राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बड़े-बड़ों को पीछे छोड़कर चौधरी...

Posted Date : 05-Dec-2017

शिक्षाकर्मियों का एक पखवाड़े का आंदोलन बीती रात जिस हैरतअंगेज तरीके से आधी रात को यह हड़ताल वापिस हुई, उसने सबको हक्का-बक्का कर दिया। अपने कार्यकाल के आखिरी पखवाड़े में बहुत ताकतवर और तजुर्बेकार एसीएस एमके राऊत ने इस हड़ताल को टालने की जिस तरह से कोशिश की थी, उससे मुख्यमंत्री के टेबिल पर ही बातचीत टूटने से बड़ी किरकिरी हुई थी, और सरकार इस फजीहत में आ गई थी कि मुख्यमंत्री के बाद भला और कौन यह काम कर सकते हैं? इसके बाद हड़ताल के बीच पंचायत विभाग के एसीएस बनने वाले आरपी मंडल ने भी इसे सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात बनी नहीं। पिछले दो दिनों में मुख्य सचिव विवेक ढांड इसे सुलझाने में या खत्म करवाने में जुटे और प्रदेश भर के कलेक्टरों से बात करके उन्होंने लगातार कोशिश की, लेकिन उससे भी बात बनी नहीं। आखिर में रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी को बीच में डाला गया, और उनका विभागीय जिम्मा न होते हुए भी पिछले दो दिनों में उन्होंने हड़ताली नेताओं से जेल के भीतर और बाहर बातचीत जारी रखी और उसे किनारे पहुंचाया। इस बीच सरकार के भीतर भी तनातनी इतनी हो गई थी कि कुछ लोग बर्खास्त किए गए शिक्षाकर्मी नेताओं को वापिस लेने के खिलाफ एकदम अड़ ही गए थे। ऐसे में उनसे बातचीत कामयाब होने वाली नहीं थी। कल रात दस बजे के करीब मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस पूरे मामले में सीधी दखल दी और रायपुर कलेक्टर को बातचीत करके सभी शर्तें तय करने के लिए अधिकृत किया। उन्होंने यह साफ किया कि ओपी चौधरी जो समझौता करेंगे, वह सरकार पूरी तरह मानेगी। नतीजा यह निकाला कि चौधरी की कुर्सी पर बैठकर राज्य के पहले कलेक्टर रहे राऊत, और बाद में एक और कलेक्टर रहे मंडल की समझौता-क्षमता पार करके चौधरी ने इसे निपटा दिया। रात एक बजे तक मुख्यमंत्री को खबर की जाती रही, और ओपी चौधरी के साथ रायपुर के ही छात्र रहे आज के एसपी संजीव शुक्ला भी लगे रहे। चौधरी की कामयाबी के पीछे यह भी रहा कि वे गांव के एक सरकारी स्कूल से पढ़कर निकले खालिस छत्तीसगढ़ी हैं, और हड़तालियों से बातचीत में उनकी यह जमीन खासी काम आई।
यह हड़ताल खत्म करवाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी आधी रात की बातचीत में ओपी चौधरी को एक नेता मान लिया है। 

