कारोबार

Posted Date : 04-Dec-2017
  • ऑस्ट्रेलिया, 4 दिसंबर। ऑस्ट्रेलिया में दुनिया की सबसे बड़ी लिथियम ऑयन बैटरी का संचालन शुरू हो गया है। इसके साथ तकनीक क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी टेस्ला इंक अपनी अनोखी शर्त पूरी करने में सफल हो गई है। खबरों के मुताबिक टेस्ला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने सितंबर के अंत में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की राज्य सरकार के साथ इस शर्त के साथ इसे बनाने का करार किया था कि अगर उनकी कंपनी इसे 100 दिन में नहीं बना पाती है तो वह इसके लिए कोई भुगतान नहीं लेगी। हालांकि, कंपनी 100 दिन तय सीमा से एक माह पहले ही इसे चालू करने में सफल रही है।
    दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में स्थापित 100 मेगावॉट की इस लिथियम ऑयन बैटरी का उद्घाटन राज्य के प्रमुख जे वेदरिल और फ्रांस की कंपनी नियॉन के उप कार्यकारी अधिकारी रोमेन डेसरूसो ने किया। यह कंपनी यहां पर विंड एनर्जी पार्क चलाती है, जिससे इस बैटरी को जोड़ा गया है। इसे निर्माण क्षेत्र में नया इतिहास बताते हुए जे वेदरिल ने कहा कि अब पिछले साल की तरह पूरे राज्य में बिजली गुल होने की घटना दोबारा नहीं होगी। वहीं, राज्य सरकार ने अपने बयान में कहा है कि जेम्सटाउन में बने अक्षय ऊर्जा के नए स्रोत से 24 घंटे और सातों दिन स्वच्छ और सस्ती पवन ऊर्जा मिल सकेगी, चाहे हवा चल रही हो या नहीं।
    उधर, टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने इस बैटरी को दुनिया में स्थापित होने वाली अगली सबसे बड़ी बैटरियों से तीन गुना शक्तिशाली बताया है। उन्होंने कहा है कि यह पूरी तरह चार्ज होने पर 30 हजार घरों को एक घंटे तक बिजली दे सकती है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से पवन ऊर्जा पर निर्भर है। हाल में उसने अपनी ऊर्जा व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए 55 करोड़ डॉलर की ऊर्जा योजना की घोषणा की है। (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 04-Dec-2017
  • चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ने 11 नवंबर को अपने इतिहास की सबसे अधिक बिक्री की। चीन के सिंगल्स डे सेलिब्रेशन के दिन अलीबाबा को 25 अरब डॉलर (करीब 1613 अरब रुपये) का ऑर्डर मिला। यह रकम भारत की दिवाली और अमेरिका की थैंक्सगिविंग सेल्स से बहुत ज्यादा है। आइए डालते हैं एक नजर दिवाली, थैंक्सगिविंग और सिंगल्स डे जैसे विशेष अवसरों पर सेल्स की स्थिति पर।

     

    ...
  •  


Posted Date : 02-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 2 दिसंबर। मोबाइल फोन यूजर्स 1 जनवरी 2018 तक अपने मोबाइल नंबर को आधार से री-वेरिफाई करने के लिए इंतजार करना होगा। इसके लिए यूजर्स को टेलिकॉम कंपनी के आउटलेट पर जाने की जरुरत नहीं है। मोबाइल को आधार से लिंक करने के लिए कस्टमर्स आईवीआरएस सर्विस का इस्तेमाल कर सकते है।
    टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने फॉरेन नेशनल्स, एनआरआई, सीनियर सिटीजंस, फिजिकली चैलेंज्ड लोगों और आधार रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर्स के लिए मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के लिए प्रक्रिया जारी कर दी है।
    आईवीआरएस के जरिए सबसे पहले मोबाइल यूजर कंपनी के दिए गए नंबर पर कॉल करना होगा। यहां उन्हें भाषा चुनने के बाद अपना आधार नंबर देना होगा। इसके बाद टेलीकॉम कंपनी यह डिटेल यूआईडीएआई को भेजेगी। यहां से आधार नंबर वैरिफाई होने के बाद यूजर को ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी इंटर करने के बाद आगे की प्रोसेस शुरू होगी, जिसके 24 घंटे बाद यूजर को मोबाइल कंपनी से मैसेज आ कन्फर्मेशन का मैसेज मिल जाएगा।
    डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन (डीओटी) ने अपने आदेश में कहा कि लाइसेंसी को सुनिश्चित करना चाहिए कि सब्सक्राइबर्स 1 जनवरी, 2018 से इन वैकल्पिक तरीकों से अपने मोबाइल कनेक्शन को री-वैरिफाई करें।
    जिन लोगों का मोबाइल नंबर आधार से रजिस्टर्ड है, उन्हें आधार से लिंक कराने के लिए ओटीपी जेनरेट करना होगा। इसके लिए 14546 को इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पॉन्स सिस्टम (आईवीआरएस) हेल्पलाइन के तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे।
    डीओटी ने कहा कि कई रिप्रिजेंटेशंस में नॉन रेजिडेंट इंडियंस (एनआरआई) और ओवरसीज इंडियंस और फॉरेन नेशनल्स को अपने मोबाइल कनेक्शन से आधार लिंक कराने में से जुड़ीं दिक्कते सामने आयी हैं। डीओटी ने कहा कि आधार नहीं रखने वाले फॉरेन नेशनल्स अपने मोबाइल ऑपरेटर के रिटेल आउटलेट्स पर जाकर और अपने पासपोर्ट की डिटेल्स जमा कर ऐसा कर सकेंगे। इसके साथ ही, 6 फरवरी से पहले अपना मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं करवाया, तो उनका नंबर बंद हो सकता है।  (न्यूज 18)

