राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ - पिछले और मौजूदा एसपी में बंटवारा

Posted Date : 14-Nov-2017

मंत्रियों और अफसरों को ऐसे बड़े-बड़े बंगले दिए जाते हैं जो कि अंग्रेजों के समय में अंग्रेज बहादुरों के लिए तो ठीक थे, लेकिन आज जब छत्तीसगढ़ जैसे गरीब प्रदेश में जनता के पैसों पर ये बंगले चलते हैं, तो यह याद रखना जरूरी है कि इस प्रदेश की आधी आबादी गरीबी की रेखा के नीचे है, और दो वक्त का इसलिए खा पाती है क्योंकि उसे रियायती चावल एक रूपए किलो दिया जा रहा है। अब ऐसे में जिन अफसरों को जितने बड़े बंगले मिलते हैं, उतना ही अधिक सरकारी खर्च उन पर होता है। मंत्री हों, या अफसर, उनके विभागों के दर्जनों कर्मचारी बंगलों पर तैनात रहते हैं, और बंगलों के रख-रखाव पर, उनके बड़े-बड़े अहातों में कभी कमरे बनते दिखते हैं, तो कभी लॉन लगते दिखता है, उन सब पर सरकार का ही खर्च अघोषित रूप से होता है जो कि जनता के नाम से किसी और योजना से निकाला जाता है। ऐसे में एक जिले की एक दिलचस्प कहानी सामने आई है जहां पर एक एसपी के बंगले में खूब दूध देने वाली एक गाय तैनात है। तैनात इसलिए कि एसपी बदल गए, गाय वहीं तैनात रही। पिछले एसपी ने गाय को प्रदेश के एक बड़े डेयरी वाले से वसूला था, और आज भी वही डेयरी वाला उस गाय का खाना भिजवाता है। गाय करीब दस लीटर दूध देती है, और इसे पिछले एसपी और वर्तमान एसपी दोनों पूरी ईमानदारी से बांट लेते हैं। पुलिस की गाड़ी दूध पहुंचाने जाती है, पुलिस कर्मचारी गाय के रख-रखाव में लगे रहते हैं। बहुत से दूसरे ऐसे बंगलों में सरकारी अमला कई और किस्म काम करता है जिनमें कुत्तों को घुमाने से लेकर बच्चों को धुलवाने तक का काम शामिल है। अब देश की सबसे बड़ी अदालत भी मंत्रियों और अफसरों के खर्च इसलिए सीमित नहीं कर सकती कि उसके जज भी सामंती अंदाज में इसी तरह बड़े-बड़े बंगलों में रहते हैं, और सायरन वाली पायलट गाडिय़ों में चलते हैं। 


पहारे के दिन नहीं फिर रहे...
आईएएस अफसर हेमंत पहारे का सब कुछ ठीक चलता नहीं दिख रहा है।  वे कुछ दिन पहले सचिव के पद पर पदोन्नत हुए हैं, लेकिन उनके पास मनमाफिक कोई काम नहीं है। उन्हें संसदीय कार्य के साथ-साथ जन शिकायत निवारण विभाग का दायित्व सौंपा गया है जहां गिनती की ही फाईलें आती हंै। कहा जा रहा है कि इस स्थिति के लिए खुद पहारे जिम्मेदार हैं। जोगी सरकार में उप सचिव के पद पर रहते उनकी हैसियत प्रमुख सचिव स्तर के अफसर से ज्यादा रही है। 
सरकार बदलने के बाद भी नगरीय प्रशासन, पीएचई व अन्य विभागों में काम कर चुके हैं। वे गरियाबंद कलेक्टर रह चुके हैं। एक शिकायत के बाद उन्हें हटाया गया था। हेमंत बिलासपुर के प्रभावशाली कांग्रेस नेता बसंत पहारे के छोटे भाई हैं। वे मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री कांगे्रस की सुश्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधो के नजदीकी रिश्तेदार भी हैं। पहारे को पहले पीएससी में भेजा गया था। वहां चेयरमैन केआर पिस्दा से नहीं जमी। इसके बाद मंत्रालय में विशेष सचिव पर्यटन-संस्कृति का दायित्व सौंपा गया। यहां भी परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रही। यही वजह है कि शिकवा-शिकायतों के चलते उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई।  


