कारोबार

Posted Date : 15-Dec-2017
  • - प्रभाकर
    एसएमएस अब कोई भेजता नहीं। कॉल भी इंटरनेट से हो रही है। डाटा मुफ्त मिल रहा है। ऐसे में टेलिकॉम कंपनियां कैसे खुद को बचा पाएंगी। हजारों नौकरियां खत्म हो चुकी हैं और यह सिलसिला रूकने वाला नहीं है।
    जबरदस्त होड़, विलय और अधिग्रहण की वजह से भारत में टेलिकॉम क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है। इससे ग्राहकों की तो पौ-बारह है लेकिन इस क्षेत्र में नौकरियों में लगातार कटौती हो रही है। बीते एक साल में इस क्षेत्र में एक-चौथाई नौकरियां कम हुई हैं। दूसरी ओर, ग्राहकों को पहले के मुकाबले बेहद कम कीमत पर डाटा और लगभग मुफ्त में फोन की सुविधा मिल रही है। खासकर बीते साल रिलायंस जियो के मैदान में उतरने के बाद इस क्षेत्र में परिदृश्य तेजी से बदला है।
    दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस क्षेत्र में कुल खर्च का लगभग पांच फीसदी वेतन-भत्तों पर खर्च होता है। बीते कुछ वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में वेतन आसमान छूने लगा था। लेकिन तब फोन की दरों और डाटा की कीमतों के भी आसमान छूने की वजह से दूरसंचार कंपनियां दोनों हाथों से माल बटोर रही थीं। बीते साल रिलायंस जियो के मैदान में उतरने और फोन व डाटा की मुफ्त सुविधा देने के बाद दूसरी कंपनियों को भी अपनी दरों में कटौती पर मजबूर होना पड़ा। इससे उनके मुनाफे में गिरावट आई और तमाम कंपनियां खर्चों में कटौती के उपाय तलाशने लगी। इस मामले में पहली गाज कर्मचारियों पर ही गिरी। दरों में कटौती की वजह से एयरटेल का मुनाफा वर्ष 2016-17 की आखिरी तिमाही में 72 फीसदी की गिरावट के साथ 373.4 करोड़ रुपये पर आ गया। इसी तरह वोडाफोन के संचालन मुनाफे में 10 फीसदी की गिरावट आई। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान उद्योग का राजस्व पहली बार गिरकर 1.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष के दौरान इसमें और गिरावट का अंदेशा है।
    मुनाफा घटने की वजह से कंपनियों के विलय व अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हुई है। मोटे अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र में काम करने वाले लगभग तीन लाख कर्मचारियों में से बीते साल भर के दौरान 75 हजार लोगों की नौकरियां चली गईं। उनको या तो निकाल दिया गया या फिर करियर को ध्यान में रखते हुए वह खुद छोड़ कर चले गए।
    रोजगार तलाशने वाली एक वेबसाइट के पार्टनर केसी रामचंद्रन कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में कर्मचारियों से इस्तीफे मांग लिए गए और कुछ मामलों में उनको मुआवजे के तौर पर तीन से छह महीने तक का वेतन दिया गया। वह कहते हैं कि अभी तो यह शुरूआत है। विलय प्रस्तावों को अमली जामा पहनाए जाने नौकरियां और घटेंगी। रामचंद्रन कहते हैं कि जिन लोगों की नौकरियां जा रही हैं उनमें से ज्यादातर लोग मध्यक्रम या वरिष्ठ प्रबंधन स्तर के हैं। उनके लिए अब दूसरे क्षेत्रों में नौकरी तलाशना बेहद मुश्किल साबित होगा।
    एक अन्य फर्म एबीसी कंसल्टेंट्स के कार्यकारी निदेशक विवेक मेहता कहते हैं कि अब तक नौकरी से हटाए गए या इस्तीफा देने वालों में 25 से 30 फीसदी मध्यक्रम के प्रबंधन का हिस्सा थे। वह भी कहते हैं कि कई कंपनियों के विलय के प्रस्तावों को अब तक अंतिम स्वरूप नहीं दिया गया है। विलय प्रस्तावों को अमली जामा पहनाने की स्थिति में मैनपावर में और कम से कम 15 फीसदी कटौती तय है।
    बीते साल सितंबर में रिलायंस जियो के मौदान में उतरने के बाद राजस्व व मुनाफा तेजी से घटने के बाद टेलिकॉम कंपनियों में खुद को मजबूत करने की होड़ मची है। यह क्षेत्र फिलहाल पांच लाख करोड़ के कर्ज के बोझ से हांफ रहा है। दूसरे नंबर पर रही वोडाफोन और तीसरे नंबर की आइडिया विलय की राह पर हैं। दूसरी ओर, पहले टेलीनोर इंडिया को खरीद चुकी भारती एयरटेल ने टाटा टेलीसर्विसेज के वायरलेस कारोबार को खरीदने का एलान किया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस भी अब काल सुविधा खत्म कर चुकी है। इसी तरह एयरसेल भी अपना कारोबार सीमित करने का मन बना चुकी है।
    सूत्रों का कहना है कि सिर्फ मोबाइल फोन कंपनियां ही नहीं बल्कि वेंडर और टावर कंपनियां भी इसी समस्या से जूझ रही हैं। रोजगार मुहैया कराने वाली तमाम वेबसाइटों का कहना है कि हाल में दूरसंचार क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का बायोडाटा आने की गति तेज हुई है। यह वैसे लोग हैं जो समय रहते दूसरी नौकरियां तलाशने का प्रयास कर रहे हैं।
    एक फर्म हेडहंटर्स इंडिया के अध्यक्ष के लक्ष्मीकांत कहते हैं कि टेलिकॉम क्षेत्र में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर नई नौकरियां तेजी से कम हुई हैं। इसके अलावा उद्योग में मैनपावर 25 से 33 फीसदी तक कम हुई है।   
    टेलिकॉम उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में लगभग डेढ़ लाख रोजगार खत्म होने वाले हैं। इसकी वजह यह है कि तेजी से बढ़ती चुनौतियों के माहौल में वह लागत घटाने के लिए लगातार जूझ रहा है। रेटिंग एजंसी क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि डाटा ग्राहकों के लिए कीमतों में कटौती की लगातार बढ़ती होड़ के चलते टेलिकॉम आपरेटरों को जो झटका लगा है उससे उबरना बेहद मुश्किल साबित होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस होड़ के खत्म होने पर इसके फायदे नजर आएंगे, लेकिन फिलहाल तो इस क्षेत्र की मुश्किलें कम होने के आसार कम ही हैं। (डायचे वेले)

