कारोबार

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  • नई दिल्ली, 23 सितंबर। जीएसटी लागू होने के बाद जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए व्यापारी सीए के साथ माथापच्ची कर रहे हैं और व्यापार में लगातार घाटा उठा रहे हैं, क्योंकि बढ़े हुए टैक्स देने से बचने के लिए ग्राहक कच्चे में माल मांगता है और व्यापारी ऐसा करें तो छापे का डर रहता है। ऐसे में छोटे व्यापारी जो जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वो इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं। इस संबंध में एनडीटीवी की टीम ने कश्मीरी गेट के ऑटो पार्ट्स में चल रहे कच्चे पक्के बिल के खेल की तफ्तीश की।
    कश्मीरी गेट में एशिया की सबसे बड़ी ऑटोपार्ट्स बाजार में सन्नाटा पसरा है, क्योंकि अधिकतर ऑटोपार्ट्स पर 28 फीसदी जीएसटी है, जिसके कारण व्यापार ठंडा है। लेकिन इस बाजार में दो तरह के व्यापारी है। एक व्यापारी जो जीएसटी के अंतर्गत रजिस्टर्ड हैं, जिन्हें हर माल 28 फीसदी जीएसटी लगा कर ही बेचना है और दूसरे वो व्यापारी हैं, जो बिना बिल दिये धड़ल्ले से माल बिना जीएसटी लिए बेच रहे हैं। बाजार में इस तरह के खरीद फरोख्त से जीएसटी के अंतर्गत रजिस्टर्ड व्यापारियों का काम बिल्कुल मंदा पड़ गया है। एनडीटीवी की टीम ने ऑटपार्ट्स के इस बाजार में जाकर दोनों तरह के व्यापारियों से मुलाकात की। बाजार में हम जीएसटी रजिस्टर्ड व्यापारी लोकेश से मिले और जाना कि वेगेनऑर के पांच पुर्जों हेडलाइट, टेल लाइट, साइड मिरर, बंपर और ग्रिल की कीमत जीएसटी लगने के बाद कितनी है।
    लोकेश ने बताया कि वो जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारी हैं, इसलिए 28फीसदी टैक्स लगाकर माल बेचते हैं। उन्होंने बताया कि हेडलाइट की कीमत जीएसटी लगाकर 830 रुपये, टेललाइट 320 रुपये, साइड मिरर 160 रुपये, बंपर 1088 रुपये, और ग्रिल 450 रुपये में बेचते हैं। लोकेश कहते हैं, ग्राहक हमसे कहता है 28 फीसदी टैक्स नहीं दे सकता कच्चे में कर लो बिल ना बनाओ। पर हम ऐसा कर नहीं सकते। क्या करें पर थोड़ी दूर कुछ व्यापारी बिना बिल के माल बेच रहे हैं, इसलिए ग्राहक वहीं जा रहे हैं।
    हमारी टीम जब लोकेश की दुकान से सिर्फ 400 मीटर दूर एक और व्यापारी के पास पहुंची, जो बिना बिल और बिना जीएसटी लगाए माल बेच रहा हैं। उस व्यापारी ने अपनी पहचान ना बताने की शर्त पर हमसे बात करने को तैयार हो गया। हमने उनसे बिना जीएसटी के वेगेनार के पांचों पुर्जों के रेट जाने तो हमारे होश उड़ गए।
    बिना बिल दिए माल बेचने वाले व्यापारी ने हमें बताया, वो हेडलाइट 700 रुपये, टेललाइट 280 रुपये, साइड मिरर 125रुपये, बंपर 900 रुपये और ग्रिल 450 रुपये में बेचते हैं। उस व्यापारी ने बताया कि ग्राहकों से वो जीएसटी नहीं वसूलते और ग्राहक भी बिल नहीं मांगता, क्योंकि अगर हमने उसे बिल दिया तो उसे 28 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा तो ऐसे में हमारा भी काम हो जाता है और ग्राहक भी खुश हो जाता है। अगर हम भी टैक्स वसूलेंगे तो ग्राहक माल ही नहीं लेंगे।
    पूरे खुलासे के बाद व्यापारी नेताओं का कहना है कि जीएसटी इतनी लगाई गई है कि ग्राहक बिना बिल माल खरीद रहा है सरकार या तो जीएसटी कम करे या फिर सारे व्यापारियों को जीएसटी के अंदर लाएं।  (एनडीटीवी)

     

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  • नई दिल्ली, 22 सितंबर । प्रधानमंत्री आवास योजना में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को नई निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) नीति की घोषणा की। नई नीति के तहत सस्ती आवास योजनाओं के लिए दो पीपीपी मॉडल तय किए गए हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों में निजी भूमि पर सस्ती आवास परियोजना विकसित करने पर केंद्रीय सहायता के रूप में बैंक कर्ज पर ब्याज के रूप में 2.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। दूसरे मॉडल के तहत यदि लाभार्थी बैंक कर्ज नहीं लेता है तो निजी भूमि पर बने मकान के लिए केंद्रीय मदद के तौर पर उसे डेढ़ लाख रुपये प्रति इकाई के हिसाब से सहायता दी जाएगी। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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  • नई दिल्ली, 22 सितंबर। अगर आपको बैंक में कोई जरूरी काम है तो इसे समय पर ही निपटा लें क्योंकि इस त्योहारी सीजन में बैंक लगातार चार दिन छुट्टी पर रह सकते हैं। 29 सितंबर को नवमी और 30 सितंबर को दशहरा होगा। इन दोनों दिन बैंकों की छुट्टी होगी। इसके बाद एक अक्टूबर को रविवार है और दो अक्टूबर को गांधी जयंती है ऐसे में बैंक लगातार चार दिन बंद रहेंगे। 
    लगातार चार दिन बंद रहने के पहले बैंकों में दो दिन छुट्टी रहेगी। 23 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार है और 24 सितंबर को रविवार है। इसलिए दोनों दिन बैंकों में छुट्टी रहेगी।  (लाइव हिन्दुस्तान)

     

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  • नई दिल्ली, 22 सितंबर। दिग्गज मीडिया ग्रुप एनडीटीवी का मालिकाना हक अब स्पाइसजेट एयरलाइंस के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह के हाथ में आ सकता है। अजय सिंह उन लोगों में शुमार होते हैं जो 2014 में भाजपा के प्रचार अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया, हां, सौदा हो चुका है और अजय सिंह संपादकीय अधिकारों के साथ एनडीटीवी पर नियंत्रण हासिल करने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सौदा करीब 600 करोड़ रुपए का है। इसके मार्फत अजय एनडीटीवी का 400 करोड़ रुपए का कर्ज भी अपने ऊपर ले रहे हैं। इस सौदे के हिसाब से एनडीटीवी में अब अजय सिंह के पास 40 और प्रणय रॉय तथा उनकी पत्नी राधिका के पास 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी।

    एनडीटीवी और इसके प्रमोटर- प्रणय व राधिका रॉय बीते दो साल से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज कर रखा है। उन पर एक बैंक से कर्ज लेकर उसे न चुकाने का आरोप है। इस मामले में बीती पांच जून को रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित चार ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे थे। इसके अलावा आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी एनडीटीवी से संबंधित मामलों की जांच कर रहे हैं। ईडी ने 2015 में एनडीटीवी को नोटिस जारी किया था। इसमें कहा था कि कंपनी में किए गए 2,030 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश में नियमों का उल्लंघन हुआ है। जबकि इसके अगले साल आयकर विभाग ने एनडीटीवी को नोटिस जारी किया। इसमें 2009-10 में हुए करीब 500 करोड़ रुपए के लेन-देन में कर चोरी का आरोप लगाया गया था।

