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क्यों US के बाद Russia ने भी 20 साल पुरानी Open Skies Treaty तोड़ दी?
08-Jun-2021 2:05 PM (87)
क्यों US के बाद Russia ने भी 20 साल पुरानी Open Skies Treaty तोड़ दी?

 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 16 जून को जेनेवा में मिलने जा रहे हैं. इससे लगभग हफ्तेभर पहले ही रूस ने मुक्त आकाश संधि तोड़ते हुए अमेरिका को अपने कड़े रुख का संकेत दे दिया. अमेरिका इस संधि से पहले ही अलग हो चुका है. ऐसे में रूस का भी इससे अलग हो जाना बड़ी आफत ला सकता है. बता दें कि ये संधि देशों में एक-दूसरे से डरे देशों में विश्वास बढ़ाने के लिए हुई थी.

रूस ने दिया अमेरिका को दोष 
अमेरिका के संधि से अलग होने के तुरंत बाद से ही रूस भी इससे पल्ला झाड़ने की फिराक में था. साल की शुरुआत में रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा था कि वो भी इससे अलग हो सकता है क्योंकि संतुलन बनाने के लिए ये जरूरी है.

अमेरिका क्यों हुआ था अलग
अमेरिका ने मई 2020 में संधि तोड़ते हुए रूस पर आरोप लगाया था कि वो संधि के बहाने से टोह लेने की कोशिश कर रहा था. दरअसल साल 2017 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर नाराज हो गए थे कि एक रूसी विमान ने गोल्फ कोर्स पर उड़ान भरी थी. इसी बात का हवाला देते हुए उन्होंने खुद को संधि से बाहर कर लिया. अब दो बेहद मजबूत देशों के संधि से बाहर होने पर खतरे या शीत युद्ध की अटकलें तक लगाई जा रही हैं.

कब बात हुई थी संधि के लिए

करीब 18 साल पहले पहले यह व्यवस्था सदस्‍य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और संघर्ष को टालने के लिए शुरू की गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डी. आइजनहावर ने पहली बार जुलाई, 1955 में मुक्‍त आकाश संधि को लेकर प्रस्ताव पेश किया था.

रूस और अमेरिका के बीच यकीन लाना था मकसद
प्रस्‍ताव में कहा गया था कि अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ एक दूसरे के क्षेत्र में टोही उड़ानों की अनुमति दें. उस समय संधि को लेकर कुछ खास नहीं हो पाया. इसके बाद मई 1989 में जब राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने फिर प्रस्ताव पेश किया. फिर नाटो देशों के बीच बातचीत शुरू हुई. इसके बाद फरवरी 1990 में वारशॉ पैक्‍ट लागू हुआ.

सैन्य गतिविधि पारदर्शिता को बढ़ावा देना
कुछ देशों ने 24 मार्च 1992 को संधि पर हस्‍ताक्षर कर दिए, लेकिन मास्को ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. हालांकि, 1 जनवरी 2002 में रूस ने भी मुक्‍त आकाश संधि पर हस्‍ताक्षर कर दिए और ये लागू हो गई. इस संधि पर अब तक 34 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं. किर्गिस्तान संधि पर हस्ताक्षर करने वाला 35वां देश है, लेकिन उसने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है. मुक्‍त आकाश संधि के तहत 1,500 से अधिक उड़ानों का संचालन किया गया है.

देश एक-दूसरे पर नजर रख सकते थे
आर्म्‍स कंट्रोल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन उड़ानों का मकसद सैन्य गतिविधि के बारे में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है. साथ ही संधि के तहत हथियारों के नियंत्रण और अन्य समझौतों की निगरानी करना है. संधि में सभी देश अपने सभी क्षेत्रों को निगरानी उड़ानों के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हैं. हालांकि, रूस ने अब तक कुछ क्षेत्रों में उड़ानों पर प्रतिबंध लगा रखा था.
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टोही विमान का सेंसर से लैस होना अनिवार्य
संधि की शर्तों के मुताबिक, निगरानी विमान सेंसर से लैस होने चाहिए जो आर्टिलरी, लड़ाकू विमान और बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों जैसे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की पहचान करने की निगरानी दल को क्षमता मुहैया करा सकते हों. हालांकि, सेटेलाइट्स के जरिये इससे कहीं ज्‍यादा और विस्‍तृत जानकारी आसानी से जुटाई जा सकती है. बावजूद इसके ये संधि की गई, क्‍योंकि इसके सभी सदस्‍य देशों के पास सेटेलाइट्स से निगरानी करने की क्षमता उपलब्‍ध नहीं है.

संधि से अमेरिका-रूस का निकलना क्या बदलेगा
ओपन स्काई ट्रीटी से दोनों सबसे मजबूत देशों के बाहर आने से ये साफ है कि उनके बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है. साल 2019 में भी दोनों ही देश एक और संधि तोड़ चुके हैं. इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज नाम की ये संधि साल 1987 में दोनों के बीच हुआ अहम करार मानी जाती थी. इसके तहत दोनों ने ही मध्यम दूरी के घातक हथियारों को नष्ट करने का करार किया था ताकि परमाणु हथियारों की दौड़ रोकी जा सके. (news18.com)

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