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 14 दिसंबर। बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने की तारीख सरकार ने 3 महीने आगे बढ़ा दी है। इसके साथ ही सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में एक बड़ा संशोधन किया है।
    इस संशोधन के बाद ये तय माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय लेनदेन से जुड़े इंस्ट्रूमेंट के लिए आधार लिंकिंग की डेडलाइन बढ़ा सकती है। बैंक खाते केे अलावा आगे हम आपको बता रहे हैं 4 ऐसी चीजों के बारे में, जिनके लिए आधार लिंकिंग की डेडलाइन बढऩा तय है।
    केंद्र सरकार ने पीएमएलए एक्ट में बड़ा संशोधन किया है। पहले जहां एक्ट में बैंक अकाउंट समेत कई अन्य चीजों के लिए 31 दिसंबर आखिरी तारीख तय की गई थी। अब सरकार ने इसे बदलकर सरकार द्वारा अधिसूचित कर दिया है।
    इसका मतलब है कि अब सरकार के पास ये अधिकार है कि वह अधिसूचना जारी कर वित्तीय इंस्ट्रूमेंट को आधार से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ा सकती है।
    बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने के लिए भी आपके पास फिलहाल 31 दिसंबर तक का समय था, लेकिन अब आपको तीन महीने और मिल गए हैं। सरकार ने बुधवार केा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। म्युचुअल फंड को आधार कार्ड से लिंक करने के लिए वैसे तो 
    (बाकी पेजï 5 पर)
    31 दिसंबर आखिरी तारीख है, लेकिन इस संशोधन के बाद इसके लिए डेडलाइन आगे बढऩी तय है।
    बीमा पॉलिसी के लिए भी आपको 31 दिसंबर की जगह नई डेडलाइन मिल सकती है।
    पोस्ट ऑफिस में आपका पीपीएफ और एनपीएस खाता है या फिर आप ने कोई और पोस्ट ऑफिस स्कीम ली है, तो इसके लिए भी आपको नई डेडलाइन भी मिल सकती है।
    आपको आधार कार्ड सुकन्या समृद्धि योजना समेत कई वित्तीय योजनाओं के लिए 31 दिसंबर तक आधार लिंक करने की डेडलाइन तय है। हालांकि इस बदलाव के बाद इन्हें भी आधा से लिंक करने के लिए आपको समय मिल सकता है।
    केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी ये कह चुकी है कि वह आधार कार्ड से अलग-अलग योजनाओं को लिंक करने की डेडलाइन अगले साल 31 मार्च तक बढ़ाने को राजी है। सरकार पैन कार्ड को लिंक करने की डेडलाइन पहले ही बढ़ा चुकी है।  (पीटीआई)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • ब्यूनस आयर्स, 13 दिसंबर। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की चल रही मंत्री स्तरीय वार्ता टूटने के कगार पर आ गई है। क्योंकि अमरीका ने खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे के स्थायी समाधान के प्रयासों में शामिल होने से इंकार कर दिया है। डब्ल्यूटीओ की चार दिवसीय बैठक रविवार को शुरू हुई थी।
    आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमरीका की सह व्यापार प्रतिनिधि शेरोन बोमर लारितसन ने यहां एक समूह बैठक में कहा कि खाद्य भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान अमरीका को स्वीकार्य नहीं है। अधिकारियों के अनुसार चूंकि अमरीका ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बातचीत में शामिल होने से इंकार कर दिया है तो वार्ताएं टूटेंगी ही।
    भारत बार- बार कहता रहा है कि मौजूदा बैठक में खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे के स्थायी समाधान निकालना ही होगा। भारत ने खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण के स्थायी समाधान की जरूरत पर अपने रुख को कड़ा करते हुए कहा है कि अगर डब्ल्यूटीओ की मौजूदा मंत्री स्तरीय बैठक इसमें विफल रही तो इससे इस बहुपक्षीय संस्थान की साख प्रभावित होगी।
    रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने डब्ल्यूटीओ की वार्ता में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत के कड़े रुख की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भुखमरी को खत्म करना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना कृषि संबंधी बातचीत का आधार होना चाहिए।
    बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु कर रहे हैं। सुरेश प्रभु ने इस मुद्दे पर कई देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश की है।  खाद्य सुरक्षा मुद्दे पर दूसरे विकासशील देश भारत के साथ हैं। वह अभी तक यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधियों के अलावा दक्षिण अफ्रीका के उद्योग मंत्री से मिल चुके हैं। (आज तक)

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर । राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों में सुस्ती का माहौल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकारें इस योजना के लिए आवंटित रकम खर्च नहीं कर पा रही हैं। बताया जाता है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) में इसके लिए 25,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसके बाद 12वीं पंचवर्षीय योजना में इसे बढ़ाकर 63,246 करोड़ रुपये कर दिया गया। दिसंबर, 2017 तक के आंकड़े बताते हैं कि 2017-18 के बजट में इसके लिए 4750 करोड़ रुपये आवंटित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इसका केवल आधा हिस्सा ही जारी किया जा सका है। इसमें से भी 38 फीसदी रकम खर्च नहीं हो सकी है।
    दूसरी ओर, केंद्र ने भी इस योजना के लिए अपनी हिस्सेदारी को कम कर दिया है। शुरुआत में यह 100 फीसदी केंद्र प्रायोजित योजना थी। अब केंद्र ने इसमें हिस्सेदारी 60 फीसदी कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सिंचित क्षेत्र, दलहन-तिलहन का रकबा और खेती पर सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर दिया गया था।(बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी लगातार जारी है। ब्रेंट कू्रड ऑयल की कीमत मंगलवार को बढ़कर 65.70 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह पिछले ढाई साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 24 जून, 2015 को कच्चा तेल इस स्तर तक पहुंचा था। वहीं पिछले छह महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़कर लगभग डेढ़ गुना (47.6 फीसदी की वृद्धि) हो गए हैं।
    यह तेजी ब्रेंट कू्रड ऑयल के महत्वपूर्ण स्रोत ब्रिटेन के उत्तरी सागर की प्रमुख पाइपलाइन को मरम्मत के लिए बंद करने से आई है। इस पाइपलाइन के दिसंबर अंत तक फिर से चालू होने का अनुमान है और विशेषज्ञों मुताबिक इस बीच कच्चे तेल के दामों में और उछाल आ सकता है।
    पिछले ढाई-तीन साल के दौरान कच्चे तेल के दाम नीचे रहने से राहत महसूस कर रही केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के लिए कीमतों में दिख रही यह तेजी परेशानी बढ़ाने वाली है। इससे अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी तेल आयात करने वाले हमारे देश में इसके दाम और बढऩे की आशंका है। 
    दूसरी ओर इससे तेल कंपनियों पर दबाव बढऩे से उनकी शेयरों की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। मंगलवार को भी तेल कंपनियों के शेयर दो से तीन फीसदी तक गिरे हैं। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल के महंगा होने से केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। 
    इनके अनुसार कच्चा तेल और महंगा होने से मौजूदा वित्त वर्ष में 3.2 फीसदी के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा। (सत्याग्रह )

