राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर कॉलम : राजपथ-जनपथ - सुंदरानी से अधिक अनुभवी कौन?

Posted Date : 08-Nov-2017

सेक्स-सीडी कांड को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल को सेक्स-सीडी कांड का सूत्रधार करार दिया। उन्होंने सीडी को नकली बताते हुए यह भी कहा कि कांग्रेसी कितना भी छाती पीटे नकली माल नकली ही दिखेगा। पुराने कांग्रेसी सुंदरानी के बयान को काफी गंभीरता से ले रहे हैं। वे मानते हैं कि सीडी असली है या नकली, सुंदरानी से बेहतर कोई नहीं बता सकता। सीडी के पुराने कारोबारी रहे हैं और असली-नकली खूब अच्छे से जानते हैं। जानकार लोग यह भी कहते हैं कि सुंदरानीजी इतने पारखी हैं कि सीडी को देखकर यह बता सकते हैं कि यह कहां फिल्माई गई है, पात्र कौन है? फिलहाल, लोग दोनों पार्टी के नेताओं की बयानबाजी को देख सुन रहे हैं और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। भूपेश बघेल को इस मामले में फंसते देखना जितना भाजपाई चाहते हैं, उतना ही बहुत से कांगे्रसी भी चाहते हैं।

भविष्य ही बेहतर हो सकता है
जीएस मिश्रा के विदाई पार्टी की प्रशासनिक हल्कों में जमकर चर्चा है। महानदी भवन में हुई पार्टी में मिश्राजी को विदाई दी गई। अपर मुख्य सचिव अजय सिंह ने पहले से तैयार एक नोट पढ़ा और उनके स्वस्थ व बेहतर भविष्य की कामना की। हालांकि विभाग में ज्यादा कुछ कहने के लिए था क्योंकि उनके विभाग में सबसे ज्यादा गड़बड़-घोटाले हुए हैं। उनके बेहतर भविष्य की कामना बहुत ही जरूरी थी। सिंचाई अफसरों ने भव्य तौर तरीकों से अपने साहब को विदाई दी। यह पार्टी एक आलीशान होटल में रखी गई थी। कहा जा रहा हैै कि होटल का बिल उन ठेकेदारों के मत्थे चढ़ गया, जो बेचारे पहले से ईओडब्ल्यू-एसीबी के चक्कर काट रहे हैं। बिल देना मजबूरी भी थी, क्योंकि साहब को लेकर यह हल्ला उड़ा है कि उन्हें जल्द ही कोई अहम जिम्मेदारी मिलेगी और वे फिर काम आ सकते हैं। 

महिला की आह बुरी होती है
राज्योत्सव के राज्य स्तरीय सम्मान बंट गए। एक आदमी को कोई सम्मान नहीं मिल पाया, और उसकी हसरत काफी थी। पुराने लोगों ने याद किया कि अपने साथ काम करने वाली एक महिला की तस्वीरों को लेकर यह आदमी अखबारों के दफ्तर में घूमा था कि वे तस्वीरें आपत्तिजनक हैं, और उन्हें छापा जाय। किसी महिला के खिलाफ ऐसी हरकत करने का नतीजा इतना खराब होता है, यह बात बाकी लोगों को भी जान और मान लेनी चाहिए।
 

सम्मान में कमीबेसी
राज्योत्सव के समापन मौके पर जिला प्रशासन की कोशिशों के बाद किसी तरह भीड़ जुट पाई। समापन समारोह में कई परम्पराएं टूटती दिखीं। मसलन, प्रदेश में भाजपा सरकार के बनने के बाद से राज्योत्सव में सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल अहम किरदार में होते थे। लेकिन इस बार वे छिटक गए। पहले वे विधानसभा अध्यक्ष के बगल की कुर्सी में विराजमान होते रहे हैं। वे सम्मान प्राप्त नागरिकों से पहले मिलते थे और फिर मुख्य अतिथि से मिलाते थे। लेकिन इस बार उनकी कुर्सी प्रेमप्रकाश पाण्डेय को आबंटित कर दी गई। सो, बृजमोहनजी सम्मान प्राप्त लोगों से आखिरी में ही मिल पाए। मंच पर सरकार के मंत्रियों के अलावा नेता प्रतिपक्ष के लिए भी कुर्सी रखी जाती रही है। नेता प्रतिपक्ष कार्यक्रम में नहीं आए। मंत्रियों के अलावा भाजपा के पदाधिकारियों को भी मंच पर बिठाया गया था। लेकिन इन सबसे खास बात यह रही कि कार्यक्रम से पहले मंचस्थ अतिथियों का हमेशा सम्मान होता आया है। लेकिन इस बार मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का ही सम्मान किया गया। बाकी का सम्मान करना संस्कृति अफसर भूल गए, अब शराब का विभाग और संस्कृति का विभाग एक ही अफसर को दिया जाएगा, तो शाम के जलसों में कुछ तो भूल होगी ही...।

राजधानी पर सैकड़ों करोड़...
राजधानी रायपुर में चार विधानसभा सीटों पर प्रदेश सरकार के सैकड़ों करोड़ रूपए से इतना काम हुआ है कि लोग हैरान हैं। बड़ी-बड़ी, नई-नई सड़कें, नए-नए पुल, प्रदेश का सबसे बड़ा सभागृह, और भी कई बड़े प्रोजेक्ट इस शहर में बन रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार किसी एक शहर पर इतना खर्च कैसे कर सकती है, इसके जवाब में एक जिम्मेदार और जानकार अधिकारी ने यह कहा कि किसी भी राजधानी की तरह रायपुर में भी पूरे प्रदेश से लोगों की आवाजाही आबादी जितनी ही रहती है। रोज यहां लाखों लोग आते हैं, और न सिर्फ उनकी नजरों में छवि बनाने के लिए, बल्कि उनको सुविधाएं देने के लिए भी राजधानी का ढांचा बाकी शहरों के मुकाबले बेहतर और अधिक क्षमता का रहना जरूरी है। ऐसे में म्युनिसिपल की क्षमता से परे राज्य सरकार को भी इस पर खर्च करना पड़ता है क्योंकि राज्य स्तर के बहुत से काम इसी शहर में होते हैं। यह एक अलग बात है कि राजधानी की विधानसभा सीटों को लेकर कांग्रेस नेता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इतने काम का मुकाबला वे कैसे करेंगे? 


अखबारनवीस पर नई तोहमत
प्रदेश के एक अखबारनवीस के खिलाफ उपभोक्ता फोरम के जज ने पुलिस में शिकायत की है कि वह एक खास पक्ष में फैसला देने के लिए दबाव डाल रहा है। यह अपने किस्म का पहला मामला है। आम तौर पर मनचाहा फैसला पाने के लिए असरदार अखबारनवीस अपील जरूर कर लेते हैं, लेकिन ऐसा दबाव डालने की नौबत आम तौर पर नहीं आती है कि उसकी पुलिस में शिकायत तक हो जाए। अब इस मामले में पत्रकार संगठन क्या करें, और अखबार मैनेजमेंट क्या करे, इसका नया-नया तजुर्बा होगा।   rajpathjanpath@gmail.com

 


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