राजनीति

Posted Date : 04-Dec-2017
  • मानसी दाश
    नई दिल्ली, 4 दिसंबर । आज पूरे देश की नजरें गुजरात विधानसभा चुनावों की तरफ हैं जहां हफ्ते भर बाद वोटिंग होने वाली है। अपने ही गृह राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक साख दांव पर लगी हुई है और कई विश्लेषकों का मानना है कि इस बार लोग उनसे खफा हैं और चुनावी नतीजों में ये बात सामने आएगी।
    उधर, राहुल गांधी और गुजरात के तीन युवा नेताओं (हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी) को वहां काफी समर्थन मिलता दिख रहा है। कई लोग मानते हैं कि ये चारों इस बार भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाले हैं।
    लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पूरा भरोसा है कि गुजरात में उनकी पार्टी 150 सीटों से अधिक पर जीतेगी। हाल में 151वें नंबर के चुनाव क्षेत्र वग्रा में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए शाह ने कहा था कि मुझे पूरा यकीन है कि दिसंबर में होने वाले चुनाव में हम 151 सीटें अपने खाते में डाल सकेंगे।
    हाल में उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि 150 से अधिक सीटों पर जीत कर भाजपा ही सरकार बनाने जा रही है। मैं इस बात पर गलत नहीं हो सकता।
    राजनीतिक विश्लेषक विद्युत ठाकर मानते हैं 151 सीटें तो नहीं लेकिन यहां भाजपा के हाथ से बहुमत छिन जाए, ऐसा तो इस बार नहीं होने वाला। वो कहते हैं कि इस बार भाजपा के खाते में 115 से 120 सीटें तो जरूर आएंगी।
    उन्होंने बताया कि अमित शाह के इस दावे के पीछे तीन बड़े कारण हैं। वो कहते हैं, कि बीजेपी के पास तीन-चार ऐसे शस्त्र हैं जिनका उत्तर कांग्रेस के पास नहीं है।
    वो कहते हैं कि पहला तो ये कि नरेंद्र मोदी गुजरात की अस्मिता का प्रतीक हैं वो हुकुम का इक्का है या कहें तो पार्टी का ट्रंप कार्ड हैं। वो गुजरात के लोगों पर इस कदर छाए हुए हैं कि उनकी बात चलेगी।
    विद्युत ठाकर मानते हैं कि हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस के पक्ष में एक माहौल तो पैदा किया है लेकिन कांग्रेस उसका लाभ उठाने के लिए तैयार ही नहीं हैं।
    वो कहते हैं कि मोदी के पास एक बड़ी मशीनरी है, कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है जो लोगों के पास जा कर उन तक संदेश पहुंचा सके। भाजपा के विरोधियों के पास ऐसी मशीनरी है ही नहीं।
    तीसरा कारण वो ये बताते हैं कि भाजपा के पास यानी मोदी के पास एक कमिटेड वोटबैंक हैं जो उन्हीं को वोट देगा। वो कहते हैं इस वोटबैंक को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि चुनाव में उम्मीदवार कौन हैं।
    विद्युत ठाकर कहते हैं कि युवा नेताओं की तरफ उम्मीद से देखने का कोई मतलब रह ही नहीं गया है क्योंकि दो युवा नेता अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी अपने ही चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।
    उन्होंने कहा कि इन दो नेताओं ने चुनाव लडऩे का फैसला किया है और भाजपा ने इन्हें स्थानीय मुद्दों में उलझा कर रखा है। वो अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर निकल नहीं पा रहे हैं, तो प्रचार कैसे करेंगे।
    वो मानते हैं कि बीते 22 साल से गुजरात में बहुमत से फासले पर रही कांग्रेस को पहली मर्तबा जीत की उम्मीद बंधी है लेकिन वो इस बार भी जीत नहीं पाएगी।
    वो कहते हैं कि 150 सीट शायद बीजेपी न जीत पाए लेकिन सरकार तो उसकी बनेगी, इसमें कोई शंका नहीं है। साल 2012 के चुनावों में भाजपा के खाते में 115 सीटें आई थीं, उससे कम तो वो इस बार नहीं लाएगी।
    अहमदाबाद में वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत दयाल मानते हैं कि अमित शाह का आत्मविश्वास गुजरात की जमीनी हकीकत से अलग दिखता है। दरअसल, भाजपा की स्थिति यहां खराब है। वो कहते हैं कि अमित शाह के 150 से अधिक के आंकड़े तक पहुंचने के दावे को लेकर गुजरात में चर्चा शुरू हो गई है और इसमें ईवीएम के साथ छेड़छाड़ को ले कर बातें सामने आ रही हैं।
    वो कहते हैं कि लोग अब इस पर बात करने लगे हैं कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए ईवीएम के साथ छेड़छाड़ कर सकती है। उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद और पहले भी भाजपा पर ऐसे आरोप लगे हैं।
    इसी हफ्ते उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि जहां पर बैलट पेपर से चुनाव हुए वहां आम आदमी पार्टी जीती है। पार्टी का दावा था कि दूसरे दलों को मिलने वाले वोट का एक फीसदी वोट चुरा कर दूसरी पार्टी में जोड़ दिया जाता है।
    प्रशांत दयाल कहते हैं कि फिर से चर्चा हो रही है कि अगर मैदानी हकीकत कुछ और है और अमित शाह दावा करते हैं कि वो 151 सीटें ले कर आएंगे तो लोगों को आशंका है कि ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन ऐसा कोई आधार नहीं है जहां पर चुनाव हुए वहां पर भाजपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की हो।
    वो मानते हैं कि शहरी इलाकों में भाजपा के लिए उतनी मुश्किल नहीं है जितना ग्रामीण इलाकों में। उनका कहना है कि दोनों जगहों लोगों के मुद्दे अलग-अलग हैं शहरी वोटर्स के लिए समस्या रोजगार, पानी, बिजली या सड़कें नहीं हैं।
    प्रशांत दयाल की राय में कि यहां लोगों के मन में असुरक्षा की भावना है। भाजपा ने लोगों के मन में डर डाला हुआ है कि कांग्रेस गई तो गुजरात में फिर से दंगे हो जाएंगे और कफ्र्यू लग जाएगा। शहरी वोटर अपनी सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है।
    ग्रामीण वोटर के बारे में प्रशांत दयाल कहते हैं कि अभी तक भाजपा का दावा था और ग्रामीण इलाकों के वोटर मानते थे कि उनके इलाकों की जो स्थिति है उसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।
    लेकिन अब वो ये सवाल कर रहे हैं कि पिछले 22 वर्षों से प्रदेश में सत्ता पर भाजपा विराजमन है और बीते तीन साल से केंद्र में मोदी हैं। अब जब भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगाती है तो लोगों को ये बात हजम नहीं होती। वो कहते हैं वो अब भाजपा के आरोप से सहमत नहीं होते और इस कारण अब करीब-करीब सभी ग्रामीण इलाके भाजपा के हाथ से निकल रहे हैं।(बीबीसी)

