं। 
    भूपेंद्र सिंह चुडासमा-(कैबिनेट मंत्री)
    गुजरात का वरिष्ठ क्षत्रिय दरबार चेहरा हैं। गुजरात की मौजूदा रुपाणी सरकार ने सीनियर मंत्री रहे हैं। शिक्षा और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभाग इनके पास थे। अहमदाबाद जिले की धोलका सीट से 5वीं बार विधायक के रूप में विधानसभा में चुनकर आये हैं। 
    कौशिक पटेल-(कैबिनेट मंत्री)
    गुजरात बीजेपी के संगठन का एक बड़ा नाम और पटेल चेहरा। पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक। इस बार उन्ही की खाली की हुई सीट नारणपुरा से चुनाव जीत कर चौथी बार विधायक चुनकर आये हैं। राज्य के राजस्व मंत्री सहित कई मंत्रालयों को संभाल चुके हैं। केशुभाई और मोदी मंत्रिमंडल में काम करने का अनुभव। सौरभ पटेल राज्य में पार्टी का सबसे सॉफिस्टिकेटेड चेहरा। पाटीदार समाज से ताल्लुक रखते हैं। लगातार 5वीं बार विधायक के रूप में चुने गए हैं। मोदी और आनंदीबेन मंत्रिमंडल में फाइनांस और ऊर्जा सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं।
    गणपत वसावा-(कैबिनेट मंत्री)
    गुजरात बीजेपी का इस वक्त सबसे मजबूत आदिवासी चेहरा, जिसने दक्षिण गुजरात मे पार्टी को पैंठ बनाने में खासी मदद की है। लगातार चौथी बार सूरत जिले की मांगरोल सीट से चुनाव जीते हैं। रुपाणी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे इसके अलावा। विधान सभा में स्पीकर भी रह चुके हैं। मोदी और आनंदीबेन मंत्रिमंडल में भी रह चुके हैं
    जयेश राधडिय़ा-(कैबिनेट मंत्री)
    सौराष्ट्र के मजबूत पाटीदार नेता वि_ल राधडिय़ा के पुत्र और खुद भी पाटीदार समाज मे अच्छी पकड़ रखते हैं। पाटीदार आंदोलन की आंधी के बीच जेतपुर की मुश्किल सीट बडे मार्जिन से जीते। साल 2007 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते 2012 में अपने पिता के साथ बीजेपी में शामिल हुए और चुनाव जीते। मोदी मंत्री मंडल में स्थान मिला फिर आनंदीबेन और रुपाणी मंत्रिमंडल में भी मंत्री रहे। इस बार तीसरा चुनाव जीते हैं। 
    दिलीप ठाकोर-(कैबिनेट मंत्री)
    गुजरात बीजेपी का सबसे बड़ा ठाकोर चेहरा जिसकी ओबीसी समाज मे भी अच्छी पैंठ है। उत्तर गुजरात मे इस बार ठाकोर आंदोलन की लहर के बीच भारी वोटों से चुनाव जीत कर 5वीं बार विधायक चुने गए हैं। मोदी, आनंदीबेन और रुपाणी मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके हैं। 
    परबत पटेल-(राज्यमंत्री)
    उत्तर गुजरात के चौधरी पटेल समाज से आते हैं। बनासकांठा के थराद की सीट से 5वीं बार विधायक चुने गए हैं। मोदी और आनंदीबेन सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 
    प्रदीप सिंह जडेजा-(राज्यमंत्री)
    अमित शाह से सबसे नजदीकी लोगों में से एक। गुजरात का उभरता हुआ क्षेत्रिय-दरबार चेहरा। मौजूदा सरकार में गृह राज्य मंत्री जाडेजा लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर विधानसभा के सदस्य बने है। मोदी, आनंदीबेन और रुपाणी तीनों के साथ काम करने का अनुभव है। 
    पुरुषोत्तम सोलंकी-(राज्यमंत्री)
    लगातर छठी बार चुनाव जीते हैं। राज्य का सबसे बड़ा कोली चेहरा जिसने कोली समाज को बीजेपी के साथ अबतक जोड़े रखा। हालांकि इस बार पार्टी कोली सीटों पर अच्छा प्रदर्शन नही कर पाई है पर पुरुषोत्तम सोलंकी को मंत्रिमंडल से दूर करके बीजेपी कोली समाज को और नाराज नही करना चाहेगी। केशुभाई, मोदी, आनंदीबेन तथा रुपाणी मंत्रिमंडल में लगातार मंत्री बने रहे हैं।
    वासन भाई आहिर-(राज्यमंत्री)
