कारोबार

Posted Date : 26-Dec-2017
  • आप अपने नए जूतों पर पैसा क्यों खर्च करेंगे? या फिर कीमती स्मार्टफोन पर? कंपनियां आपके अवचेतन मन तक अपनी पहुंच बना कर उन पर असर डालने को आतुर हैं ताकि आपकी जेब से पैसे निकाले जा सकें।
    उपकरणों के सहारे नजरों की हलचल को पकडऩा, कंप्यूटर से आपके चेहरे का ऐसा नक्शा तैयार करना जिसमें क्षण भर के लिए भी आई चमक या गुस्सा दर्ज हो, और ऐसे सेंसर जो दिमाग की गतिविधियां जान सकते हैं, इन सब का इस्तेमाल कर कंपनियां लोगों की भावनाओं तक पहुंच कर अपने लिए जानकारी जुटा रही हैं।
    पहले विज्ञापन कंपनियां अपने प्रचार अभियान की सफलता का पता लगाने के लिए कंज्यूमर सर्वे का सहारा लेती थीं लेकिन इस तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी आईसोबार की वाइस प्रेसिडेंट जेसिका अजूले कहती हैं कि ऐसा नहीं कि लोग आपको बताएंगे नहीं लेकिन वास्तव में वे यह नहीं बता सकते कि वे यह फैसला क्यों कर रहे हैं।
    नई तकनीकें यह जान चुकी हैं कि हमारी खरीदारी के फैसले विवेक और भावना दोनों से संचालित होते हैं। रिसर्च यह भी दिखाता है कि दिमाग अलग अलग स्तरों से जानकारी लेता है। मार्केट रिसर्च फर्म इप्सोस में न्यूरो एंड बिहेविएरल साइंस बिजनेस की चीफ एग्जिक्यूटिव एलिसा मोसेस बताती हैं कि ये रिसर्च कि हमें अलग-अलग तरह की भावनाओं को पकडऩे में मदद करते हैं और उनके आधार पर हम सेकेंड दर सेकेंड उत्पन्न होने वाली भावनाओं को सूक्ष्म स्तर पर जान कर उन्हें पहचान सकते हैं। लोग नहीं बता पाएंगे कि तीसरे दृश्य ने मुझे परेशान किया या फिर यह कि सातवें दृश्य को देख कर मैं रोमांचित हो उठा लेकिन उनके चेहरे की कोडिंग के जरिए हम यह जान सकते हैं।
    नई तकनीकें यह पता लगाने में मदद कर सकती हैं कि ब्रांड अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बढ़त बनाए हुए हैं या नहीं और विज्ञापनों में किस चीज को प्रमुखता देनी है इसका पता भी लगाया जा सकता है। इन तकनीकों का इस्तेमाल दूसरे उद्योगो में भी हो रहा है जैसे कि रिटेल जहां अमेजॉन के दौर में ग्राहकों को लुभाने के लिए नए नए तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है। मोसेस कहती हैं कि आखिरकार चेतना और अवचेतन के बीच एक रस्साकशी चलती है। किसी चीज को खरीदने के लिए आपको एक जागरूक फैसला करना होता है।
    इनमें से कुछ तकनीकों का पहली बार इस्तेमाल 1970 के दशक में हुआ लेकिन अब उनका इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है क्योंकि उपकरण बेहतर हो गए हैं। आई ट्रैकिंग टेस्ट में तकनीक से लैस चश्मे के साथ कैमरे का इस्तेमाल होता है जो किसी व्यक्ति के टीवी देखते समय या फिर किसी स्टोर में किस चीज पर कितनी देर निगाहें टिकी रही, यह दर्ज कर लेता है। इसे दूसरी तकनीकों के साथ जोड़ा जा सकता है जैसे गैल्वेनिक स्किन रिस्पांस जिसमें किसी व्यक्ति के हाथ में लगे सेंसर पसीना आने को पकड़ लेते हैं या फिर इलेक्ट्रोएनसेफैलोग्राफी जिसमें सिर पर लगे सेंसर के जरिए दिमाग में होने वाली हलचल दर्ज हो जाती है।
    टीविटी हेल्थ ने बुजुर्गों के लिए बनाए गए प्रोग्राम सिल्वर स्नीकर्स के लिए इनमें से कई तकनीकों का इस्तेमाल किया। आईसोबा ने इसके लिए 1000 से ज्यादा बुजुर्गों को तेजी से बदलती ढेर सारी तस्वीरें और कसरत के बारे में कुछ शब्द दिखा कर उनका रिस्पांस जमा किया। इसके आधार पर बनी रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादातर लोग कसरत को इसलिए अहम मानते हैं क्योंकि यह उन्हें सक्षम बनाता है और समर्थ बनाता है। यह खोज अहम थी क्योंकि टीविटी ने इसके आधार पर ही मार्केटिंग का अभियान तैयार किया। इसमें लिविंग लाइफ वेल भी था जिसमें अपनी उम्र को मात देते बुजुर्ग दिखाए गए। जैसे कि एक दादा जैसा शख्स छोटे से बच्चे को अपनी पीठ पर बिठा कर करसत करते नजर आते हैं। इन विज्ञापनों ने औरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। (एएएफपी)

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Posted Date : 26-Dec-2017
  • नई दिल्‍ली: सुपरटेक ने इंडियाबुल्स समूह से लिया 70 करोड़ रुपये का कर्ज लौटा दिया है. यह धन उसने पिछले सप्ताह अल्टिको कैपिटल से जुटाया था. नोएडा स्थित इस डेवलपर कंपनी ने अल्टिको कैपिटल से पिछले सप्ताह 430 करोड़ रुपये जुटाये थे. सूत्रों के अनुसार सुपरटेक ने इंडियाबुल्स समूह को 70 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान कर दिया है. शेष धनराशि का उपयोग नोएडा में आवासीय परियोजनाओं के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए किया जाएगा.