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 4 दिसंबर। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि विपक्ष को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अगला लोकसभा चुनाव राष्ट्रपति चुनाव की तरह नहीं लडऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियों को संयुक्त नेतृत्व के रूप में उभरकर आना चाहिए, क्योंकि संयुक्त व सामूहिक नेतृत्व ही प्रत्येक राज्य में भाजपा के खिलाफ सभी पार्टियों को एकजुट कर उसे चुनौती दे सकता है। 
    डेरेक ने तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी का संदर्भ देते हुए कहा कि बंगाल विपक्षी पार्टियों के सामूहिक नेतृत्व बनने का सपना साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता ने कहा कि 2019 में विपक्ष को एक रणनीति तैयार करनी होगी, जो सभी 29 राज्यों में उनकी क्षमता को मजबूत करेगी। मैं यह बात राजनीति के छात्र के रूप में कह रहा हूं। उदाहरण के लिए बंगाल में चुनाव लडऩे की बात होगी तो जाहिर है कि वह ममता दीदी पर आधारित होगा, क्योंकि वह बंगाल की राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं। 
    डेरेक के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विपक्षी दल को एक साथ लाने में प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं।  डेरेक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा, सपा और कांग्रेस है। इन तीनों को एकसाथ लाने के लिए सबसे विश्वसनीय शख्स कौन होगा? चूंकि कांग्रेस, सपा और बसपा दोनों ही प्रदेश की राजनीति के अलग-अलग खिलाड़ी हैं, ऐसे में इन्हें एकजुट करने का काम ममता दीदी बहुत ही अच्छे से कर सकती हैं। ये सभी ममता दीदी की बात सुनेंगे। (आईएनएस)

     

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 4 दिसंबर । आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद कहा है कि वह पार्टी का वर्जन 2 लाएंगे। इसके लिए वो कार्यकर्ताओं के एंटी वायरस लगाएंगे जो चुने हुए जनप्रतिनिधियों और संगठन में हो रही गलतियों, कमियों को उठा सकेंगे ताकि कमियों को दूर किया जा सके। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे नेताओं को वापस लाने के लिए संवाद कायम करेंगे।
    कुमार विश्वास ने रविवार को कहा कि पार्टी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव सहित उन लोगों से बात कर रही है, जिन्होंने संगठन छोड़ दिया था। यह बातचीत इसलिए की जा रही है, ताकि पार्टी में उनकी वापसी हो सके। हालांकि कुमार विश्वास की इस विवादास्पद टिप्पणी का दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के एक नजदीकी नेता ने खंडन किया है।
    वहीं, हालांकि स्वराज इंडिया के स्पोक्सपर्सन अनुपम ने कहा है कि दूसरों को वापसी के लिए कहने के बजाय उन्हें (आप को)  सही रास्ते पर लौट आना चाहिए।
    कुमार विश्वास ने आप कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा के बाद कहा, यदि वह कोई राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हुआ है और यहां वापस आना चाहता है... यदि किसी ने एक राजनीतिक पार्टी बना ली है और उसका विलय हमारी पार्टी के साथ करना चाहता है। यदि कोई हमसे नाखुश होकर सामाजिक कार्य करने के लिए चला गया था। सूची लंबी है। सुभाष वारे से अंजलि दमानिया, मयंक गांधी, धर्मवीर गांधी से प्रशांतजी और योगेंद्रजी।
    उन्होंने कहा, (ऐसे लोगों की) सूची को समन्वित कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं द्वारा उनसे बातचीत की जा रही है। हमने जो गलतियां कीं उसके लिए हम माफ करने के लिए कहेंगे।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 04-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 4 दिसंबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब से ही इस सवाल का जवाब हर कोई पाना चाहता है कि कांग्रेस की तरफ से उनकी मणिनगर विधानसभा सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा?
    अब नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए यह सीट जीतना और भाजपा के लिए यह सीट बचाये रखना, प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। साल 2017 के इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार सुरेश पटेल के सामने कांग्रेस ने एक नये और युवा चेहरे को मौका दिया है, जिसका नाम है श्वेता ब्रह्मभट्ट।
    34 साल की श्वेता ब्रह्मभट्ट ने अहमदाबाद से बीबीए की डिग्री ली और इसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए वो लंदन चली गईं। उन्होंने वहां इंटरनेशनल इकॉनॉमिक्स की बारीकियों को समझा। श्वेता ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट यानी आईआईएम बैंगलुरू से पॉलिटिकल लीडरशिप का कोर्स किया।
    श्वेता का परिवार राजनीति में काफी सक्रिय है। लेकिन श्वेता राजनीति में अपनी पहचान और अपना करियर अपने दम पर बनाना चाहती है। लंदन में पढ़ाई के बाद श्वेता को वहाँ की नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस में नौकरी का प्रस्ताव भी मिला, लेकिन उन्होंने वहां नौकरी करने की बजाय भारत लौट आना पसंद किया।
    श्वेता ने बैंकिंग के क्षेत्र में 10 साल तक नौकरी की, लेकिन अब वह राजनीति द्वारा समाज के लिए कुछ करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मेरा मुख्य लक्ष्य समाज सेवा करना है। राजनीति इसका एक माध्यम है। अगर मैंने ट्रस्ट या एनजीओ शुरू किया होता तो फंड के लिए मुझे सरकार के पास ही जाना पड़ता। इससे मैं कुछ सीमित लोगों तक ही पहुंच सकती थी। लेकिन राजनीति एक ऐसा मंच है जिसके जरिये आप बड़े पैमाने पर लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हो।
    मणिनगर से अपनी उम्मीदवारी पर श्वेता कहती हैं कि मेरी उम्मीदवारी से लोगों को समझने को मिलेगा कि यह लड़की कुछ करना चाहती है। श्वेता का कहना है कि आईआईएम बैंगलुरू में पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारत की राजनीति के बारे में बहुत कुछ जाना। श्वेता बताती हैं कि हम गांव-गाव घूमते थे।
     सिंगापुर गए और वहां प्रशासन के काम करने का तरीका जानने का प्रयास किया। बिजनेस वुमन के तौर पर अपने अनुभव के बारे में श्वेता बताती है कि मैं साणंद में महिला औद्योगिक पार्क पर एक प्रोजेक्ट करना चाहती थी। इसके लिए मैंने लोन लेना चाहा और इसके लिए आवेदन भी किया। मुझे वहां पर एक प्लॉट मिला और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने मेरा सम्मान भी किया। इसके बाद भारत सरकार की मुद्रा योजना के तहत मैंने लोन लेने के लिए आवेदन किया। लेकिन मुझे लोन नहीं मिला।