    वहीं दूसरी तरफ अजय सिंह के बारे में भी कुछ चीजों का जिक्र जरूरी है। वे केंद्र में अटलबिहारी वाजपेयी की पहली एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार के दौरान वरिष्ठ मंत्री प्रमोद महाजन के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) रह चुके हैं।  इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन का डीडी स्पोर्ट्स चैनल शुरू कराया। साथ ही डीडी न्यूज से जुड़ी योजना में भी वे शामिल रहे। आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट अजय 2014 के चुनाव के दौरान भाजपा के प्रचार अभियान का हिस्सा रहे और कहा जाता है कि 'अबकी बार मोदी सरकारÓ का नारा उन्हीं के दिमाग की उपज था। (इंडियन एक्सप्रेस)

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  • नई दिल्ली, 21 सितंबर। अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सब्सिडियरी बैंकों के ग्राहक हैं? यदि हां तो एसबीआई का यह निर्देश आपको जरूर पता होना चाहिए। इसके तहत आपको जल्द से जल्द नई चेकबुक के लिए अप्लाई कर देना चाहिए क्योंकि 30 सितंबर के बाद से आपकी पुरानी चेकबुक अवैध/अमान्य हो जाएगी। इन पर लिखे हुए पुराने आईएफएस कोड भी अवैध हो जाएंगे। 
    एसबीआई ने अपने सब्सिडियरी बैंकों के कस्टमर्स से कहा है कि वे जल्द से जल्द नई चेकबुक और आईएफएस कोड के लिए अप्लाई कर दें। 
    एसबीआई से जुड़े सभी बैंक और भारतीय महिला बैंक के ग्राहकों पर यह आदेश लागू होगा। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि आपका खाता स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ रायपुर, भारतीय महिला बैंक में से किसी एक में भी है तो आपको नई चेकबुक इश्यू करवाने के लिए आवेदन दे देना चाहिए- 
    एसबीआई ने इस बाबत ट्वीट कर जानकारी दी। ग्राहक नई चेक बुक के लिए इंटरनेट और मोबाइल बैंक के जरिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा एटीएम और होम ब्रांच में जाकर भी अप्लाई कर सकते हैं।  (एनडीटीवी)

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  • नई दिल्ली: नवरात्र के मौके पर ऑनलाइन शॉपिंग के दीवानों के लिए देश की जानी मानी ई कॉमर्स कंपनियों ने जबरदस्त सेल पेश की है. पेटीएम मॉल, एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे दिग्गज ई कॉमर्स वेंचर कस्टमर्स के लिए न सिर्फ डिस्काउंट लेकर आए हैं बल्कि कैशबैक और एक्सचेंज ऑफर भी लाए हैं. पेटीएम पर 20 से 23 सितंबर तक, फ्लिपकार्ट पर 20 से 24 सितंबर तक, एमेजॉन पर 21 सितंबर से 24 सितंबर तक सेल चलेगी. आइए एक नज़र में जानें इन तीनों दिगग्ज कंपनियों की सेल से जुड़ी खास बातें...

    पेटीएम पर 'मेरा कैशबैक सेल'...

    पेटीएम ई कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले पेटीएम मॉल ने सोमवार को अपने पहले त्योहारी मौसम में 20 से 23 सितंबर तक चार दिनों के 'मेरा कैशबैक सेल' की घोषणा की है. यह प्लेटफॉर्म हर रोज 25 फोन खरीदारों को 100 प्रतिशत कैशबैक देगा और 200 ग्राहक प्रति दिन 100ग्राम पेटीएम गोल्ड पाएंगे. कंपनी इन चार दिनों की अवधि में 50 लाख से अधिक नए यूजर्स की उम्मीद कर रही है. यह सेल छोटे शहर व कस्बों के ग्राहकों को न्यूनतम कीमत पर ब्रांड उत्पादों की एक विस्तृत रेंज से खरीदारी करने की सुविधा देने में बड़ी भूमिका निभाएगी. ग्राहकों को एप्लाइंसेज, मोबाइल, फैशन उत्पादों में अनोखी कीमतें मिल रही हैं और उनके निकटतम ब्रांड अधिकृत स्टोर या दुकानदारों से उस उत्पाद की विश्वसनीय डिलिवरी भी मिल रही है. वहीं कंपनी की ओर से कहा गया कि हम हर रोज फोन्स और पेटीएम गोल्ड देकर इस उत्साह को बनाए रखेंगे.
    कंपनी ने एक बयान में कहा था कि इसके तहत ग्राहकों को 501 करोड़ रुपये के सुनिश्चित कैशबैक मिलेंगे, क्योंकि कंपनी एकदम अलग कीमतों पर उत्पादों की एक विस्तृत रेंज देने के लिए ब्रांड अधिकृत स्टोर, बड़े रिटेल स्टोर्स और छोटे दुकानदारों के साथ काम करती है. मेरा कैशबैक सेल में ऐपल, सैमसंग, एलजी, ओप्पो, वीवो, सोनी, एचपी, लेनोवो, जेबीएल, फिलिप्स, प्यूमा, एलेन सॉली, ली, पेपे, लिवाइस, वेरो मोडा, पेपे, किलर, वान ह्यूसेन, एक्शन, वुडलैंड, कैटवॉक, स्केचर्स, रेड टेप, क्रॉक्स, टाइमेक्स, सफारी, लैवी, कैप्रीज, बैगइट समेत कई टॉप ब्रांड्स के प्रॉडक्ट्स मिलेंगे.

    फ्लिपकार्ट पर 'द बिग बिलियन डेज'...

    जब सभी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां कमर कर चुकी हैं त्योहारी मौसम को भुनाने का तो एमेजॉन क्यों पीछे रहती! फ्लिपकार्ट ने 20 सितम्बर से अपने पांच दिवसीय 'द बिग बिलियन डेज' की शुरुआत कर दी है. बिग बिलियन सेल 24 सितंबर तक चलेगी. इस बार मोबाइल, लैपटॉप, कैमरे और टीवी की बिक्री के लिए जबरदस्त ऑफर दे रही है. इस सेल में घर के बाकी सामानों, फैशनेबल कपड़ों, फर्नीचर और ऐक्सेसरीज को भी सेल में शामिल किया गया है. वहीं एसबीआई के डेबिट और क्रेडिट कार्ड धारकों को शॉपिंग के वक्त इनके इस्तेमाल करने पर 10 फीसदी डिस्काउंट भी दिया जा रहा है. कंपनी ने कहा है कि कुछ खास एक्सक्लूसिव प्रॉडक्ट्स पर बिड ऐंड विन का ऑप्शन भी दिया जा रहा है. बजाज फिनसर्व एंड क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर नो कॉस्ट ईएमआई का ऑप्शन मिलेगा. फोनपे के जरिए खरीददारी पर 10 फीसदी कैसबैक मिलेगा. यह सुविधा केवल उन्हीं ग्राहकों को मिलेगी जो सामान की कीमत फोनपे के जरिए चुकाएंगे.
    बीबीडी में कंपनी न केवल बायर्स को बल्कि अपने सेलर्स और अपने कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन दे रही है.  विक्रेताओं के लिए ‘बिग बोनांजा’ की पेशकश की है.  फ्लिपकार्ड फील्डर्स को सेडान और हैचबैक कारें, मोबाइल फोन, टेलीविजन, यात्रा पैकेज इत्याादि तोहफे में दिए जाएंगे. फ्लिपकार्ट केयर टच, स्मार्ट फुलफिलमेंट और एक्सप्रेस प्रोग्राम जैसी पहलें विक्रेताओं को सीधे फायदा पहुंचायेगी और उनके कारोबार को बढ़ाने में मदद करेगी.