    ...
  •  


Posted Date : 01-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 1 दिसंबर । आर्थिक वृद्धि दर में पिछली पांच तिमाहियों से जारी नरमी के रुख को पलटते हुए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।  आर्थिक वृद्धि में आई इस तेजी में विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियों और माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के साथ कारोबारियों का तालमेल बैठने को बड़ी वजह माना जा रहा है। 
    चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही थी। नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह सबसे कम वृद्धि थी। एक साल पहले दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल की गई थी। सरकार के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। इससे पहले 2013-14 में चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि की दर घटकर 4.6 प्रतिशत रह गई थी।     
    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में दर्ज की गई वृद्धि टिकाऊ है और इससे अर्थव्यवस्था में पिछली पांच तिमाहियों में जो नरमी का रुख था उसमें बदलाव का संकेत मिलता है। जेटली की उम्मीद का साझा करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर में आया उछाल दिखाता है कि अर्थव्यवस्था नरमी के झंझावत से बाहर निकल आई है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरे साल की वृद्धि दर 6.5 से सात प्रतिशत के बीच रह सकती है। 
    आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग ने कहा कि दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था के उच्च वृद्धि के रास्ते पर चलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा, जीएसटी व्यवस्था में बदलाव पूरा होने के साथ ही जल्द ही हम सात प्रतिशत से ऊपर और उसके बाद आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हासिल करेंगे। अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक काफी मजबूत हैं।            
    उद्योग जगत ने भी कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत पर पहुंचने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि के रास्ते पर पहुंच गई है और इससे उम्मीद बंधी है कि 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह और बेहतर करेगी। दूसरी तिमाही की यह वृद्धि दर मूडीज द्वारा हाल ही में भारत की साख रेटिंग में सुधार किए जाने के बाद आई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 14 साल बाद भारत की निवेश रेटिंग में सुधार किया है। मूडीज ने कहा कि दुनिया की यह बड़ी अर्थव्यवसथा 2017-18 में 6.7 प्रतिशत और इससे अगले साल में 7.5 प्रतिशत रह सकती है।  (एजेंसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 01-Dec-2017
  • मनीष शांडिल्य
    पटना, 1 दिसंबर । बिहार की राजधानी पटना में बकरी के दूध की मांग इतनी बढ़ गई है कि इसके दाम प्रति लीटर 1,000 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके पीछे पौष्टिकता या कोई अफवाह नहीं बल्कि डेंगू के बढ़ते मामले हैं।
    पटना के कंकड़बाग इलाके में बसी झुग्गियों में दूध लेने आए श्याम का पंद्रह साल के बेटे को भी डेंगू हो गया है। वो कहते हैं, करीब एक महीने पहले मेरे बेटे को डेंगू हुआ था। बीमारी तो खत्म हो गई लेकिन बेटे को अब भी कमजोरी है और इसलिए उसे यह दूध पिला रहे हैं।
    करीब तीन हफ्ते से वो रोजाना 250 एमएल दूध अपने बेटे के लिए लेकर जाता है। श्याम जी के मुताबिक, हालांकि इसकी सलाह डॉक्टर की नहीं थी लेकिन लोगों का कहना है कि इसे पिलाने से डेंगू के मरीजों को फायदा होता है।
    दरअसल इस साल सितंबर के आस-पास पटना के कुछ इलाके गंभीर रूप से डेंगू के चपेट में आए थे। तब अचानक बकरी की दूध की मांग बढ़ गई।
    बकरी पालने वाली पटना की दुसाधपकड़ी की फुलमनी देवी कहती हैं, एक महीने से ज्यादा हो गया है, लोग ये कहते हुए बकरी का दूध लेने आ रहे हैं कि उनके घर में डेंगू मरीज है। मैंने बकरी के बच्चे का दूध काट कर लोगों को इलाज के लिए यह दूध दिया है।
    डॉक्टर्स कॉलोनी इलाके में ही बकरी का दूध बेचने वाले सुरेश पासवान बताते हैं, दुर्गा पूजा के आस-पास से सुबह से ही दूध लेने आने वालों की भीड़ लग जाती थी। तब चाय के कांच वाले एक ग्लास भर दूध के डेढ़ सौ रुपए मिल जाते थे। यह सिलसिला छठ के आस-पास तक बना रहा। अब धीरे-धीरे इसकी मांग भी घटी रही है।
    हालांकि शायद ही कोई एक लीटर दूध ले जाता रहा हो लेकिन जो कीमत है, उस समय हिसाब से ये प्रति लीटर करीब एक हजार रुपये तक बिका है। दरअसल मौसम बदलने से डेंगू का प्रकोप भी कम हुआ है और इस कारण इस दूध की मांग भी घटी है।
    पटना के मुन्नाचक इलाके के अरुण कुमार के घर में भी हाल के दिनों में बकरी के दूध का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने बताया, दीवाली के करीब मेरी मां को डेंगू हो गया था। तब डॉक्टर के कहने पर मां ने करीब एक महीने तब सुबह-शाम बकरी का दूध पिया।
    ऐसा नहीं है कि लोग देसी नुस्खे के बतौर सिर्फ बकरी का दूध ही इस्तेमाल करते हैं। लोग गधी के दूध का भी इस्तेमाल करते हैं। पत्थलकट समुदाय सील-लोढ़ा, जाता, खल-मूसल बनाते है। ये लोग पत्थर से बने भारी सामान की ढुलाई के लिए गधा पालते हैं।
    इसी समुदाय के सदस्य करण शाह बताते हैं, जाड़े के मौसम में गधी का दूध लेने वाले ज्यादा आते हैं। खास कर टीबी के मरीज इस दूध का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मरीज सूरज उगने से पहले दूध लेने के लिए आ जाते हैं। हालांकि डाक्टरों का कहना है कि इस तरह के इलाज का कोई चिकित्सीय आधार नहीं है।
    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, पटना के अध्यक्ष डॉक्टर एसएनपी सिंह कहते हैं, कहीं से बात निकल गई तो लोग इस्तेमाल करने लगे। गाय और बकरी के दूध में मौजूद पोटैशियम, कैल्सियम, फैट जैसे पोषक तत्वों में ज्यादा का फर्क नहीं होता। दूध कोई भी हो सबमें पोषक तत्व मिलेंगे। (बीबीसी)

    ...
  •  


Posted Date : 01-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 1 दिसंबर। क्या आप ऐसा डेबिट कार्ड चाहते हैं, जिसमें आपका खुद का फोटो हो। अगर हां, तो अब इसके लिए आप भारतीय स्टेट बैंक का रुख कर सकते हैं। एसबीआई चंद मिनटों के भीतर आपको आपके फोटो वाला डेबिट कार्ड  जारी कर देगी।
    अगर आप महज कुछ मिनटों में पर्सनलाइज्ड डेबिट कार्ड हासिल करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको एसबीआईएनटच ब्रांच में खाता खुलवाना होगा। एसबीआई की ये आधुनिक शाखाएं देश के 143 जिलों से भी ज्यादा जगहों पर खुली हुई हैं।
    इन ब्रांच में खाता खोलने के बाद आपको इन शाखाओं पर कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यहां आपके ज्यादातर बैंक से जुड़े काम बिना लाइन पर लगे हो जाएंगे।
    इन शाखाओं में जाकर आप एओके कियोस्क के जरिये मिनटों में अपना बैंक खाता खोल सकते हैं। यहां आपके लिए कैश डिपोजिट मशीन और चेक डिपोजिट मशीन जैसी कई सुविधाएं मिलेंगी।
    यहीं आपके लिए डीसीपीके कियोस्क भी लगा हुआ है। इस कियोस्क के बूते आप अपना फोटो वाला डेबिट कार्ड महज कुछ मिनटों के भीतर हासिल कर सकते हैं।
    एसबीआई की इन शाखाओं के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप एसबीआई की वेबसाइट पर जा सकते हैं। यहां आपको ये पता चल जाएगा कि ये शाखाएं कहां-कहां पर हैं और आप कैसे इसकी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।  (आज तक)