    श्वेता बताती हैं कि इसी वजह से एक बार आईआईएम अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान एक सांसद से मैंने पूछा कि उच्च शिक्षा करने के बाद भी लोगों को लोन लेने में परेशानी होती है, तो और लोगों को कितनी परेशानी झेलनी होती होगी। लोगों तक यह योजना कैसे पहुंचेगी? उन्होंने मुझे वित्त मंत्रालय में शिकायत करने की राय दी।
    श्वेता कहती हैं कि अपनी पढ़ाई की मदद से मैं यह लड़ाई लड़ पाई। अगर मुझे इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा तो जिन महिलाओं के पास शिक्षा नहीं है, कम्युनिकेशन स्किल नहीं है पर एक अच्छा आइडिया है और उनको व्यापार करना है, तो उनकी क्या स्थिति रहती होगी? इन्हीं सब सवालों ने मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।
    गुजरात में विकास के बारे में श्वेता ने कहा कि व्यक्ति तब ही विकासशील बन सकता है जब वह हर तरह से स्वतंत्र हो। विकास की व्याख्या में से हम ने गरीबों को ही हटा दिया है। यह स्थिति अब बदलने की जरूरत है।(बीबीसी)

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Posted Date : 03-Dec-2017
  • राजकोट, 3 दिसंबर। गुजरात चुनाव से पहले राजकोट में प्रचार के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ। दरअसल राजकोट पश्चिम सीट से कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रनील राज्यगुरु के भाई का पोस्टर लगाने को लेकर दूसरे पक्ष से विवाद हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि विरोधियों ने इंद्रनील के भाई पर हमला किया।
    कांग्रेस का आरोप है कि हमले के बाद इंद्रनील और उनके समर्थकों ने भी जमकर हंगामा किया और मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के घर को घेरने की कोशिश की। पुलिस ने इंद्रनील और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया है। इसी बीच बता दें कि आज से ठीक 5 दिन बाद गुजरात में पहले चरण के लिए वोटिंग होगी। उससे ठीक पहले हर पार्टी चुनाव प्रचार करने एक दूसरे पर हमले करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के गुजरात दौरे पर जा रहे हैं।
    इस दौरान वो सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में सात रैलियां करेंगें।
    सौराष्ट्र और गुजरात में पहले चरण के दौरान 9 दिसंबर को वोटिंग होगी। प्रधानमंत्री आज दक्षिण गुजरात के भरूच और सौराष्ट्र के सुरेंद्र नगर और राजकोट में रैली करेंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने  गुजरात चुनाव को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 03-Dec-2017
  • भरुच, 3 दिसंबर। गुजरात के भरुच में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी रैली मेें आई जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 9 दिसंबर को आप अपनी उंगली से एक बार फिर से गुजरात की किस्मत एक बार फिर से चमका जा सकते  हैं। उन्होंने कहा कि वहां जहां भी गुजरात में गए हैं वहां देखकर ऐसा लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की आंधी चल रही है। 
    कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस बड़े नेताओं पंडित नेहरू से लेकर सोनिया और राहुल तक की कर्मभूमि रही है लेकिन फिर भी वहां के निकाय के चुनाव में कांग्रेस साफ हो गई। उत्तर प्रदेश कांग्रेस को अच्छी तरह से जान गया है और अब गुजरात में भी वही होने वाला है।
    मोदी ने कहा भरुच और कच्छ में मुस्लिम जनसंख्या काफी ज्यादा है। 
    अगर आप देखेंगे कि बीजेपी के शासनकाल में किन दो जिलों में सबसे ज्यादा विकास हुआ है तो उनमें यह दो जिले सबसे प्रमुख हैं। 
    गुजरात में पहले चरण का मतदान 9 दिसंबर को होना है इसी बीच दो दिनों में ही पीएम मोदी 7 रैलियां कर डालेंगे। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की रैलियों के बाद से बीजेपी की लड़ाई में और धार आ गई है। वह अपनी रैलियों में कांग्रेस और गांधी परिवार पर जमकर निशाना साध रहे हैं। इसके अलावा वह नोटबंदी और जीएसटी के फायदे रहे हैं।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 03-Dec-2017
  • रुद्रपुर, 3 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपत्तिजनक तस्वीर वॉट्सऐप पर भेजने पर एक कांग्रेस वर्कर के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि सचिन मुंजल नाम के कांग्रेस कार्यकर्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। वह रामपुरा पंचायत के एक ग्रामसभा सदस्य हैं । 
    मुंजल पर आरोप है कि उन्होंने एक वॉट्सऐप ग्रुप पर प्रधानमंत्री की आपत्तिजनक फोटो भेजी। उन पर आईपीसी की धारा 505 (किसी भी वर्ग या समुदाय के खिलाफ किसी भी अपराध के लिए किसी भी वर्ग या समुदाय के व्यक्ति को उत्तेजित करने का इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया। 
    इससे पहले भी पिछले महीने ऐसा ही मामला एक सामने आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य करते हुए वीडियो वाट्सऐप ग्रुप पर शेयर करने के चलते एक पत्रकार के खिलाफ मेरठ में शिकायत दर्ज हुई थी। वीडियो में पीएम मोदी अच्छे दिन पर सवाल करने पर भेड़ों के एक झुंड को जवाब देते हुए दिखाया गया था।  (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 03-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 3 दिसंबर। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी पार्टी द्वारा राहुल गांधी की आस्था पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष जब दिल्ली में होते हैं तब आखिर वह मंदिरों में दर्शन करने क्यों नहीं जाते हैं। शाह ने कांग्रेस पार्टी के उन आरोपों को भी खारिज किया जिसमें यह कहा गया था कि वह हिंदू नहीं बल्कि जैन हैं। शाह ने कहा, हमारा परिवार पिछली 6 पीढिय़ों से हिंदू है।
    शाह ने कहा, मैंने अपने धर्म के बारे में घोषणा नहीं की है लेकिन मैं कांग्रेस पार्टी के आक्षेपों पर खामोश नहीं रह सकता इसलिए मैं यह घोषित करता हूं कि हमारा परिवार पिछली 6 पीढिय़ों से हिंदू है।