    एमेजॉन पर 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल'...

    एमेजॉन ने भी 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' के तहत विशेष रूप से अपने 'प्राइम' ग्राहकों के लिए 20 सितम्बर दोपहर 12 बजे से सेल शुरू कर दी. एमेजॉन इंडिया के सभी ग्राहकों के लिए त्योहार पर बिक्री 21 सितम्बर से 24 सितम्बर तक चलेगी. कंपनी ने बताया कि पहली बार, ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 20 सितम्बर को दोपहर 12 बजे से केवल प्राइम सदस्यों के लिए शुरू हुआ. अमेजन इंडिया स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, बड़े उपकरण, बेबी उत्पाद, कपड़े और सामान, सौंदर्य उत्पाद, घर और रसोई उत्पाद, फर्नीचर और स्टेशनरी उत्पाद समेत कई कैटिगरीज़ में ऑफर की पेशकश कर रही है.
    ग्रेट इंडिया फेस्टिवल में जिन उत्पादों पर छूट दी जाएगी, उनमें स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप्स, एयर कंडीशनर्स, वाशिंग मशीन्स, रेफ्रिजेटर्स, कपड़े, फैशन एक्सेसरीज, ब्यूटी और मेकअप, पर्सनर केयर, बुक्स, बेबी उत्पाद, खिलौने, जूते, पालतू पशुओं के लिए उत्पाद, खाने पीने वाली चीजों, बागवानी के सामान शामिल हैं. अमेजन ने 11 बैंकों के साथ साझेदारी में ईएमआई स्कीम लांच की है जिसकी अवधि छह महीनों की है. साथ ही बजाज फिनसर्व से भी भागीदारी की है. (एनडीटीवी)

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  • नई दिल्ली, 20 सितंबर। त्योहारी सीजन से पहले रेलवे के करीब 12.30 लाख नॉन गैजेटेड कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी आयी है। केंद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन का वेतन बतौर बोनस देने का फैसला किया है।
    यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया। खास बात यह है कि बढ़ा हुआ बोनस दशहरा और दुर्गापूजा की छुट्टियों से पहले ही मिल जाएगा।
    कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, रेलवे के नॉन-गैजटेड इम्प्लॉइज को 78 दिन का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) देने का फैसला किया गया। रेल कर्मचारियों को यह बोनस वित्त वर्ष 2016-17 के लिए दिया जाएगा। इसमें आरपीएफ/आरपीएसएफ कर्मिचारी शामिल नहीं हैं।
    बोनस के लिए खर्च होंगे 2245 करोड़
    फैसले के मुताबिक 78 दिन का वेतन बतौर बोनस देने में करीब 2245.45 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बोनस के भुगतान की अधिकतम सीमा 7000 रुपये प्रति महीना तय की गयी है। बोनस के लिए पात्र रेल कर्मचारी के लिए 78 दिनों की अधिकतम देय राशि 17,951 रूपए है।
    त्योहारी सीजन में 4000 स्पेशल ट्रेनें चलाएगा रेलवे
    त्योहारों के मौसम में रेलवे देश भर में 4000 स्पेशल ट्रेन चलाएगा। 306 नियमित तौर पर चलने वाली ट्रेनों में 9500 अतिरिक्त डिब्बों की व्यवस्था भी की जा रही है। रेलवे ने इसके लिए तैयारी पहले ही शुरू कर दी है और ये अतिरिक्त डिब्बे 30 अक्तूबर तक रहेंगे। (एबीपी न्यूज)

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  • नई दिल्ली, 20 सितंबर। जब भी हम दफ्तर के लिए या फिर बाहर घूमने के लिए निकलते हैं तो अपने साथ पानी की बोतल रखना नहीं भूलते हैं। अगर गलती से पानी की बोतल अपने साथ रखना भूल जाते हैं तो हमें दुकान से खरीदना पड़ता है। आमतौर पर साधारण पानी बोतल 15-20 रुपये तक मिल जाती है। कुछ ब्रांडिड कंपनियों की पानी की बोतल 50 से 100 रुपये तक में मिल जाती है। लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर आपको बाहर से पानी की बोतल खरीदना पड़े और वह 100-200 रुपये में नहीं। बल्कि लाखों में मिले तो आपको कैसा लगेगा। जाहिर तौर पर आप एक क्षण के लिए हैरान रह गए होंगे। लेकिन भारतीय बाजारों में यह पानी की बोतल बहुत ही जल्द दिखने वाली है। जिसकी कीमत लाखों में होगी।
    इस पानी की बोतल को देखकर आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आप पानी की बोतल खरीद रहे हैं। बल्कि ऐसा एहसास होगा कि आप महंगी वाइन खरीद रहे हैं। इस पानी की बोतल को आप आर्डर देकर खरीद सकते हैं। आर्डर के बाद पानी की बोतल तैयार करने वाली कंपनी इसे सीधे बेवर्ली हिल्स से आप तक पहुंचाएगी, जिसके बदले आपको 65 लाख रुपये चुकाने होंगे।  इस बोतल की कैप गोल्ड की बनी हुई है, जिस पर 14 कैरट के 600 वाइट और 250 ब्लैक डायमंड्स लगे हुए हैं। 
    65 लाख रुपये में मिलने वाली पानी की इस बोतल को खासतौर से लक्जरी कलेक्शन का रूप दिया गया है। इस बोतल की कैप गोल्ड की बनी हुई है, जिस पर 14 कैरट के 600 वाइट और 250 ब्लैक डायमंड्स लगे हुए हैं। हर बोतल के लिए अलग सा एक केस भी बनाया गया है। पानी की इस बोतल को बेवर्ली हिल्स 90एच2ओ का नाम दिया गया है। अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए कंपनी ने बेवर्ली हिल्स 90एच2ओ का एक साल का लाइफस्टाइल कलेक्शन भी रखा है।
    पानी की बोतल तैयार करने वाली कंपनी इस प्रोडक्ट को इंडिया में उतारने की पूरी तैयारी कर चुकी है। माना जा रहा है कि कंपनी इसे अगले साल भारत में उतार सकती है। इस कंपनी का हेडक्वार्टर कैलिफोर्निया के बेवर्ली हिल्स में है। कंपनी पानी को ऊंचे पहाड़ों के झरनों से लेती है। यह पानी स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी उत्तम है। पानी में किसी तरह की कोई मिलावट नहीं है।
    इस पानी को बोतल में लाने वाली बेवर्ली हिल्स ड्रिंक कंपनी के को-फाउंडर और प्रेजिडेंट जॉन ग्लक का कहना है कि बेवर्ली हिल्स 90एच2ओ का टेस्ट बिलकुल स्मूथ और हल्का होगा।
    जो लोग इस पानी के डायमंड कलेक्शन को नहीं खरीद सकते उन्हें उदास होने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने इसी ब्रांड को दो अलग कैटेगरी के साथ भी उतारा है, जिसके अंदर 4 सब प्रोडक्ट्स हैं। इसमें 1 लीटर की बोतल के साथ 500 एमएल का पैक भी उपलब्ध है। माना जा रहा है कि कंपनी के इस प्रोडक्ट्स की डिमांड लक्जरी होटलों और बड़े रेस्टोरेंट्स के अलावा नाइट क्लब्स में होगी। इस सीरीज के सबसे छोटे पैक की कीमत 800 रुपए होगी।
    इस ब्रांड ने अपना पहला इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट कर लिया है, जिसमें भारत, अरब सहित दुनिया के 18 देश शामिल हैं। मध्य एशिया में इस ब्रांड के अरब के शाही परिवार से अच्छे संबंध रहे हैं। हिंदुस्तान में बेवर्ली हिल्स 90एच2ओ 2018 के मध्य में लॉन्च होने की उम्मीद है।  (जनसत्ता)