    अल्टिको कैपिटल का निवेश नोएडा की सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक की केपटाऊन परियोजना के विकास के लिए है जिसमें ओआरबी और केपलक्स टावर शामिल हैं.

    सुपरटेक केपटाऊन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सबसे बड़ी आवासीय परियोजनाओं में से एक है जिसमें 8,000 आवासीय इकाइयां हैं. यह परियोजना काफी कुछ आगे बढ़ चुकी है. कुल 1.10 करोड़ वर्गफुट की इस परियोजना में से 55 लाख वर्गफुट की डिलीवरी की जा चुकी है और 4,300 फ्लैट आवंटित किये जा चुके हैं. (भाषा)

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Posted Date : 25-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 25 दिसंबर। ​ नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार के लिए भारत 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से प्रमुख राजमार्ग गलियारों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्रों से जोड़ेगा. केंद्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी.

    उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत करीब दो हजार किलोमीटर राजमार्ग बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा, प्रमुख राजमार्ग गलियारों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्रों से जोड़ने के लिए करीब दो हजार किलोमीटर राजमार्ग बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ व्यापार के लिए किया जाएगा. यह भारतमाला परियोजना का हिस्सा होगा.
    मंत्रिमंडल ने करीब सात लाख करोड़ रुपये के खर्च से मार्च 2022 तक 83,677 किलोमीटर सड़क बनाने को 25 अक्टूबर को मंजूरी दी थी. इसमें 5.35 लाख करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना भी शामिल है.
    परियोजना के वित्त पोषण के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा कि केंद्रीय सड़क कोष से 2.37 लाख करोड़ रुपये आएंगे जबकि 2.05 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाए जाएंगे. इसके अलावा राजमार्ग परियोजनाओं के मौद्रीकरण से 34 हजार करोड़ रुपये तथा बजटीय आवंटन से 60 हजार रुपये जुटाए जाएंगे. गडकरी ने कहा कि इसके अलावा और भी कुछ परियोजनाएं हैं जिनका लक्ष्य दक्षिण एशिया तथा आसियान के देशों के साथ संपर्क बढ़ाना है.(भाषा)