    आहिर समाज के नेता हैं और कच्छ में इनका खासा प्रभाव है। भुज और अंजार सीट से चुनाव जीत चुके हैं और इस बार भी अंजार की सीट से चुनाव जीतकर 5वीं बार विधायक बने है। मोदी और आनंदीबेन सरकार में मंत्री रह चुके है और रुपाणी की पिछली सरकार में संसदीय सचिव थे
    ईश्वर सिंह पटेल-(राज्यमंत्री)
    कोली पटेल समाज के नेता हैं और अंकलेश्वर की सीट से चौथी बार चुनाव जीते हैं। रुपाणी और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके है। दक्षिण गुजरात मे कोली पटेलों पर इनका खासा प्रभाव है। 
    कुमार कानानी-(राज्यमंत्री)
    इन्हें पाटीदार आंदोलन का ऐपिसेंटर कही जाने वाली सूरत की वराछा सीट बड़े मार्जिन से जीतने का रिवार्ड मिल रहा है। हालांकि ये दूसरी बार ही विधायक बने है पर सूरत में पाटीदार आंदोलन के इफेक्ट को कम करने में इनका बड़ा हाथ रहा है और अब ये पहली बार मंत्री मंडल में स्थान पा रहे हैं। 
    विभावरी दवे- (राज्यमंत्री)
    रुपाणी सरकार में एक मात्र महिला चेहरा और ब्राह्मण चेहरा भी। तीसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बनी विभावरी दवे। भावनगर की पहली महिला मेयर भी रह चुकी हैं। विजय रुपाणी की पिछली सरकार में ये संसदीय सचिव के पद पर थीं। 
    बचु खाबड़-(राज्यमंत्री)
    दाहोद जिले की देवगढ़ बारिया सीट जोकि कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी उसे 2002 में जीता औऱ उसी सीट को 2012 में दोबारा जीता बचु भाई खाबड़ ने, जिसकी वजह से आनंदीबेन सरकार में मंत्री बने और रुपाणी की पिछली सरकार में भी मंत्री रहे। 2017 में तीसरी बार भी बचु भाई ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। 
    रमण पाटकर-(राज्यमंत्री)
    दक्षिण गुजरात के एक और बड़े आदिवासी नेता है जिन्होंने 1995 में दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाकों में भाजपा की जीत की नींव रखी। गुजरात की उमरगाम की सीट पर से ये इस बार 5वीं बार चुने गए हैं जिसका रिवार्ड इन्हें पहली बार मंत्री बना कर दिया जा रहा है
    ईश्वर परमार-इस बार रुपाणी सरकार का दलित चेहरा। जब गुजरात में बीजेपी के तमाम बड़े दलित नेता इस बार चुनाव हार गए हैं तो पार्टी ने इस युवा दलित नेता को आगे बढ़ाया है और पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया है। हालांकि ये दूसरी बार ही विधायक बने हैं। 
    जेद्रथ सिंह परमार-मध्य गुजरात मे पार्टी का मजबूत क्षत्रिय चेहरा। कांग्रेस के वर्चस्व वाली पंचमहल जिले की हालोल सीट को ये 2002 से लगातार जीतते आ रहे हैं। ये मोदी, आनंदीबेन तथा रुपाणी सभी सरकारों में मंत्री रहे हैं।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 26 दिसंबर । विजय रूपाणी मंगलवार को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी शासित 18 राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस समारोह में शिरकत की।
    इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने में तो कामयाब रही है मगर उसे पिछले चुनाव के मुकाबले सीटों का नुकसान हुआ है। कयास लगाए जा रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी इस बार गुजरात में रूपाणी की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बना सकती है, मगर ऐसा नहीं हुआ।
    सिर्फ 99 सीटें आने के बावजूद बीजेपी हाईकमान ने रूपाणी पर ही भरोसा जताया। मगर इसकी वजह क्या है? जानने के लिए बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने बात की गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट से। पढि़ए उनका नजरिया...