     

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  • त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले मोबाइल कंज्यूमर के लिए एक खुशखबरी है। जी हां, आपका मोबाइल बिल और भी कम होने जा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि टेलीकॉम नियामक संस्था ट्राई ने इंटर कनेक्ट यूजर चार्ज में भारी कटौती की है। इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज वो रकम है जो फोन कंपनियां एक दूसरे का कॉल कनेक्ट के लिए लेती हैं। जैसे कि अगर आइडिया का एक यूजर एयरटेल नंबर पर कॉल करता है तो आइडिया को कुछ शुल्क एयरटेल को चुकाना पड़ता है। इसे रकम को इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज कहते हैं। टेलीकॉम रेगुलरेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज की समीक्षा एक साल पहले शुरू की थी। अब ट्राई ने इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज को वर्तमान में प्रति मिनट 14 पैसे से घटा कर 6 पैसे प्रति मिनट कर दिया है। नयी कीमतें अक्टूबर से लागू होंगी। लेकिन ट्राई की मंशा है कि इस चार्ज को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक जनवरी 2020 से इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए।
    ट्राई ने अपने नये आदेश में कहा है, ‘ये पाया गया है कि इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज घटाने से उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचा है और कॉम्पीटिशन भी बढ़ा है। मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज (IUC) में कटौती से यूजर्स को और भी फायदा पहुंचने वाला है।’ हालांकि मोबाइल क्षेत्र की पुरानी कंपनियों भारती, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेलुलर को ट्राई का ये कदम पसंद नहीं आया है और वे इसका विरोध कर रही है। यहां तक की ये कंपनियां इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज में इजाफे की मांग कर रही हैं। हालांकि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जिओ ने इन कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है। इंटरकनेक्ट यूजर चार्ज कम करने का सबसे ज्यादा फायदा जिओ को ही मिलने वाला है। रिलायंस जिओ ने पिछले साल सितंबर में मोबाइल मार्केट में एंट्री करते हुए बड़ा धमाका किया था और बहुत ही कम रेट पर वॉयस कॉलिंग की सुविधा दी थी, यही नहीं जिओ ने कई ऑफर पर लाइफ टाइम फ्री वॉयस कॉलिंग की भी सुविधा दी थी।
    टेलीकॉम इंडस्ट्री पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द ही जिओ नये टैरिफ रेट की घोषणा करने वाला है। इधर उम्मीद ये भी जताई जा रही है कि ट्राई के इस कदम के खिलाफ कुछ कंपनियां अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। एयरटेल, वोडाफोन आइडिया जिओ के लॉन्च के बाद से ही नुकसान सह रही हैं। इस घोषणा के बाद उनपर और भी दबाव बढ़ सकता है।

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  • नई दिल्ली, 19 सितंबर। अगस्त महीने के लिए जीएसटी रिटर्न भरने में अब 48 घंटे से भी कम समय रह गया है, लेकिन अभी तक महज 6.9 लाख कर धारकों ने जीएसटी रिटर्न भरा है। जबकि जीएसटी के तहत 85 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इसमें जहां 23.18 लाख नए रजिस्ट्रेशन हैं। वहीं, 62.65 लाख वे करधाता हैं, जो पुरानी टैक्स नीति से इस नई टैक्स नीति में दाखिल हुए हैं। 48 घंटों से भी कम समय में जीएसटी रिटर्न का आंकड़ा काफी कम है। ऐसे में आखिरी वक्त में रिटर्न भरने के लिए भीड़ बढ़ सकती है।
    जीएसटीएन पोर्टल में तकनीकी दिक्कत आने के चलते केंद्र सरकार ने जीएसटी रिटर्न फाइल करने की तारीख बढ़ा दी थी। तारीख बढ़ाने के बाद भी जीएसटी रिटर्न भरने के आंकड़े में कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि सोमवार तक महज 6.9 लाख टैक्सपेयर्स ने ही जीएसटी रिटर्न फाइल किया है।
    जीएसटी नेटवर्क में आई तकनीकी दिक्कतों की जांच के लिए सरकार ने एक मंत्रियों का समूह गठित किया है। समूह का नेतृत्व कर रहे बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को बताया था कि अगस्त के लिए शनिवार तक 3.05 लाख लोगों ने ही रिटर्न भरा है। उन्होंने बताया कि जुलाई के लिए 46 लाख टैक्सपेयर्स ने जीएसटी रिटर्न भरा है।
    अगस्त के लिए जीएसटी रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 20 सितंबर है। टैक्सपेयर्स को जीएसटी आर 3बी फॉर्म भरना है। यह एक सिंगल फॉर्म है, जिसमें सभी टैक्सपेयर्स को अपने रिटर्न के बारे में बताना है। इसमें कंपनियों व बिजनेसेस को अपनी खरीद और बिक्री को लेकर जानकारी देनी है। इसके अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) समेत अन्य चीजों की जानकारी देनी होगी। (आज तक)

     

