राजनीति

  • नयी दिल्ली/पटना : रेलवे के लीज घोटाले में बीते दिनों केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ की लालू परिवार के खिलाफ की गयी कार्रवाई के बाद बिहार में महगठबंधन के प्रमुख दल राजद व जदयू में बढ़ी तकरार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. इन दोनों प्रमुख नेताओं के बीच संपन्न इस मुलाकात को महागठबंधन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. उधर, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे के सवाल पर जदयू अपने स्टैंड पर कायम है. जदयू नेताओं ने शनिवार को एक बार फिर दोहराते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों का जवाब राजद को जनता के बीच विस्तार से देना होगा. वहीं, दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के जरिये नीतीश कुमार ने भाजपा से नजदीकी की अटकलों को विराम लगा दिया है. 
    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कांग्रेस उपाध्यक्ष नीतीश कुमार के बीच शनिवार को नयी दिल्ली में संपन्न हुई मुलाकात के दौरान करीब चालीस मिनट तब बातचीत हुई. बताया जाता है कि इस दौरान बिहार में उपजे सियासी हालात और तेजस्वी यादव के इस्तीफे के मुद्दे पर दोनों प्रमुख नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई. राजनीतिक प्रेक्षकों की माने तो राहुल गांधी के आवास पर संपन्न हुई इस मुलाकात के बाद नीतीश कुमार की भाजपा से नजदीकी की अटकलों को विराम लगा है. पूर्व में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात नहीं होने पर अटकलें लगायी जा रही थीं कि नीतीश कुमार अपना अलग रास्ता अख्तियार कर सकते है. गौर हो कि तेजस्वी मामले पर नीतीश कुमार ने अपना स्टैंड पहले ही साफ कर दिया है. जिसके बाद तेजस्वी यादव ने पटना में नीतीश कुमार से मिलकर अपना भी रक्षा था. 
    उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सवाल पर जदयू ने नेताओं ने शनिवार को एक बार फिर से पार्टी का स्टैंड स्पष्ट करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामले पर जदयू की नीति जीरो टॉलरेंस की है और इससे कोई समझौता नहीं होगा. जदयू नेताओं ने कहा कि तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों को लेकर राजद को पब्लिक डोमेन में जाकर विस्तार से जवाब देना होगा.   
    इन सबके बीच एक प्रमुख समाचार चैनल के वेबसाइट में छपी रिपोर्ट में सूत्राें के हवाले से बताया गया है कि जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव फिलहाल राजद से गठबंधन तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं. महागठबंधन के बीच बढ़ी तल्खी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव से मुलाकात भी की. (प्रभात खबर)

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  • मुंबई, 23 जुलाई। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र सामना को दिए साक्षात्कार में उद्धव ने बीजेपी के अच्छे दिन के वादे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अच्छे दिन सिर्फ सरकारी विज्ञापनों में ही दिखाई दे रहे हैं, बाकी सिर्फ आनंद ही आनंद है।
    उद्धव ठाकरे ने जीएसटी लागू करने के तरीके की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चीजें हो रही हैं वो सब गड़बड़ है। इसे देखते हुए शांत रहना मुश्किल है। उद्धव ने कहा फिलहाल समझदारी इसी में है कि जो हो रहा है उसे शांति से देखते रहो। लेकिन शिवसेना प्रमुख की विरासत चलानी हो तो शांत रहना हमारे खून में नहीं है। जो कुछ हो रहा है उसे सिर्फ देखते रहना भी हमसे नहीं होगा। इसलिए जहां-जहां जो चीज हमें ठीक नहीं लगती वहां-वहां हम अपने विचार मजबूती से रख रहे हैं।
    ठाकरे ने जीएसटी के बहाने ही मोदी सरकार पर सत्ता के केंद्रीयकरण का आरोप लगाया। उद्धव ने कहा कि विरोध करने के पीछे एक ही उद्देश्य है कि हमारे यहां सबका केंद्रीयकरण करना है या विकेंद्रीयकरण करना है? अगर जिसकी लाठी उसकी भैंस ही राज करने का तरीका है तो राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने पंचायती राज को निचले स्तर तक पहुंचाया था। आज मोदी प्रधानमंत्री हैं और उस स्वायत्तता को खत्म कर सब कुछ केंद्र के हाथ में रखने का काम शुरू है।
    जीएसटी के साथ नोटबंदी पर भी उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार को निशाने पर ले लिया। सामना को दिए इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने कहा कि चार महीने में 15 लाख लोग बेरोजगार हो गए। नौकरियां छूट गईं, जिन 15 लाख लोगों ने नौकरी गंवाई उनकी दाल-रोटी की व्यवस्था है क्या?
    तमाम मुद्दों पर सरकार की आलोचना के बीच उद्धव ने साफ किया कि इन बातों के लिए उन्हें सरकार विरोधी नहीं समझा जाना चाहिए। मुझे एक बात साफ करनी है कि जब मैं या शिवसेना कुछ बोलती है तो उस समय हमें सरकार विरोधी समझा जाता है। मैं सरकार विरोधी नहीं हूं। मैं जनता के साथ हूं।
    सामना को दिए साझात्कार में उद्धव ने सिक्किम बॉर्डर पर चीन के साथ चल रहे तनावों पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि शिवसेना बेशक बीजेपी के साथ है लेकिन वो वॉचमैन की भूमिका निभाती रहेगी। (आज तक)

