राजपथ - जनपथ

राजपथ - जनपथ छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ - प्रेम प्रकाश का बढ़ता महत्व

Posted Date : 12-Nov-2017

सरकार के मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने खुद को फिट रखने के लिए अपना वजन भले ही 15 किलो कम लिया है लेकिन पार्टी और सरकार में उनका वजन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में जब ज्यादातर मंत्री आरोपों के घेरे में हैं, पाण्डेय सरकार और पार्टी में संकटमोचक की भूमिका निभा रहे हैं। सेक्स-सीडी कांड हो या जलकी प्रकरण, पाण्डेय ने ही आगे बढ़कर सरकार का पक्ष दमदारी से रखा। वरिष्ठता के साथ-साथ संसदीय-नियम कानून के जानकार होने के कारण भी पार्टी और सरकार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। दो दिन पहले देशभर के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में सीएम ने अपनी जगह पाण्डेय को ही पटना भेजा था। ये बात अलग है कि वहां पहुंचने के बाद ही उन्हें सम्मेलन के स्थगित होने जानकारी मिली। इससे पहले तक सीएम किसी कार्यक्रम में न जा पाने पर, राजेश मूणत या अजय चंद्राकर अथवा अमर अग्रवाल को भेज दिया करते थे। सोमवार को उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ के रायपुर में अभिनंदन कार्यक्रम का भी प्रभारी उन्हें बनाया गया है जबकि उनके विधानसभा क्षेत्र में उसी दिन केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल का कार्यक्रम है लेकिन उन्हें योगी के साथ ही रहने के लिए कहा गया है। राज्योत्सव समापन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष के बगल की कुर्सी देकर अघोषित रूप से मंत्रिमंडल में नंबर दो का दर्जा दे दिया गया है जबकि यह कुर्सी अब तक बृजमोहन अग्रवाल संभालते थे। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि पाण्डेय के विभागों में तुलनात्मक रूप से बेहतर काम होने के कारण से भी सरकार में उनका कद बढ़ा है। राजस्व विभाग में कई बेहतर काम हुए हैं जिसके कारण सरकार की छवि भी बनी है। वैसे भी उनके विभागों में भ्रष्टाचार निर्माण विभाग के मुकाबले कम है। ऐसे में उनका महत्व बढऩा ही था। 
फोटोग्राफरों को आसानी
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की कल सुबह फोटोग्राफी होनी थी। फिर उसे परिवार में जन्म होने की संभावना को देखते हुए आज पर टाला गया। लेकिन उसका एक फायदा यह हुआ कि दादा बनने की खुशी उनके चेहरे पर इस तरह लिखी हुई थी कि फोटोग्राफरों को उन्हें मुस्कुराने के लिए कहने की जरूरत ही नहीं पड़ी। उनके बेटे-बहू को कन्या रत्न प्राप्ति के साथ ही घर में जो खुशियां आई हैं, वे फोटो-सेशन के लिए एकदम सही वक्त साबित हुईं। आज सुबह से दोपहर तक अलग-अलग फोटोग्राफरों को समय दिया गया, और सभी बड़े संतुष्ट और खुश होकर वहां से निकले। 
वन दफ्तर की दूरी से परेशानी
वन विभाग का दफ्तर रायपुर शहर के बीच से उठकर नया रायपुर चले गया है। इससे और लोगों को जितनी दिक्कत हुई हो, उसके अलावा आरटीआई एक्टिविस्ट भी परेशान हैं। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने के लिए वे अब तक तो जंगल दफ्तर जाकर कागज लगा देते थे। लेकिन अब इस काम के लिए 25 किलोमीटर दूर नया रायपुर जाना पड़ेगा। दूसरी दिक्कत यह है कि दफ्तर में भी आरटीआई की अर्जी लेने में कर्मचारी टाल-मटोल करते हैं ताकि लोग थककर लौट जाएं। अब शहर के बीच के दफ्तर में तो ठीक था, 25 किलोमीटर दूर से खाली हाथ लौटना पड़ा तो बड़ा महंगा पड़ेगा। एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने यह काम की जानकारी दी कि पोस्ट ऑफिस में कई बार 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर उपलब्ध नहीं रहता, और 20 रुपये का पोस्ट ऑर्डर लगाकर सूचना पाने अर्जी लगाई जाए, तो विभाग यह घोषणापत्र मांगता है कि बचे दस रुपये का कोई दावा बाद में नहीं किया जाएगा। यह घोषणापत्र न लगा, तो अर्जी वापिस भेज दी जाती है।
सज्जनता से निपटने की चुनौती
सरगुजा में भाजपा के नेता अलग-अलग लड़ते हुए भी, और मिलकर एक होकर भी कांग्रेस के नेता, विधायक, और प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि बाबा साहब कहे जाने वाले सिंहदेव में सज्जनता बड़े गहरे तक बैठी हुई है। वे जनता के खिलाफ कोई बात नहीं करते, और न ही विरोधियों को नुकसान पहुंचाने का कोई अभियान चलाते। अभी उनके बारे में यह सुनाई पड़ा कि उनके नाम के खेतों की फसल पर उन्हें लाखों रूपए धान बोनस मिला। लेकिन वे जितने खेत लोगों को रेग पर देते हैं, उन खेतों का धान बोनस भी वे उन्हीं मजदूर-किसानों को दे देते हैं, खुद नहीं रखते। राजनीतिक रूप से उनके मुकाबले ऐसी सज्जनता सरगुजा में न कांग्रेस में दिखती न भाजपा में। और ऐसे में भाजपा के लिए सरगुजा में अपनी सीटें बढ़ाना एक बड़ी चुनौती रहेगा। कुछ लोगों का मानना है कि वहां की 14 सीटों में से कांग्रेस और भाजपा के पास अभी 7-7 सीटें हैं, और अगर यही परफॉर्मेंस रिपीट हो जाए, तो भी भाजपा के लिए एक बड़ी बात होगी। लेकिन भाजपा का अपना गणित सरगुजा में सीटें बढ़ाए बिना जम नहीं रहा है।   rajpathjanpath@gmail.com


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