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  • नई दिल्ली, 19 सितंबर। उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद इसे करीब 600 वन-स्टार रेटिंग मिल गई। लगभग 700 से कुछ अधिक लोगों ने इस ऐप को पांच-स्टार रेटिंग दी।
    भारत के बाजार के लिए विशेष रूप से तैयार भुगतान ऐप्लीकेशन तेज ने सोमवार को अपने उद्घाटन के दिन धीमा आगाज किया। इसे ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों ने शिकायत की कि इस चिरप्रतीक्षित सेवा मंच पर उन्हें साइन अप करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। कई लोगों ने इस ऐप के इस्तेमाल में आई दिक्कतों के बाद ट्विटर और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों पर नाखुशी जाहिर की। कुछ लोगों ने तेज को गूगल के प्ले स्टोर पर एक-स्टार की रेटिंग दी। उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद इसे करीब 600 वन-स्टार रेटिंग मिल गई। करीब 700 से कुछ अधिक लोगों ने इस ऐप को पांच-स्टार रेटिंग दी। 
    गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग इस सेवा का लाभ उठाने के लिए साइन अप करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे पंजीयन असफल होने के कई मामले सामने आए। प्रवक्ता ने कहा कि गूगल इंडिया ऐप की उन सभी तकनीकी दिक्कतें दूर करने में जुटे हैं, जिनकी शिकायतें उपयोगकर्ता कर रहे हैं। तेज का उद्घाटन स्वयं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किया था, इसलिए इससे उम्मीदें और भी बढ़ गई थीं।
    गूगल अपना कोई उत्पाद सार्वजनिक करने से पहले पब्लिक बीटा के माध्यमों से इसे जारी करती है। कंपनी को इससे शुरू में ही तकनीकी खामियां (अगर आती हैं तो) दूर करने में मदद मिल जाती है। तेज के मामले में गूगल ने इसे सीधे ऐन्ड्रॉयड और आईओएस के उन सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध करा दिया, जिनका यूपीआई संचालित करने वाले 55 बैंकों में किसी भी एक में भी खाता है।
    कंपनी का यह ऐप यूपीआई पर आधारित है, जो ऐन्ड्रॉयड और आईओएस चालित स्मार्टफोनों पर काम करेगा। कंपनी इस ऐप के जरिए लेन-देन के लिए कोई शुल्क नहीं लेगी और उपयोक्ता इसके जरिये अपने बैंक खातों से सीधे भुगतान कर सकेंगे और पैसा हासिल कर सकेंगे।  लोग ऐप तेजी से डाउनलोड कर रहे थे, लेकिन इसे संभालने के लिए बैंडविड्थ नहीं था। गूगल जैसी नामी कंपनी के मामले में इसे अपवाद ही माना जा सकता है, जिसके करीब 1 अरब से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के पास पर्याप्त तकनीकी ढांचा उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसा हुआ। एनपीसीआई के जरिये ही सारे यूपीआई परिचालन होते हैं।  
    तेज की शुरुआत के बाद भारत के डिजिटल भुगतान खंड में कदम रखने वाली नामी कंपनियों में गूगल का नाम भी जुट जाएगा। कंपनी ने फेसबुक और इसकी सहायक व्हाट्सऐप को यूपीआई आधारित भुगतान सेवा शुरू करने के मामले में पीछे छोड़ दिया है। भीम, फोनपे और पेटीएम के साथ गूगल का कड़ा मुकाबला होगा।
    विश्लेषकों का मानना है कि गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्रूकॉलर जैसी दिग्गज इंटरनेट कंपनियों के डिजिटल भुगतान खंड में कदम रखने से देश में यूपीआई के जरिये लेन-देन खासा बढ़ जाएगा। हालांकि लोगों की पसंद-नापसंद की बारीक समझ होने के कारण गूगल इस क्षेत्र में दूसरी कंपनियों पर भारी पड़ सकती है। गार्टनर में रिसर्च डाइरेक्टर डीडी मिश्रा ने ई-मेल के जरिये एक बयान में कहा, लोगों की प्राथमिकताओं के बारे में गूगल के पास अच्छी जानकारी है। इसकी मदद से कंपनी उपयोगकर्ताओं को दिलचस्प विकल्प उपलब्ध कराएगी।
    गूगल के उपाध्यक्ष सीजर सेनगुप्ता ने कहा कि  यह उत्पाद भारत के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जिनमें भारत पश्चिमी देशों से आगे निकल जाएगा और भुगतान व वाणिज्य एक ऐसा ही क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि तेज ऐप अंग्रेजी और सात भारतीय भाषाओं हिंदी, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मराठी, तमिल और तेलुगू में उपलब्ध है और देश भर में लोग इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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  • अजय मोदी 
    नई दिल्ली, 19 सितंबर (बिजनेस स्टैंडर्ड)। यूटिलिटी वाहन विनिर्माता महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने अमरीकी वाहन कंपनी फोर्ड के साथ आज एक करार का ऐलान किया। इसके तहत दोनों कंपनियां साथ मिलकर उत्पादों, खासकर इलेक्ट्रिक और कनेक्टेड वाहनों के विकास की संभावना तलाशेगी। इस साझेदारी से फोर्ड को तेजी से विकास कर रहे भारतीय बाजार में आधार बढ़ाने में मदद मिलेगी और महिंद्रा को वैश्विक बाजार में पैठ बनाने में सहूलियत होगी। मारुति सुजूकी और हुंडई के वर्चस्व वाले घरेलू यात्री कार बाजार में महिंद्रा और फोर्ड की बाजार हिस्सेदारी एक अंक में ही है। 
    दोनों कंपनियों की टीमें तीन साल तक साथ मिलकर काम करेंगी और इस दिशा में आगे किसी तरह की रणनीतिक साझेदारी का निर्णय तीन साल पूरे होने के बाद ही किया जाएगा। एमऐंडएम के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने कहा, वाहन उद्योग को दुनिया भर में नई प्रौद्योगिकी, टिकाऊ नीतियों और शहरी गतिशीलता के लिए नए मॉडल के विकास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों को देखते हुए हमें बाजार के नए रुझानों का अनुमान लगाने, नए विकल्प तलाशने की जरूरत है, जिससे नए अवसरों की राह खुल सकती है।
    यह पहला मौका नहीं है जब महिंद्रा और फोर्ड ने भारत में हाथ मिलाया हो। महिंद्रा ने 1990 के दशक में फोर्ड के साथ साझेदारी की थी जिससे फोर्ड भारतीय बाजार में प्रवेश कर पाई थी। फोर्ड की भारत में पहली कार एस्कॉर्ट इसी साझेदारी के तहत बनाई गई थी। साल 2005 में फोर्ड ने संयुक्त उपक्रम में महिंद्रा की 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी। इसके बाद महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने फ्रांस की वाहन कंपनी रेनो के साथ भारत में उसकी सिडैन लोगान के निर्माण और बिक्री के लिए संयुक्त उद्यम बनाया। लेकिन यह करार भी लंबा नहीं चल पाया। अप्रैल 2010 में महिंद्रा ने संयुक्त उद्यम में रेनो की हिस्सेदारी खरीद ली। 
    यूटिलिटी क्षेत्र की दिग्गज महिंद्रा फोर्ड के साथ इस साझेदारी में कार के क्षेत्र पर पुनर्विचार कर सकती है। यह साझेदारी पहले किए गए ऐसे करार से कहीं ज्यादा व्यापक है और इसमें कारों के वितरण से लेकर पुर्जों की आपूर्ति तक पर विचार किया जाएगा। भारत की तीसरी सबसे बड़ी वाहन कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को प्रतिस्पर्धी कंपनियों के यूटिलिटी वाहनों से तगड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी में सेंध लग रही है। फोर्ड भी पिछले कुछ समय से 3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर ही अटकी हुई है, जबकि कुछ वर्षों से वह भारत से सबसे बड़ी वाहन निर्यातक के तौर पर उभरी है। फोर्ड के पास अतिरिक्त क्षमता है, जिसका महिंद्रा उपयुक्त इस्तेमाल कर सकती है। भारत फिलहाल दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कार बाजार है और 2020 तक तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने की उम्मीद है।                      
    फोर्ड के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं वैश्विक बाजार के अध्यक्ष जिम फर्ली ने कहा, महिंद्रा के साथ आपसी समझौते पर किए गए हस्ताक्षर से हमें साथ मिलकर काम करने और वाहन उद्योग में आने वाले बदलावों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। यूटिलिटी बाजार में विकास की काफी संभावना है और मोबिलिटी तथा किफायती बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी में प्राथमिकता पर रखा है।
    आज की घोषणा टाटा मोटर्स के उस निर्णय के करीब तीन माह बाद की गई है जब टाटा मोटर्स ने फोक्सवैगन समूह के साथ मिलकर उत्पादों के विकास हेतु साझेदारी करने के लिए जारी बातचीत खत्म करने का निर्णय किया था। स्थानीय और वैश्विक बाजार में तेजी से बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय वाहन कंपनियां अग्रणी वैश्विक ब्रांडों के साथ साझेदारी की जरूरत महसूस कर रही हैं। हाल ही में बजाज ऑटो ने भारत में मझोले वजन के मोटरसाकिल बनाने के लिए ब्रिटेन के मोटरसाइकिल ब्रांड ट्रायंफ के साथ करार किया है।
    मारुति सुजूकी के पूर्व प्रबंध निदेशक जगदीश खट्टïर ने कहा कि आज के समय में वैश्विक स्तर पर साझेदारी का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, नए उत्पाद के विकास में काफी लागत तथा समय की जरूरत होती है। हर कंपनी की अपनी कुछ खासियत होती है। इसी कारण साथ आने वाली दोनों कंपनियों के लिए गठजोड़ फायदे का सौदा होता है। जापानी वाहन कंपनी टोयोटा ने भी सुजूकी के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए साझेदारी की है।