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Posted Date : 24-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 24 दिसंबर । खाद या यूरिया पर सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी अब सीधे किसानों के खातों में जमा की जाएगी। केंद्र के साथ मिलकर राज्य सरकारों ने इसके लिए जरूरी तैयारियां कर ली हैं। एक जनवरी 2018 से देश भर में इस योजना को लागू किया जाएगा। साथ ही यूरिया लेने के लिए किसानों को आधार कार्ड दिखाना भी जरूरी होगा।
    एक अरसे से सरकार को यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी में चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। इसके मद्देनजर सरकार ने देश के 14 राज्यों के 17 जिलों में प्रयोग के तौर पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की शुरुआत की थी। उत्साहजनक परिणाम हासिल होने के बाद अब इसे देश भर में लागू करने के लिए कमर कसी गई है।
    रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किसानों की जमीन, उनके बैंक खाते और उनकी खाद की आवश्यकता जैसी चीजों के ब्यौरे उनके आधार के साथ जोडऩे का काम भी जारी है। 
    साथ ही यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए इसकी बिक्री करने वाली दुकानों पर प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें भी लगाई जा रही हैं।
    उर्वरकों का इस्तेमाल केवल किसान ही कर सकें, इसके लिए यूरिया का उत्पादन करने वाली घरेलू कंपनियों से केंद्र सरकार ने 2015 में कुल उत्पाद के 75 प्रतिशत पर नीम के तेल की कोटिंग करने को कहा था। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रसायन उद्योगों ने उर्वरकों का इस्तेमाल बंद कर दिया था। साथ ही सरकार ने सब्सिडी के रूप में आवंटित किए जाने वाले हजारों करोड़ रुपये की बचत की। इसके अलावा किसानों की कृषि लागत में कमी आने से उनकी आय में वृद्धि हुई। उर्वरक का आयात घटने से विदेशी मुद्रा की बचत के अलावा नीम लेपित यूरिया ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी योगदान दिया। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 24-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 24 दिसंबर । 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की खबरों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज फुल स्टॉप लगा दिया। वित्त मंत्री ने कहा, इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती इन पर भरोसा ना करें। एसबीआई की एक रिपोर्ट के हवाले से खबर थी कि आरबीआई 2000 रुपये के नोट या तो वापस ले सकता है या उसकी छपाई बंद कर सकता है।
    लोकसभा में वित्त मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार आठ दिसंबर की स्थिति के अनुसार रिजर्व बैंक ने 500 रुपये के 1695.7 करोड़ नोटों की छपाई की जबकि 2000 रुपये के 365.40 करोड़ नोट की छपाई की।
    दोनों मूल्य वर्ग के नोटों का कुल मूल्य 15,787 अरब रुपये बैठता है। इसका मतलब है कि उच्च मूल्य वर्ग के बाकी बचे (15,787 अरब रुपये-13,324 अरब रुपये) 2,463 अरब रुपये के नोट रिजर्व बैंक ने छापे तो हैं लेकिन उन्हें बाजार में जारी नहीं किया।
    दिलचस्प बात यह है, इसके आधार पर यह माना जा सकता है कि 2463 अरब रुपये की मुद्रा छोटी राशि के नोटों में छापी गई हो। केन्द्रीय बैंक ने इस बीच इतनी राशि के 50 और 200 रुपये के नये नोटों की छपाई की हो।
    सरकार ने पिछले साल आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से हटाने का फैसला किया। ये नोट तब चलन में जारी कुल मुद्रा का 86 से 87 प्रतिशत था। इससे नकदी की कमी हुई और बैंकों में चलन से हटाये गये नोटों को बदलने या जमा करने को लेकर लंबी कतारें देखी गयी। उसके बाद रिजर्व बैंक ने 2,000 रुपये मूल्य के नये नोट के साथ 500 रुपये का भी नया नोट जारी किया। उसके बाद, रिजर्व बैंक ने 200 रुपये का भी नोट जारी किया।(एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 23-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 23 दिसंबर। पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति के बीच आधार को लेकर शुक्रवार को बहस हो गई। जहां वकील से नेता बने चिदंबरम ने एक उदारवादी दृष्टिकोण को रखते हुए इस पर चिंता जताई, वहीं नारायणमूर्ति का कहना था कि निजता की रक्षा के लिए संसद को कानून बनाने की जरूरत है।
    आईआईटी बांबे के एक कार्यक्रम में केद्र के हर जरूरी चीज को आधार से जोडऩे के कदम पर चिदंबरम ने कहा, सरकार पूरी तरह बहरी हो गई है। वह कुछ नहीं सुनना चाहती। वह इस धरती की हर चीज को आधार से जोडऩे पर आमादा है। वहीं नारायण मूर्ति ने कहा कि किसी भी दूसरे आधुनिक देश की तरह ड्राइविंग लाइसेंस की तरह हर व्यक्ति की पहचान रखे जाने की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस पहचान से किसी व्यक्ति की निजता का हनन न हो।
    वहीं चिदंबरम का कहना था कि हर लेनदेन को आधार से जोडऩे के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह इस देश को 'ओर्विलियाई देशÓ में बदल देगी। यह एक उदार लोकतंत्र के आदर्शों और खुले समाज के साथ समझौता करने जैसा है। उन्होंने कहा, अगर आप जवान पुरुष अथवा महिला हैं और निजी छुट्टी पर कहीं जाना चाहते हैं, भले ही दोनों की शादी न हुई हो तो इसमें हर्ज क्या है। 
    अगर कोई जवान शख्स गर्भ निरोधक खरीदना चाहता है तो उसे अपना आधार अथवा पहचान बताने की आवश्यकता क्यों है? सरकार यह क्यों जानें कि मैंने कौन सी दवा ली है? मैं किस सिनेमाघर अथवा होटल में जा ठहर रहा हूं। या मेरे दोस्त कौन हैं? अगर मैं सरकार में होता तो इस जानने का विरोध करता कि कोई व्यक्तिगत जीवन में क्या कर रहा है?
    इसका जवाब देते हुए नारायण मूर्ति ने कहा कि मैं आपसे सहमत नहीं हूं। जिन चीजों के बारे में आप बात कर रहे हैं, वो गूगल के जरिये पहले से ही उपलब्ध हैं। इस पर चिदंबरम ने कहा, आज कई एजेंसियां हैं, जो आधार मांगती हैं। यहां तक कि शवदाहगृह में भी आधार मांगा जा रहा है। हालांकि चिदंबरम ने साफ किया कि वह आधार को पहचान नंबर बनाने या सब्सिडी खातों तक पहुंचाने के लिए लिंक करने के विरोधी नहीं हैं।
    नारायण मूर्ति ने कहा कि हमें आधार को 'रद्दीÓ में नहीं फेंक देना चाहिए। उन्होंने संसद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सांसद निजता के लिए कोई कानून लेकर नहीं आ पा रहे। ताकि लोगों के व्यक्तिगत डाटा की रक्षा की जा सके। हालांकि लंबी बहस के बाद दोनों में एक मुद्दे पर सहमति बन गई। मूर्ति ने कहा, जब तक निजता की सुरक्षा के लिए कानून है, कोई दिक्कत नहीं हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि आपको फिल्म का टिकट बुक करने या दूसरे कामों के लिए आधार की आवश्यकता है। इस पर हामी भरते हुए चिदंबरम ने भी कहा कि वह नारायण मूर्ति से सहमत हैं। (एजेंसी)

