राजनीति

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Posted Date : 19-Jan-2018
  • नई दिल्ली: लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग ने  आम आदमी पार्टी  के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है. यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका है. 70 में से 67 सीटें जीतकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल के लिए यह बड़ा झटका है. आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने मार्च 2015 में 21 आप विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था. जिसको प्रशांत पटेल नाम के वकील ने लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत करके 21 विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी. राष्ट्रपति ने मामला चुनाव आयोग को भेजा और चुनाव आयोग ने मार्च 2016 में 21 आप विधायकों को नोटिस भेजा, जिसके बाद इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई. केजरीवाल सरकार ने पिछली तारीख से कानून बनाकर संसदीय सचिव पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रपति ने बिल लौटा दिया था. वहीं अरविंद केजरीवाल के मीडिया एडवाइजर नागेंदर शर्मा  ने चुनाव आयोग के फैसले पर हैरत जताते हुए आरोप लगाया कि बिना किसी सुनवाई के फैसला दे दिया गया.

    कौन हैं विधायक और कहां से चुने गए हैं
    आदर्श शास्त्री- द्वारका 
    अलका लांबा- चांदनी चौक 
    संजीव झा- बुराड़ी 
    कैलाश गहलोत- नजफगढ़ 
    विजेंदर गर्ग- राजेंद्र नगर 
    प्रवीण कुमार- जंगपुरा 
    शरद कुमार चौहान- नरेला
    मदन लाल खुफिया- कस्‍तुरबा नगर
    शिव चरण गोयल- मोती नगर
    सरिता सिंह- रोहतास नगर 
    नरेश यादव- मेहरौली
    राजेश गुप्ता- वजीरपुर 
    राजेश ऋषि- जनकपुरी 
    अनिल कुमार बाजपेई- गांधी नगर
    सोम दत्त- सदर बाजार
    अवतार सिंह- कालकाजी 
    सुखवीर सिंह डाला- मुंडका
    मनोज कुमार- कोंडली (सुरक्षित)
    नितिन त्यागी- लक्ष्‍मी नगर 
    जरनैल सिंह- रजौरी गार्डेन
    इसी बीच 'आप' के 21 विधायकों के संसदीय सचिव के मामले से जुड़ा केस खत्म करने की याचिका को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था. चुनाव आयोग ने कहा कि विधायकों पर केस चलता रहेगा. आप विधायकों ने याचिका दी थी कि जब दिल्ली हाई कोर्ट में संसदीय सचिव की नियुक्ति ही रद्द हो गई है तो ऐसे में ये केस चुनाव आयोग में चलने का कोई मतलब नहीं बनता. 8 सितंबर 2016 को दिल्ली हाइकोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द कर दी थी. (एनडीटीवी)

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Posted Date : 18-Jan-2018
  • सागरिका घोष
    नई दिल्ली, 18 जनवरी (टाईम्स न्यूज)। सीबीआई अदालत द्वारा 2 जी केस से बरी किए गए डीएमके नेता और पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने पूर्व सीएजी विनोद राय पर बड़ा हमला बोला है। अपनी किताब 2जी सागा अनफोल्ड्स पर टाइम्स ऑफ इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में राजा ने कहा कि राय संवैधानिक शक्ति के उल्लंघन के दोषी हैं।
    राजा से जब पूछा गया कि अपनी किताब में वह पूर्व सीएजी राय को विलन नंबर एक के रूप में दर्शा रहे हैं और कह रहे हैं कि राय के कंधे पर बंदूक रखकर यूपीए-2 को अस्थिर करने की कोशिश की गई थी? इसपर राजा ने कहा, मैं नहीं मानता कि कोई इसमें विलन है। मैं केवल तथ्य रख रहा हूं। अगर आप उन्हें विलन कहते हैं तो मैं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हूं। वह संवैधानिक शक्तियों के उल्लंघन के दोषी हैं। उनके जरूर किसी राजनीतिक दल के साथ संबंध रहे होंगे। मैं जेल में था और मैं इसकी तहकीकात नहीं कर सकता था। मुझे पक्का यकीन है कि राय के पीछे जरूर कोई राजनीतिक साजिश रही होगी। एक आईएएस अधिकारी होने के नाते उनकी कोई राजनीतिक महत्वकांक्षा नहीं होगी, लेकिन जरूर उन्हें किसी ने अपने स्वार्थ के लिए प्रयोग किया।
    यह पूछे जाने पर राय को किसने यूज किया? राजा ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने क्यों एकतरफा फैसलों से हमला किया। संचार विभाग और ऑडिट टीम के बीच पत्राचार हुआ था। ष्ट्रत्र ने जो भी सवाल पूछे थे उसका जवाब अधिकारियों ने उचित रूप से दिया था। अधिकारियों ने खुद सीएजी को जवाब भेजा था। कुछ भी गलत नहीं है, कोई घोटाला नहीं हुआ, कोई पॉलिसी फ्रॉड नहीं हुआ। सबकुछ सही था। सभी योग्य आवेदकों को स्पेक्ट्रम, लाइसेंस दिया गया था। जिन अधिकारियों ने सीएजी को जवाब दिया था उन्हें ही गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया और उन्होंने सीबीआई की बातों से इनकार किया और कहा कि नहीं, नहीं वे हमारे विचार नहीं थे। संचार विभाग और सीएजी टीम की एक एग्जिट कॉन्फ्रेंस हुई। टीम ने इस बात को कहा कि वे लॉस शब्द हटा लेंगे और फ्रॉड पॉलिसी (फ्रॉड पॉलिसी शब्द फर्स्ट कम फस्र्ट सव्र्ड के लिए) शब्द पलटा जाएगा। टीम ने सभी कुछ मानते हुए कहा कि स्वान टेलिकॉम योग्य है। तभी राय प्रकट होते हैं और 1.76 लाख करोड़ रुपये लॉस की बात कहते हैं। कैसे राय इस आंकड़े पर पहुंचे जबकि कागजात में ऐसी कोई बात नहीं थी? 
    यह पूछने पर कि राय ने कहा कि उनके आकलन 2008 में जो हुआ और 2010 में जैसा ऑक्शन हुआ था, उसी पर आधारित थे। आंकड़े को सनसनीखेज बनाने के पीछे मीडिया और विपक्ष का हाथ था। राजा ने कहा कि यह तुलना ही गलत थी। एक संवैधानिक अथॉरिटी अपने स्टाइल में काम नहीं कर सकता है। विभाग ने लाइन बाइ लाइन जो जानकारी दी थी उसमें कट ऑफ डेट, फस्र्ट कम फस्र्ट सव्र्ड पॉलिसी, एक्स्चेकर लॉस, दोहरी तकनीक और आवेदकों की योग्यता के बारे में जानकारी थी और यही 5 मुख्य मुद्दे थे। संचार विभाग ने फाइल नोटिंग के जरिए साफ बताया था कि निर्णय सबकी सहमति से लिया गया था और एक्स्चेकर को कोई नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन राय ने विभाग द्वारा दिए गए जवाब को नहीं माना। अधिकारियों ने आपको समझाया। आपके खुद के अधिकारियों ने लिखित में दिया कि एक्स्चेकर को कोई लॉस नहीं हुआ है। एक कॉन्फ्रेंस किया गया और दोनों विभागों ने इस वादे वाले कागजात पर हस्ताक्षर किए, लेकिन राय ने इसका उल्लंघन किया। ऐसा क्यों हुआ? सच कहूं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 
    यह पूछे जाने पर कि क्या राय पर मुकदमा करना चाहिए? आपराधिक षड्यंत्र के लिए या फिर भ्रष्टाचार निरोधी ऐक्ट के तहत? राजा ने कहा, हां यह होना चाहिए। हालांकि वह संवैधानिक अथॉरिटी हैं और उनको संवैधानिक छूट प्राप्त है, लेकिन कम से कम से उनके खिलाफ तुरंत एक जांच कमिटी तो बैठानी ही चाहिए। 
    यह पूछे जाने पर कि अगर आज आप राय से मिलेंगे तो क्या कहेंगे? राजा ने कहा, मैं उनको डिबेट के लिए बुलाता हूं। मैं हाथ जोड़कर देश के चौथे खंभे से कहता हूं कि राय को एक ही मेज पर बुलाएं और चर्चा कराएं। आइए देखें कौन सही और कौन गलत है। सब कोई उस आसमानी आंकड़े पर रुके हुए हैं। कृपया उसे इग्नोर करें। कोर्ट ने इसे नहीं माना है। सुनवाई के दौरान इसे नहीं माना गया। केवल एक बात है, कट ऑफ डेट। राय का कहना था कि यह एकतरफा तरीके से किया गया। मैंने कोर्ट में रिकॉर्ड के साथ यह साबित कर दिया। कोर्ट में मैंने यह साबित किया कि शुरू में मैं भी इसके खिलाफ था और कट ऑफ डेट पर मिलकर फैसला किया गया था। राय का कहना था कि राजा ने अकेले कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया था। पर किसी भी कागजात में इस बात की तस्दीक नहीं कर रही है। मैंने किताब और कोर्ट में भी यह साबित किया है कि राजा शुरू में कट ऑफ डेट के खिलाफ था। मेरे अधिकारी कट ऑफ डेट चाहते थे, मैं अधिकारियों की बात से सहमत हो गया था और इसलिए अपने हस्ताक्षर किया। ऐसे में बात चाहे 1.76 लाख करोड़ के नुकसान की बात हो, चाहे कट ऑफ डेट की हो या फिर फस्र्ट कम फस्र्ट सव्र्ड या फिर आवेदकों की योग्यता की बात हो, इन सबपर राय का अपना स्वतंत्र आइडिया था और यह सीएजी की राय नहीं थी। 
     

