राजनीति

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 18 नवम्बर । गुजरात चुनाव अपने चरम पर हैं। ऐसे में पार्टियों में गठबंधन, सहयोग और जोड़-तोड़ के बीच उम्मीदवारों के नाम की भी घोषणा की जा रही है। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीवारों की पहली लिस्ट जारी की। लेकिन ये लिस्ट जारी होते ही पार्टी में कई लोग नाराज हो गए हैं। कई नेता टिकट न मिलने से बेहद खफा हो गए हैं।
    नाराजगी इस हद तक बढ़ गई की उन्होंने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघानी को तत्काल प्रभाव से अपने इस्तीफे तक सौंप दिए। लेकिन इसी के तुरंत बाद नाराज पार्टी नेताओं को मनाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया। अमित शाह शुक्रवार देर रात गुजरात भाजपा के दफ्तर में डैमेज कंट्रोल की हर मुमिकन कोशिश करते रहे। हालांकि उनकी कोशि किस हद तक सफल हुई है इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। पहली सूची आने के बाद शाम तक ही पार्टी में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया था। इनमें अंकलेश्वर विधानसभा सीट पर भाई ने ही अपने भाई के टिकट का विरोध किया।
    टिकट का ऐलान होने के बाद भरुच जिला पंचायत के सदस्य वल्लभ पटेल ने पार्टी से इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने वाले वल्लभ पटेल, ईश्वर पटेल के सगे भाई हैं। अंकलेश्वर सीट से वल्लभ पटेल ने भी टिकट की मांग की थी। दशरथ पुवार ने जिला भाजपा के महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वडोदरा में भी दिनेश पटेल को टिकट दिए जाने से पार्टी में बगावत होने लगी। पादरी जिला पंचायत और तहसील पंचायत के नेता कमलेश पटेल ने इस्तीफा दिया है। वहीं वडोदरा जिला महामंत्री चैतन्य सिंह झाला ने भी पार्टी को इस्तीफा दे दिया।
    हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए भोलाभाई गोहिल भी नाराज हैं और वो इस बारे में आज जीतु वाघानी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने जसदण सीट से टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। जबकि वो इस सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इतना ही नहीं गोहिल ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी, लेकिन इस सीट से भरत बोगरा को टिकट दिया गया।(पंजाब केसरी)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • पटना, 18 नवम्बर । जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को चुनाव आयोग ने झटका दिया है। चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि जेडीयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन वाले समूह के पास पार्टी के चिह्न तीर का अधिकार होगा। खबर के मुताबिक शुक्रवार को चुनाव आयोग ने नीतीश कुमार वाले जेडीयू को चुनाव चिह्न तीर का दावेदार माना। आयोग ने पार्टी संगठन, विधानसभा और विधान परिषद में विधायकों के समर्थन के आधार पर नीतीश कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। मामले में दोनों तरफ से लिखित और मौखिक सबूत दिए गए थे। आयोग के फैसले में कहा गया, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले समूह ने विधानसभा के साथ-साथ पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में भी भारी बहुमत के साथ समर्थन दिखाया।
    इस मामले में गुजरात के नेता और शरद यादव के गुट के सदस्य छोटूभाई वसावा ने आवेदन कर उनके समूह के असली जेडीयू होने का दावा किया था। लेकिन चुनाव आयोग ने इसे भी खारिज कर दिया। इस मामले में नीतीश कुमार और उनके लोग प्रतिवादी थे। चुनाव आयोग का फैसला शरद यादव और उनके लोगों के लिए झटका है। गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस मामले की तुरंत सुनवाई की। दोनों ही समूह चुनाव लडऩा चाहते हैं और पार्टी के चिह्न पर दावा कर रहे हैं। उन्होंने आयोग से जल्दी फैसला लेने की अपील की थी।
    इस साल जुलाई में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ लिया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी। तब से जेडीयू शरद यादव और नीतीश कुमार के रूप में दो धड़ों में बंट गया था। सितंबर में आयोग ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर शरद यादव के दावे को लेकर किए गए आवेदन पर कहा था कि उनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं है।(लाइवमिंट)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • सतना, 18 नवम्बर । सतना की भाजपा महापौर ममता पांडेय एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने आईएएस प्रतिभा पॉल के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आईएएस से कहा कि अपनी औकात में रहकर बात करना। इससे पहले भी प्रतिभा पॉल और महापौर ममता पांडेय के बीच तीखी तल्ख देखी गई है।
    दरअसल शहर में गरीबों के लिए मकान आवंटन के लिए लॉटरी निकाली जा रही है। इसमें 273 लोगों को मकान का आंवटन होना था। लॉटरी निकालने की प्रक्रिया चल ही रही थी कि वार्ड क्रमांक 20 के पार्षद ने लॉटरी में पक्षपात का आरोप लगाते हुए फिर से लॉटरी निकलवाने की बात कही। इसी बीच आईएएस प्रतिभा पॉल ने इससे इंकार किया तो महापौर ममता पांडेय भड़क गई। देखते ही देखते दोनों में कोल्ड वॉर शुरू हो गया। इसी दौरान ममता पांडेय ने अपनी मर्यादा के विपरित जाते हुए प्रतिभा पॉल को अपनी औकात में रहने की नसीहत दे डाली। 
    इतना ही नहीं महापौर ने कहा कि मैं तुमसे ज्यादा पढ़ी लिखी हूं। आई एम पोस्ट ग्रेजुएट एलएलबी, मुझे मत सिखाओ। ये पूरा वाक्या वहां मौजूदा मीडिया के कैमरों में कैद हो गया। 
    इससे पहले भी बीजेपी की महापौर अपने बयानों को लेकर मीडिया में सुर्खियों में आई थी। जुलाई में उन्होंने विवादित बयान दिया था। पांडेय ने कहा कि नगर निगम के सफाई कर्मचारियों का एक पांव दारु पीना मजबूरी है। वो झाड़ू लगाकर दुबले-पतले और कंगाल हो जाते हैं। काम करते-करते उनकी शरीर की हड्डियां बाहर आ जाती है। इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की खूब किरकिरी हुई थी।
    इससे पहले पांडेय का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ममता एक ठेकेदार को गोली मारने की धमकी दे रही थी। दरअसल सतना में स्टेशन रोड से बाजार रोड तक एक सड़क बनाई जा रही थी। 
    इससे क्षेत्र के व्यापारी नाराज थे। व्यापारियों ने निर्माण कार्य में घटिया साम्रगी इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। मेयर से शिकायत की गई। इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें ममता पांडेय बोल रहीं थीं कि बिना मेरी जानकारी के रोड का काम कैसे हो रहा है। भाग जाओ नहीं तो गालियां दूंगी और गोली मार दूंगी।(एजेंसी)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 18 नवम्बर। गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पाटीदार समिति और कांग्रेस के बीच बातचीत बिगड़ गई है। चुनाव में पाटीदार नेताओं को टिकट और पाटीदारों को आरक्षण देने के प्रस्तावित फॉम्र्यूले को लेकर पाटीदार समिति और कांग्रेस के बीच दिल्ली में अहम बैठक थी, लेकिन कांग्रेस नेताओं द्वारा कथित रूप से नजरअंदाज किए जाने से नाराज पटेल नेताओं ने कांग्रेस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है। जानकारी के मुताबिक पटेल नेताओं ने 30-35 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए जाने की मांग की थी। लेकिन सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस इतनी सीटें देने को तैयार नहीं हुई।
    शुक्रवार को कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने पाटीदार नेताओं से बातचीत की। इस बातचीत के बाद पाटीदार नेताओं में नाखुशी दिखी। देर रात पाटीदार नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। हार्दिक पटेल के प्रतिनिधि दिनेश बमभानिया ने कांग्रेस पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। दिनेश बमभानिया ने कहा कि कांग्रेस ने हमें मिलने के लिए बुलाया लेकिन पूरे दिन हमें मिलने का वक्त नहीं दिया। कांग्रेस ने हमारी बेइज्जती की है। सूत्र बताते हैं कि पाटीदार नेताओं की रणनीति ज्यादा से ज्यादा सीट मांगने के लिए कांग्रेस पर दबाव बनाना है। अब देखना होगा कि आगे की राह कैसे तैयार होती है।
    पाटीदार समिति ने गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी, लेकिन इसके लिए कांग्रेस के सत्ता में आने पर समुदाय के लिए संवैधानिक रूप से आरक्षण का दर्जा देने सहित कुछ अन्य मांगें की थीं। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • मूडीज रेटिंग 