    ...
  •  


Posted Date : 01-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 1 दिसंबर। केंद्र सरकार द्वारा पैराडाइज पेपर्स की जांच के लिए गठित समूह कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना पर काम कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दिसंबर को इसकी पहली बैठक बुलाई गई है। इनमें उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा जिन्होंने विदेशों में अपनी अवैध पूंजी जमा कर रखी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) प्रमुख की अध्यक्षता वाले इस समूह में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भारतीय रिजर्व बैंक और वित्तीय खुफिया इकाई के प्रतिनिधि शामिल हैं। 
    पेपर्स में कुल 426 भारतीयों के नाम आए हैं। हालांकि, कर विभाग ने इनमें से केवल 147 नामों को ही जांच के लायक माना है। विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि उन मामलों को कार्रवाई न कर पाने की श्रेणी में रखा गया है, जिनसे जुड़ा पैन नंबर या फिर अन्य आंतरिक डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

    ...
  •  


Posted Date : 30-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 30 नवम्बर। भारत का टेलिकॉम नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने इंटरनेट न्यूट्रैलिटी के समर्थन में कहा है कि इंटरनेट तक सभी की आसान पहुंच होनी चाहिए। हालांकि, अमरीकी सरकार की संस्था ने इंटरनेट न्यूट्रेलिटी और फ्री इंटरनेट को बचाए रखने वाले कानून को खत्म करने की बात कही है। ये एक ऐसा मुद्दा है जो भारत में हर आय वर्ग के व्यक्ति के साथ सीधे जुड़ा हुआ है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि ये सारा मुद्दा दरअसल है क्या?
    नेट न्यूट्रेलिटी, फ्री इंटरनेट, नेटवर्क इक्वेलिटी और ओपन इंटरनेट आदि बेहद जटिल और तकनीकी शब्द हैं। फ्री इंटरनेट के मुद्दे की जानकारी नहीं होने की वजह से कई लोग मुक्त इंटरनेट की जगह मुफ्त इंटरनेट समझ रहे हैं।
    इंटरनेट यूजर्स के लिए समान स्पीड और समान कीमत पर इंटरनेट उपलब्ध रहने का विचार ही इंटरनेट न्युट्रैलिटी यानी इंटरनेट तटस्थता है। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं।
    सोचकर देखिए कि अगर आपकी कंपनियां आपको वॉट्सऐप से लेकर ट्विटर जैसी अन्य मोबाइल ऐप्स के लिए अलग-अलग डेटा प्लान देने लगें तो क्या होगा?
    मसलन, वॉट्सऐप के पैक की कीमत 65 रुपये और ट्विटर वाले पैक की कीमत 250 रुपये हो। जबकि दोनों मोबाइल ऐप के इस्तेमाल के लिए आपको एक ही इंटरनेट की जरूरत होती है। ऐसे में कंपनियां इंटरनेट की उपलब्धता को कीमत से प्रभावित करके आपके चुनने की शक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इंटरनेट का पूरा बाजार फ्री यानी मुक्त बाजार की अवधारणा से अलग हटकर इंटरनेट सेवादाताओं पर निर्भर हो सकता है।
    सवाल ये है कि आप फ्री इंटरनेट से क्या आशय निकालते हैं? मुफ्त इंटरनेट या फ्री इंटरनेट। बीते साल रिलायंस जियो के टेलीकॉम बाजार में उतरने के बाद से इस बाजार की दशा और दिशा में आमूल-चूल परिवर्तन आया है।
    अगर उपभोक्ताओं की नजर से देखें तो इस परिवर्तन से उन तक एक शब्द पहुंचा है और वो शब्द है—फ्री इंटरनेट।
    एयरटेल से लेकर वोडाफोन जैसी तमाम कंपनियों ने अपने इंटरनेट पैक की कीमतों में भारी कमी की है। इसके साथ ही इन्हें फ्री इंटरनेट बताकर प्रचारित किया जा रहा है।
    ऐसे में जब इंटरनेट से जुड़ी कानूनी बहस खड़ी होती है और फ्री इंटरनेट का मुद्दा खड़ा होता है तो इसे मुफ्त इंटरनेट समझने की भूल की जाती है जबकि ये इंटरनेट को कंपनियों के शिकंजे से मुक्त रखने की एक पहल है।  (बीबीसी)

    ...
  •  


Posted Date : 29-Nov-2017
  • दिल्ली, 29 नवम्बर । रिलायंस कम्यूनिकेशन के शेयर मंगलवार (28 नंवबर) को 3.37 फीसदी तक गिर गए। कहा जा रहा है कि चाईना डेवलपमेंट बैंक ने कंपनी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया होने का केस दर्ज कराया है। हालांकि मामले में बीएसई को सफाई देते हुए रिलायंस कम्यूनिकेशन के प्रवक्ता ने कहा, कंपनी को ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है जिसमें हमारे खिलाफ सीडीबी ने एनसीएलटी में केस दर्ज कराया है। ये खबरें सिर्फ मीडिया के हवाले से हैं। प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी सभी शेयरधारकों के हित को ध्यान में रखते हुए एसडीआर प्रक्रिया के सफल समाधान के लिए जेएलएफ (ज्वाइंट लेंडर्स फोरम) से जुड़ी हुई है। सीडीबी भी जेएलएफ में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
    प्रवक्ता के अनुसार, चाईना डेवलपमेंट बैंक द्वारा एनसीएलटी में एप्लीकेशन दाखिल कराए जाने से कंपनी खुद आश्चर्यचकित है। क्योंकि कंपनी सभी लेंडर्स के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है, इसमें सीडीबी भी शामिल है। हम सभी लेंडर्स के समर्थन और पूर्ण संकल्प के प्रति आश्वस्त और प्रतिबद्ध हैं।
    आरकॉम अनिल अंबानी ग्रुप का हिस्सा है। जिसे चाईना डेवलपमेंट बैंक (सीडीबी) द्वारा 1.22 अरब डॉलर का लोन दिलाया गया था। लोन करीब छह साल पहले सिंडीकेट ऑफ चाईनीज बैंक अन्य वित्तीय संस्थानों ने दिया, इसमें सीडीबी भी शामिल है। ऐसा पहली बार था जब कि सिंडिकेट ने इतना बड़ा लोन दिया था। आरकॉम ने इसके साथ 600 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त समझौता सीडीबी से किया। लोन दस साल के लिए दिया गया।
    इस साल 15 नवंबर को रिलायंस ग्रुप की कंपनियों जैसे, आरकॉम, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस इंस्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पॉवर के स्टोक्स भारी मात्रा में बिके। हालांकि बाद में कंपनी के शेयर 12 फीसदी तक गिए। बताया जाता है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आरकॉम ने 2020 डॉलर के रूप में कूपन का भुगतान नहीं किया। (जनसत्ता)