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Posted Date : 17-Jan-2018

  • तमिलनाडु। दक्षिण के सुपरस्टार कमल हासन 21 फरवरी को अपनी राजनैतिक पार्टी की घोषणा करेंगे। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु के रामनाथपुरम को चुना है। इसी दिन से वह राज्यव्यापी यात्रा की भी शुरुआत करेंगे।
    बताया जा रहा है कि कमल हासन कई चरणों में अपनी यात्रा पूरी करेंगे। रामानाथपुरम उनका गृहजनपद है। यहां से वह मधुरई, दिंडीगुल और सिवगंगई जाएंगे। बता दें कि कमल हासन ने एक साल पहले ही पहल कर दी थी कि वह अपनी राजनैतिक पार्टी बनाकर चुनाव में उतरेंगे।
    हासन ने कहा, यात्रा की शुरुआत में मैं अपनी राजनैतिक पार्टी की घोषणा करना चाहता हूं। इस यात्रा से वह यथास्थिति को चुनौती देने का इरादा रखते हैं, जो कुछ समय से तमिलनाडु की राजनीति को तोडऩे का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरे विचार और काम लोगों की एक सामुहिक आवाज को बुलंद करना है। उन्होंने कहा कि लोगों की ज़रूरतों और परेशानियों को समझने के लिए वह लोगों से मिलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह दौरा न तो किसी विद्रोह के लिए है और न ही ग्लैमर के लिए भीड़ जुटाने के लिए। यह एक खोज यात्रा है।
     इससे पहले उन्होंने एक तमिल मैगजीन के लिए लिखे जाने वाले अपने सप्ताहिक कॉलम में उन्होंने लिखा, जिन लोगों ने पैसे दिए हैं, मैं उनके पैसे लौटा रहा हूं। पार्टी बनने और उसके नामकरण से पहले ही मैं फंड्स लूं, तो ये गैरकानूनी होगा। उन्होंने कहा कि पहले पार्टी बनेगी। उसका नाम रखा जाएगा उसके बाद ही फंड लिया जाएगा।
    लेख में कमल हासन ने ये भी साफ किया है कि इसका मतलब यह नहीं हुआ कि मैं राजनीति में आने के अपने फैसले से यूटर्न ले रहा हूं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि वो पार्टी के लिए लोगों से पैसे नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि हमे पहले मजबूत नींव बनाने की जरूरत है, ताकि मेरे बाद भी यह आंदोलन चलता रहे। यह सिर्फ सीट के लिए नहीं है, बल्कि मेरी इच्छा में तमिलनाडु का विकास प्रथम है। (न्यूज18)
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    काला धन :1 लाख 20 हजार कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करेगी सरकार
    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को करीब सवा लाख और कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की। काले धन के खिलाफ लड़ाई के तहत सरकार विभिन्न नियमों का पालन नहीं करने वाली इन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है।
    केंद्र सरकार इससे पहले करीब 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण पहले ही रद्द कर चुकी है। वहीं इन कंपनियों से जुड़े 3.09 लाख निदेशकों को अयोग्य घोषित किया गया है। सरकार ने पिछले सप्ताह एक समीक्षा बैठक की थी। इसमें पहले जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया था, उनके खिलाफ की गई कारवाई की समीक्षा की गई। उसी बैठक में 1.20 लाख और कंपनियों का पंजीकरण रद्द करने का फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कॉरपोरेट मामलों के मंत्री पीपी चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिकॉर्ड से हटाई गई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करें।    
    मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी कि विभिन्न नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर करीब 1.20 लाख कंपनियों का नाम भी रिकॉर्ड से हटाया जाएगा। दिसंबर 2017 तक विभिन्न नियमों का पालन नहीं करने पर सवा दो लाख कंपनियों का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है। अवैध धन के प्रवाह को रोकने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। 
    एनसीएलटी को भेजे गए 1157 मामले
    मंत्रालय ने बयान में कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास पंजीकरण रद्द कंपनियों की बहाली के 1,157 मामले भेजे गए हैं। एनसीएलटी ने इनमें से 180 कंपनियों की बहाली पर विचार का आदेश दिया है। इन 180 में से 128 कंपनियों की बहाली संबंधित कंपनी पंजीयकों द्वारा की जा चुकी है। निदेशकों को अयोग्य घोषित किए जाने से संबंधित 992 मामले विभिन्न हाईकोर्ट में हैं। मंत्रालय ने कहा कि इनमें से 190 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। 
    सख्ती के बाद नियमों का अनुपालन बढ़ा 
    कॉरपोरेट मामलों के मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि पंजीकरण रद्द करने और निदेशकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कंपनियों द्वारा नियमों का अनुपालन बढ़ रहा है। ऐसे में विलंब पर माफी योजनाओं के मामलों को भी प्राथिमकता के आधार पर देखने को कहा है, ताकि पात्र कंपनियों को इसका लाभ सुनिश्चित हो सके। एमसीए 21 पर अधिक से अधिक कंपनियां वार्षिक रिटर्न और लेखाजोखा दाखिल कर रही हैं। कंपनी कानून के तहत सभी तरह का ब्योरा एमसीए 21 पोर्टल के जरिए दाखिल किया जाता है। 
    आयकर विभाग का भी कालेधन और कर चोरी पर 
    आयकर विभाग ने कालेधन और कर चोरी पर शिकंजा कसा है। उसने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के दौरान आठ महीने में कुल 2225 मामलों में अभियोजन की कार्रवाई की गई है, इससे पिछले वित्त वर्ष की यह संख्या 784 रही थी। इस तरह से इसमें 184 प्रतिशत की तेजी आई है। इसी तरह से इस अवधि में विभाग ने 1052 मामलों में जांच पूरी की है, जो पिछले वित्त वर्ष के पहले आठ महीने में 575 मामलों की तुलना में 83 प्रतिशत अधिक है।    (लाइव हिन्दुस्तान)
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    जल्लीकट्टू के दौरान भड़के सांड, 3 की मौत
    तमिलनाडु। तमिलनाडु में दो अलग-अलग घटनाओं में सांडों को काबू में करने वाले पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू और मंजू विरट्टू के दौरान मंगलवार को तीन व्यक्तियों की मौत हो गई।
    इन खेलों को आयोजन पोंगल त्योहार के हिस्से के तौर पर किया गया। सांडों को काबू करने का खेल जल्लीकट्टू कहलाता है, जबकि सांडों की दौड़ को मंजू विरट्टू कहा जाता है। कभी-कभी इन दोनों आयोजनों को जल्लीकट्टू ही कहा जाता है।
    कुछ साल पहले इसे प्रतिबंधित करने के बाद ये खेल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था। पिछले साल इस पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ रायभर में प्रदर्शन हुए थे और राय सरकार को खेल को फिर से शुरू करने के लिए अध्यादेश लाना पड़ा था।
    राय के आलंगाल्लुर समेत कई स्थानों पर जल्लीकट्टूू का आयोजन हुआ। शिवगंगई जि़ले के सिरावायल में सांडों की दौड़ मंजू विरट्टू देख रहे दो लोगों की मौत हो गई। इस दौड़ में 77 बैलों ने हिस्सा लिया था।
    स्पर्धा के दौरान सजे-धजे सांडों को हालांकि निर्धारित रास्ते से ही दौड़ाया जाता है, लेकिन कभी-कभार ये सांड दर्शकों की भीड़ में घुस जाते हैं और उन्हें निशाना बनाते हैं। सिरावायल में भी सांड दर्शकों के बीच घुस गए और लगभग 60 लोगों घायल कर दिया। इस घटना में गंभीर रूप से घायल रामानाथन (45) और कासी (45) की मौत हो गई। 
    सूत्रों के मुताबिक आयोजकों ने जल्लीकट्टू के लिए पुलिस से इजाज़त ली थी और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम भी किए गए थे। पुलिस घटना की जाँच कर रही है। एक अन्य घटना में तिरुचिरापल्ली जि़ले के आवरंगाडू में जल्लीकट्टू के दौरान एक भड़के हुए बैल ने सोलई पांडियन (25) नाम के एक व्यक्ति को मार डाला और 70 से अधिक लोगों को घायल कर दिया। (बीबीसी)