    नई दिल्ली, 18 नवम्बर । कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज की तरफ से भारत की सोवरिन रेटिंग में सुधार को देश की जमीनी सच्चाई से दूर बताया है। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार विदेशी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट की आड़ में देश का मूड नहीं समझ पा रही है। 
    कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा कि देश में विभिन्न चुनावों से पहले किसी विदेशी एजेंसी की क्रेटिड रेटिंग जारी हो जाती है, लेकिन अब तक किसी भारतीय एजेंसी की कोई रेटिंग नहीं आई है जो देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को बता सके। उन्होंने कहा कि अगर इन रेटिंग रिपोर्टों को सही मान भी लिया जाए तो आर्थिक विकास दर और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में लगातार गिरावट क्यों आ रही है।
    कांग्रेस नेता ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर देश की जमीनी हकीकत बहुत खराब है। शुक्ला ने कहा कि मोदीजी बताएं कि क्या वह वाशिंगटन से चुनाव लडऩा चाहते हैं? इससे पहले कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के बाद मोदी सरकार अपनी खोई साख को छुपाने के लिए इस तरह की रिपोर्टों को तिनके की तरह बटोर रही है। उन्होंने कहा, मोदीजी और मूडी की जोड़ी, दोनों देश का मूड भांपने में पूरी तरह से नाकाम रही है।
    सुरजेवाला ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें यह याद रखना चाहिए कि मूडी, एस एंड पी और दूसरी रेटिंग एजेंसियां अमरीका में आर्थिक मंदी से पहले हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई थीं।(एजेंसी)

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • बाराबंकी, 17 नवम्बर। उत्तर प्रदेश के एक बीजेपी नेता ने मुसलमानों को चेतावनी दी है। नेता ने कहा है कि निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट करें या फिर परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। बीजेपी नेता रंजीत कुमार श्रीवास्तव की पत्नी निकाय चुनाव में बाराबंकी जिले में प्रत्याशी हैं। नवाबगंज में वह उसकी पत्नी के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। इस दौरान मंच पर उनके साथ उत्तर प्रदेश सरकार के दो मंत्री भी थे। उनके सामने ही रंजीत ने इस तरह का विवादित बयान दिया। 
    13 नवंबर को हुए इस चुनावी प्रचार में रंजीत ने कहा कि यह समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं है। अपने काम के लिए आप (मुसलमान) डीएम और एसपी के पास नहीं जा सकते हैं। कोई भी नेता आपकी मदद नहीं करेगा। नगर निगम का का है सड़कें बनाना, पानी निकास की व्यवस्था कराना। अगर बीजेपी को वोट नहीं किया तो इन सब समस्याओं के साथ और भी दूसरी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। 
    बीजेपी नेता ने कहा, इस समय बीजेपी में आपका कोई पक्षकार नहीं है। बिना किसी भेदभाव के बीजेपी के पार्षदों को वोट करें। अगर आपने रंजीत साहब की पत्नी को वोट नहीं दिया और उन्हें नहीं चुना तो वह इसके जिम्मेदार होंगे। आपको बचाने समाजवादी पार्टी नहीं आएगी। यह बीजेपी की सत्ता है। मुसलमानों को अगाह करते हुए रंजीत ने कहा कि आपको ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा जो उन्होंने पहले कभी नहीं झेली होगी। उन्होंने कहा कि वह वोटों की भीख नहीं मांग रहे हैं।  (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • अहमदाबाद, 17 नवम्बर । गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी और आदित्यनाथ कुल मिलाकर 50 से अधिक चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। साथ ही, कुछ रोडशो भी होंगे। एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भाजपा नेतृत्व ने मिशन 150 को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाया हुआ है। इसे हासिल करने के लिए पार्टी सारे दांव खेलने के लिए तैयार है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि राज्य में कुछ लोग और तबका नाराज जरूर हैं लेकिन, खिलाफ कोई नहीं है। जिनकी जो समस्याएं हैं, उनको हल किया गया है। किसी भी इलाके में सरकार के खिलाफ माहौल नहीं है। बताया जाता है कि भाजपा के प्रमुख केंद्रीय नेता हर विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार करेंगे।(हिन्दुस्तान)

