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Posted Date : 08-Nov-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    अम्बिकापुर, 8 नवम्बर। रघुनाथनगर क्षेत्र के ग्राम गिरवानी में मंगलवार तड़के एक घर के अंदर भालू घुस जाने से अफरा-तफरी मच गई। लोग डरे सहमे इधर-उधर भागने लगे। भालू एक माह की मासूम बच्ची को नोचने बढ़ ही रहा था कि महिला ने आकर खुद को आगे कर दिया। महिला बच्ची को बचाते रही और भालू महिला को लहुलूहान कर दिया। आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी पहुंच गये। अंतत: भालू वहां से निकल कर भाग गया। गंभीर स्थिति में महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है। 
    जानकारी के अनुसार ग्राम गिरवानी निवासी सविता पति किस्पत घसिया (39) मंगलवार की तड़के जब सभी सोये हुये थे, तभी एक भालू उनके घर घुस गया। सविता के भाई की एक माह की बेटी भालू के निशाने पर थी, परंतु सविता ने खुद की जान की परवाह न करते हुये बच्ची को अपनी आगोश में ले लिया। भालू महिला को नोचता रहा, परंतु महिला ने बच्ची को नहीं छोड़ा। दूसरी तरफ महिला का पति डंडे से भालू को मारने लगा। हो-हल्ला सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी पहुंच गये। तब जाकर भालू वहां से भाग खड़ा हो गया।  महिला की स्थिति गंभीर देखते हुये उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाकर दाखिल कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है। बताया गया कि भालू ने घर की पांच-छ: बकरी को भी मार डाला था। 
    श्रीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महंगई के जंगल में भैंस चराने गई एक वृद्धा पर भालू ने हमला कर दिया। यह देखकर भैंसों की भीड़ वृद्धा को बचाने आगे आ गई। भैंसो की अफरा-तफरी देखकर भालू वहां से भाग खड़ा हुआ।  महिला को गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया गया है। 
    जानकारी के अनुसार ग्राम महंगई निवासी सोनकुंवर पति सुखई यादव (65) मंगलवार को घर के पास के जंगल की ओर भैंस चराने गई थी। उसी दौरान भालू ने उस पर हमला कर दिया। भालू को हमला करते देख भैंसों में अफरा-तफरी मच गई। भैंस भालू से भीड़ गये। यह देखकर भालू वहां से भाग खड़ा हुआ। वृद्धा का उपचार जारी है। 

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Posted Date : 01-Nov-2017
  • जातबाहर शादी करने वाली महिला के पति का शव 6 दिन घर पड़ा था

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    मनेन्द्रगढ़, 1 नवंबर। दूसरी बिरादरी से प्रेम विवाह के कारण समाज से बहिष्कृत महिला ने पति का अंतिम संस्कार अपने हाथों किया। उसके खेत में ही शव को दफनाया गया। इस दौरान पुलिस ने मदद की।  इसके पहले गांव में ही पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान न गांव समाने आया, न समाज। एसडीएम के निर्देश के बाद भी पंचायत तक न हाथ खड़े कर दिए।  
    ज्ञात हो कि शहर से लगभग 12 किमी दूर ग्राम पंचायत परसगढ़ी में एक ग्रामीण का शव उसकी मौत के छ: दिनों तक बिना अंतिम संस्कार के ही घर में पड़ा रहा। मृतक की पत्नी  लोगों को पांचवें दिन इसकी जानकारी दी।  ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस को घटना से अवगत कराया। आज दोपहर पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद लाश महिला को सौंप दिया।

    इस संबंध में छत्तीसगढ़ ने जब एसडीएम प्रदीप साहू से बात की तो उन्होंने कहा कि सामाजिक बहिष्कार के मामले में जो उचित कार्यवाही होगी, वह की जाएगी। अंतिम संस्कार के लिए ग्राम पंचायत को निर्देशित किया गया है कि मृतक का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाए। वहीं सरपंच  हृदय का कहना था कि चूंकि वह हमारे समाज को छोड़कर दूसरे समाज में शादी की है इसलिए समाज उसके पति के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा। 
    इस संबंध में जब संसदीय सचिव चंपादेवी पावले से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि आपके द्वारा मुझे घटना की जानकारी दी गई है। मैं भी उसी समाज से आती हूं। उनका बहिष्कार क्यों किया गया इसकी जानकारी लेती हूं। साथ ही साथ मेरे द्वारा जो भी सहयोग होगा मैं जरूर करूंगी। इस क्षेत्र की जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन देती हूं। 
    एएसआई थाना मनेन्द्रगढ़ धर्मेन्द्र बनर्जी का कहना था कि थाने में घटना की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आज मैं यहां पहुंचा हूं। मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव उसकी पत्नी के सुपुर्द कर अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के संबंध में कोई जानकारी मिल पाएगी।  
    परसगढ़ी में रहने वाले शिवनाथ व मानमती ने 25 वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था। इस दौरान उनकी कोई संतान नहीं हुई। 30 अक्टूबर सोमवार को  मानमती ने ग्राामीणों को बताया कि उसके पति की मौत बीते 26 अक्टूबर गुरूवार को हो गई है उसका अंतिम संस्कार करना है। तब ग्रामीणों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि तुम लोग हमारी जात बिरादरी के नहीं हो, यहां के ग्रामीण  न अंतिम संस्कार करेंगे और न ही शामिल होंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने घटना की जानकारी मनेन्द्रगढ़ थाने को दी। 
    संदेहास्पद मौत की जानकारी मिलने के बाद थाना मनेन्द्रगढ़ से पुलिस अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे और शव का पंचनामा कर अग्रिम कार्यवाही की।  आज  दोपहर लगभग 12 बजे मृतक का गांव में ही पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान ग्रामीणों का कहना था कि चूंकि महिला ने दूसरी बिरादरी में शादी कर ली है इसलिये गांव का कोई भी उसके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा। इसे देख पुलिस ने कफन-दफन में मदद की।  

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Posted Date : 31-Oct-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 31 अक्टूबर। कोरिया के सोनहत केवराबेहरा में  आज सुबह एक व्यक्ति बिजली खंभे पर चढ़ गया। उच्चदाब वाले तार की चपेट में आने से उसकी वहीं जलकर मौत हो गई। सूचना मिलने पर बिजली विभाग ने लाश को उतारा।  सोनहत टीआई आरपी साहू का कहना है कि शव की पहचान  जयप्रकाश पिता बाबूसिंह ग्राम किसोरी के रुप में की गई है। केवराबेहरा ग्रामीणों के मुताबिक  बिजली के तारों से आवाज आने पर देखा कि एक व्यक्ति  खंभे पर  लटका जल रहा है।  उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। मृतक बिजली के खंभों तक कैसे पहुंचा, इसका भी पता नहीं चल पाया है।

     

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Posted Date : 10-Oct-2017
  • छात्रावास अधीक्षिका व होमगार्ड निलंबित   
    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    अंबिकापुर, 10 अक्टूबर। सरगुजा के बतौली थाना के पहाड़ी कोरवा आश्रम भटको में टूटी खिड़की से भागी 7 छात्राओं में से एक की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से सभी छात्राएं डरी व सहमी हुई हैं। वे आखिर क्यों भाग रही थी  इसका पता नहीं चल सका है।
     घटना की खबर लगते ही अजाक सहायक आयुक्त जेआर नागवंशी मौके पर पहुंचे।  प्रथमत: जांच में अधीक्षिका मंजू देवी व होमगार्ड हेमवती राजवाड़े की लापरवाही पाए जाने ने पर उन्हें निलंबित कर दिया है।     
     प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह 5 बजे के आसपास भटको आश्रम की 10 वर्षीय छात्रा सुशीला अपनी अन्य 6 साथी छात्राओं के साथ 
    कमरे की खिड़की से निकल भागी थीं। सबसे आगे सुशीला ही थी, जिससे व खेत में बिछे बिजली तार की चपेट में आ गई। इधर सुशीला को झुलसा देख बाकी छात्राएं आश्रम लौट आर्इं और  रसोइये को बताया। उसने घटना के जानकारी अपने कमरे में सो रही अधीक्षका को दी। छात्रा को अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुशीला बागपनी करदना की रहने वाली थी।  बताया जा रहा है कि आश्रम के पास के खेतों में पंप चलाने के लिए किसानों ने कनेक्शन ले रखा है जिसकी चपेट में यह छात्रा आ गई।  
    मामले की जानकारी मिलते ही आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त जेआर नागवंसी  पहुंचे। पूछताछ और तथ्यों को देखने के बाद अधीक्षिका और होमगार्ड को निलंबित कर दिया। वही पम्प कनेक्शन वैध है या अवैध  इसकी जांच पुलिस कर रही है। श्री नागवंशी ने कहा कि छात्र बीमा योजना का लाभ परिजनों को दिलाने का प्रयास भी किया जा रहा है।  
    डरी व सहमी हुई हैं सभी छात्राएं-थाना प्रभारी
     छात्रा की करंट से मौत के मामले में बतौली थाना प्रभारी दीपक कुमार साहू ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। बहरहाल सभी छात्राएं डरी व सहमी हुई हैं। छात्राएं आखिर क्यों भाग रही थी। छात्राओं के बयान के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पायेगी, अन्य सभी तथ्यों की भी जानकारी ली जायेगी। 