     

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Posted Date : 12-Dec-2017
  • रत्ना भूषण/श्रमण गांगुली
    नई दिल्ली/अहमदाबाद, 12 दिसंबर। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी टेलीविजन चैनलों को सोमवार को जारी एक एडवाइजरी में कहा कि कॉन्डम के विज्ञापन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के दौरान ही दिखाए जा सकते हैं। मंत्रालय का मानना है कि ऐसे कुछ विज्ञापन अश्लील होते हैं और इनका बच्चों पर असर पड़ सकता है। इस अडवाइजरी पर कंपनियों और एडवर्टाइजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया जताई। 
    एडवाइजरी में कहा गया, कुछ चैनल बार-बार कॉन्डम के विज्ञापन दिखाते हैं, जो कथित तौर पर अश्लील होते हैं, खासतौर से बच्चों के लिए। केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि जिन विज्ञापनों से बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा हो या जो अस्वास्थ्यकर हरकतों के प्रति उनमें दिलचस्पी पैदा करें, उन्हें नहीं दिखाया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि यह एडवाइजरी ऐसे मटीरियल से बच्चों का सामना न होने देने और यह सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई है कि प्रावधानों का कड़ाई से पालन हो। कोई चूक होने पर कार्रवाई की जाएगी।
    कामसूत्र ब्रैंड की मालिक रेमंड के प्रवक्ता ने कहा, कॉन्डम के सभी विज्ञापन अश्लील नहीं होते हैं। लिहाजा पूरी तरह रोक अनुचित है। हम विज्ञापन के बारे में एएससीआई के कोड का पालन करते हैं और काफी आंतरिक जांच के बाद कदम उठाते हैं। कॉन्डम कैटेगरी या किसी भी चीज के विज्ञापन में अश्लीलता को कहीं ज्यादा सेल्फ रेगुलेशन के जरिए रोका जाना चाहिए। 
    इस आदेश को मिसगाइडेड रिफॉर्म करार देते हुए बड़ी एड एजेंसी एफसीबी इंडिया के ग्रुप चेयरमैन रोहित ओहरी ने कहा, सनी लियोनी के कॉन्डम वाले विज्ञापनों के कारण टीवी पर कॉन्डम ऐड की टाइमिंग को रेग्युलेट करने की जरूरत पैदा की है। भारत को सीनियर स्कूलों में सेक्स और बर्थ कंट्रोल एजुकेशन शुरू करनी चाहिए। दुनियाभर में कॉन्डम एडवर्टाइजिंग को डीरेग्युलेट किया जा रहा है ताकि किशोरावस्था में गर्भधारण को रोका जा सके। इसे अब वक्त की जरूरत माना जा रहा है।
    ओहरी ने कहा, अगर सनी लियोनी वाला एड अश्लील हो तो उसे रोकना चाहिए, लेकिन समूची कॉन्डम एडवर्टाइजिंग को रेग्युलेट नहीं करना चाहिए। हम टीवी को रेग्युलेट कर सकते हैं, लेकिन अपने बच्चों के इर्दगिर्द के समूचे माहौल को कैसे रेग्युलेट करेंगे? हाल में एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने मंत्रालय से इस बारे में सुझाव मांगा था कि रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच काफी स्पष्ट सेक्शुअल कंटेंट वाले कॉन्डम एडवर्टाइजमेंट्स के टीवी प्रसारण को रोकना चाहिए या नहीं। 
    ड्यूरेक्स कॉन्डम पर टीवी विज्ञापनों के जरिए काफी पैसा लगाने वाली रेकिट बेनकाइजर ने कहा कि मिनिस्ट्री से आधिकारिक सूचना मिलने पर ही वह प्रतिक्रिया देगी। इसे पहले सितंबर में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने गुजरात में मैनकाइंड फार्मा के मैनफोर्स कॉन्डम के विज्ञापन पर ऐतराज जताया था, जिसके आउटडोर कैंपेन में प्ले सेफ लिखा गया था। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 11-Dec-2017
  • लखनऊ, 11 दिसंबर। ऑनलाइन शापिंग साइट मिंत्रा से खरीदारी करने वालों की जानकारी लीक करवाकर उनसे ठगी के मामले में यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के द्वारकापुरी से 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सात लड़कियां हैं। छापे के दौरान कॉल सेंटर से एमेजॉन व अन्य शॉपिंग वेबसाइट के ग्राहकों का भी डेटा मिला है। 
    एएसपी एसटीएफ डॉ.अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि इस रैकेट के शिकार पूरे देश में हैं। इस ठगी की शिकायत मिंत्रा ऑनलाइन के नैशनल नोडल सिक्यॉरिटी अफसर ने एसटीएफ को दी थी। एसटीएफ ने ग्राहकों को की गई कॉल के जरिए मोबाइल नम्बर, कॉल आने की तारीख, समय, नाम, पैसा जमा करवाने के लिए दिए गए खाता संख्या की जानकारी जुटाई। 
    यहां से सुराग मिला कि वेबसाइट के मेन ऑफिस से पूरा डेटा लीक हुआ है। पड़ताल में पता चला कि ये कॉल सेंटर द्वारका इलाके में है। एसटीएफ ने डीसीपी, द्वारका की मदद से वहां रेड की और 18 लोगों को गिरफ्तार किया। 
    कॉल सेंटर के मैनेजर रत्नेश गुप्ता ने बताया कि कॉल सेंटर का संचालक मथुरा निवासी योगेंद्र चौधरी और उसका भाई संदीप चौधरी है। दोनों भाग निकले। योगेंद्र तीन साल से यह कॉल सेंटर चला रहा था। उसने ही मिंत्रा का डाटा लीक करवाया था। 
    छापे में 26 फोन, एक लैपटॉप, मिंत्रा का 280 पेज का डाटा, आठ बैंक खातों का ब्योरा, मिंत्रा-अमेजन के डेटा के स्क्रीन शॉट मिले हैं। 
    एसटीएफ ने 14 लोगों को मुचलके पर छोड़ दिया है। मैनेजर, दो अकाउंटेंट और एक डाटा फीडिंग मैनेजर को न्यायिक हिरासत में भेजकर साइबर थाने में केस दर्ज करवाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि 7139 ग्राहकों ने आठ दिसंबर तक मिंत्रा को ठगी की शिकायत की थी। इनमें से 590 ग्राहक 31 लाख 41 हजार 874 रुपये जमा करवा चुके थे। 
    ठगों को मालूम था कि किस ग्राहक ने मिन्त्रा से कब-क्या खरीदा। इसके आधार पर वे ग्राहक को बताते कि आपने वेबसाइट से जो खरीदारी की थी, उस पर लकी ड्रॉ में कीमती सामान निकला है। जालसाज कॉल स्पूफिंग के जरिए मिंत्रा के टॉल-फ्री नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। ग्राहकों के फोन पर मिंत्रा का ही नंबर आता था। ग्राहक उन पर विश्वास कर लेते थे। ठग ग्राहक से रजिस्ट्रेशन, इन्श्योरेन्स, कोरियर चार्ज के नाम पर आईडिया मनी या पेटीएम में पैसा लेते थे और रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। 
    अगर आपके पास किसी भी ऑनलाइन शापिंग वेबसाइट से इस तरह के इनाम वाले फोन आते हैं तो पहले वेबसाइट के टोल-फ्री नंबर पर फोन करके इस बात की पुष्टि कर लें कि क्या उनके यहां से ऐसा कोई कॉल किया गया है।  (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 11-Dec-2017
  • मुंबई, 11 दिसंबर । भारतीय रिजर्व बैंक पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने अर्थव्यवस्था को नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों से लगे झटके को देखते हुए कहा है कि अर्थव्यवस्था को इस स्थिति से पूरी तरह उबरने और उच्च वृद्धि के रास्ते पर आगे बढऩे के लिए दो साल के समय की और जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह एक झटका है जिसकी नकारात्मक धारणा के साथ शुरुआत हुई है। इसमें कुछ सुधार आ सकता है और उसके बाद कुछ फायदा मिल सकता है। फिलहाल इस समय इसमें परेशानी है और लाभ बाद में आएगा। कितना फायदा होगा और कितने अंतराल के बाद यह होगा, यह देखने की बात है।
    रेड्डी ने मुंबई में एक समूह के सवालों के जवाब में कहा कि इस समय आर्थिक वृद्धि को लेकर कोई अनुमान लगाना काफी मुश्किल काम है। उन्होंने कहा कि यह कहना अभी मुश्किल है कि अर्थव्यवस्था फिर से 7.5 से 8 प्रतिशत की संभावित उच्च वृद्धि के रास्ते पर कब लौटेगी।
    उन्होंने याद किया कि जब वह आरबीआई के गवर्नर थे, उसके मुकाबले पिछले तीन साल में कच्चे तेल के दाम एक-तिहाई पर आ गए थे। हालांकि, इस बीच जीएसटी लागू होने, नोटबंदी का कदम उठाने और बैंकों की भारी एनपीए की वजह से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हुई।
    रेड्डी ने कहा कि उच्च वृद्धि के दौरान पिछली सरकार में बिना सोच विचार के दिए गए कर्ज और भ्रष्टाचार के आरापों को लेकर टेलीकॉम तथा कोयला क्षेत्र में घटे घटनाक्रम से कंपनी क्षेत्र पर काफी दबाव बढ़ गया। इस समूचे घटनाक्रम से बैकिंग तंत्र में फंसा कर्ज 15 प्रतिशत तक बढ़ गया था। (भाषा)