    रूपाणी के पक्ष में थे चार फैक्टर
    पहली बात तो यह कि भारतीय जनता पार्टी के हाई कमान की सोच थी कि विजय रूपाणी के नेतृत्व में गुजरात में भारतीय जनता पार्टी को 49.1 प्रतिशत वोट मिले हैं जो पिछले चुनाव की तुलना में करीब 1.25 फीसदी ज्यादा हैं।
    दूसरा कारण है कि चुनाव से पहले अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि यह चुनाव रूपाणी के नेतृत्व में लड़े जा रहे हैं और उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। तीसरी वजह यह है कि नतीजे आने के बाद बीजेपी नहीं चाहती थी कि रूपाणी को हटाने से मतदाताओं के बीच यह संकेत जाए कि बीजेपी को गुजरात चुनाव में झटका लगा है। चौथा फैक्टर यह था कि अगर रूपाणी को हटाकर बीजेपी जातिगत समीकरण पर जाकर पाटीदार समाज से किसी को मुख्यमंत्री बनाती तो गैर-पाटीदार समाज नाराज हो जाता। ओबीसी को सीएम बनाने से दलित और पाटीदार नाराज हो सकते थे। ऐसे में लाजिमी था कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक बीजेपी रूपाणी को बनाए रखे और मुख्यमंत्री के चेहरे में कोई परिवर्तन न करें।
    ऊपर से विजय रूपाणी काफी संजीदा आदमी हैं और उनका सर्वस्वीकार्य व्यक्तित्व है। इसे देखते हुए उन्हें और उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल को बनाए रखा गया।
    जब आनंदी बेन पटेल को हटाकर जैन समुदाय के विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री पद पर लाया गया था, तब पटेल समुदाय नाराज न हो, इसलिए नितिन भाई पटेल को डिप्टी सीएम बनाया गया था। बीजेपी की यह सोच आज भी बरकरार है क्योंकि उन्हें हटा देते तो यह सिग्नल चला जाता कि बीजेपी ने पाटीदार समुदाय से मुंह मोड़ लिया है।
    इसलिए सीएम रूपाणी को रखना जरूरी था तो उनके साथ डिप्टी सीएम नितिन पटेल को बनाए रखना भी बीजेपी की लाचारी थी। पाटीदार समाज भारतीय जनता पार्टी से विमुख हो गया है। इस कारण इस बार बीजेपी को सात जिलों में एक भी सीट नहीं मिली है।
    नौ जिलों में एक ही सीट मिली है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में जाकर यही कहा था कि समाज का जो तबका हमसे नाराज है, उसे मनाने की कोशिश की जाए।
    इसीलिए मंगलवार को जब शपथ ग्रहण के लिए 18 राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आ रहे हैं तो पाटीदार समुदाय के छह नेताओं को समारोह से जोड़ा गया है ताकि यह संदेश दिया जाए कि भारतीय जनता पार्टी पाटीदार समाज को अपने साथ रखना चाहती है।
    गुजरात में अगले मार्च और मई के बीच राज्यसभा चुनाव होने वाला है। इसमें अरुण जेटली, पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडव्या गुजरात से चुनकर गए हैं और इनकी सीट खाली हो सकती है। संभावना है कि मनसुख मांडव्या को प्रधानमंत्री का विश्वास पात्र माना जाता है। सौराष्ट्र की लेउआ पटेल समुदाय की काफी पावरफुल कम्युनिटी भाजपा से विमुख हो गई है। ऐसे में उन्हें लाया जा सकता है।
    पुरुषोत्मम रुपाला की छवि काफी स्वच्छ है और वह अच्छे वक्ता भी हैं। इन दोनों में से किसी को पसंद किया जा सकता है। मगर यह अनिश्चित है कि इनमें से किसी को लाया गया या फिर दोबारा मार्च में केंद्र में भेजा जाए।
