राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सीएम न थकते हैं, न थमते हैं!

Posted Date : 04-Jan-2018

छत्तीसगढ़ में सरकारी अफसर और कर्मचारी इस बात से हक्का-बक्का हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह न तो थकते हैं, और न ही थमते हैं। वे पिछली बार छुट्टी मनाने कब बाहर गए, यह भी किसी को याद नहीं है। लगातार कोई न कोई कार्यक्रम, अभियान, और दौरों ने नीचे के स्तर पर सरकारी मशीनरी को उसके पंजों पर चौकन्ना बना रखा है। अब दौरों के बाद जिस अंदाज में उन्होंने बाकी जगहों के लिए वीडियो पर छोटी-छोटी जगहों के लोगों से बातचीत करके कार्रवाई करना शुरू किया है, उससे सरकारी मशीनरी को समझ आ गया है कि काम किए बिना और कोई गुजारा नहीं है। सरकारी अफसरों के लिए दूसरी दिक्कत यह है कि मुख्य सचिव विवेक ढांढ भी जमकर-बैठकर काम करने के आदी हैं, और मुख्यमंत्री के करीबी लोग बताते हैं कि सीएस को सीएम से जिस किसी कार्यक्रम के लिए खास ध्यान देने को कहा जाता है, वे भिड़कर उसे सौ फीसदी करने में लग जाते हैं। लेकिन यह सिलसिला पिछले कम से कम एक बरस से इसी रफ्तार से जारी है, और एक बरस से कम का समय चुनाव को बाकी है, उसमें यह और बढ़ते जाना तय है। जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ पर राजधानी से इतनी पैनी नजर रखी जा रही है कि जरा भी लापरवाही उनकी कुर्सी बदल सकती है। आने वाले हफ्ते राज्य में चुनाव के पहले का सबसे बड़ा बदलाव देखने वाले हैं, पुलिस में भी, और प्रशासन में भी।

कड़े काबू में भी बेकाबू दारू
पूरे प्रदेश में शराब कारोबार सरकार ने अपने हाथ में तो ले लिया है, लेकिन इस धंधे के तौर-तरीके पहले सरीखे ही चले आ रहे हैं। कल एक जगह एक ग्राहक को शराब दूकान के कर्मचारियों ने पीट-पीटकर मार डाला। यह तो कत्ल की वारदात थी, इसलिए यह खबरों में आई, लेकिन चारों तरफ तरह-तरह की जालसाजी, धोखाधड़ी, और अधिक दाम पर दारू बेचना जारी है। अब चूंकि सरकार ही दूकानदार है, और सरकार के ही जिम्मे गड़बड़ी की रोकथाम है, इसलिए कोई कार्रवाई आमतौर पर न होती है, न सामने आती है। लेकिन जो लोग बाग-बगीचों में, या स्कूल-कॉलेज के मैदान पर सुबह घूमने निकलते हैं, उन्हें किनारों और कोनों पर खाली बोतलें, प्लास्टिक की गिलासें, और पानी के पाऊच पड़े मिलते हैं, जिससे जाहिर होता है कि लोग शाम के बाद जहां जगह सूनी दिखती है, वहां पीने लगते हैं। शराब खरीदना और पीना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन लोगों की इस कानूनी जरूरत को सरकार ने इतने नियमों में बांधकर रखा है कि लोगों को कानून तोडऩा ही पड़ता है। सरकार कारोबार को नियंत्रित करे, कारोबार न करे, ऐसा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बोल गए थे। 
अब शराब के मामले में सरकार बिक्री का कारोबार करती है, और पीने की जगहों का कोई कानूनी इंतजाम नहीं है। चूंकि दारू पीने वालों के साथ किसी की हमदर्दी नहीं रहती है, इसलिए नाजायज नियम-कायदे भी बिना विरोध लागू हो रहे हैं। 


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