राजनीति

Posted Date : 23-Dec-2017
  • सोमनाथ, 23 दिसंबर।  कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी आज से गुजरात के दौरे पर हैं। राज्य में पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं, नए विधायकों से मुलाकात तो करेंगे लेकिन गुजरात की जमीं पर कदम रखते ही वह सबसे पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए गए।
    राहुल गांधी ने अपने गुजरात चुनाव के बाद के इस तीन दिवसीय गुजरात दौरे की शुरूआत गिर सोमनाथ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के दर्शनों के साथ की है। राहुल गांधी हाल में संपन्न गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान विभिन्न मंदिरों में दर्शन के लिए गये थे जिनमें सोमनाथ मंदिर भी शामिल था।
    इससे पहले जब राहुल सोमनाथ मंदिर गये तो एक विवाद पैदा हो गया था क्योंकि उनका नाम मंदिर के रजिस्टर में गैर हिंदू वाले कालम में दर्ज किया गया था। बाद में कांग्रेस ने स्पष्ट किया था कि पार्टी की ओर से मंदिर के रजिस्टर में यह दर्ज नहीं किया गया था। बता दें कि वहइ स दौरे राज्य में पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं, नए विधायकों से मुलाकात करेंगे। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Dec-2017
  • हुबली, 22 दिसंबर। कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और गुजरात चुनाव जीतने के बाद भाजपा 'कांग्रेस मुक्त भारतÓ के लिए अपने इस अगले लक्ष्य को लेकर उत्साहित दिख रही है। इसी सिलसिले में गुरुवार को हुबली में आयोजित पार्टी की 'परिवर्तन यात्राÓ में गुजरात चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक रहे योगी आदित्यनाथ ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने पिछले कुछ समय के दौरान राज्य में गर्म रहा टीपू सुल्तान का मुद्दा उछाला। योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक को हनुमान की धरती बताया जहां कभी विजयनगर का शासन था। उन्होंने राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस पर हमला करता हुए कहा कि हनुमान और विजयनगर की पूजा करने के बजाय वह टीपू सुल्तान की पूजा कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक के लोग कांग्रेस को सत्ता से हटा दें तो कोई भी टीपू सुल्तान की पूजा करने नहीं आएगा। आदित्यनाथ ने टीपू सुल्तान को हजारों लोगों का जबरदस्ती धर्मांतरण कराने वाला कट्टर तानाशाह बताया।
    कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता के पहले सेनानियों में से एक मानती है और बीते दो वर्षों से उनका जन्मदिन मना रही है। इसे लेकर योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस सरकार पर कानून व्यवस्था की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की नृशंस हत्याएं राज्य में फैली अराजकता दर्शाती हैं। कर्नाटक में टीपू सुल्तान के जन्मदिन को लेकर हाल के समय में काफी विवाद रहा है। इस सिलसिले में दो साल पहले दो व्यक्तियों की मौत भी हो गई थी।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Dec-2017
  • शिमला, 22 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी की आपसी कलह खुलकर सामने आ गई है। हिमाचल प्रदेश में अगले सीएम का नाम तय करने के लिए शिमला में बीजेपी पर्यवेक्षकों की आरएसएस नेताओं के साथ कोर कमेटी मीटिंग चल रही है। वहीं बाहर चुनाव से पहले बीजेपी की तरफ से घोषित प्रेम कुमार धूमल के समर्थक और जयराम ठाकुर के गुट के बीच जमकर नारेबाजी हो रही है। दोनों गुट अपने-अपने नेताओं को सीएम बनाने की मांग कर रहे हैं।
    इधर, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने कहा है कि हिमाचल के सीएम पर जल्द फैसला लिया जाएगा। नारे किसी नेता के पक्ष में लगाना गलत है। अगर मैं अध्यक्ष होता तो मैं ऐसे कार्यकर्ताओं को निलंबित कर देता। 
    हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद भी अभी सीएम के नाम को लेकर मुहर नहीं लगी। इसके लिए ही बीजेपी और आरएसएस की कोर कमेटी मीटिंग चल रही है। सीएम के लिए विधायक जयराम ठाकुर का नाम भी आगे चल रहा है लेकिन प्रेम कुमार धूमल के सैकड़ों समर्थक वेन्यु के बाहर इक_ा होकर उन्हें सीएम बनाने के लिए मांग कर रहे हैं। इस दौरान उनकी पुलिस से भी झड़प हो गई। 
    थोड़ी देर बाद जयराम ठाकुर के समर्थक भी वहां इक_ा होने लगे और धूमल के विरोध में नारे लगाए और कहा कि सीएम जीते हुए विधायकों में से चुना जाना चाहिए। समर्थकों ने यह भी कहा कि सीएम चुनने के लिए लॉबिंग नहीं होनी चाहिए। 
    बीजेपी की तरफ से पर्यवेक्षक बनाए गए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर गुरुवार को ही शिमला पहुंच चुके हैं। यहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नेताओं की राय जानने की कोशिश की। 
    शिमला में प्रदेश बीजेपी के साथ हुई बैठक में सीएम कैंडिडेट रहे प्रेम कुमार धूमल भी मौजूद रहे। सुजानपुर से बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद से हिमाचल प्रदेश में शीर्ष पद के लिए दौड़ शुरू है। 
     (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 21-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 21 दिसंबर। गुजरात और हिमाचल चुनावों में पीएम मोदी ने किस कदर मेहनत की, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह पार्टी की रणनीति और रैलियों पर मंत्रणा के लिए आधी रात के बाद भी अमित शाह को फोन करते थे। जीत के बाद हुई संसदीय दल की पहली बैठक में बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यह खुलासा किया। मोदी से पहले शाह ने पार्टी के सांसदों को संबोधित करते हुए गुजरात और हिमाचल चुनावों में पीएम मोदी द्वारा किए गए अथक प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने बताया, मोदीजी अक्सर रात में 2 बजे और उसके बाद तड़के 6 बजे फोन किया करते थे। मैं यह समझ नहीं पाता था कि वह आखिर सोते कब हैं।
    यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी को खड़ा करने में बीजेपी नेताओं के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए भावुक हो उठे। जनसंघ और बीजेपी के नेताओं का नाम लेते हुए उन्हें कम से कम तीन बार अपने आंसू रोकते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस पार्टी शिखर पर थी और 18 राज्यों में उसकी सरकार थी, जबकि बीजेपी इस समय 19 राज्यों में सत्ता में है। मोदी ने यह विश्वास जताया कि बीजेपी आने वाले दिनों में और भी कई राज्यों में सरकार बनाएगी। 
    पार्टी के सांसदों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, इंदिरा के समय कांग्रेस की 18 राज्यों में सरकार थी लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगियों ने साढ़े तीन वर्षों में 19 राज्यों में सरकार बना ली है। जल्द ही हम दूसरे राज्यों में भी जीत दर्ज करेंगे। बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मोदी का इंदिरा के समय की कांग्रेस का जिक्र करना महत्वपूर्ण है क्योंकि बीजेपी ने न केवल कांग्रेस को सत्ता से हटाया है बल्कि कई क्षेत्रीय पार्टियों को भी धूल चटा दी, जो राज्यों में काफी मजबूत स्थिति में थीं। 