     

    ...
  •  


Posted Date : 28-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 28 नवम्बर । मसला चुनावी ज्यादा नजर आता है। गुजरात के दुग्ध सहकारी संघ ने पिछले महीने ही दूध में निकलने वाली चर्बी (फैट या क्रीम) की कीमत बढ़ाने का फैसला किया है। इसके मुताबिक अब संघ की ओर से दूध उत्पादक किसानों को 700 रुपए प्रति किलो चर्बी के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। यह फैसला भी ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश ने इन्हीं कीमतों को घटाकर 625 से 585 रुपए प्रति किलो कर दिया है।
    सूत्र बताते हैं कि गुजरात के दुग्ध सहकारी संघ ने बीते अप्रैल के महीने में भी दूध क्रीम के भुगतान की कीमत बढ़ाई थी। उस वक्त यह कीमत 675 रुपए प्रति किलो की गई थी, जबकि दिसंबर-2016 में कीमत 625 रुपए प्रति किलो थी। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक यह फैसला विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही किया गया लगता है। क्योंकि गुजरात के कुल 4.30 करोड़ मतदाताओं में करीब 3.60 करोड़ किसान हैं। ये दुग्ध उत्पादन से भी किसी न किसी तौर पर जुड़े हैं।
    गुजरात मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) से जुड़े एक और पहलू पर सूत्र रोशनी डालते हैं। उनके मुताबिक बाजार में अमूल ब्रांड का दूध उपलब्ध कराने वाली गुजरात की इस सहकारी संस्था का मुनाफा भी लगातार बढ़ा है। साल 2011-12 में जहां संस्था की आमदनी 11,668 करोड़ रुपए थी। वहीं 2017-18 में यह 27,085 करोड़ रुपए हो चुकी है। दुग्ध उद्योग के एक बुजुर्ग कारोबारी के मुताबिक, इस बढ़ी हुई आमदनी से प्रभावशाली दल के राजनेताओं को सुविधा हुई है।
    वे अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए बताते हैं, प्रभावशाली दल से सीधा आशय उस पार्टी से है जो सत्ता में है। उसके नेता चुनावी साल में जीसीएमएमएफ की आमदनी के बल पर गुजरात की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। वह भी राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाले बगैर। और अप्रैल से नवंबर के बीच ही जिस तरह दो बार किसानों के लिए दूध क्रीम की कीमतें बढ़ाई गईं उससे इन बुजुर्ग की बात काफी हद तक सही भी जान पड़ती है।(इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 27-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 27 नवम्बर। हाल ही में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैन्डर्ड एंड पूअर्स (एस एंड पी) ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को बीबीबी- पर बरकरार रखा है। हालांकि एसएंडपी का कहना है कि आने वाले वक्त में भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती आ सकती है।
    एजेंसी ने माना है कि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी और इस साल 1 जुलाई से लागू किए गए जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और विकास की गति धीमी हुई है। लेकिन जीएसटी के कारण देश के भीतर कारोबार के लिए बाधाएं हटेंगी और सकल घरेलू उत्पाद बढ़ सकता है।
    इससे सप्ताह भर पहले क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को बीएए3 से बढ़ाकर बीएए2 कर दिया था। मूडीज की रिपोर्ट में नोटबंदी, नॉन परफॉर्मिंग लोन्स को लेकर उठाए गए कदम, आधार कार्ड, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को इसकी मुख्य वजह बताया गया।
    मूडीज और एसएंडपी अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग संस्थाएं हैं जिनका काम है देशों के आर्थिक हालात का आंकलन करना, जिससे निवेशकों को उस देश में निवेश पर राय बनाने में सहूलियत हो।
    विदेशी निवेशकों और संस्थागत विदेशी निवेशकों के लिए ये रेटिंग काफी मायने रखती है। साथ ही रेटिंग इस बात को भी दर्शाती है कि उस देश की कर्ज लौटाने की क्षमता क्या है।
    तो रेटिंग बढ़ जाने से या दूसरी रेटिंग एजेंसी के भारत के प्रति सकारात्मक रुख से क्या बदल जाएगा। लोग कह रहे हैं कि मोदी सरकार को साढ़े तीन साल हो चुके हैं- लेकिन नई नौकरियों के मौके बनने की रफ्तार बहुत कम है। उलटे आईटी सेक्टर में नौकरियां कम हो रही हैं।
    लेकिन हकीकत ये भी है कि खुद क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की साख सवालों में है। नौ साल पहले 2008 में एक विश्वव्यापी संकट का दौर शुरू हुआ तो अमरीका समेत दुनिया के कई शेयर बाजार भरभराकर गिर गए। उस समय निवेशकों को सलाह देने वाली इन संस्थाओं को हवा भी नहीं लगी कि इस तरह का कोई बड़ा संकट आने वाला है।
    ये एजेंसियां अर्थव्यवस्था पर जो विश्लेषण देती हैं उसे हम पसंद करते हैं तो खुश हो जाते हैं, लेकिन जब विश्लेषण हमें पसंद नहीं आते तो हम चुप हो जाते हैं। आपको ये मानना पड़ेगा कि सरकार वो सुनती है जो वो सुनना चाहती है और वो नहीं सुनती जो वो नहीं सुनना चाहती।
    हम मानते हैं कि विदेश से पैसा आ रहा है, शेयर बाजार में भी पैसा आ रहा है, लेकिन वो जमीनी नौकरियों के नए मौकों में तब्दील होता नहीं दिख रहा।
    हम ये भी देख रहे हैं कि देश में जो बड़े पूंजीपति हैं शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, विदेश के अलग-अलग देशों में निवेश कर रहे हैं लेकिन अपने देश में कम ही निवेश कर रहे हैं।
    ये कंपनियां निजी संस्थाएं है और इनके अपने अर्थशास्त्री हैं जो अर्थव्यवस्था पर नजर रखते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं। वो विश्लेषण करने के बाद मानते हैं कि अर्थव्यवस्था बढ़ेगी या सकल घरेलू उत्पाद बढ़ेगा तो इसे दर्शाने के लिए रेटिंग बढ़ा देते हैं।
    इस विश्लेषण के आधार पर वो निवेश करने की सलाह देते हैं। अगर वो सोचते हैं कि अर्थव्वस्था में निवेश करना बेहतर नहीं होगा तो वो ऐसे में रेटिंग जस की तस रहने देते हैं या फिर कम कर देते हैं।
    मूडीज और एस एंड पी जैसी संस्थाएं पूंजीवाद/आर्थिक उदारीकरण की नीति या कहें पश्चिमी देशों की आर्थिक विचारधारा पर यकीन करती हैं, जो खुले बाजार की नीति में विश्वास करती हैं।
    कई लोगों का कहना है कि पूंजीवाद एक बात है, लेकिन हर देश की आर्थिक नीति अलग-अलग होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो नीति एक देश में काम कर रही है उसे अन्य देश में भी लागू कर किया जाए। अब एक ही नाप का जूता सभी के पैरों में तो फिट नहीं बैठ सकता।
    इन रेटिंग्स का दृष्टिकोण काफी संकीर्ण होता है। इन एजेंसी की नजर पूरी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से पर ही रहती है, जैसे कि विदेश के निवेशक को शेयर बाजार में निवेश करना चाहिए कि नहीं। इन लोगों की रेटिंग्स का हमारे देश के आम आदमी के लिए सीधे-सीधे कोई मायने ही नहीं हैं।
    आम नागरिक के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे कुछ और ही हैं। वो शेयर बाजार में कम निवेश करते हैं। उनके लिए महंगाई बड़ा मुद्दा है, रोजगार बड़ा मुद्दा है। तो ऐसे में ये रेटिंग्स अच्छे हों या बुरे उनका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है। (बीबीसी)
    (वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक मामलों के जानकार परंजॉय गुहा ठाकुरता से बातचीत पर आधारित। उनसे बात की बीबीसी संवाददाता मानसी दाश ने।)

