राजनीति

Posted Date : 08-Dec-2017
  • राजकोट, 8 दिसंबर। पूर्व प्रधानमंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जाने-माने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने गुरूवार को केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी को लागू करने के तरीके की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गुजरातियों के भरोसे को तोडऩे और उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया।
    डॉ. सिंह ने कहा कि उनकी यूपीए सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होती थी और अगर मोदीजी भी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावे करते हैं तो उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी पर लगे आरोपों समेत अन्य आरोपों की जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता ने नोटबंदी के मोदीजी के फैसले का यह सोच का समर्थन किया कि उनके त्याग से शायद देश को फायदा हो जाये पर ऐसा नहीं हुआ। उनकी उम्मीदें और भरोसा टूट गया, 99 प्रतिशत पुराने नोट बैंक में आ गये और काले धन को सफेद बना लिया गया। मोदी सरकार ने इसे साहसिक कदम बताया पर साहसिक कदम और विनाशकारी कदम में फर्क है। 
    पूर्व पीएम ने कहा कि नोटबंदी के बाद जीएसटी को गलत ढंग से लागू कर मोदीजी ने अर्थव्यवस्था को एक और झटका दिया। नोटंबंदी और जीएसटी के चलते जीडीपी वृद्धि दर में भारी गिरावट हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात मॉडल विफल है और इसका समाज के सभी वर्ग सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। 
    मनमोहन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अपने पुराने वैभव को प्राप्त करेगी वह देश को विकास की नयी ऊंचाई पर ले जायेंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार का अस्थिर रवैया देश की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। एक समय तो कश्मीर में कड़े कदम उठा कर वहां के लोगों की भावना को ठेस पहुंचाया जाता है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री अचानक नवाज शरीफ से मिलने चले जाते हैं।  (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 08-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 8 दिसंबर । देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने वंदेमातरम पर एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर मां को सलाम नहीं कहा जाएगा तो क्या अफजल गुरु को कहा जाएगा? नायडू विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की पुस्तक के विमोचन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
    उन्होंने कहा, अक्सर लोग राष्ट्रवाद पर सवाल करते हैं। कई लोगों को वंदेमातरम से भी समस्या होती है। इसका मतलब तो मां की प्रशंसा करना होता है। यह किसी तस्वीर के बारे में नहीं है। ये तो 125 करोड़ लोगों के बारे में है फिर चाहे उनका धर्म, जाति या रंग कुछ भी हो।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिन्दुत्व कोई धर्म नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उन्होंने इसको साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के हिन्दुत्व पर 1995 में दिए फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने मातृभाषा को लेकर भी काफी कुछ कहा। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें विदेश से आए लोग अपनी भाषा में बातें कर रहे थे। नायडू ने अपने सहयोगी से पूछा कि क्या इन लोगों को इंग्लिश नहीं आती? सहयोगी ने बताया कि अंग्रेजी आती है लेकिन ये लोग अपनी मातृभाषा में बोलना पसंद करते हैं। नायडू ने कहा कि हम लोगों को भी अपनी भाषा का सम्मान करना चाहिए। दुनिया की कोई भी भाषा सीखो, लेकिन अपनी भाषा का सम्मान करो और उसे किसी से कम मत समझो।(एबीपी न्यूज)

     

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Posted Date : 08-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 8 दिसंबर। कांग्रेस ने 22 साल में पहली बार गुजरात में ऐसे सियासी समीकरण सेट किए थे, कि बीजेपी का कोई भी अस्त्र काम नहीं आ रहा था। राहुल गांधी ने गुजरात की युवा त्रिमूर्ति के जरिए बीजेपी के खिलाफ घेराबंदी करने के लिए जातिगत फॉर्मूला बनाया था, जो राज्य में कांग्रेस के सत्ता का वनवास खत्म करने की उम्मीद जगा रहा था। इन सबके बीच मणिशंकर अय्यर की फिसली जुबान ने बीजेपी को संजीवनी दे दी है। अय्यर के बयान से गुजरात में कांग्रेस के जीत का जायका बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है।
    मणिशंकर अय्यर ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी के लिए नीच शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद बीजेपी ने अय्यर के बयान को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया। हालांकि, कांग्रेस ने कुछ घंटे के अंदर ही अय्यर को निलंबित कर दिया लेकिन जो सियासी माहौल बनना था बीजेपी ने उसे हवा दे दी।
    पीएम नरेंद्र मोदी ने सूरत की चुनावी रैली में कहा, अय्यर कहते हैं कि मोदी नीच जाति का है। ये गुजरात का अपमान है। मुगल संस्कार वालों को मेरे जैसे अच्छे कपड़े पहनना सहन नहीं होता है। आपने हमें गधा और गंदी नाली का कीड़ा कहा, 18 तारीख को मतपेटियां बताएगी कि गुजरात के बेटे के अपमान का बदला कैसे लिया जाता है।
    हालांकि कांग्रेस ने मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मणिशंकर अय्यर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अय्यर के बयान से सिर्फ नरेंद्र मोदी और बीजेपी ही आहत नहीं हुई हैं बल्कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के माथे पर भी पसीने आ गए। राहुल गांधी अय्यर के बयान के सियासी मायने बखूबी समझते हैं। इसीलिए उन्होंने ट्वीट कर बयान की निंदा की है और मोदी से माफी मांगने की बात भी कही।
    राहुल गांधी इस बात से वाकिफ हैं कि उन्होंने पिछले चार महीनों से जिस कदर गुजरात की जमीन पर उतरकर काम किया है। राज्य में वेंटिलेटर पर कांग्रेस में जान दिखने लगी थी। राहुल नवसृजन यात्रा के जरिए गुजरात में सियासी फसल उगाने की कोशिश कर रहे थे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार गुजरात के रणभूमि में जातीय सियासी बिसात बिछाई थी। कांग्रेस ने गुजरात के युवा त्रिमूर्ती हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश को अपने साथ मिलाकर जीत का ख्वाब संजोया था।
    गुजरात में पटेलों की नाराजगी बीजेपी की चिंता का सबब बना हुआ था। कांग्रेस ओबीसी सहित आदिवासी और दलित मतों में सेंधमारी लगाने में जुटी थी, जिससे बीजेपी परेशान थी। बीजेपी की लाख कोशिशों के बावजूद हिंदुत्व की हवा नहीं बन पा रही थी। राहुल गांधी शुरू से ही सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल रहे थे। इसीलिए बीजेपी का ये कार्ड भी सफलता का पाला छू नहीं पा रहा था।
    पीएम मोदी के गुजरात अस्मिता कार्ड चल रहे थे और अपने आपको गुजरात का बेटा बता रहे थे। इसके बावजूद उनकी रैलियों से कहीं ज्यादा भीड़ हार्दिक पटेल की रैली में जुट रही थी। बीजेपी इसकी काट नहीं तलाश पा रही थी। ऐसे में  मणिशंकर अय्यर के बयान ने बीजेपी को ब्रह्मास्त्र दे दिया है।
    मौजूदा दौर में नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत तौर पर हमला करने का नतीजा कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। क्योंकि मोदी पर जब भी व्यक्तिगत हमले हुए हैं, उससे वो और भी मजबूत हुए हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले इसी मणिशंकर अय्यर ने मोदी के लिए 'चायवालाÓ शब्द का प्रयोग किया था। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया और कांग्रेस का हश्र क्या हुआ है ये जगजाहिर है। ऐसे में अब गुजरात के सियासी रण में एक बार फिर अय्यर का पार्ट टू आया है। इसका नतीजा क्या होगा। ये तो 18 तारीख को ही पता चलेगा।(आज तक)