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  • मुंबई, 17 सितंबर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने अकाउंट होल्डर्स के खाते में मिनिमम 5,000 रुपये का बैलेंस न होने पर फाइन लगाने के नियम पर पुनर्विचार कर रहा है। इस नियम को लेकर काफी आलोचना झेल रहे एसबीआई ने सफाई भी दी है। हाल ही में छात्रों और गरीबों के अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर पेनल्टी के रूप में पैसे काटने को लेकर एसबीआई मीडिया के निशाने पर आ गया था।
    एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि इस नियम पर एसबीआई प्रबंधन पुनर्विचार कर रहा है। एसबीआई के 40 करोड़ सेविंग्स अकाउंट्स में से 13 करोड़ प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खोले गए थे। ये अकाउंट्स बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स (बीएसडीए) हैं। बीएसडीए के तहत देश के वंचित वर्ग के लोगों के बैंकअकाउंट खोलना अनिवार्य है। बीएसडीए अकाउंट्स में सारी सुविधाएं आम खातों जैसी ही होती हैं, लेकिन इसमें चेकबुक की सुविधा नहीं होती है। 
    एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर ने इस मुद्दे पर आगे कहा, हम स्कूलों को छात्रों के बैंक अकाउंट्स बीएसडीए के अंतर्गत खुलवाने को सलाह दे रहे हैं। हम वैसे नॉर्मल अकाउंट होल्डर्स जो अपने खाते में मिनिमम बैलेंस रखने में असमर्थ हैं उन्हें भी अपना अकाउंट बीडीएसए में ट्रासंफर करवाने की सलाह दे रहे हैं। बीडीएसए अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं है। इससे अकाउंट होल्डर्स पेनल्टी देने से बच जाएंगे।
    उन्होंने आगे बताया, पिछली तिमाही में लगभग 6 करोड़ खातों में मिनिमम बैलेंस से कम राशि जमा थी। हमारे लिए यह पहचान कर पाना मुश्किल होता है कि इन अकाउंट्स में कौन से गरीब लोग हैं और कौन नहीं। हालांकि रजनीश कुमार ने फिलहाल मिनिमम बैलेंस के नियम को हटाने की अटकलों को खारिज कर दिया है।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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  • नई दिल्ली, 17 सितंबर। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को न्यूनतम 21 हजार रुपये सैलरी का लाभ जनवरी 2018 से मिल सकता है। इस प्रक्रिया से जुड़े वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। ऐसे में केंद्रीय कर्मियों को बढ़ी हुई सैलेरी के लिए तीन महीने और इंतजार करना होगा। 
    वर्तमान में केंद्रीय कर्मियों की न्यूनतम तनख्वाह 18 हजार रुपये प्रतिमाह है। कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि सरकार न्यूनतम सैलेरी 26 हजार रुपये करे, हालांकि बाद में न्यूतनम सैलेरी 21 हजार रुपये करने के मुद्दे पर वित्त मंत्रालय की विसंगति समिति यानी एनोमली कमेटी एवं कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति बन गयी। यह कमेटी सितंबर 2016 में कार्मिक विभाग के सचिव के नेतृत्व में गठित की गयी थी। समिति व केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों के बीच लगातार वार्ता जारी थी, जिस पर पिछले दिनों अंतिम सहमति बन गयी थी।
    सरकार ने इस कमेटी का गठन न्यूनतम सैलेरी पर कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए उनके प्रतिनिधियों से वार्ता के लिए बनायी थी। पूर्व में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने केंद्रीय कर्मियों की न्यूनतम सैलेरी 18 हजार रुपये तय की थी। यह न्यूनतम सैलेरी फिटमैंट फैक्टर के आधार पर लागू की गयी थी जो समान रूप से सभी वर्ग के केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.57 गुणा है, लेकिन अब निचले स्तर के कर्मियों की सैलेरी 21 हजार रुपये हो जाने पर यह 3.0 गुणा हो जायेगा।
    सरकार ने कर्मचारी संगठनों की 26 हजार रुपये न्यूनतम सैलेरी की मांग को यह कह कर खारिज कर दिया था कि यह वेतन संशोधन के फार्मूला के अनुसार, 3.68 गुणा हो जायेगा, जिसे लागू करना संभव नहीं है। वहीं, कर्मचारी संगठन 18 हजार रुपये की सैलेरी को अपर्याप्त बता रहे थे और उनका कहना था कि इतनी सैलेरी होने पर वे अधिक सैलेरी वाली दूसरी नौकरी के लिए प्रयासरत रहेंगे, जिसे कामकाज प्रभावित होता है।
    सातवें वेतन आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय कर्मियों का न्यूतनम वेतन सात हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये एवं अधिकतम वेतन 80 हजार रुपये से बढ़ा कर 2.25 लाख रुपये किया गया है। वहीं, कैबिनेट सेक्रेटरी की तनख्वाह 2.50 लाख रुपये तय की गयी है। (प्रभात खबर)