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • कुलदीप मिश्र
    अहमदाबाद, 17 नवम्बर। जितने आटे में चार रोटियां बनें, उतने में यह एक बनता है। बाजरे के आटे का रोटला। तिस पर दो चम्मच घी में चुपड़ा हुआ। गुजरात के बनासकांठा जिले के सरकारी गोडिय़ा गांव में एक समृद्ध किसान के यहां भरपूर प्रेम से आधा रोटला, कढ़ी, छाछ, दही और शीरे (दलिये का हलवा समझ लें) के साथ परोस दिया गया, जिसे पूरा खा पाने को लेकर मैं सशंकित था। यह सुस्वाद भोजन खत्म करने के बाद मैंने पूछा कि रोटला पचाना आसान होता है या मुश्किल।
    जवाब मिला कि पचाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन पचा लेने के बाद पेट के लिए अच्छा है। खाने के तुरंत बाद पानी मत पीजिएगा। थोड़ा रुककर पीजिएगा।
    बनासकांठा आलू की खेती के मामले में अग्रणी जिला है। यहां की डीसा तहसील को आलू उत्पादन का हब माना जाता है। यहां करीब 250 कोल्ड स्टोरेज हैं। लेकिन इस साल आलू के दामों में रही भारी मंदी ने किसानों में एक निराशा पैदा की है।
    पड़ोस की लाखणे तहसील के डेरा गांव में कुछ किसानों से मुलाकात तय हुई थी। वहां पहुंचा तो वहां किसान सड़े हुए और न बिक पाए आलुओं की बोरियों पर बैठे हुए मिले। उन्हें इस बार आलू दो रुपए किलो भी बेचना पड़ा है।
    उनसे पूछा कि आप लोग क्या चाहते हैं तो बोले कि आलू के निर्यात पर लगी पाबंदी हटा ली जाए, ताकि वे बेहतर दामों पर पाकिस्तान तक आलू निर्यात कर सकें। पाकिस्तान सीमा यहां से सिर्फ सौ किलोमीटर दूर है।
    पटेल समाज के इन किसानों में से ज्यादातर ने माना कि आलू पर उन्हें सरकार से सहयोग अपेक्षित था। इसके बावजूद सरकार बदलने को लेकर उनमें एक गजब की अनिच्छा दिखी। एक किसान ने मेरे कंधे पर हाथ रख मैं आपको बता रहा हूं के आत्मविश्वास के साथ मुझे बताया कि सरकार भाजपा की ही अच्छी है और आप देखना कि वही इस बार भी आएगी।
    छह रोज पहले हम अहमदाबाद के पांच कुआं सिंधी बाजार में थे। कपड़ों का बड़ा बाजार है। ज्यादातर दुकानें पाकिस्तान से आए सिंधियों की हैं। आर्थिक तौर पर निचला और मंझला तबका यहां से खरीदारी करता है।

    जीएसटी के विरोध में यहां के व्यापारियों ने 15 दिनों तक अपनी दुकानें बंद रखी थीं। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल की अमित शाह के स्तर तक मुलाकातें हुई थीं। हमने जीएसटी का असर पूछा तो एक व्यापारी ने कहा कि कुछ कर पाओगे तो बताओ, खाली-पीली क्या बात करना। लेकिन बातचीत का सिलसिला कायम हुआ तो दुकानदारों की एक भीड़ अपनी शिकायतों के साथ जमा हो ही गई।
    उनमें से कई का कहना था कि जीएसटी के बाद धंधा आधे से भी कम हो गया है। मुकेशभाई ने बताया कि कागजी पचड़ा बढ़ गया है और ऊपर से ग्राहक जीएसटी का बोझ साझा करने को तैयार नहीं है।
    जीएसटी के बाद हजार रुपए की साड़ी का दाम 50 रुपए बढ़ गया है, लेकिन ग्राहक 50 रुपए अतिरिक्त देने को तैयार नहीं है। तो सारा बोझ हम लोगों पर है। हमें बताया गया कि एक वक्त इन गलियों में पांव रखने की जगह नहीं होती थी। लेकिन उस वक्त वहां इक्का-दुक्का ग्राहक घूम रहे थे।
    कुछ ने पचास फीसदी और कुछ ने अस्सी फीसदी ग्राहकी टूट जाने का दावा किया। कुछ दुकानदार यहां तक कह गए कि निकट भविष्य में वे दूसरा धंधा शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं। ये सब जीएसटी की कड़ी आलोचनाएं थीं। मुझे नहीं पता कि वाकई वे ऐसा सोच रहे थे या नहीं। समस्याग्रस्त व्यक्ति भावावेश में कभी-कभी चार का चौदह भी कर जाता है।
    बच्चे को चोट लगती है तो दूसरे बच्चे को पिटवाने के लिए वह दर्द के अनुपात से थोड़ा अधिक जोर से रोता है। मेरे पास किसी की बैलेंस शीट नहीं थी जो मैं उनके दावे जांच पाता। लेकिन एक बात तय थी कि जीएसटी से वे सब खासे नाराज थे और उसके खिलाफ बात करते हुए एक भावनात्मक लापरवाही उनकी भाषा में नत्थी थी। कि हम बहुत परेशान हैं और हमारे आंसू फूट रहे हैं इत्यादि।
    थोड़ी ही देर में कड़ी शिकायतों की एक पूरी फेहरिस्त मैं अपनी डायरी में नोट कर चुका था। लेकिन बात एक कदम बढ़कर जब राजनीतिक पसंद पर आ टिकी तो वही व्यापारी मुझे अतिरिक्त सावधान नजर आए। राजनीति का कोई अध्येता आकर यह समझे कि जीएसटी के सख्त विरोधी ये व्यापारी खुले तौर पर भाजपा की आलोचना से क्यों बचते रहे?
    कुछ ने कहा कि बाजार के प्रेसिडेंट राजेशभाई को बुलवा लीजिए। वे बोलेंगे तो सब बोलेंगे। एक दुकानदार ने स्वीकार किया कि हां, जीएसटी इस बार चुनाव में उनके लिए एक मुद्दा हो सकता है। सबसे मजबूत आलोचना यही थी। सिंधी व्यापारियों के इस वर्ग में अधिकांश ने माना कि वे भाजपा के वफादार वोटर रहे हैं और उनकी पसंद अब भी भाजपा ही हैं। उनके स्वरों का सार यह था कि सारा गुस्सा जीएसटी से है, भाजपा से नहीं।
    क्योंकि काम भाजपा ही करवाती है। मोदी जी अपने हैं, उनसे ही लड़कर अपना काम करवा सकते हैं। कांग्रेस कौन सा जीएसटी को वापस ले लेगी? मनमोहन तो खुद जीएसटी के समर्थक रहे। इसलिए कांग्रेस की दाल तो गुजरात में गलने से रही।
    गुजरात में बीते छह दिनों से हूं। भाजपा के पुराने समर्थक तबकों में नीतिगत नाराजगियों के कुछ स्वर तो दिखे, तथापि उनमें से अधिकांश लेकिन मोदीजी अच्छे हैं पर ही खत्म होते हैं।
    जो दूसरी पार्टियों के वफादार वोटर हैं, वे तो करते ही हैं। कर ही रहे हैं। लेकिन वे तबके जो शुरू से भाजपा के वफादार समर्थक रहे, असंतोष के बावजूद अपने स्वर मद्धम किए हुए हैं। यह उत्तर प्रदेश नहीं है जहां कैमरा और माइक देखकर लोग हमसे पूछो का भाव चेहरे पर लिए खिंचे चले आते हों और फिर सरकार की निकृष्टतम शब्दों में आलोचना कर जाते हों।
    यह फरवरी भी नहीं है, जब सर्दियां जा रही थीं। यह नवंबर है और यह गुजरात है। रोटला पचाना आसान नहीं। (बीबीसी)

