छत्तीसगढ़

  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    धमतरी, 21 जुलाई। बालोद जिले के गुरुर ब्लाक अंतर्गत ग्राम सोरर में एक परिवार के 4 लोगों की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतकों में दंपत्ति समेत दो महिला शामिल हैं। घटना आज सुबह करीब 8 बजे की है। (बाकी पेजï 12 पर)
     गुरुर थाना इलाके में ग्राम सोरर में सत्य नारायण पटेल अपनी पत्नी, मां और छोटे भाई की पत्नी के साथ घर के पीछे बाड़ी में काम कर रहे थे। सत्यनारायण की पत्नी दामिनी पटेल (30) तार पर फैलाए हुए भीगे कपड़े उतारने लगी। तभी बिजली के लाइन से छू रहा था। जैसे ही दामिनी ने कपड़े को छुआ, तो वहीं खड़े-खड़े कांपने लगी। उसकी ये हालत देख दामिनी की सास राजबाई पटेल (65) दौड़ी। उसने भी जैसे ही दामिनी को छुड़ाने की कोशिश की तो करंट के चपेट में आ गई। दोनों को तार से चिपका देख सत्यनारायण दौड़ा। उसके चिपकने के बाद उसके छोटे भाई की पत्नी चित्रलेख (25) दौड़ी।  चारों तार से चिपक गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलने पर गुरुर थाना प्रभारी अविनाश तिवारी समेत अन्य जवान मौके पर पहुंचे और शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। इस घटना से गांव में शोक की लहर हैं।

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  • नोटबंदी को लेकर विपक्ष भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहा हो, लेकिन पुणे के एक स्कूल के स्टूडेंट्स इस फैसले के पॉजिटिव फेस को एक शार्ट फिल्म के माध्यम से सामने लेकर आए हैं। इस फिल्म में दिखाया गया है कैसे आतंकी बच्चों का इस्तेमाल कर नकली नोट देश में फैलाने का काम कर रहे हैं। और क्या है खास इस फिल्म में...
     
     
     
    - तकरीबन 11 मिनट की 'Black money ...Sucking the Indian Economy' नाम की इस फिल्म को पिंपरी चिंचवाड़ के एसएनबीपी इंटरनेशनल स्कूल के स्टूडेंट्स ने तैयार किया है।
    - फिल्म को बच्चों ने ही लिखा, शूट और डायरेक्ट भी किया है। इसका म्यूजिक भी स्टूडेंट्स ने ही दिया है। टेररिस्ट से लेकर पुलिसवाले का रोल भी बच्चों ने ही निभाया है।
    - कहानी एक स्टूडेंट से शुरू होती है जिसे हर दिन एक पार्सल पहुंचाने के लिए 500 रुपए मिलते हैं। वह इन पैसों से अपने फ्रेंड्स को पार्टी देता है।
    - उसके फ्रेंड्स को शक होता है और वे इन पैसों की सच्चाई पता लगाने के लिए उसका पीछा करते हैं और उसकी हर हरकत को कैमरे में शूट करते हैं। 
    - इस दौरान बच्चों को पता चलता है कि एक महिला टेररिस्ट नकली नोट देश में सर्कुलेट करने के लिए इस बच्चे का इस्तेमाल कर रही थी।
    - इन पैसों से आतंकी देश में धमाके की प्लानिंग कर रहे थे। इसके बाद स्टूडेंट्स वह फोटोग्राफ अपनी स्कूल की प्रिंसिपल को दिखाते हैं।
    - प्रिंसिपल पुलिस को इसकी सूचना देती है और पुलिस उसी स्टूडेंट के सहारे आतंकियों तक पहुंचने में कामयाब हो जाती है।
    - फिल्म के अंत में ब्लैकमनी के दुष्प्रभावों और कैशलेश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया है।

    ऐसे आया फिल्म का आइडिया
     
    - पुणे की रहने वाली प्रीति खेलकर ने एक दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना, जिसमें उन्होंने बच्चों को नोटबंदी के सकारात्मक संदेश को फैलाने का आव्हान किया था।
    - यहीं से इस फिल्म को बनाने का आइडिया आया। प्रीति ने फिल्म निर्माण से जुड़े डायरेक्टर आकाश खेलकर से यह आइडिया शेयर किया।
    - आकाश ने पिंपरी चिंचवड के एसएनबीपी इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसीपल जयश्री नटराजन को इसे बताया। इसके बाद 25 स्टूडेंट्स (सभी 13 से 16 साल के बीच) को इस प्रोजेक्ट के लिए सलेक्ट किया गया।
    - इन स्टूडेंट्स को पहले एक वर्कशॉप के माध्यम से फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग दी गई और फिर शुरू हुआ इसे बनाने का काम।
    - तकरीबन एक महीने में यह पूरी फिल्म बनकर तैयार हुई और इसे पुणे एटीएस से जुड़े अधिकारी भानुप्रताप बर्गे के हाथों लांच करवाया गया।
    - फिल्म का डायरेक्शन आकाश खेलकर ने किया है। प्रीति फिल्म की असिस्टेंट डायरेक्टर हैं।
     
    सोशल मीडिया में वायरल हुई स्टोरी
     
    - यू-ट्यूब पर लांच हुई यह शार्ट फिल्म सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है। अब तक इसे कई हजार लाइक्स मिल चुके हैं।
    - एसएनबीपी इंटरनेशनल स्कूल की ओर से जयश्री नटराजन ने फिल्म को पीएमओ ऑफिस को भी भेजा है। वे इसे कई फिल्म फेस्टिवल्स में भी दिखाने की तैयारियां कर रहे हैं। 
    - जयश्री नटराजन ने बताया कि, "नोटबंदी की घोषणा के बाद हमने स्कूल में एक डिबेट रखी। इसमें हमने उनके विचार जाने कि वे नोटबंदी को लेकर क्या सोचते हैं।"
    - "ये बहुत इंटरेस्टिंग, बच्चो ने हमें जो बताया उसे ही हमने इस फिल्म में दिखाने का प्रयास किया है। प्रीति और आकाश खेलकर जैसे प्रोफेशनल की सहायता से हम इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में सफल रहे हैं।"
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