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Posted Date : 23-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 23 दिसंबर। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुशल ट्रेडलिंक लिमिटेड के शेयरों में धोखाधड़ी वाले कारोबार के लिए पांच लोगों पर कुल एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी ने एक आदेश में कहा कि धनंजय कुमार, अमृतभाई चतुरदास पटेल, नरेंद्रभाई शिवभाई परमार, संदीप कुमार प्रकाशभाई प्रजापति तथा सावन केशवलाल प्रजापति प्रत्येक पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 
    नियामक ने एक अगस्त 2014 से 11 मार्च 2015 के दौरान कुशल ट्रेडलिंक के शेयरों की जांच की थी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी तरीके से प्रतिभूति कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। इसी जांच के आधार पर सेबी ने इन लोगों पर यह जुर्माना लगाया है। इस बीच, एक अन्य फैसले में सेबी ने आईएफसीआई लिमिटेड पर खुलासा नियमों के उल्लंघन के लिए 14 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 22 दिसंबर । देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को वहनीय बनाने के लिए सरकारी प्रोत्साहनों की जरूरत होगी। देश में पर्यावरण अनुकूल मोबिलिटी समाधानों पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी की 2020 तक भारत में पहला ईवी पेश करने की योजना है और वह इस यात्रा की तैयारी में ग्राहकों की राय जानने के लिए अध्ययन करवाएगी।
    मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने यहां कहा कि वहनीयता एक प्रमुख चुनौती है जिसका सामना ईवी को करना होगा। ऐसे वाहनों की सफलता के लिए जरूरी है कि बैटरियों व अन्य कलपुर्जों का विनिर्माण भारत में ही करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि उनकी लागत कम हो।
    क्या देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत होगी यह पूछे जाने पर भार्गव ने कहा, मेरी राय में इसकी जरूरत होगी। मेरी सोच तो यही कहती है कि कुछ हस्तक्षेप की जरूरत पड़ेगी लेकिन पता नहीं यह कितना होगा। उन्होंने कहा कि चूंकि भारतीय वाहन उद्योग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नयी चीज है इसलिए यह कहना मुश्किल है कि कितनी सरकारी मदद की जरूरत होगी। (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 21-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 21 दिसंबर। अस्पतालों में दवाइयों और दूसरी जरूरी चीजों को तय सीमा से कई गुना अधिक दामों पर बेचे जाने को लेकर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) सख्त रुख अपनाता दिख रहा है। उसने डिसपोजेबल सिरिंज बनाने वालों को चेतावनी दी है। उनके साथ एक बैठक में एनपीपीए ने कहा कि या तो निर्माता सिरिंज के दामों पर लगाम लगाएं या फिर सरकार को कोई कदम उठाना होगा।
    हाल में एनपीपीए को ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जिनमें आरोप लगाया गया कि अस्पताल तय सीमा से कहीं अधिक दाम पर दवाइयां और अन्य उत्पाद बेच रहे हैं। एनपीपीए के सामने आए कई मामलों में पाया गया कि अस्पताल तय कीमत से 20 गुना तक ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं।
    बैठक में एनपीपीए के चेयरमैन ने सिरिंज निर्माताओं और आयातकों से कीमतों की हद तय किए जाने को लेकर सुझाव मांगे थे। इस पर कंपनियों ने कहा कि ट्रेड मार्जिन अधिकतम 75 प्रतिशत तक रखा जा सकता है। उनका यह भी कहना था कि ऐसा दूसरे मेडिकल उत्पादों के लिए भी किया जा सकता है।
    एनपीपीए का यह रुख हाल ही में गुडग़ांव के फोर्टिस अस्पताल से जुड़ी एक घटना के बाद आया है। इस घटना में डेंगू से पीडि़त सात साल की बच्ची की मौत के बाद अस्पताल ने परिवार को 16 लाख रुपये का बिल थमा दिया था। मरीज के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल ने सिरिंज, तौलिये और ग्लव्स के कई गुना दाम वसूले। जांच में एनपीपीए ने पाया कि अस्पताल ने इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई चीजों पर कई गुना ज्यादा चार्ज लगाया था। मामला सामने आने के बाद फोर्टिस अस्पताल की काफी आलोचना हुई थी।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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Posted Date : 21-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 21 दिसंबर । भारतीय रिजर्व बैंक या तो 2,000 रुपये नोट वापस ले सकता है या फिर बड़ी राशि कि मुद्राओं की छपाई बंद कर सकता है। हाल ही में एसबीआई की जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
    एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हमने ये देखा है कि मार्च 2017 तक 3,501 अरब रुपये के छोटी राशि के नोट चलन में थे। आठ दिसंबर तक 13,324 अरब रुपये तक की बड़ी राशि के नोट चलन में थे।
    हाल ही में लोकसभा में वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आरबीआई ने अभी तक 500 रुपये के 16957 करोड़ नोट और 2,000 के 3654 करोड़ नए नोटों की छपाई की है। इन सभी नोटों की कुल राशि 15787 अरब रुपये हैं।  इस आरबीआई ने 2,463 अरब रुपये की ज्यादा नोटों की छपाई कर दी है।
    एसबीआई की मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने कहा कि जो भी ज्यादा नोट आरबीआई द्वारा छापे गए हैं उन्हें मार्केट में नहीं उतारा जाएगा।
    रिपोर्ट में कहा गया है कि तार्किक रूप से देखें तो आमतौर पर 2000 के जरिए लेन देन करने में हमें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस अब ऐसा लगता है कि आरबीई ने 2000 के नोटों को छापना बंद कर दिया है या फिर इनकी छपाई कम कर दी हैं।
    मालूम हो कि पिछले साल 8 नवंबर को सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था जिसके बाद से उस समय के 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से ही आरबीई ने 500 और 2000 के नए नोटों की छपाई शुरु की थी।(एजेंसी)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • शैली सेठ मोहिले और अमृता पिल्लई
    मुंबई, 20 दिसंबर। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उतरने की संभावना तलाश रही है। कंपनी की योजना से वाकिफ तीन लोगों ने इसकी जानकारी दी। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में जैविक ईंधन कारोबार के जोखिम को कम करने के लिए दीर्घावधि की रणनीति के लिहाज से यह कंपनी के लिए मुफीद होगा।
    यार्न से लेकर दूरसंचार क्षेत्र में कारोबार करने वाला रिलायंस समूह इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में संभावना तलाशने के लिए सलाहकार फर्मों के साथ व्यवहार्यता अध्ययन कर रहा है। भारत में 2032 तक इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़ा बाजार हो जाएगा। सलाहकार फर्में तेजी से चार्ज होने वाले स्टेशनों, बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कंपनी के लिए संभावना तलाश रही है।
    मामले के जानकार एक सूत्र ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना का विचार रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का है। और यह उन सात नए कारोबारों में से एक है जहां कंपनी अगले चरण में भावी विकास के लिए संभावना देख रही है। इस बारे में पुष्टि के लिए रिलायंस को शनिवार को ईमेल भेजा गया था लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया।
    एक अन्य शख्स ने कहा कि जीएसटी की दरें घोषित होने के बाद से रिलायंस इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाश रही है लेकिन इस क्षेत्र में काफी कुछ सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर निर्भर होगा। हालांकि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के स्पष्टï संकेत दिए हैं और जीएसटी परिषद ने ऐसे वाहनों पर 12 फीसदी कर की दर तय की है जबकि पेट्रोल, डीजल और हाइब्रिड कारों पर 28 फीसदी जीएसटी के साथ उपकर भी लगाया गया है। 
    सलाहकार फर्म ग्रांट थार्नटन में पार्टनर हरीश एच वी रिलायंस के इस क्षेत्र में दिलचस्पी से चकित नहीं हैं। उन्होंने कहा, आरआईएल मुख्य रूप से ऊर्जा कारोबार में है और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उसका विस्तार तार्किक प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उतर सकती हैं।
    घरेलू बाजार की व्यापकता को देखते हुए भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण संयंत्र को सपोर्ट कर सकता है और बैटरी उत्पादन के लिए निर्यात का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
    घरेलू ब्रोकरेज के एक विश्लेषक ने कहा कि आरआईएल हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करती रहती है। कंपनी यॉर्न, पेट्रोरसायन, टेक्सटाइल, रिफाइनिंग रिटेल और दूरसंचार क्षेत्र में कारोबार कर रही है। उन्होंने कहा, इनमें से कुछ दांव सही होते हैं और कुछ उतने कारगर नहीं होते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उतरने से उसे तेल आधारित अपने पोर्टफोलियो का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।
    घरेलू ब्रोकरेज के एक विश्लेषक ने कहा कि आरआईएल को अपने नकदी के निवेश के लिए नए कारोबार की भी जरूरत है। कंपनी ने हाल ही में दो बड़ी परियोजनाओं - पेट्रो रसायन का विस्तार और जियो पूरी की है। अब वह इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उतरने की संभावना देख रही है।
    जून में आरआईएल ने अपनी साझेदार बीपी के साथ केजी डी6 ब्लॉक के विकास पर 40 हजार करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की थी। इसके साथ ही दोनों कंपनियों ने गैर-परंपरागत मोबिलिटी समाधानों में साझेदारी करने के भी संकेत दिए थे। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आरआईएल की कुल आय 1.90 लाख करोड़ रुपये रही जबकि शुद्घ मुनाफा 17,217 करोड़ रुपये रहा। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 19 दिसंबर । डिजिटल करेंसी बिटकॉइन में निवेश और कारोबार करने के मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए आयकर विभाग देशभर में चार से पांच लाख अति धनाढ्य व्यक्तियों को नोटिस जारी करने की तैयारी में है। ये एचएनआई वे हैं जो बिटकॉइन एक्सचेंजों में कारोबार कर रहे थे।
    टैक्स अधिकारियों ने इस मामले में पिछले सप्ताह इस तरह के नौ एक्सचेंजों का सर्वे किया था। यह कदम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के प्रयासों के तहत उठाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इन एक्सचेंजों में अनुमानत: 20 लाख इकाइयां रजिस्टर्ड थीं जिनमें से चार से पांच लाख ऑपरेशनल हैं और कारोबार एवं निवेश कर रही हैं। 
    बिटकॉइन का पहला ट्रांजैक्शन 12 जनवरी 2009 को किया गया था। इसके आविष्कार करनेवाले सतोशी नाकामोतो ने 100 बिटकॉइन हाल फिन्ने नामक शख्स को भेजी थी। बिटकॉइन का पहला ट्रांजैक्शन 12 जनवरी 2009 को किया गया था। इसके आविष्कार करनेवाले सतोशी नाकामोतो ने 100 बिटकॉइन हाल फिन्ने नामक शख्स को भेजी थी।   (भाषा)