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Posted Date : 10-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 10 दिसंबर । मारुति सुजुकी ने बड़ी ही गुपचुप तरीके से नई डिजायर 2017 कारों के पिछले पहिए में खराबी के चलते 21 हजार से ज्यादा कारों को रिकॉल किया है। कंपनी ने अपनी इस सब कॉम्पैक्ट सिडैन की 21,494 यूनिट्स वापस मंगाईं हैं। मारुति ने उन डिजायर मॉडल्स को वापस मंगाया है जो कि 23 फरवरी 2017 से 10 जुलाई 2017 के बीच बनाई गईं। 
    मारुति ने अपनी ऑफिशल वेबसाइट पर रिकॉल नोटिफिकेशन भी डाला है। कस्टमर्स वेबसाइट पर लॉग ऑन करते हुए भी चेक कर सकते हैं कि उनकी कार के पिछले पहिए में खराबी है या नहीं। 
    इसमें ग्राहकों को अपना वीइकल रजिस्ट्रेशन नंबर वेबसाइट पर डालना होगा। 
    मारुति डिजायर 2017 को भारत में मई 2017 में लॉन्च किया गया था। इस गाड़ी ने सेल्स के मामले में जबर्दस्त परफॉर्मेंस किया। कंपनी ने अक्टूबर तक 1 लाख से अधिक डिजायर बेच डालीं। इसमें 1.2 लीटर के सीरीज पेट्रोल इंजन दिया गया है। इसके अलावा एक 1.3 लीटर डीडीआईएस डीजल इंजन वाला मॉडल भी आता है। 
    दोनों ही इंजनों को 5 स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन सिस्टम से लैस किया गया है। इसके साथ ही इसके टॉप मॉडल में 5 स्पीड एएमटी ट्रांसमिशन का भी विकल्प है। नई डिजायर की नई दिल्ली में एक्स शोरूम कीमत 5.49 लाख रुपए से शुरू होकर 9.44 लाख रुपए तक जाती है।  (नवभारत टाईम्स) 