    मोदी अपने से 14 साल छोटे बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के साथ लंबी दोस्ती का जिक्रकर भी भावुक हो गए। पीएम ने कहा कि उन्होंने युवा शाह को राष्ट्रीय नेता के तौर पर तैयार किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह पार्टी संगठन में युवा नेताओं को मौका देना चाहते हैं। भावुक मोदी ने कहा, गुजरात में बीजेपी और जनसंघ के कई नेताओं ने कठिन परिश्रम किया और उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखा। आज, मैं उन लोगों को मिस कर रहा हूं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।
    शाह ने कहा, गुजरात में 77 सीटें जीतने के बाद भी यह हास्यास्पद है कि कांग्रेस इसे अपनी नैतिक जीत मान रही है। उधर, मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि पीएम ने पार्टी नेताओं से कहा है कि वे बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के दुष्प्रचार से प्रभावित न हों।  (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 20 दिसंबर । गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक दलों में संसद में घमासान जारी है। संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर दिए गए बयान पर माफी मांगने की मांग लेकर अड़ा है। मंगलवार को इस मुद्दे पर दोनों सदनों में हंगामा हुआ।
    अब आज वित्त मंत्री अरुण जेटली विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करेंगे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज लोकसभा में मौजूद रहेंगे। लोकसभा में आज पीएमओ से जुड़े हुए सवाल पूछे जाएंगे। राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने विपक्ष को साफ तौर पर कहा कि क्योंकि राज्यसभा में कुछ नहीं हुआ है, इसलिए कोई भी माफी मांगने नहीं जा रहा है। इसके बाद राज्यसभा को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
    वित्त मंत्री अरुण जेटली, आज लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा से मुलाकात करेंगे। और इसका हल ढूंढने की कोशिश करेंगे। 
    बुधवार को भी गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर लगाए गए आरोपों को लेकर मचे हंगामे के बीच लोकसभा की  कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
    मंगलवार को लोकसभा के बाद इस मुद्दे पर राज्यसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी था। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस प्रकार का बयान देकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर सवाल उठाए गए हैं। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए। राज्यसभा में इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा दागी एमपी-एमएलए पर जो स्पेशल कोर्ट बनाने का फैसला है इसका मुद्दा भी उठाया गया था।
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू से मुलाकात की थी। उन्होंने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मिल पीएम मोदी के बयान की शिकायत की। वहीं वेंकैया नायडू ने भी विपक्ष को बताया कि सरकार की तरफ से भी मणिशंकर अय्यर के बयान को लेकर शिकायत की गई है।
    कांग्रेस सांसदों ने मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामा किया था। सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग कर रहे थे, इस दौरान वे वेल में भी आ गए। कांग्रेस सदस्यों की मांग है कि प्रधानमंत्री मोदी को मनमोहन सिंह पर दिए बयान को लेकर माफी मांगनी चाहिए। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि चुनाव खत्म हो चुके हैं जनता में अपना मत दे दिया है अब कांग्रेस सदस्यों को हंगामा छोड़ प्रश्नकाल में शामिल होना चाहिए और अपनी सीटों पर वापस चले जाना चाहिए।
    गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर हुई एक बैठक के दौरान मनमोहन सिंह का नाम आने पर कांग्रेस पीएम मोदी पर निशाना साध रही है।(आज तक)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 20 दिसंबर । गुजरात और हिमाचल चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस पार्टी संसद में हमलावर रुख अख्तियार किए हुए है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर पीएम मोदी द्वारा पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रचने के लगाए गए कथित आरोप पर पार्टी माफी मांगने की मांग कर रही है। इस बीच, राहुल गांधी द्वारा चुनाव नतीजों के दिन फिल्म देखे जाने पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर राज्यसभा सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने अजीबोगरीब बयान दिया है।
    नरेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि बीजेपी की सोच इतनी संकीर्ण क्यों है? उन्होंने कहा, यह किसी के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा मामला है। अब अगर किसी की उसी दिन सुहागरात होती तब वे कहते कि ये सुहागरात क्यों मना रहा है?
    इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि नतीजे के दिन शाम में जब बीजेपी जीत का विश्लेषण कर रही थी तब कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी एक सिनेमा हॉल में अपने दोस्तों के साथ फिल्म देख रहे थे। हालांकि राहुल गांधी ने इससे पहले ही कांग्रेस की हार स्वीकार कर ली थी और उन्होंने ट्वीट भी किए थे। 
    कांग्रेस द्वारा पीएम मोदी से माफी मांगने पर अडऩे के बाद संसद भी नहीं चल पा रही है। बुधवार को बीजेपी के संसदीय दल की बैठक भी हुई है, जिसमें कांग्रेस के हमले के खिलाफ रणनीति बनाने पर चर्चा हुई। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • चेन्नई, 20 दिसंबर। तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की मौत को लेकर बवाल जारी है। जया के विधानसभा क्षेत्र आरके नगर में उपचुनाव से ठीक एक दिन पहले टीटीवी दिनाकरन ने एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में जयललिता बीमार नजर आ रही हैं और अपोलो अस्पताल के बेड पर लेटी हुई टीवी चैनल देख रही हैं। एआईएडीएमके के एक खेमे में जयललिता की मौत में साजिश का दावा किया जा रहा है। इस बारे में अपोलो अस्पताल की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि जयललिता को बीमार हालत में अस्पताल लाया गया था। दूसरी तरफ पार्टी के पन्नीरसेल्वम खेमे और विपक्षी पार्टी डीएमके जयललिता की मौत में साजिश की बात करती आ रही है। इन सब आरोपों का जवाब देते हुए पार्टी से दरकिनार किए गए टीटीवी दिनाकरन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अस्पताल में जयललिता का शूट किया वीडियो दिखाया। 
    टीटीवी दिनकरन समर्थक पी. वेत्रिवेल ने उन आरोपों का खंडन किया जिसमें कहा जा रहा है कि जयललिता से अस्पताल में कोई नहीं मिला। उन्होंने कहा, यह गलत है कि कोई भी जयललिता से नहीं मिला था, वीडियो इस बात का सबूत है। हमने इस वीडियो को जारी करने से पहले कई दिनों तक इंतजार किया। जांच कमेटी ने अभी तक हमें समन नहीं किया है अगर करेगी तो हम उन्हें सबूत देंगे।