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Posted Date : 17-Jan-2018

  • पटना। बिहारी में दही-चूड़ा पार्टी की सियासी परिपाटी सी चल पड़ी है। इस साल बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी के नेताओं ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा का भोज दिया है। यह सिलसिला अभी तक जारी है। मंगलवार (16 जनवरी) को बीजेपी के बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पटना में दही चूड़ा की पार्टी दी थी, इसके लिए बिहार बीजेपी के कई नेताओं को न्योता दिया गया था, लेकिन बिहारी बाबू की पार्टी में कोई भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता नहीं पहुंचा। पीएम नरेंद्र मोदी पर कई मौकों पर हमला कर चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने संसदीय क्षेत्र के विधायकों, पटना के मेयर, डिप्टी मेयर, भाजपा के जिलाध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों को न्योता दिया था। पर बीजेपी नेताओं ने इस पार्टी अघोषित बायकॉट कर दिया। शत्रुघ्न सिन्हा की पार्टी में डिप्टी मेयर विनय कुमार पप्पू के अलावा कोई नेता नहीं आया। पटना से बीजेपी के सांसद ने आयकर चौराहा पर स्थित गार्डिनियर अस्पताल परिसर में पार्टी का आयोजन किया था। खास बात यह है कि शॉटगन ने इस कार्यक्रम में अपनी ही तरफ से पार्टी के चारों विधायकों का बैनर लगाया था। यहां पर बीजेपी विधायक नंदकिशोर यादव, संजीव चौरसिया, अरुण सिन्हा और नितिन नवीन की तस्वीरें लगी हुई थी लेकिन इनमें से कोई भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचा। (जनसत्ता)

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Posted Date : 17-Jan-2018

  • चेन्नई, 17 जनवरी । तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीति में उतरने और पार्टी बनाकर वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लडऩे के फैसले के 15 दिन बाद हुए एक सर्वे में उन्हें निराशा हाथ लगी है। इंडिया टुडे और कार्वी के ऑपिनियन पोल के मुताबिक अगर राज्य में मध्यावधि चुनाव हुए तो 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में उन्हें मात्र 33 सीटें मिलेंगी। सर्वे के अनुसार रजनीकांत को सीटें कम जरूर मिलेंगी, लेकिन वह किंगमेगर साबित हो सकते हैं। पोल के नतीजों पर अगर डालें तो राज्य में रजनीकांत की पार्टी को मात्र 16 फीसदी वोट मिलेंगे। रजनीकांत ने अभी अपने पार्टी के नाम की घोषणा नहीं की है। पोल में डीएमके को लाभ होता दिखाया गया है। मई 2011 से सत्ता से बाहर डीएमके को सर्वे में 130 सीटें मिलती दिख रही हैं। उसे करीब 34 फीसदी पॉप्युलर वोट मिले जो रजनीकांत की पार्टी से दोगुना है। 
    सर्वे से पता चला है कि सत्ता की दौड़ में आगे चल रही डीएमके को हालांकि मई 2016 के विधानसभा चुनाव में मिले कुल वोट में से 4 फीसदी का नुकसान हो सकता है। इस चुनाव में डीएमके को 98 सीटें मिली थीं। सर्वे में सबसे ज्यादा नुकसान एआईएडीएमके को होता दिख रहा है। अपनी करिश्माई नेता जे जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके को मात्र 68 सीटें मिलती दिख रही हैं। 
    एआईएडीएमके को वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 67 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। अगर आज चुनाव हों तो उसे करीब 26 फीसदी पॉप्युलर वोट मिलेंगे। एआईएडीएमके को 15 प्रतिशत वोटों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीएम पद की दौड़ में रजनीकांत की अपेक्षा डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन सबसे आगे चल रहे हैं। 
    उन्हें सर्वे में 50 फीसदी लोगों ने अपना सीएम माना, वहीं रजनीकांत 17 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वर्तमान डेप्युटी सीएम ओ पन्नीरसेल्वम को 11 फीसदी लोगों का समर्थन मिला है। मजेदार बात यह है कि एक और तमिल फिल्मों के सुपर स्टार और राजनीति में कदम रखने जा रहे ऐक्टर कमल हासन को मात्र 4 फीसदी लोगों ने सीएम पद के योग्य माना है। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 16-Jan-2018
  • अजय उमट, वरिष्ठ पत्रकार
    अहमदाबाद, 16 जनवरी । विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगडिय़ा का इलाज अहमदाबाद के चंद्रमणि अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के डॉक्टर रूप कुमार अग्रवाल ने बताया, 108 नंबर की इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा तोगडिय़ा को बेहोशी की हालत में अस्पताल लेकर आई थी, उनका शुगर लेवल काफी नीचे थे। तोगडिय़ा फिलहाल बोलने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन खतरे से बाहर हैं।
    राजस्थान की गंगापुर कोर्ट ने दंगे के एक मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रमुख डॉ. प्रवीण तोगडिय़ा के खिलाफ समन जारी किया था। कई बार जमानती वॉरंट जारी होने के बाद भी वो कोर्ट में हाजिर नहीं हुए जिसके बाद कोर्ट ने गैर-जमानती वॉरंट जारी किया था।
    इसके बाद राजस्थान पुलिस सोमवार को अहमदाबाद के सोला पुलिस स्टेशन उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी, लेकिन वह घर पर नहीं मिले और पुलिस वापस चली गई।
    इसके बाद दोपहर ढाई बजे पता चला कि जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त तोगडिय़ा गुम हो गए हैं और वह किसी दाढ़ी वाले शख्स के साथ ऑटो-रिक्शा में जाते दिखे थे। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और दो-तीन मुस्लिम ऑटो-रिक्शावालों को पीटा भी।
    साढ़े आठ बजे इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा को फोन आया कि कोतरपुर के पास एक शख्स बेहोशी की हालत में है। शाही बाग इलाके के चंद्रमणि अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों ने बताया है कि उनकी हालत खतरे से बाहर है। पुलिस ने अभी कोई बयान नहीं जारी किया है क्योंकि डॉक्टरों ने पुलिस को उनका बयान नहीं लेने दिया है।
    15 दिनों में कई नोटिस
    पिछले 15 दिनों में मैं देख रहा हूं कि उनके खिलाफ वॉरंट जारी होने के कई मामले सामने आए हैं। 1998 के एक मामले में कोर्ट ने 2017 में संज्ञान लेकर उनके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी किया था जिसमें वह पेश हुए।
    इसके बाद गंगापुर का वॉरंट आया और हरियाणा से भी उनके खिलाफ एक वॉरंट आ सकता है। तो पुराने मामले उनके खिलाफ खुल रहे हैं।
    यह संयोग भी हो सकता है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि तोगडिय़ा की बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अनबन हो चुकी है। वीएचपी के कार्यकारी प्रमुख के चुनाव में जब वह लड़े तो कहा जाता है कि संघ और बीजेपी का एक गुट मानता था कि उन्हें चुनाव नहीं लडऩा चाहिए।
    लेकिन भुवनेश्वर की मीटिंग में उन्होंने शक्ति प्रदर्शन करते हुए दिखाया कि वीएचपी के 70 फीसदी लोग उनके साथ हैं। आरएसएस ने इसके बाद उन्हें तीन साल के लिए कार्यकारी प्रमुख बना दिया।
    कहा जाता है कि तोगडिय़ा के बीजेपी नेताओं से काफी वैचारिक मतभेद हैं। तोगडिय़ा राम मंदिर से लेकर धारा 370 और समान आचार संहिता तक पर काफी मुखर होकर बोलते हैं। पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्होंने कहा था कि राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार को एक बिल संसद में लेकर आना चाहिए। छह मुद्दों पर उन्होंने मोदी सरकार को चुनौती देने की कोशिश की थी।
    राम मंदिर के अलावा इन मुद्दों में रोजगार, किसान संबंधी मुद्दे भी थे। उनका कहना है कि तीन तलाक पर ही केवल मोदी सरकार को मुखर नहीं होना चाहिए। इसके अलावा वह सार्वजनिक रूप से काफी मुखर रहे हैं।
    तोगडिय़ा अब इतने मजबूत नहीं हैं कि उनसे डरा जाए। लेकिन वह भी शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी जैसे बीजेपी नेताओं की फेहरिस्त में हैं जो सरकार को चुनौती देते रहते हैं। साथ ही वह सरकारी नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। बीजेपी में उनका बहुत बड़ा प्रभाव हो ऐसा दिखता नहीं है।
    (बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद से बातचीत पर आधारित। ये उनके निजी विचार हैं)(बीबीसी)