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 19 दिसंबर। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को पत्र लिखकर कारों और एसयूवी में क्रैश गार्ड बैन करने के निर्देश जारी किए हैं। क्रैश गार्ड को आमतौर पर बुल गार्ड के नाम से जाना जाता है। मंत्रालय ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर वाहन में अवैध रूप से क्रैश गार्ड लगा मिला तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 52 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जाएगा। 
    अधिकतर कार चालक अपनी गाड़ी में यह सोचकर क्रैश गार्ड लगवाते हैं कि इससे दुर्घटना के समय वाहन में कम नुकसान होगा। यह सीधे वाहन के फ्रेम से जोड़ा जाता है, इसलिए एक्सिडेंट होने पर कार को भी काफी नुकसान होता है। इसके अलावा वाहन में बैठे लोगों को भी ज्यादा चोट आती है। 
    इसके अलावा ये भी हैं नुकसान
    1. टक्कर होने पर यह एयरबैग्स को खुलने से रोकता है। 
    2. आजकल जो कारें बनाई जा रही हैं वह पैदल यात्रियों की सेफ्टी को भी ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। ताकी टक्कर होने पर सामने वाले को कम चोट आएं। हालांकि बुल गार्ड होने पर सामने वाले की मौत भी हो सकती है। 
    3. बुल गार्ड स्टील का बना होता है इसलिए यह वाहन का वजन भी बढ़ा देता है। इससे कार की परफॉर्मेंस पर फर्क पड़ता है और माइलेज भी कम हो जाता है।   (अमर उजाला)