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Posted Date : 10-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 10 दिसंबर। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की ओर मांग में गिरावट से संकेत लेते हुए राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बीते सप्ताह सोने की कीमत 850 रुपए की गिरावट के साथ 30,000 रुपए के स्तर से नीचे रही। यह तीन माह के निम्न स्तर 29,650 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई।
    औद्योगिक इकाईयों और सिक्का निर्माताओं के कमजोर उठाव के कारण चांदी की कीमत में भी गिरावट आई। बाजार सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी ब्याज दर में वृद्धि की संभावना तथा कर सुधारों की दिशा में प्रगति के कारण विदेशों में डॉलर में मजबूती आई और सुरक्षित निवेश के विकल्प के बतौर सर्राफा मांग प्रभावित हुई जिससे सोने में मई के बाद की सबसे बड़ी गिरावट आई।
    विदेशों में इस कमजोरी के रुख के अनुरूप यहां कारोबारी धारणा में मंदी रही।  वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना सप्ताहांत में गिरावट दर्शाता 1,248.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी कमजोरी के साथ 16.82 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।  उन्होंने कहा कि घरेलू हाजिर बाजार में फुटकर एवं आभूषण विक्रेताओं की मांग में पर्याप्त गिरावट आने से भी सर्राफा कीमतों पर दबाव बढ़ गया। राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कमजोर शुरुआत हुई। (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 10-Dec-2017
  • मुंबई, 10 दिसंबर । पांच सहयोगी बैंकों के मर्जर के बाद भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी 1300 शाखाओं के नाम और आईएफएससी कोड बदल दिए हैं। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने जिन शाखाओं के आईएफएससी कोड बदले हैं, वे मुंबई, नई दिल्ली, बंगलूरू, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में हैं।
    एसबीआई के रिटेल और डिजिटल बैंकिंग के प्रबंध निदेशक प्रवीण गुप्ता ने कहा, हमारे कुछ पुराने सहयोगी बैंकों की शाखाएं एसबीआई में मर्ज हो चुकी है। जब भी मर्जर होता है, आईएफएससी कोड बदल जाते हैं। उन्होंने कहा, ग्राहकों को इन बदलावों की सूचना दे दी गई है। बैंक भी उन्हें नए आईएफएससी कोड से जोड़ रहा है। गुप्ता के मुताबिक, अगर कुछ भुगतान पुराने आईएफएससी कोड से आते हैं तो उन्हें नए कोड के साथ मिला लिया जाएगा। 
    ग्राहकों को इससे कोई परेशानी नहीं होगी। एसबीआई ने अपने 2300 शाखाएं बंद कर दी हैं। साथ ही पुराने और नए नाम के साथ सभी शाखाओं की जानकारी और आईएसएससी कोड वेबसाइट पर भी डाल दिए गए हैं।
    इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड या आईएफएससी 11 अंकों का अक्षरों और अंकों से बना कोड होता है। यह बैंक की शाखाओं की अलग से पहचान के लिए इस्तेमाल होता है। आरटीजीएस, एनईएफटी अथवा आईएमपीएस के जरिये एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजने के लिए आईएफएससी जरूरी होता है। (एजेंसी)

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Posted Date : 09-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 9 दिसंबर । केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक (एफआरडीआई) ने लोगों को काफी डरा दिया है। आशंका जताई जा रही है कि इस बिल से कथित तौर पर बैंकों को संकट के समय लोगों के जमा धन को इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाएगी। इस बिल के खिलाफ मुंबई की शिल्पा श्री ने चेंजडॉटअओआरजी पर एक ऑनलाइन पिटिशन डाली है। इसके द्वारा बैंकों की खराब हालत पर उन्हें उबारने के लिए लोगों के जमा धन का इस्तेमाल नहीं करने की बात कही जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि यह खबर तेजी से फैल रही है और अब तक पिटिशन पर 70 हजार से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। 
    पिटिशन में कहा गया है, यह बिल सरकारी संस्था को अधिकार देता है कि वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे बैंक को बचाने के लिए जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल कर सके। भले ही आपने अपनी गाढ़ी कमाई जमा की हो पर सरकारी संस्था यह घोषणा कर सकती है कि बैंक की ओर से आपको कोई पैसा नहीं दिया जाना है। हां! यह हमारे उस पैसे के साथ होगा, जो हमने अपने बच्चों और भविष्य के लिए बचाकर रखा है। इसीलिए, मैंने यह पिटिशन डाली है और हम वित्त मंत्री अरुण जेटली से एफआरडीआई बिल में से बेल-इन के प्रावधान को हटाने की मांग कर रहे हैं।
    सरकार ने लोकसभा में अगस्त में एफआरडीआई बिल, 2017 रखा था, जिसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है। अब इसे संसद के शीतकालीन सत्र में सामने लाया जाएगा। इस बिल में वित्तीय सेवा प्रदाताओं के दिवालियापन से निपटने की बात की गई है। इसके तहत एक ऐसे कॉर्पोरेशन की स्थापना की बात कही गई है जिसके पास वित्तीय फर्म को संपत्तियों के ट्रांसफर, विलय या एकीकरण, दिवालियापन आदि से संबंधित कई अधिकार होंगे। 
    बिल में कहा गया है कि बैंक की विफलता पर प्रस्तावित कॉर्पोरेशन एक सीमा तक जमा बीमा देगा, जिसे स्पष्ट नहीं किया गया है। फिलहाल, 1 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट्स इंश्योर्ड हैं (बाकी पेजï 5 पर)
    लेकिन कुछ बैंक ऐसे हैं जो हाल के वर्षों में विफल रहे हैं। ऐसे में आरबीआई ने जमाकर्ताओं के लिए किसी जोखिम के बगैर प्लान बनाने पर जोर दिया है। 
     बिल में सुझाव दिया गया है कि बेल-इन प्रावधान के इस्तेमाल से देनदारी को खत्म किया जा सकता है, जो बैंक में जमा धनराशि को भी प्रभावित कर सकता है या नियम व शर्तों में बदलाव हो सकता है। डिपॉजिट इंश्योरेंस स्कीम फिलहाल सभी बैंकों, वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और कोऑपरेटिव बैंकों को कवर करती है। डीआईसीजीसी की वेबसाइट के मुताबिक अब तक 2017 में सभी कोऑपरेटिव बैंकों को इंश्योरेंस स्कीम के तहत 28 करोड़ रुपये से ज्यादा स्वीकृत किए गए। 
    हालांकि सरकार का कहना है कि वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक, 2017 जमाकर्ताओं के हित में है और इसमें उनके लिए वर्तमान कानून की तुलना में अच्छे प्रावधान किए गए है। वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, एफआरडीआई बिल में दूसरे कानूनों या अधिकारक्षेत्र (जो वैधानिक तौर पर बेल-इन की बात करते हैं, जहां बेल-इन के लिए जमाकर्ता या क्रेडिटर्स की सहमति की जरूरत नहीं होती) की तुलना में जमाकर्ताओं के ज्यादा हित सुरक्षित हैं। सरकार की पब्लिक सेक्टर के बैंकों के लिए अंतर्निहित गारंटी प्रभावित नहीं होगी। (इकनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 08-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 8 दिसंबर । भारतीय रेलवे लगातार कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहा है। इसके लिए वह पहले से ही कई ऑफर ग्राहकों को दे रहा है, लेकिन अब वह इस मोर्चे पर एक और अहम कदम उठाने जा रहा है।
    भारतीय रेलवे से टिकट भुगतान करने के लिए कैशलेस भुगतान करना जल्द ही आपके लिए फायदे का सौदा साबित होने वाला है। दरअसल रेलवे कैशलेस भुगतान करने वाले व्यक्ति को टिकट बुकिंग के दौरान छूट देने समेत कई  फायदे देने की तैयारी कर रहा है।
    सिर्फ रेल टिकट बुकिंग में छूट नहीं, बल्कि फ्री ट्रैवल इंश्योरेंस भी इसमें शामिल हो सकता है। मौजूदा समय में आपको मासिक ट्रैवल पास करने पर 0.5 फीसदी की किराये में छूट दी जाती है। अब रेलवे अनारक्षित श्रेणी के टिकट पर भी यह लाभ देने की तैयारी कर रहा है।
    रेल बोर्ड के सदस्य मोहम्मद जमशेद ने बताया कि हम कैश का इस्तेमाल कम से कम करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि कैशलेस भुगतान के लिए छूट के तौर पर दिए जाने वाली प्रोत्साहन राशि का भार रेलवे ही उठाएंगे। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 08-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 8 दिसंबर । वित्त मंत्रालय ने भरोसा जताया है कि फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल यानि एफआरडीआई बिल में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि जमाकर्ताओं के पैसों पर कोई खतरा नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया है कि डिपॉजिट पर 1 लाख रुपये तक का बीमा मिलता रहेगा। वहीं एफआरडीआई बिल में 1 लाख के ऊपर जमा को भी सुरक्षित रखने की जरूरत है।
    दरअसल एफआरडीआई बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। बिल में जमाकर्ताओं की रकम का इस्तेमाल दिवालिया की स्थिती या मुसीबत से गुजर रहे बैंक की मदद के लिए इस्तेमाल में लाई जाने का प्रस्ताव है। 
    फिलहाल डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गैरेंटी कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत 1 लाख रुपए तक के डिपॉजिट को इंश्योर किया जाता है।(मनी कंट्रोल)