    दिनाकरन ने इस साल सितंबर में भी कहा था कि अस्पताल में उनकी मौसी और जयललिता की करीबी रहीं शशिकला ने कुछ मिनट का वीडियो शूट किया था। आरके नगर उपचुनाव से ठीक एक दिन पहले दिनाकरन के वीडियो जारी करने के पीछे माना जा रहा है कि चुनावी फायदे के लिहाज से ऐसा किया गया। इससे पहले दिनाकरन ने कहा था कि वह वीडियो कानूनी बाध्यताओं के कारण जारी नहीं कर रहे हैं। दिनाकरन पर भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित कई केस चल रहे हैं।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 20 दिसंबर। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की बहुमत की सरकार बनने के बाद अब दोनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री को लेकर माथापच्ची जारी है। इसे लेकर बुधवार शाम बीजेपी संसदीय दल की बैठक होनी है, जहां पीएम मोदी समेत बीजेपी का पूरा थिंक टैंक इस पर चर्चा करेगा।  गुजरात में कम सीटें मिलने के बाद विजय रूपाणी के अलावा दूसरे कई और नामों पर भी चर्चा चल रही है, जिनमें पुरुषोत्तम रूपाला और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी आगे रहा है। 
    वहीं हिमाचल में बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल के हारने के बाद उनके सीएम बनने की उम्मीद धूमिल हो गई है। यहां भी जेपी नड्डा, जयराम ठाकुर समेत कई नामों पर चर्चा चल रही है। मंगलवार को हिमाचल के तीन जीते हुए विधायकों को दिल्ली भी बुलाया गया था।
    गुजरात विधानसभा चुनाव में विजय रुपाणी ने 25 हजार वोटों से जीत हासिल कर ली है लेकिन पिछली बार की 116 सीटों की तुलना में 99 सीटें ही मिलीं। ऐसे में सवाल है कि रुपाणी ही सीएम बनेंगे या फिर कोई और चेहरा होगा।
    25 हजार से ज्यादा सीटों से चुनाव जीत कर विजय रूपाणी ने उन खबरों पर रोक लगा दी जिनके मुताबिक उन्हें विरोधियों से कड़ी टक्कर मिल रही थी। उनको तत्काल बदले जाने की संभावना भी फिलहाल नहीं दिख रही है। क्योंकि नरेंद्र मोदी के दिल्ली चले आने के बाद गुजरात बीजेपी अंदरूनी टकराव से जूझती रही। आनंदी बेन पटेल को इसलिए जाना भी पड़ा। अब लगातार चौथी जीत के बावजूद रूपाणी को हटाने की कोशिश पार्टी के लिए एक गैजरूरी संकट पैदा कर सकती है।
    बीजेपी अभी गुजरात को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं दिखाना चाहती वरियता पर अभी हिमाचल है क्योंकि वहां पर उनके मुख्यमंत्री उम्मीदवार धूमल हारे हैं अगले दो दिन में जेटली और सरोज पांडे गुजरात जा सकते हैं। लेकिन रूपाणी को अभी नहीं तो देर-सबेर जाना पड़ सकता है। क्योंकि पार्टी का एक खेमा ऐसा है जिसकी राय में रुपाणी शरीफ नेता हैं, मगर लोकप्रिय नहीं हैं। 
    हालांकि राजनीतिक गलियारों में स्मृति ईरानी से लेकर पुरूषोत्तम रूपाला के नाम घूमने लगे हैं, मगर बीजेपी अभी अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है। राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि हमारे पर्यवेक्षक अरुण जेटली और सरोज पांडे गुजरात जाएंगे वहां नेताओं से मिलेंगे फिर वो रिपोर्ट देंगे फिर संसदीय बोर्ड तय करेगा कि प्रदेश का सीएम कौन बनेगा।  वैसे जानकारों की राय में गुजरात के नतीजे वहां की पूरी टीम के लिए खतरे की घंटी हैं। राय ऐसी भी है कि अगर वहां नेतृत्व बदलना है तो इससे सही समय दूसरा नहीं होगा।
    वोटिंग से ठीक पहले धूमल को पीएम का उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने जो चाल चली, वो कामयाब होती दिखी, लेकिन धूमल न केवल अपना चुनाव हारे, बल्कि उनके कई करीबी भी हार गए। इनमें योगेंद्र नगर से उनके समधी गुलाब सिंह भी हैं। इसके अलावा धूमल के अपने जिले हमीरपुर में भी बीजेपी हार गई। बीजेपी के आगे सवाल ये है कि बड़े नेताओं की हार के बाद वो किसे मुख्यमंत्री बनाए। हालांकि शिमला में ये खबर गर्म रही कि धूमल अब भी अपने लिए जोर लगा रहे हैं। बताया गया कि ना के कुठलेहड़ से जीते वीरेंद्र कंवर उनके लिए सीट छोडऩे को तैयार हैं। जेपी नड्डा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए जरूर चल रहा है, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का मतलब उन्हें संसदीय बोर्ड, चुनाव समिति और कई दूसरे अहम पदों से मुक्त करना होगा। एक विचार ये भी है कि उत्तराखंड के बाद क्या हिमाचल में भी ब्राह्मण को ही कमान देना उचित है? 
    इस बीच तीन जीते हुए विधायकों, सेजल के जयराम ठाकुर, शिमला के सुरेश भारद्वाज और नाहन के राजीव बिंदल को आलाकमान ने दिल्ली बुलाया है। जब जयराम ठाकुर से पूछा गया कि सीएम उम्मीदवार के तौर पर आपका नाम भी चल रहा है? तो उन्होंने कहा कि मुझे कोई संदेश नहीं है और मैं स्वीकार करूंगा जो भी आदेश होगा। हिमाचल में मुख्यमंत्री चुनने के लिए पर्यवेक्षक बनाए गए निर्मला सीतारमन और नरेंद्र तोमर ने अमित शाह से मुलाकात की और इन पर विधायकों से बात कर आलाकमान को रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 20-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 20 दिसंबर । जल्द ही कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की कमान भी राहुल गांधी को सौंपी जा सकती है। पार्टी सूत्रों के हवाले से राहुल को कमान सौंपे जाने के बाद कांग्रेस संसदीय दल में सोनिया गांधी बतौर सदस्य शामिल रहेंगी जो कि अभी इसकी अध्यक्ष हैं।
    सीपीपी के ही एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर इस बदलाव की पुष्टि की है। अलबत्ता उन्होंने यह नहीं बताया कि बदलाव कब तक होगा। उनके मुताबिक, सीपीपी के सदस्य जल्द ही राहुल को अपना नया नेता चुनेंगे। राहुल को सीपीपी के अध्यक्ष की हैसियत से सभी फैसले लेने की पूरी आजादी होगी। यानी वे अपनी पसंद से संसद के दोनों सदनों के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक आदि की नियुक्ति कर सकेंगे।
    वैसे राहुल पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सीपीपी की बैठक की अध्यक्षता कर चुके हैं। लेकिन उस वक्त उन्होंने अपनी मां और सीपीपी की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी की गैरमौजूदगी की वजह से ऐसा किया था। मगर अब चूंकि वे पार्टी अध्यक्ष बन चुके हैं। और आम तौर पर सीपीपी की कमान भी पार्टी अध्यक्ष के पास ही होती है। इसलिए यह बदलाव जल्द होना तय माना जा रहा है।
    राहुल के पक्ष में गुजरात चुनाव के नतीजे भी रहे हैं। यहां पार्टी के प्रचार अभियान की कमान पूरी तरह राहुल ने संभाली थी। इसके बाद कांग्रेस ने 2012 के मुकाबले न सिर्फ अपनी सीटें बढ़ाई (पिछली बार 61 सीटें मिली थीं इस बार 77 हासिल हुईं) हैं बल्कि वोट प्रतिशत में भी बढ़ोत्तरी (भाजपा वोट प्रतिशत पिछली बार से करीब सवा फीसद बढ़ा पर कांग्रेस का दो प्रतिशत के लगभग) की है। इससे भी पार्टी संगठन का उन पर भरोसा बढ़ा है।(हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 19 दिसंबर । गुजरात चुनाव के नतीजे आने के एक दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि बीजेपी को जबरदस्त झटका लगा है। कांग्रेस के लिए अच्छा रिजल्ट रहा है।  राहुल ने कहा है कि ये नतीजे पीएम मोदी और बीजेपी के लिए संदेश हैं। कांग्रेस पार्टी बीजेपी से लड़ेगी। पीएम मोदी हमारे कैंपेन का जवाब नहीं दे पाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पीएम मोदी विकास की बात कर रहे हैं लेकिन उसका जवाब नहीं दे पाए। गुजरात चुनाव में वह अपने बारे में बोल रहे थे और कांग्रेस पार्टी के बारे में बोल रहे थे। उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।  हमने तीन चार महीने काम किया है और रिजल्ट आपने देखा है। हमें वहां पता लगा जो गुजरात का मॉडल है उसे वहां के लोग उसे मानते ही नहीं है वह खोखला है।
    पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि वो विकास की बात करते हैं लेकिन उनके पास जवाब नहीं है। वह चाहते है कि वह सिर्फ अपनी बात कहें।
    जातिवाद और जीएसटी के सवाल पर राहुल ने कहा कि मोदीजी कहते हैं कि विकास की जीत है लेकिन चुनाव में न विकास की बात हो रही थी न नोटबंदी की न जीएसटी की। मोदीजी ने भ्रष्टाचार के मामले में नॉनस्टॉप बात की लेकिन राफेल या जय शाह के विषय में क्यों बात नहीं करते हैं।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • विशेष कोर्ट का मामला भी उठा
    नई दिल्ली, 19 दिसंबर । लोकसभा और राज्यसभा में मंगलवार को कार्यवाही के दौरान कांग्रेस ने राज्यसभा में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मनमोहन सिंह के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस के सांसदों की मांग थी कि पीएम मोदी अपने बयान पर माफी मांगे। विपक्ष के हंगामे के चलते दोनों सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित हो गई है और इसके बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुुुुई तो विधायकों और सांसदों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जाने का मुद्दा राज्यसभा में उठाया। 
    कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने राज्यसभा में नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पेशल कोर्ट की स्थापना के लिए पर्याप्त मात्रा में फंड देना चाहिए ताकि ट्रायल खत्म होने के बाद लोगों को ज्यादा दिनों तक जेल में न रहना पड़े। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कानून सबके लिए होना चाहिए, विधायिका को इससे अलग नहीं रखना चाहिए। इस पर अरुण जेटली ने कहा कि कोई सांसद कैसे कह सकता है कि उसके खिलाफ आपराधिक मामले जल्दी नहीं निपटने चाहिए। सभी को जल्दी न्याय मिलना चाहिए। 
    जेटली ने कहा कि मैं अपने सभी सहकर्मियों और विपक्ष के नेताओं को बुलाऊंगा और इस मुद्दे का समाधान खोजने की कोशिश करूंगा। बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर विधायकों और सांसदों को अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने से रोक लगाने की गुहार लगाई है। 
    राज्य सभा में मंगलवार को तानाशाही नहीं चलेगी और पीएम मोदी माफी मांगें जैसे नारों के साथ कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि हम चाहते हैं कि सदन चले, लेकिन सरकार पहले संसदीय मर्यादा का पालन करे। दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कांग्रेस सदस्यों से सदन चलाने में सहयोग की अपील की। नायडू ने विपक्ष की आपत्तियों पर पूरा ध्यान दिए जाने का आश्वासन दिया। नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जी की देश के प्रति वफादारी पर सवाल उठाया गया है। पीएम को सदन में आकर सफाई देनी चाहिए।
    गुलाम नबी आजाद पूर्व पीएम मनमोहम सिंहजी की देश के प्रति वफादारी पर सवाल उठाया गया है। पीएम को सदन में आकर सफाई देनी चाहिए। वहीं आरजेडी के सांसद ने लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा में कमी किए जाने के मामले में लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है। वहीं टीएमसी नेताओं ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एफआरडीआई बिल के विरोध में प्रदर्शन किया है। 
    रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि वन रैंक और वन पेंशन के मुद्दे पर गौर करने के लिए उन्होंने किसी नई समिति का गठन नहीं किया है।  वहीं सोमवार को लोकसभा में विपक्ष और सत्तापक्ष के हंगामे के कारण कामकाज बाधित रहने के बावजूद पांच विधेयक पेश किये गए, जिसमें लोक प्रतिनिधित्व संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, उपदान संदाय संशोधन विधेयक, दंत चिकित्सा संशोधन विधेयक और भारतीय वन संशोधन विधेयक शामिल है।
    निचले सदन में शोर शराबे के बीच ही लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सामान्य बजट से जुड़ी 2017-18 के लिये पूरक अनुदान की अनुपूरक मांगों के लिये दूसरे बैच का प्रस्ताव सदन में पेश किया। इसमें सरकार ने वर्ष 2017-18 के लिए पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच में 66,113 करोड़ रूपये के सकल अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करने के लिये संसद का अनुमोदन मांगा। इसमें गरीबों को बिजली कनेक्शन प्रदान करने और यूरिया सब्सिडी के भुगतान के लिये कोष प्रदान करना शामिल है।
    सदन में विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोक प्रतिनिधित्व संशोधन विधेयक, 2017, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम 2017, श्रम मंत्री संतोष कुमार ने उपदान संदाय (संशोधन) विधेयक 2017, स्वास्थ्य मंत्री ने जेपी नड्डा ने दंत चिकित्सा (संशोधन) विधेयक 2017 तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवद्र्धन ने भारतीय वन (संशोधन) विधेयक 2017 पेश किया। 
    दयाल सिंह कॉलेज का नाम बदलने को लेकर भी राज्य सभा में हंगामा हुआ। बीजेपी की सहयोगी अकाली दल के नरेश गुजराल ने इससे कम्युनल हेट्रेड की बात कही। उन्होंने सरकार से कहा, वह चाहे तो पूरे देश मे वंदे मातरम यूनिवर्सिटी क्यों नहीं खोलती। जवाब में एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार इस फैसले से सहमत नहीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी को फैसला होल्ड करने को कहा गया है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • सत्याग्रह ब्यूरो
    क्रिकेट की शब्दावली में एक शब्द होता है 'नर्वस नाइन्टी।' कोई बल्लेबाज जब शतक बनाने से पहले 90 से 99 के बीच आउट हो जाता है तो कहा जाता है कि वह 'नर्वस नाइन्टी' का शिकार हो गया। यानी शतक बन पाएगा या नहीं इस चिंता में पहले ही उसने अपना विकेट गंवा दिया। गुजरात विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन भी काफी कुछ ऐसे ही परिभाषित किया जा सकता है। यहां पार्टी सत्ता से 'आउट' भले न हुई हो मगर यह भी साफ है कि वह 'नर्वस नाइन्टी' की शिकार होकर (99 सीटों के साथ) सरकार में लौट रही है। जबकि उसका लक्ष्य 150+ (सीटों पर जीत) का था। इसीलिए अब ये धारणा बन रही है कि पार्टी उन सभी मसलों पर पुनर्विचार कर नई रणनीति बना सकती है जिन-जिन ने उसे 'नर्वस नाइन्टी' का शिकार बनाया। और द एशियन एज के मुताबिक देश में आर्थिक सुधार का मोर्चा ऐसे ही मसलों में शुमार है, जिस पर केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार अपनी रफ्तार धीमी कर सकती है।
    सूत्रों के मुताबिक भाजपा के रणनीतिकारों को इस बात का अहसास हो चुका है कि नोटबंदी व जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने जिस तरह के कदम उठाए उससे पार्टी को नुकसान हुआ है। लिहाजा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह का कोई और कदम उठाने से बचना चाहिए। इसीलिए माना जा रहा है कि सरकार अब संसद के शीतकालीन सत्र में एफआरडीआई (फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल) पेश नहीं करेगी। और तो क्या संसद के बजट सत्र में भी इस विधेयक के पेश होने की संभावना नजर नहीं आती।