     

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Posted Date : 16-Jan-2018
  • अहमदाबाद, 16 जनवरी। सोमवार को गायब हुए विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगडिय़ा मंगलवार सुबह मीडिया के सामने आए। करीब 11 घंटे तक गायब रहने के बाद तोगडिय़ा सोमवार देर शाम बेहोश हालत में मिले थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे एनकाउंटर की साजिश हो रही है, मेरी आवाज को दबाया जा रहा है। तोगडिय़ा ने कहा कि मैं किसी से डर नहीं रहा हूं, लेकिन मुझे डराने की कोशिश हो रही है।
    तोगडिय़ा ने कहा कि कुछ समय से मेरी आवाज दबाने का प्रयास होता रहा, मैं हिंदू एकता के लिए प्रयास करता रहा। कई वर्षों से हिंदुओं की जो आवाज थी, राम मंदिर-गोहत्या का कानून, कश्मीरी हिंदूओं को बसाने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रवीण तोगडिय़ा काफी भावुक हो गए।
    तोगडिय़ा ने कहा कि मेरे विरुद्ध कानून भंग के केस लगाए गए हैं, मुझे डराने की कोशिश की जा रही है। मकर संक्रांति के दिन राजस्थान पुलिस का काफिला मुझे गिरफ्तार करने के लिए आया था, यह हिंदुओं की मेरी आवाज दबाने का हिस्सा है।
    उन्होंने कहा कि मैंने 10 हजार डॉक्टरों को तैयार किया, लेकिन सेंट्रल आईबी ने उन्हें भी डराने की कोशिश की। कल मैं मुंबई में भैयाजी जोशी के साथ कार्यक्रम कर रहा था, मैंने पुलिस को ढाई बजे आने को कहा पर सुबह पूजा कर रहा था तभी एक व्यक्ति आया तो कहा कि मेरा एनकाउंटर करने की बात हो रही है।
    उन्होंने बताया कि जब मैंने अपने कमरे से बाहर देखा तो दो पुलिस वाले खड़े थे, मुझे लगा कि कुछ दुर्घटना हुई जो होगा तो होगा पर पूरे देश में जो परिस्थित खड़ी होगी वो ठीक नहीं होगा। तोगडिय़ा बोले कि फिर मैं वही कपड़े में पैसा का पॉकेट लेकर निकला था, नीचा उतरा ऑटो रिक्शा रोकी फिर जो कार्यकर्ता खड़े थे उनके साथ निकल गया।
    तोगडिय़ा बोले कि मैंने रास्ते में ही राजस्थान के सीएम, गृह मंत्री की ओर से संपर्क करवाया। लेकिन दोनों ने बताया कि ये झूठ है उसके बाद ही मैंने अपना फोन बंद कर दिया था ताकि मेरा फोन ट्रेस ना हो सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पूछताछ पर पता चला कि वे अरेस्ट वारंट लेकर आए हैं। राजस्थान में वकील से संपर्क कर हाईकोर्ट में वारंट कैंसल की मांग की। मैं जयपुर जाकर कार्यकर्ताओं के साथ कोर्ट में जा रहा था। रास्ते में कुछ गड़बड़ हुआ और बीमार हो गया।
    तोगडिय़ा बोले कि डॉक्टर कह रहा है कि लंबे समय से बेहोशी के कारण पल्स अनियमित है। जब डॉक्टर अनुमति देंगे, जयपुर जाकर न्यायालय के सामने जाकर आत्मसमपर्ण करूंगा। मेरी गुजरात और राजस्थान पुलिस से शिकायत नहीं है। गुजरात पुलिस से सिर्फ यह कहना है कि मेरे रूम का सर्च वारंट क्यों करने जा रहे थे, क्या मैं क्रिमिनल हूं क्या?
    रोते हुए तोगडिय़ा ने कहा कि मेरे पास सिर्फ तीन संपत्ति है। एक भगवान का बैग, एक कपड़े की और एक पुस्तक की। इसलिए मैं क्राइम ब्रांच को प्रार्थना करूंगा, आप सब हमारे हैं। राजनीतिक दबाव में आने का काम न करो। मैं कानून का पालन कर कोर्ट जाऊंगा, जीवन रहे या नहीं रहे। राम मंदिर, गौ रक्षा और किसान युवाओं के लिए अकेला लडऩा पड़े तो लड़ूंगा। उन्होंने कहा कि मेरी पास संपति, सत्ता नहीं है, मेरी आवाज दबाने का प्रयास न हो।
    तोगडिय़ा सोमवार सुबह से ही लापता थे, करीब 11 घंटे बाद वह अचेत अवस्था में मिले थे। उन्हें चंद्रमणि अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह जैसे ही तोगडिय़ा के गायब होने की खबर उड़ी तो एक तरह से हड़कंप मच गया। उनके समर्थक गुस्से में आ गए और कई जगह प्रदर्शन भी किया। तोगडिय़ा को राजस्थान या गुजरात पुलिस के द्वारा गिरफ्तार करने की खबर से अहमदाबाद में हंगामा भी हुआ था।
    इससे पहले, तोगडिय़ा की कथित गिरफ्तारी पर सोमवार को अहमदाबाद में हंगामा हुआ। वीएचपी कार्यकर्ताओं ने उनके गायब होने के विरोध में अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत, राजकोट, मोरबी और नर्मदा में विरोध प्रदर्शन किया। वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है, पूरे देश में कार्यकर्ता तोगडिय़ा को लेकर चिंतित थे। किसी को पता नहीं था कि वह कहां गए। हमने सभी कार्यकर्ताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की थी।
    वीएचपी कार्यकर्ताओं का कहना था कि राजस्थान पुलिस तोगडिय़ा को गिरफ्तार करके ले गई थी। अहमदाबाद के जॉइंट पुलिस कमिश्नर जेके भट्ट ने कहा था कि तोगडिय़ा को न गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया और न राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया। राजस्थान पुलिस ने भी तोगडिय़ा की गिरफ्तारी से इंकार किया था। वहीं, अहमदाबाद पुलिस ने कहा था कि तोगडिय़ा की तलाश की जा रही थी।
    तोगडिय़ा का इलाज कर रहे डॉ. आरएम अग्रवाल ने कहा है कि तोगडिय़ा को बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया था। उनकी शुगर कम हो गई थी और इसी वजह से वह बेहोश हो गए थे। उन्होंने बताया कि तोगडिय़ा को एंबुलेस अस्पताल लेकर आई थी। डॉ.अग्रवाल ने कहा है कि अब उनकी हालत पहले से बेहतर है।
    अहमदाबाद पुलिस क्राइम ब्रांच ने सोमवार शाम को इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें कहा गया था कि प्रवीण तोगडिय़ा की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक तोगडिय़ा विश्व हिंदू परिषद के मुख्यालय से सुबह 10.45 पर निकले थे। वह एक रिक्शे से निकले थे।
    पुलिस के मुताबिक तोगडिय़ा खुद ही रिक्शे में बैठकर वीएचपी दफ्तर से निकले थे। उन्होंने अपने सुरक्षा कर्मी को भी साथ आने से मना कर दिया था। पुलिस से जब पूछा गया कि क्या तोगडिय़ा अंडरग्राउंड हो गए तो उन्होंने कहा, हम यह नहीं कह रहे हैं, लेकिन इतना साफ है कि वह अकेले ही रिक्शे में बैठकर निकले हैं।
    अहमदाबाद पुलिस का कहना था कि पाडली ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज तलाशी जा रही हैं। यहीं तोगडिय़ा को आखिरी बार देखा गया था। पुलिस ने कहा था कि उन्हें इस मामले में तोगडिय़ा के परिवार की ओर से अब तक गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
    जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस को उनकी तलाश एक पुराने केस के सिलसिले में थी। राजस्थान पुलिस के डीजीपी ओपी गलहोत्रा ने कहा है कि तोगडिय़ा की गिरफ्तारी नहीं हुई है। राजस्थान के गंगापुर शहर में प्रवीण तोगडिय़ा के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसमें तोगडिय़ा को कोर्ट के सामने पेश होना था, लेकिन उनकी पेशी नहीं हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने तोगडिय़ा के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। (आज तक) 

