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नांदगांव के 7 ब्लॉक में सूखा


कलेक्टर को नजरी रिपोर्ट पेश
छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजनांदगांव, 12 अगस्त। जिले के 9 में से सात ब्लॉक में सूखे को लेकर आई प्रशासन की रिपोर्ट से लोगों की नींद उड़ गई है। अल्प वर्षा की वजह से बने हालात की जानकारी लेने कलेक्टर के आदेश के बाद शुरू हुए नजरी आंकलन रिपोर्ट में 5 को सर्वाधिक और दो ब्लॉक को आंशिक रूप से सूखाग्रस्त माना गया है। जबकि मानपुर एवं अंबागढ़ चौकी अच्छी बरसात की वजह से सूखे की मार से बच गए। बताया जाता है कि राजनांदगांव, मोहला, डोंगरगांव, डोंगरगढ़ व छुरिया के ज्यादातर गांव में धान की फसल चौपट हो गई है। जबकि खैरागढ़ और छुईखदान ब्लॉक में सूखे का आंशिक असर  है।
 बताया जाता है कि सावन के बाद अब भादो का पहला सप्ताह भी सूखा बीत गया है। आमतौर पर बरसात के लिए सावन मास में सर्वाधिक अनुकूल स्थिति होती है वही भादो भी बरसात के लिहाज से बेहतर होता है। जबकि सावन का पूरा महीना गर्मी और उमस से बीत गया। आषाढ़ के शुरूआत में हुई अच्छी बरसात पर भरोसा कर किसानो से धान की फसल बोया। इसके बाद मानसून के दगा देने से फसलें चौपट होने लगी हंै। आलम यह है कि ज्यादातर खेतों के फसल पीले होकर सूखने लगे है। 
 राजस्व अमले ने जमीनी स्तर पर सूखे को लेकर रिपोर्ट तैयार की। जिसमें पाया गया है कि छुरिया के 222, मोहला के 170, राजनांदगांव के 170, डोंगरगढ़ के 86 तथा डोंगरगांव के 98 गांव में फसल सूख चुकी है। इस खबर के बाद प्रशासन ने जिले को सूखाग्रस्त करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि धान के फसल के नष्ट होने की वजह से किसानों में मायूसी छा गई है। प्रशासन की नजरी आंकलन के पहले रिपोर्ट में 25 पैसे कम की स्थिति में 382 गांव है। वहीं 26 से 37 पैसे में 320 गांव, 38 से 50 पैसे से कम के आंकलन में 326 और 50 पैसे से अधिक  के आनावरी रिपोर्ट में 326 गांव शामिल है। इस तरह जिले के कुल 750 गांव में सूख से प्रभावित होने के हालात बन रहे है। 
बताया जाता है कि प्रशासन के सामने अब रोजाना चौपट होती फसल को बचाने के लिए किसान शासकीय दफ्तरों तक दौड़ लगा रहे है। जबकि किसानो को कम बारिश की वजह से अब रबी की फसलों से भी लाभ मिलने की उम्मीद नही है। रबी की फसल से पहले खरीफ फसल को बचाने के लिए खाली पड़े बांध-जलाशय भी मदद करने की स्थिति में नही है। बात साफ है कि अल्पवर्षा की वजह से पेयजल और निस्तारी संकट भी अगले कुछ दिनो में लोगो पर भारी पड़ेगा।

 खेत चराने पर नहीं मिलेगी क्षतिपूर्ति
जिले के जिन किसानों ने अपनी फसलों का चालू खरीफ मौसम में बीमा कराया है, कृषि विभाग ने उन्हें कम वर्षा अन्य कारणों से फसल प्रभावित होने के बावजूद भी फसल की जानवरों से चराई नहीं कराने की सलाह दी है। बीमित फसल को खराब होने पर जानवरों को खिला देने से ऐसे किसान फसल बीमा के तहत मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि से वंचित हो सकते हैं।
 कृषि विभाग ने पिछले दिनों कुछ अखबारों में प्रकाशित ऐसे चित्रों और खबरों को गंभीरता से लेते किसानों को सलाह दी है कि फसल बीमा का लाभ लेने के लिए किसान अपनी फसलों को किसी भी स्थिति में जानवरों से ना चराए। कलेक्टर ने भी किसानों को अल्प वर्षा के कारण खराब हो रही फसलों से किसानों को होने वाले नुकसान से चिंतित होकर यह अपील जारी की गई है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसलों के लिए किसानों को पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि मिलेगी। किसान केवल अपनी फसलों को जानवरों से चराकर या अन्य किसी तरीके से खेतों से खत्म न करें।

 




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