     

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Posted Date : 02-Oct-2017

  • लोलकी के ग्रामीण शासकीय सुविधाओं और योजनाओं से वंचित

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 2 अक्टूबर। कोरिया जिले के वनांचल जनपद पंचायत सोनहत में एक गांव ऐसा है जो राजस्व रिकार्ड मेें नहीं है, जिसके कारण गांव के लोगों को शासन की कोई भी योजना का लाभ नहीं मिल रह है। वहीं ऐसे कई गांव है जहां विकास की किरणें अभी तक नहंी पहुंच पाई हैं। मूलभुत सुविधाओं की कमी के कारण यहां के ग्रामीण अपने हाल पर ही जीना पड़ रहा है। यहां पहुंचने के लिए भी सुगम मार्ग नहीं बना है जिससे कि हर मौसम में लोगों को अपने जनपद पंचायत तक आने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। 
    सोनहत के कछाडी जोगिया, मझगवॉ, भागवतपुर, लोलकी के ग्रामीणों से मिलकर लौटे कांग्रेस उपाध्यक्ष गुलाब कमरों का कहना है विकास के नाम पर सरकारी छलावा इन गांवों मेें साफ देखा जा सकता है, बिजली, पानी सड़क के लिए ग्रामीण मोहताज है। यहां के लोगों को सरकारी योजनाओं लाभ नही मिल पा रहा है। यदि 15 दिनों में ग्राम लोलकी को जल्द की राजस्व रिकार्ड में करने की प्रशासनिक पहल नहीं की जाती है तो वो ग्रामीणों के साथ बड़ा आंदोलन करेंगे। 
    सरकार के द्वारा विकास कार्य के लिए तमाम तरह की योजनाएं चलाई जा रही है लेकिन जनपद सोनहत के दुरस्थ व वनांचल ग्रामों में जाकर देखने पर पता चलता है कि वहां विकास कुछ भी नहीं हो रहा है सब कुछ कागजों में ही संचालित हो रहा है। जनपद पंचायत सोनहत का एक ऐसा ही ग्राम लोलकी है जो जनपद मुख्यालय सोनहत से लगभग 18 किमी की दूरी पर स्थित है। प्रशासन के अधिकारी बहुत कम ही यहां पहुंच पाते हंै यदि वर्ष में एक दो बाहर पहुंच गये तो बहुत है अन्यथा यहां के ग्रामीण अपने हाल पर जी रहे हंै। जानकारी के अनुसार ग्राम लोलकी पहले वन ग्राम के अंतर्गत आता था। जिसके चलते कई विकास कार्यो में बाधा पहुंचती थी। इसके बाद वन विभाग के द्वारा इसे राजस्व ग्राम के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा दिया गया लेकिन राजस्व विभाग के पास यह प्रस्ताव आज भी धूल खा रही है। प्रस्ताव पर मुहर कई वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं लग पायी है। राजस्व रिकार्ड में यह गांव दर्ज नहीं है। विकास के कार्य तेजी से हो इसी उद्देश्य को लेकर वन विभाग द्वारा ग्राम लोलकी को राजस्व ग्राम बनाने का प्रस्ताव भेजा था जो प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रस्ताव भेजने के कई वर्ष बाद भी राजस्व ग्राम की सूची में शामिल न होना यही दर्शा रहा है। अब यहां के ग्रामीण न तो वन ग्राम के अंतर्गत है और न ही राजस्व ग्राम के अंतर्गत है। 
    नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ 
    वनांचल ग्राम लोलकी के लोग दो पाटों के बीच पीस रहे है वन विभाग द्वारा वन ग्राम को राजस्व ग्राम में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दे दिया लेकिन राजस्व ग्राम में आज तक शामिल नही हो पाया है। वही इस ग्राम में कोई भी सरकारी योजनाएॅ भी नही पहुंच पा रही है। करीब 25 घर की आबादी वाले इस ग्राम में ज्यादातर लोग आदिवासी परिवार से है जिनके द्वारा बरसात के दिनों में खेती करने के बाद शेष समय में वनों पर भी जीवन निर्भर रहता हैं यहां सिचंाई की भी सुविधा नहीं है जिस कारण एक फसल ही लेते हैं। 
    खेती किसानी कार्य के लिए यं़़त्र नहीं मिल पाता है और नही किसी प्रकार की नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति ही मिल पाती है। ग्राम लोलकी के ज्यादातर लोगों का जाति व निवास प्रमाण पत्र नहीं बन पाये है। स्कूलों में अध्ययनरत बालक बालिकाओं को भी जाति निवास नही बनाये जा सके है जबकि इसके लिए सरकार के कड़े निर्देश हंै बाजूवद अधिकांश लोगों के उक्त प्रमाण पत्र नहीं बने हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकेटेड मच्छरदानी आज तक उनको नहीं मिल पायी है जबकि पूर्व में जिले भर के पंचायतों में मच्छरदानी का वितरण किया गया था। स्वास्थ्य सेवा का लाभ भी यहॉ के ग्रामीणों को नहीं मिलता है किसी परिवार में किसी सदस्य के बीमार पडऩे पर सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही ले जाया जाता है। जिसमें भी परेशानी उठानी पड़ती है। 
    अभी भी अंधेरे में रह रहे ग्रामीण
    गांव गांव में विद्युतीकरण के लिए योजनाएं बनायी गयी है, जहां बिजली पहुंाने में वन बाधा है उन गांवों में सोलर प्लेट लगाकर ग्राम को रोशन किया जा रहा है। लेकिन जनपद पंचायत से मुश्किल से 18 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम लोलकी में सोलर प्लेट भी नहीं लगाये गये है। इसी तरह का हाल क्षेत्र के आस पास के ग्राम भगवतपुर, मझगवॉ, जोगिया की बनी हुई है जहां आजादी के पश्चात से अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है और न ही उक्त गांवों में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर सिस्टम ही लगाये गये है। जिस कारण उक्त सभी गॉवों के लोग आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर है।
    पहुंच मार्ग भी पूरा नहीं हो पाया
    जनपद पंचायत सोनहत से कछाडी मार्ग पर 18 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम लोलकी तक पहुंचने के लिए सुगम सडक मार्ग भी अब तक पूरा नही हो पाया है। जानकारी के अनुसार यहां तक पहुंचने के लिए पीएमजीएसवाई की सडक स्वीकृत की गयी थी। इसके निर्माण के में लगे ठेकेदार ने सड़क पर मिट्टी व मुरूम बिछाकर चला गया। मिट्टी मुरूम की सडक बरसात के दिनों में पानी के बहाव व भराव के कारण बुरी तरह से जर्जर हो गयी है। इसी जर्जर मार्ग की सहायता से लोगों का प्रतिदिन जनपद मुख्यालय तक आना जाना लगा रहता है। जिससे चलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मार्ग में हसदों नदी पर पुल का निर्माण कुछ वर्ष पूर्व निर्माण कराया गया था जो घटिया निर्माण कार्य के कारण पुल टुटकर बैठ गयी है। इसी टुटे पुल के मार्ग से लोगों का आवागन होता है बरसात के समय यह मार्ग बाढ़ के कारण घंटों अवरूद्ध भी हो जाता है। 