    राहुल गांधी के धर्म के बारे में बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए शाह ने कहा, हम किसी की आस्था को मुद्दा नहीं बनाते लेकिन सवाल राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने का है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति को अपनी आस्था को छिपाना नहीं चाहिए। आखिर राहुल गांधी दिल्ली में मंदिरों में क्यों नहीं जाते हैं? उन्होंने कहा, हमें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि कांग्रेस पार्टी ने अचानक राहुल गांधी का जनेऊ दिखाने का निर्णय लिया, मुझे लगता है कि इससे उनकी मां (सोनिया गांधी) को भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
    कांग्रेस द्वारा अमित शाह की बेटे जय शाह की बिजनस डीलिंग का मुद्दा उठाए जाने पर बीजेपी अध्यक्ष ने दोहराया कि जय शाह ने कुछ भी गलत काम नहीं किया है और कांग्रेस के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा, कोई भी सरकारी ठेका नहीं लिया गया और न ही सरकार से किसी तरह की मदद की गई है बल्कि राहुल गांधी जैसे लोगों को प्रॉफिट और टर्नओवर जैसे टर्म में अंतर समझना चाहिए।
    बीजेपी द्वारा सोमनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के रजिस्टर में राहुल के नाम की एंट्री करने को लेकर की गई छेड़छाड़ के आरोपों पर शाह ने कहा, यह आरोप आधारहीन हैं। वह अपने पूरे दल-बल के साथ मंदिर में गए थे और कांग्रेस की मीडिया सेल के को-ऑर्डिनेटर ने उनका नाम गैर-हिंदुओं वाले रजिस्टर में दर्ज किया था। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया है और सोमनाथ मंदिर के ट्रस्ट ने भी रजिस्टर से किसी छेड़छाड़ से इंकार किया। वे आधारहीन आरोप लगा रहे हैं।ज्
    गुजरात में नोटबंदी और जीएसटी से आगामी चुनाव में नाराजगी झेले जाने के मुद्दे पर शाह ने कहा, यूपी के निकाय चुनावों के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जीएसटी और नोटबंदी से बीजेपी को गुजरात में कोई नाराजगी नहीं झेलनी पड़ेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नोटबंदी के बाद भी पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा, जीएसटी और नोटबंदी बहुत बड़े आर्थिक सुधार है जिससे भविष्य में देश को फायदा होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद जीएसटी से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दिया है और काउंसिल के साथ बैठकें की हैं। हम पहले ही इसमें काफी सुधार कर चुके हैं और आगे भी इसमें और सुधार किए जाएंगे।  (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 03-Dec-2017
  • मुंबई, 3 दिसंबर। बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी से कुछ दिन पहले ही एक बार फिर वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने दावा किया है कि अयोध्या में जल्द ही राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा और यह भक्तों के लिए अगली दिवाली तक खुल जाएगा। रामराज्य पर एक भाषण देते हुए स्वामी ने कहा, हम आनेवाली दिवाली राम मंदिर में मनाएंगे।
    स्वामी बोले, यह संभव है कि अयोध्या में अगले साल अक्टूबर तक राम मंदिर लगभग बनकर तैयार हो जाए, क्योंकि सब कुछ तैयार है और निर्माण कार्य के लिए सारा सामान पहले ही बना लिया गया है। इनको सिर्फ आपस में स्वामी नारायण मंदिर की तरह जोडऩे की जरूरत है।
    रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में 5 दिसंबर से सुनवाई शुरू होने से पहले, स्वामी ने कहा, इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही इस विषय में गहन चर्चा कर चुका है तो इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास ऐसा कुछ भी खंडन करने के लिए बचा नहीं है। 
    उन्होंने आगे कहा, मैंने कोर्ट में अतिरिक्त बहस की है कि उस जगह पर पूजा करना मेरा और हिंदु समुदाय का मौलिक अधिकार है। मुस्लिमों के पास वह अधिकार नहीं। उनकी रुचि सिर्फ प्रॉपर्टी में है। यह सामान्य है। 
    बीजेपी नेता ने कहा, राम मंदिर के निर्माण के लिए नया कानून बनाने की जरूरत नहीं है। हम कानून ला सकते हैं, लेकिन मैं सोचता हूं इसकी जरूरत नहीं। क्योंकि हम यह केस जीत रहे हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि हम जीतेंगे।  (इकॉनॉमिक्स टाईम्स)

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Posted Date : 02-Dec-2017
  • लखनऊ, 2 दिसंबर। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में शुक्रवार को घोषित नतीजों में मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने चुनाव में 78 उम्मीदवार उतारे थे। एमआईएम ने फिरोजाबाद में 11 सीटें और महुल आजमगढ़ में तीन सीटें जीती हैं। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी ने संभल, अमरोहा, मेरठ और बागपत में दो-दो सीटें और डासना गाजियाबाद, कानपुर, बिजनौर, इलाहाबाद और सीतापुर में एक-एक सीट पर जीत हासिल की है।
    एमआईएम सूत्रों के मुताबिक, उसने फिरोजाबाद में मेयर के चुनाव में दूसरा स्थान हासिल किया है। पार्टी की उम्मीदवार मशरूम फातिमा ने 56,536 मतों के साथ, समाजवादी पार्टी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। 
    भाजपा की नूतन राठौड़ ने लगभग 99 हजार वोटों के साथ इस सीट पर जीत दर्ज की। इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि राज्य में पार्टी अपने नेताओं और सदस्यों की कड़ी मेहनत के कारण सीटें जीत सकती है। उन्होंने पार्टी का समर्थन करने के लिए मतदाताओं को धन्यवाद दिया।
    इस साल मार्च में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एमआईएम खाता खोलने में असफल रही थी। पार्टी ने 35 सीटों पर चुनाव लड़ा था। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 02-Dec-2017
  • लखनऊ, 2 दिसंबर। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में शुक्रवार को घोषित नतीजों में मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने चुनाव में 78 उम्मीदवार उतारे थे। एमआईएम ने फिरोजाबाद में 11 सीटें और महुल आजमगढ़ में तीन सीटें जीती हैं। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी ने संभल, अमरोहा, मेरठ और बागपत में दो-दो सीटें और डासना गाजियाबाद, कानपुर, बिजनौर, इलाहाबाद और सीतापुर में एक-एक सीट पर जीत हासिल की है।