    जानकारों के मुताबिक एफआरडीआई कानून में 'बेल इन' का प्रावधान आम जनता की नाराजगी का कारण बन सकता है। इस प्रावधान के तहत अगर कोई बैंक (या ऐसी ही कोई वित्तीय संस्था) आर्थिक नुकसान की वजह से बंद हो जाता है तो इसका बोझ आम जनता को उठाना होगा। यानी इस बंद होने वाले बैंक में लोगों ने अपनी जो पूंजी जमा की है उसे वे वापस हासिल करने का दावा नहीं कर सकते। सूत्रों की मानें तो सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद इस प्रावधान से जुड़ी चिंताएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
    इसी तरह का दूसरा मामला बैंक खातों, वित्तीय संसाधनों और मोबाइल नंबरों को आधार से जोडऩे का है। कहा जा रहा है कि काले धन की समस्या पर लगाम लगाने के मकसद से सरकार ने यह कदम उठाया है। पर उसे अब तक इस मामले में लोगों का ज्यादा समर्थन मिला नहीं है। इसीलिए वह इस काम के लिए अंतिम समय सीमा 31 मार्च 2018 तक बढ़ाने के लिए राजी भी हुई है। बताते हैं कि भाजपा के आर्थिक विश्लेषकों ने ही सरकार को चेताया है कि अगर उसने इन सुधारों पर जोर दिया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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    अहमदाबाद में भाजपा ने 
    21 में 16 सीटें जीतीं 
    सूरत की 16 सीटों में 15
    वडोदरा की 10 में से 9
    राजकोट में 8 में से 6 सीटें।
    यानी प्रदेश के चार बड़े शहरों की 55 सीटों में 46 भाजपा को मिली हैं।
    अब घड़ी भर को इन चार शहरों को अलग रख कर देखें। तो बाकी 127 सीटों में किसको क्या मिला -
    भाजपा - 53 
    कांग्रेस - 71
    अन्य को - 3
    जाहिर है, भाजपा की जीत महज चार शहरों की जीत है, समूचे गुजरात राज्य की तो नहीं।
    - पत्रकार शीला भट्ट

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Posted Date : 19-Dec-2017
  • चन्दन शर्मा
    नई दिल्ली, 19 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली है। पार्टी ने राज्य की 60 फीसदी से ज्यादा सीटें अपने नाम कर ली हैं। अभी तक प्राप्त खबर के अनुसार भाजपा राज्य की 68 सीटों में से 43 पर जीत दर्ज करती हुए दिख रही है। लेकिन पार्टी के लिए यह परिणाम मिला-जुला साबित हुआ है, क्योंकि राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री पद का चेहरा रहे प्रेम कुमार धूमल सहित कई प्रमुख नेता अपना-अपना चुनाव हार गए हैं।
    प्रेम कुमार धूमल को हमीरपुर जिले की सुजानपुर सीट पर अपने राजनीतिक शिष्य और कांग्रेस उम्मीदवार राजिन्दर सिंह राणा से मात खानी पड़ी है। उनकी इस हार के साथ ही राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं धूमल के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जाने लगी हैं। भाजपा के लिए खुशियों के बीच चिंता का कारण यह भी रहा है कि उसके प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती अपनी उना सीट बचा पाने में नाकामयाब रहे। उनके अलावा पालमपुर सीट से पार्टी की दिग्गज नेता इंदु गोस्वामी भी चुनाव हार गई हैं। प्रेम कुमार धूमल के समधी और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के ससुर गुलाब सिंह ठाकुर को भी हार का मुंह देखना पड़ा है।
    जानकारों के अनुसार राज्य के शीर्ष नेताओं की इस हार से अब पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की चुनौतियां बढ़ गई हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी जीत के बाद बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के अगले मुख्यमंत्री के बारे में कोई संकेत नहीं दिया। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक फिलहाल नड्डा ने मुख्यमंत्री बनने के बारे में कोई दावा नहीं किया है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री का नाम तय करेंगे।
    इस बीच पार्टी के एक नवनिर्वाचित विधायक ने धूमल के मुख्यमंत्री बनने की सूरत में उनके लिए अपनी सीट छोडऩे की पेशकश की है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा भेजने पर सहमत हो सकता है? हालांकि कई जानकार इसकी संभावना बहुत कम बता रहे हैं। उधर सोशल नेटवर्किंग साइट पर कई लोग अनुमान लगा रहे हैं कि पार्टी हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी किसी कम जाने-पहचाने चेहरे को मुख्यमंत्री बनाएगी।
    क्या धूमल की हार भीतरघात का नतीजा है?
    प्रेम कुमार धूमल की हार के बारे में कइयों का मानना है कि पार्टी में उनके विरोधियों ने उन्हें हराने के लिए काफी जोर लगाया था। इसके पीछे केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नड्डा की भूमिका मानी जा रही है। ऐसा इसलिए भी कि चुनाव से थोड़ा पहले तक उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल माना जा रहा था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने राजपूत बिरादरी की भारी आबादी को देखते हुए प्रेम कुमार धूमल को ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने का फैसला लिया। प्रेम कुमार धूमल राजपूत हैं जबकि जगत प्रकाश नड्डा ब्राह्मण जाति से आते हैं। हिमाचल प्रदेश में राजपूतों की आबादी 32 फीसदी है, जबकि ब्राह्मण 18 फीसदी।  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Dec-2017
  • मुंबई, 18 दिसंबर। गुजरात और हिमाचल चुनावों में एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी का मैजिक चलता नजर आ रहा है। लेकिन इसी बीच महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने राहुल गांधी की भरपूर तारीफ की है। शिवसेना ने कहा, नतीजे की परवाह किये बगैर गुजरात चुनाव संग्राम लडऩे के लिये कांग्रेस के नये अध्यक्ष की सराहना की। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि अमेठी से सांसद 47 वर्षीय राहुल गांधी ने बेहद नाजुक मोड़ पर इस सबसे पुरानी पार्टी का बागडोर संभाला है।
    शिवसेना के मुखपत्र 'सामनाÓ में प्रकाशित एक संपादकीय में लिखा है, राहुल गांधी ने बेहद नाजुक मोड़ पर कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्हें शुभकामना देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अब राहुल को फैसला करने दें कि वह कांग्रेस को सफलता के शिखर पर ले जाना चाहते हैं या रसातल में। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने गुजरात में अंतिम चुनावी परिणाम की परवाह किये बगैर चुनाव प्रचार में खुद को झोंका।
    पार्टी ने कहा कि जब हार के डर से (भाजपा के) बड़े-बड़े महारथियों के चेहरे स्याह पड़ गए थे तब राहुल गांधी नतीजे की परवाह किये बगैर चुनावी रण में लड़ रहे थे। यही आत्मविश्वास राहुल को आगे ले जायेगा। भाजपा एवं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने पूछा, जो यह सोचते हैं कि बीते 60 बरस में कुछ नहीं हुआ और भारत ने सिर्फ इन्हीं तीन साल में प्रगति की है, ऐसा जिन्हें लगता है वे इंसान हैं या मूर्खता के प्रतीक?