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  • नई दिल्ली, 17 सितंबर। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सोमवार को गूगल की एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) आधारित डिजिटल भुगतान सेवा ऐप तेज को लॉन्च करेंगे जिसके बाद डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम क्षेत्र में प्रतियोगिता और तेज हो जाएगी। वित्त मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए शनिवार को ट्वीट कर बताया, वित्त मंत्री अरुण जेटली सोमवार (18 सितंबर) को गूगल डिजिटल भुगतान ऐप को लॉन्च करेंगे।
    भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में गूगल के प्रवेश करने की खबर मीडिया को गुरुवार को मिली, जिसके बाद गूगल इंडिया ने 18 सितंबर को नई दिल्ली में मीडिया को एक समारोह के लिए आमंत्रित किया।
    आमंत्रण के अनुसार, जैसा कि हमलोग लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि हमारे प्रोडक्ट सभी की जरूरतों को पूरा करने में सहायक हों, हम नए प्रोडक्ट के लॉन्च पर इसकी विस्तृत जानकारी देने के लिए आपको आमंत्रित करते हैं, जोकि भारत के लिए तैयार किया गया है। तेज एंड्रॉयड पे की तरह ही काम करेगा।
    यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से लॉन्च की गई भुगतान प्रणाली है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक नियंत्रित करती है। इसके सहयोग से मोबाइल के माध्यम से दो बैंक खातों के बीच तत्काल फंड ट्रांसफर किया जा सकता है।
    भारत के बढ़ते डिजिटल भुगतान प्रणाली में वाट्सऐप भी अपने पांव पसारने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्रणी मेसैजिंग ऐप की पहले से ही एनपीसीआई के साथ बात चल रही है और कुछ बैंक यूपीआई के माध्यम से वित्तीय ट्रांजेक्शन की सहायता पहुंचाने के लिए भी तैयार हैं। डब्ल्यूएबेटाइंफो ब्लॉग वेबसाइट के अनुसार, वाट्सऐप यूपीआई प्रणाली का प्रयोग कर बैंक से बैंक ट्रांसफर योजना को अंतिम रूप दे रहा है।
    कुछ मोबाइल मैसेजिंग ऐप जैसे वी चैट और हाईक मैसेंजर पहले से ही यूपीआई आधारित भुगतान सेवा को सपोर्ट करते हैं। इलेक्ट्रोनिक और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारत में डिजिटल भुगतान की आधारभूत संरचना में 2017 के अंत तक लगभग 50 लाख इलेक्ट्रोनिक प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) के साथ तीन स्तरों में बढ़ोतरी की संभावना है।
    मंत्रालय के सचिव अरुण सुंदरराजन ने कहा, हम आशा कर रहे हैं कि दिसंबर तक पीओएस की संख्या 50 लाख हो जाएगी, जिसका मतलब है कि एक वर्ष के छोटी समयावधि में डिजिटल भुगतान के आधारभूत संरचना में तीन गुना इजाफा होगा। (आईएएनएस)

     

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  • परंजॉय गुहा ठाकुरता, वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार

    नई दिल्ली, 16 सितंबर । आज की तारीख में पेट्रोलियम और डीजल की कीमत उससे भी आगे निकल गई है जो तीन साल पहले देश में पेट्रोलियम और डीजल की कीमत थी, लेकिन इन तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत आधी हो गई है। जून, 2014 में कच्चे तेल की कीमत लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल हुआ करता था, जो आज की तारीख में गिर कर 50 डॉलर के आसपास पहुंच गया है।
    भारत अपना 80 फीसदी कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। भारत पैसों के हिसाब से जितनी चीजों का आयात करता है उसमें 33 फीसदी हिस्सा कच्चे तेल का ही है। कच्चे तेल को तैयार करके जब पंपों पर बेचा जाता है, उसमें लागत के अलावा एक्साइज ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी जुड़ जाती है। एक्साइज और कस्टम ड्यूटी भारत सरकार का वित्त मंत्रालय बढ़ाता है, लगाता है और ये पूरा का पूरा पैसा सरकार की झोली में जाता है।
    तो इस लिहाज से देखें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरने से जो भी फायदा हुआ है इसका 75 से 80 फीसदी फायदा सरकार अपने पास रख रही है, केवल 20 से 25 फीसदी लाभ उपभोक्ताओं को मिला है।
    एक उपभोक्ता के लिहाज से देखें तो प्रति लीटर जो पैसा हम आप प्रति लीटर दे रहे हैं, उसका करीब आधा पैसा सरकार के पास पहुंच रहा है। अलग अलग राज्यों में अलग-अलग कर जरूर है लेकिन उपभोक्ता जो पैसा चुकाते हैं और उसका आधा हिस्सा सरकार के पास पहुंचता है।
    सरकार को फायदा हो रहा है लेकिन इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। अर्थशास्त्रियों के मोटा मोटी अनुमान है कि पिछले तीन साल में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपये सरकार के पास इस तरह जमा हुआ है।
    आज आप पाकिस्तान में देखें, बांग्लादेश, श्रीलंका में देखें, हर देश में पेट्रोल और डीजल का दाम भारत से कम है। लेकिन भारत में ये दाम कम नहीं हो रहा है क्योंकि केंद्र सरकार एक्साइज और कस्टम ड्यूटी कम नहीं कर रही है।
    आम आदमी की जेब पर केवल पेट्रोल और डीजल का खर्चा नहीं बढ़ता है, हर चीज महंगी होती है। हर चीज जो एक जगह से दूसरी जगह जाती है, वह महंगी होगी ही क्योंकि उसको लाने-ले जाने का खर्च बढ़ जाता है। मुद्रा स्फीति बढ़ रही है। थोक मूल्य सूचकांक में बढ़ोत्तरी होती है। बीते तीन साल में जो महंगाई कम नहीं हो रही है उसकी एक वजह तो पेट्रोलियम और डीजल की कीमतों का कम नहीं होना भी है।
    पेट्रोलियम और डीजल की कीमतें कम नहीं करके सरकार अपनी तिजोरी भर रही है। क्योंकि इंडियन ऑयल हो या भारत पेट्रोलियम, ये सब सरकार की कंपनियां हैं। हालांकि तेल की कीमतें कम नहीं होने से कुछ निजी कंपनियों को भी फायदा हो रहा है, लेकिन उनका हिस्सा अभी कम ही है। सरकार पेट्रोलियम पर ड्यूटी कम क्यों नहीं कर रही है, इसका जवाब तो प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ही दे सकते हैं। लेकिन जो तस्वीर सामने है, उससे इसकी वजह का पता तो चलता है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक ही कुल सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट देखने को मिल रही है।
    अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। निजी क्षेत्रों में निवेश नहीं हो रहा है। लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। बैंकों का बहुत सारा पैसा डूबा हुआ है।
    इन सबके बीच सरकार ने नोटबंदी का फैसला ले लिया। उससे सबकुछ अनिश्चित सा हो गया। सरकार के पास आमदनी का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। राजस्व जुटाने के लिए मौजूदा सरकार के पैसा पेट्रोलियम पर टैक्स वसूलने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
    और यही वजह है कि मौजूदा सरकार पेट्रोलियम तेलों पर टैक्स को कम नहीं कर रही है और ना ही उसकी ऐसा करने की कोई राजनैतिक इच्छाशक्ति नजर आती है, लेकिन भारत के पेट्रोलियम मंत्री ये ट्वीट करते हैं कि दुनिया के कई देशों में भारत से महंगा पेट्रोल-डीजल मिलता है। लेकिन मंत्रीजी ये नहीं बताते हैं कि वे विकसित देशों की तुलना भारत जैसे विकासशील देश से कर रहे हैं।
    जापान जैसे देश में आम आदमी की आमदनी भी भारत के प्रति व्यक्ति आय की तुलना में दस गुना ज्यादा होती है। दरअसल ऐसी तुलनाएं भ्रम फैलाने का काम करती हैं ताकि आम आदमी असलियत से दूर रहे।
    ( बीबीसी संवाददाता प्रदीप कुमार से बातचीत पर आधारित )

