राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सुंदरानी के इधर कुआं उधर खाई

Posted Date : 07-Dec-2017

भाजपा विधायक श्रीचंद सुंदरानी व्यापारियों का सबसे बड़ा नेता बनने के चक्कर में घिर गए हैं। चेम्बर चुनाव में एकता पैनल से पसंद का प्रत्याशी तय करवाकर अपने ही सिंधी समाज का गुस्सा झेल रहे हैं। समाज के प्रमुख लोगों ने सुंदरानी के प्रत्याशी जितेन्द्र बरलोटा के खिलाफ अमर गिदवानी को चुनाव मैदान में उतारा है। सिंधी व्यापारी गिदवानी के पक्ष में लामबंद होते दिख रहे हैं। विधानसभा चुनाव में साल भर से भी कम समय बाकी है। ऐसे में व्यापारियों के चुनाव में अपनी ताकत झोंककर सुंदरानी ने मुसीबत मोल ले ली है। यदि बरलोटा चुनाव जीतते हैं तो उन पर समाज के प्रत्याशी को हराने का आरोप लगेगा। गिदवानी अथवा यू एन अग्रवाल के  चुनाव जीतने की स्थिति में स्वाभाविक रूप से यह संदेश जाएगा कि व्यापारियों में सुंदरानी की पकड़ नहीं रह गई है। चेम्बर अध्यक्ष रह चुके सुंदरानी को सिंधी समाज के होने के साथ-साथ व्यापारियों का सबसे बड़ा नेता होने की वजह से भाजपा ने टिकट दी थी। ऐसे में सुंदरानी के लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। पहले एक कहावत कही जाती थी कि चौबेजी छब्बे बनने चले, और दुबे बनकर रह गए, अब सुंदरानी के लिए कोई नई कहावत गढऩी होगी।

जंगल का राजा तय होने की कहानी
आईएफएस अफसर शिरीष अग्रवाल वरिष्ठता होने के बावजूद हेड ऑफ फारेस्ट फोर्स की दौड़ में पिछड़ गए। अग्रवाल गाजियाबाद के रहवासी हैं और लखनऊ में उनका ससुराल है। सुनते हैं कि यूपी के कई प्रभावशाली नेताओं ने उन्हें पीसीसीएफ बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन साफ-सुथरी छवि और लो-प्रोफाइल में रहने के कारण डॉ. आरके सिंह उन पर भारी पड़ गए। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तमाम सिफारिशों को नजर अंदाज कर न सिर्फ उन्हें हेड ऑफ फारेस्ट फोर्स बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई बल्कि उन्हें वाइल्ड-लाइफ का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। ऐसा वर्षों बाद हुआ है, जब दोनों ही पद एक अफसर के पास है। जिस दिन इस प्रमोशन की फाईल सीएम के पास पहुंची, उन्होंने बहुत सी और जानकारी मांगी, और ठोस जानकारी के बिना कोई फैसला लेने से मना कर दिया। इसके बाद आधा दर्जन से अधिक मुद्दों पर जानकारी इक_ा करने के लिए भागदौड़ हुई, और फिर जब पूरी जानकारी सीएम के सामने आई, तभी उन्होंने फाईल पर अपनी पसंद लिखी। यह जानकर उन लोगों को बहुत हैरानी होगी जो यह सोचते हैं कि ऐसे मामलों में सीएम मनमर्जी के फैसले लेते हैं, क्योंकि उन्होंने इस मामले में बड़ी ठोस जानकारी के आधार पर अपनी पसंद तय की।   rajpathjanpath@gmail.com


Related Post

Comments