     

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Posted Date : 02-Oct-2017
  • मंत्री से पेंशन देने की गुहार 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 2 अक्टूबर।  समाज कल्याण व जनपद पंचायत के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में एक बुजुर्ग महिला को सम्मानित किया गया, जबकि उसे ग्राम पंचायत ने मृत घोषित कर दिया है। उसे पेंशन भी नहीं दी जा रही है।
    दरअसल, वृद्धजन दिवस पर रविवार को संस्कृति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में ग्राम पंचायत महोरा की बसंती (80) पंचायत द्वारा मृत घोषित कर दिया गया है लेकिन वृद्धजन दिवस पर जब उसका नाम पुकारा गया तो वह मंत्री के सामने मंच पर खड़ी हो गई। फिर मंत्री द्वारा उसे भी सम्मानित किया गया। 
    इस दौरान बसंती ने शिकायत कर कहा कि ग्राम पंचायत के सचिव ने मृत मानकर वृद्धावस्था पेंशन राशि बंद कर दी है। इससे बुजुर्ग महिला को पिछले कई महीने से पेंशन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। बुजुर्ग महिला के साथ उनके परिजन भी आए थे। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग महिला पेंशन राशि के लिए बार-बार ग्राम पंचायत कार्यालय का चक्कर लगा रही है। बावजूद बुजुर्ग महिला के समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है।
    वही ग्रामीण अंचल से आए बुजुर्गों ने श्रममंत्री से शिकायत कर कहा कि पिछले 6-7 महीने से वृद्धावस्था पेंशन की राशि नहीं मिल रही है। अब बुजुर्गों को सालभर में एक दिन बुलाकर सम्मानित किया गया। बुजुर्गों ने कहा कि वृद्धावास्था पेंशन की राशि में डाका डालकर एक दिन का यह कैसा सम्मान है। 
    कार्यक्रम में करीब 30-40 बुजुर्गों ने श्रममंंत्री सहित अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई और कहा कि पिछले 6-7 महीने से वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य पेंशन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे बुजुर्गों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

     

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Posted Date : 28-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 28 सितंबर। गुरुवार की सुबह चिरमिरी के हीरागीर दफाई इलाके में रहने वाली 22 वर्षीया नवविवाहिता सोमा यादव का शव फांसी पर लटका हुआ मिला।
     वहीं महिला की डेढ़ वर्षीय बच्ची का शव भी पास मिला। मामले की सूचना पर पुलिस जांच में जुटी हुई है। बताया जाता है कि यह परिवार मजदूरी करता था, और आर्थिक दिक्कतों से परेशान था।
    चिरमिरी थाना प्रभारी विनीत दुबे का कहना है आत्महत्या को लेकर जांच जारी है। परिवार मजदूरी करता था। गरीबी को लेकर ऐसा किया है अभी इस पर कुछ कह पाना संभव नहीं है। हालांकि जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
    जानकारी के अनुसार सोमा यादव की तीन बरस पहले ही जय प्रकाश यादव से शादी हुई थी। जय प्रकाश बाजार में मजदूरी  का काम करता है। गुरुवार की सुबह उसका फांसी से झूलता शव और पास में बच्ची का शव मिला। 
     बताया जा रहा है कि सोमा ने पहले अपनी दुधमुंही डेढ वर्षीया बच्ची का गला घोंट कर उसे मार दिया और फिर खुद फांसी पर झूल गई। पड़ोसी और आसपास के लोगों का कहना है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं थी। मृतका का मायका कुबरीलड़वी थाना रांवा जिला देवघर बिहार में है।

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Posted Date : 27-Sep-2017
  • भरतपुर के एक गांव में तीन मौतें, कई पीडि़त 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 27 सितंबर। कोरिया जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में मलेरिया के थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के भरतपुर तहसील में एक बार फिर एक ही गांव के तीन लोगों की मौत मलेरिया बुखार से हो गयी, जिन घरों में मौत हुई है उनके परिवार में पीडि़त लोगों की जांच में मलेरिया पॉजिटीव आया है, जिससे साफ है कि मौतें मलेरिया से ही हुई है। इधर, राज्य सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग अब औषधियुक्त मच्छरदानी वितरण के लिए सर्वे का काम शुरू करने जा रहा है। बरसात के सीजन में ही मलेरिया बुखार के सबसे ज्यादा मरीज सामने आते है इसे ध्यान में रखते हुए बरसात के पूर्व ही मेडिकेडेट मच्छरदानी का वितरण किया जाना चाहिए था।
    जानकारी के अनुसार जिले के भरतपुर के दुधासी ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम नरगाडंडी में बीते एक सप्ताह से मलेरिया फैला है। पहली मौत 8 सितंबर 2017 को राजेश पिता भगवान सिह (35) की हुई उसके बाद 22 सितंबर 2017 को बहादूर सिंह पिता मनबोध (55) और फिर 24 सितंबर 2017 को सुनील पिता अशोक (4) की मौत हो गयी, तीन लोगों की मौत हुए तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग का अमला बुधवार को जागा, स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची,  सिर्फ एक गंभीर रूप से पीडित को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर लाया गया जबकि अभी वहां 5 गंभीर रूप से पीडि़तों से अस्पताल जाने से मना कर दिया। हलांकि अभी भी गांव में 35 लोग पीडित है। स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर पहुंचकर 48 मरीज देखे गए जिनमें 14 मलेरिया पॉजिटीव निकले। सरकारी कीट से जांची गई बीमारी के कारण सभी गंभीर रूप से मलेरिया से पीडि़त बताए जा रहे है। गंभीर रूप से मलेरिया पीडित फिलहाल गांव नरगाडंडी में कमलेश पिता दलपत सिंह (14) फुलबसिया पति बहादूर सिंह (56) भरतपुर सिंह पिता बहादूर सिंह (34) गीता पति भरतपुर सिह (30) अंजनी प्रति प्राण सिंह (4) सहित कई पीडित है। जिनका इलाज वहीं गांव में ही जारी है। 
    जानकार सूत्र बताते हैं कि मलेरिया की जांच के लिए सरकारी किट तभी मलेरिया बताती है जब कोई व्यक्ति बीमारी से काफी गंभीर हो जाता है। कई बार मलेरिया सिर पर पहुंच जाने पर ये कीट बता पाती है, जिसके कारण मलेरिया धीरे-धीरे पीडि़त को जकड़ चुका होता है। कुछ प्रभावित लोगों की मौत भी हो चुकी है। जिले में बीते दो माह से  अभी तक दैनिक छत्तीसगढ़ ऐसी 12 मौतों की जानकारी प्रकाशित कर चुका है। 
    क्या है अभी तक की स्थिति
    जिले में मलेरिया विभाग के आंकड़े बताते ह़ै कि इस वर्ष मलेरिया ने जिले भर में कोहराम मचा रखा है। भरतपुर     2599 शंकाप्रद मरीजों में 2570 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 60 पीवी और 70 पीएफ,  मनेन्द्रगढ के 6279 शंकाप्रद मरीजों में 4459 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 46 पीवी और 85 पीएफ, खडगवां के 5000 शंकाप्रद मरीजों में 5000 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 60 पीवी और 138 पीएफ, सोनहत के 6857 शंकाप्रद मरीजों में 6857 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 7 पीवी और 53 पीएफ पाए गए। पटना, बैकुंठपुर के 3179 शंकाप्रद मरीजों में 3179 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 4 पीवी और 39 पीएफ, जिला अस्पताल के 997 शंकाप्रद मरीजों में 5000 में मलेरिया के लक्षण पाए जिनमें 4 पीवी और 39 पीएफ पाए गए। इस तरह अभी तक 24911 मरीज मलेरिया से पीडित पाए गए है। 