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Posted Date : 16-Jan-2018
  • प्रमिला कृष्णन
    चेन्नई, 16 जनवरी। दक्षिणी भारतीय राज्य तमिलनाडु के मुदरै जिले की रहने वाली सेल्वरानी कनगारासू ने फैसला किया है कि वो कभी शादी नहीं करेंगी। ऐसा करने के पीछे उनके पास एक बड़ी वजह है। मेलूर गांव में रहने वाली 48 साल की सेल्वरानी ने कम उम्र में ही फैसला ले लिया था कि वो एक सांड को पालेंगी, जो बाद में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में हिस्सा ले सके।
    सेल्वरानी को लगा कि ऐसा कर के वो अपने परिवार की परंपरा को बचा सकती हैं। उनके परिवार के लोग इस त्योहार के लिए सांड पालते हैं। सेल्वरानी कहती हैं कि उनके पिता कनगरासू और दादा मुत्थुस्वामी का मानना था कि जल्लीकट्टू के सांड को पालना बच्चे की परवरिश करने जैसा है। सेल्वरानी बताती हैं कि जब तीसरी पीढ़ी की बारी आई तो मेरे दोनों भाइयों के पास सांड की देखरेख के लिए समय नहीं था। परिवारों में सांडों के मालिक पुरुष ही होते हैं लेकिन देखा जाए तो महिलाएं ही सांडों को चारा देती हैं, उनके रहने की जगह को साफ करती हैं। महिलाएं ही उनके स्वास्थ्य का खयाल रखती है और उन पर नजर रखती हैं।
    वो कहती हैं कि मेरे भाइयों के परिवारों के लिए यह सब करना संभव नहीं था। तो मैंने उनसे कहा कि ये जिम्मेदारी मुझे सौंप दी जाए। हालांकि वो शांत थीं लेकिन उनके चेहरे पर कम उम्र में मर्दों के खेल में उतरने की खुशी साफ झलक रही थी। वो अपने पुराने दिनों की बात को याद करते हुए कहती हैं कि मैं अपना परिवार और अपने जुनून यानी सांड पालने के बीच में खुद को बांटना नहीं चाहती थी। सो मैंने दूसरे विकल्प को चुना। मैं चाहती थी कि हमारे परिवार की परंपरा आगे बढ़े।
    वो कहती हैं कि मैंने जो किया उस पर मुझे केवल गर्व नहीं है बल्कि मैं बहुत खुश हूं कि मेरा परिवार बस मेरा ये सांड है। ये बड़े शरीर वाला है और मैदान में उतरने 

    पर एक गुस्सैल जानवर बन जाता है लेकिन ये बहुत प्यारा है।
    भारतीय समाज में जो महिलाएं शादी नहीं करने का निर्णय लेती हैं अक्सर उनको अलग नजरों से देखा जाता है। सेल्वरानी के परिवार और रिश्तेदार उनके अकेले रहने के फैसले से खफा भी हैं लेकिन आखिर में उन्होंने उनके फैसले को अपना लिया है। यहां तक कि मेलूर गांववासी भी सेल्वरानी के फैसले और गरीबी के बावजूद भी सांड पालने के उनकी इच्छा की तारीफ करते हैं।
    जब दुबली-पतली सेल्वरानी अपने हाथों से अपने सांड के पैने सींगों को पकड़कर उस काबू करने की कोशिश करती हैं, वो नजारा देखने वाला होता है। सेल्वरानी के सांड के सींग इतने पैने और मजबूत हैं कि पोंगल के जल्लीकट्टू के खेल में ताकतवर से ताकतवर पुरुष को उठा कर फेंक दे।
    सेल्वरानी एक बड़ी-सी मुस्कान के साथ कहती हैं कि रामू की देखभाल करना एक बच्चे की देखभाल करने जैसा है। सेल्वरानी खेतों में मजदूरी करने का काम करती हैं। जिस दिन काम होता है, वो एक दिन में करीब दो सौ रुपये तक कमा लेती हैं।
    वह अपनी कमाई का एक-एक पैसा जोड़ती हैं ताकि अपने सांड, अपने रामू के लिए चारे की व्यवस्था कर सकें। वो प्यार से रामू को आवाज देती हैं कि आ रही हूं रामू, तुम्हारा खाना तैयार है।
    कोई आम सांड होता तो उसके लिए थोड़ी घास और पुआल से काम चल जाता। लेकिन रामू जैसे खिलाड़ी सांड के लिए खाने में नारियल, खजूर, केले, तिल, मूंगफली तेल केक (खळ), बाजरा और चावल शामिल किया जाता है।
    सेल्वरानी गर्व के साथ बताती हैं कि रामू तंदुरुस्त रहे और ताकतवर बन सके इसके लिए उसके हर दिन के खाने का खर्च 500 रुपये है। ऐसे भी कुछ दिन होते हैं मुझे बस दिन में एक वक्त का ही खाना मिलता है लेकिन मैं रामू के खाने के लिए पैसे बचा लेती हूं, मुझे थकान नहीं होती, मुझे अच्छा लगता है।
    जल्लीकट्टू आयोजन समिति के सदस्य गोविंदराजन कहते हैं कि खेल में उतरने के बाद एक ताकतवर और चुस्त सांड ही चुनौती देने वालों को हरा सकता है।
    वो बताते हैं कि जब दर्जनों युवा सांड को घेर लेते हैं और हर कोशिश करते हैं कि वो जीत के लिए उसके कूबड़ को पकड़ कर 10 फीट तक आगे जा सकें, तो ऐसे में सांड की कोशिश होती है कि शुरू से आखिर तक लगभग 30 फीट के उस फासले में वो किसी को भी उसके कूबड़ को पकडऩे न दे।
    सेल्वरानी के रिश्तेदार राजकुमार उनसे काफी प्रभावित हैं और उन्होंने भी बैल की देखरेख करने में उनकी मदद करना शुरू कर दिया है। वैसे तो जल्लीकट्टू साल में एक ही बार पोंगल के दौरान खेला जाता है लेकिन सेल्वरनी को पूरे साल अपने रामू की देखभाल करनी होती है।
    वो कहती हैं कि मैं रामू को गांव के तलाब में ले कर जाती हूं और उसे तैरने के लिए उत्साहित करती हूं ताकि उसके घुटने मजबूत हो सकें। मेरा भतीजा राजकुमार रामू को वॉक पर ले कर जाता है और उसे सिखाता है कि कैसे चुनौती देने वालों को हराया जाए।
    वो कहती हैं कि जल्लीकट्टू खेल के शुरू होने से पहले मुझे जानवरों के डॉक्टर से जा कर रामू के फिटनेस का सर्टिफकेट लेना होता है ताकि वो इस खेल में हिस्सा ले सके।
    सेल्वरानी याद करती हैं कि जब पहली बार रामू एक चुनौती में हार गया था तो वो घंटे भर तक रोया था। वो कहती हैं कि हम साल 2009 में उसे पहली बार जल्लीकट्टू के खेल में ले कर गए थे। उसे मेरे पास आए केवल तीन ही महीने हुए थे। वो शायद हार के बाद काफी दुखी हो गया था। उसकी आंखों से लगातार एक घंटे तक आंसू बहते रहे थे।
    मैंने उसको समझाने की कोशिश की। उसके बाद से रामू ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बीते पांच वर्षों में हर बार खेल में रामू जीतता रहा है। रामू ने बीते कुछ वर्षों में सात बार जल्लीकट्टू के खेल में हिस्सा लिया है और उनमें से पांच बार उसने जीत हासिल की है।
    रामू ने जो इनाम जीते उनमें घर में इस्तेमाल होने वाला सामान, सिल्क की साड़ी और सोने का सिक्का शामिल है। वो कहती हैं कि रामू मेरे लिए मेरे बेटा है। उसने मेरे लिए कई इनाम जीते हैं लेकिन सबसे जरूरी बात ये है कि उसने गांव में मेरे परिवार के लिए सम्मान जीता है।
    52 साल की इंदिरा सेल्वराज, सेल्वरानी की रिश्तेदार हैं। वो कहती हैं कि खेल में बार-बार जीतने के बाद कई लोगों ने रामू को खरीदना चाहा और उसके लिए लोग एक लाख से भी अधिक रुपये देने के लिए तैयार थे, लेकिन सेल्वरानी ने रामू को बेचने के बारे में नहीं सोचा।
    वो कहती हैं कि वो रामू का ख्याल रखना चाहती है। रामू को खेल के लिए तैयार करना जैसे उसकी जिंदगी का मकसद बन गया है। हम उसे एक लाख रुपये के लिए भी रामू को बेचने के लिए नहीं मना सके। इंदिरा कहती हैं कि हम अब समझते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए उसके जूनून की कोई कीमत नहीं हो सकती। (बीबीसी)