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 17 नवम्बर। जवाहर लाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। बाद में उनकी बेटी इंदिरा गांधी और नवासे राजीव गांधी भी भारत के प्रधानमंत्री बने। भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी अमित मालवीय ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की महिलाओं के साथ तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा है कि ऐसा लगता है कि हार्दिक में नेहरू का डीएनए ज्यादा है बजाए उसके जो शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया था।
    गुजरात कांग्रेस के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा था कि पाटीदार समुदाय के युवा नेता हार्दिक पटेल में सरदार पटेल का डीएनए है।
    हाल के दिनों में हार्दिक पटेल की कथित सीडी सामने आई हैं जिनमें वो एक लड़की के साथ दिख रहे हैं। इन वीडियो पर काफी विवाद हुआ है। हार्दिक ने जहां इस वीडियो को फर्जी बताया है वहीं बीजेपी के आईटी सेल से जुड़े लोग इन्हें सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं।
    जब अमित मालवीय से बीबीसी ने पूछा कि नेहरू पर किए ट्वीट से उनका क्या आशय है तो उन्होंने कहा कि मेरा आशय बिल्कुल स्पष्ट है। उसके अलावा कुछ कहने की गुंजाइश नहीं है इसमें। जब मालवीय से कहा गया कि जो तस्वीरें उन्होंने ट्वीट की हैं उनमें जवाहर लाल नेहरू अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित के साथ भी हैं तो उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि मैंने क्या पोस्ट किया है।
    इस ट्वीट के बाद किए एक और रिट्वीट में अमित मालवीय ने लिखा है कि शक्ति सिंह गोहिल को इतिहास पढऩा चाहिए तो उन्हें पता चलेगा कि हार्दिक में नेहरू का डीएनए ज्यादा है। हालांकि बाद में अमित मालवीय ने नेहरू पर किया गया एक अन्य ट्वीट डिलीट कर दिया और इसकी वजह बताई कि कुछ कांग्रेसियों ने उनसे ऐसा करने का आग्रह किया था।
    वहीं भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने सीएनएन-आईबीएन चैनल की एक बहस में कहा कि  शक्तिसिंह गोहिल का ये कहना का हार्दिक पटेल में सरदार पटेल का डीएनए है, ये सरदार पटेल का अपमान है। अगर कांग्रेस ये कहती है कि हार्दिक पटेल में नेहरू का डीएनए है तो हार्दिक जो आजकल कर रहे हैं उसे देखते हुए हम ये बात मान लेते हैं।
    अमित मालवीय ने जो तस्वीरों का कोलाज ट्वीट किया है उसमें दो तस्वीरों में नेहरू अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित के साथ हैं। नेहरू और विजय लक्ष्मी पंडित की ये तस्वीर नेहरू की 1949 की अमरीका यात्रा की है।
    मालवीय ने जो तस्वीरें पोस्ट की हैं उनमें से कई भारत की पहली महिला फोटो पत्रकारों में शुमार होमाई व्यारावाला ने ली हैं।

    अमित मालवीय के ट्वीट पर जवाब देते हुए शक्ति सिंह गोहिल ने लिखा कि उन लोगों की बहनों और माओं के लिए अफसोस हो रहा है जो सार्वजनिक बातचीत में इस स्तर तक गिर सकते हैं। मेरे संस्कार मुझे इसका जवाब देने की अनुमति नहीं देते।
    एक और ट्वीट में शक्ति सिंह ने गोहिल ने लिखा है कि सरदार पटेल और नेहरू के डीएनए में निश्चित तौर पर ये नहीं हैं- 1. महिलाओं की जासूसी करना, 2. पत्नी को छोड़ देना, 3. विपक्षियों के बेडरूम में घुस जाना। (बीबीसी)
    वहीं मालवीय के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लेखक संदीप घोष ने लिखा कि बीजेपी आईटी सेल और प्रवक्ता ऐसी फूहड़ टिप्पणियों से पार्टी की छवि नहीं सुधार रहे हैं। असंवेदनशील। 
    ओम प्रकाश नमन ने लिखा कि जिनके दिमाग सड़े होते हैं उन्हें सब में गंदगी ही दिखाई पड़ती है इन में से दो फोटो वे हैं जिसमें नेहरूजी अपनी सगी बहन विजयलक्ष्मी पंडित से गले मिल रहे हैं।

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 16 नवम्बर । भारतीय जनता पार्टी पर महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों को तोडऩे की कोशिश करने का आरोप लग रहा है। औरंगाबाद जिले की कन्नड विधानसभा सीट से शिवसेना के विधायक हर्षवर्धन जाधव ने कहा है कि पार्टी छोडऩे के एवज में उन्हें भाजपा ने पांच करोड़ रुपए देने पेशकश की है।
    जाधव ने कहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार में राजस्व मंत्री और भाजपा के नेता चंद्रकांत पाटिल ने उन्हें पैसे देने का लालच दिया था। उनके मुताबिक इसी तरह की पेशकश भाजपा की ओर से शिवसेना के 25 विधायकों को की गई है। उन्होंने कहा, भाजपा नेताओं ने मुझसे यह भी कहा था कि वे सरकार में साझीदार शिवसेना से त्रस्त हो चुके हैं और भाजपा अब अपनी अकेली सरकार बनाने के मूड में है। इसीलिए पार्टी ऐसे नेताओं को ढूंढ रही है जो उसकी सदस्यता लेकर उसके टिकट पर चुनाव लडऩे के लिए तैयार हों।
    इन आरोपों के बाद शिवसेना के राज्य सभा सदस्य संजय राउत ने भाजपा से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। प्रदेश में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा, जाधव चर्चा में बने रहने के लिए ऐसी अनर्गल बातें करते रहते हैं। भाजपा राज्य में नंबर-एक पार्टी है। हमारा संगठन मजबूत है। (बाकी पेजï 5 पर)
    हमें इस स्तर पर जाने की जरूरत ही नहीं है। हम अपने कार्यकर्ताओं को टिकट देंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वे जीतें भी। पूरे प्रदेश में हमारे समर्पित कार्यकर्ता मौजूद हैं। हमें दूसरे दलों के नेताओं को अपनी तरफ खींचने की क्या जरूरत है?(द एशियन एज)