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Posted Date : 27-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 27 सितंबर। कोरिया जिला मुख्यालय स्थित सखी सेंटर में काउंसलिंग के दौरान एक महिला ने एक साथ 7 सल्फास की गोलियां खा लीं, उसकी जिला अस्पताल में मौत हो गयी।  
    मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार  जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के महलपारा स्थित सखी सेंटर में उस समय अफरा-तफरी मच गयी, जब ये मालूम पड़ा कि कांउसलिंग में आई एक महिला ने कुछ गोलियां खाकर आत्महत्या की कोशिश की। जिसके बाद आनन-फानन में महिला को जिला अस्पताल लाया गया, कुछ देर में उसकी मौत हो गयी। 
    सूचना पर पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।  देर रात तक मृतका के परिजन सखी सेंटर पर रूके रहे। बुधवार सुबह 11 बजे तक महिला के खुदकुशी किए जाने की जानकारी सखी सेंटर से थाना तक नहीं पहुंच पाई, बाद में तहसीलदार ने थाना पहुंच कर कार्यवाही शुरू करवाई और फिर पोस्टमार्टम की कार्यवाही शुरू हो सकी। 
    बार-बार धमका रही थी- काउंसलिग में पहुंची महिला बार बार खुदकुशी करने के लिए धमका रही थी, वो किसी भी कीमत पर अपने जीजा से अलग होने की तैयार नहीं थी। बताया जाता है कि पहले भी कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी। सल्फास की गोलियां वो खुद अपने साथ लाई थी।
    दूसरी बार कांउसिलिंग में आए डेविड अपनी पत्नी सरिता और साली ममता से सखी सेंटर के लोग बात कर रहे थे, ममता को जीजा के साथ ना रहने की समझाईस दी जा रही थी। इसी बीच ममता बाथरूम गई, कुछ देर बाद वहां से उल्टी  की आवाजें आने लगीं। फौरन उसे जिला अस्पताल लाया गया। डाक्टरों को मृतका ने बताया कि उसने एक साथ 7 गोलियां सल्फास की खाई हैं, बाद में उसकी जिला अस्पताल में मौत हो गयी। 
    क्या था मामला
    दरअसल, सुरजपुर जिले के रघुनाथपुर निवासी डेंविड कुमार लाल का विवाह 2007 में कोरबा जिले के कुरमुरा की सरिता से हुआ।  उसकी साली ममता  पति से अनबन के कारण अपने जीजा  के घर रहने लगी। डेविड कई बार उसे अपने घर जाने को कहता, परन्तु  वह उसी के साथ रहने की जिद पर कायम थी। कई बार इसी बात को लेकर गांव में पंचायत भी बैठी। 
    इसी बीच उसकी पत्नी सरिता ने राज्य महिला आयोग में मामले को सुलझाने की गुहार लगाई। जिसके बाद मामला सखी सेंटर पहुंच गया। दो साल पहले डेविड उसकी पत्नी और साली की एक बार कांउंसलिंग हो चुकी थी, दूसरी बात कांउसलिंग के लिए सखी सेंटर में तीनों को बुलाया गया था। इस दौरान मृतका के पिता समेत और भी कई रिश्तेदार उस दौरान उपस्थित थे।

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Posted Date : 26-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    मनेंद्रगढ़, 26 सितंबर। झगड़ाखांड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बंजी में रहने वाले दो सगे भाइयों ने अपने रिश्ते के एक भाई की हत्या कर दी। घटना की जानकारी खुद आरोपियों द्वारा गांव के सरपंच को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कुएं से निकलवाया। 
    प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बंजी में रहने वाले जयलाल  व गुलजार  पहले बंजी में निवास करते थे। लेकिन उनके रिश्ते के भाई सूरजभान सिंह  के दहशत के कारण दोनों पाराडोल के करही पारा में रहने लगे थे। मृतक ने दोनों भाइयों को घर से निकालने के बाद उनके कपड़े जलाकर  घर में रखा अनाज बेच दिया। इसके साथ ही उनके घर पर कब्जा कर लिया।
    सोमवार की शाम  जयलाल व गुलजार चाखनपारा अपने पुराने घर को देखने गये थे तभी  मृतक से वाद विवाद होने लगा। सूरजभान ने धारदार हथियार से इन पर हमला कर  दिया। इससे बचते हुए  दोनों भाईयों ने उसी हथियार से उस पर हमला कर  घायल कर दिया और  कुएं में फेंक दिया। फिर इस घटना की जानकारी  गाँव के सरपंच को  दी। (बाकी पेजï 5 पर)
    सरपंच दोनों को लेकर झगड़ाखांड थाने पहुंचा। थाना प्रभारी  बल सहित मौके पर पहुंचे और शव को कुएं से बाहर निकलवाया।  

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Posted Date : 22-Sep-2017
  • वृक्षारोपण महाअभियान 
    चंद्रकांत पारगीर
    बैकुंठपुर, 22 सितंबर (छत्तीसगढ़)।  कोरिया जिले में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के 5 हजार दिन पूरे होने पर स्कूलों में लगाए गए पौधे गायब हो गए है। एक माह पूर्व 20 अगस्त को वृहद वृक्षारोपण महाअभियान के तहत स्कूलों में भी पौधो रोपण का कार्य कराया गया था। वृक्षारोपण के पश्चात लगाये गये पौधों को सुरक्षित बचाने के लिए संकल्प भी लिया गया था।  
    छत्तीसगढ़ ने जिले के पांचों तहसील में कई पंचायतों के स्कूल परिसर में जब 20 अगस्त को लगाये गये पौधारोपण की जानकारी ली गई तो लिया गया तो पता चला कि कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाये तो लगभग स्कूलों में बीते माह रोपे गये पौधे आज दिखाई नहीं दे रहे है। पौधों को बचाने का संकल्प एक माह में ही चकनाचूर हो गया। जबकि वृक्षारोपण के नाम पर हजारों लाखों रूपये खर्च कर दिये गये और नतीजा कुछ भी हासिल नही हुआ। 
    जनपद बैकुंठपुर क्षेत्र के कई पंचायत क्षेत्रों के स्कूल परिसर में कुल लगाये पौधों में 25 प्रतिशत पौधे भी सुरक्षित नही्र बचाये जा सके वह भी एक माह के अंतराल में ही यह हाल है तो फिर जो 25 प्रतिशत अभी दिखाई दे रहे है वह अगले वर्ष के सीजन आते आते वह भी नही दिखाई देंगे। जिससे साफ पता चलता है कि जिस तरह का उत्साह पौधरोपण को  लेकर था उसे बचाने की कवायद की दिशा में वह उत्साह काफूर हो गया। विद्यालय प्रबंधन के द्वारा रोपित पौधों को सुरक्षित रखने की दिशा में लापरवाही बरती गयी जिस कारण एक माह में ही ज्यादातर पौधों का नामो निशान मिट गया है। 
    बैकुंठपुर जनपद क्षेत्र मे अधिकांश विद्यालयों में लगाये गये पौधे में से गिनती के ही पौधे बचे हुए हैं।  शेष पौधों का अता पता नही है। जबकि बरसात भी अभी नही गयी है, केवल असुरक्षा के चलते ही लगाये गये पौधे अस्तित्व में नही रहे। ऐसा ही हाल सोनहत के स्कूलों का है यहां एक दो स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो हर स्कूल की यहीं कहानी है, इसी तरह भरतपुर, खडगवां के स्कूलों का है। पौधों को बचाने के लिए शिक्षकों ने किसी भी प्रकार की दिलचस्पी नहीं दिखाई। 
    कहीं बचाने पर दिया पूरा ध्यान
    ऐसा नहीं कि विद्यालयो में लगाये गये पौधे सुरक्षित नहीं बचाये जा रहे है। कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जहां एक एक पौधों केा बचाने के लिए जो संकल्प पौधों केा रोपित करने के दौरान लिया गया था वह आज भी देखने मिल रहा है। बैकुंठपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के प्राशा सारा, सोनहत के हाई स्कूल सुन्दरपुर ऐसे विद्यालय है जहां पर लगाये गये पौधों को सुरक्षित रखा गया है। ग्राम सारा में पौधे सुरक्षित है बल्कि यहां के किचन गार्डन से रोज जाती सब्जियां बच्चों के मध्यान्ह भोजन में स्वाद बढ़ा रही है। सोनहत जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत सुन्दरपुर हाई स्कूल में भी सभी लगाये गये पौधे सुरक्षित देखे गये। यहां स्कूल प्रबंधन के द्वारा जनसहयोग से बांस की व्यवस्था कर लगाये गये एक एक पौधों को सुरक्षित घेरा बना दिया गया है। मजबूत घेरा बन जाने के कारण पौधे सुरक्षित बच गये है। हाई स्कूल परिसर का बाउन्डीवाल अधूरा बनाकर छोड़ दिये जाने के कारण पूरा परिसर खुला ही रहता है जिसके चलते लगाये गये पौधों को सुरक्षित घेरा देना आवश्यकता था जो यहां देखने मिला।