     

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Posted Date : 08-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 8 दिसंबर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान पर विवाद जारी है। वित्त मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा है कि मणिशंकर अय्यर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नीचÓ कहना जानबूझकर दिया गया एक जातिवादी बयान है। अरुण जेटली ने यह भी कहा कि मणिशंकर अय्यर कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत पार्टी से निलंबित किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे कांग्रेस के इस खेल को समझें। अरुण जेटली के मुताबिक कांग्रेस नेता का बयान इस मानसिकता को दिखाता है कि इस देश पर केवल एक ही परिवार राज कर सकता है।
    अरुण जेटली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस टिप्पणी को लेकर कांग्रेस को घेरा था। सूरत में आयोजित एक रैली में उन्होंने कहा, क्या यह गुजरात की अस्मिता का अपमान नहीं है? 
    क्या यह भारतीय चरित्र का अपमान नहीं है? वे मुझे नीच जाति का कह सकते हैं। हां, मैं समाज के गरीब तबके से आता हूं और अपने जीवन का हर पल गरीब, दलित, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों की की सेवा में लगाऊंगा।
    मणिशंकर अय्यर के बयान के चलते किसी भी संभावित राजनीतिक नुकसान को देखते हुए कांग्रेस पार्टी तुरंत बचाव की मुद्रा में आ गई थी। इस बयान के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, भाजपा और प्रधानमंत्री हमेशा कांग्रेस पार्टी के लिए खराब भाषा का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कांग्रेस की संस्कृति अलग है। प्रधानमंत्री के लिए मणिशंकर अय्यर ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया मैं उसका समर्थन नहीं करता। मैं और कांग्रेस पार्टी उनसे उम्मीद करते हैं कि वे माफी मांगें। राहुल गांधी की फटकार के बाद अय्यर ने भी माफी मांगी। बाद में उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया।(सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 7 दिसंबर। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्यसभा सदस्य सुभाष चंद्रा द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 11 दिसंबर को निचली अदालत के समक्ष निजी तौर पर पेश होने से आज छूट दे दी।
    न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने दिल्ली पुलिस और चंद्रा को भी नोटिस जारी किया और उनसे भाजपा नेता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत को रद्द करने की मांग वाली मुख्यमंत्री की याचिका पर जवाब मांगा। अदालत ने केजरीवाल को निजी पेशी से छूट दे दी और इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की।
    केजरीवाल ने निचली अदालत द्वारा चार मार्च को उन्हें जारी समन पर रोक लगाने की मांग की है। सुभाष चंद्रा ने नोटबंदी के मद्देनजर केजरीवाल द्वारा उन पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाए जाने को लेकर पिछले साल 17 नवंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री पर अभियोग चलाने की मांग की थी।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको मोदी ने ठगा नहीं- लालू 
    पटना, 7 दिसंबर । राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव को राहुल गांधी का नेतृत्व मंजूर हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने राहुल गांधी को अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि राहुल के नेतृत्व में देश सुरक्षित रहेगा। लालू ने कहा कि ये देश युवाओं का हैं और राहुल युवा हैं और कांग्रेस पार्टी ने उनको नेतृत्व देके एक सही कदम उठाया है। लालू ने कहा कि अगले लोक सभा चुनाव में यूपीए की सभी पार्टी राहुल के ही नेतृत्व में लोक सभा चुनाव लड़ेगी।
    लालू ने इस बात से इंकार किया कि उनकी राहुल गांधी से नहीं बनती। इस पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये सब मीडिया के मन की उपज हैं। लालू से जब गुजरात चुनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश की जनता अब नरेंद्र मोदी के करतूत से ऊब चुकी हैं लेकिन फिलहाल शांत हैं लेकिन चुनाव में ये अपना ग़ुस्सा सरकार पर अवश्य निकलेगी।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राहुल गांधी पर दिए गए बयान पर लालू ने कहा कि नरेंद्र मोदी राजनीति के दशानन हैं और गुजरात की जनता उनका राजनीतिक वध करेगी। लालू ने कहा कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसको नरेंद्र मोदी ने ठगा नहीं।
    अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर पूछे जाने पर लालू यादव का कहना था कि ये मुद्दा जानबूझकर चुनाव के समय भाजपा को याद आता है लेकिन जब इस मामले की सुनवाई सप्रीम कोर्ट में चल रही है तो सबको उसके फैसले का इंतजार करना चाहिए। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • मास्को, 7 दिसंबर । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को घोषणा की कि वह मार्च, 2018 में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में उतरेंगे। निजनी नोवोगोरॉड शहर में एक कार बनाने वाले संयंत्र के कर्मचारियों के साथ बैठक के दौरान पुतिन ने कहा, मैं रूसी संघ के राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगा। पुतिन पहली बार वर्ष 2000 में रूस के राष्ट्रपति चुने गए थे और 2004 में दोबारा निर्वाचित हुए। साल 2008 से 2012 तक उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की। साल 2012 में वह फिर से राष्ट्रपति चुने गए। अब तक, कई लोगों ने आधिकारिक तौर पर 2018 की राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने की बात कही है। इसमें रूस की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के 
    नेता व्लादिमीर झिरोनोवस्की, लिबरल याब्लोको पार्टी के संस्थापक ग्रिगोरी यवलिन्स्की और रूसी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख मैक्सिम सुराइकिन शामिल हैं।
    इस सूची में टीवी प्रस्तुतकर्ता सेनिया सोबचक, उद्योगपति सर्गेई पोलॉन्स्की, साथ ही गायक और पत्रकार एकातेरिना गॉर्डन भी शामिल हैं। विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी के भी भाग लेने की उम्मीद है, लेकिन रूसी केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, अपनी पिछली सजा के कारण वह ऐसा नहीं कर सकते। रूसी संघ के कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गेनाडी ज्यूगानोव भी राष्ट्रपति चुनाव में उतर सकते हैं।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 7 दिसंबर । गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले तीन ओपिनियन पोल में बीजेपी को जीत मिलती नजर आ रही है। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी पांचवीं बार गुजरात में सरकार बनाएगी, लेकिन इस बार जीत का अंतर पिछली बार के मुकाबले कम होगा। ओपिनियन पोल में बीजेपी राज्य की 182 सीटों में से 105-106 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। इन तीनों ओपिनियन पोल के मुताबिक, कांग्रेस 73-74 सीटों के साथ फिर विपक्ष में बैठेगी। 
    इंडिया टीवी के ओपिनियन पोल में बीजेपी को 106 से 116 सीटों के बीच मिल सकती है। अगर बीजेपी को 116 सीटों पर जीत मिलती है, जो पिछली बार मिली सीटों के बराबर होगी। वहीं टाईम्स नाउ के सर्वे में बीजेपी को 111 सीटें और एबीपी-सीएसडीएस ओपिनियन पोल में बीजेपी को सबसे कम 91 से लेकर 99 सीटों पर जीत मिल सकती है। 
    वहीं तीनों ओपिनियन पोल में कांग्रेस पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजों से बेहतर प्रदर्शन करती नजर आ रही है। इंडिया टीवी के सर्वे में कांग्रेस को 63 से 73 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। टाईम्स नाउ के सर्वे में कांग्रेस को 68 और एबीपी-सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 78-86 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। 
    2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 60 सीटों पर और बीजेपी को 116 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी पिछले 22 वर्षों से गुजरात की सत्ता पर काबिज है।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 07-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 7 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच पाटीदार अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की पांच और सेक्स वीडियो वायरल हुए हैं। वीडियो में हार्दिक महिला के साथ एक कमरे में बिस्तर पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ कमरे में कुछ कार्यकर्ता भी नजर आ रहे हैं।
    वायरल हुए वीडियो पर हार्दिक ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव की वोटिंग की तारीख आ गई है। इस तरह के कई वीडियो और भी वायरल होंगे, लेकिन इनसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
    इन वीडियो के पहले हार्दिक का पहला कथित सेक्स वीडियो 13 नवम्बर को वायरल हुआ था। इस तरह चुनाव के एक माह पहले हार्दिक के कुल 10 वीडियो वायरल हुए हैं।
    गुजरात में दो चरण 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग होनी है और 18 दिसंबर को रिजल्ट आएंगे। इसके पहले ये वीडियो वायरल होने को हार्दिक बीजेपी की साजिश बता रहे हैं। 
    ये पहली बार नहीं है जब हार्दिक पटेल की कथित सेक्स सीडी सामने आई है। साल 2015 में आरक्षण आंदोलन की शुरुआत के तुरंत बाद भी ऐसी ही एक सेक्स सीडी रिलीज की गई थी। हालांकि, हार्दिक ने उस वीडियो क्लिप को कहीं चैलेंज नहीं किया था।  (आज तक)