    मगर आज भारतीय जनता पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी कीमत पर पाटीदारों का तुष्टीकरण करके बाकी के समाज को नाराज नहीं करना चाहती। (बीबीसी)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • मुंबई, 26 दिसंबर । महाराष्ट्र के एक सरकारी अस्पताल में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों के गैर मौजूद रहने पर वहां पहुंचे केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर ने सोमवार को नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर उन्हें लोकतंत्र में भरोसा नहीं है तो ऐसे लोगों को नक्सल समूह में शामिल हो जाना चाहिए और तब सरकार उन्हें गोली मार देगी।
    पूर्वी महाराष्ट्र के चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में 24 घंटे चलने वाली जेनेरिक दवाईयों की दुकान का उद्घाटन करने के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री भाषण दे रहे थे। अहीर लोकसभा में चंद्रपुर से बीजेपी सांसद और केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री हैं।
    कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने पर नाराज अहीर ने कहा, कार्यक्रम में महापौर और उप महापौर आये हैं लेकिन चिकित्सकों को यहां आने से कौन सी चीज रोक रही है। अहीर ने कहा, नक्सली क्या चाहते हैं, वह लोकतंत्र नहीं चाहते हैं...ये लोग (अनपुस्थित चिकित्सक) भी लोकतंत्र नहीं चाहते हैं, तब उन्हें नक्सल समूह में शामिल हो जाना चाहिए। आप यहां क्यों हैं, तब (अगर आप नक्सली समूह में शामिल होते हैं) हम आपको गोली मार देंगे, आप यहां क्यों गोलियां बांट कर रहे हैं। मंत्री ने इस बात आश्चर्य जताया कि जब लोकतांत्रिक तरीके से चुना हुआ एक मंत्री दौरे पर है तो डाक्टरों के लिए छुट्टी पर जाना उचित है। चंद्रपुर महाराष्ट्र के उन चार जिलों में से एक है जिसकी पहचान केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित जिले के तौर पर की है।(आज तक)

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Posted Date : 25-Dec-2017
  • मुंबई, 25 दिसंबर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए शिव सेना की तारीफ बढ़ती जा रही है। उनकी फिर तारीफ करते हुए भाजपानीत एनडीए सहयोगी ने कहा है कि भले ही राहुल गांधी गुजरात चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने में असफल रहे हों, लेकिन उन्होंने पार्टी को विजेता के रूप में उभारा। शिव सेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने कहा, राहुल गांधी जिन्हें कभी पप्पू कह कर ताना मारा जाता था उन्होंने इस विचार को ध्वस्त कर दिया है कि जीत का मतलब केवल ताकत है और ताकत खरीदी जा सकती है।
    सामना में छपे अपने लेख में संजय राउत ने यह भी कहा है कि गुजरात चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच था और उन्होंने भाजपा और पीएम के पसीने छुड़ा दिए। राउत ने लिखा है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रहे लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कॉलम में कहा कि भाजपा 100 सीटें नहीं जीत पाई जो बताता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी भाजपा के लिए एक चुनौती होंगे।