    पार्टी ने दावा किया, कौन जानता है कि हमारे सामने ऐसा नया इतिहास रख दिया जाये कि भारत ने बीते एक साल में ही आजादी हासिल की और यह भी कि 150 वर्ष का आजादी का आंदोलन एक झूठ है। (भाषा)

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Posted Date : 18-Dec-2017
  • नारायण बारेठ
    जयपुर से, 18 दिसंबर  चैत्र-वैशाख में जब पार्टी हाई कमान ने अशोक गहलोत को गुजरात का प्रभार देकर भेजा तो राजस्थान में पार्टी के अंदर और बाहर उनके विरोधियों के चेहरों पर एक सियासी मुस्कान उतर आई।
    यह उनके समर्थकों के लिए मायूस करने वाली खबर थी क्योंकि इसे राजस्थान की सियासत से गहलोत को दूर करने के संदेश के रूप में पढ़ा गया। मगर गुजरात के चुनाव अभियान ने उन्हें फिर मजबूत भूमिका में ला दिया। वो इस कदर चुनाव अभियान में जुटे कि दिवाली पर भी अपने घर नहीं लौटे।
    वो ना तो किसी प्रभावशाली जाति से हैं, ना ही किसी प्रभावशाली जाति से उनका नाता है, वो दून स्कूल में नहीं पढ़े। वो कोई कुशल वक्ता भी नहीं हैं। वो सीधा-सादा खादी का लिबास पहनते हैं और रेल से सफर करना पसंद करते हैं।
    साल 1982 में जब वो दिल्ली में राज्य मंत्री पद की शपथ लेने तिपहिया ऑटोरिक्शा में सवार होकर राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया था। मगर तब किसी ने सोचा नहीं था कि जोधपुर से पहली बार सांसद चुनकर आया ये शख्स सियासत का इतना लम्बा सफर तय करेगा।
    उनके साथ काम कर चुके पार्टी के एक नेता ने कहा कि गहलोत कार्यकर्ताओं के नेता हैं और नेताओं में कार्यकर्ता। उनकी सादगी, विनम्रता, दीन दुखियारों की रहनुमाई और पार्टी के प्रति वफादारी ही उनकी पूंजी है। मगर विरोधियों की नजर में वो एक औसत दर्जे के नेता हैं जो सियासी पैंतरेबाजी में माहिर हैं।
    कांग्रेस में उनके विरोधी तंज के साथ कहते हैं, गहलोत हर चीज में मैसेज देने की राजनीति करते हैं। इसी मैसेज के चक्कर में दो बार कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा।
    गहलोत कांग्रेस में उन थोड़े से नेताओं में शुमार हैं जिन्हें पार्टी संगठन का व्यक्ति कहा जाता है और जो अपने सामाजिक सेवा कार्य के जरिए इस ऊँचाई तक पहुंचे हैं।
    गहलोत ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत जोधपुर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को संभालने से की थी। वो दूर दराज के गावों से आकर भर्ती हुए मरीजों से मिलकर उनके गांव-परिजनों को कुशलता की चि_ियां लिखते थे।
    फिर वो जोधपुर में तरुण शांति सेना से जुड़े और शराब की दुकानों के विरोध आंदोलन में खड़े मिले। गहलोत पर कांग्रेस नेतृत्व की नजर तब पड़ी जब वो 1971 में पूर्वी बंगाल के शरणार्थी शिविरों में काम करते दिखे।
    इसके बाद राज्य में पार्टी के छात्र संघठन के अध्यक्ष नियुक्त हुए और फिर संगठन में आगे बढ़ते गए। जब वो बहुत कम उम्र में राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष नामजद किए गए तो उन्होंने जातिवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ी और लोग उन्हें अशोक भाई के नाम से पुकारने लगे, लेकिन बाद में अशोक भाई फिर से अशोक गहलोत हो गए।
    किसी ने पूछा तो बोले, कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि वो यह सब मुख्यमंत्री बनने के लिए कर रहे हैं तो उन्हें यह बुरा लगा। गहलोत गाँधी, मार्टिन लूथर किंग और कबीर से प्रेरित हैं। जब वो पहली दफा मुख्यमंत्री बने तो राज्य सचिवालय में गाँधी की बड़ी प्रतिमा लगवाई। उनके दफ्तर में प्राय: गाँधी, मार्टिन लूथर किंग और गाँधी परिवार के नेताओं की तस्वीरें मिलती थीं।
    साल 2010 में जब गुर्जर नेता आंदोलन पर उतरे तो किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में गुर्जर नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया।
    बातचीत के बाद गहलोत इन नेताओं को गाँधी और मार्टिन लूथर किंग की तस्वीरों तक ले गए और बोले कि इन दो नेताओं ने अपना जीवन शांति और सद्भाव को समर्पित कर दिया। आप कुछ भी करें तो इन दोनों का जरूर ध्यान रखें। वो प्राय: सूत की माला पहनना पसंद करते हैं और हर साल लोगों को गाँधी डायरी भेंट करना नहीं भूलते।
    गुजरात से गहलोत का पुराना रिश्ता रहा है। जब 2001 में गुजरात में भूकंप आया, उस वक्त शायद राजस्थान पहला राज्य होगा जो मदद के लिए सबसे पहले पहुंचा। उस वक्त गहलोत मुख्यमंत्री थे।
    उन्होंने तुरंत टीम गठित करवाई और अपने अधिकारियों को राहत सामग्री के साथ गुजरात भेजा। गुजरात दंगों के बाद राजस्थान में पीडि़तों के लिए राहत कैंप खोले।
    कांग्रेस ने 2005 में जब दांडी मार्च की हीरक जयंती मनाई और साबरमती से दांडी तक 400 किलोमीटर की यात्रा निकाली तो गहलोत को समन्वयक बना कर भेजा गया। राहुल गाँधी इस यात्रा में बोरसाद से शामिल हुए और कुछ किलोमीटर तक साथ चले।
    फूंक-फूंक कर कदम रखनेवाले गहलोत सियासत और राजकाज में नाते रिश्तेदारों और परिजनों को दूर रखते रहे हैं, लेकिन उनके पिछले कार्यकाल में पुत्र को आगे बढ़ाने और कुछ रिश्तेदारों को संरक्षण देने के आरोप लगे। वो इन आरोपों को विपक्ष की चाल बताते रहे हैं।
    उनके समर्थक याद दिलाते हैं कैसे उन्होंने अपनी बेटी सोनिया का विवाह अत्यंत सादगी से किया था और बारात को छोडऩे रेलवे स्टेशन गए तो एक-एक मेहमान की गिनती कर प्लेटफॉर्म टिकट खरीदे थे। उनके पिता स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह जादूगर थे। गहलोत को भी जादू की कला विरासत में मिली है। वे जादू के करतब दिखाते भी रहे हैं।
    2008 के विधानसभा चुनाव में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी ने याद दिलाया क्या वे अपने जादू का मुजाहिरा भी करेंगे। वो पलट कर बोले मेरा जादू तो जब परिणाम आए तब देखना।
    एक वक्त जब कांग्रेस की राजनीति में चंद्रास्वामी प्रभावी बन कर उभरे, गहलोत ने उनका जमकर विरोध किया। यहाँ तक कि पहले से स्वीकृत एक कार्यक्रम में यह कह कर जाने से इंकार कर दिया क्योंकि उसमें चंद्रास्वामी भी आमंत्रित थे। चंद्रास्वामी को उस वक्त के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के निकट समझा जाता था। इसके कुछ वक्त बाद ही गहलोत का केंद्रीय मंत्री पद चला गया था।
    वो गाहे-बगाहे परिजनों के साथ मंदिरों की फेरी लगाते रहे हैं, मगर ज्योतिष और भविष्यवक्ताओं से दूर रहते हैं। उनके साथ काम कर चुके एक नेता बताते हैं कि यूँ वे बहुत सीधे-सादे दिखते हैं, लेकिन 2003 में प्रवीण तोगडिय़ा को उस वक्त गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जब उत्तर भारत की सरकारें उन पर हाथ डालने से बचती थीं। ऐसे ही आशाराम बापू के मामले में पुलिस को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया और यही कारण है कि आशाराम बापू अब तक जेल में है।
    कांग्रेस में उनसे असहमत एक नेता कहते हैं कि गहलोत की राजनीतिक समझ का कोई मुकाबला नहीं है, वो भविष्य का अनुमान लगाने की समझ रखते हैं। पर वो जब सत्ता में आते हैं तो शक्ति का केन्द्रीयकरण कर लेते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में गहलोत बेपरवाह हो गए थे, नतीजा सामने है।
    राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत टीवी की चमक-धमक से दूर रहना पसंद करते हैं। वो रेडियो के आशिक हैं। बीबीसी सुनते रहे हैं। इसीलिए एक बार जब उनकी पसंद का ट्रांजिस्टर कहीं खो गया तो बहुत परेशान हुए।
    वो अपना राजनैतिक बयान खुद लिखते हैं और एक-एक शब्द पर गौर करते हैं। बीजेपी के एक पूर्व मंत्री कहते है कि गहलोत के बयान बहुत मारक होते हैं।
    गहलोत उस वक्त पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने जब सूबे की सियासत में स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत का जलवा था। विपक्ष में रहते गहलोत स्वर्गीय शेखावत के प्रति बहुत आक्रामक थे। लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही वो सबसे पहले उनसे मिलने पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। जब शेखावत बीमार हुए तब गहलोत उन लोगों में से थे जो लगातार उनकी देखरेख करने जाते रहे।