     

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Posted Date : 22-Sep-2017
  • शिकायत पर वन विभाग ने काम रोका
    ग्रामीणों ने भाजपा नेता पर लगाया मनमानी का आरोप
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 22 सितंबर। कोरिया जिले में मनरेगा से 45 लाख की पुलिया निर्माण वन भूमि पर बिना एनओसी कार्य शुरू करवा दिया,  नियमानुसार कार्य न कराकर नियम विरूद्ध तरीके से कार्य कराये जाने की शिकायत पर वन विभाग ने काम पर रोक लगा दी है। वहीं ग्रामीणों ने भाजपा के कार्यकर्ता पर मनमानी करने का आरोप लगा मामले की शिकायत प्रशासन ने की है। 
    इस संबंध में आरईएस के कार्यपालन अभियंता श्री चौबे का कहना है कि मनरेगा से कार्य स्वीकृत किया गया है, जिसमें टेंडर नहीं होता है, परन्तु मनरेगा में ठेकेदार से कार्य करवाया जा रहा है इसके सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। 
    वहंी जनकपुर के रेंजर श्री केरकेट्टा का कहना है कि कार्य की स्वीकृति जहां होना था वहां नहंी करके उपर करवाया जा रहा था, जो कि वन क्षेत्र में आता है, ग्रामीणों की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए काम पर रोक लगा दी गई है। 
    वहीं कांग्रेस उपाध्यच गुलाब कमरो ने बताया कि भरतपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने मुझे बताया कि भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा मनमानी कर ठेकेदार बन मनरेगा के कार्य करवाए जा रहे है, उन्होने वन विभाग को इसकी जानकारी दी। मनरेगा में ठेकेदारी वर्जित है, ऐसे में संसदीय सचिव द्वारा अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे कार्य करवाए जा रहे है, कार्य के इस्टीमेट की जांच होनी चाहिए।
    प्राप्त जानकारी के अनुसार भरतपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मेंहदौली का आश्रिम ग्राम सत्कियारी तक पहुंच मार्ग एवं पुलिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक योजना का लाभ व्यक्तिगत रूप से देने के लिए कार्य किया जा रहा है। क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव छग शासन के इशारे पर दबावपूर्व कार्य कराने का भी आरोप ग्रामीणों के द्वारा लगाया गया है। 
    दरअसल, भरतपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मेंहदौली के आश्रित ग्राम सत्कियारी जो पहुॅच विहीन है इसे जोडने के लिए सडक मार्ग स्वीकृत हुआ जिसके बीच में पडने वाले अंधेरगढ नाला में पुलिया निर्माण कार्य भी है। मार्ग पर स्वीकृत पुलिया को आरईएस विभाग द्वारा स्वीकृत किया गया है। जिसे भाजपा के एक नेता के कहने पर वन विभाग की जिस स्थान पर पुलिया बनाया जाना चाहिए था वहां न बनाकर वन भूमि पर बनाया जा रहा है जो स्वीकृत सड़क से थोडॉी उपर के हिस्से में है। जिसके दोनों ओर वन भूमि का क्षेत्र है। 
    इसकी जानकारी देने पर कार्य नहीं रोका गया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने गुलाब कमरों को इसकी शिकायत दी जिसके बाद श्री कमरों ने वन विभाग को कार्यवाही के लिए कहा तो विभाग ने गुरूवार को मौके पहुंच कर वनाये जा रहे पुलिया निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गयी। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में ग्राम सत्कियारी जाने के लिए तीन पहुंच मार्ग बनाये गये है जिसमें पुल न बनाकर दूसरे जगह पर पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए पहले 5 सौ मीटर सड़क बनाया जा रहा है। इसके बाद पुलिया फिर 250 मीटर सड़क बनायी जायेगी। जबकि ग्राम सत्कियारी के लिए पूर्व पश्चिम, व मध्य से आज भी पहुंच मार्ग है। फिर भी बिना मतलब के अपनी जिद से कार्य कराया जा रहा है जिसमें वन विभाग की 810 मीटर भूमि को सम्मिलित किया जाना है। 
    जहां जाना है जाओ
    ग्रामीणों के अनुसार आरईएस विभाग के अधिकारी को पूर्व से बने पहुंच मार्ग पर ही पुलिया बनाये जाने की मांग की गयी थी तब उन्होंने कहा था कि जहां जाना है जाओ कुछ नहीं होगा। कहां क्या बनाना है हम बनायेंगे। वहीं अब आरईएस विभाग द्वारा ठेकेदार को लेआउट देकर कार्य शुरू करवा दिया, जिसे देखने वाला कोई नहीं है।  

     

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Posted Date : 22-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 22 सितंबर। कोरिया जिलामुख्यालय स्थित गेज नदी के पुल के पास तेज रफ्तार बाइक सवार सामने से आ रहे ट्रक से सीधा जा टकराया, टक्कर इतनी जबरदस्त थी की कि बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा बना मृतक की पहचान में जुटी है। मिली जानकारी के अनुसार दोपहर 1 बजे पटना की ओर से आ रही तेज रफ्तार बाइक गेज नदी पार कर रही ट्रक से सीधे टकराई। बाइक की रफ्तार इतनी तेज थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पचक गया, वहीं बाइक के भी परखच्चे उड़ गए। बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गई।