    एमआईएम सूत्रों के मुताबिक, उसने फिरोजाबाद में मेयर के चुनाव में दूसरा स्थान हासिल किया है। पार्टी की उम्मीदवार मशरूम फातिमा ने 56,536 मतों के साथ, समाजवादी पार्टी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। 
    भाजपा की नूतन राठौड़ ने लगभग 99 हजार वोटों के साथ इस सीट पर जीत दर्ज की। इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि राज्य में पार्टी अपने नेताओं और सदस्यों की कड़ी मेहनत के कारण सीटें जीत सकती है। उन्होंने पार्टी का समर्थन करने के लिए मतदाताओं को धन्यवाद दिया।
    इस साल मार्च में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एमआईएम खाता खोलने में असफल रही थी। पार्टी ने 35 सीटों पर चुनाव लड़ा था। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 02-Dec-2017
  • लखनऊ, 2 दिसंबर। उत्तर प्रदेश निकाय  चुनाव में बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज की है और माना जा रह है कि योगी का करिश्मा और मोदी लहर अभी भी बरकरार है और 2019 के चुनाव में बीजेपी के लिए दोनों ही बड़ा फैक्टर साबित होने जा रहे हैं, लेकिन इन चुनावों परिणामों नजर डालें तो बीएसपी भी वापसी करती दिख रही है। 
    कई वर्षों के बाद बीएसपी के खेमे में थोड़ी राहत वापस लौटी है। लोकसभा चुनाव में जहां बीएसपी को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी तो विधानसभा चुनाव में पार्टी लाख कोशिशें करने के बाद भी तीसरे नंबर रही, लेकिन निकाय चुनाव में बीएसपी ने सपा को तीसरे नंबर धकेल दिया है और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया है इसके साथ ही मेरठ और अलीगढ़ में मेयर का चुनाव जीत लिया।
    इतना ही नहीं झांसी, आगरा और सहारनपुर में पार्टी दूसरे नंबर रही है। 
    चुनावी नतीजों से साफ है कि मुस्लिम वोटरों का झुकाव बीएसपी की ओर बढ़ा रहा है। मायावती की कोशिश भी यही है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटर किसी भी तरह से उसके पाले में आ जाएं तो सपा को आसानी से पीछे छोड़ सकती है और खुद को बीजेपी के मुकाबले खड़ा कर सकती है। बीएसपी अभी तक निकाय चुनावों में ज्यादा रुचि नहीं दिखाती रही है। 
    साल 2006 और 2012 के चुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारे थे, लेकिन जिस तरह से चुनाव अब माइक्रो मैनेजमेंट की ओर बढ़ते जा रहे हैं उससे साफ जाहिर है कि कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए हर चुनाव से गंभीरता लेना होगा। हालांकि इस चुनाव में मायावती हो या अखिलेश यादव कहीं भी रैली करने नहीं गए थे।
    सवाल इस बात का है कि अगर उत्तर प्रदेश में बीएसपी का का उभार होता है तो किसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जाहिर यह सपा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है क्योंकि समाजवादी पार्टी का आधार वोट बैंक मुस्लिम-यादव ही हैं। अगर इसमें सेंध लगने का मतलब है कि सपा को सीधा नुकसान। दलितों और मुस्लिम समीकरण काम कर गया तो कांग्रेस को भी अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश में इन दोनों का भी वोट कांग्रेस को मिलता रहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश के कई चुनाव गवाह रहे हैं कि जब यहां पर हाथी दौड़ा है सभी को रौंदता चला गया। इसलिए बीएसपी का उभार बीजेपी के लिए कम खतरनाक साबित नहीं होगा, क्योंकि योगी के सीएम बनने के बाद से ब्राह्मणों में भी कई मु्द्दों पर नाराजगी देखी जा सकती है। अब यह आंकलन का मुद्दा है कि किस पार्टी को ज्यादा नुकसान हो सकता है।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 02-Dec-2017
  • पटना, 2 दिसंबर। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगातार चौथे दिन ट्वीट कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद पर निशाना साधा। 

    नीतीश ने शनिवार को लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के विवादास्पद बयान को लेकर लालू प्रसाद पर तंज कसा। नीतीश ने बिना किसी का नाम लिए इशारों ही इशारों में लालू पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट कर कहा, बाल-बच्चों और परिजनों से गाली दिलवाना, सामाजिक सद्भावना और साझी विरासत का उत्कृष्ट उदाहरण!
    लालू के बड़े बेटे और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को घर में घुसकर मारने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खाल उधेडऩे की धमकी दी थी। तेज प्रताप के इस बयान के बाद चारों तरफ उनकी आलोचना हुई थी। लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान भी इस बयान के बाद काफी गुस्से में दिखे थे। 
    उन्होंने कहा था कि जो आदमी नरेंद्र मोदी का खाल खींच सकता है, वो कल लालू यादव का भी खाल खींच सकता है। आमतौर पर ट्विटर से दूरी बनाए रखने वाले नीतीश पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर सक्रिय बने हुए हैं। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 02-Dec-2017
  • लखनऊ, 2 दिसंबर । यूपी निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत पर बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने कहा कि बीजेपी ईमानदार है तो ईवीएम का इस्तेमाल को बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए।  उन्होंने कहा, अगर बीजेपी ईमानदार है और लोकतंत्र में विश्वास करती है तो ईवीएम के इस्तेमाल को बंद करे और बैलट पेपर से चुनाव करवाए। साल 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। अगर बीजेपी को विश्वास है कि जनता उनके साथ है तो वे बैलट पेपर से चुनाव कराए। मैं यह दावे के साथ कहती हूं कि 2019 में बैलेट पेपर से मतदान हुए तो बीजेपी दोबारा सत्ता में नहीं आएगी।
    यूपी निकाय चुनाव में बीजेपी के बाद बीएसपी ने ही अच्छा प्रदर्शन किया है। पार्टी ने पहली बार अपने चुनाव निशान पर राज्य में निकाय चुनाव लड़ा है और मेरठ-अलीगढ़ के मेयर की सीट पर कब्जा कर लिया है। हालांकि इस चुनाव में मायावती ने खुद कहीं भी प्रचार नहीं किया लेकिन पूरे अभियान पर नजर बनाए रखी थी।
    बीएसपी ने इस चुनाव में सपा को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है और कई जगहों पर दूसरे नंबर रही है। माना जा रहा है कि राज्य में एक बार फिर से मुस्लिम वोटर बीएसपी की ओर जा रहे हैं।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 01-Dec-2017