     

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 6 दिसंबर । गुजरात के धंधुका में पीएम मोदी ने चुनावी रैली के दौरान ट्रिपल तलाक पर अपनी खमोशी की वजह भी बताई। मोदी ने कहा, जब ट्रिपल तलाक मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो सरकार ने कोर्ट में शपथ पत्र दिया था तो अखबारों ने टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश चुनावों के कारण मोदी चुप रहेंगे। लोगों ने मुझसे कहा कि इस मामले पर बात न करें और चुनावों में घाटा होगा। ट्रिपल तलाक मामले में मैं खामोश नहीं था। यह सब कुछ चुनावों के बारे में नहीं है यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों के लिए है। मानवता पहले आती है और चुनाव बाद में आते हैं। 
    कोई आपत्ति नहीं है कि कपिल सिब्बल मुस्लिम समुदाय की तरफ से लड़ रहे हैं लेकिन वह कैसे कह सकते हैं कि अगले चुनावों तक (अयोध्या मुद्दे) का कोई समाधान नहीं मिल सकता है? यह लोकसभा चुनावों से कैसे जुड़ा है? 
    गुजरात में भाजपा ने टैंकर राज को समाप्त कर दिया है। टैंकर का कारोबार कांग्रेस के नेताओं और उनके परिवारों के हाथ में था।
    एक परिवार ने डॉ.बाबा साहेब अम्बेडकर और सरदार पटेल के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि जब पंडित नेहरू का कांग्रेस पर प्रभाव बढ़ा तो कांग्रेस ने यह सुनिश्चित किया कि डॉ.अम्बेडकर को संविधान सभा में शामिल होने में कठिनाई हुई।
    भाजपा के प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि गुजरात में युवाओं की पहुंच टेक्नोलॉजी तक पहुंच गई है और उन्हें पढऩे के लिए और अधिक शैक्षिक संस्थान मिले। पिछले दो दशकों में बीजेपी सरकार के तहत कानून और व्यवस्था की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 6 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई। सभी राजनैतिक दल जोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं। लेकिन यहां चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा की खबर आ रही है। वडगाम विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे दलित नेता जिग्नेश मेवाणी पर हमला हुआ है। जिग्नेश ने खुद  ट्वीट कर हमले की जानकारी दी है। जिग्नेश का आरोप है कि उन पर ये हमला बीजेपी के लोगों ने किया है। जिग्नेश ने इसे गंदी राजनीति बताते हुए हार नहीं मानने की बात कही है। 
    जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीट किया, गंदी राजनीति। दोस्तों आज मुझ पर बीजेपी के लोगों ने तकरवाड़ा गांव में अटैक किया, बीजेपी भयभीत हो गई है, इसलिए ऐसी हरकत कर रही है। पर मैं तो एक आंदोलनकारी हूं, न डरूंगा, न झुकूंगा पर बीजेपी को तो हराऊंगा ही। जिग्नेश मेवाणी को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने समर्थन की घोषणा की है और उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। दलित समुदाय पर हो रहे अत्याचार को लेकर आंदोलन के बाद जिग्नेश मेवाणी चर्चा में आए थे।
    जिग्नेश ने दलित समुदाय से अपील की है कि वे भाजपा को हराने के लिए वोट करें। इससे पहले उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लडऩे की इच्छा नहीं जताई थी। उन्होंने कांग्रेस के राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उनकी पार्टी को समर्थन जताया था। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • समीरात्मज मिश्र
    लखनऊ, 6 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद ये धारणा आम हो रही थी कि बहुजन समाज पार्टी का आधार अब समाप्ति की ओर है। लेकिन पहली बार अपने चुनाव चिन्ह पर निकाय चुनावों में हिस्सा लेने वाली बीएसपी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया उसने इन धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
    पार्टी का ये प्रदर्शन तब रहा जब उसकी नेता मायावती ने प्रचार कार्यों से खुद को दूर रखा। जानकारों का कहना है कि पार्टी की इस मजबूती के पीछे उसके परंपरागत दलित मतों के साथ मुस्लिम मतों का उसकी ओर वापस आना है।
    जानकारों का ये भी कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं की समाजवादी पार्टी से बेरुखी के चलते ऐसा हुआ है। बीएसपी के नेता तो इस मामले में कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी का कहना है कि वो ऐसा नहीं मानती और निकाय चुनावों में उसका प्रदर्शन संतोषजनक रहा है।
    समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि नगर निगम में हम पहले भी बहुत मजबूत नहीं थे, दूसरे सरकार ने धांधली भी की है ईवीएम के जरिए। नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में हमारा प्रदर्शन ठीक है। दूसरे हम विचारधारा के आधार पर समर्थन मांगते हैं, जाति और धर्म के नाम पर नहीं।
    लेकिन निकाय चुनावों के परिणाम जिस तरह के आए हैं इससे साफ नजर आता है कि मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद बीएसपी ही रही, हालांकि कांग्रेस और सपा से भी उन्होंने परहेज नहीं किया।
    जहां तक बात नगर निगमों की है तो मेरठ और अलीगढ़ में मेयर पद पर बसपा की जीत से दलित-मुस्लिम समीकरण की चर्चा में मजबूती दिख रही है। यही नहीं, सहारनपुर में भी बीएसपी उम्मीदवार महज दो हजार वोटों से हार गया।
    दरअसल, आठ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में मुस्लिम इलाकों में समाजवादी पार्टी को इस समुदाय का भरपूर समर्थन मिला था। हालांकि अन्य वर्गों का वोट उसे इस मात्रा में नहीं मिल सका कि वो जीत में तब्दील हो सकता। लेकिन इस बार मुस्लिम वर्ग का रुझान बीएसपी के बाद कांग्रेस की ओर दिख रहा है। नगर निगम की ज्यादातर सीटों पर बीजेपी को या तो बीएसपी से टक्कर मिली है या फिर कांग्रेस से।
    मेरठ में मेयर की सीट पिछले दस साल से भारतीय जनता पार्टी के पास थी। विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी उम्मीदवार रफीक अंसारी ने बीजेपी की लहर के बावजूद पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मीकांत वाजपेयी को करारी शिकस्त दी थी, लेकिन मेयर के चुनाव में सपा मुकाबले में ही नहीं दिखी और बीएसपी सीट जीतने में कामयाब हो गई।
    अलीगढ़ में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी लेकिन मेयर के चुनाव में बीजेपी को बीएसपी ने हराया और सपा मुकाबले में नहीं दिखी। वहीं सहारनपुर में संजय गर्ग समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए लेकिन इस बार सपा को मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन शायद नहीं मिला और पार्टी बीएसपी ने ही बीजेपी को कांटे की टक्कर दी।
    ऐसे तमाम उदाहरण, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में हैं जहां मुस्लिम समुदाय के समर्थन के चलते बीएसपी की स्थिति काफी मजबूत रही। हालांकि राज्य के अन्य इलाकों में भी उसे इस समुदाय का काफी समर्थन मिला है और ये मतों और जीती गई सीटों में दिखाई भी पड़ रहा है।
    जानकार इन सब समीकरणों का सीधा अर्थ मुस्लिम मतदाताओं के रुझान में आए फर्क में देखते हैं। लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद कहते हैं कि 2014 के बाद से यूपी में जिस तरह की स्थिति बनी है, 
    उससे उसके भीतर एक भय-सा बन गया है। समाजवादी पार्टी से उसे सहानुभूति और समर्थन की उम्मीद थी लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों और कुछ अन्य कारणों से वो भरोसा काफी हद तक टूटा है। दूसरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का वैसा ठोस वोट बैंक भी नहीं है। मुस्लिम मतदाता विवशता में बीएसपी की ओर देख रहा है और इसमें आश्चर्य नहीं कि वो आने वाले चुनावों में वो और मजबूती से बीएसपी के साथ खड़ा दिखे।
    परवेज अहमद कहते हैं कि बीएसपी की ओर मुस्लिम मतदाताओं का य झुकाव आगे भी जारी रख सकता है, क्योंकि निकाय चुनाव में इसके परिणाम काफी सकारात्मक दिखे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ऐसी किसी वोट शिफ्टिंग को तवज्जो नहीं देती और उसे यकीन है कि आने वाले चुनावों में बीजेपी के मुकाबले कोई नहीं है।
    पार्टी प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि निकाय चुनाव ज्यादातर स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि पर लड़े जाते हैं। मतों का ध्रुवीकरण तो होता ही है, लेकिन आने वाले चुनावों में भी भाजपा ही जीतेगी, उसे इससे कोई खतरा नहीं है क्योंकि मोदी जी विकास की बात कर रहे हैं।
    बहरहाल, आने वाले चुनावों में क्या स्थिति बनती है ये तो समय बताएगा लेकिन इतना जरूर है कि बीएसपी को राजनीतिक रूप से गैर प्रासंगिक बताने वालों को तो इन परिणामों से जरूर झटका लगा है। (बीबीसी)