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Posted Date : 18-Dec-2017
  • साहिल मक्कड़ और शाइन जैकब 
    फैजाबाद/नई दिल्ली :  उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के निवासी वसीम खान उन 37.2 लाख लाभार्थियों में से हैं, जिन्हें रसोई गैस की सब्सिडी उनके संबंधित बैंंक खातों मेंं मिलने में कठिनाई आ रही है। खान का दावा है कि उनके परिवार को पिछले कुछ महीनों से सब्सिडी नहीं मिल रही है, जबकि उन्होंने स्थानीय गैस आपूर्तिकर्ता को बैंक खाता और आधार क्रमांक मुहैया कराया है।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियोंं ने माना है कि लाभार्थियों को भुगतान में देरी संबंधी समस्या है। एक तेल विपणन कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'करीब 37.2 लाख ग्राहकों को सब्सिडी से संबंधित समस्याएं आ रही हैं। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे हैं जिन्हें अपने हाल में खुले एयरटेल भुगतान बैंक के खाते के बारे में जानकारी नहीं है।' 
     
    अधिकारी ने आरोप लगाया कि एयरटेल भुगतान बैंक ने अनौपचारिक सहमति के बगैर एयरटेल के मोबाइलधारकोंं का नया खाता खोल दिया है। ये उपभोक्ता आधार से अपने सिम के सत्यापन के लिए एयरटेल आउटलेट गए थे। मौजूदा स्थिति के मुताबिक गैस सब्सिडी नए खुले खाते में जाती है। अधिकारी ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि करीब 167 करोड़ रुपये की सब्सिडी पिछले तीन महीने (सितंबर, अक्टूबर और नवंबर) में एयरटेल भुगतान खाते में गई है।'  
     
    दिलचस्प है कि उपरोक्त  तीन महीनों में बैंंक ने सब्सिडी से जुड़े 95 लाख लेन देन किए हैं। सब्सिडी के रूप में 167 करोड़ रुपये की राशि इन 38 लाख खातोंं में जमा है। एयरटेल पेमेंट बैंक चालू होने के पहले साल के आखिर में बैंक ने 31 मार्च 2017 तक कुल 68.33 करोड़ रुपये जमा होने की रिपोर्ट दी थी।   ऐसा तब हो गया जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले वित्तीय सेवा विभाग से संपर्क कर कहा था कि ऐसे खातों को सब्सिडी वापसी से अलग किया जाए। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'नियमों के मुताबिक एलपीजी सब्सिडी उस खाते में जाती है, जिसे हाल मेंं आधार के साथ ग्राहक ने जोड़ा हो। लेकिन हमें लगता है कि करीब 37.2 लाख उपभोक्ता एयरटेल बैंंक खाते में सब्सिडी पा रहे हैं, जो नहीं जानते हैं कि उनका कोई खाता खुला है। लेकिन हमारी तरफ से धन पहले ही जारी किया जा चुका है।' 
     
    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की शिकायत को देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने भारती एयरटेल के खिलाफ जांच शुरू की है। बैंक से कहा गया है कि क्यों न आधार नियमों के उल्लंघन के मामले में उसके ऊपर जुर्माना लगा दिया जाए। इसके बाद यूआईडीएआई ने अस्थायी  रूप से भारती एयरटेल और एयरटेल भुगतान बैंक को आधार से सिम सत्यापन करने पर शनिवार को रोक लगा दी। 
    इसके बारे में पूछे जाने पर एयरटेल के प्रवक्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि उसने पहले ही यूआईडीएआई को जवाब भेज दिया है और एयरटेल भुगतान बैंक सभी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'मोबाइल फोन के फिर से वैरीफिकेशन और एयरटेल भुगतान बैंक खाता खोला जाना पूरी तरह से अलग मामला है और यह एक दूसरे से जुड़े नहीं हैं। सभी एयरटेल भुगतान बैंक खाते ग्राहकोंं की सहमति से खोले गए हैं। सभी उपभोक्ताओंं से प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के लिए अलग से सहमति ली गई है।' 

    कंपनी ने यह भी साफ किया है कि ग्राहकों को एसएमएस और ऑटोमेटेड कॉल (यह 12 भाषाओं में उपलब्ध है) के माध्यम से समय समय पर बताया गया है कि उनकी सब्सिडी उनके खाते में आ रही है। ऑटोमेटेड कॉल से बताया जाता है कि इतने रुपये की सरकारी सब्सिडी आपके एयरटेल भुगतान बैंक खाते में आ गई है और साथ ही अगर कोई ब्याज राशि आती है तो उसकी भी सूचना दी जाती है।  

    उन्होंने कहा, 'एयरटेल भुगतान बैंक बचत खाते में जमा राशि को किसी एयरटेल स्टोर से निकाला जा सकता है या किसी भी बैंंक खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है। डीबीटी राशि की निकासी का कोई शुल्क नहीं लगता है और न ही खाते खोलने, उसके रखरखाव या उसे बंद करने का कोई खर्च लिया जाता है।' (Business Standard)