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Posted Date : 16-Sep-2017
  • किसानों को जानकारी नहीं, समिति भी नहीं जानती बीमा दावा कैसे करेगी
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 16 सितंबर। कोरिया जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिला प्रशासन ने आनन फानन में ऋ णी और अऋ णी कृषकों को बीमा तो कर दिया, परन्तु  लाभ कैसे मिलेगा ये किसी ने नहीं बताया। किसानों को पता ही नहीं है कि उनकी जमीन चाहे वो बंजर हो या खेती के उपयोग की हो सब का बीमा हो चुका है। मजे की बात तो यह है कि किसानों का बीमा कर चुके समिति प्रबंधक भी नहीं जानते कि आखिर किसान कैसे बीमा का क्लेम ले सकेंगेे।
    इस संबंध में जिला सहकारी समिति के प्रबंधक धमेन्द्र शर्मा का कहना है कि पूरे गांव के हिसाब से किसानों को क्लेम मिलेगा, ऐसा नियम है और इसकी निगरानी का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया गया है। वहीं फसल बीमा को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष गुलाब कमरो का कहना है सरकार और जिला प्रशासन इंश्योरेंश कंपनी की गोद में खेल रहे हंै, किसानों की कोई चिंता नहीं है, बीते वर्ष भी इसी तरह करोड़ों रू किसानों से प्रीमियम के नाम पर लिए गए, परन्तु कोई फायदा किसानों को नहीं मिला, इस वर्ष भी यही होने वाला है। 
    दरअसल, बीते जुलाई माह में जिला कलेक्टर ने सभी समितियों के प्रबंधकों और बैकों की बैठक ली थी, बैठक में इफ्को टोक्यों इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित थे, उन्होने प्रोजेक्टर पर कुछ प्रजेन्टेशन भी दिखाए। जिन्होंने सवाल उठाए उन्हें बस बीमा करने से मतलब रखने को कह मुंह बंद कर दिया गया। जिसके बाद कलेक्टर ने सभी समितियों एवं बैंकों को कैसे भी सभी किसानों के बीमा समय सीमा पर करने के निर्देश दे दिए। बस फिर क्या था बैकों और समितियों ने किसानों को बिना बताए उनके रकबे के अनुसार प्रीमियम काट ली, किसान चाहे तो और ना चाहे तो उन्हें फसल बीमा हो गया। 
    जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में 10299 ऋणी किसानों का 21632 रकबा के आधार पर 7 करोड़ 88 लाख 8 हजार 49 रू और 2068 अऋणी किसानों का 2226 रकबा के आधार पर 2 करोड़ 16 लाख 1 हजार 114 रू, इस तरह 12367 किसानों के कुल 10 करोड़ 49 हजार रू की राशि प्रीमियम के रूप में इंश्योरेंश कम्पनी को जमा किए जा चुके है। 
    इधर, किसानों को पता तक नहीं है कि वो और कर्जदार हो चुके हंै, ये भी नहीं जानते है कि उन्हेें मुआवजा कैसे मिलेगा और उसके लिए कैसे क्लेम करना है। दूसरी ओर प्रबंधकों ने किसानोंं के रकबे में जितनी भी भूमि दिखी बीमा किया। उनका कहना है ऐसा केन्द्र सरकार से आदेश आया था। उसके हिसाब से उतनी पर बीमा प्रीमियम किसानों के खाते से काट ली, जबकि उन्हें किसान जितनी भूमि पर वो खेती करता उतने पर प्रीमियम राशि लेना था। 
    कुछ किसान बताते हंै कि जब फसल बर्बाद होगी और बीमा कंपनी जांच करने आएंगे तो वस्तु स्थिति के अनुसार ही उसकी राशि देंगेे, ऐसे में उन्हें बेवजह ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। इससे साफ है सरकार ने बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फटाफट बीमा करवा डाला। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक एक कृषक की फसल का बीमा किया गया। पर जब मुआवजा देने की बारी आएगी तो ब्लाक स्तर पर, पंचायत स्तर पर दिया जाता है वो भी कृषकों के साथ अन्याय है। ऐसे में ज्यादातर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है, बीते वर्ष ऐसा ही हुआ है।
    क्या कहते हंै किसान
    कोरिया जिले के कदमबेहरा के किसान धीरसाय, गणेश प्रसाद, मोहरराम, जगेश्वर राम का कहना है कि उन्हेें बीमा के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं है, फसल का बीमा हो चुका है, ये भी नहीं पता, वहीं भरतपुर के ग्राम पंडरी के बैगा आदिवासियों में रामलखन, सीताराम ने भी बताया कि ऐसी कोई जानकारी उन्हें नहीं है कि समिति ने हमारे खाते से राशि काट कर बीमा कर दिया हैं, इसके अलावा खडगवां के कोटेया निवासी होलसाय सत्यनारायण, अर्जुन, सहदेव, नंदलाल, गयाराम का कहना है बीते वर्ष भी कटा था पर मिला कुछ नहीं आज तक।  इस साल बीमा के बारे में किसी ने नहीं बताया है। बैकुंठपुर के किसान रायसिंह, सुबेलाल, हीरासिंह, मदनसाय का कहना है कि कोई भी इस साल बीमा को लेकर यह बताने नहीं आया है कि फसल खराब होने पर क्या होगा। इसी तरह सोनहत के रामगढ़ निवासी गणेश गुप्ता, सद्दाम का कहना है कि ऐसी कोई भी जानकारी यहां के किसानों को नहीं है कि उनके खाते से बीमा हो गया है। तो उन्हेे क्लेम कैसे करना है ये कैसे पता चलेगा। 
    छग राज्य में खरीफ की फसल पर कितनी मिलेगी राशि
    केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वेबसाईट पर देखने से पता चला कि जितना प्रीमियल बीमा कंपनी ने किसानों से लिया है, उसके एवज में फसल खराब होने पर कितनी राशि मिलेगी। वेबसाईट के अनुसार छग राज्य में प्रति हेक्टेयर मूंगफली 25 हजार, उड़द 12 हजार, मूंग 13 हजार, मक्का 15 हजार, धान सिंचित 28 हजार, धान असिचिंत 24 हजार, अरहर 12 हजार और सोयाबीन के 22 हजार मिलेंगे। पर इन्हें क्लेम कैसे करना है इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।
    क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
    किसानों की फसल के संबंध में अनिश्चितताओं को दूर करने के लिये नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई हानि को किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम करायेगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत, किसानों को बीमा कम्पनियों द्वारा निश्चित, खरीफ की फसल के लिये 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिये 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करेगा। इसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हुई फसल के खिलाफ किसानों द्वारा भुगतान की जाने वाली बीमा की किस्तों को बहुत नीचा रखा गया है, जिनका प्रत्येक स्तर का किसान आसानी से भुगतान कर सके। इसके अन्तर्गत सभी प्रकार की फसलों (रबी, खरीफ, वाणिज्यिक और बागवानी की फसलें) को शामिल किया गया है। खरीफ (धान या चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, सोयाबीन आदि) की फसलों के लिये 2 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान किया जायेगा।

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Posted Date : 10-Sep-2017
  • चंद्रकांत पारगीर
    बैकुंठपुर, 10 सितंबर (छत्तीसगढ़)। कोरिया जिला प्रकृति की गोद में बसा जिला है और इस जिले में कई ऐसे प्राकृतिक स्थल है जहां तक पहुॅंचने के लिए अभी भी सुगम रास्ते का निर्माण नहीं होने के कारण लोगों को पैदल व दुर्गम रास्तों से होकर ऐसे प्राकृतिक स्थलों तक पहुंचना पड़ता है। 
    प्राकृतिक व ऐतिहासिक स्थल जिला मुख्यालय से कुछ ही किमी की दूरी पर सोनहत ब्लाक में कटगोडी घाट के जंगलों के बीच में स्थित है जिसके बारे में स्वयं जिला मुख्यालय के अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं है क्योंकि यहां तक पहुॅंचने के लिए सुगम रास्ता नहीं है लेकिन आस पास के ग्रामीणों को इसकी जानकारी होने के कारण आये दिन विभिन्न अवसरों पर यहां पहुंचते रहते हैं। 
    यहां के समुंदई क्षेत्र में स्थित सीता गुफा जिसे स्थानीयजन सीता कोठरी के नाम से पुकारते है यहांॅ तक पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर से सोनहत मार्ग पर 12 किमी की दूरी पर नौगई पहाडपारा गॉंव है यहां के प्राशा भवन के बगल से समुंदाई क्षेत्र तक पहुंॅचा जा सकता है। पर रास्ता सुगम  नहीं है। 
    खासकर विभिन्न पर्व के अवसर पर क्षेत्रीय लोग समुंदाई नामक स्थान पर पहुंचते है जहां एक विशाल चट्टान में गुफा बना हुआ है जिसे सीता कोठरी के नाम से जाना जाता है यहां पर जन्माष्टमी, रामनवती शिवरा़ित्र आदि मौके पर लोगों की भीड़ जुटती है। 15 अगस्त को जन्माष्टमी के अवसर पर यहां पर ग्राम छरछा बस्ती, रकैया, आदि क्षेत्रों के कई श्रद्धालु पहुंच कर पूजा अर्चना कर घटों कीर्तन भजन करते रहे।  

     

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Posted Date : 09-Sep-2017
  • अधिकांश बच्चे  
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 9 सितंबर। कोरिया जिले में मौसमी बीमारियों का कहर जारी है।  भरतपुर तहसील के  ग्राम घघरा के आश्रित ग्राम पोडी में एक बार फिर संरक्षित जनजाति पंडो बैगा के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं लगभग पूरा गांव  उल्टी-दस्त से पीडि़त है। वहीं 26 अगस्त को हुई तीन बच्चों की मौत की खबर के बाद शुक्रवार दोपहर मेडिकल टीम  पहुंची है। खबर लिखे जाने तक 15 ग्रामीणों की जांच की जा चुकी थी, जिसमें सबसे ज्यादा बच्चे हंै।
    मिली जानकारी के अनुसार भरतपुर के कोटाडोल मार्ग पर पडने वाले ग्राम घघरा के आश्रित ग्राम पोडी मे उल्टी-दस्त फैला हुआ है। यहां संरक्षित जनजाति बैगा और पंडो निवासरत है, कुल 22 घर में हर घर में कोई ना कोई पीडि़त है। बीते 26 अगस्त  को मनोज पिता पुष्पराज (3 वर्ष), अनीता (8 वर्ष) की मौत दस्त से जबकि प्रदीप (8 वर्ष) की मौत बुखार से हो गई थी। सभी पंडो जनजाति के बताए जा रहे है। 
    शुक्रवार को  स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली, इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय हुआ। शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच में मलेरिया, उल्टी-दस्त, पीलिया और बुखार के सबसे ज्यादा मरीज पाए गए हैं। वहीं अभी जांच जारी है। जिनमें सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हंै।  पोडी में  21 परिवार बैगा और पंडो जनजाति के है। 
    उल्लेखनीय है कि कोरिया जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है, खासकर जिलेे के तहसील भरतपुर में कई ऐसे क्षेत्र हंै, जहां ज्यादातर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपने मुख्यालय में निवास नहीं करते हंै, जिसके कारण ग्रामीणों को झोलाछाप डाक्टरों के सहारे रहना पड़ता है।