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  • गांधीनगर: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बापू के नाम से मशहूर शंकर सिंह वाघेला ने कल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. वाघेला का ये कदम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि गुजरात में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं और  कांग्रेस के पास गुजरात में कोई बड़ा चेहरा नहीं है.

    मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं- वाघेला

    गांधीनगर में अपने 77वें जन्मदिन के मौके पर वाघेला ने समर्थकों का एक सम्मेलन बुलाकर कहा, ‘’मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं. अपने गले में कोई झंडा नहीं लगाना. मैं कोई दल में शामिल नहीं होऊंगा.विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा भेज रहा हूं.’’ कांग्रेस से वाघेला की नाराजगी पिछले लंबे समय से चल रही थी.

    खबरों के मुताबिक, वाघेला चाहते थे कि कांग्रेस उन्हें चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाए लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई. वाघेला ने न सिर्फ पार्टी छोड़ी है बल्कि कांग्रेस के विनाशकाल की भविष्यवाणी भी कर दी. वाघेला ने कहा, ‘’पार्टी ने हमको 24 घंटे पहले निकाल दिया है. पता नहीं मैं क्या कहने वाला था. विनाशकाले विपरीत बुद्धि.’’

    कांग्रेस ने कहा, वाघेला पर नहीं की गई कोई कार्रवाई

    वाघेला के कांग्रेस पर लगाए गए इन आरोप के बाद कांग्रेस की तरफ से भी सफाई दी गई. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘’उनके खिलाफ न कोई कार्रवाई की और न निकाला गया है. पद छोड़ने का निर्णय उनका अपना है. वो चाहते थे उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए.’’ कांग्रेस और वाघेला के बीच की खाई तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस क्रॉस वोटिंग की बात सामने आयी.

    कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के लिए वाघेला को जिम्मेदार माना!

    गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 57 विधायक हैं, लेकिन मीरा कुमार को केवल 49 कांग्रेसी विधायकों के वोट मिले. इस क्रॉस वोटिंग के लिए वाघेला को जिम्मेदार माना गया. पार्टी छोड़ने के वाघेला के एलान के पहले कांग्रेस के नौ विधायकों ने उनके साथ गुप्त बैठक की. यही नहीं मंच पर भी कांग्रेस और एनसीपी के कई विधायक मौजूद थे.

    कांग्रेस की मुश्किल में बीजेपी का फायदा

    खबरों के मुताबिक अगले महीने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले 10 से 12 विधायक कांग्रेस को झटका दे सकते हैं. यानी कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं. कांग्रेस की इस मुश्किल में बीजेपी को अपना फायदा दिख रहा है.

