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मोर रायपुर का प्रतीक चिन्ह बना सेल्फी पाइंट

Posted Date : 13-Nov-2017

बहुत से मंदिरों में, या मस्जिदों या दरगाहों में लोगों के फोटो लेने पर रोक लगी रहती है। इसकी एक वजह यह है कि लोग उस जगह की गरिमा या पवित्रता को ध्यान में रखे बिना वहां सेल्फी लेने लग जाते हैं। सबसे विकसित और उदार योरप में भी बहुत से चर्चों में लोगों के कपड़ों पर तरह-तरह की पाबंदी लगी हुई है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में म्युनिसिपल ने शहर के सबसे दर्शनीय मरीन ड्राईव पर एक अविश्वसनीय लागत, 21 लाख से मोर रायपुर का प्रतीक चिन्ह लगाकर एक सेल्फी पाइंट बनवाया। अब इसकी लागत की बात छोड़ भी दें, तो वहां पर नीचे महात्मा गांधी का एक चर्चित वाक्य और उनका एक स्केच दीवार पर इस तरह उकेरा गया कि लोगों को वह दिख तो सकता था, लेकिन सेल्फी लेते लोगों के बदन के पीछे उसका छुप जाना भी तय था। लेकिन बात यहां तक भी रहती, तो भी ठीक था। लोगों ने गांधी के वाक्य के अक्षर उखाड़ फेंके, और उनके स्केच में से चेहरा तो पूरा ही गायब कर दिया। ये तस्वीरें छत्तीसगढ़ के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पाण्डेय ने खींची हैं, और गांधी के लिए लोगों के मन में हिकारत उजागर की है। गांधी का यहां लिखा गया वाक्य था- ''किसी भी देश की संस्कृति वहां बसने वाले लोगों की आत्मा में बसती है।''
जाहिर है कि इस शहर के लोगों की यही संस्कृति है, और इसे साफ-साफ बताने के लिए इसके ऊपर इतना बड़ा मोर रायपुर भी लिख दिया गया।


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