सामान्य ज्ञान

पेरियार वाइल्ड लाइफ सैंचुरी
16-May-2021 12:25 PM (41)
पेरियार  वाइल्ड लाइफ सैंचुरी

पेरियार वाइल्ड लाइफ सैंचुरी दक्षिण भारत (केरल) में वन्य जीवन की विविधता का बड़ा गढ़ है। इसकी स्थापना सन 1950 में की गई थी, जबकि टाइगर रिजर्व 1978 से शुरू किया गया। प्रभु की धरती कहे जाने वाले केरल के पश्चिमी तटों के मैदानी इलाकों में पेरियार राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व स्थित है। पेरियार सैंचुरी के बीचों बीच एक विलक्षण नयनाभिराम झील है, जो सन 1895 में पेरियार नदी पर डैम बनाकर निकाली गई थी। वैसे तो यह टाइगर रिजर्व है, लेकिन पर्यटक यहां झील में हाथियों की जलक्रीड़ा देखने आते हैं।
 पेरियार राष्ट्रीय उद्यान में कई आकर्षक वन्यजीवों को देखा जा सकता है। बाघों और हाथियों के अलावा यहां पर गौर, जंगली सुअर, सांभर, बार्किग डीयर, माउस डीयर और भारतीय जंगली कुत्ते भी देख सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक यहां 40 बाघ हैं। पेरियार में प्राइमेट्स की चार प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें शेर जैसी पूंछ वाले दुर्लभ वानर, नीलगिरी लंगूर, सामान्य लंगूर और बोनेट मकॉक शामिल हैं। दुर्लभ नीलगिरी टॉर, जो बहुत ही कम दिखाई पड़ता है, पेरियार में है।
 पक्षियों में डाटर्स, कारमोरैन्ट्स, किंगफिशर, मालाबार, हॉर्नबिल और लंबी पूंछ वाले ड्रोगोंस मुख्य रूप से पाए जाते हैं। झील के किनारे चट्टानों पर लिजार्ड को देखा जा सकता है। घूमने वाले सैलानियों को सांप की दुर्लभ नस्लें, प्राय: पाइथन देखने को मिल जाते हैं और कभी-कभी कोबरा भी। पहाड़ों की वादियों में स्थित पेरियार   में प्रकाश कैनवस के सारे रंग बिखेरता है।  
 

 राग बहार
राग बहार  शास्त्रीय राग है। यह काफ़ी थाट से उत्पन्न षाड़व षाड़व जाति का राग है। अर्थात इसके आरोह तथा अवरोह से छे छे स्वरों का प्रयोग होता है। इसके गाने का समय रात्रि का दूसरा प्रहर है। 
गांधार और निषाद दोनों स्वर कोमल है लेकिन गायक अक्सर दोनों निषाद लेते हैं, शुद्ध निषाद का प्रयोग मध्य सप्तक में होता है और वह भी आरोह में। अन्य स्वर शुद्ध लगते हैं। कुछ गायक मध्यम के साथ विवादी के रूप में शुद्ध गंधार का भी थोड़ा सा प्रयोग करते हैं। लेकिन यह नियम नहीं, इसके अवरोह में कभी कभी ऋषभ और धैवत दोनो वर्जित करते हुए निधनिप ऐसा प्रयोग होता है पर यह आवश्यक नहीं। आरोह में गमपगमधनिसां इस प्रकार पंचम का वक्र प्रयोग भी होता है जिससे रागरंजकता बढ़ती है। इस राग का वादी स्वर षडज तथा संवादी स्वर मध्यम हैं। 
राग विस्तार मध्य व तार सप्तक में होने के कारण यह चंचल प्रकृति का राग माना जाता है। मपगम धनिसां इसकी मुख्य पकड़ है। यह राग बाकी अनेक रागों के साथ मिलाकर भी गाया जाता हैं। जिस राग के साथ उसे मिश्रित किया जाता है उसे उस राग के साथ संयुक्त नाम से जाना जाता है। उदाहरण के लिए बागेश्री राग में इसे मिश्र करने से बागेश्री-बहार, वसंत-बहार, भैरव-बहार इत्यादि। परंतु मिश्रण का एक नियम हे कि जिसमें बहार मिश्र किया जाय वह राग शुद्ध मध्यम या पंचम में होना चाहिए क्योंकि बहार का मिश्रण शुद्ध मध्यम से ही शुरू होता है। 
 

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