हेलीकॉप्टर आदतन चला गया
अभी केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल रायपुर से भिलाई एक कार्यक्रम में गए तो सरकारी हेलीकॉप्टर इसके लिए निर्धारित जगह पर नहीं उतरा, और वह जाकर पुलिस बटालियन के उस मैदान में उतरा जहां कि वह मुख्यमंत्री को लेकर हर बार उतरते आया है। अब यह पता लगा है कि पायलट को गलती से उतरने के लिए यही पता दे दिया गया था, और उसका इंतजार किसी दूसरे मैदान पर होते रहा। उतरते-उतरते जब दिखा कि स्वागत करने को कोई भी नहीं है, तो हेलीकॉप्टर से ही फोन लगाया गया, तो गलती मालूम हुई। इसके बाद दुबारा उड़ान भरकर हेलीकॉप्टर सही मैदान पर गया। अब रोज-रोज जहां उतरने की आदत पड़ी रहती है, हेलीकॉप्टर पायलट की मर्जी के बिना भी हो सकता है वहीं जाकर उतर गया हो। 

केडिया पर छापे के बाद?
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े शराब कारखाने, केडिया डिस्टिलरी पर आयकर का छापा पड़ा। इसके मालिक का प्रदेश के आबकारी विभाग से इतना घरेलू रिश्ता है कि विभाग के सबसे बड़े लोगों का केडिया के दिल्ली ठिकाने पर रूकना भी बताया जाता है। आबकारी विभाग के सचिव अशोक अग्रवाल का राज्य सूचना आयुक्त पद पर दो महीने पहले  मनोनयन घोषित हो चुका है, लेकिन बोतल है कि हाथ से छूटती नहीं। इसलिए वे अभी तक आबकारी सचिव भी बने हुए हैं। लेकिन अब केडिया पर आईटी छापे के बाद लगता है कि वे हड़बड़ाकर यह कुर्सी छोड़ेंगे, और सूचना आयोग जाकर एक लंबे पुनर्वास का आनंद प्राप्त करेंगे। आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल विदेश प्रवास पर हैं, लेकिन फोन तो सभी जगह मौजूद हैं ही। अमर अग्रवाल के केडिया से भी करीबी संबंध है, और केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली से भी, जिनके विभाग ने यह छापा डाला है।
कई बरस पहले जब भोपाल की सोम डिस्टिलरी पर इनकम टैक्स का छापा पड़ा था, तो कई बड़े नाम डायरी में निकले थे। अब लोग इस बार भी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि राज्य की नई आबकारी नीति से प्रदेश की दो डिस्टिलरियों की किस्मत एकदम से चमक गई हैं। 


सेक्स-सीडी की हिमायती या विरोधी?
गुजरात में हार्दिक पटेल के नाम को जोड़कर चलाई जा रही एक सेक्स-सीडी को लेकर अब यह समझना मुश्किल हो रहा है कि भाजपा सेक्स-सीडी की राजनीति की हिमायती है, या कि विरोधी है? अभी-अभी दो हफ्ते पहले छत्तीसगढ़ में भाजपा के एक मंत्री पर एक सेक्स-सीडी को लेकर तोहमत लगी, तो भाजपा ने खुलकर उसका विरोध किया, और इसे बिलो दि बेल्ट राजनीति कहा, यानी कमर के नीचे की राजनीति। अब भाजपा के एक मंत्री के साथियों ने गुजरात में हार्दिक पटेल की सेक्स-सीडी जारी की है, तो वहां पर यह राजनीति कमर के ऊपर की हो गई? भाजपा को यह तय करना होगा कि वह ऐसी वीडियो-राजनीति को सही मानती है, या गलत? और फिर उसे अपने मंत्री के साथियों पर कार्रवाई भी करनी होगी अगर वह ऐसी राजनीति नहीं चाहती है तो।   rajpathjanpath@gmail.com


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