    ...
  •  


Posted Date : 26-Nov-2017
  • सेल, 60 फीसदी छूट या ऑफर सिर्फ तीन दिन के लिए, ऐसे विज्ञापनों के बहकावे में कहीं आप भी तो नहीं फंसते।
    अखबारों में बंपर डिस्काउंट के विज्ञापन
    हर दूसरे दिन आपको अखबार में इलेक्ट्रॉनिक और दूसरी चीजों पर भारी डिस्काउंट वाले ऑफर दिखते हैं। लेकिन जरा संभल कर, यह छलावा भी हो सकता है। कई बार कंपनियां सिर्फ कुछ खास डेबिट या क्रेडिट कार्ड्स पर ही ऐसे ऑफर देती हैं। कई बार तो पुराने या डिफेक्टेड माल पर भी ऐसे ऑफर्स दिये जाते हैं।
    एक्सचेंज ऑफर
    कई बार कंपनियां ये दावा करती हैं कि वे सबसे अच्छे दाम पर आपका सामान लेकर एक्सचेंज में नई चीज दे रही हैं। अच्छा होगा अगर आप ऐसे विज्ञापनों पर सीधे भरोसा करने के बजाय बाजार में और वेबसाइट या स्टोर्स पर पता कर लें कि वहां आपको कितना पैसा मिल रहा है। कई बार एक्सचेंज में मोबाइल या टैपटॉप देने के बाद मालूम पड़ता है कि आपने बिल्कुल कौड़ी के भाव में अपना सामान दे दिया।
    फ्लाइट टिकट्स का जाल
    आप अक्सर सुनते होंगे कि कोई एयरलाइन्स आपको 900,1000 या 1,500 रुपये में टिकट्स दे रही है। आप एयरलाइन्स की वेबसाइट पर जाते हैं और टिकट देखते हैं। आपके पहले तो वही कीमत दिखती है, लेकिन पेमेंट के ऑप्शन पर जाते ही आपको मालूम चलता है कि यह तो सिर्फ बेस फेयर की बात हो रही थी। सभी तरह के टैक्स देने के बाद टिकट लगभग उतने ही कीमत की मिल रही होती है जितनी आम दिनों में एडवांस बुकिंग में मिल जाती है।
    ऐप अलर्ट
    दुनियाभर के शॉपिंग ऐप आपके मोबाइल पर लगातार नोटिफिकेशन भेजते हैं। कई बार इन अलर्ट में कई बार ऐसे भी डिस्काउंट होते हैं जो आपको बताते हैं कि 30 प्रतिशत या 50 प्रतिशत तक के डिस्काउंट बस कुछ घंटों के लिए हैं। ज्यादातर बार लोग इन अलर्ट में भारी डिस्काउंट की सूचना पाकर महंगी खरीददारी कर लेते हैं। इसलिए ऐप अपनी सुविधा के लिए रखें लेकिन इस जाल से बचें।
    ऑफर सीमित समय के लिए
    अक्सर आपको ऐसी डील्स वाले विज्ञापन दिखेंगे जो दावे करते नजर आएंगे कि यह ऑफर सिर्फ आखिरी कुछ घंटों या दिनों के लिए है। कई बार इसमें हमारी जरूरत की चीजें होती हैं लेकिन हम फिर भी ऐसी भी चीजें खरीद लेते हैं, जो दरअसल हमें खरीदनी ही नहीं थी। सबसे बड़ी बात ये है कि कुछ घंटे या सिर्फ एक दिन वाले ऑफर्स के चलते आप चीजों के बारे में बाजार में ठीक से पता भी नहीं कर पाते हैं और चीजें खरीद लेते हैं।
    अलग टाइम पर अलग कीमत
    कई बार ऐसा भी होता है कि अगर आप अलग अलग टाइम पर किसी चीज की कीमत देखें तो आपको हर बार नई कीमत मिलेगी। कई बार ऐसा होता है कि जिन भी चीजों की डिमांड ज्यादा होती है उनकी कीमत बढ़ा दी जाती है, जब उसकी बिक्री कम हो जाती है तो उसके दाम फिर से कम कर दिये जाते हैं। इसलिए पहले से देखी हुई चीज के दाम अगर आपको कम या ज्यादा दिखें तो उसके पीछे ऐसा ही कोई कारण हो सकता है। (डॉयचे वेले)