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • अर्चना पुष्पेंद्र
    अहमदाबाद, 16 नवम्बर । गुजरात के प्रमुख शहर अहमदाबाद में बीते दिनों कुछ हिंदू और मुस्लिम परिवारों के घरों के दरवाजों पर लाल निशान देखे गए थे। इस वजह से अहमदाबाद के इस इलाके में तनाव फैलने की बात सामने आई है।
    अहमदाबाद के पाल्दी क्षेत्र की अमन कॉलोनी, एलीट फ्लैट्स, डिलाइट फ्लैट्स, क्रिस्टल अपार्टमेंट्स और साहिल फ्लैट्स जैसी 12 इमारतों के घरों के बाहरी दरवाजों पर ये निशान देखे गए हैं।
    अहमदाबाद के समृद्ध इलाकों में से एक पाल्दी क्षेत्र में आर्थिक रूप से समृद्ध मुस्लिम परिवार रहते हैं। इन इमारतों में रहने वाले मुस्लिम परिवारों ने ये निशान सुबह-सुबह अपने दरवाजों पर देखे जिसके बाद अफवाहों का दौर शुरू हो गया।
    स्थानीय नागरिकों ने इन निशानों से संबंधित शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। अहमदाबाद की पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए पता लगाया है कि ये निशान नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने लगाए हैं।
    पुलिस ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारियों ने इन घरों पर निशान लगाए हैं। लेकिन सिर्फ मुस्लिम घरों के दरवाजों पर ये निशान नहीं लगाए गए हैं। कई जगहों पर हिंदू परिवारों के घरों पर भी ये निशान देखे गए हैं। नगर निगम कर्मचारियों ने ये निशान घर-घर से कूड़ा उठाने की स्कीम के तहत ये निशान लगाए थे।

    अमन कॉलोनी के मुबीन लकाडिया कहते हैं कि हम नहीं जानते कि ये निशान किसने लगाए, लेकिन हम डरे हुए हैं। मेरी पत्नी और बच्चे अब बाहर जाने में सहज नहीं हैं। साल 2002 के दंगों के दौरान पाल्दी क्षेत्र के डिलाइट अपार्टमेंट को निशाना बनाया गया गया था। उस दौरान भी इन इमारतों पर लाल क्रॉस के निशान देखे गए थे।
    एलीट कॉलोनी के सिक्योरिटी गार्ड कहते हैं कि शुरुआत में ये अजीब लगा, लेकिन जब ज्यादा घरों में ये निशान देखे गए तो हमें डर लगा। डिलाइट फ्लैट्स में रहने वाले ओवेश सरेशवाला कहते हैं कि कोई भी लाल क्रॉस के निशान से डरेगा क्योंकि लाल क्रॉस का निशान हमले और आतंक का प्रतीक है। हम पर कौन हमला करना चाहेगा। हमने पुलिस को पत्र लिखकर मदद मांगी थी। इसके बाद पुलिस ने भी प्रतिक्रिया देकर इस मामले में जांच करने का आश्वासन दिया।
    इससे पहले कुछ विवादित पोस्टर भी देखे गए थे जिनमें पाल्दी को जुहापुरा बनने से रोकिए लिखा था। जुहापुरा सबसे बड़ी मुस्लिम बस्तियों में से एक है। पुलिस ने बताया कि पाल्दी क्षेत्र में रहने वाले कुछ लोग इन पोस्टरों और इन निशानों के बीच संबंध तलाश रहे हैं। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं। गुजरात में 9 से 14 दिसंबर के बीच विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बीजेपी ने साल 2012 में भी विधानसभा चुनाव जीता था।(बीबीसी)

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • गुजरात विधानसभा में इस बार जीत के लिए पूरा जोर लगा रही कांग्रेस ने सहयोगी तो खूब जुटाए हैं। इनमें पिछड़े वर्गों के नेता अल्पेश ठाकोर तो कांग्रेस में ही शामिल हो गए हैं। जबकि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और दलित वर्गों का झंडा बुलंद कर रहे जिग्नेश मेवानी कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं। आदिवासी नेता और जनता दल- यूनाइटेड (जद-यू) के बागी छोटूभाई वसावा भी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं। इस हिसाब से कांग्रेस का पक्ष मजबूत नजर आ रहा है। लेकिन यह द इकॉनॉमिक टाइम्स की मानें तो यह नई जुगलबंदी पार्टी के लिए परेशानी भी बन सकती है।
    अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि हार्दिक के पाटीदार अमानत आंदोलन समिति (पास) ने 22 सीटें मांगी हैं। यह संगठन इन सीटों पर अपने 10 संयोजकों और समुदाय के करीब दर्जन भर अन्य नेताओं को चुनाव में उतारना चाहता है। इसी तरह अल्पेश भी अपने समर्थकों के लिए ज्यादा सीटें मांग रहे हैं। यहां तक कि वे तो अपनी तरफ से घोषणा भी कर चुके हैं कि गेनीबेन ठाकोर उत्तर गुजरात की वाव सीट से चुनाव लड़ेंगी। जबकि पार्टी ने अभी किसी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। यही हाल दलित बहुत सीटों के मामले में जिग्नेश का भी बताया जाता है। कहा जा रहा है कि इन युवा नेताओं की सौदेबाजी से पार्टी के पुराने नेता असहज महसूस कर रहे हैं।
    अखबार की एक अन्य खबर के मुताबिक यही स्थिति जद-यू के शरद यादव के नेतृत्व वाले गुट के नेता छोटूभाई वसावा के मामले में भी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को राज्य सभा की सीट जितवाने में छोटूभाई के एक वोट ने अहम भूमिका निभाई थी। और सूत्रों के मुताबिक अब वे उस सहयोग की कीमत मांग रहे हैं। छोटूभाई आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने अपना एक संगठन भी बना रखा है। वे दलील देते हैं, दक्षिण गुजरात की करीब 20 सीटों पर आदिवासी समुदाय का बाहुल्य है। यहां हम निर्णायक स्थिति में है। हमारा जनाधार भी मजबूत है। लिहाजा हमें यहां कम से कम 12 सीटें मिलनी चाहिए।
    हालांकि कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी वसावा को सिर्फ दो सीटें ही देना चाहती है। यही वजह है कि अब तक न तो कांग्रेस गठबंधन को अंतिम रूप दे पाई है ओर न ही उम्मीदवारों के नाम ही तय कर सकी है। बताया जाता है कि कांग्रेस की देरी का पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के नेतृत्व वाला तीसरा मोर्चा फायदा उठाने की जुगत में है। वह इस कोशिश में है कि वसावा जैसे कुछ असंतुष्ट नेता उसके साथ आ जाएं। ऐसा हुआ तो कांग्रेस की मुश्किल और बढ़ सकती है। (सत्याग्रह ब्यूरो)