    गहलोत को मुफ्त दवा योजना और अकाल राहत के बेहतर प्रबंधन के लिए याद किया जाता है। साल 2003 में विधानसभा के चुनाव हुए तो गहलोत अपनी वापसी के लिए जोर लगा रहे थे। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
    मोदी ने चुनाव अभियान में भीलवाड़ा की एक सभा में गहलोत और उनकी कांग्रेस सरकार पर जम कर प्रहार किए। मोदी ने गहलोत के बोलने की शैली की खिल्ली उड़ाई, कहा कि मुख्यमंत्री क्या बोलते हैं, समझना मुश्किल है। अब गहलोत बीते छह महीने से गुजरात में हैं। चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि इस बार गहलोत अपने बोल से कितना कुछ समझा पाए है।(बीबीसी)।

     

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Posted Date : 17-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 17 दिसंबर । ज्यादातर एग्जिट पोल मेंगुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के जीत हासिल करने की संभावना जताए जाने के बीच पार्टी से राज्यसभा सदस्य संजय काकड़े ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं जीतेगी। काकड़े ने दावा किया, ''पूर्ण बहुमत को भूल जाइए, पार्टी को सरकार बनाने तक के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिलेंगी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचेगी। ÓÓ उन्होंने कहा कि यदि फिर भी पार्टी ने राज्य में सत्ता कायम रखी तो भी यह सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी के चलते होगी।
    काकड़े ने दावा किया कि उनकी टीम ने गुजरात में एक सर्वेक्षण किया है और उनका दावा सर्वेक्षण के नतीजों पर आधारित है। ''मैंने छह लोगों की एक टीम गुजरात भेजी थी। वे ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में गए जहां वे लोग किसानों, चालकों, वेटरों और श्रमिकों से मिले। उनके सर्वेक्षण के आधार पर और खुद के अवलोकन से मुझे लगता है कि भाजपा को गुजरात में पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा।ÓÓ 
    काकड़े ने अपने अनुमान के लिए भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ नकरात्मक भावना की भाजपा को कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि पिछली कुछ रैलियों में पार्टी नेताओं ने विकास पर एक शब्द नहीं बोला।
    गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आएंगे। माना जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तस्वीर तय कर सकते हैं। (भाषा)

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Posted Date : 16-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 16 दिसंबर । सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह  सहित कांग्रेस के सभी नेताओं की मौजूदगी में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाल ली है। इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा कि वह आग लगाते हैं हम बुझाते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि आप युवा हो बुजुर्ग हो हम आपको दिल से प्यार करेंगे। हम आने वाले समय में पार्टी को युवाओं की पार्टी बनाएंगे। राहुल ने कहा कि हम बीजेपी में भी अपने भाई और बहन देखते हैं चाहे हमारे उनके वैचारिक मतभेद रहे हों। इस मौके पर राहुल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि पीएम देश को पीछे ले जा रहे हैं। 
    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक दिन है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि राहुल ने पूरे देश का दौरा किया है वह देश की समस्याओं को जानते हैं। उम्मीद है कि राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस नई ऊंचाइयों को छुएगी। 
    इसके बाद भूतपूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी हिंदी में भाषण देते हुए कहा कि आज वह आखिरी बार कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में बोल ही हैं। इसके बाद पटाखों की गडग़ड़ाहट के बीच उन्होंने अपना भाषण रोक दिया और कहा कि इसको बंद करवाओ...लेकिन इसके बाद भी पटाखों की गडग़ड़ाहट होती रही और राहुल गांधी ने उनको समझाया कि यह थोड़ी देर में रुक जाएगा। फिर थोड़ी देर बाद सोनिया गांधी ने कहा कि इसी तरह मैंने भी कांग्रेस की कमान संभाली थी और इस ऐतिहासिक संगठन को संभालने की चुनौती थी। सोनिया ने कहा कि जिस परिवार में आई थी वह एक क्रांतिकारी परिवार था और इंदिराजी उसी क्रांतिकारी परिवार की बेटी थीं। इस परिवार के हर सदस्य का देश ही मकसद था।  मैंने भारत के संस्कारों को इंदिरा गांधीजी से सीखा है। जब उनकी हत्या हुई तो मुझे लगा कि मेरी मां की हत्या की गई है।
    सोनिया ने राजीव गांधी की याद करते हुए कहा कि फिर मेरे पति की हत्या कर दी गई और मेरा सहारा छीन लिया गया। मैं राजनीति से दूर रहना चाहती थी। मेरे यहां तक कि सफर में कांग्रेस के कार्यकर्ता हमारे हमसफर और मार्गदर्शक बने। हमने 10 वर्षों तक एक जिम्मेदार और प्रगतीशील सरकार दी जिसका नेतृत्व डॉ.मनमोहन सिंह ने पूरी ईमानदारी से किया। उन्होंने कहा कि हम 2014 से विपक्ष में हैं। हमारे सामने चुनौती है। हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला किया है। लेकिन हम डरने वाले नही हैं। हम संघर्ष जारी रहेगा। सत्ता, शोहरत और स्वार्थ हमारा मकसद नहीं है। इस देश के मूल्यों की रक्षा करना हमारा मकसद है। हम सब जानते हैं कि हमारी मिली जुली संंस्कृति पर वार हो रहा है। इस बीच कांग्रेस को भी अपने अंर्तमन से जागकर आगे बढऩा पड़ेगा। यह एक नैैतिक लड़ाई है। जिसमें जीत हासिल करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। 
    सोनिया गांधी ने कहा कि एक युवा नेतृत्व से पार्टी में नया जोश आएगा। उन्होंने कहा कि राहुल मेरा बेटा है उसकी तारीफ करना उचित नहीं है। लेकिन राजनीति में आने पर उसने एक ऐसे भयंकर शख्स का सामना किया जिससे वह निडर बन गया है।  
    सोनिया गांधी ने मार्च 1998 में पार्टी को नियंत्रण में लिया था वह 19 साल अध्यक्ष रहीं। सोनिया गांधी के रिटायर होने के बयान पर कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए ये स्वीकार करना आसान नहीं होगा कि सोनिया गांधी राजनीति छोड़ देंगीं। (एनडीटीवी)
     

     पटाखे चलने से सोनिया नाराज, 3 बार रोका भाषण
    शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय पर अपने बेटे राहुल गांधी की ताजपोशी के दौरान सोनिया गांधी यूं तो बहुत खुश नजर आ रहीं थीं लेकिन भाषण के दौरान सोनिया अचानक भड़क उठीं। दरअसल, सोनिया जब भाषण दे रहीं थीं तभी कांग्रेस मुख्यालय के बाहर पटाखे फूटने लगे, जिससे सोनिया नाराज हो गईं और उन्होंने अपना भाषण रोक दिया। 
    सोनिया आखिरी बार अध्यक्ष के तौर पर भाषण दे रहीं थीं। लेकिन लगातार पटाखे चलने लगे। बीच-बीच में कांग्रेस नेताओं ने कार्यकर्ताओं से पटाखे न चलाने की अपील भी की लेकिन ऐसा न होने पर सोनिया गांधी को तीन बार अपना भाषण रोकना पड़ा। हालांकि, 5-7 मिनट की रुकावट के बाद सोनिया ने दोबारा अपना भाषण शुरू किया। 
    सोनिया ने राहुल को अध्यक्ष बनने पर शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। सोनिया ने कहा कि मेरी शादी एक क्रांतिकारी परिवार में हुई। सोनिया ने बताया कि वह राजनीति से अपने परिवार और पति को दूर रखना चाहती थीं। सोनिया गांधी को साल 1998 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। उनके बाद राहुल गांधी को अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई है।  (नवभारत टाईम्स)


    प्रियंका ने नकारी रायबरेली से लडऩे की बात, कहा-मां से मजबूत महिला नहीं देखी