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Posted Date : 18-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 18 दिसंबर । भारतीय रेलवे ने बिजली के इंजनों के साथ नवीनतम यूरोपीय रेल सुरक्षा प्रणाली लैस करने के लिए 12 हजार करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, रेलवे बोर्ड ने 15 दिसंबर को अपनी बैठक में 6 हजार बिजली इंजनों को यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली (ईटीसीएस) लेवल-2 से लैस करने को मंजूरी दी है, जिससे चालकों या पॉयलटों को रेल दुर्घटनाएं रोकने में मदद मिलेंगी।
    इसके अलावा बोर्ड ने चार महानगरों को जोडऩे वाले 9,054 किमी लंबे स्वर्णिम चतुर्भज मार्ग को दुर्घटना मुक्त कॉरिडोर बनाने के लिए ईटीसीएस लेवल-2 प्रणाली को स्थापित करने का फैसला किया है। इस पूरी परियोजना पर ईटीसीएस लेवल-2 के अनुपालन में करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। मौजूदा समय में रेलवे के पास एक आधारीय ऑटोमेटिक रेल सुरक्षा प्रणाली है, जो ईटीसीएस लेवल-1 पर आधारित है, जो पॉयलटों को एक सीमित भाग पर बैक-अप मुहैया कराती है।
    क्या है यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली?
    इसे रेल सुरक्षा चेतावनी प्रणाली के नाम से जानते हैं। यह सुविधा ईटीसीएस लेवल-1 पर आधारित है, जिसे करीब 342 किमी के रेल मार्ग पर क्रियान्वित किया जाता है। गतिमान एक्सप्रेस निजामुद्दीन स्टेशन से आगरा के बीच 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है। इस प्रणाली द्वारा यह सुरक्षित दौड़ती है। हालांकि, इस प्रणाली को उन्नत करके विश्व मानकों के अनुरूप करने का फैसला किया गया है, क्योंकि ईटीसीएस लेवल-1 की अपनी सीमाएं हैं।
    कैसे करता है काम?
    ट्रेन की सुरक्षा चेतावनी प्रणाली में सिग्नलों की स्थिति संबंधी सूचना-यह लाल, पीले या हरे-इंजन को पहले भेजी जाती है, जो डीएमआई (ड्राइवर मशीन इंटरफेस) पर इंजन चालक के सम्मुख दिखाई देता है। ईटीसीएस लेवल-1 प्रणाली में सिग्नल संबंधी स्थिति की जानकारी इंजन को जब इंजन एक बेलिस से गुजरता है तो एक निश्चित अवधि पर प्राप्त होती है और चालक को अपडेटेड सूचना के लिए अगले बेलिस से गुजरने का इंतजार करना पड़ता है। ईटीसीएस लेवल-2 के क्रियान्वयन के साथ सिग्नल की स्थिति की जानकारी के लिए ट्रैक पर लगाए बेलिस की जरूरत नहीं होती। (एजेंसी)

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Posted Date : 18-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 18 दिसंबर । देश के 37.2 लाख रसोई गैस उपभोक्ताओं को बैंक से सब्सिडी हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 
    एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने माना है कि लाभार्थियों को इस तरह की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। उधर, एक तेल कंपनी के अधिकारी का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें अपने हाल में खुले एयरटेल भुगतान बैंक के खाते के बारे में जानकारी नहीं है। उनका आगे कहना है कि एयरटेल भुगतान बैंक ने सहमति के बगैर एयरटेल के मोबाइलधारकों का नया खाता खोल दिया। मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक गैस सब्सिडी नए बैंक खाते में जाती है। इस अधिकारी के अनुमान के मुताबिक बीते तीन महीनों में करीब 38 लाख खातों में 167 करोड़ रुपये की सब्सिडी एयरटेल भुगतान खाते में गई है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

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Posted Date : 17-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 17 दिसंबर )। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने भारती एयरटेल और एयरटेल पेमेंट बैंक पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनकी इलेक्ट्रॉनिक नो यूअर कस्टमर (ई-केवाईसी) लाइसेंस अस्थायी तौर पर रद्द कर दिया है। अब दोनों कंपनियां ई-केवाईसी प्रोसेस से मोबाइल कस्टमर्स के आधार बेस्ड सिम वेरिफिकेशन और पेमेंट बैंक क्लाइंट्स का ई-केवाईसी नहीं कर सकेंगी।
    आरोप है कि भारती एयरटेल ने अपने ग्राहकों की सहमति लिए बिना ही उनके बैंक खाते खोल दिए, जबकि वे तो अपने सिम का आधार आधारित केवाईसी करवाने आते थे। यूआईडीएआई ने उन आरोपों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिनमें एलपीजी रसोई गैस सब्सिडी लेने के लिए भी ऐसे पेमेंट बैंक अकाउंट्स को लिंक करने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यूआईडीएआई ने एक अंतरिम आदेश में कहा कि भारती एयरटेल और एयरटेल पेमेंट बैंक के ई-केवाईसी लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। हालांकि इसके लिए अन्य उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
    जानकारी के मुताबिक, एयरटेल पेमेंट्स बैंक के 23 लाख से ज्यादा ग्राहकों को उनके इन बैंक खातों में 47 करोड रुपये मिले, जिनके खोले जाने की उन्हें जानकारी तक नहीं थी। यही नहीं, इन लोगों की एलपीजी सब्सिडी तक इन खातों में आने लगी थी। यूआईडीएआई के समक्ष यह मामला लाया गया था। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 16-Dec-2017
  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार को अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं से लिंक करने के खिलाफ दर्ज याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए आधार से लिंक करने की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ा दी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी को और कई मोर्चों पर राहत दी है। 
    बिना आधार खोलें खाता- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई नया बैंक खाता खोलना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है। कोई  भी बैंक आपको बिना आधार के खाता खुलवाने से इंकार नहीं कर सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने हालांकि कहा है 
    कि बिना आधार के वही लोग खाता खोल सकेंगे, जिन्होंने आधार नहीं बनाया है और जो ये बता पाएंगे कि उन्होंने आधार बनाने के लिए अप्लाई किया है।
    सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के लिए तय  6 फरवरी की डेडलाइन को भी खत्म कर दिया है। अब अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के लिए भी आपके पास 31 मार्च तक का समय है।
    सुप्रीम कोर्ट ने आधार को विभिन्न योजनाओं से लिंक करने को लेकर आपको अंतरिम राहत दी है। इसलिए अगर आप ने अभी आधार कार्ड नहीं बनवाया है, तो इसे जरूर बना लें।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार को अलग-अलग  योजनाओं से लिंक करने के लिए अनिवार्य करना कितना सही है, इसको लेकर अंतिम फैसला जनवरी में देगा।
    आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मिली इस राहत का फायदा ये है कि आपको आधा को विभिन्न योजनाओं से लिंक करने के लिए कुछ और समय मिल गया है।
    मोदी सरकार ने 139 कल्याणाकारी योजनाओं को आधार से लिंक करने के लिए कहा है। फिलहाल इन सभी योजनाओं को आधार से लिंक करने के लिए अब आपके पास 31 मार्च तक समय है। (आज तक)