    शिव सेना के नेता ने लिखा कि वे कांग्रेस समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर एक मजबूत विपक्ष राहुल गांधी के पीछे खड़े रहने को तैयार है तो वे इसका स्वागत करेंगे। महाराष्ट्र कांग्रेस ने शिव सेना के इस रुख का स्वागत किया है। उसका कहना है कि अन्य पार्टियां और विपक्ष राहुल गांधी के सकारात्मक नेतृत्व को समझ गए हैं। इससे पहले गुजरात चुनाव के बाद शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी की तारीफ की थी। कांग्रेस अध्यक्ष को बाजीगर बताते हुए उन्होंने कहा था कि गुजरात मॉडल अब कांप रहा है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 25-Dec-2017
  • बलरामपुर, 25 दिसंबर । अपने बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि चुनावों के दौरान वोट के लिए राजनीतिक दल गरीबों को घूस देते हैं। लेकिन जब वही पार्टी सत्ता में आती है तो इन गरीबों के विकास पर बिल्कुल ध्यान नहीं देती है।
    बलरामपुर में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान राजभर ने कहा, बाटी-चोखा कच्चा वोट, दारू-मुर्गा पक्का वोट। सारे गरीब दारू पीते हैं, मुर्गा खाके वोट देते हैं और ये दिल्ली, लखनऊ जाने वाले नेता पांच साल तुझे मुर्गा बनाकर घुमाते हैं। यही वजह है कि गरीब हमेशा गरीब ही रहते हैं और उनका कभी विकास नहीं होता है।
    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कोई विवादित बयान दिया हो। कुछ दिनों पहले ही यूपी के मऊ में अतिपिछड़ा, अतिदलित भागीदारी रैली में राजभर ने कहा था कि यूपी में बीजेपी एक महीने में जितना खर्च करती है उतने का तो उनकी बिरादरी वाले एक दिन में शराब पी जाते हैं। 
    राजभर ने यह भी कहा था, उनकी पार्टी (भारतीय समाज पार्टी) के झंडे का पीला रंग है और हम भगवान शंकर के पुजारी हैं। अगर कोई पीले रंग का विरोध करेगा तो हम शाप दे देंगे, उसे पीलिया हो जाएगा।
    एक बार तो उन्होंने तमाम अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर भारतीय जनता पार्टी या भारतीय समाज पार्टी का कार्यकर्ता उन पर गलत काम के लिए दबाव बनाएं तो उन्हें दस-दस लाठी मारकर भगा दें। (एएनआई)

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Posted Date : 25-Dec-2017
  • कोलकाता, 25 दिसंबर । बंगाल की सबांग सीट पर हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की जीत हुई है। टीएमसी की उम्मीदवार गीता रानी भुनिया को 64192 वोट मिले। दूसरे स्थान पर सीपीआईएम की रीता मंडल रहीं जिन्हें 41987 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी अंतरा भट्टाचार्या तीसरे और कांग्रेस के चिरंजीव भौमिक चौथे स्थान पर रहे। पिछले साल हुए उपचुनाव में यहां कांग्रेस के मानस भुनिया जीते थे। बाद में वे इस्तीफा देकर टीएमसी में शामिल हो गए, इसलिए फिर से चुनाव कराना जरूरी हो गया। इस चुनाव की विजेता गीता रानी मनस भुनिया की पत्नी हैं।
    बताया जा रहा है कि सीट पर टीएमसी की जीत की संभावना काफी ज्यादा थी। हालांकि पार्टी के दो सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के बाद यह चुनाव दिलचस्प बन गया था। राजनीतिक समीक्षकों की इस चुनाव में खासी रुचि रही। वे देखना चाहते थे कि टीएमसी से भाजपा में आए मुकुल रॉय अपनी पुरानी पार्टी के वोट आधार में कोई सेंध लगा पाते हैं या नहीं। रॉय पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। चुनाव को लेकर उनकी कोशिश थी उनकी पार्टी कम से कम दूसरे स्थान पर आ जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और वह तीसरे स्थान पर रही। जानकारों का कहना है कि सबांग उप-चुनाव के परिणाम से आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सीपीआईएम का उत्साह बढ़ेगा। उनका मानना है कि भाजपा के लिए यह परिणाम हताश करने वाला है। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 25-Dec-2017