    ...
  •  


Posted Date : 24-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 24 नवम्बर। कोई भी बैंक 500 और 2000 रुपये के उन नोटों को लेने से इंकार नहीं कर सकता है जिनपर कुछ लिखा हुआ है। हालांकि व्यक्ति ऐसे नोटों को बदलवा नहीं सकता है, यह नोट सिर्फ जमाकर्ता के व्यक्तिगत खाते में जमा किये जा सकते हैं। आरबीआई के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
    अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आर्थिक साक्षरता के तहत मेला आने वाले लोगों को जागरूक कर रहा है। यहां नए नोटों के फीचर समेत लोगों को उनके अधिकारों के प्रति साक्षर किया जा रहा है। साथ में, डिजिटल माध्यम से जुडऩे के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    प्रगति मैदान के हॉल संख्या 18 में लगे आरबीआई के स्टॉल में लोग अपने सवाल लेकर भी पहुंच रहे हैं। कोई यहां 500 और 2000 रुपये के ऐसे नोटों की वैधता जानना चाह रहा है जिनपर कुछ लिखा हुआ है। तो कोई बैंक के खिलाफ शिकायत करने के तरीके के बारे में जानकारी मांग रहा है। किसी को 10 रुपये के सिक्कों की स्थिति के बारे में जानकारी चाहिए। (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 24-Nov-2017
  • मुंबई, 24 नवम्बर। फडणवीस सरकार के 34,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी के बाद भी राज्य में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी है। पिछले 10 महीनों में 2 हजार 414 किसानों ने आत्महत्या की है। यानी औसतन प्रतिदिन 8 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कांग्रेस-एनसीपी का दावा है कि बीजेपी-शिवसेना के राज में किसानों की आत्महत्या की संख्या बढ़ी है।  
    कहीं पर सूखा और कहीं पर बाढ़, बीज की बढ़ती कीमतें, कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाना, उत्पादन घटने जैसी तमाम वजहों से राज्य के छोटे और मझोले किसान परेशान हैं। फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने कई आंदोलन किए थे। वर्तमान जल संसाधन मंत्री गिरीष महाजन ने इसके लिए आमरण अनशन तक किया था। सत्ता में आने के बाद उन आंदोलनों को भाजपा सरकार भूल गई। 
    किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए सरकार ने जलयुक्त शिवार जैसी कई अन्य योजनाओं की घोषणा की। इसी साल जुलाई में फडणवीस सरकार ने 89 लाख किसानों के 34,022 करोड़ रुपये की कर्जमाफी देने की घोषणा की। जुलाई में कर्जमाफी की घोषणा के बाद अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में ही 788 किसानों से आत्महत्या की है। 
    राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जनवरी से अक्टूबर तक राज्यभर में 2,414 किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसमें 1,277 किसान परिवारों को सरकारी मदद मिली, जबकि 1,137 किसान परिवारों को मदद के लिए अपात्र ठहरा दिया गया। यानी अपात्र ठहराए गए किसानों को सरकारी मदद नहीं मिलेगी। इस संबंध में राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमारी भरसक कोशिश होती है कि आत्महत्या करने वाले सभी किसानों को सरकारी मदद मिले, लेकिन किसानों की मदद के लिए बनाए गए मापदंड इसकी इजाजत नहीं देते। वे मजबूर हैं, लेकिन जो किसान अपात्र ठहराए गए हैं, उन किसान परिवारों से संपर्क कर अन्य तरीकों से मदद पहुंचाने की कोशिश जारी है। 
    वसंतराव नाईक कृषि स्वावलंबन मिशन के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने बताया कि जब तक सरकार कृषि नीति में बदलाव नहीं करती, तब तक आत्महत्याएं नहीं रुकेंगी। अकेले मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराने से कुछ हासिल नहीं होगा। अधिकारी काम नहीं कर रहे, इसलिए कर्जमाफी का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। 
    वहीं इन आंकड़ों पर विपक्ष ने भी हमलावर रुख अपना लिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा, यह सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है। इस सरकार के राज में किसानों को कभी न्याय नहीं मिलेगा। किसानों की आत्महत्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन यह सरकार सिर्फ जुबानी जमा-खर्च कर रही है। आत्महत्या रोकने के लिए जो कुछ योजनाएं शुरू की उसमें भी इन्होंने घोटाले किए। भला कैसे मिलेगा किसानों को न्याय।
    वहीं विधान परिषद में विपक्षी नेता धनंजय मुंडे ने भी सरकार पर हल्ला बोलते हुए कहा, पिछली सरकार के शासन काल में औसतन 6 किसान आत्महत्या कर रहे थे, लेकिन इस सरकार के शासन में यह संख्या बढ़कर 8 हो गई है। इससे साबित होता है कि किसानों की मदद करने में फडणवीस सरकार फेल हो गई है। सरकार के वादे खोखले हैं। किसानों की कर्जमाफी ऑनलाइन में उलझकर रह गई है। (नवभारत टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 23-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 23 नवम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यम और प्रौद्योगिकी की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी सबको समानता पर लाने की बड़ी क्षमता रखती है जिसने सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने, प्रशासन में सुधार और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक के क्षेत्र में कारगर मदद की है और सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से लोगों का सशक्तिकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में जन धन बैंक अकाउंट, आधार प्लेटफार्म और मोबाइल माध्यम पर जोर दिया और कहा कि इससे भ्रष्टाचार को कम कर पारदर्शिता लाने में मदद मिल रही है।
    साइबर स्पेस पर वैश्विक सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने साइबर स्पेस में सभी की हिस्सेदारी सुगम की है। स्टूडियो में बैठे विशेषज्ञों के अनुभव अब सोशल मीडिया पर रेखांकित होते हैं। विशेषज्ञता और अनुभव का सम्मिश्रण बदलाव के इस दौर में वैश्विक समुदाय के लिये जरूरी है ताकि साइबर सुरक्षा के विषय से विश्वास और संकल्प के साथ निपटा जा सके। उन्होंने कहा, साइबर स्पेस प्रौद्योगिकी को लोगों का मददगार बनना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि समाज के असुरक्षित समुदाय के लोग साइबर अपराधों की कुटिल साजिश में नहीं फंसे। साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता जरूरी है और इसे हमें अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए।
    मोदी ने कहा कि साइबर स्पेस नवोन्मेष के लिये एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हमारे स्टार्टअप दिनचर्या की समस्याओं के समाधान और जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में पहल कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वैश्विक समुदाय इसकी व्यापक संभावनाओं एवं क्षमता को समझेगा जो समावेशी है। भारतीय स्टार्टअप के माध्यम से यह सभी के लिये समान पहुंच और अवसर प्रदान करता है।
    उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी सबको समानता पर लाने की बड़ी क्षमता रखती है और इसने सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने, प्रशासन में सुधार और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक के क्षेत्र में कारगर मदद की है मोदी ने कहा कि सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से लोगों का सशक्तिकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार की मदद से सब्सिडी को लक्षित लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने से दस अरब डालर की राशि बचाने में मदद मिली।
    मोदी ने डिजिटल माध्यम और प्रौद्योगिकी की सराहना करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी हर बाधा को तोड़ती है। यह वसुधैव कुटुंबकम के भारतीय दर्शन को महत्व देते हुए यह संदेश देती है कि विश्व एक परिवार की तरह है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से लोगों का सशक्तिकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है । (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 22-Nov-2017
  • अबू धाबी, 22 नवम्बर। अबू धाबी पुलिस की एक नीलामी में एक 12 साल के बच्चे ने एक कार नंबर चार लाख डॉलर (लगभग ढाई करोड़ रुपए) में खरीदा है। बच्चे ने 1111 नंबर की प्लेट के लिए पंद्रह लाख दिरहम चुकाए। विशेष पंजीकरण नंबरों की ये नीलामी पुलिस के लिए पैसा जुटाने के लिए की जाती है।