     

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Posted Date : 07-Sep-2017
  • भरतपुर में बारिश के लिए टोटकों का दौर, हवन भजन-कीर्तन जारी 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 7 सितंबर। अकाल की स्थिति निर्मित होते देख कोरिया जिले के किसान बेहद परेशान है, भरतपुर के किसान परिवार अब प्रकृति के विपरित जाने वाले मौसम को बहुत कोस रहे है। किसान परिवार की महिलाएं अब पुरूष बनकर मवेशी चराने जा रही है, तो देवताओं को गोबर पोत कर तरह तरह के टोटके जारी है, वहीं जल्दी बारिश हो इसके लिए कई गांव में बीते कई दिनों से अखंड भजन कीर्तन जारी है।  इधर, छत्तीसगढ की खबर के बाद राज्य सरकार ने आकाल के लिए राज्य स्तरीय सर्वे टीम कोरिया पहुंची और भरतपुर के कुछ गांवों में जाकर किसानों से बात की।
    कोरिया जिले के जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के आसपास में बीते तीन दिन मे रूक रूक कर बारिश हुई है, परन्तु भरतपुर तहसील में एक बूंद पानी नहीं गिरा है, यहां के किसानों की मक्का, धान, कोदो की फसल एकदम खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में कई गांवों में अपने ईष्ट देव को मनाने हर संभव प्रयास कर रहे र्है।  ग्राम पंचायत कुंवारी में महिलाएं पुरूषों के कपड़े पहन कर गांव गांव में घूम रही है तो पुरूषों के काम कर रही है, हाथ में डंडा लेकर मवेशी चराने जा रही है। गांव की मनबसिया अपने देवता को कहती है कि जब आप खुद प्रकृति के नियम बदल रहे हो, समय पर पानी आता था उसे बदल दिए तो क्यों ना हम लोग भी बदल जाए, क्यों ना प्रकृति के विपरित जाकर काम करें। इसके अलावा यहां दिनरात भगवान को मनाने तरह तरह के गीत गाकर मनाने की कोशिश जारी है। 
    यहां कई गांवों के लिए अखंड पाठ टूट नहीं पाए एक के बाद एक अपने को जोड रहे है। वहीं इसी तरह ग्राम नोढिया में झगराखांड माता के स्थान पर गांव के लोग 15 दिन से अखंड पाठ कर रहे है। वे सभी माता से जल्दी बारिश हो ऐसी कामना कर भजन में लगे हुए है। यहां के गोरेलाल, राममिलन, संतोष कुमार, रामभुवन, दयाराम, धर्मदेव, विजय बहादूर, कमलेश, फगुनी, मुन्नीबाई, हिरमती, मालतीबाई, फुल्लीबाई, बब्बीबाई, सुखमति, सुखरनिया, चैतीबाई, नानबाई, रनिया, मुगिया बाई, फूलमतिया, इंद्रवती, राजबाई सहित दर्जनों लोग यहां उपस्थित है, इधर, जनकपुर के कैलासमंदिर में बुधवार को जल्दी बारिश को इसके लिए भागवत कथा का शुभारंभ के पहले कलश यात्रा निकाली गई। भागवत कथा को लेकर आयोजक प्रमोद तिवारी का कहना है इस वर्ष हमारे यहां यदि पानी नहीं गिरा तो भीषण आकाल की स्थिति निर्मित हो जाएगी, आने वाले एक सप्ताह के अंदर पानी गिरना बहुत जरूरी है। 
    सर्वे टीम पहुंची
    'छत्तीसगढ' की खबर के बाद राज्य सरकार राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय जांच दल भेजा है, बुधवार को पहुंची टीम को भरतपुर एसडीएम रवि राही के साथ विभागीय अमले ने ग्राम चुटकी, उमरवाह और बहरासी के किसानों की फसलों को देखा है। टीम मुख्य मार्गो पर पडने वाले गांव का दौरा कर लौट गयी, हलांकि बहरासी से आगे जनकपुर के किसानों से रूबरू नहीं हो पाई, टीम लौट कर अपने रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेगी।

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Posted Date : 04-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    मनेन्द्रगढ़, 4 सितंबर। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ में उस समय लोग कचरे के ढेर पर टूट पड़े जब  जानकारी मिली कि कचरे के ढेर में 500 और 1000 रुपये के नोट निकल रहे हैं। जी हां, यह पूरा मामला है मनेंद्रगढ़ के भारतीय स्टेट बैंक के सामने स्थित कचरे के ढेर का, जहां सोमवार की सुबह सफाई कर्मचारी जब कचरे का ढेर से उठाने के लिए आये तो उन लोगों ने देखा कि कचरे के ढेर में 500 -1000 रुपये की पुराने नोट भारी तादाद में पड़े हुए हैं। आस-पास के लोगों को जब इस बात की जानकारी हुई तो काफी संख्या में लोग कचरे के ढेर में नोट बीनने में लग गए। 
    घटना स्थल के पास तीन बैंक स्टेट बैंक,बैंक ऑफ इंडिया,बैंक ऑफ बड़ौदा स्थित हैं। मामले की जांच करने नगर निरीक्षक विमलेश दुबे ने तीनों बैंक के ब्रांच मैनजरों से भी पूछताछ कर पुराने नोटों की जानकारी ली।
    कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ थाना क्षेत्र के बाजार में स्थित भारतीय स्टेट बैंक के सामने सोमवार की सुबह लगभग 9 बजे नगरपालिका परिषद के कर्मचारी रोज की तरह साफ सफाई में लगे हुए थे।  कुछ सफाई कर्मचारियों ने जब कचरे के ढेर को उठाकर ट्रेक्टर ट्रॉली में डालना शुरु किया तो उनकी आंखें हैरत से फटी रह गई जब कचरे के ढेर से   हजार-पांच सौ रुपये के फटे पुराने नोट भारी तादाद में निकलने लगे। सफाई कर्मचारी कचरे के ढेर से नोट निकलता देख नोट समेटने में जुट गए। 
    वहां आसपास के लोग भी कचरे के ढेर से नोट निकलता देख वहां पर जमा होने लगे।  कचरे के ढेर से जितने भी नोट मिले हैं सब 500 और 1000 के वे पुराने नोट हैं जिन्हें बीते  महीने चलन से बाहर किया गया है। 
     अनुमान लगाया जा रहा है कि हो सकता है इन नोटों को बैंक में जमा करने के लिए लाया गया हो लेकिन जब बैंक अधिकारी ने नोट जमा करने से मना कर दिया तो उन्हें फाड़ कर कचरे के ढेर में फेंक दिया गया।  