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • हेमंत कुमार पाण्डेय
    विधानसभा चुनावों के मद्देनजर गुजरात में सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है। सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस लगातार एक-दूसरे को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश में लगी हुई हैं। बीती 22 अक्टूबर को भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, चुनाव हमारे लिए विकासवाद की जंग है, उनके लिए वंशवाद की जंग है। कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर लगातार भागती रहती है। मेरी इच्छा है कि कभी कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़े।
    उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी रोजगार सहित कई मुद्दों पर भाजपा पर हमलावर दिखे हैं। बीती एक नवंबर को उनका कहना था, चीन में हर रोज 50 हजार नौकरियां पैदा होती हैं और भारत में केवल 450। मेक इन इंडिया के बावजूद यह स्थिति है। राहुल गांधी ने आगे कहा, किसान और गरीब को पानी नहीं मिलता, पूरा पानी चंद अमीरों को दिया जाता है। इसके अलावा वे नोटबंदी और जीएसटी से छोटे और मध्यम किस्म के कारोबारियों को होने वाली परेशानियों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं।
    इस बीच, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) ने जनवरी से अप्रैल, 2017 के दौरान देश के 527 संसदीय क्षेत्रों में 2 लाख 70 हजार लोगों के बीच एक सर्वे किया है। इसमें चुनाव से जुड़े कई मुद्दों पर मतदाताओं का मन टटोलने की कोशिश की गई है। एडीआर ने इस सर्वे के आधार पर गुजरात को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है।
    इस रिपोर्ट में गुजरात के मतदाताओं ने 30 मुद्दों में से रोजगार, सार्वजनिक परिवहन सेवा, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है। इसके अलावा 73 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहिए। राज्य के 8.72 फीसदी मतदाताओं ने कहा है कि उनके लिए चुनावी मुद्दों में रोजगार के बेहतर मौके पहले पायदान पर है। अच्छी सार्वजनिक सेवा 7.65, महिला सशक्तिकरण 7.6 और महिला सुरक्षा 7.41 फीसदी लोगों के लिए सबसे ऊपर है। इनके अलावा सांसदों की विश्वसनीयता, पर्यावरण से जुड़े मुद्दे, बिजली आपूर्ति, बेहतर सड़कें, पेयजल और कानून व्यवस्था भी लोगों के लिए शीर्ष मुद्दों में शामिल हैं।
    राज्य के गांवों में रहने वाले मतदाताओं की बात करें तो इनके लिए भी रोजगार (8.61 फीसदी), फसलों की उचित कीमत (8.58 फीसदी) और सार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा सबसे अहम मुद्दा है। इनके अलावा खेती के लिए बिजली (6.69 फीसदी) और सिंचाई सुविधा (6.65 फीसदी) भी शीर्ष-10 मुद्दों में शामिल हैं।
    उधर, करीब नौ फीसदी शहरी मतदाताओं के लिए भी रोजगार का मुद्दा ही सबसे ऊपर है। हालांकि, इसके बाद 8.54 फीसदी ने सड़कों पर पैदल और साइकिल से चलने के लिए अलग लेन बनाए जाने को प्राथमिक चुनावी मुद्दा बताया है। इनके अलावा सड़कों पर जाम से मुक्ति (7.64 फीसदी), महिला सुरक्षा (7.36 फीसदी) और नौकरियों के लिए प्रशिक्षण (6.71 फीसदी) प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हैं।
    चुनावी मुद्दों से आगे वोटिंग पैटर्न की बात करें तो सूबे के 8.27 फीसदी मतदाता जाति और धर्म के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसके बाद 8.27 फीसदी मतदाता पार्टी विशेष प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को देखकर और 5.77 फीसदी उन्हें मिले 'उपहारोंÓ के आधार पर ही वोट देते हैं। सर्वे में यह बात सामने आई है कि केवल 4.58 फीसदी वोटर ही उम्मीदवार को देखकर मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं।
    दूसरी ओर, 28 मतदाताओं ने माना है उन्हें इसकी जानकारी है कि 'गिफ्टÓ लेना गैर-कानूनी है। इसके अलावा 60 फीसदी से अधिक का कहना था कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार मतदाताओं के बीच 'गिफ्टÓ बांटते हैं। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • चंडीगढ़, 15 नवम्बर । राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से चिंतित सीएम अरविंद केजरीवाल और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर के बीच बुधवार को मुलाकात हुई। राजधानी में जहरीले स्मॉग के कारण केजरीवाल पिछले कुछ समय से खट्टर और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलने की इच्छा जता रहे थे। हालांकि पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल से मुलाकात से साफ इंकार कर दिया था। समझा जाता है कि खट्टर और केजरीवाल के बीच मुलाकात में किसानों द्वारा पराली जलाने के मुद्दे और प्रदूषण कम करने के उपायों पर चर्चा हुई। 
    दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर केजरीवाल ने 8 नवंबर को हरियाणा के सीएम को पत्र लिखा था। शुरुआत में तो सीएम खट्टर ने भी केजरीवाल से यह कहते हुए मुलाकात से इंकार कर दिया था कि उनकी सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले से ही उचित कदम उठा रही है। बाद में स्मॉग के मुद्दे पर एनजीटी की केंद्र सरकार, पड़ोसी राज्यों और दिल्ली सरकार को फटकार लगाने के बाद हरियाणा सीएम ने केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे मिलने को तैयार होने की बात कही थी। केजरीवाल ने कहा था कि हरियाणा के सीएम ने उन्हें फोन किया और कहा था कि वह मंगलवार तक दिल्ली में हैं, लेकिन बहुत व्यस्त होने के कारण दिल्ली में मीटिंग नहीं हो सकती। केजरीवाल ने कहा था कि वह बुधवार को इस मीटिंग के लिए चंडीगढ़ जाएंगे। 
    केजरीवाल ने पराली से हो रहे पलूशन के मुद्दे पर चर्चा के लिए अमरिंदर से भी मुलाकात का समय मांगा था। पंजाब के सीएम ने केजरीवाल से मुलाकात से साफ इंकार करते हुए उल्टे उनकी जमकर खिंचाई कर डाली। दरअसल, केजरीवाल ने कैप्टन को संबोधित ट्वीट में कहा था, कैप्टन अमरिंदर सर, मैं बुधवार को हरियाणा के सीएम से मिलने के लिए चंडीगढ़ आ रहा हूं। आपका आभारी रहूंगा अगर मुलाकात के लिए अपना थोड़ा वक्त दें। यह सामूहिक हित के लिए है।
    अमरिंदर ने कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री जब जानते हैं कि इस तरह की चर्चा निरर्थक और बेकार है, तो क्यों इसमें जबरन हाथ डाल रहे हैं। कैप्टन ने कहा, दिल्ली और पंजाब इस मामले में जो भी मुश्किल झेल रहे हैं वे बिल्कुल अलग हैं। इस पर बैठक करना निराधार है।
    अमरिंदर ने साथ ही कहा, पंजाब के उलट दिल्ली में स्मॉग की समस्या मुख्य रूप से शहरी प्रदूषण की देन है, जो यातायात कुप्रबंधन और गैर नियोजित औद्योगिक विकास की वजह से है। इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने और समस्या सुलझाने के बजाए केजरीवाल बेकार की बहस के लिए समय खराब करना चाहते हैं। मेरे पास उनकी तरह फालतू का वक्त नहीं है।
    अमरिंदर सिंह ने कहा कि जहां तक पराली जलाने की समस्या की बात है, तो यह कोई राजनीतिक मसला नहीं है जैसा केजरीवाल इसको प्रॉजेक्ट करना चाह रहे थे। यह एक इकनॉमिक समस्या है, जिसका हल करने की स्थिति में केवल केंद्र सरकार है। अमरिंदर ने कहा कि किसानों को पराली जलाने की खतरनाक आदत बंद करने और वैकल्पिक उपाय को लेकर क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए वह केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।  (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • अहमदाबाद, 15 नवम्बर। गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों बड़ी पार्टियों ने पूरी तरह कमर कस ली है। इसी सिलसिले में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से एनडीटीवी ने राहुल गांधी और हार्दिक पटेल की सीडी समेत कई मुद्दों पर बात की।  उन्होंने कहा कि विकास पागल नहीं है, वो पागल हो गए हैं।
    विजय रुपाणी ने राहुल गांधी और हिन्दुत्व के मुद्दे पर कहा कि वह गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में क्यों जा रहे जबकि दिल्ली में उनके घर के पास अक्षरधाम मंदिर है। वह कभी वहां गए हैं। जब हम करते हैं तो कहा जाता है कि ये हिन्दुत्व है और राहुल का मंदिर जाना हिंदुत्व क्यों नहीं है?
    हार्दिक की सेक्स सीडी के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस इससे घबराई हुई है तो वह अब हम पर ही आरोप लगा रही है। हमने इस मामले में कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कुछ नहीं है, उनके पास लोकल लीडर नहीं है और इसलिए वह हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश पर भरोसा कर रही है। उन्होंने कहा कि सीडी की जांच होनी चाहिए। 
    जब उनसे पूछा गया कि ये गप्पीदास कौन है तो उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी को गप्पीदास कहता हूं। इसका मतलब यह है कि वह सिर्फ बकवास और निराधार बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह राष्ट्रपति बन जाए, तो यह हमारे लिए एक जीत होगी। राहुल गांधी के गब्बर सिंह टैक्स वाले बयान पर विजय रुपाणी ने कहा कि हम अपने नेतृत्व का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने जीएसटी में बदलाव किया। हमें कोई अफसोस नहीं है और इसे कार्यान्वित किया गया। ये हमारे विकास सुधार का हिस्सा है। जब गुजरात के सीएम से पूछा गया कि इन चुनावों में जाति बड़ा मुद्दा होने वाला  तो उन्होंने कहा कि ये चुनाव राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व का है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 15 नवम्बर। गुजरात के युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी कुछ कथित आपत्तिजनक वीडियो क्लिप इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं। हार्दिक इनके पीछे भारतीय जनता पार्टी की साजिश को जिम्मेदार मानते हैं और इसके लिए उन्होंने भाजपा को कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी है।
    हार्दिक की चार और आपत्तिजनक वीडियो क्लिप सामने आई हैं। इनमें वे कथित तौर पर शराब पीते हुए और महिलाओं के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देखे जा रहे हैं। हालांकि अखबार के मुताबिक इनमें से किसी भी वीडियो क्लिप की प्रमाणिकता की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ये सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। इससे हार्दिक की छवि को भी धक्का पहुंच रहा है।
    हार्दिक ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, उन्हें (भाजपा को) लोगों की निजी जिंदगी में ताक-झांक करना अच्छा लगता है। उनके 22 साल पुराने विकास के जुमले की हवा निकल चुकी है। इसलिए वे गंदी राजनीति पर उतर आए हैं। इस बाबत मैं अपने वकीलों से बात करूंगा। जल्द ही साजिशकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगा। और मैं यह भी बताना चाहता हूं कि चरित्र हनन की यह कोशिश पाटीदार आंदोलन पर असर नहीं डाल पाएगी। उधर, गुजरात के दलित आंदोलन से उभरे युवा नेता जिग्नेश मेवानी ने हार्दिक के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, प्रिय हार्दिक, चिंता न करें। मैं आपके साथ हूं। सेक्स सभी का मूल अधिकार है। लेकिन किसी को भी दूसरे की निजता में ताक-झांक का हक नहीं है।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