    हालांकि वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने के साथ ही ये एलान भी किया कि वो अब न बीजेपी में शामिल होंगे न किसी और दल में बल्कि राजनीति से ही संन्यास ले लेगें, लेकिन साथ ये भी कहा कि वो कभी रिटायर नहीं होंगे. वाघेला ने संन्यास तो लिया है पर भाषण में बता दिया है कि री एंट्री का रास्ता अभी खुला हुआ है. (एबीपी न्यूज़)

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  • अहमदाबाद: गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले सूबे का सियासी माहौल गरमा गया है. राज्य में कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता और पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफे का एलान किया. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि वो न तो किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम रहे हैं और नहीं ही अपनी कोई नई पार्टी का गठन कर रहे हैं.
    अपने 77वें बर्थडे के मौके पर बुलाए गए सम्मेलन में राजनीति की दुनिया बड़े और पुराने खिलाडी शंकर सिंह वाघेला ने राजनीति से संन्यास का एलान किया. उन्होंने अपने इस फैसले का एलान गांधीनगर में किया.
    शंकर सिंह वाघेला का कांग्रेस पार्टी छोड़ना कयास के एन मुताबिक रहा है, क्योंकि बीते कुछ दिनों से जिस तरह राजनीति के गलियारों में वाघेला दिख रहे थे उससे जाहिर था कि वो कांग्रेस से अपना नाता तोड़ सकते हैं. यानि पहले ही से ये कयास लगाए जा रहे थे कि वो कांग्रेस छोड़ने का एलान कर सकते हैं. वाघेला पहले से ही कांग्रेस नाराज थे. 15 दिन पहले उन्होंने गांधीनगर में एक सम्मेलन किया था, जिसमें कांग्रेस के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी.
    दिलचस्प बात ये है कि अपने इस्तीफे के एलान से एक घंटे पहले खुद शंकर सिंह वाघेला ने मंच से कहा था कि 24 घंटे पहले ही उन्हें कांग्रेस से निकाल दिया गया है. हालांकि, तब कांग्रेस के उच्च सूत्रों ने वाघेला इस दावे का खंडन किया था.
    कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों प्रदेश अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर रह चुके शंकर सिंह वाघेला ने इस मौके पर केशूभाई पटेल की सरकार से खुद के हटने से लेकर कांग्रेस छोड़ने का जिक्र किया और इस दौरान अपना दर्द बयान किया. दिलचस्प बात ये है कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहम भाई पटेल का शुक्रिया जरूर अदा किया. उनकी मदद को आज भी सराहा. उन्होंने कहा कि वो अहमद भाई पटेल के आभारी हैं जिन्होंने उनकी सही समय पर मदद की. केशूभाई से दूरी पर कहा, “केशुभाई पटेल की सरकार में मैं पराया हो गया इसलिए मैं सरकार से अलग हुआ.”
    कांग्रेस से अपने रिश्तों को बयान करते हुए शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि वो कांग्रेस सेवा दल में रहे और उन्होंने पार्टी की खूब सेवा की. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस से उनका पुराना नाता रहा है.
    शंकर सिंह वाघेला ने अपने ट्विटर अकाउंट के स्टेटस से कांग्रेस का पद हटा दिया है, साथ ही अब किसी भी कांग्रेसी को फॉलो नहीं कर रहे हैं. जब शंकर सिंह वाघेला अपनी बात रख रहे थे तब मंच पर कांग्रेस विधायक राघवजी पटेल और NCP के विधायक कांधल और बोस्की भी मौजूद थे.
    कांग्रेस से दूरी और किसी पार्टी में नहीं जाने के एलान के बाद भी कई सवालों की चर्चा हो रही है. सवाल पूछा जा रहा है ति वाघेला का अगला कदम क्या होगा? आखिर वो राजनीति में किस का समर्थन करेंगे. अपने बेटे को कैसे मजबूत करेंगे. ये सवाल बना हुआ.
    वाघेला ने आज अपने जन्मदिन पर सम-संवेदना समारंभ के नाम से एक बड़ा आयोजन किया.  वाघेला ने इस सम्मेलन में कांग्रेस के सभी विधायकों के अलावा एनसीपी के दो और जेडीयू के एक विधायक को भी न्योता दिया.
    कयास ये भी हैं कि वाघेला के नए फैसले पर कुछ कांग्रेस विधायक भी उनके समर्थन में पार्टी छोड़ सकते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में गुजरात कांग्रेस के कुछ विधायकों ने रामनाथ कोविंद को वोट दिया है. अगले महीने गुजरात की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने है. इनमें एक सीट कांग्रेस कोटे की है. कांग्रेस को जीत के लिए 47 विधायकों का समर्थन चाहिए. राज्य में पार्टी के 57 विधायक हैं, लेकिन वाघेला समर्थक विधायकों ने साथ छोड़ा तो कांग्रेस के लिए एक नई परेशानी खड़ी हो सकती है. ( एबीपी न्यूज़)