    स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक खलीफा अल मजरूई नाम के बच्चे ने एक कुरान गायन प्रतियोगिता में पांच लाख दिरहम का ईनाम जीता था। बाकी राशि उसे अपने पिता से मिली है। ये नंबर प्लेट बच्चे की मर्सिडीज कार पर लगाई जाएगी। इसी कार से वो स्कूल जाते हैं।
    हालांकि अगले कुछ वर्षों तक वो इस कार को नहीं चला सकेंगे क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात में कार चलाने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। ये नंबर नीलामी में सबसे महंगा नहीं बिका है। नंबर 2 की प्लेट 27 लाख डॉलर में बिकी है जिसे एक व्यापारी ने खरीदा है।
    नंबर खरीद को सही ठहराते हुए व्यापारी अहमद अल मरजूकी ने कहा कि मुझे अपने देश पर गर्व है और मैं ये पैसा दान में देना चाहता था। पुलिस नंबरों की बिक्री से मिलने वाले पैसे का गरीबों और जरूरतमंदों की बेहतरी के लिए इस्तेमाल करेगी।बीते साल हुई ऐसी ही नीलामी में नंबर 1 की प्लेट 3.1 करोड़ दिरहम में बिकी थी। 
    इस साल नंबरों की नीलामी से पुलिस ने कुल डेढ़ करोड़ डॉलर जुटाए हैं। (बीबीसी)

    ...
  •  


Posted Date : 22-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 22 नवम्बर। बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और पैन कार्ड को आधार से जोडऩे के आदेश के बाद अब मोदी सरकार लोगों को अपनी अचल संपत्तियों को भी आधार से लिंक करने को कह सकती है। खबर के मुताबिक केंद्र सरकार में मंत्री हरदीप पुरी ने संकेत दिए हैं कि संपत्तियों के लेन-देन में आधार अनिवार्य किया जाएगा।
    पुरी ने कहा कि ऐसे कदम से रियल एस्टेट में लगा कालाधन बड़े पैमाने पर बाहर आएगा और बेनामी संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। उनका कहना था, संपत्ति के लेन-देन में आधार को जोडऩा एक अच्छा विचार है लेकिन मैं इसका ऐलान नहीं कर रहा हूं। हम पहले ही बैंक अकाउंट और अन्य चीजों से आधार को जोड़ रहे हैं और प्रॉपर्टी मार्केट के लिए भी कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार संकेत दिए हैं कि सरकार बेनामी संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई करेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या आधार को संपत्ति के लेन-देन से जोडऩा अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने के सरकार के अभियान की अगली कड़ी हो सकता है, केंद्रीय मंत्री ने कहा, बिलकुल, यह इसी तरह आगे बढ़ रहा है। मुझे कोई शक नहीं ऐसा होगा।
    हरदीप पुरी के मुताबिक यह पूरी तरह सुनिश्चित करना बहुत मुश्किल है कि दो लोगों के बीच होना वाला कोई लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी हो। हालांकि उन्होंने कहा कि बड़ी कीमतों वाले लेन-देन और हवाई टिकट जैसी चीजों की निगरानी निश्चित ही की जा सकती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, दुनिया में ऐसी कोई अर्थव्यवस्था नहीं जो पूरी तरह से कैशलेस हो। हालांकि स्थिर अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में लोग भारी कैश ले जाने की जरूरत महसूस नहीं करते। हम भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 21-Nov-2017
  • मुंबई, 21 नवम्बर । मुंबई के रहने वाले त्रिशनित अरोरा को पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। जिससे उनका पूरा परिवार परेशान रहता था। लेकिन उनकी रुची ही उनकी सफलता बनी और आज वो महज 23 साल की उम्र में साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट बन चुके हैं। ह्यूमन ऑफ बॉम्बे के फेसबुक पेज पर उनकी इंस्पिरेशनल स्टोरी शेयर हुई थी। जिसमें बताया गया है कि कैसे वो स्कूल की पढ़ाई छोड़कर भी अपना मुकाम हासिल किया। 

    त्रिशनित अरोरा ने बताया है कि बचपन से ही उन्हें कम्प्यूटर में रूचि थी। वो हर समय वीडियो गेम खेला करते थे। देर तक कम्प्यूटर में बैठने पर उनके पिता को काफी टेंशन होती थी। वो रोज कम्प्यूटर का पासवर्ड चेंज किया करते थे। लेकिन त्रिशनित रोज पासवर्ड को क्रेक कर दिया करता था। लेकिन इस चीज को देखकर उनके पिता भी प्रभावित हो गए और नया कम्प्यूटर लाकर दे दिया। एक वक्त ऐसा आया जिससे उनकी जिंदगी बदल गई।
    एक दिन त्रिशनित की स्कूल प्रिंसिपल ने उनके माता-पिता को स्कूल बुलाकर कहा कि उनका बच्चा 8वीं में फेल हो गया है। जिसके बाद उनके माता-पिता ने पूछा आखिर वो करना चाहते हैं। जिसके बाद उन्होंने फैसला लिया कि वो कम्प्यूटर में ही अपना करियर बनाएंगे। जिसके बाद पिता के कहने पर उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और कम्प्यूटर की बारीकियों सीखने लगे। उन्नीस साल की उम्र में वो कम्प्यूटर फिक्सिंग और सॉफ्टवेयर क्लीनिंग करना सीख गए थे। जिसके बाद वो छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम करने लगे। उनको पहला चेक 60 हजार रुपये का मिला था। जिसके बाद उन्होंने पैसे बचाकर खुद की कंपनी में खर्च करने का सोचा। आज जिसका नाम टीएसी सेक्यूरिटी सॉल्यूशन है। जो एक साइबर सिक्युरिटी कंपनी है। आठवीं फेल होने के बाद उन्होंने स्कूल से दूरी बना ली लेकिन उन्होंने 12वीं डिस्टेंस एज्यूकेशन से की और बीसीए कंप्लीट किया। लेकिन उससे पहले ही वो मुकाम हासिल कर चुके थे।

    जब त्रिशनित अरोरा 21 साल के थे तो उन्होंने अपनी कंपनी स्टार्ट की। त्रिशनित अब रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, एवन साइकिल जैसी कंपनियों को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं। वो हैकिंग पर किताबें भी लिख चुके हैं। 'हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा' 'दि हैकिंग एरा' और 'हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स' जैसी किताबें उन्होंने लिखी हैं। 
    उनकी मानें तो भारत में उनकी कंपनी के चार ऑफिस हैं और दुबई में भी एक ऑफिस है। करीब 40 फीसदी क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं। दुनियाभर में 50 फॉच्र्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। त्रिशनित का सपना है कि वो बिलियन डॉलर सेक्यूरिटी कंपनी खड़ी करें। फोब्र्स की मानें तो भारत के अलावा, टीएसी दुबई से भी काम करता है, शुरुआती दावों के अनुसाल डोमेस्टिक मार्केट और मिडिल ईस्ट से 1 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है।(एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 21-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 21 नवम्बर । नोटबंदी ने देश की अर्थव्यस्था के साथ-साथ पेमेंट के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था। नोटबंदी के पीछे सरकार का एक तर्क देश को लेस कैश इकॉनॉमी बनाना भी था। डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार पिछले साल से कई कार्यक्रम चला रही है। इस दिशा में सरकार एक बड़ा फैसला ले सकती है, चेक बुक खत्म करने का। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य लेन-देन को पूरी तरह डिजिटल करने का है। 