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 7 दिसंबर। आनलाइन सुपरमार्केट ग्रोफर्स ने वालेट सेवा सिंपल के साथ गठजोड़ कर एक नयी पहल के तहत किराना सामान के अपने खरीदारों के लिए पोस्ट पेड योजना पेश की है जिसमें उसके ग्राहक महीने भर की अपनी खरीदारी का एक बार में भुगतान कर सकते हैं।

    कंपनी की एक विग्यप्ति के मुताबिक वालेट सेवा सिंपल द्वारा अब उसके ग्राहक महीने में किसी भी समय किराने का सामान और अन्य वस्तुएं खरीद सकते हैं और

    महीने के अंत में सिंपल के विकल्प के साथ् एक बिल के जरिए पूरी राशि का भुगतान कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इस पोस्ट पेड सेवा का लक्ष्य ग्राहकों के लिये मासिक वेतन के प्रारंभिक दिनों में खरीदारी को सुगम बनाना है।

    ग्रोफर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलबिंदर धींडसा ने कहा कि यह एक अनूठी सेवा है जिसमें ग्राहक को संगठित और पारंपरिक दोनों प्रकार के खुदरा क्षेत्र के लाभ मिलते हैं।

    कंपनी के अनुसार पहले यह सेवा केवल ग्रोफर्स के वफादार ग्राहकों के लिये होगी। आगे चल कर ग्रोफर्स अपने सभी ग्राहकों के लिये पोस्टपेड ग्रॉसरी खरीद की सिंपल भुगतान विकल्प सेवा का विस्तार करेगा। ग्रोफर्स आनलाइन सुपरमार्केट प्लेटफार्म ग्राहकों को किराना, फल, सब्जी, सौंदर्य, स्वास्थ्य, घरेलू देखभाल, शिशु की देखभाल, पालतू पशु की देखभाल, मांस और समुद्री भोजन जैसी श्रेणियों में उत्पादों की पेशकश करता है और घर पर सामान की आपूर्ति करता है। यह दिल्ली, आगरा, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखन, लुधियाना, नागपुर, नोएडा और वडोदरा समेत 25 शहरों में अपनी सेवाएं देता है। (भाषा)

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 7 दिसंबर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) द्वारा कई तरह के काम कराए जाने के बाद गरीब घरों की आय में 11 फीसदी और खेतों में 32 फीसदी उत्पादकता बढ़ी है। इंस्टीट्यूट ऑफ इकॉनॉमिक ग्रोथ (आईईजी) के एक अध्ययन में यह जानकारी मिली है। इस अध्ययन के लिए 29 राज्यों के 30 जिलों के 1160 ग्रामीण परिवारों को चयनित किया गया है।
    आईईजी के अध्ययन के अनुसार, इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज के उत्पादन में 11.5 फीसदी और सब्जी के उत्पादन में 32.3 फीसदी की वृद्धि हुई है।
    ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रोजगार सुनिश्चित करने और इन इलाकों में ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के लिए 155 तरह के कार्य कराए जाते हैं। इस योजना के धन का बड़ा हिस्सा जल संरक्षण कार्यों में खर्च किया जाता है।
    जहां एक तरफ मनरेगा से ग्रामीण लोगों की आय और उत्पादकता में वृद्धि हुई है वहीं  राजस्थान के आंकड़ों को देखें तो ये मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण बेरोजगारी गारंटी योजना नजर आएगी।
    हाल ही में मनरेगा के तहत राज्य में महज 13 हजार लोगों को 100 दिन का रोजगार मिला है। जबकि जब से ये योजना लागू हुई है तब से कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि ढाई लाख से कम लोगों को 100 दिन का रोजगार मिले। आज तक संवाददाता ने गांवों में जाकर हालात का जायजा लिया तो समस्या आंकड़ों में कहीं ज्यादा दिखाई दी।
    जयपुर जिले के निमेड़ा गांव में 6 महीने बाद मनरेगा के तहत 12 लाख का काम मांगा था, लेकिन सिर्फ सात लाख रुपये का काम आया। गांव में मनरेगा के तहत 400 बेरोजगार लोगों का जॉब कार्ड बना हुआ है, 200 रुपये की मजदूर के हिसाब से 50 मजदूरों को एक दिन काम पर रखने के हिसाब से दो महीने का काम है और फिर बेरोजगार।(आज तक)