शशि कपूर की कुछ यादें...
फिल्म अभिनेता शशि कपूर के गुजरने से देश भर में उनको जानने वाले लोगों के बीच बड़ी अच्छी यादें सामने आ रही हैं। रायपुर के बहुत से लोगों को याद है कि किस तरह एक वक्त पृथ्वीराज कपूर अपना नाटक, पठान, लेकर रायपुर आए थे और यहां की एक पुरानी टॉकीज में उसका शो हुआ था। उस नाटक में कपूर परिवार के कुछ और लोगों के साथ-साथ शशि कपूर भी थे जो कि एक बच्चे की भूमिका में थे। पुराने कुछ लोगों को याद है कि नाटक के बाद पृथ्वीराज कपूर परिवार सहित चादर लेकर गेट पर खड़े हो जाते थे, और निकलते हुए लोगों से नाटक के लिए सहयोग मांगते थे।
छत्तीसगढ़ के एक अखबारनवीस सुनील कुमार ने कई मौकों पर दिल्ली और बंबई में शशि कपूर को इंटरव्यू किया था और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में उनकी कई फिल्में उनके साथ देखी थीं, या उनके बारे में बात की थी। वे छोटे से शहर के एक गैरअंगे्रजीभाषी नौजवान पत्रकार के साथ भी बड़ा हौसला बढ़ाने वाला दोस्ताना बर्ताव करते थे और पूरा समय देते थे। मुंबई फिल्म समारोह के दौरान 1984 में रायपुर से वहां गए हुए यहां के एक फोटोग्राफर प्रद्युम्न अग्रवाल (बालाजी) से तस्वीरें खिंचवाने के लिए जब सुनील कुमार ने शशि कपूर से अनुरोध किया, तो वे तुरंत तैयार हो गए। इसके बाद जुहू में उनके पृथ्वी थिएटर के अहाते में फोटो सेशन तय हुआ, और उन्होंने आधा-पौन घंटे तक जिस तरह फोटोग्राफर ने चाहा, उस तरह दर्जनों या सैकड़ों तस्वीरें खिंचवाईं। 
रायपुर के नाटकों से जुड़े हुए एक रंगकर्मी सुभाष मिश्रा जब दिल्ली में पृथ्वी थिएटर में हबीब तनवीर का नाटक आगरा बाजार देखने पहुंचे थे, तब भी वहां व्हीलचेयर पर पहुंचे हुए शशि कपूर से उनकी मुलाकात हुई थी, और देर तक बात हुई थी। रायपुर के एक और रंगकर्मी मिर्जा मसूद की भी शशि कपूर से कुछ छोटी-छोटी मुलाकातें हैं। 
गैस एजेंसी की लॉटरी खुली
इंसान की किस्मत कब चमक जाए, यह कोई नहीं जानता। ऐसे ही सिंचाई विभाग के एक छोटे कर्मचारी की अचानक किस्मत बदल गई। हुआ यूं कि सिंचाई कर्मी ने अपनी पत्नी के नाम पर गैस एजेंसी लेने के लिए फार्म भरा था और पिछले दिनों उनके नाम की लॉटरी निकल गई। यानी रायपुर शहर में सरकारी गैस कंपनी की उन्हें एजेंसी मिल गई। एजेंसी के लिए सैकड़ों लोग कोशिश करते हैं। हर महीने लाखों रूपए की नियमित आय होने के कारण इसके लिए मारा-मारी रहती है। लेकिन गैस एजेंसी आबंटन की प्रक्रिया अब पारदर्शी हो गई है। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी या सिफारिश की गुंजाईश नहीं रह गई है। एजेंसी के लिए सैकड़ों लोग फार्म भरते हैं, लेकिन लॉटरी के जरिए एजेंसी के लिए नाम तय होते हैं। 
सुनते हैं कि कई प्रभावशाली लोग अब गैस एजेंसी मिलने के बाद सिंचाई कर्मी का पार्टनर बनने के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन उसने सभी को मना कर दिया। अब जल्द ही वीआरएस लेकर एजेंसी का काम शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। न सिर्फ सिंचाई कर्मी बल्कि दो दिन पहले यहां के एक छोटे अखबार के फोटोग्राफर की भी किस्मत संवर गई। उसके परिवार के सदस्य के नाम गैस एजेंसी का लॉटरी निकल गई। अब वे भी जल्द ही गैस एजेंसी चलाने की तैयारी कर रहे हैं। 
सयान की सीट पर कई नजरें
विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान 85 बरस के हो गए हैं। वे शारीरिक और मानसिक रूप से फिट भी हैं। लेकिन वे अगला चुनाव  नहीं लड़ेंगे, क्योंकि केन्द्र से लेकर कई राज्यों में भाजपा ने बुजुर्ग नेताओं को घर बिठा दिया है। पार्टी की रणनीति नए चेहरों को आगे लाने की है। दीवान बिलासपुर जिले की बेलतरा सीट से चुनकर आए हैं। बेलतरा को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि पार्टी के कई प्रभावशाली नेता दीवान का उत्तराधिकारी बनने के लिए प्रयासरत हैं। सुनते हैं कि दीवानजी अपने बड़े बेटे को अपनी जगह चुनाव लड़ाना चाहते हैं। जो कि उनका राजनीतिक कामकाज भी देखते हैं। मंझले पुत्र भी चुनाव लडऩे के इच्छुक बताए जाते हैं। ऐसे में घर में ही मतभेद की स्थिति है। इस सीट पर हाऊसिंग बोर्ड अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी की भी निगाहें हैं। वे जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में उनकी पकड़ भी है, वे प्रदेश भाजपाध्यक्ष धरम कौशिक के एकदम करीबी माने जाते हैं। वे चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं। इसके लिए वे क्षेत्र में लगातार मेहनत भी कर रहे हैं। पार्टी के कुछ लोगों का मानना है कि दीवान परिवार में असमंजस की स्थिति का फायदा सवन्नी को मिल सकता है।   rajpathjanpath@gmail.com


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