राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ट्रंप पर किताब से सावधान

Posted Date : 06-Jan-2018

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अभी आई एक किताब में उनकी निजी जिंदगी से लेकर उनके सरकारी और कारोबारी कामकाज तक पर भयानक जानकारियां सामने आई हैं। जानकारी तो जानकारी होती है, उसमें से कुछ सच भी हो सकती हैं, कुछ झूठी भी हो सकती हैं। लेकिन ट्रंप की साख अमरीका में इस कदर मिट्टी में मिल चुकी है कि हर कोई ट्रंप के बारे में बुरी से बुरी बात पर भरोसा करने पर आमादा हैं।  उनके करीबी लोगों ने ही इस किताब के लेखक को इतनी जानकारियां दी हैं कि किताब आने के पहले उसकी एक-एक बात पर अमरीकी मीडिया में बहस चल रही है। हिंदुस्तान में भी बड़े नेताओं को चौकन्ना रहना चाहिए कि उनके करीबी लोग उनके बारे में आगे चलकर क्या-क्या बता सकते हैं। अब जैसे ट्रंप को तरह-तरह की मानसिक बीमारियों या कमजोरियों का शिकार बताया जा रहा है, और यह कहा जा रहा है कि वे इन्हीं की वजह से अखबार नहीं पढ़ पाते क्योंकि उनका ध्यान एक जगह नहीं रह पाता। यह एक अलग बात है कि वे अपने बेडरूम में एक साथ तीन-तीन टीवी देखते हुए मीडिया पर चीखते रहते हैं। अब इससे यह भी साबित होता है कि अखबार पढऩे के लिए अधिक अक्ल लगती है, और टीवी देखने के लिए कम! इसलिए हिंदुस्तान के नेताओं को भी अखबारों पर कुछ अधिक ध्यान देना चाहिए, साथ-साथ अपना कामकाज, अपने तौर-तरीके ऐसे रखने चाहिए कि आगे चलकर उन पर लिखी गई किताब बेस्टसेलर न बन जाए।

मुंबई की मौतों से सबक लेंगे?
मुंबई में अभी एक मॉल के भीतर लगी आग में 14 मौतें हुईं। अब रिपोर्ट में आया है कि एक हुक्का-बार के हुक्के से निकली चिंगारी से आग तेजी से भड़की और पर्दों से होते हुए दूसरे सजावटी सामानों तक पहुंच गई। बात की बात में लोग मारे गए। इधर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मॉल से लेकर गली-मुहल्लों तक जगह-जगह हुक्का-बार चल रहे हैं और बहुत से महंगे रेस्त्रां खुले रेस्त्रां में ही लोगों को हुक्का पिला रहे हैं। बार-बार रायपुर सहित दूसरे शहरों में पुलिस छापे मारती है, लेकिन वह बात किसी गिरफ्तारी तक पहुंचते दिखती नहीं। दरअसल सरकारों की नींद थोक में मौतों के बाद ही खुलती है। आज स्कूली बच्चे भी हुक्का-बार में बार-बार पकड़ाते हैं, लेकिन किसी बार वाले की गिरफ्तारी सुनाई भी नहीं पड़ी है। 

वक्त किस तरह लौटकर आता है यह देखना हो तो हुक्का बार में एक ही हुक्के को बारी-बारी से कई लोगों को पीते देखा जा सकता है। एक वक्त था जब गांव में किसी जाति का समूह जब बैठता था, तो वहां एक हुक्का सुलगा लिया जाता था, और फिर उसी को हर कोई इस्तेमाल करते थे, किसी जूठे का ख्याल किए बिना। अब फिर वैसा ही दिन लौटकर आ गया है। लेकिन उस वक्त खाप पंचायतों या जात पंचायतों में किसी को सजा सुनाते हुए उसका हुक्का-पानी बंद करने की सजा एक आम बात थी। अब बाजार में हुक्का-बार में कोई किसी का हुक्का बंद कर नहीं सकते। अपने साथ बिठाने से मना कर सकते हैं, लेकिन लोग बगल की मेज पर बैठकर अपना खुद का हुक्का गुडग़ुड़ा सकते हैं।

देवव्रत के मार्फत बाकी राजघराने?
कांग्रेस छोड़ चुके पूर्व सांसद देवव्रत सिंह किधर जाएंगे, यह सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। खुद देवव्रत ने  अभी तक अपना रूख साफ नहीं किया है। लेकिन जोगी पार्टी के साथ-साथ भाजपा के प्रमुख नेता उनके संपर्क में हैं। प्रदेश कांग्रेस, देवव्रत के पार्टी छोडऩे को कोई ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। वजह यह है कि उनका अपने खैरागढ़ क्षेत्र में कोई खास प्रभाव नहीं रह गया है और संगठन के प्रमुख नेता मौजूदा कांग्रेस विधायक के टिकट काटकर उन्हें आश्वासन देने की भी स्थिति में नहीं है। मगर पार्टी हाईकमान देवव्रत के पार्टी छोडऩे को गंभीरता से ले रही है और एक-दो प्रमुख नेताओं को देवव्रत से बात करने के लिए कहा गया है। देवव्रत अभी दुबई में हैं। वे 7 तारीख को दिल्ली पहुंचेंगे। उनके  दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें मनाने की कोशिश भी होगी। इससे परे जोगी पार्टी के नेता आश्वस्त हैं कि देवव्रत उनके साथ ही रहेंगे। लेकिन सुनते हैं कि देवव्रत की पहली पसंद भाजपा है। चर्चा है कि भाजपा उन्हें टिकट देने के लिए भी तैयार है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि देवव्रत के आने का बड़ा फायदा यह है कि कई और राजघराने भाजपा से जुड़ सकते हैं। सराईपाली राजघराने के प्रमुख पूर्व मंत्री महेंद्र बहादुर सिंह, देवव्रत की उपेक्षा का आरोप लगाकर पहले ही कांग्रेस पर हमला बोल चुके हैं। रायगढ़ के साथ-साथ कुछ और राजघराने के प्रमुखों को भी देवव्रत के जरिए भाजपा से जोडऩे की तैयारी भी चल रही है। ऐसे में अब देवव्रत के रूख पर निगाहें टिकी हुई हैं। इसके साथ-साथ देवव्रत का एक बड़ा आकर्षण यह भी है कि वे मुख्यमंत्री और उनके सांसद बेटे के घर और चुनाव क्षेत्रों के आसपास के इलाके के हैं। 


सिर्फ भगवान देखकर लौटे
केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम में पद्मनाभस्वामी मंदिर अपनी अथाह संपत्ति के लिए खबरों में रहते आया है, और उसके बंद खजाने को गिनने के लिए अदालत ने लोगों को नियुक्त किया था। बाहर के लोगों में इस मंदिर की चर्चा इसकी दौलत के लिए अधिक रहती है। ऐसी ही चर्चा पढ़कर छत्तीसगढ़ के एक अधिकारी अभी इस मंदिर होकर आए। उनसे पूछा गया कि अनुभव कैसा रहा, तो उनका कहना था कि खजाने की खबर पढ़कर गए थे, वहां से सिर्फ भगवान को देखकर लौटना पड़ा। 


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