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Posted Date : 16-Jan-2018
  • राबड़ी देवी को लोन देने के मामले में दामाद राहुल को भेजा समन
    पटना, 16 जनवरी । मीसा के पति शैलेश के बाद लालू यादव के दूसरे दामाद राहुल यादव भी ईडी के निशाने पर आए हैं। ईडी ने राहुल यादव को पूछताछ का समन जारी किया है। ईडी इसी सप्ताह राहुल यादव से पूछताछ करेगी। राहुल यादव पर अपनी सास और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबडी देवी को एक करोड़ रुपये का लोन देने का आरोप है। बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी ने इन्हीं पैसों से पटना में विवादित जमीन खरीदी थी। प्रवर्तन निदेशालय राहुल यादव से एक करोड़ रुपये का सोर्स जानना चाहता है।
    राहुल यादव पूर्व समाजवादी विधायक जितेद्र यादव के बेटे और लालू की बेटी रागिनी के पति हैं। इससे पहले आयकर विभाग ने दिल्ली से पटना तक लालू प्रसाद यादव के परिवार की कई बेनामी संपत्तियां जब्त की थीं, जिनमें लालू की पत्नी राबड़ी देवी, उनके पुत्र तेजस्वी यादव, पुत्री मीसा भारती, दामाद शैलेश कुमार और लालू की अन्य दो बेटियों रागिनी और चंदा यादव की बेनामी संपत्तियां शामिल हैं। जब्त की गई संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 175 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि दस्तावेजों में इनकी कीमत महज 9.32 करोड़ रुपये दिखाई गई है। (एनडीटीवी)
     

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Posted Date : 15-Jan-2018
  • चेन्नई, 15 जनवरी । फिल्म छोड़कर राजनीति में आ चुके दक्षिण भारतीय अभिनेता कमल हासन 26 जनवरी से पूरे तमिलनाडु का दौरा शुरू करेंगे। इसके अलावा वे इस महीने एक मोबाइल एप्लीकेशन 'मय्यम व्हिसिलÓ भी जारी करने वाले हैं। इस एप पर व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार की शिकायतों सहित कमल हासन के बारे में प्रतिक्रियाएं दी जा सकेंगी। उनसे बात की जा सकेगी।
    कमल ने अपने राज्यव्यापी दौरे का ऐलान करते हुए बताया कि 'आनंद विकटनÓ (तमिल पत्रिका जिसमें वे साप्ताहिक कॉलम लिखते हैं) के अगले अंक में इस बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस पत्रिका में अपने पिछले कॉलम में कमल ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरसितारा रजनीकांत के साथ काम करने की भी इच्छा जताई है। रजनीकांत ने भी बीते 31 दिसंबर को अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा की है।
    हालांकि दोनों अभिनेता-नेता एक साथ आ पाते हैं या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि कमल हासन तमिलनाडु की मौजूदा एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म) सरकार की तीखी आलोचना करते रहे हैं। वे यह भी साफ कह चुके हैं कि उनका रंग 'भगवा नहींÓ है। इस तरह उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से भी दूर रहने का संकेत दिया है। पर रजनीकांत के साथ भाजपा और प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की नजदीकियां जगजाहिर हैं।
    हालांकि एआईएडीएमके की खिलाफत रजनीकांत ने भी की है। मगर फिलहाल उन्होंने मौजूदा सरकार के विरुद्ध कोई तीखी बात नहीं कही है। अलबत्ता राजनीति की पारी शुरू करने की घोषणा के बाद वे डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि से आशीर्वाद लेने उनके घर जा चुके हैं। और 'राजनीतिक क्रांतिÓ शुरू करने की बात भी कह चुके हैं। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 15-Jan-2018
  • लखनऊ, 15 जनवरी । बसपा सुप्रीमो मायावती का जन्मदिन एक दौर में काफी धूमधाम से मनाया जाता रहा है, लेकिन अब सादगी के साथ। मायावती का आज 62वां जन्मदिवस है जिसे पार्टी जन कल्याणकारी दिवस के रूप में मना रही है। इस मौके पर वो अपने जीवन पर आधारित किताब के 13वें संस्करण मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा का विमोचन करेंगी। इसे ब्लू बुक का नाम दिया गया है।
    मायावती ने अपने 62वें जन्मदिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा वार किया है। उन्होंने कहा, हर हर मोदी, घर घर मोदी वाले नरेंद्र मोदी इस बार गुजरात में बेघर होते होते बचे। मायावती ने कहा कि गुजरात में अगर अगर दलितों की 18 से 20 फीसदी वोट होता तो फिर बाल बाल नहीं बच पाते। ऊना कांड ही मोदी के बेघर कर देता अगर दलितों के वोट कम नहीं होते ।
    मायावती ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार संविधान और कानून बदलना चाहती है। 

    मायावती ने कहा कि आजादी के बाद से कांग्रेस और बीजेपी ने हर वर्ग को नुकसान पहुंचाया है। आज देश के हर राज्य में सांप्रदायिक और जातिवाद का माहौल बनाया जा रहा है।
    मायावती ने कहा कि मेरे जन्मदिन को बीएसपी के लोग देश भर में बसपा सरकार के रहते हुए सरकार द्वारा भी हमारे संत, गुरुओं की सर्वजन हिताय और सर्वजन सख्य के मूवमेंट को देखते हुए जन कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाते रहे है। बसपा द्वारा ये ऐसी समाज सेवा है जो सत्ता में ना रहने पे भी जारी रहती है।
    मायावती ने कहा कि बसपा एक अकेली ऐसी पार्टी है जो दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम और धार्मिक अल्पसंख्यकों के मसीहा बाबा साहेब के बताए रास्ते पे चलकर आगे बढ़ रही है।
    अम्बेडकर वादी पार्टी बसपा को पूंजीवादी सोच वाली पार्टियां बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती है। पहले कांग्रेस एंड कंपनी और बीजेपी एंड कंपनी ने हमे खत्म करने की कोशिश की है।
    मायावती ने कहा, मैं खासकर कांगे्रस पार्टी से ये जानना चाहती हूं कि बाबा साहेब को भारत रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया था। इसके अलावा मंडल आयोग की शिफारिशों को लागू क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा, भाजपा एंड कम्पनी के लोगों की सरकार के चलते भी इस सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था को निष्क्रिय करके लोगों को बेरोजगार बना रहे हैं।
    मायावती ने बीजेपी पर साधा निशाना कहा कि बाबा साहब को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया था। इसके अलावा मंडल कमीशन की सिफारिशों का बीजेपी ने विरोध किया था। उन्होंने कहा कि समाज के दबे कुचले लोगों को आज भी बराबरी का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।  इन वर्गों को अपने पैरों में न तो बीजेपी खड़ा कर पायेगी और न ही कांग्रेस।
    मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी दलित और ओबीसी के लिए मे संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। बीजेपी और आरएसएस हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में ईवीएम पर बड़ा घोटाला करके हमारी पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया गया है। इसके आलावा सहारनपुर की घटना में भी हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन हमारी पार्टी की सूझबूझ से ऐसा नहीं कर पाए।
    मायावती ने कहा कि मुझे राज्यसभा में बोलने नहीं दिया गया जिसके चलते हमने इस्तीफा दिया। इसी तरह 1951 में बाबा साहब को भी परेशान किया गया था जिसके चलते उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे इस्तीफे से लोगो को अब समझ आ गया है जिसके चलते स्थानीय निकाय चुनाव में बड़ी सफलता मिली। (आज तक)

