छत्तीसगढ़ » रायपुर

नक्सलियों के हाथों उजाड़े गए ग्रामीणों को गांव वापसी की उम्मीद नहीं

Posted Date : 06-Dec-2017

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 6 दिसंबर। सरकार की तीर्थ यात्रा योजना के तहत धुर नक्सल प्रभावित इलाकों के करीब एक हजार लोग बुधवार को विशेष ट्रेन से तीर्थ यात्रा के लिए रवाना हुए। खास बात यह है कि सैकड़ों लोग ऐसे हैं जो कि पहली बार गांव से बाहर निकले हैं। तीर्थ यात्रा में अबूझमाड़ सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ऐसे ग्रामीण शामिल रहे। जिन्हें नक्सलियों के कारण अपना गांव, खेत, सब कुछ गंवाना पड़ा। अपने गांव को छोड़कर दूसरे गांव में रोजी मजदूरी करने वाले ग्रामीणों के अंतस में उनका गांव आज भी बसा हुआ है लेकिन नक्सलियों के खौफ के कारण उन्होंने गांव वापसी की उम्मीद छोड़ दी है। 
नारायणपुर के आयतुराम 2, 3 साल पहले आलबेड़ा गांव में रहा करते थे। गांव के वह पटेल थे। इसलिए नक्सलियों के निशाने पर थे। आयतु ने बताया नक्सलियों द्वारा सरपंच के मारे जाने के बाद उन्होंने जान का खतरा देखते हुए गांव छोड़ दिया। 8, 10 एकड़ खेत, गांव को गंवाकर फिलहाल वह मजदूरी की बदौलत गुजर बसर कर रहे हैं। आयतु कहते हैं सरकार चाहे तो नक्सल समस्या खत्म हो सकती है। लेकिन गांव वापसी की उम्मीद अब नहीं रह गई है। 
8वीं तक पढ़ी सुकमती पहले अबूझमाड़ में रहती थी लेकिन नक्सलियों के कहर के बाद गांव छोड़ कर वह नारायणपुर में रह रही हैं। सुकमती ने बताया कि उनके क्षेत्र में माडिय़ा बोली प्रचलित है। उस क्षेत्र के बच्चों को हिंदी में पढ़ाई करने में दिक्कतें आती है। नक्सलियों के आगे ग्रामीण बेबस हैं। गांव में किसी के नाम से पट्टा नहीं है इसलिए वहां के रहने वालों को खदेड़ कर नक्सलियों ने गांव पर कब्जा कर लिया है। माडिय़ा लोग आज भी बूढ़ादेव और जुंगेमुटे देवता को पूजते हैं लेकिन नक्सलियों के कारण घोटुल की परम्परा बिखर गई है। 
कोहकामेटा की मंगती बाई एक बार झारखंड गई थी लेकिन काशी और प्रयाग के बारे में उसे जानकारी नहीं है। मंगती बाई ने बताया कि गांव में नक्सलियों का खौफ है। कभी भी वे आकर गांववालों से खाना, अनाज मांगते हैं। मंगतीबाई ने बताया उसके गांव में अस्पताल नहीं है। बीमार होने पर गांव वालों को 5 किमी दूर कुंदला जाना पड़ता है। गांव में सिर्फ प्राथमिक स्कूल है।
 दसरी बाई पहले कुतुल गांव में रहती थी, लेकिन होमगार्ड बेटे के कारण जान का खतरा होने के कारण वह अब नारायणपुर में रह रही है। 5 एकड़ खेत गंवाकर अब वह मजदूरी करके गुजर बसर कर रही है। 
मटका बनाने का काम करने वाले एड़का निवासी सुलजूराम सोरी की भगवान जगन्नाथ के दर्शन की आस है। सुलजूराम कहते हैं पैसे कौड़ी नहीं हैं। ऐसे में कहां जाएं ? उन्होंने बताया कि गांव में थाना बनाने के बाद उनके गांव को नक्सल समस्या से निजात मिली है। उनके गांव में अब पक्की सड़क भी बन गई है।
नारायणपुर के नरेंद्र सिंग ने आज तक दंतेश्वरी मंदिर के अलावा और किसी मंदिर के दर्शन नहीं किए हैं। नरेंद्र कहते हैं बंलेश्वरी मां के दर्शन की आस है। डिप्टी कलेक्टर एस एन वाजपेयी ने बताया कि तीर्थ यात्रा में उनके क्षेत्र के 88 तीर्थ यात्री शामिल है। यात्रियों की 10 दिसंबर को वापसी होगी। तीर्थ यात्रा में कांके र और कोंडागांव के तीर्थ यात्री भी शामिल हैं।




Related Post

Comments