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 6 दिसंबर। मोदी सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिससे देश में जितने भी लोगों के पास कार है, उन्हें एलपीजी सब्सिडी देना बंद किया जा सकता है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार एलपीजी सब्सिडी में खर्च होने वाले पैसे को बचाने के लिए इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पूरा प्रस्ताव तैयार करने के लिए कई  जिलों के आरटीओ ऑफिस से डाटा जुटा लिया गया है।
    सूत्रों ने बताया कि मौजूदा समय में वे लोग भी सब्सिडी ले रहे हैं, जिनके पास दो से तीन कारें हैं। ऐसे में मोदी सरकार का एलपीजी सब्सिडी का पैसा बचाने के लिए यह कदम उठा सकती है।
    पिछले साल केंद्र सरकार ने उन लोगों को सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया था, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा मोदी सरकार ने अपने स्तर पर सब्सिडी छोडऩे के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित किया है। इसके लिए गिवइटअप कैंपेन चलाया जा रहा है।
    केंद्र सरकार ने सब्सिडी के लिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर का विकल्प अपनाकर 3.6 करोड़ फर्जी कनेक्शन पर धावा बोला था। इससे सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये बचाए थे।
    हालांकि सभी कार मालिकों से सब्सिडी वापस लेना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह काम काफी ज्यादा मुश्किल है। क्योंकि इसके लिए कार मालिकों और उनके संबंधित पते से वेरीफाई करना भी जरूरी होगा। मौजूदा समय में आपको एलपीजी गैस पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाती है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 6 दिसंबर। नोटबंदी पर आपकी जेब और घर में रखे कैश पर मोदी सरकार ने हल्ला बोला लेकिन अब बारी बैंक में जमा धन की है। केंद्र सरकार एक ऐसा बिल लेकर आ रही है जो यदि पास हो गया तो आपके बैंक में जमा धन पर आपका हक खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है। जी हां, यदि बैंक दिवालिया हो गया तो हो सकता है कि उस बैंक में जमा आपकी लाखों की रकम आप खुद ही नहीं निकाल सकें।
    फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल -2017 का मसौदा तैयार है। इसे इसी शीत सत्र में संसद में रखा जा सकता है और अगर ये बिल पास हो गया तो बैंकिंग व्यवस्था के साथ-साथ आपके लिए कई चीजें बदल जाएंगी।
    सबसे बड़ा सवाल बैंकों में रखे आपके पैसे को लेकर है। यह बिल बैंक को अधिकार देता है कि वह अपनी वित्तीय स्थिति बिगडऩे की हालत में आपके जमा पैसे लौटाने से इंकार कर दे और इसके बदले आपको सिक्योरिटीज अथवा शेयर दें।
    फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है। जब भी कोई  बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो उस बैंक को इस संकट से उभारने में मदद करेगा ये एफआरडीआई बिल। किसी भी बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और अन्य वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थित में उसे इस संकट से उभारने के लिए यह कानून लाया जा रहा है।
    इस प्रस्तावित कानून में बेल इन का एक प्रस्ताव दिया गया है। अगर इस प्रस्ताव को मौजूदा मसौदे के हिसाब से लागू कर दिया जाता है, तो बैंक में रखे आपके पैसों पर आपसे ज्यादा बैंक का अधिकार हो जाएगा। इससे बैंकों को एक खास अधिकार मिल जाएगा। बैंक अगर चाहें तो खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर आपके पैसे लौटाने से इंकार कर सकते हैं। इसके बदले वह आपको शेयर्स व अन्य प्रतिभूति दे सकते हैं।
    क्या होता है बेल-इन
    बेल-इन का साधारण शब्दों में मतलब है कि अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं की जेब से करना। इस बिल में यह प्रस्ताव आने से बैंकों को भी यह अधिकार मिल जाएगा। जब उन्हें लगेगा कि वे संकट में हैं और उन्हें इसकी भरपाई करने की जरूरत है, तो वह आम आदमी के जमा पैसों का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे।  इस मामले में सबसे डरावनी बात यह है कि बैंक आपको ये पैसे देने से इंकार भी कर सकते हैं। हालांकि वित्त मंत्री अरुण  जेटली ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह परिभाषित करने के लिए कहा है, जो फिलहाल मसौदे में किया नहीं गया है। उन्होंने कहा कि अभी इसमें काफी बदलाव किए जा सकते हैं। इसको लेकर आम लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे।  
    मौजूदा समय में बैंक में आपकी जो भी जमा पूंजी होती है। उसमें 1 लाख रुपये तक की राशि हमेशा सुरक्षित होती है। इसमें आपको मिलने वाला ब्याज भी शामिल होता है। यह गारंटी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की तरफ से मिलती है। इसका  मतलब यह है कि जब कोई बैंक दिवालिया हो जाता है और वह जमाकर्ताओं के पैसे लौटाने में सक्षम नहीं होता, तो भी इस स्थिति में उसे जमाकर्ताओं को 1 लाख रुपये तक की राशि देनी होगी।
    अगर किसी बैंक में आप ने 5 लाख रुपये रखे हैं। किसी वजह से वह बैंक दिवालिया हो जाता है। वह जमाकर्ताओं के पैसे चुकाने की स्थिति में नहीं रहता है, तो ऐसी स्थिति में भी उसे कम से कम 1 लाख रुपये आपको देने ही होंगे। हालांकि 1 लाख से ज्यादा जितनी भी रकम होगी, उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
    एफआरडीआई अगर कानून बन जाता है, तो  डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसकी जगह रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन ले लेगी। यह समिति वित्त मंत्रालय के अधीन काम करेगी। यह समिति ही तय करेगी कि बैंक में रखी आपकी कितनी रकम बैंकों के दिवालिया होने की स्थिति में सुरक्षित रहेगी।  
    इसलिए है चिंता
    बिल में ये बात तो कही गई है कि बैंक में रखे आपके पैसे को सुरक्षा कवर मिलेगा, लेकिन ये साफ नहीं किया है कि यह कितनी रकम और किस स्थिति में मिलेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नए बिल में सुरक्षा कवर की मौजूदा रकम, जो कि एक लाख है, उसे बढ़ाया जा सकता है। वहीं, कुछ आशंका जता रहे हैं कि नई व्यवस्था में कहीं इसे घटा न दिया जाए। (आज तक)

     