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Posted Date : 14-Jan-2018
  • लखनऊ, 14 जनवरी। उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने लखनऊ के चौक थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। इस एफआईआर में उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तरफ से धमकी मिली है। वसीम रिजवी को यह धमकी मदरसा शिक्षा को लेकर सवाल उठाए जाने के मामले में मिली है।
    उन्हें शनिवार देर शाम फोन पर धमकी दी गई। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने खुद को डी कंपनी का आदमी बताया और उसने धमकी दी। वसीम रिजवी ने दाऊद के खिलाफ नामजद एफआईआर करवाई है। 
    वसीम रिजवी ने बताया, मुझे जिस नंबर से फोन किया गया, वह नेपाल का नंबर था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को दाऊद का आदमी बताया। उसने धमकी दी कि मैं मौलानाओं से माफी मांगू, नहीं तो मुझे और मेरे परिवार को धमाके से उड़ा दिया जाएगा।
    फोन करने वाले ने रिजवी से कहा, शर्म नहीं आ रही मुसलमान  होकर मुसलमानों को मरवाने की बात कर रहे हो। भाई ने कहा कि समझा दो इसलिए समझा रहा हूं।
    वसीम रिजवी के मुताबिक, मैंने फोन करने वाले से पूछा कि कौन भाई? सामने वाले ने कहा कि भाई को नहीं जाने तू, दाऊद भाई। दो मिनट नहीं लगेंगे परिवार को उड़वाने में। अपनी मौत का जिम्मेदार तू खुद होगा। मौलानाओं से माफी मांगो। समझाने के लिए फोन किया है समझ नहीं आ रही तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 13-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 13 जनवरी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जो सवाल उठाए हैं, वो बेहद गंभीर और संवेदनशील हैं और इन्हें ध्यान से देखा जाना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैं समझता हूं कि ये संवेदनशील और अहम मुद्दा है। जजों ने जो मुद्दे उठाए हैं वे बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने सवाल पूछे हैं। गंभीर मामला है, इनको ध्यान से देखा जाना चाहिए। जजों ने जज लोया की मौत का मामला उठाया है, उसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए।
    राहुल गांधी ने कहा कि जिन नागरिकों को सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, वो इस मुद्दे को देख रहे हैं और चाहते हैं कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
    कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के करीब तीन घंटे बाद बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
    पात्रा ने कहा कि न्यायपालिका के जो अंदरूनी विषय होते हैं, उन्हें सड़क पर लाने का प्रयास करना अनुचित है। इस पर घरेलू राजनीति नहीं होनी चाहिए। हमें दुख है कि कांग्रेस पार्टी जिसे भारत की जनता ने चुनाव दर चुनाव खारिज किया है, वो वहाँ अवसर तलाश रही है, जहाँ उसे नहीं करना चाहिए।
    इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन किया। ये चार जज हैं- जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ।
    अपने आवास पर आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के नंबर दो जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा कि हम चारों इस बात पर सहमत हैं कि इस संस्थान को बचाया नहीं गया तो इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र जिंदा नहीं रह पाएगा। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका अच्छे लोकतंत्र की निशानी है।
    चूंकि हमारे सभी प्रयास बेकार हो गए, यहां तक कि आज सुबह भी हम चारों जाकर चीफ जस्टिस से मिले, उनसे आग्रह किया। लेकिन हम अपनी बात पर उन्हें सहमत नहीं करा सके। इसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा कि हम देश को बताएं कि न्यायपालिका की देखभाल करें।
    मैं नहीं चाहता कि 20 साल बाद इस देश का कोई बुद्धिमान व्यक्ति ये कहे कि चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने अपनी आत्मा बेच दी है।
    जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि वे मजबूर होकर मीडिया के सामने आए हैं। से ये पूछने पर कि क्या आप मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाना चाहते हैं, जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि ये देश को तय करना है।
    इसी साल अक्टूबर में मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मिश्र की जगह लेने जा रहे जस्टिस गोगोई ने कहा कि ये देश का कर्ज था जो हमने चुकाया है। यह पूछे जाने पर कि वो क्या मुद्दे थे, जिस पर चीफ जस्टिस से उनके मतभेद थे, जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि इसमें मुख्य न्यायाधीश का कुछ मामलों की सुनवाई को जजों को सौंपना भी शामिल था। (बीबीसी)

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Posted Date : 12-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 12 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में भाजपा की नवगठित सरकार ने भी उत्तर प्रदेश की तरह 'राजनीतिक फायदेÓ के लिए दर्ज मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। ये मुकदमे पिछली कांग्रेस सरकार ने दर्ज करवाए थे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे और सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ चल रहे पांच मामले भी शामिल हैं। ये मामले हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) को जमीन आवंटित करने से जुड़े हैं। इन मामलों में कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2002 के दौरान नियमों को ताक पर रखकर क्रिकेट एसोसिएशन को जमीन आवंटित की थी।
    यह फैसला प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों की एक बैठक में किया गया। इस फैसले के अलावा बैठक में कुछ अन्य अहम फैसले भी हुए जिनके तहत अब राज्य में शराब उद्योग का संचालन करने वाली हिमाचल प्रदेश बेवरेज लिमिटेड (एचपीबीएल) को समाप्त करने निर्णय शामिल है। एचपीबीएल ने पिछले साल से ही काम करना शुरू किया था। इस कंपनी के निर्माण का फैसला पिछली कांग्रेस सरकार ने लिया था और भाजपा के मुताबिक इस कदम के चलते शराब कारोबार में अनियमितताएं देखी जा रही थीं।
    मंत्रिमंडल की यह बैठक किसानों के लिए भी राहत की खबर लाई है। प्रदेश में बड़े स्तर पर पैदा होने वाले नींबू वंश के खट्टे फलों जैसे संतरा, कीनू, गलगल और मालटा के लिए सरकारी खरीद के नए दाम तय किए गए हैं। इनका न्यूनतम समर्थन मूल्य अब 5.50 रुपये से 7 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच तय किया गया है। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 11-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 11 जनवरी । जम्मू-कश्मीर में सेना ऑपरेशन ऑल आउट चला रही है। इसके तहत सेना आतंकियों के सफाए में लगी है। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार के एक विधायक ने इन आतंकियों को शहीद करार दिया है साथ ही अपना भाई भी बताया है। 
    पीडीपी विधायक एजाज अहमद मीर, ने आतंकियों को लेकर दिए बयान में कहा है कि कश्मीर के आतंकी हमारे भाई हैं और वो मर नहीं रहे बल्कि शहीद हो रहे हैं। इनमें से कुछ तो नाबालिग हैं जिन्हें यह भी नहीं पता वो क्या कर रहे हैं।
    अहमद यहीं नहीं रुके और उन्होंने आगे कहा कि हमें उनकी मौत का जश्न नहीं मनाना चाहिए, यह हमारी सामूहिक असफलता है। हमें तब भी दुख होता है जब हमारे जवान शहीद होते हैं। हमें जवानों के साथ ही आतंकियों के परिवारों के साथ भी सद्भावना रखनी चाहिए।
    जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार है और ऐसे में विधायक के इस बयान के बाद भाजपा और केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर आ सकती है। हालांकि एजाज अहमद के बयान से भाजपा ने किनारा किया है और उसे गलत करार दिया है।
    केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पीडीपी विधायक के बयान का विरोध करते हुए कहा है कि अलगाववादी और आतंकी कश्मीर के दुश्मन हैं। खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कह चुकी हैं कि कश्मीर के लोग अमन चाहते हैं। ऐसे में कोई आतंकी किसी के भाई कैसे हो सकते हैं। (एएनआई)