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  • नई दिल्ली, 15 सितंबर । केंद्र सरकार आधार कार्ड को सभी जरूरी सेवाओं के लिए अनिवार्य करने में जुटी हुई है। मोबाइल और पैन कार्ड को आधार से लिंक करने को अनिवार्य बनाने के बाद सरकार ड्राइविंग लाइसेंस को भी इससे जोडऩे की तैयारी कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर ने शुक्रवार को कहा कि वह ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से लिंक करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी बात की है।
    रविशंकर ने कहा कि हमने मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए पैन को आधार कार्ड से लिंक किया। अगर ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से जोड़ दिया जाता है, तो इससे डुप्लीकेट लाइसेंस की संख्या पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधार डिजिटल आइडेंटिटी है। डिजिटल गवर्नेंस अच्छा शासन होता है।
    इससे पहले मई में भी रविशंकर ने ड्राइविंग लाइसेंस को आधार कार्ड से जोडऩे की बात कही थी। उस समय रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि डुप्लीकेट लाइसेंस की संख्या कम की जा सके। इसका एक फायदा यह भी होगा कि जो डुप्लीकेट लाइसेंस लेने के बाद शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं, उन पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा।
    केंद्र सरकार जहां अब ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने की योजना बना रही है। वहीं, इससे पहले पैन कार्ड और आपके मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर आपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया तो आपके लिए आईटीआर फाइल करने में दिक्कत हो सकती है।
    इसी तरह सरकार ने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने को भी अनिवार्य कर दिया है। अगले साल फरवरी से पहले अगर आप ने ऐसा नहीं किया तो आपका मोबाइल नंबर बंद हो सकता है। इसलिए आप जल्द से जल्द अपना मोबाइल नंबर आधार से लिंक कराएं। (आज तक)

     

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  • दीपशिखा सिकरवार
    नई दिल्ली, 15 सितंबर। पेट्रोलियम गुड्स की पूरे देश में एकसमान कीमत रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य नैचरल गैस पर वैल्यू ऐडेड टैक्स रेट 5 फीसदी तक रखने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनपुट के रूप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल, डीजल जैसे दूसरे ईंधनों पर वैट रेट घटाने पर राजी हो गए हैं। राज्यों में इसकी रूपरेखा बन जाने के बाद जीएसटी काउंसिल इस स्कीम पर विचार करेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने को बताया, काउंसिल इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय करेगी। आधिकारिक स्तर पर केंद्र और राज्यों के बीच चर्चा हुई है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ कमी आएगी। खासतौर पर उन राज्यों में यह कमी आएगी, जहां ज्यादा टैक्स वसूला जाता है।
    काउंसिल ने इससे पहले इस मुद्दे पर विचार किया था और तय किया गया था कि राज्य इस बारे में एक स्कीम बनाएं। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि मामला अब राज्यों के पाले में है और उन्हें ही स्कीम बनाकर काउंसिल के सामने रखना है। केंद्र पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना चाहता था, लेकिन इस सेक्टर से राजस्व का बड़ा हिस्सा हासिल करने वाले राज्यों ने इस कदम का समर्थन नहीं किया था। अगर राज्यों ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी तो यह इन पेट्रो प्रॉडक्ट्स पर एक समान टैक्स रेट तय करने की दिशा में अहम कदम होगा।
    पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रो प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने की वकालत बुधवार को की थी। उन्होंने कहा था, जीएसटी काउंसिल को पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए। आधिकारिक स्तर पर हुई चर्चा में नैचरल गैस पर वैट रेट को 5 फीसदी तक रखने और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर इसे घटाकर वाजिब लेवल पर लाने की सहमति बनी थी ताकि फर्टिलाइजर और स्टील सेक्टरों की इंडस्ट्रियल यूनिट्स की कारोबारी सेहत पर बुरा असर न पड़े।
    पहले प्रस्ताव दिया गया था कि सेंट्रल सेल्स टैक्स में बदलाव कर यह पक्का किया जाए कि जीएसटी के दायरे में ली गईं वस्तुओं की उत्पादन लागत बहुत ज्यादा न बढ़े। अब जिसे सी फॉर्म के नाम से जाना जाता है, उसके तहत मैन्युफैक्चरर्स सुविधा नहीं ले सकते हैं। इस फॉर्म के तहत वे किसी दूसरे राज्य से पेट्रो प्रॉडक्ट्स लेते थे, तो उस पर वहां लगने वाला वैट चुकाने के बजाय 2 पर्सेंट सेंट्रल सेल्स टैक्स देते थे।
    अब उन्हें वैट चुकाकर पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स खरीदना होगा, जिसकी दरें 15 से 30 फीसदी के बीच हैं। यह मैन्युफैक्चरर्स पर एक तरह से दोहरी मार है क्योंकि उन्हें न केवल ज्यादा टैक्स देना होगा, बल्कि वे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर चुकाए गए इन करों पर जीएसटी सिस्टम के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट भी क्लेम नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, कुछ राज्यों ने अपने यहां लाए जाने वाले पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर एंट्री टैक्स भी लगा दिया है। राज्य नहीं चाहते हैं कि मैन्युफैक्चरर्स 2 फीसदी की रियायती दर पर पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स इंपोर्ट करें क्योंकि इससे राजस्व का नुकसान होगा। राज्यों को डर है कि ऐसे में तो सभी मैन्युफैक्चरर्स दूसरे राज्यों से पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स खरीदने लगेंगे और लोकल वैट नहीं देंगे। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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  • नई दिल्ली, 15 सितंबर । बीते साल नोटबंदी के बाद अब जीएसटी की वजह से देश में असंगठित क्षेत्र पर फिर मार पडऩे की आशंका है। यह बात संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंकटाड की 'व्यापार और विकास-2017Ó नाम से जारी रिपोर्ट में कही गई है। इस रिपोर्ट के हवाले से जीएसटी की वजह से 2017 में विकास दर का अनुमान सात से घटकर 6.7 फीसदी रह गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के लिए विश्व अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करना मुश्किल लग रहा है। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी के फायदे गिनाते हुए कहा है कि जल्द ही सब सस्ता हो जाएगा। (अमर उजाला)

     

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  • नई दिल्ली, 15 सितंबर। बीते महीने सब्जियों और प्याज की कीमत में उछाल का सीधा असर थोक महंगाई दर पर पड़ा है। नए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक महंगाई दर 3.24 फीसदी रही जो बीते चार महीने में सबसे ज्यादा है। थोक महंगाई दर जुलाई 2017 में 1.88 फीसदी, जबकि पिछले साल अगस्त में 1.09 फीसदी थी। थोक महंगाई दर में अप्रैल में सबसे ज्यादा उछाल आया था, तब यह 3.85 फीसदी तक पहुंच गई थी।
    गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं की कीमत में पिछले साल अगस्त के मुकाबले इस साल अगस्त में 5.75 फीसदी, जबकि बीते महीने के मुकाबले 2.15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सब्जियों की कीमतों में जुलाई 2017 में 21.59 फीसदी के मुकाबले अगस्त 2017 में 44.91 फीसदी का उछाल आया है। इसके अलावा अगस्त में प्याज की कीमत 88.46 फीसदी बढ़ गई थी। अगस्त में सब्जियों के अलावा फल, अंडा, मीट और मछली की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, आलू और दाल की थोक कीमतों में गिरावट का रुझान जारी रहा।
    अगस्त में खाद्य पदार्थों के अलावा ईंधन और बिजली क्षेत्र की थोक महंगाई दर भी बढ़ी है। जुलाई में 4.37 फीसदी के मुकाबले अगस्त में इनकी कीमतों में 9.99 फीसदी का उछाल आया। इसकी वजह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को बताया गया है। इसी हफ्ते जारी खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में यह बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा रही है।  (सत्याग्रह)

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