राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ - मुनव्वर राणा का कहना ठीक है...

Posted Date : 13-Nov-2017

मशहूर शायर मुनव्वर राणा का केन्द्रीय मंत्रियों को लेकर यह बयान  आया है कि नरेंद्र मोदी की बदकिस्मती है कि वह तो अच्छे इंसान हैं लेकिन उनके पास एक भी रत्न नहीं हैं। किसी भी राजा के लिए यह बेहद अफसोस की बात है। राणा की टिप्पणी से भाजपा के लोग असहमत हो सकते हैं लेकिन प्रदेश के उद्योग और व्यापार जगत के जानकार लोग इसे सही मानते हैं। वे इस संदर्भ में केन्द्रीय रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल के कामकाज को गिनाते हैं और बताते हैं कि राज्य को कैसे एनडीए के सर्वाधिक पढ़े-लिखे मंत्रियों में से एक पीयूष गोयल के  फैसले से नुकसान हुआ है। 
श्री गोयल दो साल पहले प्रदेश दौरे पर आए थे और चुनिंदा उद्योगपतियों से भी रूबरू हुए थे। बताते हैं कि एक बड़े उद्योगपति ने उन्हें बताया कि कोयला विदेशों से आयात करना पड़ रहा है। इस पर श्री गोयल ने आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि प्रदेश में भारी मात्रा में कोयले का उत्पादन हो रहा है और उन्हें विदेश से आयात की नौबत आ रही है,  यह व्यवस्था तुरंत बदली जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरतों के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराएंगे। 
गोयल ने कोयले के आयात पर तत्काल रोक लगा दी। पहले जो उद्योगपति गोयल के फैसले से खुश थे, वे अब बेहद मायूस हैं। हाल यह है कि एसईसीएल उन्हें पर्याप्त कोयला उपलब्ध नहीं करा पा रहा है और केन्द्र ने आयात पर रोक लगा रखी है। इससे भारी नुकसान हो चुका है। न सिर्फ निजी बल्कि सरकारी बिजलीघरों को कोयले की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। हाल यह है कि सरकार को अब तक सौ करोड़ से अधिक की चपत लग चुकी है। मुख्यमंत्री और कुछ समय पहले तक एसीएस रहे एन बैजेन्द्र कुमार इसको लेकर कई बार पत्र लिख चुके थे और गोयल से बात भी हो चुकी है। लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है।
भ्रष्टाचार थमेगा कैसे?
सरकार ने भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए सत्यनिष्ठा संधि लागू कर रखा है। इसमें निर्माण विभागों में यह लिखित में देना होता है कि वे रिश्वत लेंगे न देंगे। इसमें अफसर के साथ-साथ ठेकेदार के भी हस्ताक्षर होते हैं। लेकिन सत्यनिष्ठा संधि लागू होने के बाद भ्रष्टाचार पर काबू पाना तो दूर, इसमें बढ़ोत्तरी हुई है। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने निर्माण विभाग से जुड़े अफसर-ठेकेदारों के खिलाफ ही सबसे ज्यादा प्रकरण दर्ज किए हैं। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में विशेषकर जिले के आला अफसर की भूमिका सबसे ज्यादा है। रायपुर संभाग के एक नए और छोटे जिले में तो आला अफसर से मातहत परेशान है। वजह यह है कि अफसर खुद को गांव-गरीब, हितैषी होने का दिखावा करने नित नए हथकंडे अपनाते हैं और इसकी गाज निर्माण अफसरों ठेकेदारों पर गिरती है। दीवाली पार्टी में गरीब बच्चों को घर में भोजन कराना हो या फिर बच्चे की जन्मदिन पार्टी, इसका बिल मातहतों को ही भरना होता है। सुनते हैं कि अगर एक बड़े कार्यक्रम में अनुभवी और वरिष्ठ अफसरों की ड्यूटी नहीं लगाई जाती, साख का भ_ा बैठ जाता।
चेक राजदूत, और शौचालय
छत्तीसगढ़ के आबकारी, टैक्स, और म्युनिसिपल मामले देखने वाले मंत्री अमर अग्रवाल स्पेन जाते हुए दिल्ली में रूके। उन्हीं के एक पे्रसनोट के मुताबिक चेक रिपब्लिक के राजदूत उनसे मिले, और उन्होंने बाकी बातों के साथ इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि छत्तीसगढ़ खुले में शौचमुक्त करने के लिए सकारात्मक पहल कर रहा है। अब योरप के एक देश के राजदूत की छत्तीसगढ़ में शौचालय बनने में दिलचस्पी हैरान करने वाली है। इसके तुरंत बाद पे्रसनोट कहते हैं कि अमर अग्रवाल ने चेक राजदूत और उनकी टीम को छत्तीसगढ़ आने का न्यौता दिया जिस पर राजदूत ने तुरंत सहमति दी। ऐसा लगता है कि चेक राजदूत को अब तक यह गलतफहमी थी कि छत्तीसगढ़ आने पर उन्हें शौचालय नहीं मिलेगा, और खुले में जाना होगा। 
सूखे पर चिट्ठियां जारी
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भी सरकार के लोग निराश बताए जा रहे हैं। प्रदेश की 97 तहसील सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। केन्द्र सरकार से करीब 3 हजार करोड़ रूपए राहत राशि की मदद मांगी गई है। 
श्री तोमर भी पिछले दिनों प्रदेश दौरे पर आए थे और उन्होंने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की थी और कहा था कि इसका परीक्षण चल रहा है। जल्द ही मदद का भरोसा दिलाया था। अब हाल यह है कि मदद तो दूर, प्रस्ताव में कमीबेशी निकालकर अभी तक राज्य से पत्र व्यवहार ही हो रहा है। यह स्थिति तब है जब केन्द्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है। इससे पहले केन्द्र में यूपीए की सरकार होने के बावजूद राज्य को उदारतापूर्वक मदद की जाती थी।


Related Post

Comments