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Posted Date : 04-Sep-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 4 सितंबर। ये नजारा है कोरिया के भरतपुर तहसील का, जहां ग्रामीण इंद्र देवता से बारिश की मांग कर बीते तीन दिनों से टोने-टोटके और गीत गाकर धरने पर  हैं। ग्रामीण बादल को  बरसने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।  दिनभर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर उन्हें बरसने को आमंत्रित कर रहे हैं।
    दरअसल, कोरिया जिले में बीते तीन वर्षों से खेती को लेकर किसान बेहद परेशान है, वर्ष 2015-16 में जिला अकाल की चपेट में आया था, फिर वर्ष 2016-17 में  भरतपुर में इतनी बारिश हुई कि खेतों में पानी भरा रहा और  खड़ी फसल बर्बाद  हो गया। इस वर्ष शुरुवात में  बारिश हुई, परन्तु अब बिना पानी खेतों में खड़ी फसल  पीली पड़ती जा रही है। वहीं भरतपुर तहसील के 5 गांव लरकोडा, डोगरीटोला, बडकाडोल, सरईटोला और सरईपाली के ग्रामीण मेघों के देवता इंद्र को मनाने के लिए धरने पर हंै। 
    बीते तीन दिन से इन गांवों की महिलाएं कई लोकगीत गाकर उन्हें मनाने में जुटी हंै तो पुरूष भी उनके साथ कंघे से कंघा मिलाकर साथ दे रहे हंै। इनमें सभी जाति के लोग शामिल है। धरने पर बैठे उपसरपंच धनी सिंह, लालबीर सिंह, मान सिंह, अजमेर, मंगल सिंह, बृहस्पति, भूपेश, नान बाई, रूकमन, भूतन, निरसिया बाई सहित कई ग्रामीण बताते हंै कि ऐसा उनके पूर्वज करते आए हंै, जिससे जल्दी बारिश होती है, वे सब कैसे भी हो मेघों को मना लेंगे, क्योंकि यदि 10 दिन में पानी नहीं गिरा तो हम लोगों की खेती चौपट हो जाएगी। यदि पानी बरसता है तो बकरे की बलि दी जाएगी। 
    घरों की लीपाई उखाड़ कर रहे प्रवाहित
    मेघों को बरसने पर मजबूर करने के लिए यहां बैठे ग्रामीण टोटका भी कर रहे हैं। वे  अपने घरों  की लीपाई उखाड़ कर नदी में प्रवाहित कर  रहे हैं। उनका कहना है कुछ लोगों की गलती है कि बारिश के पहले लीपाई की जिससे भी बारिश नहीं हो रही है। नदी में प्रवाहित करने के बाद सभी वहां से पानी भर कर लाते हंै और रोजाना पीपल के पेड़ के नीचे हवन-पूजा किया जाता है। फिर पूरे दिन लोकगीतों के माध्यम से इंद्र देवता को खुश करने का काम चलता है। कन्याओं से हवन करवाया जा रहा है। 
    नहीं मिलता है सरकारी योजना 
    ग्रामीण बताते है सरकारी योजना से बने तालाब डेम से वे लाभ नहीं ले पा रहे हंै। डेम और नहरें बनी भी है तो जर्जर होने के कारण वे किसी काम की नहीं है।  राज्य सरकार के बोनस घोषमा पर ग्रामीणों का कहना है जब फसल ही नहीं हुई तो बोनस किस काम का। 
    कोरिया में बारिश का हाल
    कोरिया में औसत बारिश 1410 मिमि है जबकि अभी तक 830 मिमि बारिश हुई है।  सबसे कम बारिश बैकुंठपुर में मात्र 54 प्रतिशत, भरतपुर और मनेन्द्रगढ़ में 71 प्रतिशत, खडग़वां में 74 प्रतिशत और सबसे ज्यादा बारिश सोनहत में 106 प्रतिशत दर्ज की गई है।  
    बोनस के पहले खोले राहत कार्य
    धरने में पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष गुलाब कमरो का कहना है राज्य सरकार ने बोनस की घोषणा तो कर दी, परन्तु अकाल की स्थिति को देखते हुए पहले राहत कार्य खोले जाएं, स्टापडेमों के गेट खुले पड़े हंै, पानी को रोकने प्रशासन अभी तक आगे नहीं आया है।  ग्रामीण मेघों को मनाने के लिए ऐसे टोटके करने पड़ रहे हैं। बीते तीन साल के हालात को देखते हुए राज्य सरकार तत्काल किसानों के कर्ज माफ करें।

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Posted Date : 02-Sep-2017
  • कॉलरी कामगार परिवार भुखमरी के कगार पर
    रंजीत सिंह
    मनेन्द्रगढ़, 2 सितम्बर।  हसदेव क्षेत्रांतर्गत विभिन्न कॉलरी खदानों में कार्यरत् अशिक्षित एवं कम पढ़े-लिखे श्रमिकों को बीमा के नाम पर शोषण का शिकार बनाने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। बीमा एजेंटों के इस कथित शोषण के कारण 30 से 50 हजार वेतन पाने वाले कॉलरी श्रमिकों एवं उनके परिवार जनों के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ जाती है तो वहीं कुछ श्रमिक कर्ज के बोझतले दबते चले जाते हैं।
    ताजा मामला वेस्ट झगराखांड कॅलरी खोंगापानी एसईसीएल हसदेव क्षेत्र में ड्रेसर के पद पर कार्यरत् कॉलरी कर्मी रामजीत का है जिसके नाम पर विभिन्न बीमा एजेंटों द्वारा 20 बीमा किया गया है जिसके प्रीमियम के रूप में प्रतिमाह 12 हजार 517 रूपए कटौती हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिन बीमा एजेंटों द्वारा कॉलरी कर्मी का बीमा धोखे में कराये हुए हस्ताक्षर से कराया गया है उसकी आज तक पॉलिसी बॉण्ड भी कॉलरीकर्मी को नहीं दी गई है। यहां तक कि बीमा एजेंटों के द्वारा कॉलरी कर्मी के बीमा पॉलिसी में नॉमिनी के स्थान पर बीमा एजेंट अपने परिवार के सदस्यों का नाम अंकित करा रखे हैं।
    वेतन कटौती से परिवार चलाना मुश्किल
    कॉलरीकर्मी ने बताया कि उसकी 28 हजार रूपए महीने की तनख्वाह बनती है। बीमा, पीएफ, पेंशन आदि मिलाकर करीब 18 हजार 500 रूपए प्रतिमाह कटौती की जा रही है। केवल बीमा का ही 12 हजार 517 रूपए काटा जा रहा है। शेष 9 हजार 500 रूपए वेतन से उसे अपने अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भरण-पोषण करने में आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।
    पॉलिसी बंद करने भेजा लीगल नोटिस
    बीमा एजेंटों के द्वारा धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर कॉलरी कर्मी के द्वारा भाजीबीनि के मनेंद्रगढ़ शाखा प्रबंधक, प्रबंधक मंडल कार्यालय शहडोल के साथ ही एसईसीएल हसदेव एरिया के वेस्ट झगराखांड कॉलरी शाखा प्रबंधक को अपने अधिवक्ता के माध्यम से लीगल नोटिस भेजकर तीन वर्ष से अधिक चली हुई समस्त पॉलिसियां बंद कर पॉलिसी बांड में उसके द्वारा जो ऋण प्राप्त किया गया है उक्त राशि उसके जमा धन से मुजरा कर लिए जाने की मांग की गई है। कॉलरी कर्मी ने 15 दिवस के भीतर नोटिस का जवाब नहीं दिए जाने पर कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
    शोषण करने में कॉलरी कर्मचारी भी शामिल
    कॉलरी खदानों में पदस्थ श्रमिकों का बीमा के नाम पर आर्थिक एवं मानसिक शोषण करने में निजी बीमा अभिकर्ताओं के साथ-साथ कॉलरी में पदस्थ कर्मचारी भी अपने परिवार जनों को बीमा एजेंट बनाकर शामिल हैं। यदि भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा मनेंद्रगढ़ कार्यालय से कॉलरी कर्मचारियों के परिवार जनों के बीमा अभिकर्ता होने की जानकारी मिल जाए तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं।
    18 फर्जी पॉलिसी, नॉमिनी तक में जालसाजी
    कॉलरी कर्मी रामजीत ने बताया कि उसकी जानकारी में बीमा एजेंटों के द्वारा दो बीमा पॉलिसी की गई है। पॉलिसी संख्या 207615071 का मासिक किश्त 624.67 रूपए तथा बीमा पॉलिसी क्र. 207814416 का मासिक किश्त 663.67 रूपए है। शेष 18 पॉलिसियां एजेंटों के द्वारा उसे नहीं दी गई है। शेष पॉलिसियों की जांच करवाने पर पता चला कि एजेंटों ने मूल बांड को बिना उसकी इजाजत के अपने कब्जे में रखकर उसके नॉमिनी में भी जालसाजी कर अपने परिवार के सदस्यों का नाम अंकित करा रखा है।

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