राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कांगे्रस फेरबदल में एक बड़ा प्रमोशन

Posted Date : 07-Jan-2018

सेक्स-सीडी विवाद से घिरे होने के बाद भी कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल पर फिर भरोसा जताया है। भूपेश की तेजतर्रार छवि उनके पक्ष में गई। हालांकि संगठन में उनकी हैसियत पहले जैसी नहीं रह गई है। उन्हें दो कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार डहरिया और रामदयाल उइके के साथ मिलकर कोई फैसला लेना होगा। पूरी सूची देखें तो शैलेश नितिन त्रिवेदी का कद काफी बढ़ा है। उन्हें संचार विभाग का अध्यक्ष बनाया गया है। शैलेश को सालभर पहले ही मीडिया विभाग से हटाया गया था। लेकिन चुनावी साल में उनकी जरूरत महसूस करते हुए उन्हें बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले संचार विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।  
एआईसीसी में संचार विभाग का पद है लेकिन छत्तीसगढ़ में पहली बार यह विभाग बनाया गया है। संचार विभाग के अंतर्गत मीडिया विभाग-आईटी सेल भी आते हैं। मीडिया विभाग और आईटी सेल के प्रमुख को संचार विभाग का सदस्य बनाया गया है। अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्य प्रवक्ता रहे राजेन्द्र तिवारी और रमेश वल्र्यानी भी शैलेश की टीम का हिस्सा होंगे। कुल मिलाकर कांग्रेस की अलग-अलग मीडिया टीम शैलेश के  मार्गदर्शन में ही काम करेगी। ऐसे में स्वाभाविक रूप से शैलेश अब सबसे ज्यादा प्रभावशाली महामंत्री हो गए हैं। उनकी कुछ खूबियों में से एक यह भी है कि वे आज के कांगे्रस संगठन में जोगी खेमे की सबसे अधिक समझ रखने वाले नेता हैं। वे लंबे समय तक अजीत जोगी, और फिर रेणु जोगी के साथ काम करते रहे, और रेणु जोगी को विधायक के रूप में मिले मकान में भी वे लंबे समय तक रहे। बाद में जब जोगी पिता-पुत्र को शैलेष से परहेज हुआ, तो उन्होंने उनके कहने पर रातों-रात रेणु जोगी के नाम से आबंटित मकान को खाली करके चाबी भेज दी थी। आज प्रदेश कांगे्रस के सामने भाजपा तो घोषित चुनौती है, लेकिन अजीत जोगी अघोषित और रहस्यमय चुनौती हैं। ऐसे में जोगी की नस-नस से वाकिफ शैलेष नितिन त्रिवेदी का इस बरस बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। वैसे भी मीडिया के लोगों से कांगे्रस के किसी पदाधिकारी को अगर सबसे अधिक और गहरे दोस्ताना रिश्ते हैं, तो वे शैलेष के ही हैं। 

खाने को लेकर दो नसीहतें
शादी या दूसरी दावतों में लोग प्लेट में खाना इतना भर लेते हैं कि ऐसे नजारे पर कपिल शर्मा से लेकर राजू श्रीवास्तव तक बहुत से कॉमेडियन शानदार लतीफे बना चुके हैं कि ऐसी प्लेट में कौन सा पकवान क्या महसूस करता है। ऐसे ही नजारे के लिए अभी रायपुर के एक समझदार ने फेसबुक पर यह पोस्ट किया- इतना ही लो थाली में, फिंक न जाए नाली में। 
यह तो एक नसीहत है, लेकिन एक दूसरी नसीहत भी है जो कि अधिक खाते-पीते लोगों के लिए है, जिनके लिए अधिक खाना नुकसानदेह होता है। उनका कहना है कि पेट में बर्बाद करने के बजाय प्लेट में बर्बाद कर लेना बेहतर है। इन दोनों नसीहतों को देखें तो यह लगता है कि धीरे-धीरे खाना चाहिए, प्लेट में कम लेकर खाना चाहिए, और फिर जरूरत हो तो दुबारा ले लेना चाहिए। न प्लेट में बर्बाद करना चाहिए, न पेट में बर्बाद करना चाहिए। 


उप्र-मप्र के बेहाल अफसर देखकर...
छत्तीसगढ़ के आईएएस-आईपीएस अफसर जब कभी उत्तरप्रदेश या मध्यप्रदेश के अपने साथियों से बात करते हैं, तो उसके बाद राहत महसूस करते हैं कि वे योगी या शिवराज के राज में नहीं हैं। उत्तरप्रदेश में जिस अंदाज में योगी सरकार सरकारी इमारतों, पुलिस थानों, और यहां तक कि हज हाऊस को भी भगवा पुतवा चुकी है, उसे देखकर अफसर सहमे हुए हैं कि उन्हें कब तक भगवा वर्दी से छूट मिली है, और जाने किस दिन उन्हें भी भगवा पहनना पड़े। बड़े अफसरों की एक पार्टी में उत्तरप्रदेश में पहली बार मांसाहार नहीं रखा गया, दारू रखना तो दूर की बात थी। बड़े-बड़े आला अफसरों को लगा कि वे सत्तारूढ़ सोच के गुलाम हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश में भी दो दिन पहले जब मंडला की एक मुस्लिम कलेक्टर शंकराचार्य के खड़ाऊ सिर पर उठाकर मीलों पैदल चलीं, तो यह देखकर बाकी अफसर भी हक्का-बक्का रह गए।
छत्तीसगढ़ में अफसरों को अभी भी इज्जत के साथ रहने और जीने की आजादी है, वे अपनी मर्जी से खा-पी सकते हैं। छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाकर केंद्र सरकार में काम कर रहे एक आईएएस ने अभी वहां से छत्तीसगढ़ में अपने साथियों को यह बताया कि केंद्र सरकार में भी किस तरह निजी चाल-चलन पर भी सत्ता की सोच हावी है। छत्तीसगढ़ के एक आईएएस ने कहा कि सत्ता को खुश करने के लिए जो अफसर इमारतों को बिना जरूरत रंगवा रहे हैं, या खड़ाऊ सिर पर लादकर चल रहे हैं, वे अदालतों में जवाबदेह हो सकते हैं। (  rajpathjanpath@gmail.com)


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