     

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 15 नवम्बर। संसद के शीतकालीन सत्र पर इस बार अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। यह होगा या नहीं होगा? होगा तो कब और कितने दिन का? इन तमाम सवालों पर अभी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फैसला नहीं किया है। यानी सत्र हुआ भी तो इसमें विलंब होना तय है। सूत्रों  की मानें तो यह लेट-लतीफी मोदी सरकार के लिए परेशानी का कारण भी बन सकती है।
    सूत्र बताते हैं कि राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस के रणनीतिकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एकजुट कर रहे हैं। आजाद के बारे में बताया जाता है कि वे अब तक 18 विपक्षी दलों के नेताओं से बात कर चुके हैं। इनमें वाम दल, डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कडग़म), जद-यू (जनता दल-यूनाइटेड) का शरद यादव गुट, तृणमूल कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) आदि प्रमुख हैं।
    सूत्रों के मुताबिक सभी विपक्षी दलों की अगले सप्ताह दिल्ली में बैठक हो सकती है। इसके बाद बाद संसद के शीतकालीन सत्र में देरी का मसला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक भी ले जाया जा सकता है। इस मुद्दे को सत्र के दौरान किस तरह उठाया जाए इस पर भी बैठक के दौरान विपक्ष की संयुक्त रणनीति तय की जा सकती है। नोटबंदी-जीएसटी जैसे मसलों पर भी समन्वय बेहतर करने के बारे में इस बैठक में बातचीत की जा सकती है।
    संसद का शीतकालीन सत्र अमूमन नवंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू हो जाता है। परंपरा के मुताबिक इस बारे में सांसदों को 15 दिन पहले बता दिया जाता है। लेकिन इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव के चक्कर में सत्र के बारे में अब तक कोई फैसला ही नहीं किया गया है। सूत्र बताते हैं कि संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की 17 नवंबर को बैठक होने वाली है। इसमें संसद सत्र के बारे में फैसला हो सकता है। (द एशियन एज)