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 15 दिसंबर । अगर आप मोबाइल फोन, टीवी और माइक्रोवेव खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपकी जेब पर बोझ बढऩे वाला है। केंद्र सरकार ने विदेशी मोबाइल, टीवी और माइक्रोवेव पर कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। सरकार के इस फैसले के बाद इनकी कीमतों में बढ़ौतरी हो जाएगी।

    जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने यह कदम मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। सरकार के इस कदम से अब मोबाइल फोन 15 फीसदी महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही एलईडी टीवी और माइक्रोवेव की कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ौतरी हो गई है। वाटर हीटर पर भी कस्टम ड्यूटी को दुगुना कर 20 फीसदी कर दिया गया है। हेयर ड्रेसिंग से जुड़े इलेक्ट्रिक उत्पाद पर भी अब इसी दर से कस्टम ड्यूटी लागू होगी।बता दें यह बढ़ौतरी केवल उन उपकरणों पर हुई है, जिनको विदेश से इंपोर्ट किया जाता है। देश में बनने वाले मोबाइल फोन, टीवी और माइक्रोवेव के दाम नहीं बढ़ेंगे। (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 15 दिसंबर ।  भारत में 1980 के दशक में डीरेग्युलेशन और रिफॉम्र्स यानी सुधारों का दौर शुरू होने के बाद से लोगों के बीच आर्थिक असमानता में भारी वृद्धि हुई है। देश में सबसे अधिक कमाने वाले 0.1 प्रतिशत लोगों की ग्रोथ आमदनी के लिहाज से नीचे के 50 प्रतिशत में मौजूद लोगों से अधिक हो रही है। 
    वल्र्ड इनक्वलिटी लैब ने गुरुवार को जारी अपनी पहली वल्र्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट में कहा, 2014 में भारत की राष्ट्रीय आमदनी में आमदनी के लिहाज से शीर्ष 1 प्रतिशत लोगों की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी, जबकि शीर्ष 10 प्रतिशत का इसमें लगभग 56 प्रतिशत हिस्सा था। सबसे अधिक कमाने वाले 0।1 प्रतिशत लोगों की ग्रोथ आमदनी के लिहाज से नीचे के 50 प्रतिशत लोगों से अधिक हो रही है। नीचे के 50 प्रतिशत लोगों की अब कुल आमदनी में हिस्सेदारी घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है। 
    रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती असमानता का यह ट्रेंड 1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद 30 वर्षों से विपरीत है, जब आमदनी में असमानता काफी कम हो गई थी और नीचे के 50 प्रतिशत लोगों की आमदनी राष्ट्रीय औसत से अधिक बढ़ी थी। 
    रिपोर्ट में बताया गया है कि 1980 के बाद से दुनिया भर में सबसे धनी 1 प्रतिशत लोगों ने दुनिया की जनसंख्या में सबसे निर्धन 50 प्रतिशत से अधिक ग्रोथ हासिल की। अन्य शब्दों में, 1980 के बाद से दुनिया भर में पैदा हुई सभी नई आमदनी में से 27 प्रतिशत सबसे धनी 1 प्रतिशत लोगों के पास गई, जबकि सबसे निर्धन 50 प्रतिशत लोगों के पास कुल ग्रोथ का केवल 13 प्रतिशत आया। 
    रिपोर्ट को इकॉनॉमिस्ट फाकुंडो अल्वारेदो, लुकास चांसेल, थॉमस पिकेटी, इमेनुएल साएज और गैब्रिएल जुकमैन ने तैयार किया है। इसमें कहा गया है, इन आंकड़ों से एक बड़ी असमानता का पता चलता है क्योंकि टॉप 1 प्रतिशत में अभी 7.5 करोड़ व्यक्ति, जबकि नीचे के 50 प्रतिशत में लगभग 3.7 अरब व्यक्ति हैं। 

    यह पूंजी के मालिकाना हक में बड़े बदलाव का संकेत है। 
    रिपोर्ट तैयार करने में शामिल रहे साएज ने कहा, निजीकरण और आमदनी में बढ़ती असमानता से संपत्ति में असमानता में बढ़ोतरी हुई है। देशों में और वैश्विक स्तर पर प्राइवेट कैपिटल कुछ ही व्यक्तियों में सीमित होती जा रही है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उभरते हुए देश अगर 1980 से बाद की अपनी नीतियों पर चलना जारी रखेंगे तो वैश्विक आमदनी और संपत्ति में असमानता तेजी से बढ़ेगी। 
    इसमें कहा गया है कि वैश्विक आमदनी और संपत्ति में असमानता की समस्या से निपटने के लिए देशों की और वैश्विक कर नीतियों में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षिक नीतियों, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वेतन तय करने वाली नीतियों का बहुत से देशों में दोबारा आकलन करने की जरूरत है। आमदनी और संपत्ति में वर्तमान असमानता से निपटने और भविष्य में इसमें बढ़ोतरी को रोकने के लिए भविष्य के मद्देनजर इन्वेस्टमेंट करने की जरूरत है। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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