राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बाबरी की ईंटें

Posted Date : 06-Dec-2017

6 दिसंबर 1992, आज ही के दिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, और उसमें छत्तीसगढ़ से गए हुए कारसेवक भी शामिल थे। उनमें से एक, भाजपा के एक बड़े नेता लौटते हुए गिराए गए ढांचे की ईंटें लेकर लौटे थे, और रायपुर में अखबारों के दफ्तर में जाकर उन ईंटों के दर्शन भी करवाए गए थे। कुछ पत्रकारों ने ईंटों की ऐसी झांकी को डांटकर भगा दिया था, और कुछ ने बड़ी आस्था से प्रणाम किया था। ईंटें लेकर चलने वालों का अंदाज उस वक्त ऐसा था कि सरहद से दुश्मन का सिर काटकर बहादुर सिपाही घर लौटे हैं। बाद के बरसों में भाजपा की सरकार नहीं रही तो ये ईंटें दब गई थीं। अब आज बदले हुए माहौल में भाजपा के वे नेता फिर से उन ईंटों को निकाल सकते हैं कि उन्होंने किस तरह बाबरी मस्जिद की ईंट से ईंट बजा दी थी। 

अदालत-सरकार बेअसर
सरकार के नियम बहुत से बन जाते हैं, लेकिन अमल किसी पर होना बड़ा मुश्किल होता है। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए पटाखों और आतिशबाजी पर राज्य सरकार ने रोक लगाई, और वह पूरी तरह बेअसर है। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शादी और बारात में भी कितनी जमकर आतिशबाजी हुई, यह खुद सरकार के पास तस्वीरों और वीडियो में पहुंची है। प्लास्टिक के कप-प्लेट-ग्लास-चम्मच बिकने में एक धेले की कमी नहीं आई है, और सड़कों के किनारे इसकी दुकानें ज्यों की त्यों सजी हुई हैं। हाईकोर्ट के और राज्य सरकार के हुक्म के बावजूद सड़क पर ऐसी गाडिय़ां के काफिले बारातों के आगे-पीछे दिखते हैं जिनमें दर्जनों स्पीकर बांधकर भयानक शोर किया जाता है। अब सरकार और अदालत ये दोनों अगर बेअसर हैं, तो वह दिन अधिक दूर नहीं है कि दिल्ली में खेल रहे श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाडिय़ों की तरह इस शहर में भी लोग मास्क लगाकर घर से निकलें। 
पदयात्रा ने बढ़ा दी दूरियां
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत के बीच खटास बढ़ गई है। कुछ समय पहले जिला अध्यक्षों के चयन और सेक्स-सीडी मामले पर दोनों नेता भिड़ चुके हैं। हालांकि बाद में दोनों ने कई जगहों सरकार के खिलाफ अभियान में साथ आकर सब कुछ ठीक होने का संकेत भी दिया। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। सुनते हैं कि जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिले में पदयात्रा कार्यक्रम को लेकर भूपेश और महंत समर्थकों के बीच फिर ठन गई है। महंत का 13 दिसम्बर को जन्मदिन है। इस दिन कोरबा-जांजगीर चांपा जिले में कई जगहों पर जलसे की तैयारी है। लेकिन भूपेश ने 11 तारीख से पदयात्रा शुरू करने का फैसला ले लिया। राहुल की ताजपोशी के चलते इस कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया और अब यात्रा 12 तारीख से निकलेगी। महंत समर्थक चाहते थे कि पदयात्रा 13 तारीख के बाद निकाली जाए। लेकिन पीसीसी ने तारीख आगे बढ़ाने से मना कर दिया। यात्रा में सभी प्रमुख पदाधिकारियों को मौजूद रहने के लिए कहा जा रहा है। इससे महंत समर्थक नाराज हैं और वे इस पदयात्रा को जन्मदिन कार्यक्रम को फीका करने की कोशिशों के रूप में देख रहे हैं।
स्काईवॉक से एक नया खतरा
राजधानी रायपुर में बन रहे स्काईवॉक को लेकर कुछ लोगों ने एक नए किस्म की गैरतकनीकी दिक्कत का खतरा सामने रखा है। उनका कहना है कि जब सड़कों पर चल रही गाडिय़ों के दरवाजे खोल-खोलकर लोग थूकते हैं, तो धरती से बीस फीट ऊपर स्काईवॉक पर चलते हुए वे अपनी पीक कहां डालेंगे? जाहिर है कि नीचे चलने वाले लोगों पर। हो सकता है कि इससे दुपहिया वाले लोगों का हेलमेट लगाना बढ़ जाए और उनकी जान बचने लगे, लेकिन कपड़ों के ऊपर रेनकोट जैसी जैकेट इस गर्म इलाके में लोग कैसे पहनेंगे? और पीक की धार मारने वाले लोगों का हाल यह है कि अपनी ऊंचाई से अधिक ऊपर तक वे पीक की मार कर देते हैं। 


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