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Posted Date : 05-Dec-2017
  • देव चटर्जी और ईशिता आयान दत्त 
    मुंबई/कोलकाता, 5 दिसंबर  एस्सार समूह कर्जदाताओं का बकाया चुकाने की योजना बना रहा है ताकि वह हजीरा में अपने स्टील प्लांट की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सके। इस संयंत्र में टाटा स्टील और आर्सेलर मित्तल जैसी कंपनियों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। एक कर्जदाता ने कहा कि समूह ने कर्जदाताओं से लंबित ब्याज बकाया के बारे में जानकारी मांगी है, जिससे वह रकम अदा कर सके और दिसंबर अंत तक अन्य के साथ संयंत्र के लिए बोली लगा सके। 
    भूषण पावर एंड स्टील के प्रवर्तक संजय सिंघल ने भी कहा कि अगर ऐसा संभव होता है तो वह बकाया देय चुका कर अपनी फर्म के लिए बोली लगा सकते हैं। एस्सार स्टील ने अप्रैल 2016 से इस साल जून तक बैंकों को करीब 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। एस्सार ऑयल और एजिस की बिक्री से मिलने वाली रकम से समूह अपना कर्ज चुका सकता है। बैंकर ने कहा, ऋणदाताओं की समिति इस पर विचार करेगी।
    एस्सार स्टील पर बैंकों का करीब 44 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है लेकिन बकाया ब्याज काफी कम है। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के मैनेजिंग पार्टनर आलोक धीर ने कहा, सरकार द्वारा जारी स्पष्टïीकरण के अनुसार कोई कंपनी या प्रवर्तक अपना बकाया बैंकों को चुका कर बोली प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। उन्होंने कहा, ऋणदाताओं की समिति को उनको बेहतर पेशकश मिल सकती है और अभिरुचि प्रक्रिया के पूरा होने के बाद वे अपने लिए बेहतर वित्तीय सौदे की मांग कर सकते हैं।
    मुंबई के एक जाने-माने वकील ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, प्रवर्तक कंपनी के लिए बोली लगा सकते हैं, लेकिन उन्हें अपना खाता चालू करना होगा। लेकिन इसमें स्पष्टïता नहीं है कि उन्हें पूरा कर्ज चुकाना होगा या केवल बकाया ब्याज/मूलधन। अगर पूरा कर्ज चुकाने की बात हो तो एनसीएलटी प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं होगा क्योंकि कोई देनदारी नहीं होगी।
    सार्वजनिक क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कई प्रवर्तकों ने आग्रह किया हैै कि वह बकाया चुकाने के बारे में उनकी योग्यता पर विचार करें। उन्होंने कहा कि यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक से जुड़ा है, इसलिए इस बारे में केंद्रीय बैंक द्वारा ही स्पष्टï किया जा सकता है। इस बारे में एस्सार समूह के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 
    एस्सार स्टील उन 12 कंपनियों में शामिल हैं, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक ने राष्टï्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में भेजा है। एस्सार स्टील के अलावा, भूषण स्टील, भूषण पावर एंड स्टील, मोनेट इस्पात और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स जैसी कंपनियां ऋणशोधन एवं दिवालिया प्रक्रिया में गईं हैं।
    एनसीएलटी ने इन कंपनियों के निदेशक मंडल को निलंबित कर ऋणशोधन पेशेवरों को नियुक्त किया है। ऋणशोधन एवं निपटान पेशवर फंसी कंपनियों के कर्ज का एक हिस्सा लेने इच्छुक पक्षों के लिए वित्तीय बोली मंगाएंगे। इस बीच बैंक को भी अपना करीब 60 फीसदी कर्ज गंवाना होगा। सबसे अधिक कर्ज को लेने वाले बोलीदाता को ही कंपनी सौंपी जाएगी। मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भूषण पावर ऐंड स्टील देय बकाया 10 हजार करोड़ है, जिसे अग्रिम में चुकाया जा सकता है। भूषण पावर का कुल कर्ज करीब 37,248 करोड़ रुपये का है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)।

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • मुंबई, 4 दिसंबर। अमरीकी दवा कंपनी मायलन और बेंगलुरु की कंपनी बायोकॉन की लगभग एक दशक पुरानी साझेदारी के सामने आ रही दिक्कतें अब दूर होती नजर आ रही हैं। अमरीकी एफडीए ने शुक्रवार रात उनकी बायोसिमिलर दवा ट्रैस्टिजमाब को मार्केटिंग अप्रूवल दे दिया, जिससे उसकी लॉन्चिंग को लेकर चल रही कयासबाजी बंद हो गई। ओगिवरी ब्रांड नेम वाली यह दवा ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली स्विस दवा कंपनी रोश की ब्लॉकबस्टर दवा का वर्जन है।
    बायोसिमिलर दवाएं बहुत ही जटिल बायोलॉजिक दवाओं की कॉपी होती हैं। बायोसिमिलर दवाओं का असर इनोवेटर वर्जन जैसा ही होता है। दुनियाभर में हर साल 3.16 अरब डॉलर की सेल्स वाली ट्रैस्टिजमाब की बिक्री 2020 तक 10 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। एनालिस्टों का कहना है कि अमरीकी एफडीए के अप्रूवल से मायलन की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, क्योंकि उसके पास अमरीका में यह दवा बेचने के एक्सक्लूसिव राइट्स हैं जबकि बायोकॉन की कॉम्प्लेक्स दवाओं के बाजार में पैर जमाने का सपना सच होने जैसा होगा।
    बायोकॉन मायलन की बायोसिमिलर दवा को मंजूरी अमरीकी एफडीए के ओंकोलॉजी ड्रग्स एडवाइजरी कमेटी की ओरिजनल प्रॉडक्ट के बायोसिमिलर के हक में 16-0 मतों से फैसला आने के चार महीने बाद मिली है। बायोकॉन ने अपना प्रपोज्ड बायोसिमिलर अमरीका दवा कंपनी के साथ मिलकर तैयार किया था। एफडीए कमिश्नर स्कॉट गॉटलिब ने कहा, एफडीए बड़ी संख्या में बायोसिमिलर दवाओं को मंजूरी दे रहा है जिससे कॉम्पिटिशन को बढ़ावा मिले और हेल्थकेयर की लागत में कमी आए। हम हमारे लिए बड़ी बात है क्योंकि कैंसर जैसी बिमारियों की दवा बहुत महंगी पड़ती हैं।
    एनालिस्टों ने बताया कि इंडियन मार्केट ने कंपनी की दवा को मंजूरी मिलने का अनुमान महीनों पहले लगा लिया था। उन्होंने कहा कि अब कंपनी के शेयरों में तेज उछाल आ सकता है। बायोकॉन की एमडी किरण मजूमदार शॉ ने कहा, हमारे बायोसिमिलर ट्रैस्टिजमाब को मिला अमरीकी एफडीए का अप्रूवल असल में हमारे लिए सबसे बड़ा पल है, जिसने हमें ग्लोबल बायोसिमिलर प्लेयर्स की कतार में ला खड़ा किया है। इससे कैंसर के सस्ते इलाज वाले बायोलॉजिक के डिवेलपमेंट पर फोकस करने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत बनाता है। यह ऐसी एडवांस्ड थेरेपी डिवेलप करने की हमारी यात्रा का अहम मील का पत्थर है जो दुनिया के करोड़ों अरबों मरीजों को फायदा दिला सकती है। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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