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Posted Date : 06-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 6 दिसंबर। गुजरात चुनाव को लेकर सीएसडीएस-एबीपी के ताजा सर्वे में भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होने की बात सामने आने के बाद भाजपा की चिंता बढऩे की बात सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सत्ताधारी भाजपा अपने स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही है। बताया जाता है कि आने वाले दिनों में नरेंद्र मोदी की कुल 12 चुनावी रैलियां प्रस्तावित हैं। हालांकि, कांग्रेस पर जोरदार हमला करने के लिए इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले सोमवार को जारी सीएसडीएस-एबीपी के ताजा सर्वे में दोनों प्रमुख पार्टियों को चुनाव में 43-43 फीसदी वोट मिलने की बात कही गई थी। (द एशियन एज)

     

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Posted Date : 05-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 5 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनाव  से पहले सियासी मुकाबला काफी दिलचस्प हो चुका है। एबीपी न्यूज-सीएसडीएस के ऑपिनियन पोल के मुताबिक कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। पोल में दोनों दलों को 43-43 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है। वहीं, 14 फीसदी वोट अन्य को मिल सकते हैं। हालांकि कांटे की टक्कर के बावजूद 182 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी को 95 सीटें मिल रही हैं। कांग्रेस को 82 सीटें मिलने की संभावना है जबकि 5 सीटें अन्य को मिल सकती हैं। 
    पोल में जो रुझान सामने आए हैं उसमें सबसे बड़ा झटका हार्दिक को लगा है। आरक्षण की मांग को लेकर राज्य में एक नए चेहरे के रूप में उभरे हार्दिक पटेल के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद माना जा रहा था कि बीजेपी के वोटबैंक में सेंध लग सकती है। हाल ही में हार्दिक की विवादित सीडी सामने आने के बाद एक बार फिर राज्य में राजनीतिक समीकरण रोमांचक बनते नजर आ रहे हैं। पोल के हिसाब से पटेल समुदाय के अंदर ही हार्दिक की लोकप्रियता में कमी आई है। इसका नुकसान अगर उन्हें होता है तो साथ में कांग्रेस को भी होगा। पोल में बीजेपी को शहरी क्षेत्रों से जबकि कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है। 
    पिछले महीने एबीपी-सीएसडीएस के पोल में बीजेपी को लगभग 113-121 सीटें जबकि कांग्रेस को 58-64 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। पोल में विजय रूपाणी को अगले सीएम के रूप में देखा जा रहा था। 
    एबीपी-सीएसडीएस सर्वे की खास बातें- 
    - जीएसटी के चलते बीजेपी से नाखुश व्यापारी इस बार कांग्रेस की तरफ ज्यादा झुके हुए नजर आ रहे हैं। पोल के हिसाब से कांग्रेस को जहां 43 फीसदी वोट मिल सकते हैं वहीं 40 फीसदी व्यापारी कर सकते हैं बीजेपी के लिए वोट। पोल में यह भी सामने आया है कि केवल 37 फीसदी व्यापारी जीएसटी से खुश हैं जबकि 44 फीसदी व्यापारी इससे नाखुश। 
    - पाटीदार समाज भी कांग्रेस की ओर रुख कर सकता है। पोल के मुताबिक बीजेपी से 2 फीसदी अधिक पाटीदार कांग्रेस के लिए वोट कर सकते हैं। 
    - हालांकि, कोली समाज अभी भी बीजेपी के साथ नजर आ रहा है। कोली समाज में से बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में 26 फीसदी वोट अधिक मिल सकते हैं। 
    - सौराष्ट्र के इलाके में जहां बीजेपी को 45 फीसदी वोट मिलने की संभावना है वहीं कांग्रेस की गाड़ी 39 फीसदी वोटों पर अटक सकती है। एबीपी-सीएसडीएस के पिछले महीने के पोल में दोनों पार्टियों के खाते में 42 फीसदी वोट जाते दिखाई दे रहे थे। हालांकि, सौराष्ट्र और कच्छ के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को 43 फीसदी और कांग्रेस को 49 फीसदी वोट मिलने की संभावना पोल में जताई गई है। शहरी इलाकों में बीजेपी (46फीसदी) कांग्रेस (30 फीसदी) से लगभग 16 फीसदी अधिक वोट अधिक हासिल कर सकती है। 
    -उत्तर गुजरात में कांग्रेस बीजेपी से आगे निकलती हुई दिखाई दे रही है। वहां बीजेपी को 45 फीसदी और कांग्रेस को 49 फीसदी वोट मिल सकते हैं। यहां ग्रामीण इलाकों में 56 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस बीजेपी (41 फीसदी) से आगे है जबकि शहरी इलाकों में बीजेपी (50 फीसदी) कांग्रेस (41 फीसदी) से आगे है। 
    - दक्षिण गुजरात में कांग्रेस को बढ़त है और उसे 42  फीसदी वोट मिल सकते हैं। बीजेपी को यहां 40  फीसदी वोट से संतोष करना पड़ सकता है। यहां के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी 44  फीसदी के साथ कांग्रेस (42 फीसदी) से आगे है जबकि शहरी इलाकों में कांग्रेस 43 फीसदी वोटों के साथ बीजेपी (36 फीसदी) से आगे है। 
    - मध्य गुजरात में बीजेपी (41 फीसदी) ने कांग्रेस (40 फीसदी) पर मामूली बढ़त हासिल की है।  (एजेंसियां)

     

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Posted Date : 05-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 5 दिसंबर । गुजरात चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को राहुल में ट्वीट कर पीएम मोदी से देश में बढ़ती महंगाई को लेकर सवाल किया। लेकिन इस ट्वीट को उन्होंने हटा दिया था। 
    कहा जा रहा है कि राहुल ने अपने ट्वीट में महंगाई का गलत आंकड़ा दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने आंकड़ों में सुधार कर दोबारा सवाल को ट्वीट किया।
    राहुल ने जो नया ट्वीट किया है, वह पुराने जैसा ही है। बस इसमें जो बढ़ोतरी के आंकड़े हैं उन्हें रुपए के आधार पर दिया है। इससे पहले वाले ट्वीट में उन्होंने बढ़ोतरी वाले आंकड़ों को प्रतिशत के हिसाब से दिया था।