  • चेन्नई, 25 दिसंबर । तमिलनाडु में अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी के लिए आरके नगर विधानसभा सीट पर हुआ उपचुनाव तो अच्छे संकेत लेकर नहीं आया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जयललिता की इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी कारू नागराजन को उतने वोट भी नहीं मिले जितने नोटा (ऊपर बताए गए उम्मीदवारों में से कोई नहीं) को हासिल हो गए।
    नागराजन को 1,417 वोट ही हासिल हुए। जबकि इस क्षेत्र के 2,373 मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुनना बेहतर समझा। यहां तक कि राजनीति में नई-नवेली और अनुभवहीन पार्टी- 'नाम तमिलारÓ ने भी इस उपचुनाव के दौरान अपनी बेहतर उपस्थिति दर्ज करा ली। इस पार्टी के प्रत्याशी को यहां 3,860 वोट मिल गए और वह चौथे स्थान पर रहे। जबकि मुख्य विपक्षी दल डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कडग़म) को तीसरा स्थान मिला।
    हालांकि तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद डीएमके के उम्मीदवार एन मारुतु गणेश अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। उन्हें 24,651 वोट हासिल हुए। इस सीट के नतीजे में एक और दिलचस्प चीज यह रही है कि यहां 13 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब राज्य में सत्ताधारी दल का प्रत्याशी यहां से नहीं चुना गया। आरके नगर के लोगों ने सत्ताधारी एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म) से निष्कासित नेता टीटीवी दिनाकरण को 40,000 वोट से जिताया है। उन्होंने एआईएडीएमके के अधिकृत उम्मीदवार ई मधुसूदनन को पराजित किया है। (द हिंदू)

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Posted Date : 24-Dec-2017
  • नीलकांत पारटकर
    राज ठाकरे के पिता श्रीकांत ठाकरे कलाप्रेमी थे। हिंदी गजलों के शौकीन,संगीतकार थे। उनके घर गायकों का जमावड़ा लगता था और रात-रात गीत गजलों की महफिल सजा करती। उन दिनों मराठी गजल को सुरेश भट्ट ने एक उंचाई तक पहुंचाया था। आशा लता की मखमली आवाजों ने कई गज़लें अजर-अमर कर दी थी। श्रीकांतजी की बड़ी इच्छा थी कि एक मराठी गजल रफीजी से गंवाई जाए। सुरेश भट्ट भी यह सुन उछल पड़े थे, लेकिन रफी कितनी फीस लेंगे यह सोच दोनों परेशान थे। किसी मध्यस्थ से श्रीकांतजी ने रफी से मुलाकात कर अपनी मंशा बताई। ना-नुकर के बाद रफी ने मराठी अल्फाज और ळ शब्द के उच्चारण पर अपना भय जाहिर किया। श्रीकांतजी ने कहा- हम मराठी $ग•ाल आपको पहले गाकर सुनाऐंगे और आपको जिस लब्ज पर दिक्कत हो उसे दूसरे लब्ज से सरल करेंगे। दूसरे दिन रफीजी की रिकॉर्डिंग थी उन्होंने उसी स्टूडियों में रिहर्सल रखी। श्रीकांतजी ने जैसे हार्मोनियम पर $ग•ाल सुनाई, रफी ने कहा- चलो रिकॉर्डिंग रूम ट्राइ करके देखते हैं। रफी ने पूरी जान डालकर $ग•ाल गाई बोल थे-
    हा रूसवा सोड सखी पूरे हा बहाना सोड ना अबोला!!!
    (यह गुस्सा छोड़ों सनम छोड़ों ये बहाना, मुझसे जरा बोलो ना!!)