  • लखनऊ, 1 दिसंबर । यूपी निकाय चुनाव की मतगणना+ के बीच एक सीट पर बेहद रोचक मुकाबला देखने को मिला। इस सीट पर दो पार्टियों के बीच मुकाबला ड्रॉ हो गया। बाद में इस सीट पर लकी ड्रॉ+ के जरिए बीजेपी उम्मीदवार मीरा अग्रवाल को विजयी घोषित किया गया। 
    निकाय चुनावों के लिए जारी मतगणना में यह रोचक मुकाबला मथुरा के वार्ड नंबर 56 में देखने को मिला। दो प्रत्याशियों को कांटे के मुकाबले में बराबर वोट मिले। बीजेपी+ और कांग्रेस के बीच यहां कांटे का मुकाबला रहा। दोनों ही प्रत्याशी लगातार काउंटिंग में एक दूसरे पर बढ़त बनाते दिखे। पर, जब काउंटिंग खत्म हुई तो आंकड़ा और दिलचस्प आया। दोनों ही उम्मीदवारों ने 874 वोट हासिल किए। इसके बाद फैसला लकी ड्रॉ के जरिए किया गया, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी मीरा की जीत हुई। 
    निकाय चुनावों के लिए अब तक जारी रुझानों में नगर निगम में बीजेपी 14 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं बीएसपी 2 सीटों पर आगे है। कांग्रेस और एसपी का अभी खाता भी नहीं खुला है। इसी तरह नगर पालिका अध्यक्ष के लिए चुनावों में भी बीजेपी भारी बढ़त लेती दिख रही है। निकाय चुनाव के तहत मेयर के लिए 16 सीटों और नगर पालिका के लिए 198 सीटों पर मतगणना जारी है। (एएनआई)

     

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Posted Date : 01-Dec-2017
  • अमरेली, 1 दिसंबर । अपने धर्म के बारे में विवाद होने के एक दिन बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि वह और उनके परिवार के सदस्य 'शिवभक्तÓ हैं, लेकिन राजनैतिक फायदे के लिये वह अपने धर्म का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं। बंद कमरे में व्यापारियों की बैठक को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि उन्हें अपने धर्म के बारे में किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है और न ही वह धर्म को लेकर 'दलालीÓ करते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने सोमनाथ मंदिर में गैर हिंदुओं वाले रजिस्टर में उनका नाम दर्ज कर दिया, जिसकी वजह से विवाद हुआ।
    उन्होंने कहा कि मेरी दादी (दिवंगत इंदिरा गांधी) और मेरा परिवार शिवभक्त है। लेकिन हम इन चीजों को निजी रखते हैं। हम आमतौर पर इस बारे में बातचीत नहीं करते हैं, क्योंकि, हमारा मानना है कि यह बेहद व्यक्तिगत मामला है और हमें इस बारे में किसी के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हम इसका व्यापार नहीं करना चाहते हैं। हम इसको लेकर दलाली नहीं करना चाहते हैं। हम इसका राजनैतिक उद्देश्य के लिये इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इस बातचीत का वीडियो मीडिया से साझा किया है।
    गांधी ने कहा कि मैं आपको बताऊंगा कि कल क्या हुआ। मैं मंदिर के भीतर गया। तब मैंने विजिटर्स बुक पर हस्ताक्षर किए। उसके बाद भाजपा के लोगों ने दूसरी पुस्तिका में मेरा नाम लिख दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहर लाल नेहरू के बीच संबंधों पर राहुल ने कहा कि वे कुछ राजनैतिक और विचारधारात्मक मतभेदों के बावजूद मित्र थे। (बाकी पेजï 5 पर)
    उन्होंने कहा कि यद्यपि वे मित्र थे और साथ जेल भी गये, लेकिन कुछ लोग यहां झूठ फैला रहे हैं कि वे दुश्मन थे। साथ ही इस बात के सबूत हैं कि सरदार पटेल आरएसएस के खिलाफ थे। लेकिन कुछ लोग यहां झूठ फैला रहे हैं कि वह आरएसएस से सहानुभूति रखते थे। यह सही नहीं है। राहुल के कल सोमनाथ मंदिर जाने के बाद विवाद हो गया था जब अहमद पटेल के साथ उनका नाम गैर हिंदुओं वाले रजिस्टर में पाया गया। कांग्रेस ने इसे 'फर्जीÓ करार दिया था जबकि भाजपा इस बात पर जोर दे रही थी कि कांग्रेस उपाध्यक्ष लोगों के सामने अपने धर्म की घोषणा करें। (भाषा)

     

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Posted Date : 01-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 1 दिसंबर। एयरसेल मैक्सिस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने चेन्नई में 4 और कोलकाता में 2 जगहों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के एक रिश्तेदार के घर पर भी छापा मारा गया है। इनका नाम  एस कैलाशम है जो कार्ति चिंदबरम के मामा बताए जा रहे हैं। इसके अलावा  रामजी नटराजन और सुजाय संबामूर्थि के घर पर भी छापा मारा गया है। कोलकाता में मनोज मोहनका के घर सहित दो ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक  एफआईपीबी क्लीयरेंस के मामले में रिश्वत के आरोप पर यह कार्रवाई की गई है।
    बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में याचिका देकर आरोप लगाया है कि एयरसेल मैक्सिस डील में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कैबिनेट कमेटी की अनुमति के बिना ही मंजूरी दी जबकि ये डील 3500 करोड़ की थी।
     नियमों के मुताबिक वित्तमंत्री 600 करोड़ रुपये तक की डील को ही मंजूरी दे सकते थे। एफआईपीबी ने फाइल को वित्तमंत्री के पास भेजा और उन्होंने इसे मंजूर कर दिया। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 01-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 1 दिसंबर। महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिव शहजाद पूनावाला ने पार्टी के शीर्ष पद की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एक व्यक्ति के चयन के लिए चुनाव का दिखावा किया जा रहा है।
    दरअसल शहजाद के बयान के निशाने पर राहुल गांधी को माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि जल्द ही वह पार्टी के अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाल सकते हैं। अभी वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं कांग्रेस का कहना है कि शहजाद सिर्फ पब्लिसिटी के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।
    इस सब के बीच चर्चा इस बात की हो रही है कि कल तक टीवी चैनलों पर कांग्रेस का पक्ष रखते नजर आने वाले शहजाद आज अचानक पार्टी के खिलाफ क्यों बोल रहे हैं। माना जा रहा है कि शहजाद के निशाने पर राहुल गांधी हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनाने की मांग पार्टी के अंदर लंबे समय से उठ रही है।
    कौन हैं शहजाद पूनावाला?