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  • पटना: बिहार में चल रहे राजनीतिक संकट में कयासों का दौर जारी है. बिहार कैबिनेट मीटिंग के बाद नीतीश, तेजस्वी और तेजप्रताप ने अलग से बैठक की जिससे नए कयासों को बल मिला है. हर कोई यही जानना चाहता हैं कि क्या उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफ़ा देंगे या नहीं. सब जानते हैं कि महागठबंधन का भविष्य उनके इस्तीफ़े पर निर्भर करता है. खबर आई थी कि तेजप्रताप और तेजस्वी ने कार्यालय जाना छोड़ दिया है और उनके विभागों की महत्वपूर्ण फाइलें उनके घर पर जा रही हैं.
    माना जाता है कि फिलहाल, तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े के लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मा दिया गया है. बताया जाता है कि बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी इस मुद्दे पर मध्यस्थता की भूमिका में लालू और नीतीश से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के घर पर 7 जुलाई को हुई सीबीआई छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया था वहीं अब तेजस्वी के मुद्दे पर कह रही है कि राजद को अपना रुख नरम कर महागठबंधन के हित में निर्णय लेना चाहिए.
    कांग्रेस तेजस्वी का इस्तीफ़ा चाहती है लेकिन सार्वजनिक रूप से बोल नहीं सकती. क्योंकि खुद कांग्रेस में कई मिसाल हैं जहां नेता पर आरोप लगने के बावजूद वे सत्ता में पद पर बने रहे. कांग्रेस को मालूम है कि इस बार उनका वास्ता एक तरफ नीतीश कुमार से पड़ा है जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करते और दूसरी तरफ लालू यादव हैं जो कई मामलों में आरोपी और चारा घोटाले के एक मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद भी भ्रष्ट आचरण करने से परहेज नहीं करते.
    सुशील मोदी ने फिर लगाए आरोप  
    बीजेपी नेता सुशील मोदी आरजेडी परिवार पर हमला जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि 2013-14 में 'मूंछ वाले' तेजस्वी यादव ने 13 बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया. उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान के जरिए भी हमला किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी मूंछ भी नहीं आई थी तब के केस सुशील मोदी उठा रहे हैं. लेकिन आज मोदी ने कहा कि ये मामले उनके मूंछ आ जाने के बाद है.
    उधर, राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि उनकी पार्टी ने पिछले हफ़्ते ये निर्णय ले लिया कि तेजस्वी के इस्तीफ़ा का सवाल नहीं है. अब जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि उनकी पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर संयम से काम लेते हुए महागठबंधन धर्म निभाते हुए इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन ये अनिश्चित काल के लिए नहीं माना जा सकता. (एनडीटीवी)

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  • वालेटा (माल्टा) !   लीबिया के एक विमान को शुक्रवार को दो लोगों ने अगवा कर लिया, जिसमें 82 पुरुष, 28 महिलाएं और एक नवजात सहित 118 यात्री सवार थे। विमान के माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतारे जाने के कुछ घंटों बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सेबा से त्रिपोली जा रहे अफ्रीकियाह एयरवेज के विमान को शुक्रवार को दो लोगों ने अगवा कर लिया था। बताया गया था कि इस शख्स के पास हथगोला था।

    टाइम्स ऑफ माल्टा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद सभी यात्रियों को रिहा करा लिया गया। विमान के यात्रियों ने अपराह्न 1.50 बजे (स्थानीय समयानुसार) के आसपास विमान से बाहर निकलना शुरू किया, जबकि दोनों अपहर्ता अपराह्न 3.40 बजे (स्थानीय समयानुसार) विमान से बाहर निकले और सैनिकों के समक्ष समर्पण कर दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अपहर्ता ने चालक दल को बताया कि वह गद्दाफी समर्थक है और यदि उसकी मांगों को पूरा कर दिया गया तो वह 111 यात्रियों को रिहा कर देगा लेकिन चालक दल को रिहा नहीं करेगा।

