छत्तीसगढ़

  • दोरनापाल। लगातार हुई बारिश ने बस्तर को प्रभावित किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग- इंद्रावती पुल, मलकानगिरी पुल समेत अंदरूनी इलाकों का कटाव बना रहा नदी नाले उफान पर रहे। वहीं शबरी जो दो राज्यों (छत्तीसगढ़-ओडिशा) के बीच से होकर गुजरती है। के सरहदी इलाकों में आने वाले ओडिशा के खेतों में नदी का पानी लबालब भर झीलनुमा आकार ले चुका है।  ओडिशा के आदिवासी  मछली पकड़ रहे हंै। टीन की बनी छोटी से नाव जिसका वजन मात्र 10-12 किलो होगा से जाल में फंसी हुई मछलियों को निकालने में लगे हुए थे। बारिश में इन आदिवासियों का पेट से लेकर गुज़ारे तक का जुगाड़ हो रहा है।  ये तश्वीर ओडिशा के पोडिय़ा की है। तस्वीर / छत्तीसगढ़  / अमन सिंह भदौरिया 

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  • अब मलकानगिरी में चल रहा इलाज 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    सुकमा, 21 जुलाई। जानकारी का अभाव कहें या फिर अंधविश्वास। लेकिन यह सच है कि एक बाप ने अपने तीन महीने के बच्चे के साथ वो किया जो कभी सोच नहीं सकते। किसी बीमारी से बच्चे का पेट फूला और बुखार आने लगा तो बाप ने झाड़ फूंक कर बच्चे के पेट को जख्मी कर दिया। हालात गंभीर हुई तो मलकानगिरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। 
    जानकारी के मुताबिक सुकमा जिले के पोंगाभेज्जी गाँव जो घोर नक्सल प्रभावित है। वहां का निवासी कोसा पदामी ने कल अपने तीन महीने का बच्चा राजेश को जिला अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। उसके बाद मलकानगिरी जिला अस्पताल में अपने तीन महीने के बच्चे को भर्ती कराया। बताया कि कुछ दिनों से उसके तीन महीने का बच्चा राजेश पदामी का पेट फूल रहा था। जानकारी का अभाव या फिर अंधविश्वास के चलते कोसा ने अपने बेटे राजेश के पेट में छेद नुमा जख्म दे दिए। वो भी एक दो नहीं काफी छेद किए। जिसके कारण बच्चे की हालत गंभीर हो गई। उसके बाद उस बच्चे को सीमावर्ती राज्य ओडिशा के मलकानगिरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है।

     

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