    टीवी चैनलों की चर्चाओं में कांग्रेस का पक्ष रखने वाले शहजाद पूनावाला मूलत: पुणे से हैं, जहां उनका होटल और रेस्तरां का कारोबार है। शहजाद और उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला को पुणे से कांग्रेस के सांसद रहे सुरेश कलमाड़ी का करीबी माना जाता है।
    जिस वक्त कलमाडी 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के चेयरमैन थे, शहजाद और तहसीन मिलकर उनकी तरफ से मीडिया से संपर्क करते थे। खास बात यह है कि जब कलमाडी को कॉमनवेल्थ खेलों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जेल जाना पड़ा, तब शहजाद और तहसीन खुद को विवाद से दूर रखने में सफल रहे थे।
    शहजाद ने कानून की पढ़ाई की है और वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील मनीष तिवारी के साथ काम कर चुके हैं। वह अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों को उठाते रहे हैं। उन्होंने गोरक्षा के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी साल जून में मॉब लिंचिंग के खिलाफ मानव सुरक्षा कानून नाम का बिल ड्राफ्ट करने में भी वह शामिल थे।
    ट्विटर हैंडल पर अपना नाम शहजाद जय हिंद लिखते हुए खुद को उन्होंने नेहरूवादी, गांधीवादी और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता बताया है। उन्होंने लिखा है कि मेरा धर्म इस्लाम है, संस्कृति हिंदू है और विचारधारा भारतीय है।
    क्या है कांग्रेस से नाराजगी की वजह?
    शहजाद बुधवार को यह कहकर सुर्खियों में आ गए कि अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩा चाहते हैं तो पहले उन्हें उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए। शहजाद ने कहा कि कांग्रेस के संविधान के मुताबिक अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ता प्रतिनिधि चुनते हैं और वे प्रतिनिधि वोट देते हैं। मगर अभी जो हो रहा है, वह इलेक्शन नहीं, सेलेक्शन है।
    उन्होंने कहा कि मेरे पास इसके पुख्ता सबूत हैं कि कम से कम एक राज्य में चयन के माध्यम से प्रतिनिधि नियुक्त किए गए हैं। इस आधार पर कि वे वफादार और चाटुकार हैं। उन्हें कार्यकर्ताओं ने नहीं चुना।
    शहजाद कहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष एआईसीसी की अध्यक्ष सोनिया गांधीजी द्वारा बनाए गए हैं, जो राहुल गांधी जी की माता हैं। उन्होंने ही राहुल को उपाध्यक्ष बनाया है, वह चुने नहीं गए हैं। तो पूरे सिस्टम में चुनाव की कोई जगह नहीं है, चयन हो रहा है। और इस सिस्टम में कोई लड़ ही नहीं सकता और न ही किसी के लडऩे की अहमियत होगी। क्योंकि सिर्फ एक व्यक्ति का चयन हो रहा है।
    आगे उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अधिकृत प्रवक्ता ने दस दिन पहले ही बयान दिया है कि अगले 100 वर्षों तक कांग्रेस के अध्यक्ष गांधी ही रहेंगे। जबकि अभी तक उन्होंने नामांकन भी नहीं भरा है। इससे भी साबित होता है कि यह सिस्टम फिक्स्ड है।
    मैंने ये शंकाएं पार्टी के नेतृत्व तक पहुंचाईं, काफी वर्षों से समय मांग रहा था और वंशवाद पर रूबरू होने की कोशिश कर रहा था। मगर कभी जवाब नहीं मिला। अब इन दो मुद्दों पर मैंने लीडरशिप से बात की तो चि_ियां लीक की गईं।
    महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोच चव्हाण ने तो यहां तक कह दिया है कि शहजाद पूनावाला कांग्रेसी हैं ही नहीं। महाराष्ट्र कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मीडिया से बात कर रहे चव्हाण का वीडियो पोस्ट किया गया है।
    इसमें वह कह रहे हैं कि हम देख रहे हैं कि कुछ लोग राहुल जी की आलोचना कर रहे हैं। मगर मुझे नहीं लगता इसमें कोई सच्चाई है। सच्चे कांग्रेसी ऐसे विषयों पर बात नहीं करते।
    शहजाद के संबंध में चव्हाण कहते हैं कि वह कांग्रेसी नहीं है। ढाई साल में शायद ही वो पार्टी के किसी मामले में शामिल हुए हों।  वह राहुल जी का नाम इस्तेमाल करके पब्लिसिटी हासिल करना चाह रहे हैं। इसे महत्व नहीं देना चाहिए।
    मगर शहजाद का कहना है कि वह कांग्रेस से सदस्य हैं और उनके पास इसके सबूत भी हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का राजनीतिक गॉडफादर नहीं है, वे मेरे साथ हैं। मगर पार्टी में किसी के अंदर साहस नहीं है। मैंने परिवारवाद और चुनाव पर सवाल उठाए तो पार्टी ने कहा कि मैं पार्टी का मेंबर ही नहीं हूं। जबकि मेरे पास मेरे अपॉइंटमेंट लेटर है कि मैं सेक्रेटरी के तौर पर नियुक्त हुआ हूं।
    मेरे पास जनार्दन द्विवेदी की तरफ से जारी 12 अप्रैल 2016 की प्रेस रिलीज है, जिसमें मेरी नियुक्ति का जिक्र है। पांच दिसंबर 2014 का अजय माकनजी के हस्ताक्षर वाला पत्र है वह लेटर भी है जिसमें मुझे राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की ट्रेनिंग में शामिल किया गया। जब मेरी पार्टी परिवारवाद के खिलाफ बोलने वालों के साथ इस तरह का बर्ताव करती है, तो लोग बोलने से डरते हैं।
    शहजाद के रुख से उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला भी नाराज हैं। तहसीन ने मीडिया से बात करते हुए और ट्वीट करके कहा है कि शहजाद को उचित मंच पर शिकायत करनी चाहिए थी। उन्होंने ट्वीट किया है कि शहजाद पूनावाला को मैंने हमेशा अपने बच्चे की तरह समझा है। उन्हें ऐसा करते देख मुझे दुख पहुंचा है। इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। जीतने के लिए हमें कांग्रेस और इसके सहयोगियों को मजबूत करना चाहिए। किसी भी शिकायत को उचित मंच पर उठाया जाना चाहिए था। मैं और मेरी पत्नी खुद को उनसे अलग करते हैं।
    भाई की नाराजगी की वजह क्या है? इस बारे में पूछे जाने पर शहजाद ने कहा कि मेरे भाई चाहते थे कि मैं पहले उनसे बोलता। अगर मैं ऐसा करता तो वो मुझे बोलने नहीं देते क्योंकि ये मेरी अंतरात्मा की आवाज थी।
    उन्होंने कहा कि उनकी वफादारी परिवार से है, मेरी वफादारी गांधी जी के उसूलों और मुल्क से है। गांधी जी हमारी पार्टी के सबसे बड़े नेता थे, मगर उन्होंने अपने बच्चों को राजनीति में नहीं धकेला। राजनीति, और खासकर कांग्रेस में जिस तरह का परिवारवाद आ गया है, उसके खिलाफ बोलना भी जरूरी थी। तहसीन पूनावाला की पत्नी मोनिका वाड्रा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कजन हैं।