    राहुल ने पीएम मोदी से 7वां सवाल ट्वीट करते ट्वीट लिखा, 
    जुमलों की बेवफाई मार गई, नोटबंदी की लुटाई मार गई, जीएसटी सारी कमाई मार गई, बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई, बढ़ते दामों से जीना दुश्वार, बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार?
    राहुल ने अपने ट्वीट में कुछ आंकड़ों का भी जिक्र किया है जो देश में बढ़ती महंगाई की ओर इशारा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि साल 2014 से 17 के बीच गैस सिलिंडर से लेकर दाल, प्याज, दूध, डीजल, टमाटर जैसी वस्तुओं के दाम दोगुने से ज्यादा बढ़ गए हैं।(आज तक)

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Posted Date : 05-Dec-2017
  • सुबोध घिल्डियाल
    नई दिल्ली, 5 दिसंबर । राहुल गांधी के लिए कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं में प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह 2 अपवाद हैं। गांधी इन दोनों नेताओं से निजी और सार्वजनिक तौर पर मार्गदर्शन लेते रहे हैं। लेकिन सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय में अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन भरे जाने से पहले राहुल गांधी के इन दोनों नेताओं से मिलने और आशीर्वाद लेने में एक सांकेतिक संदेश छिपा हुआ है- पार्टी की नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी के साथ सहज है। 
    अगर यह जानबूझकर किया गया तो इसकी वजह पार्टी में पीढिय़ों का टकराव हो सकता है। कांग्रेस में पीढिय़ों के टकराव की बहस तभी से चल रही है जब युवा राहुल गांधी ने पार्टी नेतृत्व की तरफ पहला कदम उठाया था। एक युवा महासचिव को पुरानी पीढ़ी के नेताओं में खास दमखम नहीं दिखा जो चाहता था कि न सिर्फ युवा नेता उभरें जो पुराने की जगह लें बल्कि पुराने तरीकों की जगह नई सोच ले। 
    राहुल के इस ब्लूप्रिंट को लेकर शुरुआत से ही कांग्रेस के पुराने नेताओं में संदेह था लेकिन 2014 में कांग्रेस के सत्ता खोने के बाद यह मुखर हुआ। पार्टी के नेतृत्व की उनकी एक्सपेरिमेंटल स्टाइल पर कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए, जिन्हें लगा कि विपक्ष में रहते हुए पार्टी का फोकस खुद को मजबूत करने पर होना चाहिए न कि नए-नए प्रयोग करने पर। 
    इस तरह की पृष्ठभूमि के बीच कांग्रेस ने पीढ़ीगत बदलाव पर जश्नवाले अंदाज से जरूर चौंकाया जब पार्टी के नेताओं को हुजूम अकबर रोड मुख्यालय पहुंचकर राहुल गांधी के लिए शीर्ष पद को प्रस्तावित किया। कांग्रेस के दिग्गजों के साथ-साथ राज्यों इकाइयों के नेता भी इस मौके पर मौजूद थे। 
    यह स्पष्ट है कि समय के साथ कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव का समय परिपक्व हुआ पीढ़ीगत समझौता आकार ले सका। इस डील के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने पुराने तरीकों को जारी रखने के लिए आक्रामक लॉबिंग की और राहुल गांधी ने कुछ कदम आगे बढ़ते हुए सीनियर नेताओं को उनके भविष्य और अपनी एक्सपेरिमेंटल स्टाइल को लेकर आश्वस्त किया। अब सीनियरों को उम्मीद होगी कि राहुल पार्टी को उस संकट से उबार सकेंगे जिसे अस्तित्व के संकट के तौर पर देखा जा रहा है। 
    कई का मानना है कि कुछ राज्यों के पिछले चुनावों में राहुल गांधी के नेतृत्व ने पार्टी का मनोबल बढ़ाने में मदद की है। कांग्रेस में कुछ बदलाव भी दिख रहे हैं। अचानक कांग्रेस में हिंदू पहचान को लेकर हिचक खत्म होती दिख रही है और पार्टी यह दिखा रही है कि इसमें और सेक्युलरिजम के उसके आदर्श के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि समय के साथ पार्टी बीजेपी की उस चालाक रणनीति को ध्वस्त कर सकेगी जिसमें वह कांग्रेस को प्रो-माइनॉरिटी के तौर पर प्रचारित करती है जिससे जमीन पर ध्रुवीकरण में मदद मिलती है। 
    राहुल गांधी के सामने बतौर कांग्रेस अध्यक्ष कई चुनौतियां होंगी। वह पार्टी के अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चलने की तत्परता दिखा चुके हैं। 
    राहुल गांधी राज्यों की इकाइयों को वरिष्ठ नेताओं के हाथ में देने को तैयार हैं। राहुल के इस नजरिए ने बुजुर्ग नेताओं के हाशिये पर चले जाने के डर को बहुत हद तक खत्म किया है। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 4 दिसंबर। गुजरात चुनाव में पहले चरण की वोटिंग को अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। राजनीतिक पार्टियां प्रचार में अपनी जान फूंक रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां के धर्मपुर में रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर नामांकन को लेकर निशाना साधा।
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस, पार्टी नहीं कुनबा है और हमारे लिए देश बड़ा है। उन्होंने ये भी कहा कि बादशाह को पता होता है कि उसकी औलाद को ही तख्त मिलेगा। मोदी ने ये भी कहा कि औरंगजेब राज उन्हें मुबारक हो।
    मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि जहांगीर की जगह जब शाहजहां आए, क्या तब कोई चुनाव हुआ था? जब शाहजहां की जगह औरंगजेब आए, तब कोई चुनाव हुआ था?  मोदी ने कहा, ये तो पहले से ही पता था कि जो बादशाह है, उसकी औलाद को ही सत्ता मिलेगी।
    मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेता खुद मानते हैं कि ये पार्टी नहीं, ये कुनबा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को औरंगजेब राज मुबारक हो। दरअसल, राहुल गांधी ने जब नामांकन भरा तो उसी दौरान कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल के बचाव में ये बयान दिया था, जिसे पीएम मोदी ने गुजरात में रैली के मंच से पढ़ा।
    रविवार को भी पीएम मोदी गुजरात में ही थे, उन्होंने सुरेंद्र नगर में रैली के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सुरेंद्रनगर में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ताजपोशी को लेकर पार्टी के भीतर से उठी आवाज का समर्थन किया है। उन्होंने वंशवाद पर सवाल उठाने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता शहजाद पूनावाला की तारीफ की है।
    पीएम मोदी ने मंच से कहा कि शहजाद ने शहजादे को लेकर सवाल उठाए तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। यहां तक कि शहजाद को सोशल मीडिया ग्रुप से भी हटा दिया गया। पीएम ने कहा कि ये किस तरह का टॉलरेंस है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर के आर्कबिशप की ओर से जारी पत्र को फतवा करार देते हुए कहा कि यह राष्ट्रभक्ति ही है जिसने हमें दुनिया के किसी भी हिस्से में हर भारतीय की मदद करने के लिए प्रेरित किया। पीएम मोदी ने यह बात रविवार को अहमदाबाद में गुरुकुल विवि प्रतिष्ठान में अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहीं। (आज तक)