     

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • लखनऊ, 15 नवम्बर। अयोध्या विवाद को अदालत से बाहर सुलझाने के लिए धर्मगुरू श्रीश्री रविशंकर ने अपनी कोशिशें तेज कर दी है। इस कड़ी में आज उन्होंने लखनऊ में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। अभी तक दोनों के बीच हुई बातचीत का कोई ब्यौरा बाहर नहीं आया है। विश्व हिंदू परिषद ने मध्यस्थता का विरोध किया है।
    बीते कुछ दिनों से श्रीश्री रविंशकर अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए कोशश कर रहे हैं और इस सिलसिले में वो कोई मुस्लिम नेताओं से भी मिल चुके हैं। योगी से मुलाकात के बाद श्री श्री रविंशकर कल अयोध्या जाएंगे।
    खास बात ये  है कि श्रीश्री की मध्यस्था को केंद्र सरकार की तरफ से कोई औपचारिक समर्थन नहीं है। बल्कि केंद्र सरकार ने श्रीश्री की कोशिशों से दूरी बना कर रखी हुई है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है लेकिन अगर बातचीत से मसला हल होता है तो स्वागत योग्य कदम है।
    बीते दिनों यूपी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने श्रीश्री से मुलाकात की थी। श्रीश्री कई इमान और गुरूओं के संपर्क में हैं। जिनमें निर्मोही अखाड़ा के आचार्य राम दास भी शामिल हैं।
    अखाड़ा परिषद और शिया वक्फ बोर्ड के बीच विवाद खत्म करने को लेकर सहमति बन गई है। शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए राजी है। शिया वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद सुलझाने वाले ड्राफ्ट का कवर पेज जारी किया है। कवर पेज पर लिखा है, एक रास्ता एकता की ओर। तस्वीर में एक तरफ मंदिर और दूसरी तरफ मस्जिद है। (एबीपी न्यूज)

     

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • अहमदाबाद/नई दिल्ली, 14 नवम्बर (नवभारत टाईम्स)। गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की कथित सीडी ने चुनावी राजनीति को गरमा दिया है। प्रदेश के स्थानीय चैनलों में इस वीडियो के टेलिकास्ट के बाद से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज है। लेकिन, इस बीच वीडियो को रिलीज करने वाले शख्स की बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के साथ तस्वीर सामने आने के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वीडियो को रिलीज करने वाले अश्विन सांकड़सरिया की मनसुख मांडविया के साथ तस्वीर सामने आने के बाद हार्दिक पटेल और कांग्रेस की ओर से बीजेपी पर हमले तेज हो सकते हैं। इस बीच सीडी प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि मैं नामर्द नहीं हूं, लेकिन मैं वीडियो में होता तो खुलकर सामने आता। 
    हार्दिक ने कहा, मैं मर्द हूं, नपुंसक नहीं, जो करना होगा सीना ठोक कर करूंगा। उन्होंने इसे गंदी राजनीति करार देते हुए कहा, जो सेक्स सीडी सामने आई है, वह फेक है। यह वीडियो फर्जी है और बीजेपी की गंदी पॉलिटिक्स का हिस्सा है। बीजेपी ने मेरी निजी जिंदगी पर निशाना साधा है। बीजेपी में इस तरह का कारनामा करने वाले कई लोग हैं, अब मैं भी उनकी सीडी लेकर आऊंगा।
    वीडियो रिलीज होने के बाद अब अश्विन की मांडविया के साथ फोटो भी वायरल हो रही है। इस बीच मनसुख मांडविया ने अश्विन के साथ अपनी तस्वीर को लेकर तो कुछ नहीं कहा है, लेकिन कांग्रेस पर जरूर हमला बोला है। 
    कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि कांग्रेस ने हार्दिक पटेल को सरदार वल्लभ 

    भाई पटेल के डीएनए वाला व्यक्ति बताया है, यह सरदार पटेल का अपमान है। मनसुख मांडविया ने कहा कि सरदार पटेल के साथ सीडी वाले व्यक्ति का नाम जोडऩा गलत है। गुजरात और देश की जनता कांग्रेस की इस हरकत को माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में बीजेपी को बीच में लाना ठीक नहीं है। 
    हार्दिक ने कहा है कि अगर मैं इसमें होता तो सीना ठोककर स्वीकार करता। हार्दिक ने ट्वीट करते हुए लिखा, अब गंदी राजनीति की शुरुआत हो गई है। मुझे बदनाम कर लो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन गुजरात की महिलाओं का अपमान किया जा रहा है। इसके बाद हार्दिक पटेल ने एक और ट्वीट कर कहा, जिसको जो करना है कर ले, पीछे हटने वाला नहीं हूं। जम के लडऩे वाला हूं। तेईस साल का हार्दिक अब बड़ा हो रहा है। मुझे बदनाम करने में करोड़ों का खर्च किया जाता हैं।

     

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • चेन्नई, 14 नवम्बर । तमिलनाडु में कभी राजनीति की धुरी रह चुकीं एआईएडीएमके नेता वीके शशिकला पर आयकर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। शशिकला, उनके रिश्तेदार और सहयोगियों से जुड़े ठिकानों पर आयकर छापे में 1,430 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगा है।

    आयकर विभाग के अधिकारियों ने टैक्स चोरी के शक में बीते गुरुवार को राज्य के विभिन्न शहरों में स्थित 187 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। ये सारे ठिकाने शशिकला, उनके भतीजे टीटीवी दीनाकरण और तमिल चैनल जया टीवी से जुड़े हैं।
    चेन्नई में एक वरिष्ठ टैक्स ऑफिसर के हवाले से बताया कि छापे में सात करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और पांच करोड़ रुपये मूल्य के जेवरात बरामद किए गए हैं।
    तमिलनाडु की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी शशिकला आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में बेंगलुरु की जेल में बंद हैं। वहीं छापे में बराबम इस अघोषित संपत्ति को लेकर पूछताछ के लिए टैक्स अधिकारियों ने शशिकला के भतीजे और जया टीवी के प्रमुख विवेक जयरमन को तलब किया है।
    आयकर विभाग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, जयरमन के 100 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। ये सभी खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर चल रहे थे। गुरुवार को आईटी अधिकारियों ने शशिकला से जुड़े 188 परिसरों एवं आवासों और फार्म हाउस की तलाशी ली थी। तलाशी अभियान तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, बेंग्लुरु और हैदराबाद के उन स्थानों पर चलाया गया जो शशिकला से जुड़े थे।(पीटीआई)
     

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