    इससे पहले, माल्टा के प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट ने ट्वीट कर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "सेबा से त्रिपोली जा रहे अफ्रीकियाह एयरवेज के विमान को माल्टा की ओर मोड़ दिया गया और इसे यहां उतारा गया। वैकल्पिक सुरक्षा एवं आपात अभियान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।"

    उन्होंने कहा, "इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि विमान में 111 यात्री सवार हैं जिनमें से 82 पुरुष और 28 महिलाएं और एक नवजात हैं।"

    समाचार एजेंसी लाना के मुताबिक, लीबिया की संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार ने विमान का अपहरण होने और इसे माल्टा में उतारे जाने की पुष्टि की थी।

    'टाइम्स ऑफ माल्टा' के मुताबिक, विमान के उतारे जाने के बाद 45 मिनट तक इंजन चालू था। माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे आने वाली अन्य सभी उड़ान सेवाएं रद्द कर दी गईं या उनकी दिशा बदल दी गई।

    भूमध्य द्वीप माल्टा लीबिया तट से लगभग 500 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।

    माल्टा में विमान अपहरण की पिछली बड़ी वारदात 23 नवंबर, 1985 को हुई थी, जब इजिप्ट एयर बोइंग 737 विमान को भी इस द्वीप देश की ओर मोड़ दिया गया था।

    24 घंटे तक चले बंधक संकट का अंत 62 लोगों की मौत के साथ हुआ था। इस दौरान, मिस्र के कमांडो तथा अपहर्ताओं के बीच भीषण झड़प हुई थी। तीन में से केवल एक अपहर्ता ही जिंदा पकड़ा जा सका, जिसे बाद में सजा दी गई।

    वहीं, 43 साल पहले इराक से माल्टा जा रहे एक जंबोजेट बोईंग 747 विमान को फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने अगवा कर लिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री डोम मिंटोफ ने अपहर्ताओं से सौदेबाजी कर विमान में मौजूद 247 यात्रियों तथा आठ विमान परिचारिकाओं को रिहा करा लिया था।

    ईंधन के बदले यात्रियों व विमान परिचारिकाओं को रिहा कराया गया था। विमान बाद में माल्टा से रवाना हो गया अंतत: अपहर्ताओं ने समर्पण कर दिया था।

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  • संयुक्त राष्ट्र।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फिलीस्तीन में अवैध इजरायली बस्तियों को खत्म करने और वहां जारी अन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव आज पारित कर दिया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर वीटो करने से मना कर दिया और उसने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

    इस प्रस्ताव में इजरायल से पूर्वी येरूशलम समेत फिलीस्तीन के इलाके को खाली कर वहां चल रही अन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आज मतदान हुआ जिसमें अमेरिका ने हिस्सा नहीं लिया।

    प्रस्ताव के पक्ष में कुछ 14 वोट पड़े जबकि एक सदस्य के तौर पर अमेरिका ने वोट नहीं दिया। मिस्र ने इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था लेकिन इजरायल ने ट्रंप से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा जिसके बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था।

    लेकिन मलेशिया, न्यूजीलैंड, सेनेगल और वेनेजुएला ने दोबारा इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। गौरतलब है कि अमेरिका इस मामले में परंपरागत तौर पर इजरायल का समर्थन कर उसे अब तक संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई से बचाता आया है लेकिन इस बार उसने ऐसा नहीं किया। 

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  • मास्को।  रूस की सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आज कहा कि रूस ने कभी हथियारों की दौड़ में शामिल होने की शुरूआत नहीं की और न ही भविष्य में ऐसा करेगा। आरआइए संवाद समिति ने रूस की सरकार के हवाले से आज इस बात की जानकारी दी।

    इससे पहले आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु हथियारों में विस्तार करने की योजना वाले बयान पर कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।  ट्रंप ने अमेरिका के परमाणु हथियारों की क्षमता में विस्तार करने को लेकर कहा कि यह हथियारों की एक दौड़ है और संयुक्त राज्य अमेरिका इसमें विजयी होगा। 

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