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 4 दिसंबर । कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष पद के लिए पर्चा दाखिल कर दिया है। इस मौके पर पार्टी के दिग्गज नेता भी पार्टी मुख्यालय भी मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह, कर्नाटक के सिद्धारमैया, हिमाचल प्रदेश के वीरभद्र सिंह, पुडुचेरी के वी नारायणस्वामी, मेघालय के मुकुल संगमा और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस मौके पर मौजूद हैं। राहुल गांधी की उम्मीदवारी के लिए प्रस्तावकों में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हैं।
    कांग्रेस के राज्यों के प्रमुख, वरिष्ठ नेता व प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रतिनिधि भी राहुल गांधी के समर्थन के लिए कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय में मौजूद हैं। राहुल गांधी करीब 10.30 बजे कांग्रेस के मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए केवल राहुल गांधी ही एक मात्र उम्मीदवार हैं, उनके अलावा किसी ने भी नामांकन दाखिल नहीं किया है। राहुल गांधी को किसी ने भी चुनौती नहीं दी है। संगठनात्मक चुनाव के लिए मुलापल्ली रामचंद्रन को निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है। रामचंद्रन ने आईएएनएस से कहा कि कई राज्यों द्वारा 90 नामांकन फार्म लिया गया है, हालांकि इसमें से किसी को अभी जमा नहीं किया गया है। नामांकन दाखिल करने के लिए पार्टी मुख्यालय पहुंचने से पहले राहुल गांधी मनमोहन सिंह के घर गए थे।
    राहुल गांधी द्वारा पर्चा दाखिल करने के बाद मनमोहन सिंह ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने 19 साल तक पार्टी की सेवा की है। बेहद महान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी कांग्रेस को ऊपर ले जाएंगे।
    राहुल के अलावा किसी भी व्यक्ति ने पर्चा दाखिल नहीं किया। राहुल के साथ मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, शीला दीक्षित, जितिन प्रसाद, वी नारायणसामी, अशोक गहलोत, तरूण गोगोई, सुशील कुमार शिंदे और ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद हैं।
    राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। उनके साथ इस मौके पर कांग्रेस के तमाम नेता मौजूद हैं। राहुल गांधी माथे पर तिलक लगाकर पहुंचे।
    पार्टी मुख्यालय पहुंचे राहुल गांधी। उनके साथ इस वक्त सोनिया गांधी नहीं हैं। सोनिया गांधी 19 वर्षों तक कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं। उन्होंने लगातार 19 वर्षों तक कांग्रेस का नेतृत्व किया।
    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले राहुल गांधी। कांग्रेस मुख्यालय के सामने कांग्रेस के कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद हैं। मुख्यालय के सामने पहले ही राहुल गांधी के लिए बधाई संदेश लगा दिए गए हैं।
    कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि क्या बीजेपी में अध्यक्ष का चुनाव होता है। क्या नितिन गडकरी को बैलेट पेपर्स के द्वारा चुना गया। पहले उन्हें जवाब देना चाहिए।
    मनमोहन सिंह से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे राहुल गांधी। मनमोहन सिंह राहुल गांधी के मुख्य प्रस्तावकों में शामिल हैं। उनके अलावा सोनिया गांधी भी मुख्य प्रस्तावक हैं।
    राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय के लिए रवाना। कांग्रेस बहुत दिनों से इस चुनाव का इंतजार कर रही थी। पहले कहा जा रहा था कि गुजरात विधानसभा चुनावों के बाद नया अध्यक्ष चुना जाएगा।
    नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को शुरू हुई। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर है। संभावना इसी बात की है कि कोई और प्रत्याशी नामांकन नहीं करेगा, इसलिए चुनाव की नौबत नहीं आएगी। ऐसी स्थिति में नामांकन पत्रों की जांच के बाद पांच दिसम्बर को राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है। ऐसा होने पर वह अपनी मां सोनिया गांधी की जगह लेंगे जो 1998 से ही कांग्रेस अध्यक्ष हैं। सोनिया गांधी ने कांग्रेस के इतिहास में सर्वाधिक लंबे समय तक अध्यक्ष पद संभाला है।
    सूत्रों ने बताया कि राहुल नामांकन पत्र के चार सेट दाखिल करेंगे और उनमें से एक में सोनिया गांधी पहली प्रस्तावक होंगी। दूसरे नामांकन सेट में मनमोहन सिंह प्रमुख प्रस्तावक होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल के पक्ष में 75 से ज्यादा नामांकन दाखिल किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के अलावा गुलाम नबी आजाद, एके एंटनी, पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, अहमद पटेल तथा पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री प्रस्तावकों के रूप में पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे।
    कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी के पक्ष में प्रदेश इकाइयों और संबंधित संगठनों के अलावा पार्टी के सभी महासचिव और सीडब्ल्यूसी सदस्य नामांकन दाखिल करेंगे। पार्टी प्रवक्ता सुष्मिता देव ने कहा कि राहुल गांधी सोमवार को आधिकारिक रूप से नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। कांग्रेस के आतंरिक चुनाव की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ऐसी आलोचना होती रही है कि कांग्रेस का चुनाव लोकतांत्रिक है या नहीं। मेरा कहना है कि यह ऐसा चुनाव है जिसकी निगरानी भारत का निर्वाचन आयोग कर रहा है।(जनसत्ता)

     