    शहजाद से जब यह पूछा गया कि क्या वह अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩा चाहते हैं, तो उनका जवाब था कि न मैं चुनाव लडऩे के लिए यह कर रहा हूं और न ही मुझे अध्यक्ष बनना है। मैं बस यह कह रहा हूं कि परिवारवाद से लडऩे के लिए नियम बन जाना चाहिए कि एक परिवार में एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाना चाहिए। फिर मेरा परिवार हो या राहुलजी का परिवार हो।
    उनका कहना है कि इस नियम के आने से परिवारवाद खत्म होगा और हमारी पार्टी जो इतना खराब प्रदर्शन कर रही है, उसमें सुधार होगा। मैं कांग्रेस के लिए काम करता हूं और मेरा पूरा एक्टिविज्म कांग्रेस की तरफ रहा है। संघ परिवार के खिलाफ भी लड़ता हूं और परिवारवाद के खिलाफ भी लड़ता हूं और इस लड़ाई को जारी रखूंगा।
    शहजाद कहते हैं कि अगर कांग्रेस सिस्टम में सुधार नहीं कर सकती तो उसे ईमानदारी से कह देना चाहिए कि हम ऐसी पार्टी हैं, जहां गांधी ही अध्यक्ष बनेंगे, वंशवाद विरोधियों के लिए यहां जगह नहीं है और हमारी पार्टी इसी तरह से चलेगी। राहुल जी की तरह यह नहीं कहना चाहिए कि हम बदलाव कर रहे हैं। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 30-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 30 नवम्बर। राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपे जाने से पहले पार्टी के भीतर से ही उनके खिलाफ आवाज उठने लगी है। महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिव शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि एक परिवार से किसी एक को ही पद मिलना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो। उन्होंने अध्यक्ष चुने जाने की पूरी प्रक्रिया को ही पाखंड करार दिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस में राहुल की ताजपोशी की तैयारियां जोरों पर हैं। 
    टीवी पर अकसर पार्टी का पक्ष रखते हुए नजर आने वाले शहजाद पूनावाला ने कहा, मुझे लगता है कि एक परिवार से किसी एक को ही टिकट मिलना चाहिए, चाहे वह शहजाद पूनावाला हों या राहुल गांधी। पूनावाला ने चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, कांग्रेस अध्यक्ष के लिए होने वाला चुनाव, चुनाव नहीं चयन है। चुनाव की यह प्रक्रिया पाखंड है।
    पूनावाला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव पूरी तरह फिक्स है। उन्होंने कहा, मुझे यह जानकारी मिली है कि जो प्रतिनिधि पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए वोट डालने जा रहे हैं, वे गुप्त रूप से फिक्स हैं। उन्हें उनकी वफादारी के लिए नियुक्त किया गया है। पूनावाला ने कहा कि वह जानते हैं कि अब उनपर हमले किए जाएंग। उन्होंने कहा- हां, इस पर बोलने के लिए हिम्मत चाहिए। मुझ पर अब सभी तरह के हमले किए जाएंगे पर मेरे पास तथ्य हैं।
    इस बीच कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की ताजपोशी की तैयारियां जोरों पर हैं। राहुल गांधी के नामांकन पत्र भरने को लेकर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत शुक्रवार से नामांकन पत्र दाखिल किए जाने हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी 3 दिसंबर को नामांकन पत्र दाखिल करेंगे, क्योंकि राहुल 1 और 2 दिसंबर को केरल में रहेंगे। 
    कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन मुल्लापल्ली रामचंद्रन चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका में रहेंगे। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए उन्होंने बुधवार को प्रदेश के रिटर्निंग अफसरों के साथ बैठक की। सभी पीआरओस से कहा गया है कि अपने-अपने प्रदेश में जाकर नामांकन पत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नजर रखें। 
    माना जा रहा है कि राहुल गांधी को चुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा, उन्हें निर्विरोध चुन लिया जाएगा। अगर कोई और पद पर दावेदारी करना चाहेगा तो उसके लिए जरूरी होगा कि प्रदेश कांग्रेस कमिटी के 10 प्रतिनिधि उनका नाम प्रस्तावित करें।   (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 30-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 30 नवम्बर। गुजरात विधानसभा चुनावों के बीच बुधवार को सोमनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान एंट्री रजिस्टर में राहुल गांधी का नाम गैर-हिंदू के रूप में दर्ज होने पर सियासी घमासान मचने के बाद कांग्रेस की तरफ से सफाई दी गई है साथ ही बीजेपी पर भी निशाना साधा है। कांग्रेस की ओर से तस्वीर जारी करते हुए कहा गया है कि राहुल गांधी हिंदू ही नहीं जनेऊधारी भी है।  दिलचस्प बात यह है कि कहां तो कांग्रेस और बीजेपी शुरू में दावा कर रहे थे कि विधानसभा का चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जाएगा तो बात जातिगत समीकरणों से लेकर जनेऊ तक आ गई है। 
    सोमनाथ दौरे पर गए कांग्रेस को अंदाजा भी नहीं था कि बीच चुनाव में वह ऐसे विवाद में फंस जाएगी जहां उसको राहुल गांधी को हिंदू साबित करना पड़ जाएगा। दरअसल राहुल के मंदिर पहुंचने के बाद उनका नाम मंदिर के एंट्री रजिस्टर में लिखे जाने के बाद से विवाद शुरू हो गया।
    सोमनाथ मंदिर में गैर-हिंदू दर्शनार्थियों को दर्शन से पहले इस रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करना पड़ता है। राहुल गांधी का नाम वहां पर गैर-हिंदू रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया। इस खबर के आते ही बीजेपी ने राहुल के धर्म पर सवाल खड़ कर दिए।
    अचानक उठे इस विवाद पर कांग्रेस सकते में आ गई। कांग्रेस ने बयान और तस्वीरें जारी कर बताया कि राहुल हिंदु ही नहीं जनेऊधारी हिंदू हैं। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि राहुल ने एंट्री रजिस्टर पर खुद नहीं लिखा है, विजिटर्स बुक में लिखा है। इसके  साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल के सोमनाथ मंदिर दौरे पर किसी और की नहीं सीधे प्रधानमंत्री मोदी की नजर रहती है।  (एनडीटीवी)

     

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