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Posted Date : 11-Jan-2018
  • कोलकता, 11 जनवरी । बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर यानी डी लिट की मानद डिग्री देने पर पेंच फंसा हुआ है। आज हाइकोर्ट के फैसले के बाद ही ये तय हो पाएगा कि ममता को डी लिट की मानद डिग्री दी जाएगी या नहीं? ममता बनजी को डिग्री देने के फैसले का एक पूर्व वाइस चांसलर ने विरोध किया है। उनकी दलील है कि डी-लिट की डिग्री देने की वजह साफ नहीं है। वहीं राज्य सरकार इसे राजनीति से प्रेरित बता रही है।
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कोलकता विश्वविद्यालय से मिलने वाली डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डिलीट) की मानद उपाधि के मामले में आज हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। गुरुवार को ममता बनर्जी को मानद उपाधि दी जानी है। पश्चिम बंगाल विवि के पूर्व वाइस चांसलर रंजू गोपाल मुखोपाध्याय ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि बनर्जी इस डिग्री के लिए अयोग्य है और विवि ने उन्हें यह उपाधि देने का निर्णय मनमाने और उचित तर्क से रहित है।
    वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकता हाईकोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को डी लिट की मानद उपाधि देने के कलकत्ता विवि के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका राजनीति से प्रेरित है। कोलकता विवि कल अपने दीक्षांत समारोह में संस्थान की छात्रा रहीं ममता बनर्जी को डी लिट की उपाधि प्रदान करेगा।
    महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने हाईकोर्ट की एक पीठ के समक्ष कहा कि मानद उपाधि देने का फैसला कोलकता विवि के सीनेट और सिंडिकेट ने किया। पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी शामिल थे।
    उन्होंने कहा कि इस याचिका को जनहित याचिका नहीं मानना चाहिए और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता और विवि के पूर्व प्राध्यापक रंजूगोपाल मुखर्जी ने दावा किया कि उपाधि देने का फैसला मनमाना और अपारदर्शी है।(एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 10-Jan-2018
  • लखनऊ, 10 जनवरी । समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिलहाल कांग्रेस के साथ आगे किसी गठबंधन की संभावना से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता पार्टी संगठन को मजबूत करना है। एक साक्षात्कार में अखिलेश ने कहा, 2019 का चुनाव निश्चित रूप से अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश से निकलने वाला संदेश पूरे देश में जाएगा। इसमें (गठबंधन और सीटों पर माथापच्ची) काफी समय बर्बाद होता है और मैं किसी असमंजस में नहीं रहना चाहता।
    हालांकि अखिलेश ने कहा कि बाद में किसी सही समय पर गठबंधन के बारे में सोचा जा सकता है लेकिन इस समय उनकी प्राथमिकता पार्टी संगठन मजबूत करना है। उनके मुताबिक उनकी राजनीति का स्टाइल अलग है और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ आने में उन्हें परहेज नहीं है।
    सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 2017 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा और सहयोगी दलों में 403 में 325 सीटें जीतीं जबकि सपा 47 पर सिमट गई। उधर, कांग्रेस को बस सात सीटें मिली थीं।(पीटीआई)

     

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Posted Date : 10-Jan-2018
  • मंदसौर, 10 जनवरी। देश में 200 साल पुराने एक युद्ध की बरसी पर भड़की हिंसा की आग अभी शांत ही हुई थी कि भाजपा की एक मंत्री के महर्षि वाल्मिकी को डाकू कह देने से विवाद बढ़ गया। हालांकि जल्द ही यह मामला शांत भी हो गया।
    घटना मध्यप्रदेश की है, जहां मंदसौर में राज्य की महिला और बाल कल्याण मंत्री अर्चना चिटनिस ने एक कार्यक्रम के दौरान रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मिकी को डाकू कह दिया। उनके द्वारा वाल्मिकी को डाकू कहे जाने से वाल्मिकी समुदाय के लोग भड़क गए और उन्होंने वहां हंगामा खड़ा कर दिया।
    चिटनिस के भाषण के दौरान ही वहां विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू हो गई, जिसके बाद उन्होंने खुद माफी मांग कर हंगामे को शांत कराने की कोशिश की।
    चिटनिस संजय गांधी उद्यान में अखिल भारतीय वाल्मिकी समुदाय के एक अधिवेशन में हिस्सा ले रही थीं। चिटनिस के भाषण के दौरान ही वाल्मिकी समुदाय के लोग उनका विरोध करने लगे और उनकी ओर से वाल्मिकी को डकैत कहे जान को अपमान के तौर पर लिया।
    इस भाषण से वाल्मिकी समुदाय के लोग काफी उग्र हो गए और उन्हें बड़ी मुश्किल से शांत कराया जा सका। पूरे प्रकरण पर मंत्री चिटनीस ने सफाई दी और कहा, मैं तो केवल उस इतिहास को दुरुस्त करने की बात कर रही थी जो ब्रिटिश काल में लिखा गया था। मैं तो वाल्मीकिजी की महानता और एकता के बारे में बता रही थी, लेकिन अगर मेरे एक घंटे के भाषण के दौरान शब्दों से किसी को ठेस पहुंची हो तो इसके लिए माफी मांगती हूं। (आज तक)

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Posted Date : 09-Jan-2018
  • कोलकता, 9 जनवरी । बंगाल के नोआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव से पहले बीजेपी की पं.बंगाल इकाई को जबरदस्त झटका लगा है। बीजेपी की प्रत्याशी तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक मंजू बसु ने उसका पाला छोड़ कर तृणमूल का दामन थाम लिया है।
    बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने सोमवार शाम उपचुनाव के लिए पार्टी के प्रत्याशी के रूप में मंजू बसु के नाम की घोषणा की थी। इसके कुछ घंटों के बाद, मंजू ने बताया कि वह अभी भी तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं। मंजू ने कहा, मैं तृणमूल सुप्रिमो ममता बनर्जी की एक वफादार सिपाही हूं। मैं अभी भी तृणमूल के साथ हूं और ममता बनर्जी में मेरा पूरा विश्वास है। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि मंजू ने पार्टी के टोल-फ्री नंबर पर सदस्यता के लिए मिस्ड कॉल किया था। उनके पार्टी से जुडऩे के बारे में कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गयी थी।
    तृणमूल के टिकट पर नोआपाड़ा से दो बार विधायक रही मंजू ने मामले पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। बस इतना बताया कि भाजपा के प्रस्ताव को खारिज करने का यह उनका निजी निर्णय है।
    उन्होंने कहा, आपको कई राजनीतिक दलों से प्रस्ताव मिल सकते हैं, लेकिन इसे स्वीकार करने या नहीं करने का फैसला आपका व्यक्तिगत होता है। कुछ महीनों पहले कांग्रेसी विधायक मधुसूदन घोष के निधन के चलते नोआपाड़ा विधानसभा सीट खाली हुयी थी। यहां उपचुनाव 29 जनवरी को होने वाला है और मतगणना एक फरवरी को होगी।  (भाषा)

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Posted Date : 09-Jan-2018
  • नई दिल्ली, 9 जनवरी । दलित नेता और गुजरात से पहली बार विधायक बने जिग्नेश मेवाणी मंगलवार को संसद मार्ग से पीएम निवास तक युवा हुंकार रैली करने वाले हैं। हालांकि 26 जनवरी की सुरक्षा के मद्देनजर रैली की इजाजत नहीं मिली है। पार्लियामेंट स्ट्रीट पर दिल्ली पुलिस ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। पार्लियामेंट स्ट्रीट पर दिल्ली पुलिस ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया।
    जिग्नेश मेवाणी ने भी ट्वीट कर बीजेपी को चुनौती दी है। जिग्नेश ने लिखा है कि बांध ले बिस्तर बीजेपी, राज अब जाने को है, जुल्म काफी कर चुके, पब्लिक बिगड़ जाने को है।
    नई दिल्ली के डीसीपी ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि रैली के आयोजकों को लगातार किसी और जगह पर जाने का सुझाव दिया जा रहा है, लेकिन वो मान नहीं रहे हैं।
    इस रैली में मेवाणी के साथ आरटीआई एक्टिविस्ट अखिल गोगोई भी शामिल होने वाले हैं। रैली से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2 जनवरी को इस रैली के ऐलान के बाद से ही इसे रोकने की कोशिश की जा रही है। इस रैली का ऐलान करते हुए जिग्नेश ने कहा था कि हम पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने जाएंगे। 
    उन्होंने कहा था कि हमारे एक हाथ में संविधान होगा और दूसरे हाथ में मनु स्मृति। मेवाणी ने कहा था कि ये रैली सामाजिक न्याय के लिए है। भीमा कोरेगांव लड़ाई की सालगिरह पर हुई हिंसा के मामले में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके बाद जिग्नेश मेवाणी ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा था। 'सामाजिक न्यायÓ रैली या 'युवा हुंकार रैलीÓ की योजना तैयार की गयी थी जिसे मेवाणी और असम के किसान नेता अखिल गोगोई को संबोधित करना है।
    एनजीटी ने पिछले साल पांच अक्टूबर को अधिकारियों को जंतर मंतर रोड पर धरना, प्रदर्शन, लोगों के जमा होने, भाषण देने और लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल संबंधी गतिविधियां तत्काल रोकने का आदेश दिया था। आयोजकों में से एक और जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेय ने कहा कि इस कार्यक्रम को रोकने के लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं और यहां तक कि कुछ मीडिया घराने गलत सूचना भी फैला रहे हैं कि रैली के लिए इजाजत नहीं दी गई है।
    पांडेय ने बताया कि दो जनवरी को रैली की घोषणा किए जाने के बाद से कि मेवाणी को एक देशद्रोही और शहरी नक्सली बताने वाले पोस्टरों पर बहुत सारा पैसा खर्च किया गया है। उन्होंने कहा कि रैली पूर्व निर्धारित समय पर ही होगी।(एनडीटीवी)

     

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