    राहुल गांधी  के कांग्रेस की कमान संभालने के बाद उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी से मजबूत महिला कभी नहीं देखा है। वहीं रायबरेली सीट से खुद की दावेदारी की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रियंका ने कहा, रायबरेली से मेरे चुनाव लडऩे का सवाल ही नहीं है, मेरी मां ही वहां से चुनाव लड़ेंगी। इस मौके पर प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने भी राहुल को बधाई दी है।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 15 दिसंबर । संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है। सत्र शुरू होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के नए मंत्रियों से परिचय कराया और लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अन्य अधिकारियों के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा की पहली महिला महासचिव से भी परिचय करवाया।  आइए जानते हैं कौन हैं वो महिला और उनसे जुड़ी कई अहम बातें।
    नवंबर में मध्य प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्नेहलता श्रीवास्तव को महासचिव पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1 दिसंबर से पद संभाल लिया है। श्रीवास्तव ने 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए पूर्व महासचिव अनूप मिश्रा का जगह ली है।
    लोकसभा में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब महासचिव जैसे सर्वोच्च पद पर महिला आसीन होंगी। वर्तमान में राज्यसभा में भी महिला महासचिव रमा देवी पद संभाल चुकी हैं।
    श्रीवास्तव साल 1982 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और हाल ही में वो केंद्र सरकार न्याय विभाग के सचिव पद से रिटायर हुई थीं। उन्हें वित्त मंत्रालय और नाबार्ड में वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का अनुभव है। उनका कार्यकाल 30 नवंबर 2018 तक का होगा।
    विकिपीडिया के अनुसार श्रीवास्तव भारत के राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की अध्यक्ष हैं। स्नेहलता श्रीवास्तव का जन्म 18 सितंबर 1957 को हुआ और वो शहरी भूगोल में विशेषज्ञता के साथ भूगोल में स्नातकोत्तर हैं और क्षेत्रीय आयोजना और आर्थिक विकास में एम फिल किया है।
    भारतीय प्रशासनिक सेवा के 30 वर्ष से अधिक के अपने कार्यकाल में उन्होंने विविध कार्यक्षेत्रों में काम किया है, जिनमें वित्त, दूरसंचार, राजमार्ग, राजस्व, बहुपक्षीय बैंक अर्थात् विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक, विदेशी मुद्रा नियंत्रण, अमरीका और कनाडा के संबंध में द्विपक्षीय सहयोग शामिल हैं। (आज तक)

     

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 15 दिसंबर। संसद के शीत सत्र में सदन की कार्रवाई शुरू होते ही राज्यसभा में पहले शरद यादव और अली अनवर की सदस्यता का मुद्दा गर्माया। इसके बाद नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी के लगाए आरोपों पर भी स्पष्टीकरण मांगा। आजाद ने कहा कि इस मसले पर प्रधानमंत्री को सदन में अपना रूख साफ करना चाहिए, जिसके बाद सदन में खूब हंगामा हुआ और कार्यवाही 2.30 बजे तक स्थगित कर दी गई।
    उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह पर पाकिस्तान के साथ षडय़ंत्र रचने का जो आरोप लगाया है उसका सबूत दें या फिर संसद और देश से माफी मांगे। वहीं शिवसेना ने भी प्रधानमंत्री से मनमोहन सिंह पर लगाए गए आरोपों पर सफाई मांगी हैं। 
    इससे पहले विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों द्वारा जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता शरद यादव को निलंबित करने के मुद्दे पर काफी हंगामा किया गया, जिसके चलते उच्च सदन की कार्यवाही संक्षिप्त समय के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि, इसके तुरंत बाद प्रश्नकाल के लिए कार्यवाही जैसे ही फिर शुरू हुई, आजाद और अन्य विपक्षी नेताओं ने मोदी द्वारा पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात को लेकर पूर्व मनमोहन सिंह को निशाना बनाए जाने के खिलाफ हंगामा किया।
    मोदी ने दावा किया था कि कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पर हुई एक बैठक के दौरान, जिसमें मनमोहन सिंह भी शामिल थे, गुजरात चुनावों को लेकर भारत में कार्यरत पाकिस्तान के उच्चायुक्त और पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी से चर्चा की गई थी।
    वहीं लोकसभा में दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा के नवनिर्वाचित सांसद सुनील जाखड़ ने पद की शपथ ली। (बाकी पेजï 5 पर)
    सुनील जाखड़ लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष बलराम जाखड़ के बेटे हैं। सुनील जाखड़ ने फिल्म स्टार एवं सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई गुरदास लोकसभा सीट से उपचुनाव जीता था।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल में शामिल नए सदस्यों से सदन का परिचय कराया, जिनमें रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री पीयूष गोयल और अन्य हैं। मोदी ने सितंबर में अपने मंत्रिपरिषद में बदलाव कर नौ नए चेहरों को शामिल किया था। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने तीन निवर्तमान सांसदों और कांग्रेस नेता प्रियरंजन दासमुंशी सहित कुछ पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि देन के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। सांसदों ने मौजूदा सांसद सुल्तान अहमद (तृणमूल कांग्रेस), एम।तसलीमुद्दीन (राष्ट्रीय जनता दल) और महंत चांदनाथ (भारतीय जनता पार्टी) को श्रद्धांजलि दी।
    वहीं संसद के शीतकालीन सत्र में इंडियन नेशनल लोक दल के सांसद दुष्यंत चौटाला ट्रैक्टर से संसद पहुंचे। इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को पहली बार एक राज्यसभा सांसद के तौर पर संसद पहुंचे। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 15 दिसंबर। कांग्रेस की निवर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी से जब पूछा कि शनिवार को राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में आपका रोल क्या होगा तो उन्होंने कहा कि वह रिटायर होने की भूमिका में हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस संसदीय पार्टी की चेयरपर्सन रहेंगी तो उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका रिटायर होने की है। 
    कांग्रेस के नेताओं से बधाई लेते वक्त सोनिया ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के सभी महत्वपूर्ण फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जब सवाल पूछे गए तो वह खामोश रहे। राहुल शनिवार को अधिकारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालेंगे। 

    राहुल गांधी को 11 दिसंबर को कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुन लिए गए था। राहुल गांधी ने 4 दिसंबर को इस पद के चुनाव में नामांकन किया था। राहुल के पक्ष में 86 लोगों ने प्रस्ताव किया था। उनके अलावा किसी और का नामांकन नहीं था। 
    2004 में राहुल ने राजनीति में शुरुआत की और अमेठी से लोकसभा चुनाव जीता। साल 2012 में यूपी चुनाव में नेतृत्व किया, सिर्फ 28 सीटें जीतीं। साल 2013 में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनाए गए। उसी साल दागियों पर आए अध्यादेश को बेकार बताकर पार्टी को शर्मिंदा कर डाला। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की लेकिन 44 पर ही कांग्रेस सिमट गई।
    साल 2015 में सूट-बूट की सरकार कहकर मोदी सरकार पर निशाना साधा ये बयान काफी चर्चा में रहा। साल 2015 में ही बिहार में महागठबंधन किया और जीत मिली। साल 2017 में 5 में से 4 राज्यों में कांग्रेस हारी, यूपी में सिर्फ 7 सीटें मिलीं। 2017 में पंजाब में अकाली-बीजेपी गठबंधन को हराया और वहां कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी।  (एनडीटीवी)

     

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