    कन्फीड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सेक्रटरी जनरल प्रवीण खंडेवाल ने बताया था, इसकी पूरी संभावना है कि निकट भविष्य में सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए चेक बुक व्यवस्था को खत्म कर दे।
    खंडेवाल ने डिजिटल रथ की लॉन्चिंग पर इसकी जानकारी दी थी। सीएआईटी और मास्टरकार्ड मिलकर इस कार्यक्रम को चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य ट्रेडर्स को डिजिटल ट्रांजैक्शंस के तरीके बताने के साथ-साथ कैशलेस इकॉनॉमी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, सरकार करंसी नोटों की प्रिंटिंग पर 25 हजार रुपये खर्च करती है और नोटों की सुरक्षा और रखरखाव पर 6 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। दूसरी तरफ बैंक डेबिट कार्ड पेमेंट के लिए 1 प्रतिशत और क्रेडिट कार्ड के लिए 2 प्रतिशत चार्ज करते हैं। सरकार इस प्रक्रिया में बदलाव कर बैंकों को सीधे सब्सिडी पहुंचाना चाहती है।
    जिससे इस चार्ज को हटाया जा सके।
    चेक बुक बैन करने से कैशलेस इकॉनॉमी की दिशा में क्या फायदा होगा? अधिकतर व्यापारिक लेन-देन चेक के जरिए ही होता है। अभी 95 प्रतिशत ट्रांजैक्शंस कैश या चेक के जरिए होते हैं। नोटबंदी के बाद नकद लेन-देन में कमी आई और चेक बुक का उपयोग बढ़ गया। सरकार ने इस वित्त वर्ष के अंत तक 2.5 खरब डिजिटल ट्रांजैक्शंस का टारगेट रखा है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए सरकार चेक बुक पर जल्द ही बैन लगा सकती है। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 20-Nov-2017
  • शाइन जैकब, संजीव मुखर्जी और श्रेया जय
    नई दिल्ली, 20 नवम्बर  सरकार ने दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने पिछले सप्ताह राजधानी में तय समय से पहले बीएस-6 ईंधन की व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी और अब वह बायोएथेनॉल संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। पराली जलने से निकलने वाला धुआं ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण है।
    सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) जैसी तेल विपणन कंपनियां जल्दी ही देश में पराली संग्रहण केंद्र स्थापित करेंगी जिसका इस्तेमाल देश में बन रहे दूसरी पीढ़ी के 12 बायोएथेनॉल संयंत्रों में किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में बायोईंधन से जुड़े कार्यकारी समूह के अध्यक्ष वाई बी रामकृष्ण ने कहा, तेल विपणन कंपनियों को हर संयंत्र के लिए सालाना करीब 1.5 लाख टन बायो मास की जरूरत होगी। इसमें धान और गेहूं की पराली तथा बांस के डंठल शामिल हैं। ऐसे दो संयंत्र पंजाब और हरियाणा में बन रहे हैं।
    पराली साल में 15 से 30 दिन तक उपलब्ध रहती है, इसलिए ये कंपनियां इस दौरान इनका संग्रहण करेंगी। पराली जलाने से इस बार एनसीआर में प्रदूषण का व्यापक असर रहा जिसके कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा और दिल्ली में भारी वाहनों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगानी पड़ी। खासकर पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किसान धान की फसल काटने के बाद उसके अवशेष जला देते हैं।
    तेल विपणन कंपनियां बायोएथेनॉल संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रही हैं। सरकारी कंपनियों के इस क्षेत्र में कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की संभावना है। निजी क्षेत्र की कंपनियां भी 16 बायोएथेनॉल संयंत्र बनाने पर विचार कर रही हैं। इस तरह इस क्षेत्र में कुल 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। रामकृष्ण का कहना है कि इससे पराली जलाने की समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि इनमें से हर संयंत्र को रोजाना 500 टन बायो मास की जरूरत पड़ेगी। 
    पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि दिल्ली में 1 अप्रैल, 2018 से ही वाहनों के लिए बीएस-6 मानक लागू किया जाएगा। अनुमानों के मुताबिक बीएस-4 मानक वाले वाहन बीएस-6 ईंधन पर चलाए जाएं तो इससे 50 फीसदी कम प्रदूषण होगा। कुछ आकलनों के मुताबिक इन चार राज्यों में 3।4 करोड़ टन धान की पराली पैदा होती है। मशीनों से कटाई के कारण पराली पूरी तरह नहीं उखड़ती है जिससे किसानों को अवशेष जलाना पड़ता है। वे इसे सडऩे के लिए नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि उन्हें अगली फसल के लिए खेत तैयार करना पड़ता है। हालांकि उनके पास कटाई मशीन के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) जोडऩे का विकल्प है जो पराली को नीचे तक काटता है और फिर इसे काटकर मिट्टी में मिला देता है। इसकी लागत एक लाख से 1.25 लाख रुपये पड़ती है।
    कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब में करीब 7,500 स्वचालित कटाई मशीनें और 8500 ट्रैक्टर से चलने वाली कटाई मशीनें हैं जिन पर एसएमएस नहीं जुड़ा है। राज्य सरकार इन मशीनों पर 50 फीसदी यानी 50 हजार रुपये तक सब्सिडी देती है। लेकिन कई किसानों का कहना है कि अतिरिक्त मशीनों के कारण कटाई मशीन की क्षमता कम हो जाती है।
    नीति आयोग की एक मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 11,500 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। एचपीसीएल ने 4, आईओसी और बीपीसीएल ने 3-3, मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने एक-एक बायोएथेनॉल संयंत्रों का खाका तैयार कर लिया है। सीएमसी बायोरिफाइनरीज, जैब इनोगी और केमपोलिस जैसी निजी कंपनियां भी इस कारोबार में हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की योजना 2020-21 तक ईंधन में एथेनॉल की मात्रा मौजूदा 4.3 फीसदी से बढ़ाकर 8 से 10 फीसदी करने की है। दस फीसदी एथेनॉल मिश्रण के लिए भारत को करीब 4.5 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी जिसकी कीमत 23 हजार करोड़ रुपये होगी।(बिजनेस स्टैंडर्ड)।

     

    ...
  •