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • सूरत, 4 दिसंबर । गुजरात में पांच दिनों बाद विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए वोटिंग होगी। इससे पहले कल सूरत में रैली के बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने बड़ा दावा किया है। हार्दिक ने कहा एक कारोबारी ने उन्हें रैली न करने के लिए पांच करोड़ का ऑफर दिया है।
    हार्दिक ने कल पांच करोड़ रुपए के ऑफर मिलने के बारे में बताया, मैंने पूछा कि कौन बोल रहा है। तो बोला कि हार्दिक सूरत में ना आने की कीमत बोल। हार्दिक ने कहा कि मुझे सूरत में रैली ना करने के लिए पांच करोड़ की पेशकश की गई थी। देर रात सूरत की जनसभा में हार्दिक पटेल ने ये खुलासा कर सबको चौंका दिया है।
    भारी भीड़ के बीच हार्दिक ने ये खुलासा तो कर दिया, लेकिन इतने बड़े रकम की पेशकश आखिर किस ने की थी। ये नाम हार्दिक पटेल ने जनता को नहीं बताया। हार्दिक पटेल ने कहा, मैं नाम नहीं बताऊंगा लेकिन इतना बताता हूं कि सूरत के एक व्यापारी का फोन आया था।
    हार्दिक के इस दावे के बाद गुजरात की राजनीति में एक बार फिर से कई सवाल खड़े हो गए हैं। 
    सवाल ये कि क्या विकास के मुद्दे से शुरु हुआ गुजरात का चुनाव अब खरीद फरोख्त तक जा पहुंचा है। क्या गुजरात के चुनावों में भी धन बल की एंट्री हो चुकी है।
    सवाल हार्दिक पटेल से भी है कि आखिर क्यों इतने बड़े खुलासे के बाद भी हार्दिक व्यापारी का नाम बताने से क्यों बच रहे हैं? क्या इसके पीछे भी हार्दिक पटेल की सोची समझी रणनीति है या फिर चुनावी बयार के बीच हार्दिक ने सिर्फ वाहवाही पाने के लिए बयानबाजी की है? (एबीपी न्यूज)

     

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • सूरत, 4 दिसंबर । हार्दिक पटेल ने सूरत के पाटीदारों के एरिया में जनक्रांति रैली निकाली। हार्दिक 11 घंटे में 50 किलोमीटर चले। देर शाम यहां के किरण चौक पर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो भाजपा को वोट देगा वह असली पटेल का बेटा नहीं है, उसका डीएनए पाटीदार का नहीं है। इस दौरान उन्होंने बीजेपी और अमित शाह के लिए भाषा की मर्यादा भूलते हुए आपत्तिजनक शब्दों का यूज किया। उन्होंने कहा कि पाटीदार समाज पहले बीजेपी के साथ था, लेकिन वह दूसरी बीजेपी थी। आज की बीजेपी को अमित शाह जैसे लोग चलाते हैं, जो अहंकारी हैं। ऐसे व्यक्ति के साथ पाटीदार समाज नहीं जा सकता है।
    उन्होंने मंच से पाटीदार समाज को उलाहना देते हुए कहा कि जो पाटीदार भाजपा को वोट देगा वह असली पाटीदार नहीं होगा। उसका डीएनए पाटीदार का नहीं होगा। 'जय सरदारÓ के 11 उद्घोष के साथ कहा, आज सूरत में लाखों लोगों का साथ मिला। इससे साबित होता है कि समाज उनके साथ है भाजपा के नहीं। उन्होंने कहा कि अहंकारियों को हराना है और 6 करोड़ गुजरातियों को जिताना है। पहले पाटीदार भाजपा के साथ था, क्योंकि तब केशु भाई और काशीराम राणा जैसे नेता थे, जो जनता और किसानों का हित देखते थे, लेकिन अब अमित शाह जैसे लोग भाजपा को चला रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ पाटीदार नहीं हैं। 
    यह वह भाजपा है जो 22 साल के विकास की सीडी बनाने के बजाय 22 साल के युवक की अश्लील सीडी बनाती है। इसके अलावा कई मुद्दों पर भाजपा पर प्रहार किए। 
    हार्दिक की जनक्रांति रैली वराछा से कापोद्रा होते हुए कतारगाम-डभोली के रास्ते लगभग 40 किलोमीटर तक घूमने के बाद किरण चौक पर रैली का समापन किया। इस दौरान रैली में शामिल युवाओं ने भाजपा और मोदी विरोधी नारे लगाए। रैली के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, ताकि किसी भी प्रकार की कोई अराजकता न फैले।

    हार्दिक की रैली में हजारों की संख्या में युवाओं व समाज के लोग शामिल हुए। गौर करने वाली बात यह रही कि रैली मेें एक से बढ़कर एक महंगी गाडिय़ां शामिल हुईं, जबकि हार्दिक पटेल आर्थिक स्थिति के आधार पर ओबीसी कोटे में पाटीदार समाज के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। कतारगाम क्षेत्र में रैली में कम भीड़ थी, लेकिन जैसे ही रैली वराछा-धरमनगर रोड पर पहुंचीं, अचानक रैली में भीड़ बढ़ गई।
    आज भी भाजपा मुझे खरीदने के लिए ऑफर दे रही है। आज की यह रैली और सभा नहीं करने के लिए मुकेश पटेल और विमल पटेल ने मुझे 5 करोड़ रुपए का ऑफर की है, लेकिन मैंने ना कर दिया। यह वही मुकेश पटेल हैं जिसने हार्दिक पटेल जेल में था तब सरकार और हार्दिक के बीच समझौता करने का प्रयास किया था। वहीं मुकेश पटेल चैलेंज किया है कि हार्दिक प्रूफ करें कि उन्होंने सभा नहीं करने के लिए पैसे का ऑफर दिया।
    रैली के दौरान पास समर्थकों ने अलावा मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया गया। कतारगाम क्षेत्र आंबा तलावडी के पास भाजपा के कतारगाम सीट के उम्मीदवार वीनू मोरडिया का प्रचार कर रहे रिक्शा वालों से पास कार्यकर्ताओं ने पोस्टर छीन कर फाड़ दिए। थोड़ी देर बाद वराछा में भाजपा के उत्तर विधानसभा सीट से उम्मीदवार कांती बलर के पोस्टर को भी पास कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया। (प्रदेश टुडे)

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