छत्तीसगढ़ » रायपुर

एपीएल को भारत सरकार से आबंटन नहीं छत्तीसगढ़ के पीडीएस में अभूतपूर्व बदलाव

Posted Date : 06-Dec-2017

18 राज्यों के दल अवलोकन करने पहुंचे-मोहले
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 6 दिसंबर। खाद्य एवं ग्रामोद्योग मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पीडीएस में किए गए सुधारों से अभूतपूर्व बदलाव आया है। देश के अन्य राज्यों ने इसका अध्ययन कर इसे अपनाया है। 18 राज्यों के दल ने छत्तीसगढ़ के पीडीएस का अवलोकन किया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के द्वारा एपीएल को खाद्यान्न आबंटन नहीं किया जाता है।
श्री मोहले ने बुधवार को संवाददाताओं को अपने विभाग के 14 वर्ष के कार्यकाल, उपलब्धियों और योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के पीडीएस को मजबूत बनाकर खाद्य सुरक्षा के नेटवर्क को 14 वर्षों में बेहतर बनाया गया है। इसी का परिणाम है कि राज्य को पीडीएस के क्षेत्रों में 7 अवार्ड मिले हैं।
बताया गया कि राज्य में कुल 12 हजार 298 उचित मूल्य की दूकानें संचालित की जा रही है इनमें से 11 हजार 43 दूकानें ग्रामीण क्षेत्रों में पीडीएस की सामाग्री प्रदान करने के लिए पहले 76 केन्द्र थे जो अब बढ़कर 127 हो गए हैं। राज्य में 14 साल में 5 हजार 260 उचित मूल्य दूकान सह गोदामों का निर्माण कराया गया है। पीडीएस के तहत चावल वितरण पर प्रति वर्ष 22 सौ करोड़ रूपए, नमक वितरण पर 76 करोड़ और चना वितरण पर 4 सौ करोड़ रूपए खर्च किया जा रहा है। 
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 36 लाख 38 हजार रसोई गैस कनेक्शन दिया गया है। पीडीएस में पारदर्शिता लाने के लिए अब तक 12 हजार 298 राशन दूकानों में से 97 प्रतिशत राशन दूकानों का कम्प्यूटरीकरण कर दिया गया है। 57.72 लाख कार्डों में से 55.99 लाख राशन कार्डों को आधार से लिंक किया जा चुका है। पीडीएस प्रणाली को वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। शिकायतों के लिए निशुल्क कॉल सेंटर बनाया गया है।  
श्री मोहले ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वदेशी माल के उत्पादन और उसके उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। इसके लिए 7 अगस्त 2015 से राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। पिछले 14 वर्षों में ग्रामोघोग विभाग में कई योजनाओं का शुभारंभ किया गया है। राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखण्ड के आमगांव में 4 करोड़ 5 लाख की लागत से कंबल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई है। इससे कंबल बुनकरों को रोजगार मिल रहा है। 

 




Related Post

Comments