    इस तरह $ग•ाल की रिकॉर्डिंग हुई सब खुशी से झूम उठे। श्रीकांतजी ने रफी को साइड में ले जाकर फीस पूछी, रफी ने मराठी में यह मेरा डेब्यू है घर आओ फीस बता दूंगा। श्रीकांतजी दो दिन बाद रफी के घर फ्लॉवर बुके और चेक बुक लेकर पहुंचे। चेक बुक रफी के सामने रखकर बोले लिख लिजिए। रफी ने मुस्कुराकर चेक बुक वापिस की और बुके में से लाल गुलाब निकाल अपने कोट में लगाया और बोले बस मिल गई फीस। 
    इसके बाद रफी ने दो मराठी भजन भी गाए-
    शोधिसी मानवा राउळी मंदिरी!!!
    कुठे शोधिसी रामेश्वर!!
    रफी ने लगभग सभी भारतीय भाषाओं में गाया है। जैसी मखमली उनकी आवाज थी वैसा ही दिल था। उन्होंने सही तो कहा था, तुम मुझे यूं भूला ना पाओगे!!!

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Posted Date : 24-Dec-2017

  • पटना, 24 दिसंबर । बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को शनिवार को रांची की सीबीआई कोर्ट ने देवघर चारा घोटाला केस में दोषी करार दिया। इस पर जेडीयू के बागी नेता शरद यादव ने कहा, उम्मीद है कि लालू को न्याय मिलेगा। चारा घोटाला मामले में उन्हें ऊपरी अदालत से न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोग हैं जो इस केस में दोषी थे लेकिन उन्हें बरी कर दिया गया।
    वहीं सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि अगर लालू पर इस केस में आरोप साबित हुए हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। इसके जरिए सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का ये दोहरा मापदंड ठीक नहीं है। भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार ही होता है फिर चाहे वो सृजन घोटाला हो, पनामा पेपर्स, व्यापमं घोटाला या फिर अमित शाह के बेटे... सबके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि कानून सबके लिए समान है।
    इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लालू के बारे में कहा था कि वो फैसले को स्वीकार करने की जगह मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं। मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए वह बीजेपी पर साजिश के आरोप लगा रहे हैं। तो वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोर्ट के फैसले पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। तो राम विलास पासवान ने तो यह तक कह दिया था कि लालू ने अपने साथ-साथ पूरे परिवार को डुबो दिया।
    शनिवार को देवघर चारा घोटाला केस में लालू यादव को कोर्ट ने दोषी करार दिया। लालू यादव समेत कुल 22 लोग देवघर चारा घोटाले में आरोपी थे, जिसमें से 16 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, जबकि बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा और ध्रुव भगत समेत 6 लोगों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट में लालू यादव को दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें वहां से सीधे बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया। हालांकि कोर्ट 3 जनवरी को सजा का ऐलान किया जाएगा। (आज तक)

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Posted Date : 23-Dec-2017
  • नोएडा, 23 दिसंबर। यूपी की सियासी जमात के बीच एक अनकही मान्यता है कि मुख्यमंत्री रहते हुए जो भी शख्स नोएडा पहुंचेगा, उसकी सत्ता छिन जाएगी। अपशगुन का ये चक्रव्यूह इतना खतरनाक माना जाता है कि 19 वर्षों में सिर्फ मायावती ने ही बतौर सीएम नोएडा का दौरा किया, लेकिन अब मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मिथक को तोडऩे नोएडा आ रहे हैं।
    दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ 25 दिसंबर को नोएडा-दिल्ली के बीच शुरू होने जा रही मेट्रो की नई लाइन शुभारंभ कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस प्रोग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल होना है। जिससे पहले यहां तैयारियों का जायजा लेने शनिवार को योगी आदित्यनाथ नोएडा पहुंच रहे हैं।
    सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ अल्फाज में दावा किया कि नोएडा बस एक मिथक है और वो इसे तोड़कर रहेंगे। इसलिए एक नहीं दो-दो बार नोएडा की धरती पर कदम रखकर योगी आदित्यनाथ ये जताएंगे कि वो सियासत के साथ धर्म कर्म और पूजा पाठ में भले ही डूबे रहते हों लेकिन अंधविश्वासों से परे हैं चाहे ये अंधविश्वास उनकी कुर्सी से ही क्यों न जुड़ा हो।
    पिछली सरकार के मुखिया अखिलेश यादव 5 साल में एक बार भी नोएडा कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। नोएडा से जुड़ी कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास अखिलेश ने लखनऊ बैठे बैठे ही कर डाला।
    अब योगी आदित्यनाथ नोएडा आ रहे हैं, वो ऐसा करने वाले वो 29 साल में सिर्फ दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। आदित्यनाथ ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो जानबूझ कर राजनीतिक रूप से मनहूस माने जाने वाले नोएडा जाने की हिम्मत कर रहे हैं। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जानते-बूझते 2011 में नोएडा गई थीं और 2012 के चुनावों में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।  (आज तक)

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Posted Date : 23-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 23 दिसंबर । ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कृषि मंत्री दामोदर राउत (76) को उनके मंत्रालय से शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया। एक मंत्री ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, राउत से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
    वहीं मुख्यमंत्री पटनायक ने कहा, किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति को मैं सख्ती से नामंजूर करता हूं। मैंने डॉ. (दामोदर) राउत को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है।Óृ राउत बीजू जनता दल (बीजद) के उपाध्यक्ष भी हैं।
    पटनायक ने आगे कहा, उनकी बर्खास्तगी को स्वीकार करने के लिए माननीय राज्यपाल को शुक्रवार शाम में एक पत्र भी भेजा गया। हालांकि, राउत इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए उपस्थित नहीं हो सके क्योंकि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से दूर थे। खबरों के अनुसार उन्होंने 17 दिसंबर को मल्कानगिरि में एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजक टिप्पणी की थी, जिसके बाद राज्यव्यापी प्रदर्शन हुए थे।
    पारादीप से 76 वर्षीय विधायक ने कहा था, राज्य के किसी भी हिस्से में कोई आदिवासी भीख नहीं मांग रहा, जबकि बस पड़ाव जैसे स्थानों पर ब्राह्मणों को भीख मांगते कोई भी देख सकता है। राज्य में ब्राह्मणों की आबादी नौ फीसदी है। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शन किया था।
    सात बार के विधायक राउत पहले भी विवादों में रहे हैं। उन्होंने अक्तूबर में भाजपा की एक महिला नेता और आंगनवाड़ी सेविकाओं के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी। पिछले 17 वर्षों में ऐसा तीसरा मौका है जब विभिन्न कारणों से राउत का मंत्रीपद वापस लिया गया है।(जनसत्ता)

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Posted Date : 23-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 23 दिसंबर । टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले से गुरुवार को बरी की गईं द्रमुक नेता और राज्यसभा सदस्य कनीमोई ने कहा कि वह साल 2019 का लोकसभा चुनाव लडऩा चाहती हैं। कनीमोई ने कहा कि वह हमेशा से ही चुनाव लडऩा और लोगों की सेवा करना चाहती हैं। जब पूछा गया कि क्या वह लोकसभा चुनाव लडऩा चाहती हैं? इस पर द्रमुक नेता ने कहा, मैं पार्टी से पूछुंगी कि क्या मैं चुनाव लड़ सकती हूं। फैसला तो पार्टी को ही करना है। कनीमोई द्रमुक के वरिष्ठ नेता एम करुणानिधि की बेटी हैं। 2जी घोटाले मामले में पटियाला हाउस कोर्ट की सीबीआई विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोई समेत 17 आरोपियों को बरी कर दिया है। 
    अदालत का फैसला सुनते ही कनिमोई रोने लगी थीं।(भाषा)

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